यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

21. सभी ज्ञान संप्रयात्मक है यह किसका विचार है?

Correct Answer: (d) सुकरात
Solution:

सभी ज्ञान संप्रयात्मक हैं यह विचार सुकरात का है। सुकरात ग्रीक के महान दार्शनिकों में से थे। सुकरात ने सामान्य को ही संप्रत्यय कहा है। वे एक ही जाति की अलग-अलग वस्तु विशेषों में निहित सारगुणों को सामान्य कहते थे।

22. 'द्रव्य कुछ है लेकिन क्या है मैं नहीं जानता' अधोलिखित में से यह किसका विचार है?

Correct Answer: (c) केवल लाक
Solution:

लाक कहते हैं कि प्रत्यक्ष केवल गुणों का होता है। इसी को प्रत्यय प्रतिनिधित्वाद भी कहते हैं। लाक के अनुसार ज्ञान का एक मात्र श्रोत प्रत्यक्ष है। अतः द्रव्य का प्रत्यक्ष न होने के कारण उन्होंने द्रव्य को अज्ञेय कहा। हमारे लिए द्रव्य गुणों का समुदाय मात्र हैं, किन्तु गुणों के अतिरिक्त उनका आधारभूत द्रव्य होना अवश्य चाहिए भले ही वह हमारे लिए अज्ञेय हो। इसीलिए लाक ने कहा "द्रव्य कुछ है लेकिन क्या, मैं नहीं जानता।"

23. ईश्वर के संबंध में अरस्तू का सही विवरण क्या है?

Correct Answer: (c) शुद्ध आकार और शुद्ध वास्तविकता
Solution:

अरस्तू का कथन है की तत्व शब्द का प्रयोग वस्तुतः सामान्य या स्वरूप (Form) के लिए ही होना चाहिए। किन्तु शुद्ध स्वरूप (Pure Form) जो जड़ता (Matter) से नितान्त रहित हो केवल ईश्वर और आत्मा ही है। अतः ये ही वस्तुतः तत्व है।

24. अधोलिखित में से डेविड ह्यूम को क्या स्वीकार्य है?

Correct Answer: (d) कारणता मानवीय मन की आदत है।
Solution:

ह्यूम का मानना था की कारणता मानवीय मन की आदत है। हम का विचार है कि कारणता का आरोप करना व्यर्थ है। कारण और कार्य का संबंध वास्तविक नहीं है। वाह्य जगत में हम दो घटनाओं को साथ घटते देखते है। ऐसा सदैव होने की अनुभूति के आधार पर हम एक को कार्य और दूसरे को कारण समझ लेते हैं।

25. निम्न में से कौन स्पिनोजा दर्शन के संगत है?

Correct Answer: (c) सर्वेश्वरवाद
Solution:

स्पिनोजा सर्वेश्वरवदी थे। स्पिनोजा द्वैत को नकारते थे। उनके अनुसार सत्ता एक है। वह स्वतंत्र और सर्वव्यापी है। सब कुछ द्रव्य या द्रव्य ही सब कुछ है। स्पिनोजा ने अपने द्रव्य को अमृत से बचाने के लिए ईश्वर नाम दिया है। इस तरह स्पिनोजा के द्रव्य सिद्धांत से उसका सर्वेश्वरवाद फलित होता है।

26. निम्न में से किस दार्शनिक का मत है की वह चाँदी जो सीपी में आभासित होती है न तो वास्तविक है न तो अवास्तविक

Correct Answer: (d) अद्वैती
Solution:

अद्वैत वेदान्त का मानना है की भ्रम में जो पदार्थ दिखाई देता है उसे न तो वास्तविक कहा जा सकता है न तो अवास्तविक । भ्रम में जो वस्तु दिखाई देती है वह अनिर्वचनयी होती है। विचार करने पर पाते हैं की चाँदी में सीपी का आभास न तो वास्तविक हैं न तो अवास्तविक । अद्वैत वेदान्त में इसे अध्यास कहा जाता है यह माया के कारण होता है।

27. वह कौन से दार्शनिक हैं जो यह मानते हैं की तंतु से निर्मित पट कुछ नया है?

Correct Answer: (c) नैयायिक
Solution:

नैयायिक यह मानते हैं की तंतु से निर्मित पट कुछ नया है। कपड़े का निर्माण सूतों के संयोग से होता है। यही सूतों का संयोग (कर्म) कपड़े का असमवायि कारण है। असमवायि कारण उस गुण को कहते हैं जो उपादान कारण में समवेत रहकर कार्य की उत्पत्ति में सहायक होता है।

28. दार्शनिक पद 'अभेद का तादात्म्य' निम्न में से किससे संबंधित है?

Correct Answer: (b) लाइबिनत्ज
Solution:

'अभेद के तादात्म्य' सिद्धान्त का संबंध जर्मन के बुद्धिवादी दार्शनिक 'लाइन्नित्ज' से है। इनका मानना था की प्रत्येक चिदणु अपनी स्वतंत्र सत्ता और विशेषता रखते हुए भी विश्व की एकतन्त्रता को छुण्ण नहीं करता।

29. किसके अनुसार कैवल्य का उचित मार्ग पुरुष प्रकृति का विवेक ज्ञान है?

Correct Answer: (c) सांख्य
Solution:

सांख्य दर्शन के अनुसार ज्ञान ही कैवल्य का साधन है। सांख्य ने पुरुष और प्रकृति के भेद ज्ञान को सम्यक ज्ञान कहा है। अभिप्राय यह है की पुरुष प्रकृति का विवेक ज्ञान ही कैवल्य का उचित मार्ग है।

30. जैन ज्ञान मीमांसा में भूत, सूक्ष्म और दूरस्थ वस्तुओं का ज्ञान कहलाता है?

Correct Answer: (d) अवधि
Solution:

जैन दर्शन ज्ञान के दो भेद करता है (i) अपरोक्ष (ii) परोक्ष परोक्ष ज्ञान के दो प्रकार है (क) मति (ख) श्रुत। तथा अपरोक्ष ज्ञान के तीन प्रकार है- (क) अवधि (ख) मनः पर्याय (ग) केवल । अवधि ज्ञान उस ज्ञान को कहते हैं जिसके द्वारा अत्यंत दूर स्थित वस्तुओं का सूक्ष्म तथा अस्पष्ट द्रव्यों का ज्ञान होता है।