Solution:लाक कहते हैं कि प्रत्यक्ष केवल गुणों का होता है। इसी को प्रत्यय प्रतिनिधित्वाद भी कहते हैं। लाक के अनुसार ज्ञान का एक मात्र श्रोत प्रत्यक्ष है। अतः द्रव्य का प्रत्यक्ष न होने के कारण उन्होंने द्रव्य को अज्ञेय कहा। हमारे लिए द्रव्य गुणों का समुदाय मात्र हैं, किन्तु गुणों के अतिरिक्त उनका आधारभूत द्रव्य होना अवश्य चाहिए भले ही वह हमारे लिए अज्ञेय हो। इसीलिए लाक ने कहा "द्रव्य कुछ है लेकिन क्या, मैं नहीं जानता।"