यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

41. न्याय ज्ञान मीमांसा के अनुसार हम सभी वस्तुओं को स्पर्शीय ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा जानते हैं जिसे चाक्षुस ज्ञानेन्द्रिय के अतिरिक्त किसे जानते हैं?

A. स्पर्शत्व
B. रूपत्व
C. रूप
D. स्पर्श

Correct Answer: (d) केवल B और C
Solution:

न्याय ज्ञानमीमांसा के अनुसार सभी वस्तुओं को स्पर्श ज्ञान इन्द्रियों के द्वारा जाना जाता है। हम वस्तुओ को चाक्षुस ज्ञानेन्द्रियो के अतिरिक्त रूपत्व और रूप से भी जानते हैं।

42. न्याय ज्ञानभीमांसा के अनुसार हम वाह्य प्रत्ययों को निम्नलिखित के द्वारा जानते हैं?

A. चक्षुऐन्द्रिय
B. स्पर्शेन्द्रिय
C. अन्तरीन्द्रिय
D. घ्राणेन्द्रिय

Correct Answer: (c) केवल A और B
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार वाह्य प्रत्ययों का ज्ञान चक्षुरेन्द्रिय और स्पर्शेन्द्रिय के द्वारा ही होता है। न्यायदर्शन के अनुसार चक्षु और स्पर्शेन्द्रियों के द्वारा लौकिक पदार्थों के सन्निकर्ष से प्राप्त ज्ञान वाह्य प्रत्ययों का ज्ञान है।

43. न्याय ज्ञान मीमांसा से संबंधित अनुमिति की कुछ अवस्थाएं नीचे दी गई है। उस कूट को चुनिए जिसमें उस अवस्था का वर्णन है, जहाँ अनुमति संभव नही है?

A. अनुमान सिद्धिविशिष्ट इच्छा का अभाव
B. अनुमान सिद्धि का अभाव विशिष्ट इच्छा का अभाव
C. अनुमान सिद्धिविशिष्ट इच्छा की उपस्थिति
D. अनुमान सिद्धि का अभाव विशिष्ट इच्छा की उपस्थिति

Correct Answer: (a) केवल A
Solution:

न्याय ज्ञान मीमांसा के अनुसार अनुमिति की कुछ अवस्थाएं है जैसे अनुमान सिद्धि का विशिष्ट इच्छा का अभाव अनुमान सिद्धि विशिष्ट इच्छा की उपस्थिति । परन्तु सिद्धि विशिष्ट इच्छा के अभाव में अनुमति संभव नहीं है।

44. न्याय के अनुसार शक्ति है-

A. ईश्वरेच्छा
B. इच्छामात्र
C. वृत्ति
D. अलग पदार्थ

Correct Answer: (c) केवल A, B और C
Solution:

न्याय दर्शन आस्तिक दर्शनों में से एक है इसके प्रणेता 'गौतम' है। इसके अनुसार शक्ति-ईश्वर की इच्छा इच्छामात्र और वृत्ति का संयोग है।

45. निम्नलिखित में से कौन जीवनमुक्ति और विदेहमुक्ति दोनों को मानता है?

A. बुद्ध
B. शंकर
C. रामानुज
D. माधव

Correct Answer: (b) केवल Aऔर B
Solution:

महात्माबुद्ध और शंकर दोनों जीवनमुक्ति और विदेहमुक्ति को मानते है। महात्मा बुद्ध के अनुसार इस जीवन में ज्ञान की प्राप्ति अर्थात कैवल्य की प्राप्ति ही जीवनमुक्ति है और ज्ञानोपरांत जब शरीर का पतन हो जाता है यह विदेह मुक्ति है। इसी तरह का विचार शंकर का भी है। वे आत्म तत्व के साक्षात्कार को जीवनमुक्ति करते है।

46. डा. अम्बेडकर द्वारा स्वीकृत त्रयी सिद्धांत से संबंधित युग्म नीचे दिए गए हैं

A. स्वतंत्रता समानता और सत्य
B. स्वतंत्रता बंधुत्व और शांति
C. स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व
D. स्वतंत्रता, बंधुत्व और एकजुटता
सही विकल्प का चयन करें :

Correct Answer: (d) केवल C
Solution:

भारतीय संविधान के निर्माता, दलितो के मसीहा डा. अम्बेडकर की न्याय दृष्टि काफी व्यापक थी वे ऐसे समाज और धर्म की कल्पना करते थे। जिसमें स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का महत्वपूर्ण स्थान हो। उनका मानना था की स्वतंत्रता, समानता और बधुत्व से पूरित समाज ही आम आदमी के जीवन में उत्थान ला सकता है।

47. निम्नलिखित में कौन सा थेल्स के संगत है-

A. ब्रहमाण्ड का मूलभूत श्रोत वायु है।
B. ब्रहमाण्ड का मूलभूत श्रोत संख्या है।
C. ब्रहमाण्ड का मूलभूत श्रोत जल है।
D. पृथ्वी सपाट है जो पानी पर तैरती है।

Correct Answer: (d) केवल C और D
Solution:

थेलीज के अनुसार विश्व का परम तत्व जल है जल से ही सृष्टि की उत्पत्ति है, जल के ऊपर ही इसकी स्थिति है और जल में ही इसका प्रलय है। पृथ्वी सपाट रूप में इसी जल पर तैरती है। जल ही बिन्दु रूप से सबका जनक है। गति और परिणाम का सूचक है।

48. निम्नलिखित में से कौन सा तर्क वाक्य बर्कले द्वारा स्वीकृत है

A. दृश्यमान वस्तुएं अस्तित्व में हैं।
B. अदृश्यमान वस्तुएं अस्तित्व में है।
C. आत्मा संवेदो का समुच्चय मात्र है।
D. जड़ द्रव्य अचर रूप से अस्तित्व में है।

Correct Answer: (d) केवल A और C
Solution:

बर्कले के अनुसार हम बहुत से विज्ञानों की कल्पना कर सकते हैं, परन्तु वाह्य पदार्थों के अभाव में उनके संवेदन नहीं प्राप्त कर सकते है। फिर यदि वाह्य, पदार्थ हमारे विज्ञान मात्र हों, तो वे सबको लगभग एक ही रूप में क्यों प्रतीत होते हैं? यह तो स्पष्ट है की जिन संवदनों को इन्द्रियाँ वाह्य पदार्थों से ग्रहण करती हैं, उन संवेदनों को स्वयं नहीं उत्पन्न किया जा सकता है। अतः वाह्य पदार्थों की सत्ता माननी पड़ेगी, इस आधार पर कह सकते हैं कि दृश्यमान वस्तुएं अस्तित्व में हैं। बर्कले ने आत्मा को संवेदों का समुच्चय मात्र माना है।

49. निम्नलिखित कथनों में से कौन से हेरा क्लिटस को स्वीकार्य नही है?

A. सत् कुछ नही है केवल सत् है।
B. कोई एक नदी में दो बार नहीं घुस सकता।
C. सत् असत् में परिवर्तित होता है और असत् सत् में।
D. स्पेरान ब्रहमाण्ड का मूलभूत तत्व है।

Correct Answer: (d) केवल A और D
Solution:

हेराक्लाइट्स के अनुसार, विश्व गति है, परिणाम है, धारा है, कोई भी व्यक्ति एक नदी में दो बार नहीं जा सकता है। क्योंकि जिस पानी में प्रथम बार स्नान किया, वह बह गया और उसके स्थान पर दूसरा पानी आ गया दूसरी बार स्नान दूसरे पानी में ही हो सकता है। कोई वस्तु दो क्षणों तक नहीं टिक सकती है। इन्होंने कहा की हम सत भी है और असत भी, और सदसद निर्वचनीय भी हैं। सत असत में और असत सत में परिवर्तित होता है।

50. के. सी भट्टाचार्य के अनुसारव्यक्तिनिष्ठता की अवस्थाएं नीचे दी गई है-

A. दैहिक
B. मनस्तत्व
C. आध्यात्मिक
D. जैविक

Correct Answer: (c) केवल A, B और C
Solution:

के. सी. भट्टाचार्य भारत के आधुनिक सामाजिक राजनैतिक चितंको में महत्वपूर्ण स्थान रखते थे। यह कलकत्ता विश्वविद्यालय मे दर्शन के प्रोफेसर थे। इनके अनुसार व्यक्तिनिष्ठता की कुछ अवस्थाएं होती है जैसे दैहिक, मनस्तत्व, आध्यात्मिक । जबकी, जैविक अवस्था व्यक्तिनिष्ठता की अवस्था नही है।