यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

81. बौद्ध दार्शनिक मनमय में कौन एक सही अनुक्रम है:

A. अनिमित्त समाधि, अप्रणिहित समाधि, शून्यता समाधि
B. अप्रणिहित समाधि शून्यता समाधि, अनिमित्त समाधि
C. शून्यता समाधि, अनिमित्त समाधि, अप्रणिहित समाधि
D. शून्यता समाधि, अप्रणिहित समाधि, अनिमित्त समाधि
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (d) C
Solution:

बौद्ध दार्शनिक मनमय के अनुसार समाधि का सही अनुक्रम इस प्रकार है-
शून्यता समाधि → अनिमित्त समाधि → अप्रणिहित समाधि ।

82. द्वैत वेदान्त के मोक्ष का सही अनुक्रम क्या है?

A. सारुष्य, सायुज्य, सामीप्य, सालोक्य
B. सालोक्य, सामीप्य, सारुष्य, सायुज्य
C. सामीप्य, सालोक्य, सायुज्य, सारुष्य
D. सालोक्य, सायुज्य, सारुप्य, सामीप्य
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (b) B
Solution:

द्वैत वेदान्त मोक्ष की एक भावात्मक अवस्था है। माध्व दर्शन में मुक्तात्मा की साधना के अनुरूप आनंन्द भोग में तारतम्य की बात की जाती है। तारतम्यता के आधार पर क्रमशः सालोक्य, सामीप्य, सारुप्य, सामुज्य भेद से चार प्रकार की मुक्ति मानी गई है। यही चार अवस्थाएं है।

83. उपनिषदो की व्यावहारिक शिक्षा में निम्न में से सही अनुक्रम क्या होगा?

A. मनन, श्रवण निदिध्यासन
B. श्रवण मनन निदिध्यासन
C. मनन, निदिध्यासन, श्रवण
D. श्रवण, निदिध्यासन, मनन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :

Correct Answer: (b) B
Solution:

भारतीय दार्शनिक परंपरा ने उपनिषदों का महत्वपूर्ण स्थान है। उपनिषदो मे कर्मकाण्ड की बजाय, आध्यात्मिक और व्यावहारिक शिक्षा पर जोर दिया गया है। उपनिषदों की कुल ज्ञात संख्या 108 है। उपनिषदो में कहा गया है की जीवनमुक्ति के लिएश्रवण, मनन और निदिध्यासन अत्यावश्यक है।

84. श्री अरविन्द के संदर्भ में निम्न में से कौन सा एक सही अनुक्रमहै?

A. मौलिक अज्ञान, वैश्विक अज्ञान, अहंभावात्मक अज्ञान, कालिक अज्ञान
B. मौलिक अज्ञान, अहंभावात्मक अज्ञान, वैश्विक अज्ञान, कालिक अज्ञान
C. मौलिक अज्ञान, कालिक अज्ञान, वैश्विक अज्ञान, अहंभावात्मक अज्ञान
D. अहंभावात्मक अज्ञान, वैश्विक अज्ञान, मौलिक अज्ञान, कालिक अज्ञान
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (a) A
Solution:

अरविन्द का सामाजिक राजनैतिक दर्शन लक्ष्य की दृष्टि से आदर्शवादी, उपागम की दृष्टि से यथार्थवादी, क्रिया की दृष्टि से प्रयोजनवादी तथा महत्वाकांक्षा की दृष्टि से मानवतवादी है अरविन्द के संदर्भ में अज्ञानता पर सही अनुक्रम इस प्रकार होगा-
मौलिक अज्ञान → वैश्विक अज्ञान → अहंभावात्मक अज्ञान → कालिक अज्ञान

85. सामान्य की समस्या का प्रारम्भ दर्शनशास्त्र के किसके द्वारा किया गया था?

Correct Answer: (c) प्लेटो
Solution:

प्लेटो ग्रीक के सबसे महान दार्शनिक थे प्लेटो के समय में ग्रीक दर्शन अपने चरम पर पहुँचा। दर्शनशास्त्र में सामान्य की समस्या का प्रारंम्भ प्लेटो द्वारा होता है। इनके अनुसार जगत के विविध विशेषो या व्यक्तियों की सत्ता 'सामान्यों' के कारण है। सामान्य अपनी जाति के विशेषो में अनुगत रहते हैं और उनको अन्य जाति के विशेषो से पृथक करते हैं।

86. नीचे दो कथन दिए गए है: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है:

अभिकथन (A): भगवतगीता के आलोक में सच्चा सन्यास सभी प्रकार के कर्मों के फलों से सन्यास है।
तर्क (R) : कर्मफल मोक्ष मार्ग में बाधक होते हैं।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या है।
Solution:

भगवत गीता कर्मफलों को मोक्ष मार्ग में बाधक मानती है। वह मोक्ष के लिए सन्यास मार्ग का प्रतिपादन करती है, उसके अनुसार कर्मफलों से संन्यास ही सच्चा संन्यास है।

87. नीचे दो कथन दिए गए है, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है:

अभिकथन (A): सत्य निगमनात्मक तर्क के विषय में निष्कर्ष दिए गए आधार वाक्य से तार्किक रूप से निकलता है।
तर्क (R) : आधार वाक्य में निष्कर्ष औपचारिक रूप से नहीं होता है।
उपयुक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुने।

Correct Answer: (c) (A) सही है और (R) गलत है।
Solution:

कथन A की "सत्य निगमनात्मक तर्क के विषय में निष्कर्ष दिए गए आधार वाक्य से तार्किक रूप से निकलता है।" परन्तु कारण R "आधारवाक्य में निष्कर्ष औपचारिक रूप से नही होता" गलत है क्योंकि 'आधार वाक्य में निष्कर्ष औपचारिक रूप से होता है।

88. नीचे दो कथन दिए गए है: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है:

अभिकथन (A) : अद्वैत वेदान्त के अनुसार ब्रह्म अनिश्चित है।
तर्क (R) : इसे बुद्धि द्वारा नहीं समझा जा सकता, परन्तु उसकी ओर संकेत किया जा सकता है। उपर्युक्त उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या है।
Solution:

अद्वैत वेदान्त के अनुसार ब्रह्म अनिर्वचनीय, अनिश्चित है। कारण यह बुद्धि से परे है, फिर भी उसकी ओर संकेत किया जा सकता है।

89. नीचे दो कथन दिए गए हैं एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है।

अभिकथन (A) : रामानुज में एकतत्ववाद और दैवआस्तिकवाद स्पष्ट रूप से समरूपित है। तर्क (R) : सामंजस्यीकरण दार्शनिक युक्तियुक्तता की कीमत पर नहीं।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेः

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) सही व्याख्या है।
Solution:

रामानुजाचार्य के विशिष्टाद्वैतवाद में एकतत्ववाद और दैव आस्तिकवाद दोनों स्पष्टतः समान है। क्योंकि विशिष्टादैत में सामंजस्यीकरणे दार्शनिक युक्तियुक्तता की कीमत पर नहीं होता है।

90. नीचे दो कथन दिए गए है: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया।

अभिकथन (A): निर्गुण ब्रह्म की धारणा धार्मिक भावना के क्षेत्र में तटस्थ प्रतीत होती है।
तर्क (R): धार्मिक भावना और तार्किक चिंतन एक साथ नहीं हो सकते।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनेः

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या है।
Solution:

धार्मिक भावना का भाव तार्किकता से परे होता है, इसमें तार्किक चिंतन का कोई स्थान नहीं होता है। इसीलिए निर्गुण ब्रह्म का विचार धार्मिक भावना के क्षेत्र में तटस्थ होता है।