यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 80

1. 'शब्दः नित्यचक्षुषत्वात्' उपर्युक्त अनुमान में कौन-सा हेत्वाभास है?

Correct Answer: (b) स्वरूपसिद्ध
Solution:

स्वरूपसिद्ध हेत्वाभास है, क्योंकि 'चाक्षषु होना' हेतु स्तभावतः पक्ष शब्द में असिद्ध है, क्योंकि चाक्षुष होना कान का गुण न होकर आँख का गुण है, अतः यहां पक्ष तो असत् नही है, किन्तु हेतु का स्वरूप ही ऐसा है कि वह पक्ष में नहीं रह सकता।
(भारतीय दर्शन आलोतन एवं अनुशीलन चन्द्रधर शर्मा)

2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन नीति के संवेगी सिद्धान्त से समुचित है?

(A) नैतिक भाषा का कार्यभावों को अभिव्यक्त करता है।
(B) यदि कोई कथन अनुभव के द्वारा सत्यापित नहीं होता है, तो यह पुनरूविक नही है।
(C) नैतिक विधेय तथ्यात्मक होते है।

Correct Answer: (a) केवल a
Solution:

नैतिक भाषा कार्यभावों को अभिव्यक्त करना नीति के संवेगी सिद्धान्त पर आधारित है, क्योंकि Ayer का कहना है, कि जब हम अपने कार्यभावों को व्यक्त करने के लिए संवगों Ayer का कहना है, कि जब हम अपने कार्यभावों को व्यक्त करने के लिए संवगों का प्रयोग करते है, जैसे चोरी करना पाप है को हम संवेगात्मक रूप से कह सकते है कि चोरी करना छिः है
(नीतिशास्त्र के मूल सिद्धान्त वेद प्रकाश वर्मा) 

3. विटगेन्स्टाइन द्वारा अपने फिलोसोफिकल में प्रस्तुत उदाहरण बक्स में बन्द कीट का बॉक्स (बीटल इन द बॉक्स) में से किससे सम्बन्धित है?

Correct Answer: (d) व्यक्तिगत भाषा की आलोचना
Solution:

विटगेस्टाइन द्वारा अपने फिलोसीफिकल में प्रस्तुत उदाहरण बक्से में बंद कीट (बीटल इन द बॉक्स) में व्यक्तिगत भाषा की आलोचना से सम्बन्धित है, क्योंकि (बीटल इन द बॉक्स) में व्यक्तिगत भाषा की आलोचना से सम्बन्धित है, क्योंकि जब कुछ दार्शनिको ने कहा 'कुछ है' तो Wittgenskin इसका खण्डन करते हुए कहते है, कि माना कि कुछ व्यक्ति है, जिनके पास अलगअलग बॉक्स है, और कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के Box को नहीं देख रहा है, ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति यह कैसे कह सकता है, कि किसके Box में क्या है सम्भव है, कि प्रत्येक के Box में अलगअलग वस्तु हो और किसी के Box में कुछ भी नही इसलिए कुछ भी कहना ठीक नही है। इस प्रकार Wittgenstein व्यक्तिगत भाषा का खण्डन करते है।
(Tractatus- Wittgenstein)

4. सुमेलित कीजिए :

सूची-Iसूची-II
A. स्पेनर(i) डेटा ऑफ एथिक्स
B. मैकेंजी(ii) मेटाफिजिक्स ऑफ मॉरल्स
C. सिजविक(iii) ए मैनुअल ऑफ एथिक्स
D. कापट(iv) मैथड्स ऑफ एथिक्स

कूटः

ABCD
(a)iiiiviii
(b)iiiiiiiv
(c)iiiiivii
(d)iiiiiiiv
Correct Answer: (c)
Solution:

स्पेन्सर का 'डेटा ऑफ एथिक्स' मैकेन्जी का 'ए मेनुअल ऑफ इथिक्स', सिजविक का 'मेथडस ऑफ इथिक्स' तथा काण्ट का मेटाफिजिक्स ऑफ मोरल्स' से सम्बद्ध है।
(नीतिशास्त्र के मूल सिद्धान्त वेद प्रकाश वर्मा) 

5. बौद्ध दर्शन में निम्नलिखित में से किस विचारधाराओं में बाह्य वस्तु को यथार्थ माना गया है?

Correct Answer: (d) सौत्रन्तिक एवं वैभाषिक
Solution:

बौद्ध दर्शन में सौत्रन्तिक एवं वैभाषिक विचारधाराओं में बाह्य वस्तु को यथार्थ माना गया है, जिनमें से सौत्रन्तिक बाह्य जगत वस्तु का ज्ञान प्रत्यक्ष से मानते है, जबकि सौत्रन्तिक बाह्य वस्तु का ज्ञान अनुमान पर आधारित मानते है।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा प्रो. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा) 

6. निम्नलिखित में से कौन दो स्पिनोजा से सम्बन्धित है?

(A) समान्तरवाद
(B) अन्तः क्रियावाद
(C) सर्वेश्वरवाद
(D) निमित्त संयोगवाद
कूटः

Correct Answer: (c) A, C
Solution:

स्पिनोजा के दर्शन के देकार्त का द्वैतवाद, अद्वैतवाद में, ईश्वरवाद, सर्वेश्वरवाद में और क्रिया प्रतिक्रियावाद समान्तरवाद में परिणत हो जाता है, इसके अतिरिक्त निमित्रवाद (देहात्मनिमित्रवाद) या संयोगवाद (देहात्मसंयोग) डेकार्ट का सिद्धान्त है।
(पाश्चात्य दर्शन चन्द्रधर शर्मा) 

7. सुमेलित करे:

सूची-Iसूची-II
A. सायर(i) फीटर एंड ट्रैकलिंग
B. नीरो(ii) बिंग एंड बायिंगनेस
C. कॉकगाई(iii) वे राइजिंग ऑफ रिलिजियस एक्सपीरियंस
D. विलियम्स जेम्स(iv) जीवविज्ञान ऑफ मॉरल्स

कूटः

ABCD
(a)iiiiviii
(b)iiiviiii
(c)iviiiiii
(d)iiiiiiiv
Correct Answer: (b)
Solution:

सार्व का बींग एण्ड नथिंगनेस, नीत्शे का 'दि जॉएफुल विल्डम', 'बियॉण्ड गुड ऐंड डीवले', दि- जीनिएलॉजी ऑफ मॉरल्स', कीर्केगार्ड का 'फीतर एण्ड ट्रेम्बलिंग', तथा विलियम्स जेम्स का 'वेराइटीज ऑफ रिलीजियस एक्सपीरियन्स' से सम्बन्ध है।
(समकालीन पाश् चात्य दर्शन बसन्स कुमार लाल)

8. यह विचार कि, 'कानून मनुष्य के लिए है, न कि कानून के लिए' यह निम्नलिखित में से किस चिंतक की आलोचना प्रस्तुत करता है।

Correct Answer: (c) काण्ट
Solution:

यह विचार काण्ट की आलोचना प्रस्तुत करता है। काण्ट की प्रमुख पुस्तकों में, (1781) 'Critique of Pure reason' (ज्ञान मीमांसा सम्बन्धी विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार), 'Critique of judgement' (1790) (सौदर्य शास्त्र की मूल समस्याओं का विवेचन) 'Critique of Practical reasen (नैमिक दर्शन की मूल समस्याओं का विवेचन) है। (पाश्चात्य दर्शन का उद्भव और विकास -डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)

9. यह किनका मत है, कि रंग और इसका ज्ञान एक तथा समान है?

Correct Answer: (a) वसुबन्धु
Solution:

वसुबन्धु नीला रंग और इसका ज्ञान एक तथा समान है, वसबन्धु का प्रमुख ग्रन्थ विज्ञाप्तिमात्रता है।
(भारतीय दर्शन आलोचना एवं अनुशीलन चन्द्रधर शर्मा) 

10. आईसाह बर्लिन ने नकारात्मक स्वतन्त्रता के विचार को निम्नलिखित में से मुख्य रूप से किससे सम्बद्ध किया है?

Correct Answer: (c) शास्त्रीय उदारवादी परम्परा
Solution:

आईसाह बर्लिन ने नकरात्मक स्वतन्त्रता के विचार को शास्त्रीय उदारवादी परम्परा या प्रारभिक परम्परा से सम्बद्ध किया है, क्योंकि उदारवाद के प्रारम्भिक विचारक स्वतन्त्रता को नकारात्मक मानते थे, वे स्वतन्त्रता को बन्हानो के अभाव के रूप में देखते थे।
(सामाजिक-राजनीतिक दर्शन की रुपरेखा- प्रो.राममूर्ति पाठक)