यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 80

11. निम्नलिखित में से यह किसने समर्थन किया है- 'अन्ततः राज्य का उपक्षय हो जाएगा।

Correct Answer: (d) मार्क्स
Solution:

कार्ल मार्क्स ने शेषित सर्वहारा वर्ग को पूँजीपतियों के विरूद्ध संघर्ष की प्रेरणा और सफलता का रास्ता दिखाया जिसके अनुसार क्रान्ति के पश्चात् सर्वहारा वर्ग की विजय होगी। सत्ता- मजदूसरों के हाथ में होगी। पूँजीगत राज्य के स्थान पर 'श्रमजीवी राज्य बताया गया, वर्गविहीन समाज होने के पश्चात् अन्ततः राज्य का उपक्षय या विहीन हो जाएगा।
(सामाजिक-राजनीतिक दर्शन की रूपरेखा प्रो. राममूर्ति पाठक)

12. निम्नलिखित में से किस प्रकार का तर्क यह दावा करता है, कि इसका निष्कर्ष पूर्णरूप से इसके आधारवाक्यों द्वारा समर्थित होता है?

Correct Answer: (b) निगमनात्मक
Solution:

निगमनात्मक युक्ति में निष्कर्ष पूर्णरूप से इसके आधारवाक्यों द्वारा समर्थित होता है। निगमनात्मक पद्धति को व्यवस्थित रूप अरस्तु ने प्रदान किया। निगमनात्मक युक्ति- उदाहरण - सभी मनुष्य मरणशील है।
राम एक मनुष्य है।
राम मरणशील है।
(तर्कशास्त्र प्रवेशिका - राममूर्ति पाठक) 

13. सुमेलित करे :

सूची-Iसूची-II
(a) प्रमाण-व्यवस्था(i) मीमांसा
(b) प्रमाण-संन्लन(ii) चार्वक
(c) स्वात: प्रमाणवाद(iii) बौद्ध
(d) स्वभाववाद(iv) न्याय

कूटः

iiiiiiiv
(a)iiiiiiiv
(b)iiiiviii
(c)iiiiiivi
(d)iiiiiivi
Correct Answer: (b)
Solution:

बौद्ध का प्रमाण व्यवस्था, न्याय का प्रमाण सप्लव, मीमांसा का स्वतः प्रमाण्यवाद, परतः अप्रमाण्यवाद तथा चार्वाक का स्वभाववाद, देहात्मवाद, प्रत्यक्षवाद से सम्बन्धित है।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा- हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा)

14. निम्नलिखित में से किसे वेदत्रयी में सुमेलित नहीं किया गया है?

Correct Answer: (c) अधर्ववेद
Solution:

वेदत्रयी में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद को सम्मिलित किया गया है, अथर्ववेद को वेदत्रयी में सम्मिलित नही किया गया है।
(भारतीय दर्शन आलोचना अनुशीलन चन्द्रधर शर्मा) 

15. निम्नलिखित में से कौन-सा सोफिस्ट्स को स्वीकार्य है?

Correct Answer: (b) सत्य व्यक्तिनिष्ठ है।
Solution:

सोफिस्ट्स के अनुसार, सत्य व्यक्ति निष्ठ है, जैसे कि प्रोटोगोरस के अनुसार, 'मनुष्य सभी वस्तुओं का मापदण्ड है, जबकि सुकरात इसका खण्डन करते है कि 'व्यक्ति सभी वस्तुओं का मापदण्ड नही हो सकता'।
(ग्रील एवं मध्यकालीन दर्शन डॉ. छोटे लाल त्रिपाठी) 

16. काण्ट के वैज्ञानिक निर्णय के प्रारूप के सन्दर्भ में निम्न पर विचार कीजिए?

(A) विश्लेषणात्मक
(B) संश्लेषणात्मक
(C) प्राग आनुभाविक
(D) अनुभवाश्रित
कूटः

Correct Answer: (b) A और D
Solution:

काण्ट के अनुसार वैज्ञानिक निर्णय के प्रारूप के सन्दर्भ में संश्लेषणात्मक और प्राग्नुभाविक है, जिसमें संश्लेषणात्मक से तात्पर्य है, जिन निर्णयों के अन्तर्गत उद्देश्य और विधेय एक-दूसरे से भिन्न होते है, जबकि प्राग्नुभाविक निर्णय वे है, जो ज्ञान की नवीनता और यथार्थता के साथ-साथ उसे सार्वभौम और अनिवार्य बनाने के लिए ऐसे निर्णयों की आवश्यकता होती है।
(पाश्चात्य दर्शन का उद्भव और विकास प्रो. हरिशंकर उपाध्याय)

17. सुमेलित करे:

सूची-Iसूची-II
A. तत्त्वमीमांसा का मर्सन(i) लाइबनिज
B. सत्ता-दृश्यता है(ii) लोक
C. ज्ञान की तीन श्रेणियाँ(iii) बर्कले
D. स्वतंत्रता की समस्या(iv) ह्युम

कूटः 

Correct Answer: (c) iv iii ii i
Solution:

ह्यूम का तत्वमीमांसा का निरसन, बर्कले का 'सत्ता दृश्यता है', 'अध्यात्मवाद की स्थापना का प्रयास', 'लौक की अमूर्त प्रत्ययों की आवधारणा का खण्डन', लॉक का ज्ञान की तीन श्रेणियाँ जिसमें (a) इन्द्रिय ज्ञान (संवेदन) (b) प्रतिभ ज्ञान का अन्तः प्रज्ञात्मक ज्ञान (c) निदर्शनात्मक ज्ञान, तथा लाइबनित्य का स्वतन्त्रता की समस्या चिणुओं के क्रियाशिक्त से है।
(पाश्चात्य दर्शन चन्द्रधर शर्मा) 

18. न्याय दर्शन के अनुसार निम्नलिखित में से कौन अदृष्ट से असंगत है?

Correct Answer: (d) नैतिक नियंता
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार अदृष्ट शुभ और अशुभ का आगार, आदृश्य शक्ति तथा जड़ है, न कि कोई नैतिक नियंता है।
(भारतीय दर्शन आलोचना एवं अनुशीलन चन्द्रधर शर्मा) 

19. न्याय ज्ञानमीमांसा में निम्नलिखित में से कौन-सा केवल 'सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष' का विषय हो सकता है?

Correct Answer: (d) धूम की सभी स्थितियाँ
Solution:

न्याय ज्ञानमीमांसा में केवल सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष का विषय धूम की सभी स्थितियाँ है, क्योंकि सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष में हम न केवल वस्तु का प्रत्यक्ष करते है, बल्कि उनमें निहित सामान्य का या जाति का भी प्रत्यक्ष कर लेते है।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा- हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा) 

20. कामन्दकीय नीतिसार के अनुसार 'त्रयी' पद सम्बन्धित है?

Correct Answer: (b) ऋक्, यर्ज, साम
Solution:

कामन्दकीय नीतिसार में 'त्रयी' पद ऋक्, यर्जु, साम है, कामन्दकीय नीतिसार राज्यशास्त्र का एक संस्कृत ग्रन्थ है, कामन्दकीय नीतिसार में कुल मिलाकर 20 सर्ग (अध्याय) तथा 36 प्रकरण है, जिसमें कामन्दकीय नीतिसार के चतुर्थ सर्ग में राज्य के सप्तांगो राजा, प्रजा, अमात्य, राष्ट्र, दुर्ग, कोष, मित्र ।