Solution:चार्वाक का देहात्मवाद, जैन दर्शन का आत्मदेह परिणाम सत्-असत् कार्यवाद, बौद्ध का नैरात्मवाद, तथा वैशेषिक दर्शन का नित्यात्मावाद, आरम्भवाद, सांख्या का सत्कार्यवाद, अद्वैत वेदान्त और विशिष्टाद्वैत का सत्कायवाद, गौड़पाद का अघातवाद, शुद्धाद्वैत का अविकृत परिणामवाद है।
(भारतीय दर्शन आलोचना एवं अनुशीलन चन्द्रधर शर्मा)