यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 80

21. सुमेलित करें:

सूची-Iसूची-II
(a) देहात्मवाद(i) वैशेषिक
(b) आत्मदेह परिमाण(ii) जैन-दर्शन
(c) नैरात्मवाद(iii) बौद्ध-दर्शन
(d) नित्यात्मवाद(iv) चार्विक

कूटः 

Correct Answer: (b) iv ii iii i
Solution:

चार्वाक का देहात्मवाद, जैन दर्शन का आत्मदेह परिणाम सत्-असत् कार्यवाद, बौद्ध का नैरात्मवाद, तथा वैशेषिक दर्शन का नित्यात्मावाद, आरम्भवाद, सांख्या का सत्कार्यवाद, अद्वैत वेदान्त और विशिष्टाद्वैत का सत्कायवाद, गौड़पाद का अघातवाद, शुद्धाद्वैत का अविकृत परिणामवाद है।
(भारतीय दर्शन आलोचना एवं अनुशीलन चन्द्रधर शर्मा) 

22. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए है, उन पर विचार कीजिए और नीचे दिए गये कूट से सही उत्तर दीजिए ?

अभिकथन (A): यदि व्यक्ति साधन पर ध्यान रखे तो साध्य का औचित्य स्वतः ही सिद्ध हो जाता है।
तर्क (R) :
साध्य-साधन के औचित्य को सिद्ध करता है।

Correct Answer: (c) (A) सत्य है और (R)असत्य है।
Solution:

गाँधीजी के अनुसार, यदि व्यक्ति साधन पर ध्यान रखे तो साध्य का औचित्य स्वतः ही सिद्ध हो जाता है, अतः साधन साध्य के औचित्य को सिद्ध करता है, जिसमें गाँधीजी साध्य के रूप में 'सत्य' को और साधन के रूप में अहिंसा को लेते है।
(सामाजिक-राजनीतिक दर्शन की रूपरेखा - प्रो. रामपूर्ति पाठक)

23. न्याय के अनुसार किस सन्निकर्ष के द्वारा गौ और गौत्व के सम्बन्ध का ज्ञान होता है?

Correct Answer: (d) विशेषणता
Solution:

प्रत्यक्ष ज्ञान का जनक इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष छह प्रकार का होता है, न्याय के अनुसार अभाव के प्रत्यक्ष में विशेषण विशेष्टाभात सनिकर्ष होता है, अतः हात में पटाभाव का भी सन्निकर्ष विशेषणविशेष्टाभाव अर्थात् विशेषणता का सन्निकर्ष है।

24. निम्नलिखित में से कौन-सा हीगेल के साथ असंगत है?

Correct Answer: (b) हीगेल ने काण्ट के अश्रेयवाद की पुष्टि की है।
Solution:

काण्ट के अनुसार परमसत् अज्ञात एवं अज्ञेय है, देशकाल से परे वस्तु का अपना वास्तविक स्वरूप अज्ञात एवं अज्ञेय है, इसके विरूद्ध हीगले का कहना है कि परमसत् को अज्ञेय कहना आत्मविरोधाभासी है, कि परमसत्ता है, परन्तु वह अज्ञेय है, जो है, उसे अज्ञेय नही कहा जा सकता है, काण्ट कम से कम इतना तो जानते है, कि 'वह है' और वह संवेदनाओं का उत्पादक कारक है; अतः परमतत्व को अज्ञेय कहना भी एक प्रकार से उसे जानना है।
(पाश्चात्य दर्शन चन्द्रधर शर्मा) 

25. निम्नलिखित में से कौन 'गूढ ज्ञानवादी प्राणी' की आवधारणा को प्रतिपादित करता है?

Correct Answer: (d) श्री अरविन्दो
Solution:

'गूढ़ज्ञानाप्राणी' की आवधारणा श्री अरविन्दो द्वारा प्रतिपादित है, अरविन्द पूर्णाद्वैतवादी दार्शनिक थे। उनकी मुख्य कृति में 'दिव्य जीवन', 'सावित्री', 'The Secref of the veda', The problem of Rebirth', 'Foundation of indian cutture' है, इसके अतिरिक्त 'वन्दे मातरम्' अखबार इन्ही के द्वारा प्रतिपादित किया गया।
(आधुनिक भारतीय चिन्तन- डॉ. ओम प्रकाश टाक) 

26. सुमेलित कीजिए :

सूची-Iसूची-II
A. अव्यतीवाद(i) नागार्जुन
B. असतर्त्वतीवाद(ii) तसुबन्धु
C. आत्मव्यतिवाद(iii) कुमारिल
D. विपरीतव्यतिवाद(iv) प्रभाकर

कूटः

Correct Answer: (c) iv i ii iii
Solution:

भारतीय दर्शन में भ्रम के सिद्धान्त को ख्यातिवाद कहते है:
(1) प्रसिद्धार्थ ख्यातिवाद चाक
(2) आत्म-ख्यातिवाद विज्ञानवाद योगात्तार
(3) शून्यख्यातिवाद या असतत्ख्यातिवाद - शून्यवाद माध्यामिक
(4) अन्यथारख्यातिवाद न्याय वैशेषिक
(5) सअसत्ख्यातिवाद /विवेकख्यातिवाद सांख्य दर्शन
(6) अख्यातिवाद- प्रभाकर (अन्तिताभिधानवाद)
(7) विपरीतख्यातिवाद कुमारिल (अभिहितान्तयवाद)
(8) अनिर्वचनीय या सद्स‌विलक्षणख्याति अद्वैत वेदान्त
(9) सत् या यथार्थख्यातिवाद - विशिष्टाद्वैत
(10) अभिनव अन्यथाख्यातिवाद - द्वैतवाद (भारतीय दर्शन चन्द्रधर शर्मा)

27. अभिकथन (A) और कारण (R) नीचे दिए गए है। उन पर विचार और लॉक के सन्दर्भ में सही कूट का चयन करे;

अभिकथन (A): चिणु गवाक्षहीन है।
तर्क (R) : चिणुओं में पूर्व स्थापित सामंजस्य है।

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनों सत्य है, और (R), (A) की सही व्याख्या नही है
Solution:

लाइबनिज्य के अनुसार चिदणु गवाक्षहीन है, सभी चिणु स्वतन्त्र और क्रियाशील है परन्तु आत्मा और शरीर के चिणुओं में परस्पर सम्बन्ध कैसे हो सकता है, इसके लिए लाइबनिज्य ने चिदणुओं में पूर्व स्थापित सामंजस्य के नियम का प्रतिपादन किया। अतः चिणुओं में पूर्व स्थापित सामंजस्य का उसके भवाक्षहीन होने से कोई मतलब नही है।
(पाश्चात्य दर्शन का उद्भव और विकास डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)

28. न्याय ज्ञानमीमांसा में हम जिसके द्वारा स्त्री को सॉप समझते है?

Correct Answer: (c) ज्ञानलक्षण सन्निकर्ष
Solution:

न्याय दर्शन में ज्ञान लक्षण सत्रिकर्ष वह सन्निकर्ष हैं, जिसमें इन्द्रियों अपने सम्बन्धित विषय से भिन्न विषय का ज्ञान प्रदान करती है, जैसे- रस्सी को सौंप, चन्दन की लकड़ी के टुकड़े को देखकर उसके सुगन्धित होने का ज्ञान, न्याय-दर्शन में वस्तुवाद की रक्षा और भ्रम की सम्यक रूपेण व्याख्या करने के लिये इस सन्निकर्ष को स्वीकार किया गया।
(भारतीय दर्शन की रूपरेखा- हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा) 

29. बहुसंस्कृतिवाद के सन्दर्भ में विलकिमात्रिका के दृष्टिकोण से निम्नलिखित में से कौन-सा सही नही है?

Correct Answer: (d) समूह अपने पृथक् प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को नकार नही सकते।
Solution:

बहु-संस्कृतिवाद के सन्दर्भ में चार्ल्स टेलर ने 'पहचान की राजनीति' तथा विल किमालिका ने अल्पसंख्यक अधिकार की आवधारणा दी। जिसके अन्तर्गत तिलकिमालिका की महत्वपूर्ण रचनाएँ- Multicultural Citizenship, Multicultural Odysseys है, विल किमालिका के दृष्टिकोण में समूह अपने से पृथक् प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को नकार सकते है।

30. चार्वाक के अनुसार अनुमान प्रमाण नहीं हो सकता क्योंकि;

Correct Answer: (d) व्याप्ति स्थापित नही की जा सकती।
Solution:

चाको के अनुसार, अनुमान का प्रमुख साधन व्याप्ति ज्ञान है, जिसे स्वयं अनुमान पर आधारित माना जा सकता है, चाको के अनुसार व्याप्ति की स्थापना सम्भत नहीं हो सकती है, अतः वह केवल प्रत्यक्ष प्रमाण को ही मानते है, चार्वाको के अनुसार व्याप्ति की स्थापना प्रत्यक्ष के आहार पर सम्भव नहीं है, क्योंकि एक साथ सारी घटनाओं का निरीक्षण नही किया जा सकता।