यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 80

31. निम्नलिखित में से यह किसका कथन है कि "मेरा धर्म मुझे बताता है कि कोई यदि ऐसा संकट उपस्थित हो, जिसे दूर नही किया जा सकता, तो हमें व्रत (उपवास) रखना चाहिए और प्रार्थना करनी चाहिए।

Correct Answer: (b) गाँधी
Solution:

गाँधी जी के अनुसार यदि हमारे समक्ष ऐसा संकट उपस्थित हो, जिसे दूर नही किया जा सकता, तो हमें उपवास और प्रार्थना करनी चाहिए, जिससे आत्मशुद्धि होगी और इसमें (हड़ताल) लक्ष्य स्वयं कष्ट सहन करते हुए विरोधी का हृदय परिवर्तन करना होता है।
(आधुनिक भारतीय चिन्तन- डॉ.ओमप्रकाश टाक) 

32. सूत्र ~ (P ∂ Q) निम्नलिखित में से किसके समतुल्य है?

Correct Answer: (c) P . ~ Q
Solution:

~ (P ∂ Q) = P . ~ Q

33. शंकर के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा अस्वीकार्य है?

Correct Answer: (b) ब्रह्म अंतःकल्याण गुण पूर्ण है।
Solution:

शंकर के अनुसार ब्रह्म निर्विवेग है, परंतु मानवों के अनुसार ब्रह्म सम्पूर्ण, साकार, पूरुषोत्तम है वह अन्तःक्रिया गुणों से युक्त सभी वस्तुओं के भेद गुणों से रहित है। अतः ब्रह्म अन्तःकल्याण गुण परिपूर्ण रामानुज का स्वीकार्य है।

34. अनुमान के नियमों का उपयोग करते हुए प्रतिज्ञप्तयात्मक तर्कशास्त्र में प्रस्तुत प्रमाण क्या कहलाते है?

Correct Answer: (a) स्वाभाविक निगमन
Solution:

35. निम्नलिखित में से किस सिद्धान्त में यह प्रतिपादित किया गया है, कि दण्ड को कठोरता अपराध की गम्भीरता की समानुपाती होनी चाहिए?

(A) प्रतिरोधात्मक सिद्धान्त (निवारक)
(B) प्रतिकारात्मक सिद्धान्त (प्रतिफलनात्मक)
(C) सुधारात्मक सिद्धान्त
कूटः

Correct Answer: (b) C केवल
Solution:

प्रतिकारात्मक सिद्धान्त वह है, जिसमें दण्ड साध्य है, और अपराधी को दण्ड अवश्य मिलना चाहिए। इसमें अपराधी को उतना ही कष्ट दिया जाना चाहिए, जितना उसने पीड़ित व्यक्ति को दिया इसे यहूदियों ने धर्मग्रन्थ 'ओल्ड टेस्टामेण्ट' में स्पष्ट रूप से कहा गया कि, 'आँख के बदले आँख, दाँत के बदले दाँत' । जबकि निवारक या प्रतिरोधात्मक और सुधारात्मक में ऐसा नहीं है।
(नीतिशास्त्र के मूल सिद्धान्त वेद प्रकाश वर्मा) 

36. अष्टांग -मार्ग के सही क्रम वाले विकल्प को चुनेः-

Correct Answer: (a) सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाक्, सम्यक कर्मान्त
Solution:

अष्टांग मार्ग आष्टागिक मार्ग बौद्ध दर्शन के चतुर्थ आर्य सत्य के अन्तर्गत दुःख निरोध उपाय या निर्वाण प्राप्ति उपाय के सन्दर्भ में किया गया है, ये इस प्रकार है;
सम्यक् दृष्टि → सम्यक् संकल्प → सम्यक् वाक → सम्यक्
आजीव → सम्यक् व्यायाम → सम्यक्स्मृति → सम्यक् समाधि ।

37. यह विचार कि ज्ञान, ज्ञेय, ज्ञाता और स्वयं ज्ञान को प्रकाशित करता है; निम्नलिखित में से किसके द्वारा प्रतिपादित है;

Correct Answer: (b) प्रभाकर मीमांसा
Solution:

प्रभाकर मीमांसा में प्रत्यक्ष ज्ञान के सन्दर्भ में 'त्रिपुटी- प्रत्यक्षवाद' है, जिसमें किसी भी विषय के प्रत्यक्षीकरण में ज्ञाता, ज्ञान और ज्ञेय तीनो का प्रत्यक्ष होता है।

38. किसी निगमनात्मक तर्क के आधार वाक्य यदि सत्य है, तो वे उसके निष्कर्ष के सत्य के लिए निर्णायक आधार प्रदान करते है, निगमनात्मक तर्क की यह विशेषता क्या कहलाती है?

Correct Answer: (c) वैधता
Solution:

निगमनात्मक तर्क के विशेषता वैधता या अवैधता होती है, जबकि तर्कवाक्य की विशेषता सत्यता या असत्यता होती है, अतः यदि किसी निगमनात्मक तर्क के आधारवाक्य यदि सत्य है, तो वे उसके निष्कर्ष के सत्य के लिए निर्णायक आधार प्रदान करते है, निगमनात्मक तर्क की यह विशेषता वैधता कहलाती है। (तर्कशास्त्र प्रवेशिका राममूर्ति पाठक)

39. निम्नलिखित में से किस सिद्धान्त का प्रतिपादन शंकर ने किया है?

Correct Answer: (a) नित्यानित्य वस्तु-विवेक
Solution:

शंकरचार्य के अनुसार, अज्ञान का निवारण ब्रह्म ज्ञान से होता है, जिसके लिए शारीरिक एवं मानसिक शुद्धि अनिवार्य है, जिसके लिए शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित साधन चतुष्टय सिद्धान्त है। जो निम्न है, नित्यानित्य वस्तु विवेक, वैराग्य, शमदमादि- साधन सम्यत् और मुमुक्षत्व है।
(भारतीय दर्शन चन्द्रधर शर्मा) 

40. (x) (φx) φ√ (जहां √ कोई एक प्रतीक है) निम्नलिखित में से किसका रूप है?

Correct Answer: (b) सार्वभौमिक दृष्टांतकरण
Solution:

सार्वभौमिक दृष्टांतकरण = (x)' (φx)'
. φ√ (जहां √ कोई एक प्रतीक है) जो परिमाणन के चार नियमों के अंतर्गत पहला नियम है।
(तर्कशास्त्र प्रवेशिका- न्यायमूर्ति पाठक)