यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 80

51. नीचे चार ज्ञानेन्द्रियों की सूची दी गई है। न्याय ज्ञानमीमांसा के अनुसार जिन सभी ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा हमें द्रव्य का प्रत्यक्ष होता है, उससे सम्बन्धित कूट का चयन कीजिए ?

Correct Answer: (d) चाक्षुषेन्द्रिय, स्पर्शेन्द्रिय और आन्तरिक ज्ञानेन्द्रिय
Solution:

न्याय ज्ञानमीमांसा के अनुसार ज्ञानेन्द्रियाँ दो प्रकार की होती है. बाह्य ज्ञानेन्द्रियाँ आँख, जीभ, कान, नाक और त्वचा। इसके अतिरिक्त मन भी एक इन्द्रिय है, जो आन्तरिक इन्द्रिय कहलाती हैं, इन इन्द्रियों के अभात में हमें द्रव्य का प्रत्यक्ष ज्ञान होना अंसम्भव है।

52. निम्नलिखित में से यह किसका विचार है, कि उचित और अनुचित के सभी सन्दर्भ में राज्य के नियम ही सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है?

Correct Answer: (b) हॉब्स
Solution:

हॉब्स सामाजिक समझौतावादी विद्वान है, उनका प्रमुख ग्रन्थ 'लेवियाथन' है, जिसमें उन्होंने निरकुंश राजतन्त्र का विचार दिया, हॉब्स ने बाजारवादी सम्बन्धों की सुरक्षा हेतु एक निरकुंशतापूर्ण, शक्तिशाली राजा का समर्थन किया, क्योंकि एक शक्तिशाली राजा के द्वारा ही समाज में शान्ति व सुरक्षा बनायी जा सकती है, एक सम्प्रभु शक्ति के अभाव में लोगों की सम्पत्ति खतरे में पड़ जायेगी। अतः हॉब्स के अनुसार व्यक्ति स्वतन्त्रता वही तक है, जहाँ तक राज्य व विधि का प्रतिबन्ध न हो।

53. जब केवल एक आधार वाक्य से निष्कर्ष निकाला जाता है, तो इसे क्या कहा जाता है?

Correct Answer: (b) अव्यवहित अनुमान
Solution:

अनुमान दो प्रकार के होते है:-
(i) अव्यवहित अनुमान, जिसमें अव्यवहित अनुमान में निष्कर्ष केवल एक आधार वाक्य से निकलता है;
उदाहरण - (A) सभी मनुष्य मरणशील है।
कोई मनुष्य अमरणशील नहीं है।
(ii) व्यवहित अनुमान, जिसमें निष्कर्ष कम से कम दो आधारवाक्यों से निकलता है। अव्यवहित अनुमान - परिवर्तन, प्रतिवर्तन, प्रति परिवर्तन आता है।

54. निम्नलिखित में से यह किसका दृढ़ विचार है, कि 'नैतिक भाषा निर्देशात्मक होती है?

Correct Answer: (c) हेअर
Solution:

हेयर नैतिक भाषा को निर्देशात्मक भाषा का एक प्रकार मानते है, आदेश भी निर्देशात्मक भाषा का एक प्रकार है, निर्देशात्मक भाषा के द्वारा कुछ करने को कहा जाता है, परामर्श का उद्देश्य भी यह बताना है, कि क्या किया जाय। इसलिए नैतिक भाषा को परामशीत्मक भी कहा जा सकता है। हेयर की मुख्य कृति, द लॅग्टॉज ऑफ मॉरल्स, फ्रीडम एण्ड रीजन मुख्य है।

55. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए है, उन पर विचार कीजिए और नीचे दिए गये कूट से सही उत्तर दीलिए?

अभिकथन (A): ह्यूम संशयवादी है।
तर्क (R): कारणता का सिद्धान्त अनुभववाद का आहार है।

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनों सत्य है, परन्तु (R),(A) की सही व्याख्या नही है।
Solution:

कारणता का सिद्धान्त अनुभववाद का आधार नही है, क्योंकि ह्यूम परम्परागत कारणता को न मानकर कारणता को साहचर्य के नियम पर आधारित मानते है, और ह्यूम एक संशयवादी दार्शनिक है जहाँ पर तो वो तार्किक अनुभववाद के पथ पर दृढ़ता से बढ़ते हुए संशयवाद में पहुँच जाते है।

56. सुमेलित करे:

सूची-Iसूची-II
A. होताजो मधुर स्वर में मंत्र बोलता है।
B. उद्गाताजो श्रुति मंत्रों के उच्चारण से देवताओं का आह्वान करता है।
C. अर्थव्यजो विधिवत निरीक्षण करता है, और सभी देवताओं का ज्ञाता है।
D. ब्रह्माजो पूर्ण विधि विधान का पालन करते हुए आहुति देता है।

कूटः

Correct Answer: (a) ii i iv iii
Solution:

ऋग्वेद, जो स्तुति मंत्रों के उच्चारण से देवताओं का आहवान करता है, इसके उच्चारक को 'होता' कहा जाता था, सामवेद में पुरोहित को उद्‌गाता कहा जाता है, जो मधुर स्वर में मंत्रमान करता है, यजुर्वेद में जो पूर्ण विधि-विधान का पालन करते हुए आहुति देता है, उसे अर्ध्वयु कहा जाता था, ब्रह्मा तो है, जो विधिवत् निरीक्षण करता और सभी वेदों का ज्ञाता है।

57. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए है, उन पर विचार कीजिए और नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर दीजिए ?

अभिकथन (A): युणक नित्य होने चाहिए।
तर्क (R) : दृयुणक नित्य परमाणुओ से निर्मित्त है।

Correct Answer: (d) (A) गलत है और (R) सही है।
Solution:

वैशेषिक के अनुसार दिक, काल, आत्मा, मन और भौतिक परमाणुओ की न सृष्टि होती है और न विनाश ही होता अतः ये नित्य द्रव्य है, तथा परमाणु के संयोग से उत्पन्न द्वयगुक, वंयणुक, चुतरणुक आदि को तथा कर्म को अनित्य कहा गया है।

58. सुमेलित करे :

सूची-Iसूची-II
A. के. सी. भट्टाचार्य(i) माया जगत का तथ्यात्मक विवरण है।
B. टैगोर(ii) निषेध का क्षेत्र असिमित क्षेत्र है।
C. विवेकानंद(iii) जगत सत्य सुखवस्थिति पूर्ण है।
D. राधाकृष्णन(iv) यदि सत्य को उसकी प्रतीति से पृथक् कर दिया जाए तो सत्य का सर्वांगीण भाग भंग हो जाता है।

कूटः

Correct Answer: (d) ii iv i iii
Solution:

के. सी. भट्टाचार्य का निषेध का क्षेत्र असीम क्षेत्र है, टैगोर का यदि सत् को उसकी प्रतीति से सर्वथा पृथक् कर दिया जाए, तो सत्य के सवोकृष्ट अंश भंग हो जाता है, विवेकानन्द का माया जगत का तथ्यात्मक विवरण है, राधाकृष्णन का जगत् सत्य सुव्यवस्थित पूर्णता है से सम्बन्ध है।

59. न्याय ज्ञानमीमांसा में सत् हेतु का निम्नलिखित में से कौन-सा लक्षण नहीं है?

Correct Answer: (b) विपक्षसत्व
Solution:

न्याय ज्ञानमीमांसा में अनुमान को प्रामणिकता के लिए हेतु को सद् होना चाहिए। स हेतु वह है, जिसमें साध्य को सिद्ध करने की योग्यता हो। यह योग्यता हेतु में तब आती है, जब वह पाँच गुणों से युक्त हो;
पक्षसत्व → सपक्षसत्व → विपक्षअसत्व → अवाधित

60. वह अव्यवहित अनुमान क्या कहलाता है, जिसमें उद्देश्य और विधेय शब्दों को आपस में बदल दिया जाता है?

Correct Answer: (a) परिवर्तन
Solution:

परिवर्तन अव्यवहित अनुमान का वह रूप है, जिसमें उद्देश्य-विधेय का स्थान परस्पर बदल जाता है A का I, E का E, I का I, तथा O का परिवर्तन नहीं होता है।
उदाहरण (A) सभी मनुष्य मरणशील है।