यू.जी.सी. NTA नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 80

71. 'समस्त इस प्रत्यय के माध्यम से होता है' यह उक्ति निम्नलिखित दर्शिनिकों में किसकी है?

Correct Answer: (b) सुकरात
Solution:

सुकरात के अनुसार, 'समस्त ज्ञान प्रत्यय के माध्यम से होता है' इसमें प्रत्यक्ष के बाद प्रत्यय (समप्रत्यय) की स्थिति आती है इन्होंने इन्द्रियों की अपेक्षा बुद्धि पर बल दिया और वह कि 'समस्त ज्ञान सम्प्रत्ययों से निर्मित है, तथ्य बुद्धि सम्प्रत्ययों का संकाय है।

72. निम्नलिखित में से कौन-सा अरस्तु को स्वीकार्य नहीं?

Correct Answer: (c) कारणता का सिद्धान्त एक भ्रम है।
Solution:

अरस्तु के दर्शन में कारणता का सिद्धान्त एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त है, जिसे किसी भी कार्य के पीछे छिपे कारण का विश्लेषण करते हुए चार कारणों को कार्य की उत्पत्ति हेतु आवश्यक मानते है, जिसमें उपादान, निमित्त, स्वरूप तथा लक्ष्य कारण है, जो बाद में दो मूलभूत कारणों में रूपान्तरित हो गये, पहला स्वरूप कारण (निमित्त, स्वरूप, लक्ष्य) दूसरा उपादान कारण।

73. अर्थशास्त्र में वर्णित निम्नलिखित में से कौन सा उपाय शत्रु के मस्तिष्क में शंका उत्पन्न करने के लिए है?

Correct Answer: (d) भेद
Solution:

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भेद एक ऐसा उपाय है, जो शक्तिशाली शत्रु से विजय न पाने की स्थिति में शत्रु के मस्तिष्क में शंका या फूट डालनी चाहिए, ताकि उसकी शक्ति क्षीण हो सके।

74. सुमेलित करें:

सूची-Iसूची-II
(a) एपीरन(i) शेल्स
(b) जल(ii) अनकेडीमंडर
(c) वायु(iii) डेमोक्रीटस
(d) परमाणु(iv) एनेजीगोरस

कूटः 

Correct Answer: (b) ii i iv iii
Solution:

जल का थेल्स, एनेजीमेनीज का वायु, अनेक्जीमेण्डर का असीम या एपीरौन डेमोकिट्स का परमाणु, हेरावलटिस का अग्नि, पार्मेनाइडीज का 'शुद्ध सूत्र' तथा एनेक्जागोरस का नाउस 8' को मूलतत्व के रूप में माना।

75. निम्नलिखित में से किसके अनुसार अथीपत्रि स्वतन्त्र प्रमाण है?

Correct Answer: (b) शंकर
Solution:

शंकराचार्य, कुमारिल, प्रभाकर के अनुसार अथीपत्रि एक स्वतन्त्र प्रमाण है।

76. श्री अरविन्द के विविध रूपान्तरण का सही अनुक्रम बताइए?

Correct Answer: (d) चैत्य रूपान्तरण, आध्यात्मिक रूपान्तरण, अतिमानसिक रूपान्तरण
Solution:

अरविन्द का पूर्ण योग मानस से अतिमानस तक के विकास की प्रक्रिया है, यहाँ अरविन्द विकास की इस प्रक्रिया को सम्पन्न करने हेतु 'त्रिस्तरीय प्रक्रिया' या त्रिस्तरीय रूपान्तरणों की बात करते है ये क्रमश है;
चैत्य रूपान्तरण (आत्मिकता का रूपान्तरण) → आध्यात्मिक → अतिमानसिक रूपान्तरण

77. निम्नलिखित नारीवादी विचारको में से किसका मत है, कि महिलाओं को समाज में उनके पालन पोषण के परिणम स्वरूप 'पुरुष का अन्य' आतित, युत्पन्न स्थिति प्रदान की गई है, और जो फ्रायड ने कथन 'शरीर संरचना नियति है' को चुनौती देती है?

Correct Answer: (b) सिमोन द बुबा
Solution:

फ्रायड और सिमोन द बुबी दोनों उम्रनारीवादी दार्शनिक थे। सिमोन द बुबा के अनुसार स्त्रियाँ बनाई जाती है, पैदा नहीं होती जिसके अन्तर्गत उनको समाज में पालन-पोषण के परिणामस्वरूप 'पुरुष का अन्य' आतित, व्युत्पन्न स्थिति प्रदान की गई है जो फ्रायड के कथन 'शरीर संरचना नियति है' को चुनौती देती है, जिसमें फ्रायडस्टोन ने वर्ग की आवधारणा को यौन की आवधारणा में अलग किया और माना कि यौन विभेद शारीरिक भी है, जिसके कारण दोनो की भूमिकाएं समाज में भिन्न-भिन्न होती है।

78. जैन ज्ञानमीमांसा में भूत, सूक्ष्म और दूरस्थ वस्तुओं का ज्ञान क्या कहलाता है?

Correct Answer: (c) अवधि
Solution:

जैन दर्शन में ज्ञान के दो भेद किये गये है, पहला अपरोक्ष ज्ञान, जिसमें तीन प्रकार अवधि, मनःपर्याय तथा केवल ज्ञान आता है, तथा दूसरा परोक्ष ज्ञान, जिसमें दो प्रकार मति और श्रुत आता है। अवधि ज्ञान वह ज्ञान है जिसमें बाधाओं के हट जाने पर वस्तुओं का जो ज्ञान होता है, इस ज्ञान के द्वारा मानव अत्यन्त दूरस्थित वस्तुओं का सूक्ष्म तथा अस्पष्ट द्रव्यों का ज्ञान पाता है।

79. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए है, उन पर विचार कीजिए और नीचे दिए गये कूट से सही उत्तर दीजिए ?

अभिकथन (A): तर्कबुद्धि को नैतिक मानदण्ड के रूप में समझा जाना चाहिए।
तर्क (R): सुख को नैतिक मानदण्ड नही समझा जा सकता।

Correct Answer: (b) (A) और (R)दोनों सत्य है, परन्तु (R), (A)की गलत व्याख्या है।
Solution:

सुख को नैतिक मानदण्ड नही समझा जा सकता और तर्क बुद्धि को नैतिक मानदण्ड के रूप में समझा जाना चाहिए दोनो सही है परन्तु सुख को नैतिक मानदण्ड नहीं समझा जा सकता क्योंकि तर्कबुद्धि को नैतिक मानदण्ड के रूप में समझा जाना चाहिए थे गलत व्याख्या है।

80. सुमेलित करें:

सूची-Iसूची-II
(A) प्रत्येक निषेध स्वीकृत है(i) लाइबनिज
(B) पर्याप्‍त कारण का नियम(ii) स्पिनोजा
(C) आत्मात्‍मक प्रत्ययवाद(iii) कांट
(D) अतिवृद्ध भ्रम(iv) बर्कले

कूटः

Correct Answer: (c) ii i iv iii
Solution:

स्पिनोजा का 'प्रत्येक निषेध स्वीकार है', लाइबनिज्य का 'पर्याप्त कारण का नियम' बर्कले का 'आत्मगत प्रत्ययवाद', काण्ट का अतीन्द्रिय भ्रम से सम्बन्ध है।