Solution:दर्शनशास्त्र वह विद्या है, जो परम सत्य और सिद्धांतों और उनके कारणों की विवेचना करता है। दर्शन यथार्थ की परख के लिए एक दृष्टिकोण है। दार्शनिक चिंतन मूलतः जीवन की अर्थवत्ता की खोज का पर्याय है। वास्तव में, दर्शन को परिभाषित करना स्वयं में ही एक दार्शनिक प्रश्न है। दर्शन के जनक महर्षि व्यास जी हैं, संपूर्ण मानव जीवन को दर्शन का अध्ययन क्षेत्र या दर्शन की शाखाएँ माना जा सकता है।
लेकिन आधुनिक दर्शन में दर्शन का अध्ययन क्षेत्र का विभाजन समस्याओं के आधार पर किया गया है इस दृष्टि से दर्शन का अध्ययन क्षेत्र निम्न है-
1. तत्व मीमांसा (Metaphysics)
(a) ईश्वर संबंधी तत्व (Theology)
(b) आत्मा संबंधी तत्व (Metaphysics of Soul)
(c) दृष्टि (विश्व) शास्त्र (Consmology)
(d) सत्ता शास्त्र (Ontology)
2. ज्ञान मीमांसा (Epistemology)
3. मूल्य मीमांसा (Axiology)
(a) आचार मीमांसा (Ethics)
(b) तर्कशास्त्र (Logic)
(c) सौंदर्यशास्त्र (Aesthetics)