यू.जी.सी. NTA नेट परीक्षा जून-2019 (इतिहास)

Total Questions: 100

11. निम्नलिखित में से किसको उपकरणों के सुव्यवस्थित विवरण वाली पहली उपलब्ध भारतीय रचना कहा जाता है?

Correct Answer: (c) ब्रह्मास्फुट सिद्धान्त
Solution:

ब्रह्मगुप्त लगभग सातवीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध गणितज्ञ थे। उन्होने दो महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों की रचना की ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त तथा खण्डखाद्यक अथवा खण्डखाद्य पद्धति । ब्रह्मस्फुट सिद्धांत के 19 से 24 तक के अध्याय खगोलीय उपकरणों और प्रेक्षणों को समर्पित है।

12. निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?

Correct Answer: (c) कश्मीरी शैली : यह बाह्य विश्व के किसी भी प्रकार के प्रभाव से रहित विशुद्ध स्थानीय शैली है।
Solution:

कश्मीरी शैली का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण मार्तण्ड सूर्य मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी ईस्वी के मध्य कार्कोट वंश के राजा ललितादित्य मुक्तापीड द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर के वास्तुकला की विशेषता इसके मेहराब हैं।

मंदिर के स्तंभों और द्वार मंडपों की वास्तु शैली रोम की गोथिक शैली से कुछ अंशों में मिलती जुलती है। इसके स्तंभों में ग्रीक संरचना का प्रयोग किया गया है। इस मंदिर में चीनी, रोमन, ग्रीक और भारतीय शैली की झलक दिखाई देती है।

13. बागोर साइट के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौनसा सही नहीं है?

Correct Answer: (c) इसके प्रारंभ से ही कृषि सम्बन्धी चिन्ह पाये गए हैं।
Solution:

बागोर राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित है। यहाँ 1968 से 1970 तक वी.एन. मिश्र ने उत्खनन कार्य करवाया था। बागोर भारत का सबसे बड़ा मध्य पाषाणिक स्थल है। यहाँ से बागोर को प्रारम्भ में तीन सांस्कृतिक कालों में विभाजित किया गया किन्तु वर्तमान में दो सांस्कृतिक कालों मध्यपाषाणकाल और लौह काल में विभाजित किया गया है।

मध्यप्रदेश में स्थित आदमगढ़ तथा बागोर दो मध्यपाषाणिक स्थल ऐसे है जो पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। बागोर से चैल्सेडनी औजारों की प्राप्ति अत्यधिक मात्रा में हुई है। बागोर से जबु, बैल, भेड़, बकरी और सुअर की करीब 5000 ई.पू. से ही पालतू पशु के रूप में पालन किया जाता था। यहाँ प्रारम्भ से ही कृषि सम्बन्धी चिन्ह नहीं मिलते है।

14. सूची-I को सूची- II के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची - I (पुस्तक)सूची - II (लेखक)
(A) इरफान हबीब(i) परहैप्स दि अर्लिएस्ट प्लाउडफील्ड सो फार एक्सकेवेटेड एनीह्वेयर इन दि वर्ल्ड
(B) बी.बी. लाल(ii) इमैजिनिंग रिवर सरस्वती- अ डिफेन्स ऑफ कॉमन सेंस
(C) आर.एच. मीडो(iii) रीजनल इंटरेक्शन इन इंडस वैली अर्बेनाइजेशन
(D) मार्सिया ए. फेन्ट्रेस(iv) दि डोमेस्टिकेशन एंड एक्सप्लेयटेशन ऑफ प्लांट्स एंड एनिमल्स इन दि ग्रेटर इंडस वैली

नीचे दिए गए विकल्प में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) (A)-(ii); (B)-(i); (C)-(iv); (D)-(iii)
Solution:सही सुमेलन हैं।
सूची - I (पुस्तक)सूची - II (लेखक)
(A) इरफान हबीबइमैजिनिंग रिवर सरस्वती-अ
डिफेन्स ऑफ कॉमन सेंस
(B) बी.बी. लालपरप्स दि अर्लिएस्ट प्लाउडफील्ड
सो फार एक्सकेवेटिड एनीलेयर इन
दि वर्ल्ड
(C) आर.एच. मीडोदि डोमेस्टिकेशन एंड
एक्सप्लायटेशन ऑफ प्लांट्स एंड
एनिमल्स इन दि ग्रेटर इंडस वैली
(D) मार्सिया ए. फेन्ट्रेसरीजनल इंटरेक्शन इन इंडस वैली
अर्बनाइजेशन

15. राजशेखर के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा वक्तव्य सही है?

Correct Answer: (b) वह प्रतिहार शासक महेन्द्रपाल और महिपाल का दरबारी कवि सी. 9वीं 10वीं शताब्दी सी.ई.) था।
Solution:

संस्कृत के प्रसिद्ध कवि व नाटककार राजशेखर प्रतिहार वंशी महेन्द्रपाल प्रथम तथा उसके पुत्र महिपाल में निवास करते थे। उन्होंने निम्न ग्रंथों की रचना की-
(1) बाल रामायण
(2) बाल भारत प्रचन्ड पाण्ड्व
(3) विद्धशालभंजिका
(4) कपूर मंञ्जरी
(5) काव्य मीमांसा

16. निम्नलिखित में से कौन-सा मनुस्मृति में मिश्रित जातियों को दिए जाने वाले विभिन्न दर्जे के सम्बन्ध में सही नहीं है?

Correct Answer: (d) अनुलोम विवाह को प्रतिलोम विवाह की अपेक्षा कहीं अधिक, पवित्र कानून का उल्लंघन करने वाला माना जाता था।
Solution:मनुस्मृति हिन्दू धर्म का एक प्राचीन धर्मशास्त्र है। इसे मानव धर्मशास्त्र, मनुसंहिता आदि नामों से भी जाना जाता है। मनुस्मृति में वर्ण व्यवस्था का विस्तार से वर्णन मिलता है।

इसके अनुसार वर्ण व्यवस्था में एक दर्जा कम की पत्नी से जन्में बच्चों की द्विजों के भाग के रूप में स्वीकृति मिलती थी। वर्ण दर्जे के हिसाब से दो या तीन डिग्री नीचे की महिला से जन्में बच्चों से शूद्रों में एक नया समूह निर्मित होता था। यदि महिला का संबन्धित दर्जा पुरूष के दर्जे से ऊंचा होता था तो ऐसे विवाह की संततियों के माता-पिता के दर्जे से नीचे रखा जाता था।

प्रतिलोम विवाह को अनुलोम विवाह की अपेक्षा कहीं अधिक पवित्र कानून का उल्लंघन करने वाला माना जाता था। मनुस्मृति के टीकाकार भारुचि, मेघातिथि, गोविन्दराज एवं कुल्लुक भट्ट है।

17. नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) कहा गया है और दूसरे को कारण (R) कहा गया है:

अभिकथन (A): तर्क दिया जाता है कि आरंभिक ऐतिहासिक दक्षिण भारत में कवियोंद्वारा किया गया गुणगान राजनीतिक सत्ता का आधार नहीं था।
कारण (R) : उक्त काल के कवि अपनी भौतिक खुशहाली के लिए राजाओं पर निर्भर होते थे।
उपर्युक्त दो कथनों के संदर्भ में निम्न में से क्या सही है?

Correct Answer: (d) (A) गलत है परन्तु (R) सही है
Solution:

आरंभिक ऐतिहासिक दक्षिण भारत में कवियों राजाओं की प्रशंसा में अनेक कविताएं लिखी। इसके बदलें में उन्हें राज्य की ओर से अच्छे पुरस्कार प्राप्त होते थे। परम्परा के अनुसार उन्हें धन के अतिरिक्त भूमि, अश्व, रथ, हाथी आदि से भी पुरस्कृत किया जाता था। अतः विकल्प (d) वक्तव्य सही है।

18. निम्नलिखित में से कौन-सा छोटे सार्वजनिक बाजारों तथा बड़े व्यापारिक केन्द्रों के बीच के स्थानीय विनिमय केन्द्र को इंगित करता है?

Correct Answer: (a) मंडपिका
Solution:

आठवीं शताब्दी ईस्वी के पश्चात् अनेक कस्बों का उल्लेख प्राप्त होता है जो सभवतः बड़े-बड़े गाँवों से स्थापित होने लगे थे। इन कस्बो में एक मंडपिका (बाद में मंडी) होती थी। जहां आस-पास के गांव के लोग अपने-अपने उत्पादों की ब्रिकी हेतु इकट्ठा होते थे। ये छोटे सार्वजनिक बाजारों तथा बड़े व्यापारिक केन्द्रो के बीच के स्थानीय विनिमय केन्द्र थे।

19. सूची-I को सूची - II के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची- I (स्थान)सूची- II (काल)
(A) किली गुल मुहम्मद(i) 3370-2530 BC
(B) डम्ब सादध(ii) 4555-3885 BC
(C) कालीबंगा(iii) 2980-1865 BC
(D) राना घुंडाई(iv) 4550-3164 BC
Correct Answer: (d) (A)-(iv); (B)-(ii); (C)-(iii); (D)-(i)
Solution:सही सुमेलन हैं
सूची- I (स्थान)सूची- II (काल)
(A) किली गुल मुहम्मद4550-3164 BC
(B) डम्ब सादध4555-3885 BC
(C) कालीबंगा2980-1865 BC
(D) राना घुंडाई3370-2530 BC

20. निम्नलिखित में से किसमें रेडियोंकार्बन निर्धारण तकनीक लागू की जाती है?

Correct Answer: (b) पुरातत्व विज्ञान
Solution:

1946 ई. रसायनशास्त्री विलर्ड लिबि द्वारा रेडियोधर्मी कार्बन-14 विधि का अविष्कार किया गया। पुरातत्व में तिथि निर्धारण के लिए इसका सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। कार्बन-14 द्वारा काल निर्धारण विधि के रेडियों कार्बन काल निर्धारण तकनीक कहते है। इसका प्रयोग पुरातत्व जीव विज्ञान में जन्तुओं और पौधों के प्राप्त अवशेषों के आधार पर जीवन काल, समय चक्र का निर्धारण करने में किया जाता है।