जहाँगीर ने दो बार लाहौर से लगभग 29 कि.मी. दूर शिकार महल के रूप में उपयोग किए जाने वाले एक मीनार, तालाब और मंडप का उल्लेख करता है। आज इस जगह को शेखपुरा के नाम से जाना जाता है, परन्तु जहाँगीर ने 1606 में इसे जहाँगीरपुरा कहा है और उसके बाद 1620 में इसे जहाँगीराबाद कहता है, इन दोनों का अर्थ है जहाँगीर का शहर, इसमें जहाँगीराबाद अधिक भावात्मक रूप है।
यहाँ जहाँगीर के प्रिय लंगड़े हिरण की 1606 में मौत हुई थी, उसे एक कब्र में दफना दिया गया था। और उसके ऊपर हिरण की प्रतिमा और कश्मीर में मुल्ला मुहम्मद हुसैन द्वारा लिखी प्रशस्ति लगा दी गई। इस समाधि प्रस्तर के समीप उस क्षेत्र के जागीरदार सिकंदर मुइन खान की देखरेख में 1606 में लगभग एक मीनार का निर्माण कराया गया था।
जहाँगीर के आदेशानुसार सिकंदर मुइन खान ने एक तालाब और राजमहल का भी निर्माण कराया। जब निर्माण कार्य प्रगति पर था, उसी समय मुइन की मौत हो गई, इसके बावजूद परिसर का निर्माण कार्य 1620 में ठीक प्रकार से पूरा हो गया, बाद के चरणों का निर्माण कार्य इरादत खाँ की देखरेख में पूरा हुआ।
इसके निर्माण पर इतना अधिक व्यय हुआ था कि बादशाह ने अपने संस्मरणों में इस राशि का उल्लेख किया है। जहाँगीर ने इस स्थल को एक 'शाही शिकार स्थल' माना था, यद्यपि उसके उत्तराधिकारियों ने इस जगह को अपर्याप्त पाया और 1634 में इसके मंडप के पुनर्निर्माण पर काफी धन व्यय किया।
निम्नलिखित मे से किस शहर में अकबर के शासनकाल में निर्मित 'नीम सराय मीनार' स्थित है?