यू.जी.सी. NTA नेट परीक्षा दिसम्बर – 2019 (इतिहास)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़े और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें।

बरनी एक भिन्न प्रकार का इतिहासकार था, जिसकी दिल्ली सल्तनत के इतिहास के बारे में 1357 में लिखित कृति उस बिंदु से शुरू होती है, जहां मिन्हाज सिराज़ ने अपना आख्यान समाप्त किया था। बरनी अपने सहकर्मियों से भिन्न है, विशेष रूप से इसलिए कि वह वंशगत और राजनीतिक के बजाए, जीवन के पहलुओं जैसे-आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक और धार्मिक को उठाता है। वह इसमें भी अनुपम है कि वह घटनाओं के प्रति स्वयं अपना एक विशिष्ट ऐतिहासिक सिद्धांत प्रस्तुत करता है। यह सिद्धांत स्वेच्छाचारी राजतंत्र, स्थापित अभिजात वर्ग और गैर-कुलीन वर्गों के, नवोदित वर्ग के बीच त्रिकोणीय संबंध पर आधारित है।
बरनी द्वारा वर्णित त्रिकोणीय संबंध के कौन से तत्त्व हैं?

Correct Answer: (a) स्वेच्छाचारी राजतंत्र, स्थापित अभिजात्य वर्ग, गैर-कुलीन वर्गों के नवोदित वर्ग ।
Solution:

जियाउद्दीन बरनी एक इतिहासकार एवं राजनैतिक विचारक थे जो मुहम्मद बिन तुगलक और फिरोजशाह तुगलक के काल में भारत में रहे। बरनी की प्रसिद्ध कृति 'तारीख-ए-फिरोजशाही' है। बरनी ने वंशगत और राजनीति के बजाए जीवन के पहलुओं जैसे आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक और धार्मिक को उठाया हैं उसके द्वारा दिए गए सिद्धांत स्वेच्छाचारी राजतंत्र, स्थापित अभिजात वर्ग और गैर कुलीन वर्ग, नवोदित वर्ग के बीच त्रिकोणीय संबंध पर आधारित माने गए है।

92. उस पुस्तक का नाम बताइए, जो दिल्ली सल्तनत के इतिहास के बारे में उस बिंदु से शुरू होती है, जहाँ मिन्हाज सिराज ने अपनी पुस्तक को समाप्त किया था।

Correct Answer: (b) तारीख-ए-फिरोजशाही
Solution:

बरनी की प्रसिद्ध कृति तारीख-ए-फिरोजशाही के बारे में कहा गया कि यह पुस्तक दिल्ली सल्तनत के बारे में उस बिन्दु से शुरू होती है जहाँ से मिन्हाज-उल-सिराज ने अपनी पुस्तक 'तबकातए-नासिरी' को समाप्त किया था। बरनी ने उस समय की घटनाओं के प्रति स्वयं अपना एक विशिष्ट ऐतिहासिक सिद्धान्त प्रस्तुत किया था।
नोट:- UGC ने इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (c) माना है।

93. निम्नलिखित में से बरनी की लेखन शैली के बारे में क्या सही है?

Correct Answer: (e) a & d
Solution:

बरनी अपने इतिहास द्वारा अपने समकालीन उच्चवर्ग का पथप्रदर्शन करना तथा अपने समकालीन शासकों के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करना चाहता था उसने अपने सहकर्मियों से भिन्न वंशगत और राजनीतिक के बजाए जीवन के पहलुओं जैसे-आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक और धार्मिक को उठाया। उसने मुहम्मद बिन तुगलक व फिरोजशाह तुगलक के शासनकाल के बारे में वर्णन किया है।

94. बरनी का तारिक-ए-फिरोज शाही लिखने का उद्देश्य था-

Correct Answer: (c) फिरोज शाह तुगलक को खुश करना
Solution:

बरनी ने अपनी कृति तारीख-ए-फिरोजशाही के माध्यम से इतिहास की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए इतिहासकार के कर्तव्य का भी उल्लेख किया है। इस इतिहास में उसने सुल्तान बलबन के राज्यकाल से लेकर फिरोज शाह तुगलक के राज्यकाल के प्रथम छह वर्षों तक का इतिहास लिखा है। इसी के माध्यम से इतिहास द्वारा अपने समकालीन उच्च वर्ग का प्रथ प्रदर्शन करके अपने समकालीन सुल्तान फिरोजशाह के समक्ष एक आदर्श रखना चाहता था।

95. मिन्हाज़ सिराज की पुस्तक का शीर्षक क्या है?

Correct Answer: (c) तबकात-ए-नासिरी
Solution:

मिन्हाज-उल-सिराज दिल्ली के मामलुक सल्तनत के प्रमुख इतिहासकार थे। उन्होंने दिल्ली के सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद के लिए तबकात-ए-नासिरी नामक पुस्तक को लिखा। इस पुस्तक में सिराज ने अपने धार्मिक विचारों, इस्लाम और मुस्लिम शासकों के लिए अपने ऐतिहासिक दृष्टिकोण के बारे में बताया।

96. निम्नांकित परिच्छेद को पढ़े और दिए गए प्रश्नों के उत्तर देंः

1857 का विद्रोह सिर्फ सिपाहियों के असंतोष से उपजी हुई चीज नहीं थी। वह वस्तुतः कंपनी के प्रशासन के विरूद्ध संचित शिकायतों, एक व्यापक असंतोष और विदेशी शासन के प्रति घृणा का परिणाम था। इसका सर्वाधिक महत्त्वपूर्णकारण आर्थिक शोषण, पारंपरिक आर्थिक ताने-बाने का संपूर्णविनाश और बड़ी संख्या में किसानों हस्तकारों व हथकरधा कारीगरों और पारंपरिक जमीदारों और प्रमुखों की निर्धनताथी। ब्रिटिश भूमि और राजस्व नीतियों के चलते बड़ी संख्यामें किसान भू स्वामियों की जमीने व्यापारियों और महाजनो केहाथों में चली गई और वे ऋण के बोझ तले दब गए। इसके अलावा, आम जनता प्रशासन के निचले स्तर पर भी व्याप्त भ्रष्टाचार से काफी पीड़ित थी। दुरूह न्यायिक तंत्र के कारण अमीर लोग गरीबों का दमन करते थे और वे अपनी निरंतर बढ़ती गरीबी से हताश थे। भारतीय का मध्य और उच्च वर्ग प्रशासन के उच्चतर पदों से अपनी बेदखली से परेशान था। भारतीय शासकों के विस्थापन से कला और संस्कृति कर्मियों तथा धार्मिक उपदेशकों पंडितों और मौलवियों का राज्य संरक्षण खत्म हो गया था और उन्होंने सरकार के विरूद्ध असंतोष को हवा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, इसके अतिरिक्त, 'हड़प सिद्धांत' के प्रयोग द्वारा देशी रियासतों के विलय की लार्ड डलहौजी की नीति से भी व्यापक क्षोभं था। अंततः ईसाई धर्म प्रचारकों की धर्मांत्रण संबंधी गतिविधियों ने आम जनता के मन में भय और शंकायें पैदा कर दी थी।
निम्नांकित में से सही विकल्प चुनेंः

Correct Answer: (b) ब्रिटिश भूमि और राजस्व नीतियों ने भारतीय किसानों को कर्जदार बना डाला
Solution:

1859 का विद्रोह सिर्फ सिपाहियों के असंतोष से उपजी हुई. चीज नहीं थी बल्कि कंपनी के प्रशासन के विरूद्ध संचित शिकायतों और व्यापक असंतोष तथा विदेशी शासन के प्रति घृणा का परिणाम था। इस समय ब्रिटिश भूमि और राजस्व नीतियों के चलते बड़ी संख्या में किसान भू-स्वामियों की जमीने व्यापारियों और महाजनों के हाथों में जाने से वे ऋण के बोझ तले दबते चले गए यह भी उनके विद्रोह के कारणों में शामिल है।

97. निम्नांकित में से कौन 1857 के विद्रोह का कारण नहीं था?

Correct Answer: (e) *
Solution:

1857 के विद्रोह होने के अनेक कारण है-
1. आर्थिक शोषण, पारंपरिक आर्थिक तने बाने का सम्पूर्ण विनाश।
2.दुरूह न्यायिक तंत्र के कारण
3. भारतीय समाज का मध्य और उच्च वर्ग प्रशासन के उच्चतर पदों
से अपनी बेदखली से परेशान थे।
4. चर्बी वाले कारतूस का मुद्दा
5. सिपाहियों का धार्मिक एवं जातिगत भावना
6. राजनीतिक कारण जैसे- देशी रजवाड़ो का पतन, सहायक संधि, व्यपगत की नीति, अवध का विलय ।
इसका उत्तर यू.जी.सी.ने पहले (d) सही माना था बाद में इस प्रश्न को हटा दिया।

98. निम्नांकित में से किसने 'हड़प सिद्धांत' की नीति का प्रयोग किया?

Correct Answer: (c) लॉर्ड डलहौजी
Solution:

लार्ड डलहौजी की 'हड़प की नीति' ने 1857 के विद्रोह में प्रमुख भूमिका निभाई। इसके तहत वह भारत की प्राकृतिक सीमाओं तक अंग्रेजी राज्य का विस्तार कर दिया। डलहौजी द्वारा विलय किए गए राज्य-सतारा (1848 ई.) जैतपुर, संभलपुर (1849 ई.) बघाट (1850), उदयपुर (1852), झाँसी (1853) नागपुर (1854) करौली (1855) थे।

99. निम्नांकित में से कौन 1857 के विद्रोह को सिर्फ 'सिपाहियों की बगावत' मानते हैं?

Correct Answer: (b) जॉन डब्ल्यू. के
Solution:

जॉन विलियम केई एक ब्रिटिश सैन्य इतिहासकार सिविल सेवक और सेना अधिकारी थे। सैन्य इतिहास पर उनके द्वारा किए गए प्रमुख कार्यों पर भारत में 'द हिस्ट्री ऑफ सिपाही युद्ध' पुस्तक को लिखा गया। वर्ष 1844 में उन्होंने कलकत्ता रिव्यू शुरू किया तथा वर्ष 1856 में उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी की सिविल सेवा में प्रवेश किया। इन्होंने वर्ष 1857 के विद्रोह को सिर्फ 'सिपाहियों की बगावत' मानते थे। उन्होंने भारतीय मामलों से संबंधित कई कार्यों का संपादन भी किया, एक आशावादी के निबंध लिखे (लंदन 1870) और आवधियों के लिए लगातार योगदान दिया था।

100. 'हड़प सिद्धांत' के तहत निम्नांकित में से किस रियासत का विलय नहीं किया गया था?

Correct Answer: (d) अवध
Solution:

लार्ड डलहौजी की 'हड़प नीति' ने वर्ष 1857 के विद्रोह को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई। इसके द्वारा वह भारत की प्राकृतिक सीमाओं तक अंग्रेजी राज्य का विस्तार कर दिया। हड़प नीति के तहत शामिल राज्य- सतारा (1848) जैतपुर, संभलपुर (1849) बाघाट (1850) उदयपुर (1852) झाँसी (1853) नागपुर (1854) करौली (1855) अवध (1856) थे। परन्तु उस समय अवध का प्रथम नवाब वाजिद अली शाह था। 1848 ई. में कर्नल स्लीमैन की अवध क्षेत्र के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई इसके तहत अवध में चारों तरफ अव्यवस्था फैली हुई थी। जिसे उसने अराजकता की संज्ञा दी। कुशासन का सारा दोष नवाज वाजिद अलीशाह के सिर पर डाल दिया आगे चलकर 1854 में जेम्स आउट्रम की रिपोर्ट के आधार पर कुशासन का आरोप लगाकर अवध राज्य (1856) को लार्ड डलहौजी ने ब्रिटिश शासन में मिला लिया।