Solution:बाबर की आत्मकथा संस्मरण का नाम 'तुजुक-ए-बाबरी' है, जो बाबर ने तुर्की भाषा में लिखा है। इसका सर्वप्रथम फारसी भाषा में अनुवाद शेख जेतुद्दीन ख्वाजा ने किया था, लेकिन अकबर के समक्ष फारसी भाषा में अनुवाद करने वाले विद्वान अर्दुरहीम खानखाना थे। इनके पिता बैरम खान मुगल बादशाह अकबर के संरक्षक थे। इनकी मृत्यु के पश्चात रहीम को अकबर ने अपने नवरत्नों में शामिल में किया वे “मिर्जा खान" की उपाधि प्रदान की। इन्होंने बाबर की आत्मकथा “तुजुके बाबरी" का फारसी में अनुवाद किया। इन्हें अरबी, तुर्की, फारसी, (तुर्की भषा) संस्कृत और हिन्दी भाषा का भी ज्ञान था।