यू.जी.सी. NTA नेट परीक्षा दिसम्बर – 2019 (इतिहास)

Total Questions: 100

21. 1913 में किसने निम्नांकित टिप्पणी की थी:

"भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कोई भारतीय नहीं कर सकता था .....यदि किसी भारतीय ने ऐसा कोई अखिल भारतीय आंदोलन शुरू किया होता तो भारत के अधिकारियों ने आंदोलन को अस्तित्व में ही नहीं आने दिया होता। उन दिनों राजनैतिक आंदोलन को लेकर इतना अविश्वास था कि यदि कांग्रेस के संस्थापक एक अंग्रेज नहीं हुए होते तो प्राधिकारियों ने आंदोलन को कुचलने का तत्काल कोई रास्ता ढूंढ लिया होता।" उचित विकल्प चुनेंः

Correct Answer: (d) गोपाल कृष्ण.गोखले
Solution:

गोपालकृष्ण गोखले एक स्वतंत्रता सेनानी समाजसेवी विचारक एवं सुधारक थे। ये राष्ट्रपिता महात्मा गाधी के राजनीतिक गुरू थे। इन्होंने वर्ष 1913 में कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कोई भारतीय नहीं कर सकता था क्योंकि उनका मानना था कि उन दिनों राजनीतिक आन्दोलन को लेकर इतना अविश्वास था कि यदि कांग्रेस के संस्थापक एक अंग्रेज नहीं हुए होते तो प्राधिकारियों ने आंदोलन को कुचलने का तत्काल कोई रास्ता ढूँढ लिया होता। गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 ई. में 'सर्वेन्ट्स ऑफ इण्डिया सोसायटी' की स्थापना की।

22. निम्नलिखित घटनाओं को कालक्रम से व्यवस्थित कीजिए:

(A) सिकन्दर का भारत से वापस जाना।
(B) पर्सीपोलिस का दहन ।
(C) सिकन्दर द्वारा हिन्दुकुश के पार पूर्वी ईरान पर विजय ।
(D) सिकन्दर के साम्राज्य का त्रिपैरेदिसस में विभाजन ।
निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (d) (B), (C), (A), (D)
Solution:

पर्सिपोलिस ईरान के हखामनी साम्राज्य का एक श्रेष्ठ शहर व राजधानी था। डेरियस प्रथम (ई.पू. 522-486) के काल में यह महान शहर था। सिकन्दर ने इसी शहर को जलाने के साथ पूर्वी दिशा में विजय अभियान प्रारम्भ किया। अन्ततः ई.पू. 327 में सिकन्दर ने हिन्दुकुश के पार पूर्वी ईरान पर आधिपत्य स्थापित कर लिया। अपने सेनानायकों व विपरीत परिस्थितियों में सिकन्दर ने ई. पू. 326 में भारत से वापस जाने की योजना बनायी। सिकन्दर की मृत्यु के पश्चात ई.पू. 323 में बेबीलोनिया की त्रिपैरेदिसस में उसके साम्राज्य के विभाजन हेतु समझौता हुआ जो आगे कई चरणों में पूरा हुआ।

23. आरंभिक 13वीं शताब्दी में बिहार और बंगाल को मिलाकर एक स्वायत्त राज्य की स्थापना निम्नांकित में से किसने की थी?

Correct Answer: (b) मुहम्मद बख्तियार खिल्जी
Solution:

मुहम्मद गोरी के सेनापतियों में मुहम्मद बख्तियार खिलजी (गाजी इख्तियार) ने पूर्वी भारत में बंगाल बिहार तक अपने अभियान को चलाया। उस समय बिहार बंगाल क्षेत्र पर सेन वंश के शासक लक्ष्मण सेन ने उसका विरोध किया। बख्तियार खिलजी ने 1202-03 ई. में बिहार को जीता तथा वहाँ स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय को जलाकर नष्ट कर दिया तथा लक्ष्मण सेन को पराजित कर बंगाल व बिहार क्षेत्रों को जीतकर एक प्रांत के रूप में संगठित किया।

24. जैन ग्रन्थ भगवती सूत्र के अनुसार काशी और कोशल के कितने गणराज्य पूर्वी भारत के शक्तिशाली महासंघ के अंग थे, जिन्होंने मगध के राजा अजातशत्रु का विरोध किया था?

Correct Answer: (c) 18
Solution:भगवती सूत्र जैन धर्म का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। इसमें जैन धर्म के सिद्धान्तों के अतिरिक्त स्वर्ग और नरक के विषय में विस्तृत वर्णन किया गया है। भगवती सूत्र के अनुसार, काशी और कोशल के 18 गणराज्य, जो पूर्वी भारत के शक्तिशाली महासंघ  के अंग थे इन्होंने मगध के राजा अजातशत्रु का विरोध किया था। इसमें महावीर स्वामी का जीवन चरित तथा 16 महाजनपद का भी उल्लेख मिलता है।

25. भारत के बारे में मेगस्थनीज़ के मौलिक विवरण खो गए हैं। उनके कुछ संस्मरण निम्नलिखित में से किसके वृत्तांतों में संरक्षित किए गए हैं?

(A) एरियन
(B) डिओडोरस
(C) हेलिओडोरम
(D) हेरोडोटस
सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (d) केवल (A) और (B)
Solution:

प्राचीन यूनानी इतिहासकार डियोडोरस और एरियन के मगध साम्राज्य के बारे में दिए गए विवरण मेगास्थनीज के बाद के माने गए। डियोडोरस के अनुसार मगध के राजधानी नगर 'पालिब्रोथा' (पाटलिपुत्र) की स्थापना हेराकल्स ने की थी जबकि अलेक्जेंडर कनिंघम ने पा‌िलपुत्र नगर का निर्माण कार्य अजातशत्रु के राज्यकाल में आरम्भ हुआ माना। स्ट्रेबो, एरियन, डायोडोरस, प्लिनी, प्लूटार्क आदि यूनानी इतिहासकारों ने चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के बारे में वर्णन किया था। आगे चलकर सेल्यूकस के राजदूत के रूप में मेगास्थनीज ने मौर्य काल का विस्तृत वर्णन किया हुआ है।

26. नीचे दो कथन दिए गए है, जिसमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे के तर्क (R) कहा गया है।

अभिकथन (A): गर्व, अहंकार, सहानुभूति, विद्वेष, व्यक्तिगत प्रतिद्वन्द्विता, राजनीतिक मतभेद, सामाजिक विभेद, धार्मिक विवाद या देशभक्तिपूर्ण भावना किन्हीं व्यक्तियों को मूल अभिलेखों को विकृत बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
तर्क (R) : विद्वता और राजनीतिक वक्तव्यों के बीच एक घूसर क्षेत्र बना रहता है, जो संभवतः अन्यों की तुलना में इतिहासकारों को अधिक प्रभावित करता है क्योंकि उनका चिरकालिक रूप से राजनीतिज्ञों के वैध दावों के लिए उपयोग किया जाता रहा है।
उपर्युक्त दोनों कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनों सही हैं लेकिन (A) की सही व्याख्या (R) नहींहै।
Solution:

किन्ही व्यक्तियों के मूल अभिलेखों को विकृत बनाने के लिए गर्व, अहंकार, सहानुभूति, व्यक्तिगत प्रतिद्वन्द्विता, राजनीतिक मतभेद, धार्मिक विवाद आदि प्रेरित करते है जो विद्वता और राजनीतिक वक्तव्यों के बीच एक घूसर क्षेत्र बनाये रखता है। यह इतिहासकारों को अत्यधिक प्रभावित करता है क्योंकि उनके विचार चिरकालिक रूप से राजनीतिज्ञों के वैध दावों के लिए उपयोग किया जाता है। इस प्रकार कथन Aऔर र दोनों सही है लेकिन Aकी सही व्याख्या R नहीं कर रहा हैं।

27. आधुनिक संगीत के विषय में निम्नांकित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (d) संगीत में नव विकसित रूचि, इसका अभ्यास और प्रस्तुति पूर्णतः राष्ट्रवादी आदर्शों से प्रेरित थी।
Solution:

संगीत शब्द के अंतर्गत गायन, वादन एवं नृत्य इन तीनों कलाओं का समावेश माना गया है। संगीत को इतिहास की सभ्यता और संस्कृति के विकास से अलग नहीं किया जा सकता है। उन्नीसवीं सदी में दरबारी संरक्षण में कमी के साथ ही एक नए शहरी पश्चिमी शिक्षा प्राप्त वर्ग के उदय के द्वारा शास्त्रीय संगीत को दरबारों और मंदिरों से निकालकर एक नए सांस्कृतिक परिवेश का द्योतक बनाया। इस नए सांस्कृतिक परिवेश ने संगीत की संरचना और रूपों में अत्यधिक बदलाव किए। आगे चलकर आधुनिक संगीत युग में इसे नए तरीके से परिभाषित पुनर्गठित और पोषित किया गया। संगीत को विकसित करने में सामाजिक, राजनीतिक व राष्ट्रवादी आदर्शों का योगदान माना गया।

28. भारत पर पाश्चात्य विचारों के प्रभाव के संदर्भ में निम्नांकित कथनों में से कौन सा सही है?

(A) अंग्रेजी शिक्षा ने पाश्चात्य विचारों के असीम द्वार खोल दिए जिन्होंने प्रारम्भ में उन्हें अभिभूत कर दिया था। (B) अंग्रेजी शिक्षा के माध्यम से आई पाश्चात्य विचारों की स्वीकृति ब्रिटिश शासन की स्वीकृति के समानार्थी थी।
(C) इसने तुरंत राजनीतिक सत्ता के खिलाफ राजनीतिक चेतना व प्रतिरोध को जन्म दिया।
(D) इसने तर्कवाद की भावना को जागृत किया जिसके कारण हठधर्मी सिद्धान्त की निरकुंशता और परम्परागत सत्ताओं, विश्वासों व प्रथाओं के खिलाफ मानसिक विद्रोह हुआ।
निम्नलिखित में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल (A) व (D)
Solution:

भारत में एक राजनीतिक सत्ता बनने के साथ ही ये आवश्यक हो गया कि उन्हें इस प्रकर के लोगों की आवश्यकता है। जो उनके सिद्धान्तों को आगे ले जा सके। प्रारम्भ में अंग्रेजी शिक्षा ने पाश्चात्य विचारों के माध्यम से उच्च वर्ग को अभिभूत कर दिया। ये प्रभाव ब्रह्मसमाज, एशियाटिक सोसायटी आदि में प्रस्फुटित होता है। तर्कवाद की भावना के विकसित होने से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में आयी कुप्रथाओं व निरंकुशता को चुनौती मिली इसने हठधर्मिता को भी चोट पहुँचाई। इसके बावजूद ये कहना तर्कसंगत नहीं होगा कि अंग्रेजी शिक्षा के माध्यम से आयी पाश्चात्य विचारों की स्वीकृति ब्रिटिश शासन की स्वीकृति के समानार्थी थी क्योंकि कोई सत्ता हठधर्मिता पर ही निर्भर होती है व इस शिक्षा ने इसका विरोध किया। इस शिक्षा ने सर्वप्रथम धार्मिक विनारों व सामाजिक कुप्रथाओं को लेकर चेतना व प्रतिरोध को जन्म दिया न कि राजनीतिक चेतना के प्रति ।

29. आरंभिक तमिल साहित्य निम्नांकित में से किसका साक्ष्य प्रस्तुत करता है?

Correct Answer: (a) जाति प्रथा की अनुपस्थिति
Solution:

दक्षिण भारत के क्रमबद्ध इतिहास की जानकारी का सर्वप्रमुख स्रोत है जो तमिल भाषा में लिपिबद्ध है। तमिल समाज में जाति व्यवस्था का प्रमाण नहीं मिलता है। दक्षिण में आर्य सभ्यता के विस्तार का उल्लेख तमिल साहित्य में मिलता है जिसके मुख्य विस्तारकर्ता ऋषि अगस्त्य और कौण्डिन्य थे। संगम साहित्य एक जटिल राजनीतिक एवं आर्थिक तंत्र का उल्लेख करते है। संगम कालीन समाज आर्थिक गतिविधियों के आधार पर 4 वर्गों यथा- अण्ड्यार (ब्राह्मण), अरसर (शासक वर्ग), वेनिगर (वणिक) तथा वेल्लार (किसान) में विभाजित थे।

30. भारतीय उपमहाद्वीप के निम्नलिखित में से किस नवपाषाणकालीन स्थल पर फसल उत्पादन का प्राचीनतम साक्ष्य पाया गया है?

Correct Answer: (d) मेहरगढ़
Solution:

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित मेहरगढ़ को पूर्व नवपाषाण काल से हड़प्पाकाल तक का प्रमुख स्थान माना गया है। यहाँ से गेहूँ की तीन एवं जौ की दो किस्मों की खेती किए जाने के प्रमाण मिले है। इसे "बलूचिस्तान की रोटी की टोकरी" कहा जाता है। अतः इसे ही नवपाषाणकालीन स्थल पर फसल उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
विशेष-उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में स्थित 'लहुरादेव' से भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि किये जाने के प्राचीनतम साक्ष्य मिले है। यहाँ से 8000-9000 ई.पू. से चावल उत्पादन का साक्ष्य मिला है।