यू. जी. सी. NTA नेट परीक्षा दिसम्बर 2020/जून 2021 राजनीति शास्त्र (SHIFT-II)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

सारांशतः व्यक्तियों के लिए आंतरिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की राज्यों के भीतर दखल देने की बढ़ती तत्परता बिनाशर्त संप्रभुता से हटकर वैश्विक शासन की ओर आगे बढ़ने का संकेत देती है। इस दिशा में आगे बढ़ने के कुछ लक्षण दिख रहे हैं परन्तु राज्य संप्रभुता और अहस्तक्षेप के सिद्धांत अभी भी महत्वपूर्ण हैं। 'इन बिन्दुओं पर कोई स्पष्ट आम सहमति नहीं है।

फिर इस विचार के लिए कुछ समर्थन हैं कि यू एन चार्टर के अनुच्छेद 2 (7) की सटीक व्याख्या की जानी चाहिए की किसी राज्य की स्पष्ट सहमति के बिना उस राज्य में कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता है। चीनी लोकतांत्रिक गणराज्य की सरकार द्वारा समर्थित दलीलों में संभवतः यह पक्ष बार-बार दिखता है।

दूसरे पक्ष का विश्वास है कि मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए किसी देश के भीतर हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर खतरा के आधार पर ही न्यायसंगत है। शरणार्थियों की अधिक संख्या या यह विनिर्णय कि अन्य राज्य सैन्य हस्तक्षेप कर सकते हैं, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरें का साक्ष्य है।

कुछ उदारवादी यह दलील देते हैं कि यह शर्त लचीली है और कभी भी विवेकपूर्ण लगने पर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप को न्यायसंगत ठहराया जा सकता है। दृढ़तर पक्ष के लिए भी कुछ समर्थन है। सितंबर 1999 में यू एन के महासचिव कोफी अन्नान ने यह घोषणा की कि व्यक्तिगत संप्रभुता उतना ही महत्वपूर्ण हो सकती है जितनी राष्ट्रीय संप्रभुता।

संयुक्त राष्ट्र किस आधार पर राज्य के मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है?

Correct Answer: (a) राज्य सरकार की स्पष्ट सहमति के आधार पर
Solution:

संयुक्त राष्ट्र राज्य सरकार की स्पष्ट सहमति के आधार पर राज्यों के मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है तथा मानवाधिकारों की रक्षा के लिए राज्यों को सामूहिक निर्देश भी दे सकता है क्योंकि राष्ट्रीय गरिमा के साथ व्यक्ति की गरिमा का भी महत्त्व होता है।

92. राज्य में हस्तक्षेप के मामले में संयुक्त राष्ट्र को निम्नलिखित में से किस पहलू से संबंधित प्रावधानों को अनुपालन करना चाहिए?

Correct Answer: (a) घरेलू अधिकार क्षेत्र
Solution:

राज्य में हस्तक्षेप के मामले में संयुक्त राष्ट्र को घरेलू अधिकार क्षेत्र से संबंधित प्रावधानों का अनुपालन करना चाहिए।

93. संयुक्त राष्ट्र का नया दायित्व किस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की स्थापना करती है?

Correct Answer: (b) वैश्विक शासन प्रदान करना
Solution:

संयुक्त राष्ट्र का नया दायित्व वैश्विक शासन की ओर आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।

94. संयुक्त राष्ट्र किस आधार पर राज्य के मामले में हस्तक्षेप करने के लिए तत्पर है?

Correct Answer: (d) आंतरिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए
Solution:

संयुक्त राष्ट्र व्यक्तियों के लिए आंतरिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए राज्य के मामले में हस्तक्षेप करने को तत्पर है।

95. संयुक्त राष्ट्र संघ के हस्तक्षेप के आधार के संबंधों में कुछ वर्गों की आम भावना क्या है?

Correct Answer: (b) मानवाधिकारों का उल्लंघन
Solution:

संयुक्त राष्ट्र संघ के हस्तक्षेप के आधार पर कुछ वर्गों की आम भावना है कि मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए किसी देश के भीतर हस्तक्षेप अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर खतरा के आधार पर ही न्यायसंगत है।

96. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ें और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर देंः

1960 के दशक से, लैटिन अनुभव से निर्भरता के सिद्धांत को सामान्यीकृत करके इसे शेष विश्व पर लागू किया गया। वालरस्टेन (1974, 1980, 1989) ने एक विश्व आर्थिक व्यवस्था के अपने सिद्धांत को प्रतिपादित किया जो संकेन्द्रित वलयों-पश्चिम के केंद्रीय देशों, एक अर्ध-परिधि और परिधि इतिहास द्वारा संभव बनाये गये विभेदीकरण को शामिल करता है।

केंद्र में स्थित देश सर्वप्रथम औद्योगीकृत हुए और शेष विश्व पर एक निर्णायक बढ़त प्राप्त किया। परिधीय राज्य वे हैं जो केन्द्रीय देशों की आवश्यकताओं को संतुष्ट करते हैं और जिन्हें जानबूझकर उच्च औद्योगिक कुशलताओं का विकास करने से रोका जाता है।

'अर्ध-परिधि' राज्य मध्य श्रेणी में आते हैं जो किसी भी दिशा में जा सकते हैं और इनमें वे केन्द्रीय राज्य भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी केंद्रीय राज्य की स्थिति खो दी हो। संपूर्ण व्यवस्था श्रम के एक अंतर्राष्ट्रीय विभाजन को प्रतिबिम्बित करती है। इस व्यवस्था की मुख्य प्रवृत्ति अतिरिक्त मूल्यों का परिधि क्षेत्र से केंद्रीय राज्यों की ओर हस्तांतरण करना है।

पी.पी.रे (1971, 1973), एक फ्रांसीसी समाजशास्त्री ने उत्पादन के साधनों का अभिव्यक्तिरण की एक परिशुद्ध अवधारणा को आगे बढ़ाते हुये इसे द्वैतवाद के विचार से जोड़ा। उन्होंने तर्क किया कि विश्व के कुछ निश्चित क्षेत्रों में अल्पविकास वहाँ के देशज समाज की प्रवृत्ति के कारण अत्यधिक था। पश्चिम में, सामंती उच्च वर्ग के अभिवृत्ति के कारण सामंतवाद ने पूंजीवाद को जन्म दिया।

शेष विश्व में, जिसने यूरोपीय सामनवाद का अनुभव नहीं किया था, व्यापार और निवेश के माध्यम से एक समाज का विश्व अर्थव्यवस्था के रूप में एकीकरण का परिणाम मौजूदा शासित वर्गों को मजबूत करने, पूँजीवाद के विस्तार के उनके प्रतिरोध के बल देने के रूप में हुआ। कैंपारासों और बहरूर (1981) ने कहा है: निर्भरता संरचनात्मक स्थिति से संबंधित है जिसमें, केवल एक बाह्य सहायता पर एक अनन्य (अथवा सीमित) विश्वास के बिना एक स्वस्थ एकीकृत व्यवस्था अपने आर्थिक चक्र को पूरा नहीं कर सकती।

एक एकीकृत व्यवस्था के रूप में निर्भरता के लिये, इनमें से कौन जरूरी है?

Correct Answer: (a) बाह्य योगदानकारी कारक
Solution:

एक एकीकृत व्यवस्था के रूप में निर्भरता के लिए बाह्य योगदान कारक जरूरी है।

97. निर्भरता सिद्धांत में अर्थपरिधि की अवधारणा को किसने दिया?

Correct Answer: (b) इमैन्युल वालरस्टेन
Solution:

वालरस्टेन ने एक विश्व आर्थिक व्यवस्था के अपने सिद्धांत को प्रतिपादित किया जो संकेन्द्रित वलयो, पश्चिम के केंद्रीय देशों, एक अर्ध परिधि और परिधि इतिहास द्वारा संभव बनाए गए विभेदीकरण को शामिल करता है।

98. वालरस्टोन के अनुसार विश्व आर्थिक व्यवस्था इनमें से कौन सी अवस्था को व्यक्त करती है?

Correct Answer: (b) श्रम का अंतर्राष्ट्रीय विभाजन
Solution:

वालरस्टोन के अनुसार, संपूर्ण विश्व व्यवस्था श्रम के एक अंतर्राष्ट्रीय विभाजन को प्रतिबिम्बित करती है।

99. गैर पश्चिमी देशों की विश्व आर्थिक व्यवस्था में शामिल होने का इनमें से कौन सा परिणाम होता है?

Correct Answer: (c) उनका पूंजीवाद के विस्तार का विरोध करने की क्षमता बढ़ना
Solution:

गैर पश्चिमी देशों की विश्व आर्थिक व्यवस्था में शामिल होने का परिणाम उनका पूंजीवाद के विस्तार का विरोध करने की क्षमता बढ़ने के रूप में होता है।

100. उत्पादन के साधनों का अभिव्यक्तिकरण की अवधारणा इनमें से किसकी व्याख्या करती है?

Correct Answer: (d) विश्व के कुछ देशों में अल्पविकास की स्थिति
Solution:

फ्रांसीसी समाजशास्त्री पी.पी. रे ने उत्पादन के साधनों का अभिव्यक्तिकरण की अवधारणा को प्रतिपादित किया है जिसके अनुसार विश्व के कुछ निश्चित क्षेत्रों में अल्पविकास वहाँ के देशज समाज की प्रवृत्ति के कारण अधिक था।