Solution:जय प्रकाश नारायण ने 5 जून, 1974 को पटना के गाँधी मैदान से तात्कालिक इन्दिरा गाँधी सरकार की अस्वीकार्य नीतियों व सर्वसत्तावाद के खिलाफ 'सम्पूर्ण क्रांति' का आह्वान किया। इसे 'प्रिजन डायरी' नामक उनकी पुस्तक में संपूर्ण क्रांति पर उनकी टिप्पणी में ढूंढ़ा जा सकता है।
यह एक अंहिसात्मक क्रांति का आगाज था जिसका ध्येय व्यक्ति व समाज में परिवर्तन कर विद्यमान विकृत व्यवस्था की जगह सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक शैक्षणिक सांस्कृतिक व आध्यात्मिक व्यवस्थाओं को नवीन रूप देना था।
लोकतंत्र के आधार के रूप में नैतिक समाज की उनकी तलाश उनकी सपूर्ण क्रांति की निर्देशक शक्ति थी। समग्र क्रांति का उद्देश्य राजनीतिक व आर्थिक सत्ता का विकेन्द्रीकरण था न कि केन्द्रीकरण।