Solution:आधुनिक उदारवाद को सकारात्मक उदारवाद भी कहा जाता है। परंपरागत उदारवाद की अवधारणा ने पूँजीवाद को पोषित किया जिसके कारण समाज दो वर्गों पूंजीपति वर्ग और मजदूर वर्ग में बंट गया। परम्परागत उदारवादी सरकार गरीबों के कल्याण हेतु प्रतिबद्ध नहीं थी जिसके कारण मार्क्सवाद और साम्यवाद का जन्म हुआ।
इन दो विचारधाराओं से अपने अस्तित्व पर आये संकट के डर से उदारवाद ने लोक कल्याणकारी राज्य का समर्थन किया और निजी सम्पत्ति पर अंकुश लगाने की वकालत की। जे.एस. मिल ने उदारवाद के सकारात्मक स्वरूप की इस विचारधारा का समर्थन टी.एच.ग्रीन, लास्की, मैकाइवर, हॉबहाऊस आदि ने किया।
सकारात्मक उदारवाद की निम्न विशेषताएँ हैं-
(i) कल्याणकारी राज्य पर बल
(ii) व्यक्ति के सर्वांगीण विकास पर बल
(iii) सकारात्मक स्वतंत्रता, समानता व अधिकारों पर बल
(iv)राज्य के सामाजिक हित के संदर्भ में हस्तक्षेप का समर्थन