Solution:आदेशों की स्वीकृति के सम्बन्ध में चेस्टर बर्नार्ड ने उदासीनता के क्षेत्र की अवधारणा का प्रतिपादन किया है। उसके अनुसार स्वीकृति योग्यता की दृष्टि से समस्त आदेशों को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है-
(i) कुछ आदेश ऐसे होते हैं जो स्वीकृति योग्य नहीं होते अर्थात् अधीनस्थों द्वारा उनका पालन नहीं किया जाता है।
(ii) कुछ आदेश तटस्थता की पंक्ति पर होते हैं अर्थात् वे मुश्किल से ही स्वीकार या अस्वीकार किए जाते हैं।
(iii) तीसरी श्रेणी में ऐसे आदेश होते हैं जो अधीनस्थों द्वारा निर्विवाद रूप से स्वीकार कर लिए जाते हैं। बर्नार्ड के अनुसार,
उदासीनता के क्षेत्र में ये तीसरे प्रकार के आदेश ही सम्मिलित किए जाते हैं। दूसरे शब्दों में, जिन आदेशों के प्रभावों से व्यक्ति परिचित होता है, उनके प्रति प्रायः उदासीन हो जाता है। ऐसे आदेश उसके उदासीनता के क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं।