Solution:हीगल के अनुसार, राज्य निरंकुश, सर्वशक्तिमान और अभ्रान्त है। राज्य तो पृथ्वी पर ईश्वर का अवतार है। वह पृथ्वी पर अस्तित्वमान एक दैवीय विचार है।
हीगल ने महिलाओं को कमतर माना है, उसके अनुसार महिलाओं की तार्किक क्षमता कम होती है। हीगल के अनुसार, यदि स्त्री सार्वजनिक जीवन में आती है तो यह बड़ा ही हानिकारक होगा क्योंकि उनके विचार सोचे समझे नहीं होते। वे सार्वजनिक क्षेत्र में ऐसी नैतिकता तथा न्याय विचार नहीं लाएंगी जो परिवार के अनुरूप हो।
वे निष्पक्ष नहीं हो सकती और सैद्धान्तिक निष्कर्ष को निकालने की क्षमता उनमें नहीं होती। हीगल ने नागरिक समाज की अवधारणा को अस्वीकार नहीं किया बल्कि उसके अनुसार, परिवार एवं राज्य के बीच नागरिक समाज एक महत्वपूर्ण रचना है। हगल के अनुसार, नागरिक समाज में आपस में तीन संबंधित पहलु होते हैं-
(i) जरूरतों की व्यवस्था
(ii) न्याय का प्रशासन
(iii) पुलिस और सहयोग की जरूरत
हीगल ने युद्ध का समर्थन करते हुए ऐतिहासिक विकास का एक माध्यम माना है। उसके अनुसार युद्ध जनता का नैतिक स्वास्थ्य बनाये रखता है।