Correct Answer: (d) यह वह दर है, जिस पर बैंक अपना धन आरबीआई के पास रखते हैं और संपार्श्विक प्राप्त करते हैं।
Solution:- रेपो दर वह दर है, जिस पर एक बैंक, RBI से कम अवधि पर ऋण प्राप्त करती है।
- अर्थात जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से धन उधार लेते हैं।
- मूल्य स्थिरता के साथ विकास के वृहद आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक नीति के स्वरूप को इंगित करने के लिए यह एकल नीति दर है।
- जबकि रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है, जिस पर RBI, बैकों से कम अवधि पर ऋण प्राप्त करती है।
- रेपो रेट की परिभाषा
- जब बैंकों के पास नकदी की कमी होती है, वे RBI से रेपो समझौते के तहत उधार लेते हैं
- RBI को प्रतिभूतियां संपार्श्विक के रूप में रखी जाती हैं।
- यह दर मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में तय की जाती है।
- गलत कथन की पहचान
- सबसे सामान्य गलत कथन यह है: "रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक RBI के साथ अपने धन रखते हैं
- संपार्श्व्विक प्राप्त करते हैं।" यह वर्णन वास्तव में रिवर्स रेपो रेट का है
- जहां बैंकों के पास अतिरिक्त नकदी होने पर वे RBI को उधार देते हैं
- RBI संपार्श्विक प्रदान करता है। रेपो रेट में उधार लेने वाला RBI नहीं, बल्कि बैंक होते हैं।
- अन्य संभावित गलत कथन
- कुछ प्रश्नों में अन्य विकल्प जैसे "रेपो रेट CRR या SLR जैसी जमा दर है
- भी गलत माने जाते हैं, क्योंकि CRR/SLR अनिवार्य जमा हैं, जबकि रेपो स्वैच्छिक उधार सुविधा है।
- एक और भ्रांति: "रेपो रेट केवल रात्रिकालीन ऋण पर लागू होती है"—यह आंशिक रूप से सही है
- लेकिन पूर्ण नहीं, क्योंकि यह विभिन्न अवधियों के लिए हो सकती है।
- प्रभाव और महत्व
- रेपो रेट बढ़ाने पर उधार महंगा होता है, जिससे बैंकों के ऋण ब्याज बढ़ते हैं
- मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है, लेकिन आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है।
- वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), हालिया नीतियों में इसे 5.5% तक कम किया गया था
- विकास को बढ़ावा मिले। रिवर्स रेपो (वर्तमान में रेपो से 0.5-1% कम) के साथ यह दरें तरलता कॉरिडोर बनाती हैं।
- अन्य संबंधित दरें
- रिवर्स रेपो रेट: RBI बैंकों से धन लेने की दर।
- स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF): बिना संपार्श्विक के जमा।
- मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): आपातकालीन उधार, रेपो से ऊंची।