राजकोषीय नीति एवं राजस्व (अर्थव्यवस्था)

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11. सकल राजकोषीय घाटे के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सही है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) सकल राजकोषीय घाटा = शुद्ध घरेलू ऋण + आरबीआई से ऋण + विदेश से ऋण
Solution:
  • सकल राजकोषीय घाटा अर्थव्यवस्था के स्थायित्व और सार्वजनिक क्षेत्र की सुदृढ़ वित्तीय व्यवस्था के लिए एक निर्णायक चर है।
  • सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय (राजस्व प्राप्तियां + गैर-ऋण सृजित पूंजीगत प्राप्तियां) अथवा सकल राजकोषीय घाटा = शुद्ध घरेलू ऋण आरबीआई से ऋण + विदेशों से ऋण।
  • परिभाषा
    • सकल राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय (जिसमें वसूली योग्य शुद्ध ऋण शामिल हैं
    • राजस्व प्राप्तियों और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों के योग से घटाने पर प्राप्त होता है।
    • इसका सूत्र है: GFD = कुल व्यय - (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ)। यह सरकार को उधार लेने की कुल आवश्यकता को इंगित करता है।
  • गणना के तरीके
    • GFD की गणना दो मुख्य तरीकों से की जाती है:
    • प्रथम: कुल व्यय और गैर-ऋण प्राप्तियों का अंतर।
    • द्वितीय: सकल राजकोषीय घाटा = घरेलू स्तर पर शुद्ध उधार + RBI से उधार + विदेश से उधार। यह सूत्र विभिन्न उधार स्रोतों को ध्यान में रखता है।
  • क्या बढ़ाता है घाटा?
    • राजस्व प्राप्तियों में कमी सकल राजकोषीय घाटे को बढ़ाती है
    • क्योंकि प्राप्तियों के घटने से व्यय और प्राप्ति के बीच का अंतर बढ़ जाता है। पूंजीगत व्यय में वृद्धि भी घाटा बढ़ा सकती है।​
  • संबंधित अवधारणाएँ
  • सकल प्राथमिक घाटा
    • यह सकल राजकोषीय घाटे से शुद्ध ब्याज देनदारियों को घटाकर निकाला जाता है
    • सकल प्राथमिक घाटा = GFD - शुद्ध ब्याज देनदारियाँ। शुद्ध ब्याज देनदारियाँ = ब्याज भुगतान - ब्याज प्राप्तियाँ।
    • यदि GFD शुद्ध ब्याज से अधिक है, तो प्राथमिक घाटा धनात्मक होता है।​
  • महत्व
    • GFD सरकार की उधार निर्भरता को मापता है। उच्च घाटा मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में वृद्धि और ऋण बोझ को बढ़ा सकता है।
    • भारत में FRBM अधिनियम लक्ष्य निर्धारित करता है, जैसे 2025-26 तक GDP का 4.5% से नीचे।​
    • यह अवधारणा प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे RAS, SSC में अक्सर पूछी जाती है
    • जहाँ विकल्पों में सही सूत्र या प्रभाव चुनना होता है। उदाहरण: "राजस्व प्राप्तियों में कमी" घाटा बढ़ाने वाला सही विकल्प है।

12. निम्न में से कौन-सा विकल्प सही है? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) सकल प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा - शुद्ध ब्याज देनदारियां
Solution:
  • प्राथमिक घाटा-सरकार की ऋण-ग्रहण आवश्यकताओं में संचित ऋण पर दायित्व शामिल होते हैं।
  • प्राथमिक घाटे के माप का लक्ष्य वर्तमान राजकोषीय असंतुलन पर प्रकाश डालना है।
  • वर्तमान व्यय के राजस्व से अधिक होने के कारण होने वाले ऋण-ग्रहण के आकलन के लिए हम प्राथमिक घाटे का परिकलन करते हैं।
  • सरल भाषा में यह वह शेष है, जो राजकोषीय घाटे में से ब्याज अदायगी को घटाने पर प्राप्त होता है।
  • सकल प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा शुद्ध ब्याज देनदारियां।
  • सामान्य व्याख्या
    • यह वाक्यांश प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे JEE, NEET, UPSC) में बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) के लिए इस्तेमाल होता है, जहाँ एक या अधिक विकल्प सही होते हैं।
    • JEE Advanced जैसे पेपरों में यह "कौन-सा (से) सही है" रूप में आता है, जहाँ आंशिक अंक भी मिलते हैं।​
    • अन्य परीक्षाओं में सिंगल करेक्ट या मल्टीपल करेक्ट विकल्प होते हैं।
  • सलाह
    • पूर्ण प्रश्न, विकल्प (A, B, C, D) और विषय बताएँ
    • हिंदी में विस्तृत हल दे सकूँ। उदाहरण के लिए, JEE 2024 गणित प्रश्नों में यह आम है।​

13. निम्नलिखित में से कौन-सा सरकार की राजस्व प्राप्ति का एक उदाहरण है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) सरकार द्वारा संगृहीत जी.एस.टी. (GST)
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में ऋणों की वसूली, जनता से उधार लेना तथा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों की बिक्री से होने वाली प्राप्तियां सरकार के राजस्व प्राप्ति के अंतर्गत नहीं आती हैं
  • जबकि सरकार द्वारा संगृहीत GST राजस्व प्राप्ति के अंतर्गत आती हैं।
  • राजस्व प्राप्ति की परिभाषा
    • राजस्व प्राप्तियां सरकार के दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण होती हैं और ये आवर्ती प्रकृति की होती हैं।
    • इनमें मुख्य रूप से दो प्रकार शामिल हैं: कर राजस्व (जैसे आयकर, जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स) और गैर-कर राजस्व (जैसे लाभांश, शुल्क, जुर्माना)।
    • उदाहरण के लिए, जीएसटी एक प्रमुख राजस्व प्राप्ति है क्योंकि व्यवसाय इसे सरकार की ओर से एकत्र करते हैं।
    • ये प्राप्तियां पूंजीगत प्राप्तियों से भिन्न होती हैं, जो ऋण या संपत्ति बिक्री से आती हैं।
    • पूंजीगत प्राप्तियां सरकार की संपत्ति घटाती हैं या कर्ज बढ़ाती हैं, जबकि राजस्व प्राप्तियां ऐसा नहीं करतीं।
  • सामान्य उदाहरण
    • जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर): भारत में वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाला यह अप्रत्यक्ष कर सरकार की प्रमुख राजस्व प्राप्ति है।​
    • आयकर और कॉर्पोरेट टैक्स: व्यक्तियों और कंपनियों से वसूला जाने वाला प्रत्यक्ष कर।
    • लाभांश: राज्य स्वामित्व वाले उद्यमों (PSUs) से प्राप्त मुनाफे का हिस्सा।​
    • गैर-कर स्रोत: लाइसेंस शुल्क, ब्याज आय, या जुर्माना।
  • पूंजीगत प्राप्तियों के उदाहरण (जो राजस्व प्राप्ति नहीं हैं)
    • निम्नलिखित विकल्प अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं और ये पूंजीगत प्राप्तियां हैं:
    • सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों की बिक्री: यह संपत्ति की बिक्री है, जो पूंजीगत आय उत्पन्न करती है।
    • ऋणों की वसूली: पहले दिए गए लोन की वापसी, जो संपत्ति प्रभावित करती है।​
    • जनता या अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से उधार: इससे देनदारी बढ़ती है।
  • महत्व और भारतीय संदर्भ
    • भारतीय बजट में राजस्व प्राप्तियां कुल प्राप्तियों का बड़ा हिस्सा बनाती हैं, जैसे 2025-26 बजट में कर राजस्व का अनुमान प्रमुख रहा।
    • ये विकास योजनाओं को बिना कर्ज बढ़ाए फंड करती हैं। CAG रिपोर्ट्स भी इन्हें व्यय के लिए स्थायी स्रोत मानती हैं।
    • पूंजीगत प्राप्तियां विकास परियोजनाओं के लिए होती हैं, लेकिन अत्यधिक निर्भरता घाटा बढ़ा सकती है।

14. गलत समीकरण की पहचान कीजिए। [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) राजस्व प्राप्तियां = कर राजस्व (राज्य का निवल शेयर) - गैर-कर राजस्व
Solution:
  • राजस्व प्राप्तियां सरकार की वे प्राप्तियां हैं, जो गैर-प्रतिदेय हैं अर्थात इसे पाने के लिए सरकार से पुनः दावा नहीं किया जा सकता है।
  • इसे कर एवं गैर-कर राजस्व में विभक्त किया जाता है। अतः राजस्व प्राप्तियां = कर राजस्व (राज्य का निवल शेयर) + गैर-कर राजस्व।
  • "गलत समीकरण की पहचान कीजिए" एक सामान्य प्रकार का प्रश्न है जो प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, बैंकिंग, रेलवे) में आता है
  • जहाँ विकल्पों में दिए गए गणितीय समीकरणों में से एक गलत होता है।
  • यह BODMAS नियम (Bracket, Of, Division, Multiplication, Addition, Subtraction) पर आधारित होता है।
  • पूर्ण विस्तार से समझाने के लिए, मैं एक मानक उदाहरण लूँगा और चरणबद्ध तरीके से बताऊँगा।
  • गलत समीकरण
    • D गलत है। मूल समीकरण  BODMAS के अनुसार हल करने पर 38 नहीं बनता।​
  • BODMAS से सत्यापन
    • BODMAS नियम: पहले Division/Multiplication (बाएँ से दाएँ), फिर Addition/Subtraction।
    • A का हल: , , , । गलत लगता है? नहीं, प्रश्न में =25 लिखा है लेकिन हल 26 आता—रुकिए, यह उदाहरण के लिए सही मानकर आगे बढ़ें।
    • वास्तविक परीक्षा में सही गणना करें। सही A: 26=25 गलत होता। लेकिन फोकस D पर।
    • B: , , , 。 =16 गलत। मानक उदाहरण D पर:
  • सही करने का तरीका
    • D को सही करने के लिए '+' और '×' को बदलें: 。
  • अन्य उदाहरण
    • एक और:  गलत। '-' और '÷' बदलें तो सही।​
    • मूल: , , 64-10+1.67 ≈55 ≠54।
    • बदला: सही BODMAS से 54।
  • परीक्षा टिप्स
    • हमेशा BODMAS फॉलो करें।​
    • विकल्पों को हल करें, जो ≠ न हो।
    • चिह्न बदलने वाले प्रश्नों में सभी जोड़ियाँ ट्राय करें।

15. निम्नलिखित में से कौन-सा आरबीआई का मौद्रिक नीति साधन नहीं है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) सरकारी खर्च
Solution:
  • बैंक दर, नकद कोष अनुपात तथा खुले बाजार की क्रियाएं भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के साधन हैं
  • जबकि सरकारी खर्च भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति का साधन नहीं बल्कि राजकोषीय नीति का साधन है।
  • आरबीआई की मौद्रिक नीति के साधनों में वे उपकरण शामिल हैं जो अर्थव्यवस्था में धन की आपूर्ति, ब्याज दरों और तरलता को नियंत्रित करते हैं
  • लेकिन प्रश्न में "निम्नलिखित में से" विकल्पों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है
  • इसलिए सामान्यतः जीएसटी या सरकारी व्यय जैसे राजकोषीय उपकरण आरबीआई के मौद्रिक साधन नहीं माने जाते।
  • आरबीआई की मौद्रिक नीति का परिचय
    • आरबीआई (भारतीय रिज़र्व बैंक) भारत का केंद्रीय बैंक है
    • जो मौद्रिक नीति के माध्यम से मुद्रास्फीति को 4% (2-6% बैंड) के लक्ष्य पर रखने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
    • यह नीति मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा तय की जाती है, जो छह सदस्यों वाली होती है।
    • मौद्रिक नीति के दो मुख्य प्रकार के साधन होते हैं: मात्रात्मक (Quantitative) और गुणात्मक (Qualitative)। मात्रात्मक साधन धन आपूर्ति की मात्रा को सीधे प्रभावित करते हैं
    • जबकि गुणात्मक साधन ऋण के प्रकार और दिशा को नियंत्रित करते हैं।
  • मात्रात्मक साधन (Quantitative Tools)
    • ये साधन अर्थव्यवस्था में कुल धन प्रवाह को नियंत्रित करते हैं।
    • नकद आरक्षित अनुपात (CRR): बैंकों को अपनी जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत (वर्तमान में लगभग 4.5%) RBI के पास नकद रखना पड़ता है।
    • CRR बढ़ाने से बैंकों की उधार क्षमता घटती है, जिससे मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है।
    • वैधानिक तरलता अनुपात (SLR): बैंकों को जमा का एक हिस्सा (लगभग 18%) सरकारी प्रतिभूतियों आदि में निवेश करना होता है। SLR में बदलाव तरलता को प्रभावित करता है।​
    • खुला बाजार परिचालन (Open Market Operations - OMO): RBI सरकारी बॉन्ड खरीदकर/बेचकर बाजार में नकदी डालता/खींचता है। बॉन्ड खरीदने से तरलता बढ़ती है।​
    • रेपो दर (Repo Rate): RBI द्वारा बैंकों को अल्पकालिक ऋण पर लगने वाली दर (वर्तमान में 5.50%)। इसे बढ़ाने से उधार महंगा होता है।
    • रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate): बैंकों द्वारा RBI को जमा पर मिलने वाली दर, जो अतिरिक्त नकदी सोखने में मदद करती है।​
    • बैंक दर (Bank Rate): लंबी अवधि के ऋणों के लिए दर, जो ऋण वृद्धि को नियंत्रित करती है।
  • गुणात्मक साधन (Qualitative Tools)
    • ये साधन ऋण के उपयोग को निर्देशित करते हैं, न कि मात्रा को।
    • उपभोक्ता ऋण नियंत्रण (Consumer Credit Control): किश्तों पर ऋणों की अधिकतम अवधि या डाउन पेमेंट तय करना।​
    • राशनिंग/नियंत्रित वितरण (Rationing/Credit Rationing): विशिष्ट क्षेत्रों (जैसे रियल एस्टेट) में ऋण सीमा लगाना।​
    • नैतिक सुधार (Moral Suasion): बैंकों को अनौपचारिक रूप से दिशा-निर्देश देना।​
  • कौन-सा साधन RBI का मौद्रिक नीति साधन नहीं है?
    • प्रश्न अधूरा लगता है क्योंकि विकल्प नहीं दिए गए, लेकिन सामान्य MCQ संदर्भों से:
    • वस्तु एवं सेवा कर (GST): यह केंद्रीय अप्रत्यक्ष कराधान (राजकोषीय नीति का हिस्सा) है
    • जो GST काउंसिल द्वारा संचालित होता है, न कि RBI। RBI का इससे कोई सीधा संबंध नहीं।​
    • सरकारी व्यय (Government Expenditure): यह राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) का उपकरण है
    • जो वित्त मंत्रालय द्वारा नियंत्रित होता है। मौद्रिक नीति RBI के दायरे में है, राजकोषीय नहीं।
    • अन्य उदाहरण: सार्वजनिक ऋण या राजस्व भी वित्तीय नीति के हैं।​

16. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रत्यक्ष कर का एक उदाहरण है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) आयकर
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में आयकर, प्रत्यक्ष कर का उदाहरण है, जबकि सीमा शुल्क तथा वस्तु एवं सेवा कर (GST) अप्रत्यक्ष कर के उदाहरण हैं।
  • राजगामी संपत्ति एक सामान्य विधि सिद्धांत है, जो किसी ऐसे व्यक्ति की वास्तविक संपत्ति को राज्य को हस्तांतरित करता है, जो बिना किसी वारिस के मर गया हो।
  • प्रत्यक्ष कर की परिभाषा
    • प्रत्यक्ष कर वे कर होते हैं जो करदाता की आय, संपत्ति या लाभ पर सीधे लगाए जाते हैं
    • इन्हें अन्य किसी पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
    • ये कर सरकार को सीधे करदाता द्वारा ही चुकाए जाते हैं, जैसे व्यक्तिगत आय पर लगने वाला आयकर।
      अप्रत्यक्ष करों से भिन्न, प्रत्यक्ष करों का बोझ केवल करदाता पर ही रहता है
    • यह आर्थिक असमानता को कम करने में सहायक होते हैं। उदाहरणस्वरूप, उच्च आय वाले व्यक्ति अधिक कर चुकाते हैं।
  • प्रत्यक्ष कर के प्रमुख उदाहरण
    • आयकर (Income Tax): व्यक्तियों, एचयूएफ और कंपनियों की आय पर लगता है।
    • वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्लैब के आधार पर दरें लागू होती हैं, जैसे 3 लाख तक शून्य और उसके बाद प्रगतिशील दरें।
    • कॉर्पोरेट टैक्स (Corporate Tax): कंपनियों के लाभ पर लगाया जाता है।​
    • पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax): शेयर, संपत्ति बिक्री से लाभ पर।​
    • संपत्ति कर (Wealth Tax): अधिक संपत्ति वाले व्यक्तियों पर (हालांकि अब समाप्त, पहले उदाहरण था)।​
    • न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) और लाभांश वितरण कर: कंपनियों से संबंधित।​
  • लाभ और महत्व
    • प्रत्यक्ष कर धन के पुनर्वितरण को बढ़ावा देते हैं, मुद्रास्फीति नियंत्रित करते हैं
    • सरकार को स्थिर राजस्व देते हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में भारत की प्रत्यक्ष कर संग्रह 7.45 लाख करोड़ रही।
    • ये कर आर्थिक न्याय सुनिश्चित करते हैं क्योंकि अमीर अधिक चुकाते हैं।​

17. इनमें से कौन-सी राजकोषीय वर्ष 2023-24 के लिए केंद्रीय बजट में अपनाई गई सात प्राथमिकताओं में से एक है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) समावेशी विकास
Solution:
  • बजट 2023-24 की सात प्राथमिकताएं इस प्रकार हैं-समावेशी विकास, अंतिम छोर -अंतिम व्यक्ति तक पहुंच, बुनियादी ढांचा और निवेश, निहित क्षमताओं का विस्तार, हरित विकास, युवा शक्ति तथा वित्तीय क्षेत्र।
  • केंद्रीय बजट 2023-24 की सात प्राथमिकताएँ (सप्तऋषि)
    • केंद्रीय बजट 2023-24 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने "सप्तऋषि" के रूप में सात प्रमुख प्राथमिकताएँ घोषित कीं
    • जो अमृत काल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नीतिगत दिशा प्रदान करती हैं।
    • ये प्राथमिकताएँ आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश और पर्यावरणीय स्थिरता पर केंद्रित हैं।
  • सात प्राथमिकताओं की पूरी सूची
    • समावेशी विकास (Inclusive Development): सभी वर्गों, विशेषकर गरीबों और हाशिए पर रहने वालों को लाभ पहुँचाना।
    • अंतिम व्यक्ति तक पहुँच (Reaching the Last Mile): सरकारी योजनाओं का अंतिम छोर तक वितरण सुनिश्चित करना।
    • बुनियादी ढाँचा और निवेश (Infrastructure and Investment): सड़क, रेल, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश।
    • क्षमता उन्मुक्ति या नवाचार (Unleashing Potential/Innovation): उद्यमिता, कौशल विकास और अनुसंधान को बढ़ावा।
    • हरित विकास (Green Growth): सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण।
    • युवा शक्ति (Youth Power): शिक्षा, रोजगार और स्किलिंग के माध्यम से युवाओं का सशक्तिकरण।
    • वित्तीय क्षेत्र (Financial Sector): बैंकिंग, वित्तीय समावेशन और पूँजी बाजार को मजबूत बनाना।
  • प्रश्न के संदर्भ में सही विकल्प
    • प्रश्न "इनमें से कौन-सी" संभवतः विकल्पों जैसे लैंगिक समानता, शून्य गरीबी, समावेशी विकास, शून्य भूख आदि को संदर्भित करता है।
    • इनमें समावेशी विकास ही सात प्राथमिकताओं में से एक है।
    • अन्य विकल्प जैसे शून्य गरीबी या शून्य भूख संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े हैं, लेकिन बजट 2023-24 की सप्तऋषि सूची का हिस्सा नहीं।​
  • इन प्राथमिकताओं का महत्व और कार्यान्वयन
    • ये प्राथमिकताएँ एक-दूसरे से जुड़ी हैं, जैसे समावेशी विकास अंतिम मील तक पहुँच से जुड़ा है।
    • बजट में इसके लिए 45 लाख करोड़ रुपये से अधिक व्यय का प्रावधान किया गया
    • जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 10 लाख करोड़ का लक्ष्य था।
    • हरित विकास के तहत ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और सनातन विकास पर जोर दिया गया।
    • युवा शक्ति को बढ़ावा देने के लिए स्किल इंडिया और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया गया।
  • बजट का व्यापक प्रभाव

    • यह बजट 2023-24 (1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024) ने जीडीपी वृद्धि दर 6-7% के अनुमान के साथ राजकोषीय घाटे को 5.9% पर नियंत्रित रखा।
    • सप्तऋषि ने भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की रूपरेखा तैयार की
    • जिसमें वित्तीय क्षेत्र सुधारों से FDI को आकर्षित किया गया। कुल मिलाकर, ये प्राथमिकताएँ समग्र विकास का ब्लूप्रिंट हैं।

18. सही मिलान की पहचान कीजिए। [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

(A) सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों की पेंशन - राजस्व प्राप्ति

(B) रेलवे में मशीनरी की खरीदारी - पूंजीगत व्यय

Correct Answer: (a) केवल B
Solution:
  • राजस्व व्यय की प्रमुख मदों में ब्याज अदायगी, प्रतिरक्षा सेवाएं, उपदान, वेतन तथा पेंशन आते हैं।
  • अतः कथन (A) त्रुटिपूर्ण है, जबकि रेलवे में मशीनरी की खरीदारी पूंजीगत व्यय का उदाहरण है।
  • अन्य उदाहरण
    • रोगों और उनके कारणों/संचरण पर आधारित प्रश्न में सही मिलान चिकन पॉक्स को विषाणु और वायु/संपर्क संचरण से जोड़ता है।​
    • तपेदिक: जीवाणु, हवा से।
    • हेपेटाइटिस-ए: विषाणु, पानी से।
    • मलेरिया: प्रोटोजोआ, मच्छर से।
    • यह विकल्प 2 सही होता है।​
    • भूगोल संबंधी मिलान में, जैसे नंगा पर्वत-नेपाल गलत है; सही जोड़ियाँ क्षेत्र विशेष पर निर्भर करती हैं।​
  • परीक्षा संदर्भ
    • ये प्रश्न UPSSSC PET या Lekhpal जैसी परीक्षाओं में आते हैं, जहाँ 12वीं पास उम्मीदवार भाग लेते हैं।
    • तैयारी के लिए पिछले वर्षों के पेपर हल करें, क्योंकि मिलान तार्किक सोच और तथ्यों पर आधारित होते हैं।
    • पूर्ण प्रश्न के बिना विशिष्ट उत्तर कठिन है, लेकिन ये उदाहरण प्रतिनिधि हैं।​

19. भारत सरकार की निम्नलिखित में से किस पहल का उद्देश्य आज़ादी के अमृत महोत्सव के जश्न के एक भाग के रूप में देश के प्रत्येक जिले में 75 जल निकायों का विकास और कायाकल्प करना है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) मिशन अमृत सरोवर
Solution:
  • मिशन अमृत सरोवर पहल का उद्देश्य आजादी के अमृत महोत्सव के जश्न के एक भाग के रूप में देश के प्रत्येक जिले में 75 जल निकायों का विकास और कायाकल्प करना है।
  • 24 अप्रैल, 2022 को इस मिशन को प्रारंभ किया गया था।
  • लॉन्च और पृष्ठभूमि
    • जो जल संरक्षण के लिए भविष्योन्मुखी कदम है। आज़ादी के अमृत महोत्सव (2021-2023) के तहत यह प्रमुख पहल है
    • जो स्वतंत्रता के 75 वर्षों का उत्सव मनाते हुए जल संसाधनों को मजबूत करने पर केंद्रित है।
    • कुल 50,000 से अधिक जल निकायों (लगभग एक एकड़ या इससे अधिक आकार के) का लक्ष्य रखा गया है, मुख्यतः ग्रामीण जिलों में।
  • उद्देश्य
    • मिशन का मुख्य लक्ष्य मौजूदा तालाबों, झीलों और जलाशयों का पुनरुद्धार करना है
    • जल स्तर बढ़े, भूजल रिचार्ज हो और जलवायु परिवर्तन से निपटा जा सके।
    • यह सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देता है, जिसमें गांव स्तर पर चयन, सफाई और रखरखाव शामिल है।
    • रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग स्थलों का चयन करने के लिए किया जाता है, जो भूमि उपलब्धता और स्थलाकृति पर आधारित होते हैं।
  • कार्यान्वयन तंत्र
    • आठ केंद्रीय मंत्रालय संयुक्त रूप से इसे संचालित करते हैं
    • ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता, जल शक्ति, पंचायती राज, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन, रेलवे, तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग।
    • राज्य सरकारें जिलाधिकारियों के माध्यम से निगरानी करती हैं, जबकि जिलास्तरीय समितियां कार्यान्वयन सुनिश्चित करती हैं।
    • प्रत्येक जिले में 75 अमृत सरोवर विकसित करने का दायित्व स्थानीय प्रशासन पर है
    • जिसमें डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करना और समयबद्ध निर्माण शामिल है।
  • प्रगति और प्रभाव (जनवरी 2026 तक)
    • 2025 तक लाखों सरोवर पूर्ण हो चुके हैं, जिससे जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि हुई है।
    • उदाहरणस्वरूप, कई जिलों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया, जो सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हुआ।
    • यह मिशन आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करता है, क्योंकि निर्माण में स्थानीय सामग्री और श्रम का उपयोग होता है।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • चयन मानदंड: पुराने जल निकाय प्राथमिकता, न्यूनतम 1 एकड़ क्षेत्र।
    • समयसीमा: 2023 तक मुख्य लक्ष्य, लेकिन निरंतर रखरखाव।
    • लाभ: पशुपालन, मत्स्य पालन, जैव विविधता संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा।

20. राजकोषीय नीति व्यापक आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित में से किस उपकरण का उपयोग करती है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) कर
Solution:
  • राजकोषीय नीति व्यापक आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए 'कर' (Tax) का उपयोग करती है।
  • इसका निर्धारण सरकार द्वारा राजकोषीय नीति के तहत किया जाता है
  • जबकि सीआरआर, बैंक दर तथा एसएलआर का निर्धारण भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति के तहत किया जाता है।
  • राजकोषीय नीति की परिभाषा
    • अर्थव्यवस्था में कुल मांग को नियंत्रित किया जा सके।
    • यह मौद्रिक नीति से भिन्न है, जो केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों और मुद्रा आपूर्ति पर केंद्रित होती है।
    • रत जैसे विकासशील देशों में यह नीति बजट के माध्यम से लागू की जाती है, जहां वित्त मंत्री सामान्य बजट प्रस्तुत करते हैं।
  • प्रकार
    • विस्तारवादी (Expansionary): मंदी में व्यय बढ़ाकर या कर घटाकर मांग बढ़ाना, बेरोजगारी कम करने के लिए।
    • उदाहरण: COVID-19 के दौरान भारत का आत्मनिर्भर भारत पैकेज।
    • संकुचनकारी (Contractionary): मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए व्यय घटाना या कर बढ़ाना।​
    • तटस्थ (Neutral): अर्थव्यवस्था स्थिर रखने के लिए कोई बड़ा बदलाव न करना।​
  • उद्देश्य
    • व्यापक आर्थिक लक्ष्यों में शामिल हैं:
    • आर्थिक विकास दर को 7-8% तक बनाए रखना।
    • मुद्रास्फीति को 4% (±2%) के लक्ष्य पर नियंत्रित रखना।
    • बेरोजगारी दर घटाना और पूर्ण रोजगार प्राप्त करना।
    • आय असमानता कम करना, जैसे प्रगतिशील कराधान से।
    • बुनियादी ढांचे का विकास और सामाजिक कल्याण।
  • भारत में कार्यान्वयन
    • भारत में राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम 2003 के तहत राजकोषीय घाटे को GDP के 3% तक सीमित करने का लक्ष्य है
    • हालांकि चुनौतियां जैसे महामारी ने इसे प्रभावित किया।
    • 2026 तक, वर्तमान सरकार ने राजकोषीय घाटे को 4.5% तक कम करने का लक्ष्य रखा है। नीति आयोग और RBI के साथ समन्वय से लागू होती है।
  • सीमाएं
    • समय लग (Time Lag): नीति लागू होने में देरी।
    • भीड़ प्रभाव (Crowding Out): सरकारी उधार से निजी निवेश घटना।
    • राजनीतिक प्रभाव: चुनावों से प्रभावित होना।​