राजकोषीय नीति एवं राजस्व (अर्थव्यवस्था)

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31. आमतौर पर, कुल मांग पर सरकारी खर्च में वृद्धि की तुलना में करों में कमी का ....... गुणांक प्रभाव होगा। [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) कम
Solution:
  • कुल मांग पर सरकारी खर्च में वृद्धि की तुलना में करों में कमी का कम गुणांक प्रभाव होता है।
  • गुणक प्रभाव क्या है?
    • गुणक प्रभाव किसी प्रारंभिक व्यय परिवर्तन (जैसे सरकारी खर्च या कर) से उत्पन्न होने वाली राष्ट्रीय आय में कुल वृद्धि को दर्शाता है।
    • सरकारी खर्च का गुणक  होता है, जहाँ MPC सीमांत उपभोग प्रवृत्ति है। करों में कमी का गुणक  होता है
    • जो सरकारी खर्च के गुणक से छोटा होता है क्योंकि इसमें MPC का गुणक लगता है।
  • सरकारी खर्च का प्रभाव
    • सरकारी खर्च (G) में वृद्धि सीधे कुल मांग (AD = C + I + G + NX) को बढ़ाती है।
    • मान लीजिए  और MPC = 0.8, तो गुणक 5 होगा, जिससे आय में 500 की वृद्धि होगी।
    • यह पूर्ण राशि अर्थव्यवस्था में प्रवेश करती है, जिससे चेन रिएक्शन शुरू होता है: आपूर्तिकर्ता कमाते हैं, वे खर्च करते हैं, और मांग बढ़ती जाती है।
  • करों में कमी का प्रभाव
    • करों (T) में कमी से प्रयोज्य आय (Y - T) बढ़ती है, लेकिन केवल MPC हिस्सा उपभोग (C) पर खर्च होता है।
    • उसी उदाहरण में , MPC = 0.8 के लिए गुणक 4 होगा
    • आय वृद्धि 400 होगी। शेष (1 - MPC) बचत या ऋण चुकाने में चला जाता है, इसलिए प्रभाव कम होता है।
  • क्यों छोटा प्रभाव?
    • लीकेज: कर कटौती में बचत लीकेज अधिक होता है, जबकि सरकारी खर्च में कोई लीकेज नहीं।
    • प्रत्यक्ष vs अप्रत्यक्ष: G प्रत्यक्ष AD बढ़ाता है; कर कटौती अप्रत्यक्ष रूप से C के माध्यम से।
    • उदाहरण: भारत में 2019 कर कटौती का प्रभाव सीमित रहा क्योंकि उपभोक्ता बचत बढ़ाने में लगे।
  • व्यावहारिक निहितार्थ
    • विस्तारवादी नीति में सरकारी खर्च तेजी से मंदी दूर करता है, लेकिन घाटा बढ़ाता है।
    • कर कटौती लंबे समय में निवेश प्रोत्साहित करती है, पर तात्कालिक प्रभाव कम।
    • विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में MPC कम होने से अंतर और स्पष्ट होता है।

32. निम्नलिखित में से सत्य कथन की पहचान कीजिए। [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) वसूली गई फीस और जुर्माना एक गैर-कर प्राप्ति है।
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में विकल्प (d) को छोड़कर शेष सभी विकल्प असत्य हैं।
  • वस्तु एवं सेवा कर एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है, जबकि आयकर प्रत्यक्ष कर की श्रेणी में आता है।
  • सत्य कथन पहचानने की विधि
    • सत्य कथन की पहचान के लिए दिए गए विकल्पों को तथ्यों, परिभाषाओं या गणना से सत्यापित करें।
    • उदाहरण के लिए, गणित में संख्या प्रणाली के प्रश्नों में परिमेय-अपरिमेय की जाँच करें। असत्य कथन वे होते हैं जो परिभाषा या नियमों का उल्लंघन करते हैं ।​
  • सामान्य उदाहरण
    • वास्तविक संख्याएँ: प्रत्येक वास्तविक संख्या अपरिमेय नहीं होती
    • क्योंकि इसमें परिमेय संख्याएँ भी शामिल हैं। अतः "प्रत्येक वास्तविक संख्या अपरिमेय है" असत्य है ।​
    • सदिश गुणनफल: अदिश गुणनफल  होता है, यह सत्य है ​।
  • जाँच के तरीके
    • गणना द्वारा: LHS और RHS की तुलना करें, जैसे  ।​
    • परिभाषा जांच: चतुर्भुज के अंतःकोणों का योग 360° होता है, 350° असत्य है ।​
    • तर्क: धनात्मक पूर्णांक का योगात्मक प्रतिलोम ऋणात्मक होता है, अतः बड़ा होने का कथन असत्य है ।​

33. ....... वे पदार्थ हैं, जिसके लिए भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) तथा केंद्रीय उत्पादन कर दोनों लगेंगे। [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) तंबाकू तथा तंबाकू पदार्थ
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में तंबाकू एवं तंबाकू विनिर्मित पदार्थ हेतु भारत में वस्तु एवं सेवा कर तथा केंद्रीय उत्पाद शुल्क दोनों लगते हैं।
  • GST का अवलोकन
    • GST एक गंतव्य-आधारित अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगता है।
    • यह 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ और कई पुराने करों जैसे VAT, सेवा कर आदि को समाहित कर लिया।
    • सामान्यतः अधिकांश वस्तुओं पर केवल GST लगता है, लेकिन कुछ अपवादों में अतिरिक्त केंद्रीय उत्पाद शुल्क भी लागू होता है।
    • तंबाकू उत्पाद इन अपवादों में प्रमुख हैं, जहां GST उत्पाद की बिक्री पर लगता है।
  • केंद्रीय उत्पाद शुल्क क्या है?
    • केंद्रीय उत्पाद शुल्क वस्तुओं के निर्माण या उत्पादन पर लगने वाला कर है
    • जो 1944 के केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम और 1985 के केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम द्वारा नियंत्रित होता है।
    • यह मैन्युफैक्चरिंग स्टेज पर लागू होता है, जैसे उत्पादन लाइन से गोदाम तक स्थानांतरण पर।
    • तंबाकू पर यह शुल्क इसलिए लगता है क्योंकि सरकार इनके उत्पादन को हतोत्साहित करना चाहती है।​
  • तंबाकू उत्पाद क्यों विशेष?
    • तंबाकू और उसके उत्पाद (जैसे सिगरेट, गुटखा, पान मसाला, जर्दा, तंबाकू पाउडर) पर GST (आमतौर पर 28% स्लैब में) के अलावा केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगता है।
    • इसके अतिरिक्त, compensation cess भी लागू होता है, जो राज्यों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए है।
    • उदाहरणस्वरूप, सिगरेट पर उत्पाद शुल्क % आधारित या ad valorem हो सकता है।
    • यह प्रथा इसलिए है क्योंकि GST ने उत्पाद शुल्क को大部分取代 कर दिया, लेकिन तंबाकू जैसी 'sin goods' पर दोहरी व्यवस्था बरकरार रखी गई।​
  • अन्य संबंधित पदार्थ
    • शराब: कुछ मामलों में शराब पर भी GST और उत्पाद शुल्क दोनों लगते हैं, लेकिन यह राज्य-विशेष नियमों पर निर्भर करता है।​
    • पेट्रोलियम उत्पाद: इन पर GST नहीं लगता, बल्कि केंद्रीय उत्पाद शुल्क और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगता है।​
    • GST 2.0 अपडेट्स (2025 से) में तंबाकू उत्पादों पर 40% GST + cess जैसी दरें बढ़ाई गई हैं, लेकिन केंद्रीय उत्पाद शुल्क की दोहरी प्रणाली जारी है।
  • कर की गणना उदाहरण
    • मान लीजिए एक तंबाकू उत्पाद का मूल्य ₹100 है:
    • केंद्रीय उत्पाद शुल्क: 20-30% (उत्पादन पर)।
    • GST: 28% (बिक्री मूल्य पर, जिसमें उत्पाद शुल्क शामिल)।
    • Compensation Cess: अतिरिक्त 100-200% तक।
    • कुल प्रभावी कर 60-100% से अधिक हो सकता है। यह व्यवस्था उपभोक्ता मूल्य बढ़ाकर सेवन कम करती है।​​
  • नीतिगत कारण
    • ये पदार्थ 'sin goods' हैं, जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। सरकार दोहरे करों से राजस्व तो बढ़ाती ही है
    • साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारने का प्रयास करती है। CBIC दिशानिर्देशों के तहत ये अपवाद रखे गए हैं
    • GST का व्यापक ढांचा बना रहे। वर्तमान में (जनवरी 2026 तक) यह प्रथा अपरिवर्तित है।

34. यदि प्राथमिक घाटे और ब्याज के भुगतान दोनों को दोगुना कर दिया जाए तो राजकोषीय घाटे में क्या परिवर्तन होगा ? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) 100% बढ़ जाएगा
Solution:
  • यदि प्राथमिक घाटे और ब्याज के भुगतान दोनों को दोगुना कर दिया जाए, तब राजकोषीय घाटा 100 प्रतिशत बढ़ जाएगा।
  • राजकोषीय घाटा = प्राथमिक घाटा + ब्याज अदायगी या प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज अदायगी
  • मूल अवधारणाएँ
    • राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) सरकार की कुल प्राप्तियों से कुल व्यय को घटाने पर प्राप्त अंतर है
    • जिसमें ब्याज भुगतान भी शामिल होता है। प्राथमिक घाटा (Primary Deficit) राजकोषीय घाटे से ब्याज भुगतान घटाने पर मिलता है
    • जो ब्याज रहित उधारी की आवश्यकता दर्शाता है। सूत्र सरल है: राजकोषीय घाटा = प्राथमिक घाटा + ब्याज भुगतान।
  • गणना का उदाहरण
    • मान लीजिए प्रारंभिक प्राथमिक घाटा (PD) = ₹100 करोड़ और ब्याज भुगतान (I) = ₹50 करोड़।
    • तब राजकोषीय घाटा (FD) = 100 + 50 = ₹150 करोड़। अब दोनों को दोगुना करें: नया PD = ₹200 करोड़, नया I = ₹100 करोड़।
    • नया FD = 200 + 100 = ₹300 करोड़। वृद्धि = (300 - 150)/150 × 100 = 100%।
  • गणितीय प्रमाण
    • सामान्य रूप से, FD = PD + I। नया FD' = 2PD + 2I = 2(PD + I) = 2FD। अतः FD' = 2FD, जो दोगुना होना सिद्ध करता है।
    • यह परिवर्तन रैखिक योग के कारण होता है, क्योंकि दोनों घटक स्वतंत्र रूप से जोड़े जाते हैं।
  • आर्थिक निहितार्थ
    • ऐसी स्थिति में सरकार की उधारी आवश्यकता दोगुनी हो जाती है, जो मुद्रास्फीति, ब्याज दरें बढ़ा सकती है।
    • प्राथमिक घाटा कम होना वित्तीय अनुशासन का संकेत है, लेकिन ब्याज बोझ पुराने ऋणों पर निर्भर करता है।
    • भारत जैसे देशों में बजट लक्ष्यों (जैसे FRBM अधिनियम) पर इसका प्रभाव पड़ता है।

35. GST बिल में कितने टैक्स स्लैब वर्गीकृत हैं? [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) चार
Solution:
  • वस्तु एवं सेवा कर (GST) बिल में चार टैक्स स्लैब वर्गीकृत हैं, जो इस प्रकार हैं-5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत तथा 28 प्रतिशत ।
  • जीएसटी स्लैब का आधार
    • जीएसटी काउंसिल ने वस्तुओं और सेवाओं को उनकी आवश्यकता, विलासिता और सामाजिक प्रभाव के आधार पर इन स्लैब में बांटा है।
    • आवश्यक वस्तुओं पर कम या शून्य टैक्स लगता है, जबकि विलासिता और हानिकारक वस्तुओं (जैसे सिगरेट, शराब) पर अधिक।
    • 1 जुलाई 2017 से लागू जीएसटी ने पुराने कई अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत किया।
  • 0% स्लैब (शून्य दर)
    • इसमें जीवन के लिए जरूरी वस्तुएं आती हैं, जिन पर कोई जीएसटी नहीं लगता।
    • ताजे फल, सब्जियां, दूध, अंडे, अनाज, नमक, गुड़।
    • स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, धार्मिक प्रसाद, सैनिटरी नैपकिन, बच्चों की किताबें।
  • 5% स्लैब
    • आवश्यक लेकिन प्रोसेस्ड वस्तुओं के लिए।
    • चीनी, चाय, कॉफी (इंस्टेंट 제외), खाद्य तेल, मसाले, मिठाई, अगरबत्ती, घरेलू LPG।
    • पैकेज्ड पनीर, काजू, स्किम्ड मिल्क पाउडर।
  • 12% स्लैब
    • मध्यम आवश्यकता वाली वस्तुएं।
    • फलों के रस, मक्खन, पनीर, जमे हुए मांस उत्पाद।
    • रसोई उपकरण, साबुन, टूथपेस्ट।
  • 18% स्लैब
    • ज्यादातर सामान्य वस्तुएं और सेवाएं।
    • चॉकलेट, पास्ता, कोल्ड ड्रिंक्स, मोबाइल फोन, लैपटॉप।
    • रेस्तरां सेवाएं (कुछ छोड़कर), होटल।
  • 28% स्लैब
    • विलासिता और 'सिन' गुड्स।
    • वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर।
    • सिगरेट, पान मसाला, एयरोप्लेन, लग्जरी कारें। कुछ पर अतिरिक्त सेस भी।
  • विशेष प्रावधान
    • कंपोजिशन स्कीम: छोटे व्यवसाय (टर्नओवर 1.5 करोड़ तक) के लिए फिक्स्ड रेट (1-6%)।​
    • सेस: 28% स्लैब वाली कुछ वस्तुओं पर अतिरिक्त (जैसे कोल्ड ड्रिंक पर 12%)।
    • अपडेट्स: जीएसटी काउंसिल नियमित बदलाव करती है; 2025 तक चार मुख्य स्लैब बरकरार, हालांकि दो-स्लैब सुधार की चर्चा है।

36. वर्ष 2023-24 के बजट के अनुसार सरकार द्वारा प्रत्येक 1 रुपये की प्राप्ति में कॉरपोरेशन टैक्स (corporation tax) कितना होता है? [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 15 पैसे
Solution:
  • केंद्रीय बजट 2023-24 के अनुसार, सरकार द्वारा प्रत्येक 1 रुपये की प्राप्ति में निगम कर (कॉर्पोरेशन टैक्स) 15 पैसा अनुमानित था।
  • वर्ष 2024-25 (अंतरिम बजट) के बजट में निगम कर 17 पैसे अनुमानित है।
  • 2023-24 बजट में कॉरपोरेशन टैक्स की हिस्सेदारी
    • भारत सरकार के 2023-24 के केंद्रीय बजट के अनुसार, कुल प्राप्तियों के प्रत्येक 1 रुपये में कॉरपोरेशन टैक्स (निगम कर) से 15 पैसे प्राप्त होते हैं।
    • यह हिस्सा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट भाषण में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है, जहां कुल राजस्व प्राप्तियों की संरचना का ब्रेकअप दिया गया था।
  • बजट प्राप्तियों का ब्रेकअप
    • बजट 2023-24 में सरकार ने कुल प्राप्तियों को सरलता से समझाने के लिए प्रत्येक 1 रुपये का विभाजन किया था:
    • वस्तु एवं सेवा कर (GST): 17 पैसे (सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर स्रोत)।
    • कॉरपोरेशन टैक्स: 15 पैसे।
    • आयकर: लगभग 13-14 पैसे।
    • कस्टम्स ड्यूटी और अन्य कर: शेष हिस्सा।
    • यह ब्रेकअप गैर-ऋण प्राप्तियों (gross tax revenue) पर आधारित था, जो कुल बजट प्राप्तियों का प्रमुख हिस्सा बनाती हैं।
    • कुल प्राप्ति अनुमान लगभग 27 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें टैक्स राजस्व करीब 23 लाख करोड़ का था।
    • कॉरपोरेशन टैक्स का अनुमान 9.22 लाख करोड़ रुपये रखा गया, जो कुल टैक्स प्राप्ति का लगभग 15% था।
  • कॉरपोरेशन टैक्स का महत्व और वृद्धि
    • कॉरपोरेशन टैक्स भारत सरकार के राजस्व का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है, जो मुख्य रूप से कंपनियों की आय पर लगने वाले प्रत्यक्ष कर से आता है।
    • 2023-24 बजट में इसका अनुमान पिछले वर्ष (2022-23) के संशोधित अनुमान से 10.5% अधिक रखा गया था।
    • 2022-23 में वास्तविक संग्रह बजट लक्ष्य से 16% ऊपर रहा, जो आर्थिक सुधार और कर अनुपालन में वृद्धि को दर्शाता है।​
  • अन्य संदर्भ और तुलना
    • GST प्रत्येक 1 रुपये में 17 पैसे का योगदान देता है, जो कॉरपोरेशन टैक्स से थोड़ा अधिक है, क्योंकि GST एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर है
    • जो आपूर्ति श्रृंखला के हर चरण पर लगता है। कॉरपोरेशन टैक्स मुख्यतः बड़ी कंपनियों (जैसे टर्नओवर 400 करोड़ से अधिक) पर केंद्रित है
    • जहां कर दरें 22-30% (नई/पुरानी व्यवस्था) हैं। बजट ने स्टार्टअप्स के लिए छूट बढ़ाई, जैसे लाभ पर 100% टैक्स छूट की समय सीमा 31 मार्च 2024 तक विस्तार।
    • नोट: ये आंकड़े बजट अनुमान (Budget Estimates) पर आधारित हैं।
    • वास्तविक संग्रह बाद में जारी RE/BE में समायोजित होते हैं। यह जानकारी SSC जैसी परीक्षाओं में भी पूछी जाती है।

37. यदि सकल राजकोषीय घाटे का मूल्य निवल ब्याज दायित्व से अधिक होगा, तो सकल प्राथमिक घाटे का मूल्य ....... होगा। [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) धनात्मक
Solution:
  • यदि सकल राजकोषीय घाटे का मूल्य निवल ब्याज दायित्व से अधिक होगा, तो सकल प्राथमिक घाटे का मूल्य धनात्मक होगा।
  • सकल प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा - निवल ब्याज दायित्व।
  • परिभाषाएँ
    • सकल राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ) के बीच का अंतर है, जो कुल उधार की आवश्यकता दर्शाता है।​
    • सकल प्राथमिक घाटा सकल राजकोषीय घाटे से निवल ब्याज दायित्व घटाने पर प्राप्त होता है: GPD = GFD - निवल ब्याज दायित्व।
    • निवल ब्याज दायित्व सरकार के ब्याज भुगतान और ब्याज प्राप्तियों का शुद्ध अंतर है।​
  • गणितीय संबंध
    • यदि GFD > निवल ब्याज दायित्व, तो GPD = GFD - निवल ब्याज दायित्व > 0, अर्थात् सकारात्मक।
    • उदाहरण: यदि GFD = ₹2000 करोड़ और निवल ब्याज = ₹1500 करोड़, तो GPD = ₹500 करोड़ (सकारात्मक)।​
    • यदि GFD = निवल ब्याज (= ₹2000 करोड़), तो GPD = 0 (शून्य); यदि कम, तो नकारात्मक।​
  • आर्थिक महत्व
    • सकारात्मक प्राथमिक घाटा दर्शाता है कि सरकार ब्याज以外 के व्यय (जैसे विकास कार्य) के लिए भी उधार ले रही है, जो राजकोषीय स्वास्थ्य पर दबाव बढ़ाता है।​
    • शून्य प्राथमिक घाटा आदर्श है, जहाँ उधार केवल ब्याज चुकाने तक सीमित रहता है।​
    • भारत में ये संकेतक बजट विश्लेषण के लिए FRBM अधिनियम के तहत महत्वपूर्ण हैं।​

38. अर्थव्यवस्था में कितने प्रकार की राजस्व प्राप्तियां अस्तित्व में हैं? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) दो
Solution:
  • राजस्व प्राप्तियां वे प्राप्तियां हैं जिनका दावा सरकार से नहीं किया जा सकता।
  • अतः इन्हें गैर-प्रतिदेय कहा जाता है। इन्हें कर तथा गैर-कर राजस्व में विभाजित किया जाता है।
  • कर राजस्व (Tax Revenue)
    • राजस्व सरकार की आय का सबसे बड़ा स्रोत है, जो नागरिकों और व्यवसायों पर लगाए गए विभिन्न करों से आता है।
    • इन्हें प्रत्यक्ष कर (जिनका बोझ सीधे करदाता पर पड़ता है) और अप्रत्यक्ष कर (जिनका बोझ अंतिम उपभोक्ता पर स्थानांतरित होता है) में बांटा जाता है।
    • प्रत्यक्ष कर: आयकर, निगम कर (कॉर्पोरेट टैक्स), संपत्ति कर, उपहार कर आदि।
    • उदाहरणस्वरूप, व्यक्तिगत आयकर से सरकार को करोड़ों रुपये की आय होती है।
    • अप्रत्यक्ष कर: वस्तु एवं सेवा कर (GST), उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी), सीमा शुल्क (कस्टम्स ड्यूटी), सेवा कर आदि। GST ने कई पुराने करों को एकीकृत कर सरलीकरण लाया है।
    • ये कर अर्थव्यवस्था में आय के पुनर्वितरण और मुद्रास्फीति नियंत्रण में सहायक होते हैं।
    • कर राजस्व कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 80-90% हिस्सा होता है।
  • गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue)
    • गैर-कर राजस्व वे प्राप्तियां हैं जो करों के अलावा आती हैं
    • इन्हें ब्याज, लाभांश, शुल्क आदि में वर्गीकृत किया जाता है। ये सरकार की संपत्तियों, सेवाओं या निवेशों से उत्पन्न होती हैं।
    • ब्याज प्राप्तियां: सरकारी बांड्स, ऋणों या रिजर्व बैंक से प्राप्त ब्याज।
    • लाभांश और लाभ: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) जैसे ONGC, SBI से मिलने वाले मुनाफे का हिस्सा।
    • शुल्क और सेवा शुल्क: लाइसेंस फीस, पासपोर्ट शुल्क, रजिस्ट्रेशन फीस आदि।
    • जुर्माना और दंड: ट्रैफिक चालान, पर्यावरण उल्लंघन आदि से।
    • अन्य स्रोत: विदेशी अनुदान, सरकारी संपत्तियों से किराया, मुद्रा लेनदेन लाभ।
    • गैर-कर राजस्व कुल राजस्व का 10-20% होता है और यह करों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।
  • राजस्व प्राप्तियों का महत्व
    • राजस्व प्राप्तियां सरकार के राजस्व बजट का आधार होती हैं, जो वेतन, पेंशन, सब्सिडी जैसे चालू खर्चों को वित्तपोषित करती हैं।
    • इन्हें पूंजीगत प्राप्तियों (जैसे उधार) से अलग रखा जाता है क्योंकि ये स्थायी नहीं होतीं।

39. पूंजीगत व्यय क्या है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अवसंरचना (Infrastructure) के विकास पर व्यय की गई धनराशि
Solution:
  • अवसंरचना के विकास पर व्यय की गई धनराशि को पूंजीगत व्यय कहते हैं।
  • इसके अंतर्गत भूमि अधिग्रहण, भवन निर्माण, मशीनरी, उपकरण, शेयरों में निवेश तथा केंद्र सरकार के द्वारा राज्य सरकारों एवं संघ-शासित प्रदेशों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा अन्य पक्षों को प्रदान किए गए
  • ऋण और अग्रिम संबंधी व्यय को शामिल किया जाता है।
  • परिभाषा
    • पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure या CapEx) से तात्पर्य उन खर्चों से है
    • जो स्थायी संपत्तियों जैसे भूमि, भवन, मशीनरी, वाहन या प्रौद्योगिकी पर किए जाते हैं।
    • ये व्यय बैलेंस शीट में संपत्ति के रूप में दर्ज होते हैं, न कि तुरंत लाभ-हानि खाते में खर्च के रूप में।
    • इनकी उपयोगिता कई लेखा वर्षों तक बनी रहती है, और इन्हें ह्रास (Depreciation) के माध्यम से धीरे-धीरे लेखांकित किया जाता है।
  • विशेषताएँ
    • दीर्घकालिक उपयोगिता: ये व्यय स्थायी स्वभाव के होते हैं और कम से कम एक वर्ष से अधिक समय तक लाभ देते हैं।​
    • दृश्यमान स्वरूप: इन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है, जैसे नई मशीन या भवन का निर्माण।​
    • लाभार्जन क्षमता में वृद्धि: व्यवसाय की उत्पादकता, क्षमता या लाभ कमाने की शक्ति को बढ़ाते हैं।
    • नकद प्रवाह पर प्रभाव: ये बड़े पैमाने के होते हैं और अक्सर ऋण या इक्विटी से वित्तपोषित होते हैं।​
  • उदाहरण
    • पूंजीगत व्यय के सामान्य उदाहरण निम्न हैं:
    • नई फैक्ट्री या कार्यालय भवन का निर्माण।
    • उत्पादन मशीनरी या उपकरणों की खरीद।​
    • पुरानी संपत्तियों का आधुनिकीकरण या विस्तार।​
    • अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश, यदि यह नई संपत्ति सृजित करे।​
    • भूमि अधिग्रहण या वाहनों की खरीद।​
  • महत्व
    • पूंजीगत व्यय व्यवसाय की वृद्धि के लिए रणनीतिक होते हैं। ये उत्पादकता बढ़ाते हैं
    • प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करते हैं और लंबे समय में राजस्व उत्पन्न करते हैं।
    • सरकारों के लिए, ये अवसंरचना विकास (जैसे सड़कें, पुल) पर केंद्रित होते हैं
    • जो आर्थिक विकास को गति देते हैं। हालांकि, ये जोखिमपूर्ण भी हो सकते हैं यदि अपेक्षित रिटर्न न मिले।
  • गणना और प्रबंधन
    • पूंजीगत व्यय की गणना आमतौर पर इस फॉर्मूले से की जाती है:
    • CapEx = PP&E (साल के अंत में) - PP&E (साल की शुरुआत में) + Depreciation Expense
    • जहां PP&E संपत्ति, संयंत्र और उपकरण को दर्शाता है।
    • व्यवसाय इन्हें बजटिंग के माध्यम से नियोजित करते हैं
    • जिसमें ROI (Return on Investment) का मूल्यांकन शामिल होता है।

40. कौन-सा घाटा सरकार की ऋण-ग्रहण आवश्यकताओं को दर्शाता है? [MTS (T-I) 14 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) राजकोषीय घाटा
Solution:
  • राजकोषीय घाटा सरकार की ऋण-ग्रहण आवश्यकताओं को दर्शाता है।
  • यह घाटा सरकार के कुल व्यय और ऋण ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों का अंतर है।
  • राजकोषीय घाटे की परिभाषा
    • राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ)।
    • दोहरी लेखांकन प्रणाली के अनुसार, सरकार का कुल व्यय हमेशा कुल प्राप्तियों के बराबर होता है
    • लेकिन जब व्यय राजस्व से अधिक हो जाता है, तो शेष अंतर को ऋण से भरा जाता है।
    • इसलिए, राजकोषीय घाटा सीधे सरकार की कुल ऋण आवश्यकता को प्रतिबिंबित करता है।​
  • महत्व और प्रभाव
    • उच्च राजकोषीय घाटा सार्वजनिक ऋण बढ़ाता है, जो आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
    • सरकार इसे आंतरिक (घरेलू बाजार) या बाह्य उधार (विदेशी स्रोत) से पूरा करती है।
    • प्रबंधन के लिए कर वृद्धि या व्यय कटौती जैसे उपाय अपनाए जाते हैं।
  • भारतीय संदर्भ में उदाहरण
    • वित्त वर्ष 2025 में भारत ने 4.8% जीडीपी का राजकोषीय घाटा लक्ष्य हासिल किया
    • जो ऋण बोझ को नियंत्रित रखने में सहायक रहा।
    • इससे विकास कार्यों के लिए उधार की आवश्यकता स्पष्ट होती है।​