राजकोषीय नीति एवं राजस्व (अर्थव्यवस्था)Total Questions: 4941. निम्नलिखित में से सरकारी बजट में पूंजीगत व्यय का उदाहरण कौन-सा है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (II-पाली)](a) ऋण पर ब्याज भुगतान(b) किसानों को प्रदान की गई सब्सिडी(c) सरकारी भवनों का रख-रखाव(d) सैन्य उपकरणों की खरीदCorrect Answer: (d) सैन्य उपकरणों की खरीदSolution:पूंजीगत व्यय सरकार के वे व्यय हैं जिसके परिणामस्वरूप भौतिक या वित्तीय परिसंपत्तियों का सृजन या वित्तीय दायित्वों में कमी होती है।प्रश्नगत विकल्पों में सैन्य उपकरणों की खरीद पूंजीगत व्यय का उदाहरण है।पूंजीगत व्यय की परिभाषाजैसे भूमि खरीद, भवन निर्माण, मशीनरी अधिग्रहण या ऋण प्रदान करना। ये राजस्व व्यय से भिन्न होते है, जो दैनिक संचालन जैसे वेतन या रखरखाव पर जाते हैं।उदाहरणस्वरूप, सड़कें, पुल, स्कूल भवन या सैन्य उपकरणों की खरीद पूंजीगत व्यय के अंतर्गत आते हैं, क्योंकि ये वर्षों तक उपयोगी रहते हैं।सामान्य उदाहरणसैन्य उपकरणों की खरीद: यह क्लासिक उदाहरण है, क्योंकि उपकरण लंबे समय तक रक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं।स्कूल और अस्पताल भवनों का निर्माण: ये परिसंपत्तियां शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को दीर्घकालिक रूप से बढ़ावा देती हैं।सड़कें, पुल और सिंचाई परियोजनाएं: बुनियादी ढांचे का विकास आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करता है।मशीनरी या उपकरण खरीद: यदि मूल्य सीमा से अधिक हो, तो इसे पूंजीगत माना जाता है।पूंजीगत व्यय बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैंजो जीडीपी वृद्धि और रोजगार सृजन में योगदान देते हैं।भारत जैसे देशों में, ये व्यय विकास योजनाओं जैसे बजट आवंटन से वित्तपोषित होते हैं।42. निम्नलिखित में से कौन-सा सरकारी बजट में राजस्व प्राप्ति का उदाहरण है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (I-पाली)](a) अंतरराष्ट्रीय संगठनों से धनराशि ऋण पर लेना(b) किसी राज्य-स्वामित्व वाली कंपनी द्वारा ऋण का पुनर्भुगतान(c) सरकारी-स्वामित्व वाली भूमि की बिक्री(d) राज्य-स्वामित्व वाले उद्यम से प्राप्त लाभांशCorrect Answer: (d) राज्य-स्वामित्व वाले उद्यम से प्राप्त लाभांशSolution:प्रश्नगत विकल्पों में 'राज्य स्वामित्व वाले उद्यम से प्राप्त लाभांश' सरकारी बजट में राजस्व प्राप्ति का उदाहरण है।सरकारी बजट में राजस्व प्राप्ति वे स्रोत हैं जिनसे सरकार को नियमित आय होती है, बिना अपनी संपत्ति बेचे या भविष्य में चुकाने वाले उधार लिए।राजस्व प्राप्ति की परिभाषाराजस्व प्राप्तियाँ सरकारी बजट का वह हिस्सा हैं जहाँ सरकार की चालू आय दर्ज की जाती हैजैसे कर संग्रह, लाभांश या ब्याज। इनमें कोई देयता (liability) उत्पन्न नहीं होती, अर्थात् सरकार को इन्हें वापस करने की ज़िम्मेदारी नहीं पड़ती।पूँजीगत प्राप्तियों (जैसे उधार या संपत्ति बिक्री) से अलग, ये स्थायी और गैर-ऋण आधारित होती हैं।उदाहरणस्वरूप, जीएसटी या आयकर जैसी आय राजस्व प्राप्ति के अंतर्गत आती है।राजस्व प्राप्ति के मुख्य उदाहरणकर राजस्व: प्रत्यक्ष कर (आयकर, संपत्ति कर) और अप्रत्यक्ष कर (जीएसटी, उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क) शामिल हैं।भारत में जीएसटी सरकार की प्रमुख राजस्व प्राप्ति है, जो व्यवसायों द्वारा एकत्रित कर सरकार को हस्तांतरित किया जाता है।गैर-कर राजस्व: सार्वजनिक उपक्रमों के लाभांश, सरकारी ऋणों पर ब्याज, सेवाओं के शुल्क (जैसे पासपोर्ट फीस) और अनुदान। ये करों के बिना प्राप्त होती हैं।राजस्व प्राप्तियाँ बजट संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैंक्योंकि ये घाटे को कम करने में मदद करती हैं। भारत के 2025-26 बजट में कर राजस्व कुल प्राप्तियों का बड़ा हिस्सा रहा।43. सरकारी बजट क्या है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) वैयक्तिक वित्त प्रबंधन के लिए एक योजना।(b) किसी देश की आर्थिक वृद्धि पर एक रिपोर्ट।(c) किसी विशिष्ट अवधि के लिए सरकार के अपेक्षित राजस्व और व्यय का वित्तीय विवरण।(d) विदेश नीति के लक्ष्यों को रेखांकित करने वाला एक दस्तावेज ।Correct Answer: (c) किसी विशिष्ट अवधि के लिए सरकार के अपेक्षित राजस्व और व्यय का वित्तीय विवरण।Solution:किसी विशिष्ट अवधि के लिए सरकार के अपेक्षित राजस्व और व्यय का वित्तीय विवरण 'सरकारी बजट' कहलाता है।प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित प्राप्तियों तथा खर्चों का ब्यौरा संसद में पेश करना सरकार का उत्तरदायित्व है।यह वार्षिक वित्तीय ब्यौरा सरकार का मुख्य बजट संबंधी घोषणा पत्र होता है।बजट की परिभाषासरकारी बजट एक विस्तृत वित्तीय विवरण है जिसमें सरकार की अनुमानित प्राप्तियां (जैसे कर, गैर-कर राजस्व और उधार) और अपेक्षित व्यय (जैसे विकास कार्य, सब्सिडी और प्रशासनिक खर्च) शामिल होते हैं।यह आमतौर पर 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के वित्तीय वर्ष के लिए तैयार किया जाता है।भारत में संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत इसे "वार्षिक वित्तीय विवरण" कहा गया हैजिसे राष्ट्रपति संसद में प्रस्तुत करता है, लेकिन वित्त मंत्री द्वारा ही पेश किया जाता है।बजट के उद्देश्यबजट के मुख्य उद्देश्य संसाधनों का पुनर्वितरण, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना हैं।यह सरकार को गरीबी उन्मूलन, बेरोजगारी कम करने और असमानता घटाने में मदद करता है।उदाहरणस्वरूप, सब्सिडी के माध्यम से कमजोर वर्गों को सहायता प्रदान की जाती है, जबकि कर सुधारों से राजस्व बढ़ाया जाता है।बजट के घटकबजट दो मुख्य भागों में विभाजित होता है: प्राप्तियां और व्यय।प्राप्तियां: कर राजस्व (आयकर, जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स), गैर-कर राजस्व (लाभांश, शुल्क), पूंजीगत प्राप्तियां (उधार, विनिवेश)।व्यय: राजस्व व्यय (वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान) और पूंजीगत व्यय (अवसंरचना, संपत्ति निर्माण)।बजट के प्रकारसरकारी बजट को अधिशेष (राजस्व > व्यय), संतुलित (राजस्व = व्यय) और घाटे वाला (व्यय > राजस्व) में वर्गीकृत किया जाता है।भारत में अधिकतर घाटे वाले बजट होते हैं, जहां घाटे की पूर्ति उधार से की जाती है।इसके अलावा, कार्यवाही बजट (संचालन पर जोर) और विकास बजट (पूंजीगत व्यय पर फोकस) भी प्रचलित हैं।भारत में बजट प्रक्रियाप्रक्रिया कई चरणों में होती है: पूर्व-बजट परामर्श, वित्त मंत्रालय द्वारा अनुमान तैयार करना, फरवरी में लोकसभा में पेश करना, चर्चा, मतदान और अनुमोदन।अप्रैल से कार्यान्वयन शुरू होता है, और वर्षांत में मूल्यांकन किया जाता है।वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), केंद्रीय बजट वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, जो राष्ट्रपति की सिफारिश पर आधारित होता है।बजट का महत्वबजट आर्थिक नीति का प्रमुख साधन है जो मुद्रास्फीति नियंत्रण, रोजगार सृजन और विकास को प्रभावित करता है।यह पारदर्शिता लाता है और जनता को सरकार की प्राथमिकताओं से अवगत कराता है।हालांकि, अत्यधिक घाटा राजकोषीय घाटा बढ़ा सकता है, इसलिए राजकोषीय जिम्मेदारी अधिनियम जैसे कानून इसका नियमन करते हैं।44. निम्नलिखित में से सरकारी बजट में राजस्व व्यय का उदाहरण कौन-सा है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) नए राजमार्ग का निर्माण(b) किसी राज्य-स्वामित्व वाली कंपनी में निवेश(c) सरकारी कर्मचारियों के वेतन का भुगतान(d) ऋण का पुनर्भुगतानCorrect Answer: (c) सरकारी कर्मचारियों के वेतन का भुगतानSolution:'सरकारी कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करना' सरकारी बजट में राजस्व व्यय का उदाहरण है।राजस्व व्यय के गैर- योजनागत व्ययों में ब्याज अदायगी, प्रतिरक्षा सेवाएं, उपदान, वेतन और पेंशन आते हैं।राजस्व व्यय की परिभाषाराजस्व व्यय वे खर्चे हैं जो सरकार के सामान्य कार्यों को चलाने के लिए किए जाते हैंजैसे विभागों का रखरखाव, ब्याज भुगतान और सब्सिडी।ऐसे व्यय से कोई नई संपत्ति नहीं बनती या देनदारियां कम नहीं होतीं।उदाहरणों में वेतन, पेंशन, ब्याज और प्रशासनिक खर्च शामिल हैं।अन्य विकल्पों का विश्लेषणनए राजमार्ग का निर्माण पूंजीगत व्यय है क्योंकि यह संपत्ति सृजित करता है।राज्य स्वामित्व वाली कंपनी में निवेश भी पूंजीगत व्यय के अंतर्गत आता है।ऋण की चुकौती मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय मानी जाती है।पूंजीगत व्यय से अंतरपूंजीगत व्यय संपत्तियों के अधिग्रहण या ऋण चुकौती पर केंद्रित होता है, जैसे भवन निर्माण या मशीनरी खरीद।राजस्व व्यय बजट का बड़ा हिस्सा होता है और कर राजस्व से पूरा किया जाता है।भारतीय बजट में राजस्व व्यय कुल व्यय का लगभग 80-85% होता है।भारतीय संदर्भ में उदाहरणकेंद्र सरकार के बजट में वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान प्रमुख राजस्व व्यय हैं।2025-26 बजट में इनका हिस्सा बढ़ा है, जो मुद्रास्फीति और वेतन संशोधन से प्रभावित है।राज्य बजटों में भी यही वर्गीकरण लागू होता है।45. राजस्व व्यय क्या है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) ऋण चुकाने पर व्यय की गई धनराशि(b) परिसंपत्तियों को खरीदने पर व्यय की गई धनराशि(c) सड़कों के निर्माण पर व्यय की गई धनराशि(d) दिन-प्रतिदिन के सरकारी कार्यों पर व्यय की गई धनराशिCorrect Answer: (d) दिन-प्रतिदिन के सरकारी कार्यों पर व्यय की गई धनराशिSolution:राजस्व व्यय केंद्र सरकार का भौतिक या वित्तीय परिसंपत्तियों के सृजन के अतिरिक्त अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया व्यय है। अतः प्रश्नगत विकल्पों में विकल्प (d) सर्वाधिक निकटतम उत्तर है।परिभाषाराजस्व व्यय से तात्पर्य उन खर्चों से है जो सरकार के दिन-प्रतिदिन के कार्यों, जैसे कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और सब्सिडी प्रदान करने पर होते हैं।ये व्यय अल्पकालिक होते हैं और इससे न तो नई संपत्तियों का सृजन होता है तथा न ही किसी देनदारी में कमी आती है।व्यावसायिक संदर्भ में, यह उत्पादन या सेवाओं के संचालन से जुड़े नियमित खर्च जैसे मरम्मत, रखरखाव और उपयोगिताओं के बिल शामिल करता है।प्रकारराजस्व व्यय मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित होता है।प्रत्यक्ष राजस्व व्यय: तैयार माल या सेवाओं के उत्पादन से सीधे जुड़े खर्च, जैसे कच्चा माल, मजदूरी और सीधे उत्पादन लागत।अप्रत्यक्ष राजस्व व्यय: परिचालन को सहायक खर्च, जैसे प्रशासनिक वेतन, किराया, ब्याज, कर, मूल्यह्रास और रखरखाव।उदाहरणसरकारी स्तर पर उदाहरणों में रक्षा व्यय, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च, पुलिस और प्रशासनिक सेवाएं शामिल हैं।व्यवसाय में, मशीन की नियमित मरम्मत, बिजली बिल, कर्मचारी वेतन या स्टेशनरी खरीद राजस्व व्यय के रूप हैं।उदाहरणस्वरूप, एक बेकरी मशीन खरीदना पूंजीगत व्यय होगा, लेकिन उसकी मरम्मत राजस्व व्यय।महत्वये व्यय सरकार या व्यवसाय की निरंतरता सुनिश्चित करते हैं, क्योंकि बिना इनके दैनिक संचालन रुक जाता है।भारत जैसे देशों में केंद्रीय बजट का बड़ा हिस्सा (लगभग 80-85%) राजस्व व्यय पर जाता हैजो विकासात्मक व्यय को सीमित कर सकता है।उच्च राजस्व व्यय राजकोषीय घाटे को बढ़ा सकता है, इसलिए इसे नियंत्रित रखना आवश्यक होता है।46. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? [CGL (T-I) 13 दिसंबर, 2022 (I-पाली)](A) सरकार द्वारा पेश किया गया वेतन विधेयक एक पूंजीगत व्यय है।(B) सरकार द्वारा किसी कंपनी में किया गया विनिवेश एक प्रकार की पूंजीगत प्राप्ति है।(a) केवल (B)(b) केवल (A)(c) (A) और (B) दोनों(d) न तो (A) और न ही (B)Correct Answer: (a) केवल (B)Solution:पूंजीगत व्यय वह व्यय है, जो भौतिक और स्थायी प्रकार की ठोस परिसंपत्तियों जैसे-अभियंत्रण प्रयोजनाओं, भवनों, भूमि, मशीनरी संयंत्र आदि की वृद्धि या उनके निर्माण के उद्देश्य से लिया जाता है।इसमें सरकार द्वारा किसी कंपनी में किए गए विनिवेश भी शामिल हैं।इससे स्पष्ट है कि वेतन विधेयक एक पूंजीगत व्यय नहीं है। अतः मात्र कथन (B) सत्य है।प्रश्न का प्रारूपऐसे प्रश्नों में आमतौर पर 2-3 कथन दिए जाते हैं, और विकल्प होते हैं:केवल I सत्य है।केवल II सत्य है।I और II दोनों सत्य हैं।कोई भी सत्य नहीं।सामान्य उदाहरण (कृषि विषयक)कथन I: भारत में तटीय क्षेत्र अच्छी तरह सिंचित हैं।कथन II: उपज को एक मौसम में भूमि पर उत्पादित फसल से मापा जाता है।उत्तर: I और II दोनों सत्य। तटीय क्षेत्र सिंचित हैं, जबकि पठारी कम; उपज मौसमी फसल उत्पादन है।तर्कशास्त्र उदाहरणकथन: 'सत्य/असत्य' कथनों पर लागू होते हैं, 'मान्य/अमान्य' तर्कों पर।उत्तर: सत्य। कथन सत्य-असत्य हो सकते हैं, तर्क मान्य-अमान्य।पूर्ण प्रश्न के लिए कथन प्रदान करें ताकि विस्तृत विश्लेषण दूँ।47. 1991 में नई आर्थिक नीति (NEP) के तहत भारत सरकार द्वारा अपनाई गई उदारीकरण और निजीकरण कार्यक्रमों का प्राथमिक परिणाम क्या था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (I-पाली)](a) राजकोषीय नीति सुधार(b) केंद्रीकरण(c) मौद्रिक नीति सुधार(d) वैश्वीकरणCorrect Answer: (d) वैश्वीकरणSolution:विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।वर्ष 1991 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा नई आर्थिक नीति का शुभारंभ करने के पीछे का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को 'वैश्वीकरण' के मैदान में उतारना था।नीति का पृष्ठभूमि1991 में भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था, जिसमें उच्च मुद्रास्फीति (13% से अधिक), राजकोषीय घाटा (9% GDP), और बोपेज संकट प्रमुख थे।तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 24 जुलाई 1991 को नई आर्थिक नीति की घोषणा कीजिसके柱ार थे उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation), और वैश्वीकरण (Globalisation)—जिसे LPG सुधार कहा जाता है।इसका उद्देश्य सरकारी नियंत्रण कम करना, निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना, और वैश्विक अर्थव्यवस्था से एकीकरण था।उदारीकरण के प्रमुख कदमउदारीकरण ने सरकारी हस्तक्षेप घटाया:औद्योगिक लाइसेंसिंग समाप्त: 18 प्रमुख उद्योगों को छोड़कर सभी के लिए लाइसेंस राज खत्म, जिससे निजी उद्योग स्वतंत्र रूप से शुरू हो सके।आयात शुल्क में भारी कटौती: 300% से घटाकर औसतन 50% किया गया, और निर्यात सब्सिडी हटाई गई।विदेशी व्यापार नीति में सुधार: EXIM स्क्रिप्स और Quantitative Restrictions हटाए गए।ये कदम अर्थव्यवस्था को खुला बनाने के लिए थे, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ी।निजीकरण के प्रमुख कदमनिजीकरण ने सार्वजनिक क्षेत्र को सीमित किया:सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में विनिवेश शुरू: बोर्ड फॉर इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंशियल रिकंस्ट्रक्शन (BIFR) गठित।निजी क्षेत्र को आरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश: कोयला, तेल जैसे क्षेत्र खोले गए।FDI सीमा में ढील: 51% तक स्वत: अनुमति, पहले 50% तक सीमित थी।इससे निजी निवेश बढ़ा और दक्षता सुधरी।प्राथमिक परिणाम: वैश्वीकरणउदारीकरण और निजीकरण का प्राथमिक परिणाम वैश्वीकरण था, जो भारत को विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ने का माध्यम बना।बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) आईं: Coca-Cola, Pepsi जैसी कंपनियां लौटीं, जिससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रोजगार बढ़े।निर्यात-आयात वृद्धि: व्यापार बाधाएं हटीं, भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जुड़ा।विदेशी निवेश उछाल: FDI स्टॉक 1991 के $73 मिलियन से 2000 तक $3.6 बिलियन पहुंचा।यह परिवर्तन अर्थव्यवस्था को बंद से खुली बनाकर दीर्घकालिक विकास का आधार रखा।दीर्घकालिक प्रभाव और आलोचनासकारात्मक: IT-BPO क्षेत्र का उदय, मध्यम वर्ग विस्तार, गरीबी दर 45% से घटकर 26% (1991-2011)।नकारात्मक: असमानता बढ़ी (Gini Coefficient 0.32 से 0.38), कृषि उपेक्षित रही, और PSU नुकसान बढ़ा।कुल मिलाकर, LPG ने भारत को 8-9% विकास वाली सबसे तेज अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया।वैश्वीकरण ने न केवल संकट टाला, बल्कि आधुनिक भारत की नींव रखी।48. केंद्रीय बजट के किस कार्य के तहत भारत सरकार सड़कों और अस्पतालों का निर्माण करती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) पुनर्वितरण(b) आवंटन(c) अधिशेष निर्माण(d) स्थिरीकरणCorrect Answer: (b) आवंटनSolution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 वार्षिक वित्तीय विवरण शब्द को परिभाषित करता है, जिसे केंद्रीय बजट भी कहा जाता है।बजट की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय में वित्तीय मामलों के विभाग के बजट प्रभाग को दी जाती है।भारत सरकार सड़कों और अस्पतालों का निर्माण केंद्रीय बजट के आवंटन राशि के तहत करती है।बजट के प्रमुख कार्यकेंद्रीय बजट के चार मुख्य कार्य होते हैं: राजस्व वितरण (Revenue Distribution), पुनर्वितरण (Re-distribution), स्थिरीकरण (Stabilization), और आवंटन (Allocation)।आवंटन कार्य में सरकार विभिन्न क्षेत्रों जैसे सड़कें, अस्पताल, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए संसाधनों का आवंटन करती है।यह सुनिश्चित करता है कि सीमित संसाधनों का इष्टतम उपयोग हो और विकास परियोजनाएं पूरी हों।सड़कों का निर्माणसड़कों के लिए मुख्य रूप से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बजट का उपयोग होता है।बजट 2025 में मंत्रालय को 2.87 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें एनएचएआई को 1.87 लाख करोड़ मिले।PMGSY के चौथे चरण में 62,500 किमी ग्रामीण सड़कें बनाने का लक्ष्य है, चालू वर्ष के लिए 16,100 करोड़ आवंटित।अस्पतालों का निर्माणअस्पतालों और स्वास्थ्य ढांचे के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को बजट आवंटन मिलता हैजिसमें पीएम-जाय योजना और डे केयर कैंसर सेंटर शामिल हैं।बजट 2025-26 में सभी जिला अस्पतालों में 200 कैंसर सेंटर स्थापित करने की योजना है।यह सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों के विकास को बढ़ावा देता है।आवंटन प्रक्रियावित्त मंत्रालय बजट तैयार करता है, जो अनुच्छेद 112 के तहत संसद में पेश होता है।राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को सड़क रखरखाव के लिए धन मिलता है।यह कार्य आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और ग्रामीण संपर्क बढ़ाने में सहायक है।49. निम्नलिखित में से कौन-सा राजकोषीय सुधारों का एक घटक नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) कराधान सुधार(b) ब्याज दर में बदलाव(c) सार्वजनिक व्यय सुधार(d) सार्वजनिक ऋण का नियंत्रणCorrect Answer: (b) ब्याज दर में बदलावSolution:भारत में राजकोषीय नीति भारत की आर्थिक रणनीति की आधारशिला है, जो देश की वृद्धि को विकास और चुनौतियों के विभिन्न चरणों के माध्यम से आगे बढ़ाती है।इसका तात्पर्य सार्वजनिक व्यय, कराधान एवं सार्वजनिक ऋण के संबंध में सरकारी नीति से है।अर्थात यह राजकोषीय सुधारों के घटक के रूप में प्रयोग किए जाते हैं।ये घटक कराधान सुधार, सार्वजनिक व्यय सुधार तथा सार्वजनिक ऋण का नियंत्रण है।जबकि ब्याज दर में बदलाव इसका घटक नहीं बल्कि मौद्रिक नीति का घटक है।राजकोषीय सुधार क्या हैं?राजकोषीय सुधार सरकार की नीतियों में बदलाव होते हैं जो सार्वजनिक वित्त को मजबूत बनाते हैं।इनमें राजकोषीय घाटे को कम करना, सार्वजनिक व्यय का पुनर्गठन, कर प्रणाली में सुधार और ऋण प्रबंधन शामिल होते हैं।ये सुधार आर्थिक दक्षता, समानता और स्थिरता को बढ़ावा देते हैं।मुख्य घटकराजकोषीय सुधारों के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:सार्वजनिक व्यय सुधार: सरकारी खर्च को प्रभावी बनाना, बेकार व्यय कम करना, और शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों पर प्राथमिकता देना।कर सुधार: कर आधार बढ़ाना, कर कानून सरल बनाना, कर दरें तर्कसंगत करना, और कर चोरी रोकना। इससे राजस्व बढ़ता है और अनुपालन सुधरता है।सार्वजनिक ऋण प्रबंधन: ऋण स्तर को टिकाऊ रखना, पारदर्शिता बढ़ाना, और विवेकपूर्ण उधार नीतियां अपनाना।राजकोषीय घाटा नियंत्रण: व्यय और राजस्व के बीच संतुलन बनाना ताकि भविष्य की पीढ़ियों पर बोझ न पड़े।कौन-सा घटक नहीं है?राजकोषीय सुधारों का घटक ब्याज दरों पर नियंत्रण नहीं है। ब्याज दरें मौद्रिक नीति का हिस्सा हैंजो केंद्रीय बैंक (आरबीआई) द्वारा संचालित होती हैं।राजकोषीय सुधार वित्तीय प्रबंधन तक सीमित रहते हैं, न कि मौद्रिक चरों तक।भारत में उदाहरणभारत में 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद राजकोषीय सुधार महत्वपूर्ण बने।एनएबीएआर्ड जैसे लक्ष्यों से घाटा कम किया गया। कर सुधारों में जीएसटी प्रमुख है, जो कर प्रणाली को एकीकृत करता है।महत्व और प्रभावये सुधार मुद्रास्फीति नियंत्रित करते हैं, विकास को बढ़ावा देते हैं।हालांकि, अत्यधिक कटौती से सामाजिक कल्याण प्रभावित हो सकता है। संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।Submit Quiz« Previous12345