संविधान संशोधन

Total Questions: 35

31. संसद ने संविधान (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022 पारित किया है। यह ....... राज्य से संबंधित है। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) उत्तर प्रदेश
Solution:
  • संपत्ति के मौलिक अधिकार को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 300क में रखा गया।
  • अब यह एक विधिक या कानूनी अधिकार है। अनुच्छेद 300क के अनुसार, किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार से ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
  • उद्देश्य और प्रावधान
    • विधेयक का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) की सूचियों में संशोधन करना है।
    • विशेष रूप से, यह उत्तर प्रदेश के चार जिलों (सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज और चंदौली) में गोंड समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान करता है।
    • इससे इन समुदायों को सरकारी लाभ जैसे आरक्षण, छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।​
  • संसदीय प्रक्रिया
    • यह विधेयक 28 मार्च 2022 को लोकसभा में पेश किया गया और शीतकालीन अधिवेशन के दौरान दोनों सदनों से पारित हुआ।
    • राज्यसभा ने इसे उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मंजूरी दी।
    • संविधान (अनुसूचित जनजाति) (उत्तर प्रदेश) आदेश, 1967 और संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में संशोधन शामिल है।​
  • महत्वपूर्ण प्रभाव
    • इस संशोधन से प्रभावित समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, जिसमें शिक्षा, रोजगार और अन्य अवसर शामिल हैं।
    • यह राष्ट्रपति की सिफारिश पर आधारित था और आदिवासी कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रायोजित। समान विधेयक अन्य राज्यों जैसे तमिलनाडु या झारखंड के लिए अलग हैं।​
    • जाति और अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022, · संविधान (अनुसूचित दिसंबर 2022 में पारित किया गया था।
    • विधेयक का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) की सूची को संशोधित करना है।
    • विभिन्न समुदायों की अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने या बाहर करने की मांगों को पूरा करने के यह संशोधन लिए आवश्यक था।
    •  उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की आबादी काफी अधिक है
    • जिससे सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के लिए ऐसे संशोधन महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

32. संविधान (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2022, दिसंबर 2022 में पारित किया गया था और यह किस राज्य से संबंधित है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) उत्तर प्रदेश
Solution:
  • संपत्ति के मौलिक अधिकार को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 300क में रखा गया।
  • अब यह एक विधिक या कानूनी अधिकार है। अनुच्छेद 300क के अनुसार, किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार से ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
  • यह विधेयक दिसंबर 2022 में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था। यह उत्तर प्रदेश राज्य से सीधे संबंधित है
  • जहां अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की सूचियों में संशोधन का प्रस्ताव था।
  • विधेयक का मुख्य उद्देश्य
    • विधेयक का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के चार विशिष्ट जिलों—चंदौली, कुशीनगर, संत कबीर नगर और संत रविदास नगर (महमूदाबाद)—में गोंड समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची से हटाकर अनुसूचित जनजाति के रूप में शामिल करना था।
    • इससे प्रभावित समुदाय को ST लाभ, जैसे आरक्षण और कल्याण योजनाएं, प्राप्त हो सकें।
    • यह संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 और संविधान (अनुसूचित जनजातियां) (उत्तर प्रदेश) आदेश, 1967 में बदलाव लाता है।
  • विधायी प्रक्रिया और पारित होने की तिथियां
    • विधेयक को मार्च 2022 में लोकसभा में पेश किया गया और दिसंबर 2022 में दोनों सदनों से पारित हुआ।
    • लोकसभा में 9 दिसंबर को चर्चा हुई, जबकि राज्यसभा ने इसे स्वीकृति दी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बना, जो राज्य सरकार की सिफारिश पर आधारित था।
  • उत्तर प्रदेश से संबंध का महत्व
    • उत्तर प्रदेश में गोंड समुदाय को पहले SC के रूप में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन स्थानीय सर्वे और मांगों के आधार पर ST दर्जा उचित पाया गया।
    • यह संशोधन केवल इन चार जिलों तक सीमित है, अन्य राज्यों जैसे तमिलनाडु या झारखंड के समान नाम वाले विधेयकों से अलग।
    • इससे SC/ST समुदायों की सही पहचान सुनिश्चित होती है।

33. किस संवैधानिक संशोधन के तहत, राज्य छह से चौदह वर्ष तक की आयु वाले सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 86वें
Solution:
  • 86वें संविधान संशोधन अधिनियम (2002) द्वारा संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 21 क को जोड़कर उसके तहत 6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को उनका मौलिक अधिकार घोषित किया गया।
  • तत्पश्चात संसद द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 पारित किया गया, जो 1 अप्रैल, 2010 को लागू हुआ।
  • प्रमुख प्रावधान
    • इस संशोधन ने संविधान में अनुच्छेद 21A जोड़ा, जो स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्य छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा
    • जैसा कि राज्य कानून द्वारा निर्धारित हो। अनुच्छेद 45 को संशोधित कर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (छह वर्ष से कम आयु) पर जोर दिया गया।
    • साथ ही,अनुच्छेद 51A(k) के माध्यम से माता-पिता या अभिभावकों का कर्तव्य जोड़ा गया कि वे अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर दें।​
  • कार्यान्वयन और प्रभाव
    • यह संशोधन 86वें अधिनियम के बाद 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) से लागू हुआ
    • जो सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा, निजी स्कूलों में 25% आरक्षण और स्कूल प्रबंधन समितियों का गठन सुनिश्चित करता है।
    • राष्ट्रीय प्रारंभिक शिक्षा आयोग की निगरानी में गुणवत्ता पर फोकस किया गया।
    • इससे प्राथमिक शिक्षा में नामांकन बढ़ा, लेकिन चुनौतियां जैसे बुनियादी ढांचा और शिक्षक कमी बनी रहीं।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • संविधान निर्माण के समय अनुच्छेद 45 में 14 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा का लक्ष्य था, लेकिन इसे निर्देशक सिद्धांत तक सीमित रखा गया।
    • 86वां संशोधन ने इसे मौलिक अधिकार बनाकर बाध्यकारी किया, जो सामाजिक न्याय और समानता को मजबूत करता है।​

34. निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन अधिनियम ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 क के तहत शिक्षा के अधिकार को मूल अधिकार बनाया है? [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (III-पाली), CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) 86वां संशोधन अधिनियम, 2002
Solution:
  • 86वें संविधान संशोधन अधिनियम (2002) द्वारा संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 21 क को जोड़कर उसके तहत 6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को उनका मौलिक अधिकार घोषित किया गया।
  • तत्पश्चात संसद द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 पारित किया गया, जो 1 अप्रैल, 2010 को लागू हुआ।
  • मुख्य प्रावधान
    • संशोधन ने तीन महत्वपूर्ण बदलाव किए: अनुच्छेद 21A का समावेश, मौलिक कर्तव्यों में अनुच्छेद 51A(k) जोड़ना जो माता-पिता को बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व देता है
    • तथा नीति निदेशक तत्वों में अनुच्छेद 45 का संशोधन जो 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा को अनिवार्य बनाता है।
    • अनुच्छेद 21A स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्य 6 से 14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा।
    • इससे पहले शिक्षा केवल नीति निदेशक तत्व था, लेकिन अब यह जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 21) से जुड़ गया।​
  • पृष्ठभूमि और कार्यान्वयन
    • यह संशोधन दिसंबर 2002 में पारित हुआ और 2009 के शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) का आधार बना, जो संशोधन को कानूनी रूप प्रदान करता है।
    • RTE ने स्कूलों में 25% आरक्षण, शिक्षक योग्यता और बुनियादी ढांचे जैसे मानदंड निर्धारित किए।
    • संशोधन ने लिंग, जाति या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी बच्चों को समान अवसर सुनिश्चित करने पर जोर दिया।​
  • प्रभाव और महत्व
    • इस संशोधन ने साक्षरता दर बढ़ाने और बाल श्रम कम करने में योगदान दिया, हालांकि कार्यान्वयन में चुनौतियां जैसे अपर्याप्त स्कूल और शिक्षक कमी बनी रहीं।
    • यह संविधान के समानता और गरिमा के सिद्धांतों को मजबूत करता है, जिससे भारत शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति की ओर अग्रसर हुआ।
    • कुल मिलाकर, 86वां संशोधन शिक्षा को लोकतंत्र की आधारशिला बनाने का प्रयास था।

35. अगस्त, 2021 में राम नाथ कोविंद ने सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करने और उन्हें निर्दिष्ट करने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सशक्त बनाने हेतु किस संविधान संशोधन अधिनियम को सहमति दी? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 105वें
Solution:
  • अगस्त, 2021 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करने और उन्हें निर्दिष्ट करने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सशक्त बनाने हेतु 105वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2021 को मंजूरी प्रदान किया।
  • पृष्ठभूमि
    • यह संशोधन 102वें संविधान संशोधन (2018) के प्रभाव को सीमित करने के लिए लाया गया, जिसने राज्यों को OBC सूची तैयार करने का अधिकार छीन लिया था
    • केवल केंद्र तथा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को यह शक्ति दी थी।
    • सुप्रीम कोर्ट के 1 मई 2021 के फैसले (जनहित अभियंत्रण बनाम भारत संघ) ने भी राज्यों के अधिकारों पर सवाल उठाए, जिसके जवाब में यह संशोधन प्रस्तावित हुआ।
    • राष्ट्रपति ने 18 अगस्त 2021 को इसे मंजूरी दी, जो संविधान के अनुच्छेद 342A, 366(26C) और 338B में संशोधन करता है।​
  • मुख्य प्रावधान
    • अनुच्छेद 342A: राज्य विधायिका को सामाजिक और शैक्षिक पिछड़े वर्गों की राज्य सूची तैयार करने, उसमें शामिल या हटाने का अधिकार देता है
    • बशर्ते केंद्र की राष्ट्रीय सूची के साथ संघर्ष न हो।
    • अनुच्छेद 366(26C): "राज्य पिछड़ा वर्ग" की परिभाषा स्पष्ट करता है, जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित वर्गों को संदर्भित करता है।
    • अनुच्छेद 338B: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को केवल केंद्रीय सूची के मामलों की जांच का अधिकार सीमित करता है, जबकि राज्य आयोग राज्य-स्तरीय मामलों को संभालेंगे।​
    • यह संशोधन संघीय ढांचे को मजबूत करता है और राज्यों को OBC आरक्षण (शिक्षा और नौकरियों में) लागू करने में स्वायत्तता प्रदान करता है।​
  • प्रभाव और महत्व
    • संशोधन से राज्यों को अपनी OBC सूचियां अद्यतन करने और उप-वर्गीकरण (जैसे EWS जैसी नीतियां) करने की क्षमता मिली जो महाराष्ट्र, बिहार जैसे राज्यों के लिए महत्वपूर्ण था।
    • इससे सामाजिक न्याय सुनिश्चित होता है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर पिछड़ेपन की पहचान अधिक सटीक होती है।
    • हालांकि, कुछ आलोचनाएं केंद्र-राज्य समन्वय की कमी पर हैं। कुल मिलाकर, यह OBC सशक्तिकरण का मील का पत्थर है।​