राज्य की नीति के निदेशक तत्व

Total Questions: 41

11. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य का नीति निदेशक सिद्धांत है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना
Solution:
  • अनुच्छेद 38(1) राज्य को "लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने" का निर्देश देता है।
  • यह राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) का एक मूल लक्ष्य है, जो राज्य से न्यायपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपेक्षा करता है।
  • अन्य विकल्प (a), (c), और (d) मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) से संबंधित हैं जो संविधान के भाग IV-A में दिए गए हैं।
  •  ये सिद्धांत आयरिश संविधान से प्रेरित हैं और कानूनी रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन नीति निर्माण में बाध्यकारी हैं।
  • उपयोगकर्ता के प्रश्न "निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य का नीति निदेशक सिद्धांत है?" में विकल्पों का उल्लेख नहीं है
  • इसलिए पूर्ण विवरण में इन सिद्धांतों की विस्तृत व्याख्या दी जा रही है।​
  • उत्पत्ति और प्रकृति
    • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों की अवधारणा आयरिश संविधान के अनुच्छेद 45 से ली गई है, जो डॉ. बी.आर. अंबेडकर और संविधान सभा के सदस्यों द्वारा कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए शामिल किए गए।
    • अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये सिद्धांत मौलिक अधिकारों के पूरक हैं और राज्य को कानून बनाते समय उनका पालन करना चाहिए, हालांकि अदालतों द्वारा प्रवर्तित नहीं किए जा सकते।
    • मौलिक अधिकार नकारात्मक (राज्य पर प्रतिबंध) हैं, जबकि DPSP सकारात्मक निर्देश हैं जो सामूहिक कल्याण पर केंद्रित हैं।​
  • वर्गीकरण
    • ये सिद्धांत समाजवादी, गांधीवादी, उदारवादी-बौद्धिक और अन्य सिद्धांतों में विभाजित हैं:
    • समाजवादी सिद्धांत: अनुच्छेद 38 (सामाजिक व्यवस्था को बढ़ावा), 39 (धन संकेंद्रण रोकना, समान वेतन), 41 (रोजगार, शिक्षा, सहायता), 42 (काम की न्यायोचित स्थितियां), 43 (जीविका मजदूरी), 43A (श्रमिक भागीदारी), 47 (पोषण स्तर सुधार)।​
    • गांधीवादी सिद्धांत: अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतें), 43B (सहकारी समितियां), 46 (SC/ST हित), 47 (नशा निषेध), 48 (कृषि सुधार)।​
    • उदारवादी सिद्धांत: अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता), 45 (बाल शिक्षा), 48A (पर्यावरण संरक्षण), 49 (स्मारकों की रक्षा), 50 (न्यायपालिका पृथक्करण), 51 (अंतरराष्ट्रीय शांति)।​
  • महत्व और कार्यान्वयन
    • DPSP ने भूमि सुधार, पंचायती राज (73वें संशोधन), शिक्षा का अधिकार (RTE अधिनियम), MGNREGA जैसी योजनाओं को प्रेरित किया।
    • सर्वोच्च न्यायालय ने गोलकनाथ (1967) और केशवानंद भारती (1973) मामलों में इन्हें संविधान की आत्मा माना।
    • हाल के संशोधनों ने इन्हें मजबूत किया, जैसे 42वें संशोधन द्वारा 39A, 43A, 48A जोड़े गए।

12. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में सूचीबद्ध नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) कुछ मामलों में ट्रांसजेंडरों के लिए अधिकार
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) में विशेष रूप से ट्रांसजेंडरों के लिए अधिकारों का कोई सूचीबद्ध अनुच्छेद नहीं है।
  • जबकि DPSP कल्याणकारी राज्य की बात करते हैं (d), और समान वेतन (b) तथा समान नागरिक संहिता (c) स्पष्ट रूप से अनुच्छेद 39(d) और 44 में दिए गए हैं, ट्रांसजेंडरों के अधिकार मुख्य रूप से न्यायिक व्याख्याओं और बाद में लागू किए गए कानूनों के माध्यम से सुरक्षित किए गए हैं।
  • DPSP की प्रकृति
    • ये सिद्धांत आयरिश संविधान से प्रेरित हैं और कल्याणकारी राज्य की स्थापना का लक्ष्य रखते हैं।
    • मौलिक अधिकारों (भाग III) के विपरीत, DPSP सकारात्मक निर्देश हैं जो नीति निर्माण में मार्गदर्शन करते हैं। अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है
    • इन्हें लागू करने का प्रयास राज्य को करना चाहिए।​
  • प्रमुख वर्गीकरण
    • DPSP को समाजवादी, गांधीवादी, उदारवादी और अन्य सिद्धांतों में विभाजित किया जाता है:
    • समाजवादी: अनुच्छेद 38 (समानता को बढ़ावा), 39 (धन का वितरण, समान वेतन), 41 (रोजगार का अधिकार), 43 (न्यूनतम मजदूरी), 47 (पोषण स्तर सुधार)।​
    • गांधीवादी: अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायत), 43B (सहकारिता), 46 (SC/ST हित), 47 (नशा निषेध), 48 (कृषि-पशुपालन)।
    • उदारवादी: अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता), 45 (शिक्षा), 48A (पर्यावरण संरक्षण), 49 (स्मारकों की रक्षा), 50 (न्यायपालिका पृथक्करण)।​
  • क्या सूचीबद्ध नहीं है
    • प्रश्न में "निम्नलिखित में से कौन-सा" विकल्पों का उल्लेख नहीं है, लेकिन सामान्य MCQ संदर्भों से "वैज्ञानिक स्वभाव, मानवता और जांच की भावना का विकास" (scientific temper) DPSP में स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं है।
    • यह मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51A) का हिस्सा है। अन्य विकल्प जैसे पोषण स्तर ऊंचा करना (अनु. 47) या कमजोर वर्गों के हित (अनु. 46) DPSP में हैं।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • DPSP मौलिक अधिकारों के अधीन हैं, लेकिन संशोधनों (जैसे 25वां, 42वां) ने इन्हें मजबूत किया। उदाहरणस्वरूप, अनुच्छेद 39(b)-(c) को प्राथमिकता दी गई।
    • ये गैर-न्यायोचित होने के बावजूद नीतियों को प्रभावित करते हैं।

13. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत में राज्य को, 'आय, स्थिति, सुविधाओं और अवसरों में' असमानताओं को कम करने की आवयश्यकता को संविधान संशोधन ....... द्वारा जोड़ा गया था। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 44वां
Solution:
  • आय, स्थिति, सुविधाओं और अवसरों में असमानताओं को कम करने की आवश्यकता को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38(2) में जोड़ा गया था।
  • यह संशोधन, जो आपातकाल के बाद किया गया था, राज्य पर यह दायित्व डालता है
  • वह न केवल व्यक्तियों के बीच, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के समूहों के बीच भी असमानताओं को कम करने का प्रयास करे, जिससे सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो।
  • संबंधित अनुच्छेद 38
    • अनुच्छेद 38 राज्य को यह दायित्व देता है कि वह ऐसी सामाजिक व्यवस्था स्थापित करे जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय जीवन के सभी अंगों में परिलक्षित हो।
    • बाद में इसी अनुच्छेद में उप‑धारा (2) जोड़कर स्पष्ट किया गया कि राज्य न केवल व्यक्तियों के बीच, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों और विभिन्न व्यवसायों में लगे समूहों के बीच आय, स्थिति, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा।​
  • 44वें संशोधन से हुआ परिवर्तन
    • 44वें संशोधन, 1978 के तहत अनुच्छेद 38(2) का समावेश हुआ, जिसने “आय” के साथ “स्थिति, सुविधाओं और अवसरों” में असमानताओं को कम करना भी राज्य का संवैधानिक दायित्व बना दिया।
    • इस संशोधन का उद्देश्य आपातकाल के बाद संविधान को अधिक लोकतांत्रिक और कल्याणकारी बनाना तथा सामाजिक‑आर्थिक न्याय की दिशा में राज्य की भूमिका को और स्पष्ट करना था।​
  • आय, स्थिति, सुविधाएं और अवसरका महत्व
    • इन चारों शब्दों का अर्थ यह है कि असमानता केवल कमाई या संपत्ति तक सीमित नहीं मानी जाएगी, बल्कि समाज में व्यक्ति या समूह की सामाजिक प्रतिष्ठा, मिलने वाली सार्वजनिक सुविधाएं (शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास आदि) और जीवन में आगे बढ़ने के अवसर भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
    • इस प्रकार राज्य को ऐसी नीतियां बनाने के लिए प्रेरित किया गया जो क्षेत्रीय असंतुलन, वर्गीय विषमता और पेशागत भेदभाव को कम करके एक अधिक समानतामूलक समाज की स्थापना करें।​
  • नीति निदेशक सिद्धांतों के व्यापक लक्ष्य
    • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत समग्र रूप से एक कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना को साकार करने के लिए मार्गदर्शन देते हैं।
    • 44वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 38(2) में किया गया यह परिवर्तन इस बात का प्रतीक है
    • संविधान निर्माताओं और बाद के संशोधनों ने आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और अवसरगत बराबरी को भी उतना ही आवश्यक माना है।​

14. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य का नीति निदेशक सिद्धांत नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) हमारी संस्कृति की समृद्ध विरासत को महत्व देना
Solution:
  • "हमारी संस्कृति की समृद्ध विरासत को महत्व देना और उसका संरक्षण करना" एक मौलिक कर्तव्य है
  • जिसे अनुच्छेद 51A(f) में सूचीबद्ध किया गया है। यह नागरिकों पर डाला गया दायित्व है।
  • जबकि अन्य विकल्प (a) अनुच्छेद 50, (b) अनुच्छेद 44, और (d) अनुच्छेद 43B में स्पष्ट रूप से राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) के रूप में दिए गए हैं, जो राज्य के लिए निर्देश हैं।
  • भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy - DPSP) वर्णित हैं
  • जो राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं। ये सिद्धांत कानूनी रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं
  • लेकिन नीति निर्माण में बाध्यकारी हैं। उपयोगकर्ता के प्रश्न "निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य का नीति निदेशक सिद्धांत नहीं है?" में विकल्प स्पष्ट रूप से दिए गए नहीं हैं
  • इसलिए सामान्यतः पूछे जाने वाले MCQ-आधारित प्रश्नों के आधार पर विस्तृत व्याख्या दी जा रही है।​
  • DPSP की प्रकृति
    • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत आयरिश संविधान से प्रेरित हैं और मौलिक अधिकारों (भाग III) के पूरक हैं।
    • अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये राज्य नीति के लिए मौलिक हैं
    • लेकिन न्यायालय द्वारा लागू नहीं किए जा सकते। ये समाजवादी (अनु. 38-39), गांधीवादी (अनु. 40-48), उदारवादी-बौद्धिक (अनु. 50-51) और अन्य सिद्धांतों पर आधारित हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, अनुच्छेद 39 में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए समान कार्य हेतु समान वेतन सुनिश्चित करना शामिल है
    • जबकि केवल पुरुषों तक सीमित कोई प्रावधान नहीं।​​
  • सामान्य गलत विकल्प के उदाहरण
    • प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, UPSC) में अक्सर निम्नलिखित में से एक को DPSP का हिस्सा नहीं माना जाता:
    • काम का अधिकार: यह मौलिक अधिकार (अनु. 21 के तहत व्याख्या) या 86वें संशोधन से RTE से जुड़ा है, DPSP नहीं।​
    • सूचना का अधिकार: यह 2005 का RTI अधिनियम है, DPSP का हिस्सा नहीं।​
    • शिक्षा का अधिकार: 2002 के 86वें संशोधन से अनु. 21A बनाकर मौलिक अधिकार बना, पहले अनु. 45 में था लेकिन अब DPSP नहीं।​
    • अन्य गलत: "केवल पुरुषों के लिए समान पारिश्रमिक" (अनु. 39 सही मायने में男女 दोनों के लिए)।​
  • महत्वपूर्ण वर्गीकरण
    • समाजवादी: आय असमानता कम करना (अनु. 38), धन संकेंद्रण रोकना (अनु. 39)।​
    • गांधीवादी: ग्राम पंचायतें (अनु. 40), कुटीर उद्योग (अनु. 43), गौ-रक्षा (अनु. 48)।
    • अन्य: पर्यावरण संरक्षण (अनु. 48A), RTE पहले अनु. 45 में था लेकिन संशोधन से हटाया। यदि प्रश्न में "14 वर्ष तक निःशुल्क शिक्षा" विकल्प है
    • तो अब यह DPSP नहीं क्योंकि मौलिक अधिकार बन गया।​

15. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 36 से 51 किन मुद्दों से संबंधित नहीं हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) किसी व्यक्ति या समूह के लाभ के लिए आर्थिक उतार-चढ़ाव की स्थिति पर नियंत्रण
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 36 से 51 (DPSP) में लोक कल्याण को सुरक्षित करना (a), समान न्याय (c), और श्रमिकों के लिए उपयुक्त कानून (d) जैसे मुद्दे शामिल हैं।
  • हालाँकि, DPSP में सीधे तौर पर किसी व्यक्ति या समूह के लाभ के लिए आर्थिक उतार-चढ़ाव की स्थिति पर नियंत्रण के लिए विशिष्ट निर्देश शामिल नहीं है।
  • यह मुद्दा सामान्य आर्थिक नीतियों और विनियामक प्राधिकरणों के कार्यक्षेत्र में आता है।
  • कवर किए गए प्रमुख क्षेत्रों में समान न्याय, निःशुल्क विधिक सहायता, श्रमिकों के लिए उपयुक्त कानून और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है।
  • किसी व्यक्ति या समूह के लाभ के लिए आर्थिक उतार-चढ़ाव का नियंत्रण अनुच्छेद 36 से 51 में उल्लिखित नहीं है।
    Other Information
  • राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP):
    • ये सिद्धांत भारतीय संविधान के भाग IV में सूचीबद्ध हैं।
    • ये गैर-न्यायसंगत हैं, जिसका अर्थ है कि ये किसी भी अदालत द्वारा लागू नहीं किए जा सकते हैं।
    • उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियाँ बनाना है जिनके तहत नागरिक एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सकें।
  •  अनुच्छेद 39:
    • राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि नागरिकों, पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से, आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार हो।
    • यह यह भी अनिवार्य करता है कि भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण साझा भलाई की सेवा करने के लिए वितरित किया जाए।
  • अनुच्छेद 41:
    • राज्य को बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और विकलांगता के मामलों में सार्वजनिक सहायता प्रदान करने का निर्देश देता है।
  • अनुच्छेद 42:
    • राज्य को काम की न्यायसंगत और मानवीय परिस्थितियों और मातृत्व राहत को सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान करने का निर्देश देता है।

16. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 1 दिसंबर 2023 (11-पाली)]

Correct Answer: (b) भारत के संविधान के अनुच्छेद 36-51 नीति-निदेशक सिद्धांतों से संबंधित हैं।
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत आते हैं और अनुच्छेद 36 से अनुच्छेद 51 तक वर्णित हैं।
  • ये सिद्धांत कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए सरकारों को मार्गदर्शिका प्रदान करते हैं। अन्य विकल्प गलत अनुच्छेद सीमाओं को दर्शाते हैं
  • अनुच्छेद 52-62 राष्ट्रपति से, अनुच्छेद 12-35 मौलिक अधिकारों से, और अनुच्छेद 62-71 मुख्य रूप से राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से संबंधित हैं।
  • संवैधानिक आधार और प्रकृति
    • नीति निदेशक सिद्धांतों का उल्लेख संविधान के भाग‑IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक किया गया है।
    • ये सिद्धांत शासन के “मूल मार्गदर्शक” हैं; इनका उद्देश्य सामाजिक‑आर्थिक न्याय स्थापित कर भारत को कल्याणकारी राज्य बनाना है, न कि केवल राजनैतिक लोकतंत्र।
  • लागू होने (non‑justiciable) की बात
    • अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति निदेशक सिद्धांत न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय (enforceable) नहीं हैं
    • यानी इनको न मानने पर कोई नागरिक सीधे अदालत में जाकर इन्हें लागू करवाने की माँग नहीं कर सकता।
    • फिर भी अनुच्छेद 37 ही यह भी कहता है कि ये सिद्धांत “मूलभूत” हैं और राज्य पर इनका पालन करने का कर्तव्य है
    • इसलिए इनका कानूनी नहीं, बल्कि संविधानिक‑नैतिक दायित्व है।
  • मौलिक अधिकारों से संबंध
    • मौलिक अधिकार व्यक्तियों के लिए “रक्षा‑ढाल” हैं, जो राज्य पर नकारात्मक प्रतिबंध लगाते हैं
    • जैसे – राज्य ऐसा‑ऐसा नहीं कर सकता), जबकि नीति निदेशक सिद्धांत राज्य को सकारात्मक दिशा देते हैं (जैसे – राज्य को ऐसा‑ऐसा करने का प्रयत्न करना चाहिए)।
    • सुप्रीम कोर्ट ने बाद के कई निर्णयों में साफ किया कि मौलिक अधिकार और नीति निदेशक सिद्धांत परस्पर विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं
    • आदर्श स्थिति यह मानी जाती है कि कानून बनाते समय दोनों का सामंजस्य किया जाए।
  • प्रमुख सही कथनपरीक्षा की दृष्टि से
    • अधिकतर प्रतियोगी परीक्षाओं में “कौन‑सा कथन सही है / नहीं है” जैसे प्रश्नों में निम्न प्रकार के तथ्य पूछे जाते हैं, जिन्हें सही मानना चाहिए:
    • “नीति निदेशक सिद्धांत संविधान के भाग‑IV में अनुच्छेद 36‑51 के अंतर्गत हैं” – यह कथन सही है।
    • “ये सिद्धांत सामाजिक‑आर्थिक लोकतंत्र स्थापित करने और कल्याणकारी राज्य की दिशा में राज्य का मार्गदर्शन करते हैं” – यह भी सही कथन है।
    • “ये सिद्धांत न्यायालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से लागू नहीं किए जा सकते, परंतु राज्य के लिए पालन योग्य माने गए हैं” – यह कथन भी सही है।
    • “राज्य की नीतियाँ बनाते समय सरकार को इन्हें ध्यान में रखना चाहिए” – इस प्रकार का कथन भी सही माना जाता है।
    • इसके विपरीत, जो कथन आम तौर पर गलत माने जाते हैं, वे इस प्रकार के होते हैं:
    • “ये सिद्धांत मौलिक अधिकारों की तरह न्यायिक रूप से लागू किए जा सकते हैं” – गलत।
    • “नीति निदेशक सिद्धांत केवल केन्द्र सरकार पर लागू होते हैं, राज्यों पर नहीं” – गलत (ये पूरे ‘State’ – अर्थात संघ और राज्यों – दोनों पर लागू माने जाते हैं)।
  • वर्गीकरणसमाजवादी, गांधीवादी और उदारजनतांत्रिक
    • यदि प्रश्न में विस्तार से पूछा जाए, तो अक्सर सिद्धांतों के वर्गीकरण पर भी कथन आते हैं:
    • समाजवादी सिद्धांत: अनुच्छेद 38, 39, 39A, 41, 42, 43, 43A, 47 आदि – ये सामाजिक‑आर्थिक समानता, आजीविका के साधन, समान वेतन, काम की मानवोचित दशाएँ, सार्वजनिक स्वास्थ्य इत्यादि से जुड़े हैं।
    • गांधीवादी सिद्धांत: अनुच्छेद 40, 43, 43B, 46, 47, 48 आदि – ग्राम‑पंचायत, कुटीर‑उद्योग, नशा‑निवारण, गौ‑संरक्षण, कमजोर वर्गों के उत्थान आदि।
    • उदार‑जनतांत्रिक या सामान्य सिद्धांत: अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता), 45 (प्रारंभिक शिक्षा), 48A (पर्यावरण‑संरक्षण), 49 (स्मारक‑संरक्षण), 50 (न्यायपालिका‑कार्यपालिका पृथक्करण), 51 (अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा) आदि।
  • यदि विकल्पआधारित प्रश्न हो
    • आपके वाक्य “निम्नलिखित में से कौन‑सा कथन सही है” से लगता है कि असल प्रश्न में 4 विकल्प दिए होंगे।
    • ऐसे प्रश्नों में सही कथन की पहचान करने के लिए यह चेक‑लिस्ट रखें:
    • क्या कथन यह कह रहा है कि इन्हें न्यायालय लागू करवा सकता है? – तो वह सामान्यतः गलत होगा।
    • क्या कथन यह कहता है कि ये संविधान के भाग‑IV, अनुच्छेद 36‑51 में हैं, या ये राज्य के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं
    • यह कि इनका उद्देश्य कल्याणकारी राज्य बनाना है? – तो वह सामान्यतः सही होगा।
    • क्या कथन यह कह रहा है कि ये केवल केन्द्र / केवल राज्यों पर लागू हैं? – वह गलत होगा, क्योंकि ‘State’ शब्द दोनों के लिए प्रयुक्त है।
    • क्या कथन इन्हें “राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक न्याय तथा समानता” से जोड़ता है? – सामान्यतः यह सही दिशा में होता है।

17. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा से संबंधित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 48 A
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण के संरक्षण तथा उसमें सुधार करने और देश के वन तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का निर्देश देता है।
  • यह प्रावधान 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा DPSP में जोड़ा गया था, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य के दायित्व को मजबूत करता है।
  • अनुच्छेद 48A का पाठ
    • संविधान के भाग IV (राज्य नीति के निर्देशक तत्व) में शामिल यह अनुच्छेद 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया। इसका मूल पाठ है
    • राज्य, देश के पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन और वनों तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा।" । यह राज्य (सरकार) पर एक नीतिगत दायित्व लगाता है
    • जो न्यायिक रूप से प्रवर्तनीय नहीं है, लेकिन अदालतें इसे मौलिक अधिकारों से जोड़कर लागू करती हैं ।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन (मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) के प्रभाव से यह प्रावधान जोड़ा गया।
    • इंदिरा गांधी सरकार ने पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने के लिए 42वें संशोधन में अनुच्छेद 48A और मौलिक कर्तव्य के रूप में अनुच्छेद 51A(g) शामिल किया ।​
    • इससे पहले संविधान में पर्यावरण का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, लेकिन अनुच्छेद 47 (पोषण स्तर सुधार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े।
  • संबंधित संवैधानिक प्रावधान
    • अनुच्छेद 51A(g): नागरिकों का मौलिक कर्तव्य—प्राकृतिक पर्यावरण (वन, झील, नदी, वन्यजीव) की रक्षा और संवर्धन करना तथा प्राणियों के प्रति दया रखना ।​
    • अनुच्छेद 21: स्वच्छ पर्यावरण को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया (सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में) ।​
    • अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौतों को लागू करने के लिए कानून बनाने की शक्ति ।​
  • कानूनी और व्यावहारिक प्रभाव
    • अनुच्छेद 48A ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 जैसे कानूनों को जन्म दिया ।
    • न्यायालयों ने इसे सार्वजनिक हित याचिकाओं (PIL) में उपयोग किया, जैसे गोविंद बल्लabh पंथ बनाम उड़ीसा राज्य (वन कटाई रोकना) और एम.सी. मेहता मामलों में प्रदूषण नियंत्रण । राज्य सरकारें वन नीतियां, अभयारण्य और हरित पट्टा योजनाओं से इसका पालन करती हैं।

18. भारतीय संविधान के राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांतों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

A. 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम ने संविधान में राज्य के छः नीति-निदेशक सिद्धांतों को जोड़ा।

B. 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम ने अनुच्छेद 45 के स्थान पर एक नया अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया और प्राथमिक शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बना दिया।

Correct Answer: (c) केवल B
Solution:
  • कथन A असत्य है:
    42वें संशोधन अधिनियम, 1976 ने संविधान में चार नए नीति-निदेशक सिद्धांत जोड़े: अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता), 43A (उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी), 48A (पर्यावरण संरक्षण), और अनुच्छेद 39 में एक खंड (बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसर)। इसने छः सिद्धांत नहीं जोड़े।
  • कथन B सत्य है: 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 ने अनुच्छेद 45 की विषय-वस्तु को बदला और प्राथमिक शिक्षा को अनुच्छेद 21A के तहत एक मौलिक अधिकार बना दिया।
  • भारतीय संविधान के राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy - DPSP) संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित हैं।
  • ये राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाने के दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
  • ये सिद्धांत आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं और मौलिक अधिकारों के पूरक के रूप में कार्य करते हैं।​
  • विशेषताएं
    • ये सिद्धांत कानूनी रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं, जैसा कि अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है, लेकिन राज्य के प्रशासन में मौलिक हैं।
    • राज्य इनका पालन करने के लिए बाध्य है, और न्यायालय इन्हें कानूनों की वैधता जांचने के लिए उपयोग कर सकता है।
    • इनका उद्देश्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है, जिसमें समानता, गरीबी उन्मूलन और गांधीवादी सिद्धांत शामिल हैं।​
  • वर्गीकरण
    • समाजवादी सिद्धांत: अनुच्छेद 38-39 में समान न्याय, संसाधनों का समान वितरण और धन संकेंद्रण रोकना शामिल है।
    • गांधीवादी सिद्धांत: अनुच्छेद 40, 43, 46-48 में ग्राम पंचायतें, कुटीर उद्योग, आदिवासी कल्याण और गौ-रक्षा पर जोर।
    • उदारवादी बौद्धिक सिद्धांत: अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता), 50 (न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण) और 51 (अंतरराष्ट्रीय शांति)।​
  • महत्व और प्रभाव
    • ये सिद्धांत सरकारों को नीति निर्माण में मार्गदर्शन देते हैं, जैसे भूमि सुधार, शिक्षा का अधिकार और MGNREGA।
    • संविधान के 42वें संशोधन ने इन्हें संवैधानिक रूप से प्राथमिकता दी। न्यायालय ने Champakam Dorairajan मामले से Minerva Mills तक इनकी व्याख्या में संतुलन बनाया।​
  • चुनौतियां
    • इनकी गैर-प्रवर्तनीयता के कारण आलोचना होती है, लेकिन ये लोकतांत्रिक जवाबदेही बढ़ाते हैं। वर्तमान में, ये सतत विकास लक्ष्यों से जुड़ चुके हैं।

19. 1976 के 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान में कितने निदेशक तत्व जोड़े या संशोधित किए गए? [Phase-XI 28 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) चार
Solution:
  • 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान में चार नए नीति-निदेशक तत्व जोड़े गए:
  • अनुच्छेद 39A: समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता।
  • अनुच्छेद 43A: उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी।
  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन।
  • अनुच्छेद 39 में एक नया खंड जोड़ा गया जो बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करता है।
  • अनुच्छेद 39ए - समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता।
  •  अनुच्छेद 43ए - उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी।
  • अनुच्छेद 48ए - पर्यावरण का संरक्षण एवं सुधार तथा वनों एवं वन्य जीवों की सुरक्षा।
  • अनुच्छेद 39 (एफ) - शोषण तथा नैतिक और भौतिक परित्याग से बच्चों और युवाओं का संरक्षण (अनुच्छेद 39 को संशोधित करने के लिए जोड़ा गया)।
    Other Information
  •  राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत (डीपीएसपी)
    •  राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत भारत राज्य को नियंत्रित करने वाली संघीय संस्थाओं को दिए गए दिशानिर्देश या सिद्धांत हैं
    •  जिन्हें कानून और नीतियां बनाते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
    •  इन्हे संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक सूचीबद्ध किया गया है।
    •  सिद्धांतों का उद्देश्य ऐसी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां बनाना है जिनके तहत नागरिक अच्छा जीवन जी सकें।
    •  वे प्रकृति में गैर-न्यायसंगत हैं, अर्थात वे किसी भी अदालत द्वारा लागू नहीं किए जा सकते हैं, लेकिन निर्धारित सिद्धांतों को देश के शासन में मौलिक माना जाता है।
  •  42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
    •  इसे "मिनी-संविधान" के नाम से भी जाना जाता है, इस संशोधन ने भारतीय संविधान में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए।
    •  इसने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की शक्तियों को कम करने का प्रयास किया तथा अन्य परिवर्तनों के अलावा संसद को संविधान में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्रदान की।
    •  इसने संविधान में दस मौलिक कर्तव्य भी जोड़े।
    •  इसके कई प्रावधानों को बाद में 1978 के 44वें संशोधन अधिनियम द्वारा निरस्त कर दिया गया।

20. निम्नलिखित उद्योगों में से एक उद्योग को प्रोत्साहन दिया जाना हमारे संविधान के राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत का हिस्सा है और वह उद्योग ....... है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) कुटीर उद्योग
Solution:
  • अनुच्छेद 43 राज्य को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों (Cottage Industries) को बढ़ावा देने का निर्देश देता है।
  • यह DPSP का एक गांधीवादी सिद्धांत है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, रोज़गार सृजित करना और विकेंद्रीकृत आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
  • भारत का संविधान राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों के संवर्धन को अपने लक्ष्यों में से एक के रूप में शामिल करता है (अनुच्छेद 43)।
  • कुटीर उद्योग रोजगार प्रदान करके और पारंपरिक अर्थव्यवस्था का समर्थन करके ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • ये उद्योग आम तौर पर छोटे पैमाने पर संचालित होने वाले होते हैं जो परिवारों द्वारा अपने स्वयं के उपकरणों और संसाधनों का उपयोग करके चलाए जाते हैं।
  • कुटीर उद्योगों का संवर्धन पारंपरिक शिल्प और कौशल को संरक्षित करने में मदद करता है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग हैं।
    Other Information
  • राज्य के नीति निदेशक तत्व
    •  ये भारत के राज्य को नियंत्रित करने वाले संघीय संस्थानों को दिए गए दिशानिर्देश या सिद्धांत हैं
    •  जिन्हें कानून और नीतियों को बनाते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
    •  ये भारत के संविधान के भाग IV में निहित हैं, जिसमें अनुच्छेद 36 से 51 शामिल हैं।
    •  इन सिद्धांतों का उद्देश्य ऐसी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियाँ बनाना है जिनके तहत नागरिक एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सकें।
    •  इनका उद्देश्य कल्याणकारी राज्य के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना भी है।
  • कुटीर उद्योग
    •  यह छोटे पैमाने पर उत्पादन गतिविधियों को संदर्भित करता है आम तौर पर घर पर परिवार के सदस्यों द्वारा अपने स्वयं के उपकरणों का उपयोग करके किए जाते हैं।
    •  ये उद्योग श्रम-गहन होते हैं और पारंपरिक कौशल और विधियों पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं।
    •  कुटीर उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे रोजगार प्रदान करते हैं और स्थानीय संसाधनों के उपयोग में मदद करते हैं।
    • इसके उदाहरणों में हथकरघा बुनाई मिट्टी के बर्तन, हस्तशिल्प और कढ़ाई शामिल हैं।
  •  ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास
    •  इसमें अपेक्षाकृत अलग-थलग और कम आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता और आर्थिक कल्याण में सुधार करना शामिल है।
    •  कुटीर उद्योगों सहित ग्रामीण उद्योगों का संवर्धन ग्रामीण आर्थिक विकास का एक अनिवार्य हिस्सा है।
    •  यह स्थानीय रोजगार के अवसर प्रदान करके शहरी क्षेत्रों में प्रवास को कम करने में मदद करता है।
    •  ग्रामीण विकास पहल में अक्सर उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ बुनियादी ढाँचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में सुधार शामिल होता है।