राष्ट्रपति

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1. भारत के केंद्रशासित प्रदेशों का प्रशासन कौन चलाता है? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) राष्ट्रपति
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 239(1) के तहत, केंद्रशासित प्रदेशों का प्रशासन सीधे राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति, इन क्षेत्रों का प्रशासन अपने द्वारा नियुक्त एक प्रशासक (जिसे उपराज्यपाल या मुख्य आयुक्त भी कहा जाता है) के माध्यम से करते हैं।
  • हालाँकि दिल्ली और पुडुचेरी जैसे कुछ केंद्रशासित प्रदेशों में अपनी विधानसभाएँ और मंत्रिपरिषद हैं, फिर भी अंतिम संवैधानिक अधिकार और नियंत्रण केंद्र सरकार (राष्ट्रपति) के पास ही रहता है।
  • संविधान के भाग V में अनुच्छेद 52 से 78 तक संघ कार्यपालिका से संबंधित है।
  •  संघ कार्यकारिणी में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, मंत्रिपरिषद और भारत के महान्यायवादी शामिल होते हैं।
  •  राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है, जिसमें शामिल हैं:
    • संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य:
    •  राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य; और
    • केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और पुदुचेरी की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य
  •  राष्ट्रपति भारत के केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन करता है।
  •  राष्ट्रपति का चुनाव एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार होता है और मतदान गुप्त मतदान द्वारा होता है।
  •  राष्ट्रपति पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए पद पर रहता है।
    Other Information
  • मुख्यमंत्री
    •  वह राज्य सरकार का मुखिया होता है।
    •  राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है।
    •  मुख्यमंत्री का चुनाव राज्य विधान सभा में बहुमत के माध्यम से किया जाता है।
    •  मुख्यमंत्री का कार्यकाल निश्चित नहीं होता है और वह राज्यपाल की मर्जी पर अपना पद धारण करता है ।
    •  वह अंतर-राज्य परिषद और राष्ट्रीय विकास परिषद के सदस्य हैं जिनकी अध्यक्षता प्रधान मंत्री करते हैं।
  • भारत के प्रधान मंत्री :
    •  प्रधान मंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधान मंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
    •  भारत का प्रधान मंत्री भारत सरकार का प्रमुख होता है।
    •  वह मंत्रिपरिषद का प्रमुख भी होता है।
    •  वह कैबिनेट का अध्यक्ष होता है और कैबिनेट की बैठकों की अध्यक्षता करता है।
    •  वह भारत के राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं।
    •  प्रधान मंत्री भारत के राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपते हैं।
  • विधान सभा के सदस्य (विधायक)
    •  विधायक जनता द्वारा चुने जाते हैं।
    •  फिर वे विधान सभा के सदस्य बनते हैं और सरकार भी बनाते हैं।
    •  इस प्रकार हम कहते हैं कि विधायक जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

2. भारत का नाममात्र कार्यकारी प्राधिकारी (nominal executive authority) कौन है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) राष्ट्रपति
Solution:
  • भारत एक संसदीय प्रणाली पर आधारित है, जहाँ राष्ट्रपति राज्य का नाममात्र या संवैधानिक प्रमुख होता है। इसका अर्थ है कि सभी सरकारी निर्णय औपचारिक रूप से उन्हीं के नाम पर लिए जाते हैं।
  • हालाँकि, वास्तविक कार्यकारी प्राधिकारी (real executive authority) प्रधानमंत्री और उनके नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में निहित होती है। प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद ही वास्तविक नीतियों और कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
  • राष्ट्रपति को राज्य का औपचारिक प्रमुख माना जाता है, जो राष्ट्र की एकता, अखंडता और एकजुटता के प्रतीक के रूप में कार्य करता है।
  •  यद्यपि भारत के राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्तियां निहित हैं लेकिन इनका प्रयोग वह प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है।
  •  राष्ट्रपति की भूमिका पर्याप्त सीमा तक औपचारिक होती है जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री और उनकी परिषद में निहित होती है।
    Other Information
  • भारत में राष्ट्रपति का पद 26 जनवरी, 1950 को देश के गणतंत्र बनने पर स्थापित हुआ।
  •  भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 में कहा गया है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
  • राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी शामिल होते हैं।
  • राष्ट्रपति अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक अपने पद पर बने रहते हैं।
  •  मृत्यु, त्यागपत्र या पदच्युति के कारण पद रिक्त होने की स्थिति में, उपराष्ट्रपति नए राष्ट्रपति के निर्वाचित होने तक राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन करता है।

3. निम्नलिखित में से कौन, भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचन मंडल का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रपति के महाभियोग का हिस्सा नहीं है? [C.P.O. S.I. 7 जून, 2016 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) राज्य विधानसभा
Solution:
  • राष्ट्रपति का चुनाव (अनुच्छेद 54):
    इसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।
  • राष्ट्रपति का महाभियोग (अनुच्छेद 61):
    इसमें केवल संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत) ही भाग लेते हैं। राज्य विधानसभाओं के सदस्य महाभियोग की प्रक्रिया में शामिल नहीं होते हैं।
  • • चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व की प्रणाली के माध्यम से आयोजित किया जाता है।
    Other Information
  • निर्वाचक मंडल
    • राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
    • प्रत्येक राज्य के लिए मतों की कुल संख्या आखिरी जनगणना के अनुसार उसकी जनसंख्या के समानुपाती होती है।
  •  मतदान प्रणाली
    •  चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली का पालन करता है।
    •  प्रत्येक मतदाता उम्मीदवारों को वरीयता के क्रम में रेंक करता है, और जो उम्मीदवार मतों का एक निर्दिष्ट कोटा प्राप्त करता है, वह जीत जाता है।
  •  राष्ट्रपति की भूमिका
    •  भारत के राष्ट्रपति राज्य के नाममात्र प्रमुख और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं।
    •  राष्ट्रपति को संसद के किसी भी सदन को बुलाने और स्थगित करने और लोकसभा को भंग करने का अधिकार है।
  •  पात्रता मानदंड
    •  राष्ट्रपति पद के लिए एक उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए, कम से कम 35 वर्ष का होना चाहिए, और लोकसभा का सदस्य होने के लिए योग्य होना चाहिए।
    •  उम्मीदवार भारत सरकार या किसी भी राज्य की सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।

4. राष्ट्रपति की परिलब्धियां तथा भत्ते और उनके कार्यालय से संबंधित अन्य व्यय भारत के/की ....... में प्रभारित किए जाते हैं। [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) संचित निधि
Solution:
  • संविधान के अनुच्छेद 112(3) के अनुसार, राष्ट्रपति के वेतन, भत्ते और उनके कार्यालय से संबंधित अन्य व्यय भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित व्यय (Charged Expenditure) होते हैं।
  • इस व्यय पर संसद में चर्चा हो सकती है, लेकिन यह मतदान के अधीन नहीं होता है। इसका अर्थ है कि यह राशि सीधे निधि से निकाली जाती है, जिससे राष्ट्रपति के पद की वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
  • प्रत्यक्ष करों और अप्रत्यक्ष करों के माध्यम से सरकार द्वारा प्राप्त राजस्व, उधार लिया गया धन और उसके द्वारा किए गए ऋणों और खर्चों से प्राप्तियाँ, असाधारण मदों को
    छोड़कर संचित निधि का हिस्सा हैं।
  • इस निधि का गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 266 (1) के तहत किया गया था।
  •  आकस्मिक निधि या सार्वजनिक खाते से मिलने वाली असाधारण मदों को छोड़कर सभी सरकारी व्यय इस निधि से किए जाते हैं।
  •  संसद की स्वीकृति के बिना इस निधि से कोई पैसा नहीं निकाला जा सकता है।
  •  निम्नलिखित व्यय भारत की संचित निधि पर प्रभारित व्यय होंगे:
    1. राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ और भत्ते तथा उसके पद से संबंधित अन्य व्यय।
    2. राज्यसभा के सभापति और उपसभापति तथा लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते।
    3. ऋण शुल्क जिसके लिए भारत सरकार उत्तरदायी है, जिसमें ब्याज, सिंकिंग फंड शुल्क (निक्षेप निधि प्रभार) और मोचन शुल्क शामिल हैं, और ऋण लेने तथा सेवा और ऋण मोचन से संबंधित अन्य व्यय।
    4. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को या उनके संबंध में देय वेतन, भत्ते और पेंशन।
    5. संघीय न्यायालय के न्यायाधीशों को या उनके संबंध में देय पेंशन उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के संबंध में देय पेंशन।
    6. भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक को या उसके संबंध में देय वेतन भत्ते और पेंशन।
    7. किसी भी न्यायालय या मध्यस्थ न्यायाधिकरण के किसी भी निर्णय, आज्ञा, या पंचाट को पूरा करने के लिए आवश्यक कोई भी राशि।
    8. संविधान द्वारा या संसद द्वारा विधि द्वारा घोषित कोई अन्य व्यय इस प्रकार भारित किया जाना।
    Other Information
    भारत की आकस्मिक निधि:
    • इस निधि का गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 267(1) के तहत किया गया था।
    •  इस निधि का उपयोग आपात स्थिति, आपदा आदि के दौरान अप्रत्याशित व्यय को पूरा करने के लिए किया जाता है।
    •  भारत के राष्ट्रपति की ओर से वित्त मंत्रालय के सचिव इस निधि के प्रभार को धारण करते हैं।
    • सरकार ने 2021 में निधि का आकार 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 30,000 करोड़ रुपये कर दिया है।
  • भारत के लोक लेखा :
    • इस निधि का गठन संविधान के अनुच्छेद 266(2) के तहत किया गया था।
    • भारत सरकार द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त अन्य सभी सार्वजनिक धन (भारत की संचित निधि के अंतर्गत आने वाले को छोड़कर) को इस निधि में जमा किया जाता है।
    • सार्वजनिक धन का सृजन विभागों के बैंक खातों, राष्ट्रीय बचत निधि, भविष्य निधि आदि से होता है।

5. भारत में संघ की कार्यपालिका शक्ति ....... को प्राप्त है। [Phase-XI 30 जून, 2023 (II-पाली), CGL (T-I) 9 जून, 2017 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) राष्ट्रपति
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 53(1) स्पष्ट रूप से कहता है कि "संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार या तो स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।
  • " यह उन्हें संवैधानिक रूप से संघ का कार्यकारी प्रमुख बनाता है। हालाँकि, यह शक्ति वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद द्वारा उपयोग की जाती है।
  • संवैधानिक आधार
    • संघ की कार्यपालिका भाग V, अध्याय I (अनुच्छेद 52-78) के अंतर्गत आती है। अनुच्छेद 53(2) राष्ट्रपति को संघ के रक्षा बलों का सर्वोच्च कमांडर बनाता है,
    • जिसका प्रयोग कानून द्वारा नियंत्रित होता है। राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख होता है,
    • जबकि वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले मंत्रिपरिषद के पास रहती है, जो सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।​
  • शक्तियों का विस्तार
    • संघ की कार्यपालिका शक्ति संसद को विधि बनाने की शक्ति वाले विषयों तक और संधि-करारों तक विस्तृत है (अनुच्छेद 73)।
    • राष्ट्रपति संसद के सत्र बुलाने, अभिभाषण देने, अध्यादेश जारी करने और विधेयकों पर हस्ताक्षर करने जैसी शक्तियां रखते हैं।
    • हालांकि, ये शक्तियां संवैधानिक रूप से सीमित हैं और मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही प्रयोग होती हैं।​
  • व्यावहारिक प्रयोग
    • राष्ट्रपति की शक्तियां प्रायः औपचारिक होती हैं, जैसे उच्च अधिकारियों की नियुक्ति, क्षमादान देना और आपातकाल घोषित करना।
    • वास्तविक निर्णय प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल लेते हैं, जो लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं। यह संसदीय प्रणाली का मूल सिद्धांत है।​

6. भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में विवाद याचिका निम्नलिखित से किसमें दायर की जा सकती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) केवल भारत का सर्वोच्च न्यायालय
Solution:
  • संविधान के अनुच्छेद 71(1) के तहत, राष्ट्रपति या उप-राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित या उससे जुड़े सभी संदेहों और विवादों की जाँच और निर्णय करने का अधिकार केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) को प्राप्त है।
  • इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है। किसी अन्य न्यायालय, यहाँ तक कि उच्च न्यायालय को भी, इस पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं है।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 71. राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव के संबंध में या उससे उत्पन्न सभी संदेहों और विवादों की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जाँच की जाएगी और निर्णय लिया जाएगा।
  •  राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952, सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक चुनाव याचिका दायर की जा सकती है।
    Other Information
  • भारत में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कैसे चुने जाते हैं:
    • मतदाता: हम, देश के मतदाता आम तौर पर दो तरह से मतदान करते हैं, या बल्कि मुझे दो अलग-अलग प्रकार के चुनावों को कहना चाहिए।
    • राज्य विधानसभा :राज्य विधानसभा चुनाव वे होते हैं जिनमें हम अपने विधायक को चुनते हैं जो आगे राज्य का मुख्यमंत्री चुनते हैं।
    • लोकसभा चुनाव: ये चुनाव वे होते हैं जिनमें हम सांसद (संसद सदस्य) चुनते हैं।
    • उच्च सदन (राज्य सभा) :राज्य विधानसभाएं प्रत्येक राज्य से राज्य सभा के सदस्य का चयन करती हैं
    • यह संख्या उस विशेष राज्य के आकार और जनसंख्या के आधार पर भिन्न होती है। इस तरीके से चुने गए कुल अंक 238 (कुल 250 में से) हैं।
    • निचला सदन (लोकसभा): जैसा कि ऊपर बताया गया है, मतदाता सीधे संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों से संसद सदस्यों का चुनाव करने के लिए वोट डालते हैं, जिनकी कुल संख्या 543 हैं।
  • संवैधानिक आधार
    • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 71(1) स्पष्ट रूप से कहता है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव संबंधी विवादों की जांच और निर्णय सर्वोच्च न्यायालय ही करेगा
    • इसका फैसला अंतिम होगा। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति (चुनाव) अधिनियम, 1952 की धारा 14(2) भी सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले में विशेष क्षेत्राधिकार देती है
    • जिसके तहत चुनाव याचिका दायर की जा सकती है। उच्च न्यायालयों या अन्य निचली अदालतों को इस तरह के विवादों की सुनवाई का अधिकार नहीं है
    • जैसा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2022 में एक मामले में स्पष्ट किया था।​
  • याचिका दायर करने की प्रक्रिया
    • चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद असंतुष्ट उम्मीदवार या मतदाता 30 दिनों के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर कर सकता है।
    • याचिका में आरोप जैसे मतगणना में गड़बड़ी, अयोग्य उम्मीदवार या अनुचित प्रभाव आदि शामिल हो सकते हैं।
    • सर्वोच्च न्यायालय पूर्ण जांच करता है और यदि आवश्यक हो तो चुनाव रद्द करने या पुनर्निर्वाचन का आदेश दे सकता है।​
  • महत्वपूर्ण उदाहरण
    • 2022 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति चुनाव विवाद वाली याचिका को खारिज कर सर्वोच्च न्यायालय के विशेष अधिकार क्षेत्र की पुष्टि की।
    • इसी प्रकार, संविधान के अनुच्छेद 71 के तहत सर्वोच्च न्यायालय ही एकमात्र प्राधिकारी है, जो राष्ट्रपति चुनाव की अखंडता सुनिश्चित करता है।

7. संविधान में भारत के राष्ट्रपति के चुनाव की विधि ....... के संविधान से ली गई थी। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) आयरलैंड
Solution:
  • भारत के राष्ट्रपति के चुनाव की विधि, जिसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Proportional Representation by means of Single Transferable Vote) कहा जाता है, आयरलैंड के संविधान से ली गई है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 55 में इस पद्धति का वर्णन किया गया है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है
  • निर्वाचक मंडल में विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व संतुलित रहे।
  • भारतीय संविधान में भारत के राष्ट्रपति के चुनाव की विधि आयरिश संविधान से ली गई थी।
  • यह अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली है, जिसमें निर्वाचक मंडल द्वारा राष्ट्रपति का चयन किया जाता है।​
  • संवैधानिक प्रावधान
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 और 55 राष्ट्रपति के चुनाव की विधि का वर्णन करते हैं, जो आयरलैंड के संविधान से प्रेरित है।
    • आयरलैंड में राष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों और स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों वाले निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है
    • वैसे ही जैसे भारत में संसद के निर्वाचित सदस्यों और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा।
    • यह प्रणाली प्रत्यक्ष जनमत के बजाय प्रतिनिधि-आधारित सुनिश्चित करती है, जो संविधान सभा की बहसों में डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने उल्लेख किया था।​
  • निर्वाचक मंडल और मतगणना
    • निर्वाचक मंडल में लोकसभा, राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों (दिल्ली और पुडुचेरी सहित) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं
    • मनोनीत सदस्यों को छोड़कर। मतगणना एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली से होती है
    • जिसमें मतों का मूल्य राज्य की जनसंख्या के आधार पर निर्धारित होता है ताकि समानुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
    • आयरिश संविधान की इसी प्रणाली को अपनाकर भारत ने संघीय संरचना को ध्यान में रखा।​
  • अन्य प्रभाव और अंतर
    • संविधान निर्माताओं ने आयरलैंड के अलावा अमेरिकी संविधान से भी कुछ प्रेरणा ली, लेकिन अप्रत्यक्ष चुनाव मुख्यतः आयरिश मॉडल से है।
    • राष्ट्रपति (चुनाव) अधिनियम, 1952 इस विधि को लागू करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 71 द्वारा संरक्षित है।
    • यह प्रक्रिया राष्ट्रपति को नाममात्र प्रमुख बनाए रखती है, जबकि वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास रहती है।​

8. भारत के राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपाल अनुच्छेद ....... के तहत उल्लिखित उन्मुक्तियों की सुविधा लेते हैं। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 361
Solution:
  • अनुच्छेद 361 भारत के राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों को उनके पद की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग के लिए व्यक्तिगत उन्मुक्ति (immunity) प्रदान करता है।
  • इसका मतलब है कि उनके कार्यकाल के दौरान, उनके विरुद्ध उनके आधिकारिक कृत्यों के लिए कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती और न ही उन्हें गिरफ्तार या कैद किया जा सकता है।
  • दीवानी कार्यवाही के लिए भी दो महीने के नोटिस की आवश्यकता होती है।
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों को विशेष उन्मुक्तियां प्रदान की गई हैं।
  • ये उन्मुक्तियां उन्हें संवैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने वाली कानूनी कार्रवाइयों से बचाती हैं।​
  • अनुच्छेद 361 की मुख्य धाराएं
    • अनुच्छेद 361(1) के अनुसार, राष्ट्रपति या राज्यपाल अपनी शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग या उनमें किए गए कार्यों
    •  किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होते।
    • अनुच्छेद 361(2) उनके कार्यकाल के दौरान किसी आपराधिक कार्यवाही को शुरू या जारी रखने से रोकता है।​
    • अनुच्छेद 361(3) कार्यकाल में गिरफ्तारी या कारावास की प्रक्रिया को प्रतिबंधित करता है
    • जबकि अनुच्छेद 361(4) व्यक्तिगत कृत्यों के लिए सिविल मुकदमे के लिए दो माह की पूर्व लिखित सूचना अनिवार्य बनाता है।​
  • उन्मुक्तियों का उद्देश्य
    • ये प्रावधान राज्यपालों और राष्ट्रपति को केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति देते हैं
    • बिना राजनीतिक या कानूनी हस्तक्षेप के। उदाहरणस्वरूप, रामेश्वर प्रसाद बनाम भारत संघ (2006) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक कार्यों के लिए पूर्ण उन्मुक्ति की पुष्टि की, लेकिन दुर्भावनापूर्ण कार्यों पर जांच की गुंजाइश रखी।​
    • पुंछी आयोग (2010) ने राज्यपालों की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया में सुधार सुझाए, जैसे "राष्ट्रपति की इच्छा पर्यंत" वाक्यांश हटाना।​
  • संबंधित संवैधानिक प्रावधान
    • अनुच्छेद 153 राज्यपाल की नियुक्ति, अनुच्छेद 163 मंत्रिपरिषद की सलाह, और अनुच्छेद 200 विधेयकों पर निर्णय को नियंत्रित करते हैं।
    • ये उन्मुक्तियां आधिकारिक कार्यों तक सीमित हैं, निजी कार्यों पर पूर्ण सुरक्षा नहीं।​
    • हाल के मामलों में, जैसे पश्चिम बंगाल राज्यपाल से जुड़े यौन उत्पीड़न शिकायत में, सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 361 की सीमाओं की समीक्षा पर सहमति दी।

9. निम्नलिखित में से किसके पास किसी आकस्मिकता में किसी राज्य के राज्यपाल के कार्यों के निर्वहन के लिए उचित प्रावधान करने की शक्ति है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) राष्ट्रपति
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 160 यह प्रावधान करता है कि "राष्ट्रपति, ऐसी किसी भी आकस्मिकता में, जिसका इस अध्याय में उपबंध नहीं है
  • राज्य के राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन के लिए ऐसा उपबंध कर सकेगा, जो वह ठीक समझे।
  • यह शक्ति सुनिश्चित करती है कि राज्यपाल का पद किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में खाली न रहे और राज्य प्रशासन सुचारू रूप से चलता रहे।
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 159 के तहत राष्ट्रपति को किसी आकस्मिकता (contingency) में किसी राज्य के राज्यपाल के कार्यों के निर्वहन के लिए उचित प्रावधान करने की शक्ति प्राप्त है।
  • यह प्रावधान राज्यपाल की अनुपस्थिति, रिक्ति या असमर्थता जैसी स्थितियों में प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करता है।​
  • अनुच्छेद 159 का प्रावधान
    • अनुच्छेद 159 स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्यपाल के पद की रिक्ति होने पर या जब वह राज्य के बाहर हो या कार्य करने में असमर्थ हो, तब राष्ट्रपति उचित प्रावधान   कर सकता है।
    • इसमें किसी अन्य राज्य के राज्यपाल को अतिरिक्त प्रभार सौंपना, उप-राज्यपाल नियुक्त करना या केंद्र सरकार के अधिकारी को दायित्व देना शामिल हो सकता है।​
    • यह शक्ति राष्ट्रपति के विवेक पर आधारित है और सामान्यतः तात्कालिक होती है, जब तक स्थायी व्यवस्था न हो जाए।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि राज्यपाल बीमार हो या यात्रा पर हो, तो राष्ट्रपति मुख्य सचिव को राज्यपाल के कर्तव्यों का पालन करने का निर्देश दे सकता है।​
  • संबंधित संवैधानिक ढांचा
    •  अनुच्छेद 153 राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा करता है, जबकि अनुच्छेद 156 पद की अवधि और हटाने को नियंत्रित करता है।
    •  आकस्मिकता में अनुच्छेद 159 राष्ट्रपति को संक्रमणकालीन व्यवस्था की शक्ति देता है, जो संघीय संरचना में केंद्र की भूमिका को मजबूत बनाता है।​
    •  सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न मामलों में इस प्रावधान को मान्यता दी है, जैसे कि राज्यपाल की अनुपस्थिति में प्रशासनिक निर्णयों को वैध ठहराते हुए।
    •  यह सुनिश्चित करता है कि राज्य का प्रशासन बाधित न हो।

10. दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति ....... द्वारा की जाती है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) भारत के राष्ट्रपति
Solution:
  • अन्य राज्यों के विपरीत, जहाँ राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • संविधान के अनुच्छेद 239AA के तहत, दिल्ली के उपराज्यपाल की भूमिका राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में अधिक होती है।
  • राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की भी नियुक्ति करते हैं, और वे सभी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
  • नियुक्ति की प्रक्रिया
    • राष्ट्रपति उपराज्यपाल (लेफ्टिनेंट गवर्नर) की सलाह पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं।
    • विधानसभा चुनावों के बाद बहुमत प्राप्त पार्टी या गठबंधन का नेता उपराज्यपाल को अपना दावा प्रस्तुत करता है
    • जो राष्ट्रपति को सिफारिश भेजते हैं। औपचारिक रूप से राष्ट्रपति नामांकित व्यक्ति को शपथ दिलवाने का आदेश देते हैं
    • जो आमतौर पर उपराज्यपाल के माध्यम से होता है।​
  • संवैधानिक आधार
    • 69वें संविधान संशोधन (1991) ने अनुच्छेद 239AA जोड़ा, जिसके अनुसार दिल्ली की विधानसभा चुनी हुई है, लेकिन प्रशासनिक प्रमुख उपराज्यपाल होते हैं।
    • अन्य राज्यों में राज्यपाल मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं (अनुच्छेद 164), लेकिन दिल्ली में राष्ट्रपति की भूमिका केंद्रीय नियंत्रण सुनिश्चित करती है।
    • विधानसभा में 70 सदस्य हैं, जिनमें से बहुमत (36+) प्राप्त नेता को प्राथमिकता मिलती है।​
  • वर्तमान संदर्भ
    • 2025 तक, दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा की जीत पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की सलाह पर नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति की।
    • प्रक्रिया में 2-3 दिन लग सकते हैं, क्योंकि नाम पर राष्ट्रपति की मंजूरी अनिवार्य है। अरविंद केजरीवाल 2015 से 2025 तक सातवें मुख्यमंत्री रहे।​
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
    • मुख्यमंत्री को विधानसभा सदस्य होना चाहिए, अन्यथा 6 महीने में चुनाव लड़ना पड़ता है। दिल्ली सरकार विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है
    • लेकिन भूमि, पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे विषय केंद्र के अधीन हैं। यह व्यवस्था केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन बनाए रखती है।