राष्ट्रपति

Total Questions: 21

11. ....... राष्ट्रपति को संसद और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित कानूनों तथा समवर्ती सूची में शामिल विषयों के बीच विसंगतियों को दूर करने का अधिकार देता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 254
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 254 संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानूनों के बीच विसंगति की स्थिति में समाधान प्रदान करता है।
  • यदि समवर्ती सूची के किसी विषय पर राज्य द्वारा बनाया गया कानून संसद के कानून के विरुद्ध होता है, तो सामान्यतः संसद का कानून प्रभावी होता है।
  • हालाँकि, यदि राज्य का कानून राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखा गया हो और उसे राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हो गई हो
  • तो वह राज्य में प्रभावी रहेगा, भले ही वह संसदीय कानून के विरुद्ध हो। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को इस विवाद को सुलझाने का अधिकार देता है।
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। यह प्रक्रिया भारत के संविधान के अनुच्छेद 239AA के तहत विनियमित होती है
  • जो दिल्ली को विशेष केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देता है।​
  • नियुक्ति की प्रक्रिया
    • राष्ट्रपति उपराज्यपाल (लेफ्टिनेंट गवर्नर) की सलाह पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं।
    • विधानसभा चुनावों के बाद बहुमत प्राप्त पार्टी या गठबंधन का नेता उपराज्यपाल को अपना दावा प्रस्तुत करता है
    • जो राष्ट्रपति को सिफारिश भेजते हैं। औपचारिक रूप से राष्ट्रपति नामांकित व्यक्ति को शपथ दिलवाने का आदेश देते हैं
    • जो आमतौर पर उपराज्यपाल के माध्यम से होता है।​
  • संवैधानिक आधार
    • 69वें संविधान संशोधन (1991) ने अनुच्छेद 239AA जोड़ा, जिसके अनुसार दिल्ली की विधानसभा चुनी हुई है, लेकिन प्रशासनिक प्रमुख उपराज्यपाल होते हैं।
    • अन्य राज्यों में राज्यपाल मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं (अनुच्छेद 164), लेकिन दिल्ली में राष्ट्रपति की भूमिका केंद्रीय नियंत्रण सुनिश्चित करती है।
    • विधानसभा में 70 सदस्य हैं, जिनमें से बहुमत (36+) प्राप्त नेता को प्राथमिकता मिलती है।​
  • वर्तमान संदर्भ
    • 2025 तक, दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा की जीत पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की सलाह पर नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति की।
    • प्रक्रिया में 2-3 दिन लग सकते हैं, क्योंकि नाम पर राष्ट्रपति की मंजूरी अनिवार्य है। अरविंद केजरीवाल 2015 से 2025 तक सातवें मुख्यमंत्री रहे।​
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
    • मुख्यमंत्री को विधानसभा सदस्य होना चाहिए, अन्यथा 6 महीने में चुनाव लड़ना पड़ता है।
    • दिल्ली सरकार विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, लेकिन भूमि, पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे विषय केंद्र के अधीन हैं।
    • यह व्यवस्था केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन बनाए रखती है।

12. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में यह कहा गया है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा? [MTS (T-I) 20 अक्टूबर, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 52
Solution:
  • भारतीय संविधान के भाग V के अंतर्गत, अनुच्छेद 52 में यह घोषणा की गई है कि "भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
  • यह अनुच्छेद भारत गणराज्य में राष्ट्रपति के पद की स्थापना करता है।
  • इसके बाद के अनुच्छेद राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्ति (अनुच्छेद 53), चुनाव (अनुच्छेद 54), चुनाव की रीति (अनुच्छेद 55), और महाभियोग (अनुच्छेद 61) से संबंधित हैं
  • लेकिन पद की स्थापना का मूल आधार अनुच्छेद 52 है।
  • भारत का राष्ट्रपति भारत गणराज्य का राष्ट्राध्यक्ष होता है।
  • भारत के राष्ट्रपति देश की कार्यकारी, विधायी और न्यायिक शाखाओं के नाममात्र प्रमुख के साथ-साथ भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ होते हैं।
  • भारतीय राष्ट्रपति देश के नेता हैं और उन्हें देश के पहले नागरिक के रूप में भी जाना जाता है।
  • वह संघ की कार्यकारिणी का सदस्य होता है, जिसके प्रावधानों पर अनुच्छेद 52-78 में विचार किया जाता है
  • जिसमें राष्ट्रपति पर अनुच्छेद (अनुच्छेद 52-62) शामिल हैं।
  • भारतीय राष्ट्रपति देश के पहले नागरिक और देश की एकता एकता और अखंडता के प्रतीक हैं।
  • उपराष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, मंत्रिपरिषद और भारत के महान्यायवादी के साथ, वह संघ की कार्यकारिणी के सदस्य हैं।
    Other Information
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी से बने एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 55 के अनुसार, "विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व का मापन राष्ट्रपति के चुनाव में व्यावहारिक रूप से एक समान होगा।"
  • राष्ट्रपति के रूप में चुनाव के लिए योग्यता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 58 में निर्धारित की गई है।

13. भारत के राष्ट्रपति को हटाने के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

A. महाभियोग की प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन में शुरू की जा सकती है।

B. महाभियोग के आरोप उस सदन के एक-तिहाई सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित होने चाहिए, जिसमें प्रक्रिया शुरू की गई है।

C. महाभियोग प्रक्रिया में राष्ट्रपति को 30 दिनों का नोटिस दिया जाना चाहिए।

D. महाभियोग प्रस्ताव उस सदन की कुल सदस्यता के दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाता है।

Correct Answer: (d) केवल A और D
Solution:
  • राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया (अनुच्छेद 61) से संबंधित सही कथन ये हैं:
  • सत्य: महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन (लोक सभा या राज्य सभा) में शुरू किया जा सकता है।
  • असत्य: आरोप उस सदन की कुल सदस्यता के एक-चौथाई (1/4) सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित होने चाहिए, न कि एक-तिहाई।
  • असत्य: महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने से पहले राष्ट्रपति को 14 दिनों का नोटिस दिया जाना चाहिए, न कि 30 दिनों का।
  • सत्य: महाभियोग प्रस्ताव उस सदन की कुल सदस्यता के दो-तिहाई (2/3) बहुमत से पारित किया जाता है।
  • भारत के राष्ट्रपति को केवल संविधान के उल्लंघन के गंभीर आरोप पर संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया के माध्यम से हटाया जा सकता है।
  • अब तक भारत में किसी राष्ट्रपति पर इसका उपयोग नहीं किया गया है।​
  • महाभियोग का आधार
    • राष्ट्रपति को पद से हटाने का एकमात्र वैधानिक आधार "संविधान का उल्लंघन" है, जो अनुच्छेद 56(1)(b) में उल्लिखित है।
    • यह उल्लंघन अत्यंत गंभीर होना चाहिए, जैसे संवैधानिक शपथ का जानबूझकर तोड़ना, हालांकि इसकी सटीक परिभाषा संविधान में नहीं दी गई है
    • इसका निर्धारण संसद करती है। राष्ट्रपति का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, लेकिन महाभियोग से इसे समय से पहले समाप्त किया जा सकता है।​
  • प्रक्रिया का आरंभ
    • महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) द्वारा शुरू किया जा सकता है।
    • आरोप-पत्र पर उस सदन के कुल सदस्यता के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं
    • राष्ट्रपति को कम से कम 14 दिनों की पूर्व सूचना दी जानी चाहिए। यह नोटिस स्पीकर या सभापति के माध्यम से दिया जाता है।​
  • जांच और पारित होना
    • प्रस्ताव originating सदन में कुल सदस्यता के दो-तिहाई बहुमत से पारित होने पर दूसरे सदन को भेजा जाता है, जहां जांच होती है।
    • राष्ट्रपति को अपना बचाव करने का पूर्ण अधिकार है, जिसमें अटॉर्नी जनरल या अन्य कानूनी सलाहकार की सहायता लेना शामिल है।
    • यदि दूसरा सदन भी दो-तिहाई बहुमत से आरोप सिद्ध मान लेता है, तो राष्ट्रपति उस दिन से पद से हट जाता है जिस दिन प्रस्ताव पारित होता है।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • यह प्रक्रिया पूर्णतः संसदीय है; न्यायपालिका का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होता।
    • भारत में अब तक कोई राष्ट्रपति महाभियोग का शिकार नहीं हुआ, जो इसकी कठिनाई दर्शाता है।
    • अन्य पदाधिकारियों (जैसे उपराष्ट्रपति) के लिए अलग प्रक्रियाएं हैं, लेकिन राष्ट्रपति के लिए केवल यही मार्ग है।​

14. भारत में, निम्नलिखित में से किसके पास किसी अपराधी के दंड को क्षमा करने, प्रविलंबित करने या कम करने की शक्ति है? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) राष्ट्रपति
Solution:
  • भारत के राष्ट्रपति के पास संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत किसी भी अपराधी के दंड को क्षमा करने, प्रविलंबित (Reprieve) करने, विराम (Respite) देने, परिहार (Remission) करने या लघुकरण (Commutation) करने की शक्ति है। यह शक्ति विशेष रूप से उन मामलों पर लागू होती है जहाँ:
  • दंड सेना न्यायालय (Court-martial) द्वारा दिया गया हो।
  • दंड मृत्युदंड (Death Sentence) हो।
  • भारत में किसी अपराधी के दंड को क्षमा करने, प्रविलंबित करने या कम करने की शक्ति मुख्य रूप से राष्ट्रपति और राज्यपालों के पास निहित है। ​
  • राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति
    • राष्ट्रपति को किसी भी व्यक्ति की सजा को क्षमा (pardon), कम करना (commutation), प्रविलंबित करना (reprieve), राहत देना (respite) या निलंबित करने की शक्ति है
    • विशेष रूप से मृत्युदंड के मामलों में। यह शक्ति संघीय कानूनों, कोर्ट मार्शल और संवैधानिक उल्लंघनों पर लागू होती है।
    • राष्ट्रपति इस पर मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है, और याचिका गृह मंत्रालय के माध्यम से आती है।​
  • राज्यपाल की क्षमादान शक्ति
    • राज्यपाल राज्य सूची के अपराधों या राज्य कानूनों के तहत दोषसिद्ध व्यक्तियों के दंड पर क्षमा आदि दे सकता है
    • लेकिन कोर्ट मार्शल के मामलों में नहीं। राष्ट्रपति की तुलना में यह शक्ति संकीर्ण है, क्योंकि मृत्युदंड सीधे राष्ट्रपति के क्षेत्राधिकार में आता है।
    • राज्यपाल भी मंत्रिपरिषद की सलाह मानता है।​
  • क्षमादान के प्रकार
    • क्षमा: दोषसिद्धि और दंड दोनों समाप्त, अपराधी निर्दोष घोषित।
    • लघुकरण : दंड का स्वरूप बदलना, जैसे मृत्युदंड को उम्रकैद में।
    • परिहार : दंड की अवधि कम करना बिना स्वरूप बदले।
    • विराम : विशेष परिस्थितियों में हल्का दंड देना।
    • ये शक्तियां न्यायिक प्रक्रिया का पूरक हैं, लेकिन न्यायपालिका द्वारा समीक्षा योग्य।

15. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 72, क्षमादान आदि और कुछ मामलों में सजा को निलंबित, परिहार या लघुकरण करने की ....... की शक्ति से संबंधित है। [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) राष्ट्रपति
Solution:
  • अनुच्छेद 72 भारत के राष्ट्रपति को क्षमादान की शक्ति प्रदान करता है। यह एक न्यायिक शक्ति है
  • जो राष्ट्रपति को मृत्युदंड सहित किसी भी दंड को पूर्णतः क्षमा करने या उसकी प्रकृति अथवा अवधि को बदलने का अधिकार देती है।
  • यह शक्ति कार्यपालिका की सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक है, जिसे वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयोग करते हैं
  • इसका उद्देश्य न्याय प्रणाली में मानवीय दृष्टिकोण को बनाए रखना है।
  • अनुच्छेद 72 का मूल पाठ
    • संविधान के अनुच्छेद 72(1) के अनुसार, राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किसी व्यक्ति की सजा को क्षमा, विलंब, राहत या छूट देने अथवा उसकी सजा को निलंबित, माफ या लघुकृत करने की शक्ति होगी।
    • यह शक्ति विशेष रूप से उन मामलों में लागू होती है जहां सजा मृत्युदंड हो, सैन्य न्यायालय द्वारा दी गई हो, या संघीय कानूनों के तहत अपराध हो।​
  • क्षमादान के प्रकार
    • क्षमा : अपराधी को पूर्ण रूप से मुक्त कर देता है, सजा और दोषसिद्धि दोनों समाप्त हो जाते हैं।
    • प्रविलंबन : सजा के निष्पादन को अस्थायी रूप से स्थगित करता है, विशेषकर मृत्युदंड के मामले में दया याचिका पर विचार के लिए समय प्रदान करता है।
    • परिहार या छूट : सजा को कम या हल्का कर देता है, जैसे उम्र या स्वास्थ्य के आधार पर।
    • लघुकरण : सजा की अवधि कम कर देता है, लेकिन अपराध का स्वीकार्यता बनी रहती है।
    • निलंबन : सजा को निलंबित रखता है, लेकिन बाद में पुनः लागू हो सकती है।​
  • प्रक्रिया और सीमाएं
    • दया याचिका गृह मंत्रालय को भेजी जाती है, जो संबंधित राज्य सरकार से परामर्श कर मंत्रिपरिषद की सलाह तैयार करता है।
    • राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य है, लेकिन अनुच्छेद 74(1) के तहत एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है।
    • सर्वोच्च न्यायालय इस शक्ति की न्यायिक समीक्षा कर सकता है, जैसा कि मारू राम (1980) और धनंजय चटर्जी (1994) मामलों में हुआ।​
  • राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों में अंतर
    • अनुच्छेद 161 राज्यपाल को समान शक्तियां देता है, लेकिन राष्ट्रपति की शक्ति व्यापक है
    • क्योंकि वे कोर्ट मार्शल मामलों और केंद्रीय कानूनों में हस्तक्षेप कर सकते हैं, जबकि राज्यपाल नहीं।
    • राष्ट्रपति पूरे भारत पर लागू करते हैं, राज्यपाल केवल राज्य कानूनों तक सीमित।

16. भारतीय संविधान के निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया का उल्लेख है? [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 61
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61 में भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) लगाने की विस्तृत प्रक्रिया का उल्लेख है।
  • महाभियोग केवल "संविधान का उल्लंघन" करने के आधार पर लगाया जा सकता है।
  • यह एक अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) प्रक्रिया है, जिसमें संसद के दोनों सदनों में से किसी एक में आरोप शुरू किया जाता है, और दूसरे सदन द्वारा आरोपों की जाँच की जाती है।
  • अनुच्छेद 61 का मूल पाठ
    • अनुच्छेद 61(1) के अनुसार, संविधान के उल्लंघन के लिए राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने पर संसद का कोई भी सदन आरोप लगा सकता है।
    • अनुच्छेद 61(2) में स्पष्ट है कि ऐसा आरोप तभी लगाया जाएगा जब संकल्प कम से कम 14 दिनों की लिखित सूचना के बाद प्रस्तुत किया गया हो
    • जिस पर सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हों, और वह दो-तिहाई बहुमत से पारित हो।
    • अनुच्छेद 61(3) में कहा गया है कि आरोप लगाने वाले सदन के बाद दूसरा सदन जांच करेगा, जिसमें राष्ट्रपति को उपस्थित होने और अपना पक्ष रखने का अधिकार होगा।
    • अनुच्छेद 61(4) के तहत, यदि जांच के बाद दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित होता है कि आरोप सिद्ध है, तो राष्ट्रपति उस तिथि से पद से हट जाएगा।​
  • महाभियोग की प्रक्रिया
    • महाभियोग की शुरुआत लोकसभा या राज्यसभा में से किसी एक सदन से हो सकती है
    • जिसमें 14 दिनों का पूर्व नोटिस और एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
    • प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित होने पर दूसरा सदन जांच करता है, जो अर्ध-न्यायिक होती है।
    • राष्ट्रपति को जांच में अपना बचाव करने का पूर्ण अधिकार है, जिसमें वकील के माध्यम से प्रतिनिधित्व शामिल है।
    • अंतिम संकल्प भी दो-तिहाई बहुमत से पारित होने पर ही प्रभावी होता है, जो राष्ट्रपति को तत्काल पदमुक्त कर देता है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उपयोग
    • यह प्रावधान 26वें संविधान संशोधन (1971) से जुड़ा है, लेकिन भारत के स्वतंत्रता के बाद से अब तक किसी राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया कभी आरंभ नहीं हुई।
    • यह शक्ति संसद को संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए दी गई है, न कि व्यक्तिगत दंड के लिए। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे संवैधानिक संतुलन का हिस्सा माना है।​
  • अन्य संबंधित प्रावधान
    • अनुच्छेद 62 राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर नए चुनाव की प्रक्रिया बताता है, जबकि अनुच्छेद 71 राष्ट्रपति चुनाव संबंधी विवादों पर सर्वोच्च न्यायालय की विशेष क्षेत्राधिकार स्थापित करता है।
    • महाभियोग केवल संविधान उल्लंघन तक सीमित है, न कि सामान्य अपराधों के लिए।

17. भारतीय संविधान के भाग V अध्याय II में निम्नलिखित में से कौन-से उपबंध शामिल नहीं हैं? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) संसद के विश्रांतिकाल के दौरान अध्यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति
Solution:
  • भारतीय संविधान के भाग V, जिसका शीर्षक 'संघ' है, में कई अध्याय हैं:
  • अध्याय I: कार्यपालिका (अनुच्छेद 52-78)
  • अध्याय II: संसद (अनुच्छेद 79-122)
  • अध्याय III: राष्ट्रपति की विधायी शक्तियाँ (अनुच्छेद 123)
  • अध्यादेश जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति का उल्लेख अनुच्छेद 123 में है, जो कि अध्याय III का हिस्सा है, न कि अध्याय II (संसद) का।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों के सत्र में नहीं होने पर अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • यह शक्ति राष्ट्रपति को अस्थायी कानून जारी करने की अनुमति देती है जिनका प्रभाव संसद के अधिनियम के समान होता है।
  • इन अध्यादेशों को एक निर्दिष्ट अवधि के भीतर संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए या वे काम करना बंद कर देंगे।
  • यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अध्यादेश जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति पूर्ण नहीं है और संविधान द्वारा निर्धारित कुछ सीमाओं और शर्तों के अधीन हो सकती है।
  • अध्यादेशों को तत्काल आवश्यकता और तात्कालिकता की आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए, और उन्हें उन मामलों पर जारी नहीं किया जा सकता है जो संसद की विधायी क्षमता से बाहर हैं।
    Other Information
  • भारत के राष्ट्रपति, राज्य के प्रमुख और कार्यकारी के संवैधानिक प्रमुख के रूप में, भारतीय संविधान में उल्लिखित विभिन्न शक्तियाँ और कार्य हैं।
  • राष्ट्रपति की कुछ प्रमुख शक्तियों में शामिल हैं:
  • कार्यकारी शक्तियां
  • विधायी शक्तियाँ
  • कूटनीतिक शक्तियाँ
  • आपातकालीन शक्तियां
  • न्यायिक शक्तियाँ

18. भारत में राष्ट्रपति द्वारा अधिकतम ....... सदस्यों को राज्य सभा का सदस्य बनने के लिए मनोनीत किया जा सकता है। [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 12
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(3) के अनुसार, राष्ट्रपति राज्य सभा में 12 सदस्यों को मनोनीत (Nominate) कर सकते हैं।
  • ये सदस्य ऐसे व्यक्ति होते हैं जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है।
  • इस नामांकन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की प्रतिभाएं, जो सीधे चुनाव में भाग नहीं लेती हैं, संसद में अपना योगदान दे सकें।
  • मनोनयन का आधार
    • ये सदस्य साहित्य, कला, विज्ञान, समाज सेवा या खेल जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव वाले व्यक्ति होते हैं।
    • राष्ट्रपति इनकी नियुक्ति अपनी विवेकाधीन शक्ति से करता है, जो संसद की विशेषज्ञता को मजबूत करने के लिए है।​
  • राज्यसभा की संरचना
    • राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 है, जिसमें 238 सदस्य राज्य विधानसभाओं द्वारा चुने जाते हैं और शेष 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
    • वर्तमान में कुल 245 सदस्य हैं, जिसमें 12 नामित शामिल हैं।​
  • प्रक्रिया और शर्तें
    • मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है, और वे राज्यसभा के अन्य सदस्यों के समान अधिकार रखते हैं।
    • नामांकन से पहले राष्ट्रपति को आयोगों या अन्य स्रोतों से सलाह ली जा सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय उसका होता है।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • यह प्रावधान संविधान सभा द्वारा अपनाया गया ताकि निर्वाचित सदस्यों के अलावा विशेषज्ञ शामिल हों।
    • उदाहरणस्वरूप, मार्च 2023 तक 10 नामित सदस्य सक्रिय थे, शेष पद रिक्त।

19. भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है? [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) राष्ट्रपति
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत, भारत के राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं।
  • राष्ट्रपति इस नियुक्ति से पहले सर्वोच्च न्यायालय और राज्यों के उच्च न्यायालयों के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श करते हैं
  • जिन्हें वह आवश्यक समझते हैं। वर्तमान में, न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली की सिफारिशों के आधार पर की जाती है।
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत होती है
  • जिसमें राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के वरिष्ठ न्यायाधीशों से परामर्श करने के बाद नियुक्ति करते हैं।​
  • नियुक्ति की प्रक्रिया
    • मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए सामान्यतः सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को प्राथमिकता दी जाती है, जिसे 'वरिष्ठता का नियम' कहा जाता है।
    • निवर्तमान CJI द्वारा अगले CJI के लिए सिफारिश की जाती है, जो केंद्रीय कानून मंत्री के माध्यम से प्रधानमंत्री और फिर राष्ट्रपति तक पहुंचती है।
    • यदि कोई संदेह हो, तो कॉलेजियम (CJI और चार वरिष्ठ न्यायाधीश) से परामर्श लिया जाता है।​
  • संवैधानिक आधार
    • संविधान के अनुच्छेद 124(2) में स्पष्ट है कि राष्ट्रपति CJI की नियुक्ति के लिए आवश्यक समझे जाने वाले न्यायाधीशों से परामर्श करेंगे।
    • मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर' (MoP) इस प्रक्रिया को विस्तार से निर्देशित करता है, जिसमें सिफारिश की जांच और सहमति शामिल है।
    • यह प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करती है।​
  • योग्यता और कार्यकाल
    • CJI बनने के लिए व्यक्ति को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश होना चाहिए, जो 5 वर्ष के लिए या 65 वर्ष की आयु तक पद पर रहता है।
    • राष्ट्रपति शपथ दिलाते हैं, जैसा कि हाल ही में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के मामले में हुआ।​
  • महत्वपूर्ण भूमिकाएं
    • CJI सर्वोच्च न्यायालय के रोस्टर को नियंत्रित करते हैं, तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं
    • (अनुच्छेद 127), और कॉलेजियम के प्रमुख के रूप में अन्य न्यायाधीशों की सिफारिश करते हैं।
    • यह व्यवस्था कार्यपालिका के हस्तक्षेप को सीमित रखती है।

20. भारत के निम्नलिखित राष्ट्रपतियों में से कौन योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी थे? [CGL (T-I) 01 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) प्रणब मुखर्जी
Solution:
  • प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee), जो 2012 से 2017 तक भारत के 13वें राष्ट्रपति रहे, 1991 से 1996 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष (Deputy Chairman of the Planning Commission) के रूप में कार्य कर चुके थे।
  • योजना आयोग के अध्यक्ष हमेशा प्रधानमंत्री होते थे, जबकि उपाध्यक्ष एक पूर्णकालिक कार्यकारी प्रमुख होता था।
  • राष्ट्रपति बनने से पहले, प्रणब मुखर्जी भारत सरकार में वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे थे।
  • प्रणब मुखर्जी का योगदान
    • प्रणब मुखर्जी ने योजना आयोग में पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण और आर्थिक नीतियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • योजना आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता था, जबकि उपाध्यक्ष कैबिनेट द्वारा नियुक्त किया जाता था।
    • उनकी राजनीतिक यात्रा में वित्त, रक्षा और विदेश मंत्री जैसे पद भी शामिल रहे, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा दर्शाते हैं।​
  • योजना आयोग का संदर्भ
    • योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई थी, जिसका उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक विकास की योजना बनाना था।
    • गुलजारीलाल नंदा इसके पहले उपाध्यक्ष (1953-1963) थे, लेकिन वे कभी राष्ट्रपति नहीं बने। प्रणब मुखर्जी एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन्होंने यह दोहरा दायित्व निभाया।​
  • अन्य राष्ट्रपतियों की स्थिति
    • रामास्वामी वेंकटरमण, प्रतिभा पाटिल या ज्ञानी जैल सिंह जैसे अन्य राष्ट्रपतियों ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष का पद नहीं संभाला।
    • योजना आयोग को 2015 में नीति आयोग ने प्रतिस्थापित कर दिया। प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।​