Correct Answer: (c) उपभोक्ता मामले विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
Solution:- भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards - BIS) उपभोक्ता मामले विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तत्वावधान में कार्य करने वाला एक वैधानिक निकाय है।
- इसलिए, विकल्प (c) सही है। BIS भारत में मानकीकरण, अंकन (हॉलमार्किंग), और गुणवत्ता प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) के लिए राष्ट्रीय मानक निकाय है।
- इसका मुख्य उद्देश्य वस्तुओं के मानकीकरण और गुणवत्ता प्रमाणन के माध्यम से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
- यह विभिन्न उत्पादों के लिए भारतीय मानक (Indian Standards) विकसित और प्रकाशित करता है
- जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्राप्त हो सकें और उद्योगों को व्यापार में आसानी हो।
- स्थापना एवं कानूनी आधार
- BIS की स्थापना भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 के तहत 23 दिसंबर 1986 को की गई थी
- हालांकि कुछ स्रोतों में 1 अप्रैल 1987 को कार्य शुरू करने की तिथि उल्लिखित है।
- पहले इसे भारतीय मानक संस्थान (ISI) के नाम से जाना जाता था
- जिसकी जड़ें 1947 में हैं। यह अधिनियम 2016 में संशोधित हुआ, जिसने इसके कार्यों को और मजबूत किया।
- संगठनात्मक संरचना
- BIS का मुख्यालय मानेक भवन, नई दिल्ली में स्थित है।
- इसका महानिदेशक प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है (वर्तमान में प्रमोद कुमार तिवारी)।
- यह मंत्रालय के उपभोक्ता मामले विभाग के अधीन आता है
- राष्ट्रीय स्तर पर 5 क्षेत्रीय कार्यालयों, 33 ब्रांच कार्यालयों एवं अनेक प्रयोगशालाओं के माध्यम से कार्य करता है।
- बोर्ड ऑफ BIS में उद्योग प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, उपभोक्ता संगठन एवं सरकारी अधिकारी शामिल होते हैं।
- प्रमुख कार्य एवं जिम्मेदारियां
- BIS के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
- उत्पादों, सेवाओं, प्रक्रियाओं एवं विधियों के लिए भारतीय मानक (IS) तैयार करना, प्रकाशित करना एवं लागू करना।
- ISI मार्क, हॉलमार्किंग जैसी अनुरूपता मूल्यांकन योजनाएं संचालित करना, जो उपभोक्ताओं को गुणवत्ता वाली वस्तुएं उपलब्ध कराती हैं।
- प्रयोगशालाओं को मान्यता प्रदान करना तथा अंतरराष्ट्रीय मानक निकायों जैसे ISO एवं IEC में भारत का प्रतिनिधित्व करना।
- आयातित एवं स्वदेशी उत्पादों की गुणवत्ता जांच, विशेषकर आग्निरोधी सामग्री, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) एवं उपभोक्ता उत्पादों के लिए।
- उपभोक्ता स्वास्थ्य जोखिम कम करना एवं उत्पाद विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।
- BIS ने हाल के वर्षों में गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) लागू कर घटिया आयात रोकने में भूमिका निभाई है। यह 'मेक इन इंडिया' एवं 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा देता है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- BIS की नींव 1947 में ISI के रूप में पड़ी, जो स्वतंत्र भारत के औद्योगिक विकास का हिस्सा था।
- 1986 के अधिनियम ने इसे वैधानिक रूप प्रदान किया, जबकि 2016 का संशोधन ने इसे आधुनिक चुनौतियों जैसे डिजिटल उत्पादों के लिए अनुकूल बनाया।
- आज यह 20,000 से अधिक मानक विकसित कर चुका है।