राष्ट्रीय (अद्यतन सामान्य ज्ञान) भाग-III

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11. अक्टूबर, 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई "वन नेशन वन फर्टिलाइजर" (One Nation One Fertilizer) योजना के तहत उस ब्रांड का नाम बताइए जिसके तहत ये सभी उर्वरक बेचे जाएंगे? [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) भारत
Solution:
  • अक्टूबर, 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई "वन नेशन वन फर्टिलाइजर" (One Nation One Fertilizer) योजना के तहत, सभी उर्वरक 'भारत' (Bharat) ब्रांड नाम के तहत बेचे जाएंगे।
  • इस योजना को प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना (PM-BJUP) के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसका उद्देश्य उर्वरकों की ब्रांडिंग को मानकीकृत करना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सब्सिडी वाले उर्वरकों की ब्रांडिंग देश भर में एकल ब्रांड 'भारत' के तहत हो।
  • यह कदम उर्वरक क्षेत्र में एकरूपता लाने और किसानों के बीच भ्रम को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
  • योजना का परिचय
    •  इसका मुख्य उद्देश्य देशभर में सब्सिडी वाले उर्वरकों को एक ही ब्रांड "भारत" के तहत बेचना है
    • किसानों को गुणवत्ता और उपलब्धता में एकरूपता मिले।
  • ब्रांड विवरण
    • सभी प्रकार के उर्वरक जैसे यूरिय आदि अब "भारत" ब्रांड और PMBJP लोगो के साथ एकसमान पैकेजिंग में बिकते हैं।
    • इससे विभिन्न कंपनियों के ब्रांडों की बहुलता समाप्त हो गई है, और किसानों को ब्रांड भ्रम से मुक्ति मिली है।
  • उद्देश्य और लाभ
    • योजना उर्वरकों की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करती है तथा मिट्टी के संतुलित पोषण को बढ़ावा देती है।​
    • कंपनियों के बीच अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा कम होती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला सुव्यवस्थित रहती है।​
    • माल ढुलाई सब्सिडी पर बोझ घटता है, क्योंकि क्रॉस-कंट्री मूवमेंट कम हो जाता है।

12. सैम की वार्षिक आय 9 लाख रुपये है। वित्त वर्ष 2021-22 की आयकर स्लैब दरों (Income Tax Slab Rates) की नई व्यवस्था के अनुसार उसकी आय पर भारत का कौन-सा टैक्स स्लैब (नई व्यवस्था) लागू होगा? [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 15%
Solution:
  • सैम की वार्षिक आय 9 लाख रुपये है। वित्त वर्ष 2021-22 की आयकर स्लैब दरों की नई कर व्यवस्था के अनुसार, उसकी आय पर लागू टैक्स स्लैब निम्नलिखित है:
  • नई कर व्यवस्था (FY 2021-22) के तहत स्लैब दरें इस प्रकार थीं:
  • ₹0 से ₹2.5 लाख तक - शून्य
  • ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक - 5%
  • ₹5 लाख से ₹7.5 लाख तक - 10%
  • ₹7.5 लाख से ₹10 लाख तक - 15%
  • ₹10 लाख से ₹12.5 लाख तक - 20%
  • ₹12.5 लाख से ₹15 लाख तक - 25%
  • ₹15 लाख से ऊपर - 30%
  • चूँकि सैम की आय ₹9 लाख है, यह ₹7.5 लाख से ₹10 लाख की सीमा में आती है।
  • अतः, उसकी आय के इस हिस्से पर 15% का टैक्स स्लैब लागू होगा।
  • नई व्यवस्था के आयकर स्लैब (FY 2021-22)
    • वित्त वर्ष 2021-22 (आकलन वर्ष 2022-23) के लिए भारत सरकार ने बजट 2021 में नई सरलीकृत आयकर व्यवस्था पेश की
    • जिसमें अधिकांश कटौतियां और छूट (जैसे 80C, 80D, HRA) उपलब्ध नहीं होतीं, लेकिन कर की दरें कम हैं।
    • यह व्यवस्था वैकल्पिक है—टैक्सपेयर पुरानी व्यवस्था भी चुन सकते हैं। नई व्यवस्था के स्लैब इस प्रकार हैं:
    • ये स्लैब व्यक्तियों (60 वर्ष से कम उम्र), HUF, AOP आदि पर लागू होते हैं।
    • स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेस 4% अतिरिक्त लगता है। सर्चार्ज उच्च आय पर लागू होता है (जैसे 50 लाख से अधिक पर 10%)।
  • सैम की 9 लाख आय पर विश्लेषण
    • सैम की कुल आय 9,00,000 रुपये है, जो 7.5 लाख से 10 लाख के स्लैब में आती है।
    • इसलिए, इस स्लैब की 15% दर उनके अधिकांश कर योग्य आय पर लागू होगी। स्टेप-बाय-स्टेप गणना:​
    • 0 से 2.5 लाख: 0 रुपये कर (0%)
    • 2.5 लाख से 5 लाख (2.5 लाख): 5% = 12,500 रुपये
    • 5 लाख से 7.5 लाख (2.5 लाख): 10% = 25,000 रुपये
    • 7.5 लाख से 9 लाख (1.5 लाख): 20% = 22,500 रुपये? नहीं
    • सही स्लैब 7.5-10 लाख पर 15%। कुल टैक्स बेसिक रूप से प्रोग्रेसिव है
    • लेकिन 9 लाख पर मुख्य स्लैब 15% ही माना जाता है जैसा प्रश्न में पूछा गया।​
  • अतिरिक्त जानकारी
    • रिबेट (सेक्शन 87A): 5 लाख तक आय पर पूर्ण रिबेट (12,500 तक), लेकिन 9 लाख पर लागू नहीं।​
    • सेस और सर्चार्ज: कुल टैक्स पर 4% सेस। 9 लाख पर सर्चार्ज नहीं।​
    • फाइलिंग: ITR-1 या ITR-2 में नई व्यवस्था चुनें।
    • वित्त वर्ष 2021-22 की अंतिम तिथि बीत चुकी, लेकिन उदाहरण के लिए उपयोगी।​

13. 2022 में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ....... में ग्रीनफील्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC - Electronic Manufacturing Cluster) को मंजूरी दी। [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) महाराष्ट्र
Solution:
  • 2022 में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने महाराष्ट्र में ग्रीनफील्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC - Electronic Manufacturing Cluster) को मंजूरी दी।
  • यह मंजूरी पुणे के रंजणगाँव (Ranjangaon) में दी गई थी।
  • इस क्लस्टर की स्थापना का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Electronics Manufacturing) को बढ़ावा देना
  • निवेश आकर्षित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। यह भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • EMC का स्थान और विवरण
    • यह क्लस्टर महाराष्ट्र के पुणे जिले के रंजangaon फेज III में स्थापित किया जा रहा है
    • जहां महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) और राज्य सरकार की राज्य औद्योगिक एजेंसी को मंजूरी मिली।
    • परियोजना की कुल लागत 492.85 करोड़ रुपये है
    • जो इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, साझा सुविधाएं और सहायक इकाइयों को विकसित करेगी।
  • उद्देश्य और लाभ
    • EMC योजना का मुख्य लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) क्षेत्र को मजबूत करना है
    • जिसमें मोबाइल फोन, केबल और अन्य उपकरणों का उत्पादन शामिल है।
    • यह निवेश को आकर्षित करेगा (लगभग 2000 करोड़ रुपये से अधिक), 5000 से ज्यादा नौकरियां पैदा करेगा और राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा देगा।
    • ग्रीनफील्ड होने से नई जमीन पर आधुनिक सुविधाएं जैसे बिजली, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स विकसित होंगी।
  • EMC योजना का व्यापक संदर्भ
    • EMC 2.0 योजना के तहत देशभर में 15 राज्यों में 20 ग्रीनफील्ड EMC और 3 कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स (CFC) को मंजूरी मिल चुकी है
    • कुल क्षेत्र 3565 एकड़ और लागत 3898 करोड़ रुपये (जिसमें 1577 करोड़ अनुदान)। 2022 तक फंड वितरण की समयसीमा थी
    • जो इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को गहरा करने के लिए थी। महाराष्ट्र का यह क्लस्टर PLI योजना और SPECS जैसी अन्य पहलों का हिस्सा है।

14. सितंबर, 2020 में किस विधेयक के कारण लोगों ने दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया? [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) कृषि विधेयक
Solution:
  • सितंबर, 2020 में, कृषि विधेयक (Farm Bills) के कारण लोगों ने दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
  • केंद्र सरकार ने संसद में तीन कृषि बिल पारित किए थे
  • कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020; कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020; और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020।
  • किसानों और कुछ संगठनों ने इन विधेयकों का विरोध किया क्योंकि उन्हें लगा
  • ये विधेयक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली को कमजोर करेंगे और उन्हें बड़े कॉर्पोरेट खरीदारों के प्रति संवेदनशील बना देंगे।
  • एक वर्ष से अधिक के विरोध के बाद, इन कानूनों को नवंबर 2021 में रद्द कर दिया गया था।
  • विरोध के कारण
    • किसानों को डर था कि ये बिल APMC मंडियों को खत्म कर देंगे, जिससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी चली जाएगी।
    • पंजाब और हरियाणा जैसे गेहूं-धान उत्पादक राज्यों में MSP पर निर्भरता अधिक थी, इसलिए विरोध तीव्र हुआ।
    • विपक्ष ने इन्हें "किसान-विरोधी" कहा, जबकि सरकार ने "सुधार" का दावा किया।
  • प्रदर्शनों का स्वरूप
    • 19-20 सितंबर 2020 से पंजाब-हरियाणा में ट्रैक्टर रैलियां और हाईवे जाम शुरू हुए।
    • पंजाब के जीरकपुर में युवा कांग्रेस ने दिल्ली मार्च निकाला, पुलिस ने रोका।
    • हरियाणा के सिरसा में NH-9 ब्लॉक, जककल जाम।
    • दिल्ली बॉर्डर पर किसान दिल्ली कूच करने को तैयार, बड़े प्रदर्शन की शुरुआत।​​
    • पंजाब में अकाली दल ने बीजेपी गठबंधन तोड़ा।​
  • प्रभाव और फैसला
    • प्रदर्शन नवंबर 2020 तक दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहे, जिससे राष्ट्रीय ध्यान गया।
    • नवंबर 2021 में सरकार ने तीनों विधेयक वापस ले लिए।
    • यह भारत के सबसे लंबे किसान आंदोलनों में से एक था।

15. नवंबर, 2022 में भारतीय तटरक्षक के उन्नत और हल्के हेलीकॉप्टर (Indian Coast Guard Advanced Light Helicopter) Mk-III स्क्वाड्रन, 840 Sqn (CG) को ....... में नियुक्त किया गया। [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) चेन्नई
Solution:
  • नवंबर, 2022 में भारतीय तटरक्षक (Indian Coast Guard) के उन्नत और हल्के हेलीकॉप्टर (Advanced Light Helicopter - ALH) Mk-III स्क्वाड्रन, 840 Sqn (CG) को चेन्नई में नियुक्त किया गया।
  • यह स्क्वाड्रन हवाई टोही, खोज और बचाव, समुद्री गश्त और निगरानी जैसी महत्वपूर्ण परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जिम्मेदार है।
  • चेन्नई में तैनाती का उद्देश्य पूर्वी समुद्र तट पर तटीय सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाना और समुद्री मार्गों की निगरानी को मजबूत करना है।
  • ALH Mk-III हेलीकॉप्टरों का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया जाता है।
  • कमीशनिंग का विवरण
    • यह तटरक्षक क्षेत्र पूर्व (Coast Guard Region East) को मजबूत करने वाला एक प्रमुख कदम था
    • जो स्वदेशी हेलीकॉप्टर निर्माण में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
    • स्क्वाड्रन में 16 ALH Mk-III हेलीकॉप्टर शामिल हैं, जो हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित बहु-भूमिका वाले हेलीकॉप्टर हैं।
  • ALH Mk-III हेलीकॉप्टर की विशेषताएं
    • ALH Mk-III, जिसे ध्रुव के नाम से भी जाना जाता है, जहाजों और तटवर्ती स्टेशनों से संचालित होने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    • इसमें उन्नत निगरानी, खोज एवं बचाव (SAR), तटीय सुरक्षा, प्रदूषण प्रतिक्रिया जैसी क्षमताएं हैं।
    • ये हेलीकॉप्टर पूर्वी समुद्री सीमा पर नजर रखने, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • महत्व और प्रभाव
    • चेन्नई में इस स्क्वाड्रन की तैनाती से तमिलनाडु तट और पूर्वी समुद्री क्षेत्र में ICG की परिचालन क्षमता में भारी वृद्धि हुई।
    • यह स्क्वाड्रन समुद्री निगरानी को मजबूत करता है और तटरक्षक के कुल बेड़े में रोटरी-विंग विमानों की संख्या बढ़ाता है
    • जिसमें डोर्नियर 228, चेतक जैसे अन्य शामिल हैं।
    • कुल मिलाकर, यह घटना भारत की समुद्री सुरक्षा को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई।

16. राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक 27 जुलाई, 2022 को लोक सभा में पारित हुआ था। निम्नलिखित में से कौन-सी संस्था भारत में डोपिंग नियंत्रण कार्यक्रमों का प्रबंधन और संचालन करती है? [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी
Solution:
  • राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक 27 जुलाई, 2022 को लोक सभा में पारित हुआ था।
  • भारत में डोपिंग नियंत्रण कार्यक्रमों का प्रबंधन और संचालन करने वाली संस्था राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA - National Anti-Doping Agency) है।
  • NADA भारत में खेल में डोप-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।
  • यह विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के दिशानिर्देशों का पालन करती है
  • एथलीटों पर डोप परीक्षण करती है, डोपिंग रोधी शिक्षा प्रदान करती है और डोपिंग उल्लंघन के मामलों को देखती है।
  • विधेयक का संक्षिप्त इतिहास
    • उसके बाद 2 अगस्त 2022 को राज्यसभा से भी मंजूरी मिली।
    • यह विधेयक खेलों में डोपिंग रोकने के लिए NADA को वैधानिक दर्जा प्रदान करता है
    • जो पहले एक पंजीकृत सोसाइटी के रूप में कार्यरत थी।
    • इस कानून ने भारत को विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत ढांचा दिया।
  • NADA की भूमिका और कार्य
    • NADA की स्थापना 2005 में हुई थी और यह युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के अधीन काम करती है।
    • यह डोपिंग रोधी नियमों का निर्माण, कार्यान्वयन और निगरानी करती है।
    • खिलाड़ियों पर डोप परीक्षण आयोजित करना, नमूने एकत्र करना तथा परिणामों की जांच सुनिश्चित करना।
    • राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) के साथ समन्वय स्थापित कर परीक्षणों का संचालन।​
    • एथलीटों, कोचों और सहायक स्टाफ को डोपिंग जागरूकता कार्यक्रम चलाना।​
    • NADA WADA के कोड का पालन करती है, जो वैश्विक स्तर पर डोपिंग नियंत्रण का आधार है।​
  • डोपिंग नियंत्रण कार्यक्रम की प्रक्रिया
    • डोपिंग नियंत्रण में निम्न चरण शामिल हैं:
    • टारगेट टेस्टिंग: उच्च जोखिम वाले खिलाड़ियों पर केंद्रित परीक्षण।
    • रैंडम टेस्टिंग: यादृच्छिक चयन से नमूने।
  • इन-कंपटीशन और आउट-ऑफ-कंपटीशन टेस्ट
    •  प्रतियोगिता के दौरान या बाहर।​
    • नमूनों की जांच NDTL में होती है, जो WADA-अनुमोदित लैब है।
    • उल्लंघन पर NADA अपील पैनल के माध्यम से 4 वर्ष तक की निष्कासन की सजा दे सकती है।​
  • विधेयक के प्रमुख प्रावधान
    • विधेयक NADA को स्वतंत्र महानिदेशक के नेतृत्व में शक्तियां देता है:
    • डोपिंग रोधी शिक्षा, अनुसंधान और क्षमता निर्माण।
    • खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा और समयबद्ध न्याय।
    • अतिरिक्त NDTL की स्थापना और पोषक तत्व मानकों का निर्धारण।
    • यह यूनेस्को कन्वेंशन को लागू करता है, जिससे भारत स्वच्छ खेलों में वैश्विक प्रतिबद्धता दिखाता है।​
  • महत्वपूर्ण उपलब्धियां और चुनौतियां
    • 2022 के बाद NADA ने परीक्षण संख्या बढ़ाई, 2023-24 में 5000+ टेस्ट किए।
    • हालांकि, कुछ मामलों में देरी और अपीलों की चुनौतियां बनी रहीं।
    • यह विधेयक रोजगार और अनुसंधान के अवसर भी पैदा करता है।
    • NADA का विस्तार ओलंपिक जैसे आयोजनों के लिए भारत को तैयार करता है।

17. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक वर्चुअल इवेंट के माध्यम से ....... तक क्षय रोग को खत्म करने के लिए 'प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (Pradhan Mantri TB Mukt Bharat Abhiyan)' और निक्षय (Nikshay) 2.0 पोर्टल लांच किया है। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 2025
Solution:
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक वर्चुअल इवेंट के माध्यम से 2025 तक क्षय रोग (टीबी) को खत्म करने के लिए 'प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान और निक्षय (Nikshay) 2.0 पोर्टल लांच किया है।
  • भारत सरकार ने 2025 तक टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक लक्ष्य 2030 है।
  • इस अभियान के तहत, टीबी रोगियों को अतिरिक्त पोषण, निदान और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के लिए सामुदायिक सहायता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • निक्षय पोर्टल टीबी रोगियों के लिए एक एकीकृत सूचना और संचार प्रौद्योगिकी मंच है।
  • निक्षय 2.0 पोर्टल की विशेषताएं
    • निक्षय 2.0 एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है जो टीबी रोगियों की निगरानी, उपचार प्रगति ट्रैकिंग और दान प्रबंधन के लिए विकसित किया गया।
    • यह 'निक्षय मित्र' पहल का हिस्सा है, जहां दानकर्ता (जैसे विधायक, राजनीतिक दल, कॉर्पोरेट, एनजीओ, व्यक्ति) रोगियों को पोषण, अतिरिक्त जांच और व्यावसायिक सहायता प्रदान कर सकते हैं।
    • पोर्टल दान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाता है और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करता है।
  • लॉन्च इवेंट के मुख्य बिंदु
    • वर्चुअल कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि टीबी भारत में संक्रामक रोगों में सबसे अधिक मौत का कारण है
    • जहां विश्व की 20% आबादी होने पर भी 25% से अधिक टीबी मरीज हैं, ज्यादातर गरीब वर्ग से।
    • उन्होंने इसे जन आंदोलन बनाने और सभी नागरिकों का कर्तव्य बताया।
    • कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया, राज्यपाल, जिला स्वास्थ्य अधिकारी और अन्य हितधारक शामिल हुए।
  • अभियान की प्रगति और प्रभाव
    • लॉन्च के बाद अभियान ने लाखों निक्षय मित्र जोड़े, जिन्होंने रोगियों को सहायता दी। दिसंबर 2024 में 100-दिवसीय गहन टीबी मुक्त अभियान शुरू हुआ।
    • फरवरी 2026 तक, भारत टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रगति कर रहा है, लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं।
    • यह अभियान राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) को जन-भागीदारी से मजबूत करता है।

18. गर्भ के चिकित्सकीय समापन संशोधन विधेयक, 2021 [The Medical Termination of Pregnancy (MTP) (Amendment Bill) 2021] द्वारा कुछ श्रेणियों की महिलाओं के लिए गर्भपात की ऊपरी सीमा को 20 सप्ताह से बढ़ाकर ....... सप्ताह कर दिया गया है। [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 24
Solution:
  • गर्भ के चिकित्सकीय समापन संशोधन विधेयक, 2021 द्वारा कुछ श्रेणियों की महिलाओं के लिए गर्भपात की ऊपरी सीमा को 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दिया गया है।
  • यह संशोधन विशेष रूप से यौन उत्पीड़न या बलात्कार से पीड़ित महिलाओं, नाबालिगों, मानसिक रूप से बीमार महिलाओं, विकलांग महिलाओं और मानवीय आधार पर अन्य कमजोर महिलाओं को सुरक्षित और कानूनी गर्भपात तक पहुँच प्रदान करने के लिए किया गया था।
  • इस संशोधन का उद्देश्य महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की सुरक्षा करना और सुरक्षित गर्भपात सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना है।
  • विधेयक का पृष्ठभूमि
    • यह विधेयक मूल गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 में संशोधन करता है
    • जिसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और वैध गर्भपात सेवाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करना है।
    • 2020 में लोकसभा और 2021 में राज्यसभा से पारित होने के बाद यह अधिनियम 24 सितंबर 2021 को लागू हुआ। इससे पहले 20 सप्ताह की सीमा सामान्य मामलों में लागू थी
    • लेकिन संशोधन ने चिकित्सकीय, मानवीय और सामाजिक आधारों पर ढील दी।
  • मुख्य प्रावधान
    • सामान्य गर्भपात सीमा: अधिकांश मामलों में अब भी 20 सप्ताह तक की अनुमति, लेकिन केवल एक रजिस्टर्ड चिकित्सक की राय पर।
    • इसमें मां के जीवन या स्वास्थ्य को खतरा, भ्रूण में असामान्यता या गर्भनिरोधक विफलता शामिल है।
    • विशेष श्रेणी महिलाओं के लिए विस्तार: दुष्कर्म पीड़ित, अनाचार से प्रभावित, दिव्यांग, नाबालिग या अन्य कमजोर महिलाओं के लिए सीमा 24 सप्ताह तक बढ़ाई गई।
    • इन मामलों में दो चिकित्सकों की राय जरूरी है।
    • 24 सप्ताह से अधिक: केवल मेडिकल बोर्ड की मंजूरी पर, यदि भ्रूण में गंभीर असामान्यताएं हों।
    • राज्य-स्तरीय बोर्ड में गायनेकोलॉजिस्ट, स्तनपान विशेषज्ञ आदि शामिल होते हैं।
  • गर्भनिरोधक विफलता पर बदलाव
    • अब विवाहित और अविवाहित दोनों महिलाएं गर्भनिरोधक विधि की विफलता पर 20 सप्ताह तक गर्भपात करा सकती हैं।
    • पहले यह सुविधा केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित थी।
  • प्रभाव और महत्व
    • यह संशोधन दुष्कर्म या देरी से पता चले मामलों में महिलाओं को राहत देता है, खासकर कमजोर वर्गों को।
    • हालांकि, 24 सप्ताह से आगे की सीमा सख्ती से मेडिकल बोर्ड पर निर्भर है
    • जो भ्रूण विकृतियों की जांच सुनिश्चित करता है।
    • भारत में सुरक्षित गर्भपात सेवाओं का विस्तार हुआ, लेकिन जागरूकता और पहुंच अभी भी चुनौती है।

19. फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने 'बल्क ड्रम पार्कों को बढ़ावा देने' योजना के तहत तीन राज्यों हिमाचल प्रदेश, गुजरात और ........ में बल्क ड्रग पार्क बढ़ाने के प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) आंध्र प्रदेश
Solution:
  • फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने 'बल्क ड्रम पार्कों को बढ़ावा देने' योजना के तहत तीन राज्यों हिमाचल प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश में बल्क ड्रग पार्क बढ़ाने के प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
  • इस योजना का उद्देश्य देश में बल्क ड्रग्स (दवाओं के उत्पादन के लिए कच्चे माल) के विनिर्माण की लागत को कम करना और भारत को वैश्विक बल्क ड्रग विनिर्माण केंद्र बनाना है।
  • इन पार्कों में सामान्य बुनियादी सुविधाएँ होंगी, जिससे बल्क ड्रग उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा और दवाओं के उत्पादन में देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
  • योजना का उद्देश्य
    • यह योजना केंद्र सरकार द्वारा 20 मार्च 2020 को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अधिसूचित की गई थी
    • जिसमें कुल 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
    • इसका मुख्य लक्ष्य विश्वस्तरीय सामान्य अवसंरचना (जैसे साझा परीक्षण सुविधाएं, भंडारण, अपशिष्ट प्रबंधन) विकसित कर बल्क ड्रग्स (कच्चे सक्रिय औषधीय संघटक या APIs) के उत्पादन लागत को 10-20% तक कम करना है।
    • इससे भारत की दवा आयात निर्भरता (विशेषकर चीन से 60-70%) घटेगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
  • मंजूर राज्य और वित्तीय सहायता
    • तीन राज्यों—हिमाचल प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश—के प्रस्तावों को प्रत्येक पार्क के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता के साथ मंजूरी मिली है।
    • हिमाचल प्रदेश (पहाड़ी राज्य): परियोजना लागत का 90% सहायता।
    • स्थान: ऊना जिले के हरोली तहसील में 1,402.44 एकड़ भूमि।​
    • गुजरात: परियोजना लागत का 70% सहायता। स्थान: भरूच जिले के जम्बूसर तहसील में 2,015.02 एकड़ भूमि।​
    • आंध्र प्रदेश: परियोजना लागत का 70% सहायता। स्थान: पूर्वी गोदावरी जिले के थोंडागी मंडल के केपी पुरम और कोढ़ाहा में 2,000.45 एकड़ भूमि।​
    • 13 राज्यों से प्राप्त 13 प्रस्तावों में से इन तीन को चयनित किया गया।
    • राज्यों को 90 दिनों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा करने का निर्देश दिया गया।
  • कार्यान्वयन प्रगति
    • 2022 तक सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी, और 2025-26 तक ये पार्क कार्यरत होने की उम्मीद है।
    • फरवरी 2026 तक, विभाग ऑफ फार्मास्यूटिकल्स (रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन) योजना को लागू कर रहा है
    • जो सहकारी संघवाद का उदाहरण है।
    • पार्कों से 50+ बल्क ड्रग्स का उत्पादन होगा, जिससे 35,000 करोड़ रुपये का निवेश और लाखों रोजगार सृजन होगा।
  • अन्य संबंधित पहलें
    • यह PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम का हिस्सा है
    • जिसमें मरीन गुड्स, फिनिशिंग इंटरमीडिएट्स आदि पर भी फोकस है।
    • कोविड-19 के बाद शुरू आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ी यह योजना दवा क्षेत्र को मजबूत करेगी।
    • 2026-27 बजट में रसायन क्षेत्र को अतिरिक्त बढ़ावा मिला है।

20. भारत में 5G दूरसंचार तकनीक किस वर्ष शुरू की गई थी? [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 2022
Solution:
  • भारत में 5G दूरसंचार तकनीक 2022 में शुरू की गई थी।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर, 2022 को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) में 5G सेवाओं की औपचारिक शुरुआत की थी।
  • 5G पिछली पीढ़ियों की तुलना में काफी तेज गति और कम विलंबता (low latency) प्रदान करता है
  • जिससे नई तकनीकों जैसे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन-टू-मशीन संचार के लिए मार्ग प्रशस्त होता है।
  • प्रारंभिक लॉन्च का विवरण
    • इस लॉन्च के समय रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में 5G सेवाएं शुरू कीं।
    • सरकार ने अगस्त 2022 में स्पेक्ट्रम नीलामी के माध्यम से दूरसंचार कंपनियों को 5G बैंड आवंटित किए थे
    • जिसके बाद यह रोलआउट संभव हुआ। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्मार्ट कृषि और कार्यकर्ता सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में 5G के उपयोग मामलों का भी प्रदर्शन किया
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारत का मोबाइल नेटवर्क सफर 1995 में 2G से शुरू हुआ, जिसमें वॉयस कॉल और SMS की सुविधा थी।
    • 2009 में 3G लॉन्च हुआ, जिसने मोबाइल इंटरनेट को गति दी, और 2012 में 4G ने हाई-स्पीड डेटा को आम किया।
    • 27 वर्षों के इस सफर के बाद 2022 में 5G ने भारत को अल्ट्रा-फास्ट कनेक्टिविटी प्रदान की, जो डेटा स्पीड को 10 Gbps तक बढ़ा सकती है।
  • तकनीकी विशेषताएं और लाभ
    • 5G तकनीक 4G से 10-100 गुना तेज है, जिसमें कम लेटेंसी (1 मिलीसेकंड तक) और अधिक डिवाइस कनेक्टिविटी है।
    • यह IoT, स्मार्ट सिटीज, ऑटोनॉमस वाहन और AR/VR जैसे अनुप्रयोगों को सक्षम बनाएगी।
    • भारत में प्रति व्यक्ति औसत डेटा उपयोग 14 GB प्रति माह है
    • 5G से डेटा लागत और कम होगी, जिससे ग्रामीण डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
  • चुनौतियां और भविष्य
    • शुरुआती चरण में स्पेक्ट्रम उपलब्धता, इंफ्रास्ट्रक्चर लागत और डिवाइस संगतता चुनौतियां रहीं, लेकिन सरकार और टेलीकॉम कंपनियों ने इन्हें दूर किया।
    • 2026 तक पूर्ण कवरेज की उम्मीद है, जो आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करेगा।