राष्ट्रीय (अद्यतन सामान्य ज्ञान) भाग-III

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31. जनवरी, 2023 को, ....... को नागरिक उड्डयन (विमानन) महानिदेशालय (DGCA) के अगले महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) विक्रम देव दत्त
Solution:
  • जनवरी, 2023 को, विक्रम देव दत्त को नागरिक उड्डयन (विमानन) महानिदेशालय (DGCA) के अगले महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था।
  • उन्हें अरुण कुमार का स्थान लेने के लिए नियुक्त किया गया था। DGCA भारत में नागरिक उड्डयन को विनियमित करने वाली मुख्य संस्था है।
  • जनवरी 2023 में विक्रम देव दत्त को नागरिक उड़्डयन महानिदेशालय (DGCA) के महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था।
  • विक्रम देव दत्त का पृष्ठभूमि
    • विक्रम देव दत्त 1993 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं, जो AGMUT (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम-केंद्रशासित प्रदेश) कैडर से हैं
    • नियुक्ति से पहले वे एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड (AIAHL) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक थे।
    • उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव, नागरिक उड्डयन मंत्रालय में संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले हैं।
  • DGCA की भूमिका
    • DGCA भारत का प्रमुख नागरिक विमानन नियामक निकाय है
    • जो हवाई सुरक्षा, नियमों का प्रवर्तन, विमान योग्यता मानकों और हवाई परिवहन सेवाओं का नियमन करता है।
    • इस नियुक्ति से विमानन क्षेत्र में उभरती चुनौतियों जैसे दुर्घटना जांच और नीतिगत सुधारों पर जोर दिया गया।​
  • बाद की प्रगति
    • विक्रम देव दत्त ने DGCA में कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
    • बाद में अक्टूबर 2024 में उन्हें कोयला मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया।
    • उनकी नियुक्ति ने विमानन उद्योग में प्रशासनिक स्थिरता प्रदान की।​

32. संविधान (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022 ने उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में ....... समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी है। [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) गोंड (Gonds)
Solution:
  • संविधान (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022 ने उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में गोंड (Gonds) समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी है।
  • यह विधेयक उत्तर प्रदेश के चार जिलों (चंदौली, कुशीनगर, संत कबीर नगर, भदोही) के गोंड समुदाय को अनुसूचित जाति से हटाकर अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करता है
  • विधेयक का परिचय
    • इससे पहले यह समुदाय इन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति (SC) के रूप में वर्गीकृत था
    • लेकिन उनकी जनजातीय विशेषताओं को मान्यता देने के लिए यह बदलाव आवश्यक था।
  • प्रभावित क्षेत्र
    • विधेयक ने उत्तर प्रदेश के चार जिलों—चंदौली, कुशीनगर, संत कबीर नगर और संत रविदास नगर (भदोही)—में गोंड समुदाय को ST का दर्जा दिया।
    • इन जिलों तक सीमित होने से यह संशोधन क्षेत्र-विशिष्ट है, जो राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों के तहत अनुसूचियों में परिवर्तन की अनुमति देता है
    • (अनुच्छेद 342)। इस बदलाव से समुदाय को सरकारी योजनाओं, आरक्षण और कल्याणकारी लाभों में ST श्रेणी के तहत अधिक अवसर मिलेंगे।
  • संसदीय प्रक्रिया
    • लोकसभा ने विधेयक को 1 अप्रैल 2022 को पारित किया।
    • उसके बाद, 14 दिसंबर 2022 को जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा राज्यसभा में पुनः पेश किया गया
    • जहां इसे ध्वनिमत से मंजूरी मिली। दिसंबर 2022 में संसद के शीतकालीन सत्र में पारित होने के बाद
    • इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और यह संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2022 के रूप में कानून बन गया।
  • महत्व और प्रभाव
    • गोंड समुदाय भारत की प्रमुख जनजातियों में से एक है, जो मुख्य रूप से मध्य भारत में निवास करता है
    • लेकिन उत्तर प्रदेश के इन पूर्वांचल जिलों में उनकी उपस्थिति ऐतिहासिक रूप से SC के रूप में दर्ज थी।
    • इस संशोधन से लगभग हजारों सदस्यों को ST लाभ मिलेंगे, जैसे शिक्षा, नौकरी में 7.5% आरक्षण (केंद्रीय स्तर पर), वन अधिकार और जनजातीय कल्याण मंत्रालय की योजनाएं।
    • यह कदम सामाजिक न्याय को मजबूत करता है, क्योंकि गोंडों की सांस्कृतिक और नृवंशीय पहचान जनजातीय है
    • वे गोंडी भाषा बोलते हैं और पारंपरिक रूप से वन-आधारित जीवन जीते हैं।
  • पृष्ठभूमि और संदर्भ
    • भारतीय संविधान अनुसूचित जातियों और जनजातियों को विशेष दर्जा देता है ताकि सदियों के भेदभाव को दूर किया जा सके।
    • राष्ट्रपति संविधान (अनुसूची 5 और 6) के तहत इन सूचियों को संसद की सिफारिश पर संशोधित कर सकते हैं।
    • यह विधेयक उसी प्रक्रिया का हिस्सा था, जहां उत्तर प्रदेश सरकार और जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की सिफारिश पर कार्रवाई की।
    • समान अन्य विधेयक उस समय तमिलनाडु के लिए भी पारित हुए, जो ST सूचियों को अद्यतन करने की निरंतर प्रक्रिया दर्शाते हैं।
    • यह संशोधन उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में ST आबादी को सही प्रतिनिधित्व प्रदान करता है
    • जहां ST की कुल आबादी लगभग 1% है, लेकिन स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण है।
    • अब गोंड समुदाय इन चार जिलों में SC लाभ खोए बिना ST लाभ प्राप्त कर सकता है
    • हालांकि दोहरी वर्गीकरण से बचने के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान लागू हो सकते हैं।​

33. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य लॉजिस्टिक्स ईज अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स (लीड्स) 2022 में "अचीवर्स" राज्यों में प्रथम स्थान पर है? [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) महाराष्ट्र
Solution:
  • लॉजिस्टिक्स ईज अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स (LEADS) 2022 में आंध्र प्रदेश "अचीवर्स" राज्यों में प्रथम स्थान पर है।
  • LEADS रिपोर्ट राज्यों में लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जो माल की आवाजाही की दक्षता और व्यापार करने में आसानी को दर्शाता है।
  • अचीवर्स" श्रेणी में वे राज्य शामिल हैं जो लॉजिस्टिक्स समर्थन में उच्च रैंक प्राप्त करते हैं।
  • LEADS रिपोर्ट का परिचय
    •  2022 संस्करण में पारंपरिक रैंकिंग के बजाय वर्गीकरण-आधारित ग्रेडिंग अपनाई गई
    • जिसमें तटीय राज्य, भू-आबद्ध राज्य, उत्तर-पूर्वी राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया।
    • अचीवर्स" वे राज्य हैं जिन्होंने 90% या इससे अधिक स्कोर हासिल किया।
  • अचीवर्स श्रेणी के राज्य
    • 2022 में "अचीवर्स" श्रेणी में शामिल राज्य और केंद्रशासित प्रदेश निम्नलिखित हैं:
    • आंध्र प्रदेश
    • असम
    • चंडीगढ़
    • दिल्ली
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • कर्नाटक
    • महाराष्ट्र (प्रथम स्थान)
    • ओडिशा
    • पंजाब
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • गुजरात
    • इनमें महाराष्ट्र ने शीर्ष प्रदर्शन किया
    • जो अपनी मजबूत लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, परिवहन नेटवर्क और नीतिगत सुधारों के कारण संभव हुआ।
  • अन्य श्रेणियां
    • फास्ट मूवर्स (80-90% स्कोर): केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पुडुचेरी, सिक्किम, त्रिपुरा।
    • एस्पिरर्स (80% से कम स्कोर): शेष राज्य।
    • यह वर्गीकरण राज्यों को अपनी विशिष्ट भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर सुधार करने में मदद करता है।
  • रिपोर्ट का महत्व
    • LEADS 2022 पहली रिपोर्ट 2018 से जारी हो रही है
    • यह लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में सहायक है।
    • महाराष्ट्र जैसे राज्य बड़े पैमाने पर माल ढुलाई हब के रूप में उभरे, जिससे राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स इंडेक्स में सुधार हुआ।

34. गुजरात के किस गांव को अक्टूबर, 2022 में भारत का पहला चौबीस घंटे सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला गांव घोषित किया गया था? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) मोढेरा
Solution:
  • गुजरात के मोढेरा गांव को अक्टूबर, 2022 में भारत का पहला चौबीस घंटे सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला गांव घोषित किया गया था।
  • यह गांव गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित है और यह अपनी सौर ऊर्जा परियोजना के माध्यम से अपनी सभी बिजली की जरूरतों को पूरा करता है।
  • यह अपनी ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है।
  • मोढेरा गांव
  • घोषणा का संदर्भ
    • यह उपलब्धि प्रधानमंत्री की सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली दृष्टि का हिस्सा थी।
    • गांव में जमीनी सोलर प्लांट के अलावा 1300 से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए
    • जो बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) से जुड़े हैं।
    • इससे गांव को रात में भी सौर ऊर्जा उपलब्ध हो सकी, और ग्रामीणों को मुफ्त बिजली मिलने लगी।​
  • तकनीकी विवरण
    • गांव के 1000+ घरों और सरकारी भवनों पर सोलर पैनल लगे हैं, जो कुल मिलाकर पर्याप्त ऊर्जा पैदा करते हैं।
    • दिन में उत्पन्न बिजली को बैटरी में स्टोर किया जाता है, जिससे 24x7 आपूर्ति संभव हुई।
    • परियोजना की लागत करोड़ों में थी, लेकिन यह स्वदेशी तकनीक पर आधारित थी और अन्य गांवों के लिए मॉडल बनी।​
  • ऐतिहासिक महत्व
    • मोढेरा का सूर्य मंदिर 11वीं शताब्दी का है, जिसे चालुक्य राजा भीमदेव प्रथम ने बनवाया था।
    • घोषणा के साथ ही मंदिर को सौर ऊर्जा से चलने वाली 3D प्रोजेक्शन और हेरिटेज लाइटिंग भी दी गई।
    • अब शाम 6 से रात 10 बजे तक पर्यटक इसे देख सकते हैं, जो पूर्णतः सौर ऊर्जा पर निर्भर है।
  • प्रभाव और प्रगति
    • यह परियोजना ने ग्रामीण ऊर्जा आत्मनिर्भरता का उदाहरण पेश किया, जहां बिजली ग्रिड पर निर्भरता शून्य हो गई।
    • लगभग 6000 की आबादी वाले इस गांव ने साबित किया कि सौर ऊर्जा बड़े पैमाने पर लागू हो सकती है।
    • 2026 तक यह मॉडल अन्य क्षेत्रों में फैल चुका है, लेकिन मोढेरा पहला और प्रेरणादायक बना हुआ है।

35. 28 जुलाई, 2022 को भारतीय नौसेना को कौन-सा स्वदेशी विमानवाहक पोत सौंपा गया था? [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) आईएनएस विक्रांत
Solution:
  • 28 जुलाई, 2022 को भारतीय नौसेना को आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant), भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier), सौंपा गया था।
  • इसे आधिकारिक तौर पर 2 सितंबर, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नौसेना में शामिल किया गया था।
  • इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited) ने किया है।
  • जहाज की मुख्य विशेषताएँ
    • आईएनएस विक्रांत की लंबाई 262 मीटर, चौड़ाई 62 मीटर और विस्थापन 45,000 टन है
    • जो इसे भारत का सबसे बड़ा स्वदेशी युद्धपोत बनाता है। इसमें 2,300 कम्पार्टमेंट हैं
    • यह लगभग 1,600 क्रू सदस्यों (महिलाओं सहित) को समायोजित कर सकता है।
    • जहाज 88 मेगावाट बिजली उत्पन्न करता है, जो एक छोटे शहर जितनी हो सकती है, और चार गैस टर्बाइन्स से संचालित होता है।
  • निर्माण और इतिहास
    • निर्माण 2009 में शुरू हुआ, जिसमें 76% सामग्री स्वदेशी थी और 18 राज्यों से पार्ट्स आए।
    • लागत लगभग 20,000 करोड़ रुपये आई। पहले विक्रांत पोत ने 1971 युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी
    • इसलिए नाम रखा गया। ट्रायल के बाद 28 जुलाई 2022 को नौसेना को सौंपा गया, और 2 सितंबर 2022 को पीएम नरेंद्र मोदी ने कोच्चि में औपचारिक कमीशनिंग की।
  • परिचालन क्षमताएँ
    • यह STOBAR (शॉर्ट टेक-ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी) सिस्टम पर काम करता है, जिसमें स्की-जंप से विमान उड़ान भरते हैं
    • अरेस्टर वायर्स से उतरते हैं। 30 लड़ाकू विमान (मिग-29K) और हेलीकॉप्टर (केए-31, MH-60R) ले जा सकता है।
    • अधिकतम गति 28 नॉटिकल मील है, और इसमें उन्नत रडार, सेंसर, AI-आधारित सिस्टम वर्टिकल लॉन्च मिसाइलें हैं।
  • सामरिक महत्व
    • आईएनएस विक्रांत ने भारत को स्वदेशी विमानवाहक बनाने वाले चुनिंदा देशों (अमेरिका, ब्रिटेन आदि) की सूची में शामिल किया।
    • यह हिंद महासागर में नौसेना की 'दो मोर्चा' क्षमता बढ़ाता है, खासकर चीन के खिलाफ।
    • हाल ही में यह श्रीलंका के इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2025 में शामिल हुआ, जो भारत की रणनीतिक पहुंच दर्शाता है।

36. भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई "कवच" प्रणाली एक ........ है। [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली
Solution:
  • भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई "कवच" प्रणाली एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (Automatic Train Protection System) है।
  • यह प्रणाली ट्रेनों को टकराने से रोकने के लिए विकसित की गई है और यह ट्रेन चालक की गलती की स्थिति में ट्रेन की गति को स्वचालित रूप से नियंत्रित करती है।
  • कवच का परिचय
    • कवच को 2012 से विकास किया गया और इसे ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (TCAS) के रूप में जाना जाता था
    • जिसे बाद में "कवच" नाम दिया गया। यह उच्चतम सुरक्षा स्तर SIL-4 प्रमाणित है
    • जो 10,000 वर्षों में एक बार गलती की संभावना रखता है। इसका उद्देश्य लोको पायलट की गलती होने पर भी ट्रेन को स्वचालित रूप से रोकना है।
  • कार्यप्रणाली
    • कवच रेडियो, जीपीएस, आरएफआईडी टैग और ऑप्टिकल फाइबर जैसी तकनीकों का उपयोग करता है।
    • यदि ट्रेन लाल सिग्नल पार करती है, स्पीड लिमिट लांघती है या आगे ट्रेन से टकराने का खतरा है
    • तो यह ऑटोमैटिक ब्रेक लगा देता है। खराब मौसम में भी यह ट्रेन को सुरक्षित गति पर रखता है।
  • मुख्य विशेषताएं
    • स्वदेशी और दुनिया की सबसे सस्ती ATP प्रणाली (विदेशी सिस्टम से 6 गुना सस्ती)।
    • दो ट्रेनों के बीच टक्कर रोकना, सिग्नल उल्लंघन पर रोक।
    • स्टेशन मास्टर पैनल (SM-OCIP) से नियंत्रण।
  • स्थापना प्रक्रिया
    • प्रत्येक स्टेशन पर कवच यूनिट लगाना।
    • ट्रैक पर RFID टैग बिछाना।
    • टेलीकॉम टावर और ऑप्टिकल फाइबर बिछाना।
    • हर लोकोमोटिव पर लोको कवच इंस्टॉल करना।​
  • वर्तमान स्थिति (फरवरी 2026 तक)
    • कवच 1,400+ किमी रूट और 1,500+ लोकोमोटिव पर तैनात है। कवच 4.0 संस्करण उत्तर भारत के कोहरे वाले इलाकों में सक्रिय है
    • जैसे वडोदरा-अहमदाबाद रूट। 654 किमी पर 155 स्टेशन और 2,892 इंजन कवर। पूरे नेटवर्क (34,000 किमी) को कवर करने की योजना।
  • परीक्षण और इतिहास
    • पहला परीक्षण 2016 में, टक्कर रोधी टेस्ट 2022 में सिकंदराबाद में सफल। 2025 तक कवच 4.0 का विस्तार। यह रेलवे को शून्य दुर्घटना लक्ष्य की ओर ले जा रहा है।
    • कवच न केवल सुरक्षा बढ़ाता है, बल्कि भारतीय रेल को वैश्विक स्तर पर निर्यात योग्य तकनीक प्रदान करता है।

37. "डिजिटल इंडिया सप्ताह, 2022" का विषय क्या है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) नव भारत प्रौद्योगिकी प्रेरणा
Solution:
  • डिजिटल इंडिया सप्ताह, 2022" का विषय नव भारत प्रौद्योगिकी प्रेरणा था।
  • इसका उद्देश्य डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचारों को प्रदर्शित करना और नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं तक पहुँच को बढ़ावा देना था।
  • डिजिटल इंडिया सप्ताह 2022 का मुख्य विषय 'डिजिटल इंडिया: कैटालाइजिंग न्यू इंडियाज टेकेड' था, जिसे हिंदी में 'नव भारत प्रौद्योगिकी प्रेरणा' के रूप में भी जाना जाता है।
  • आयोजन विवरण
    • यह सप्ताह 4 से 10 जुलाई 2022 तक गुजरात के गांधीनगर में आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया
    • जो भारत के डिजिटल परिवर्तन का जश्न मनाने और वैश्विक स्तर पर तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का मंच था।
    • कार्यक्रम में 200 से अधिक स्टालों वाला डिजिटल मेला लगा, जहां आधार, UPI, कोविन, डिजिलॉकर जैसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स और भारतीय स्टार्टअप्स के समाधानों को दिखाया गया।
  • उद्देश्य
    • इसका मुख्य लक्ष्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाना था।
    • IT (भारतीय प्रतिभा) + IT (सूचना प्रौद्योगिकी) = IT (इंडिया टुमॉरो) के फॉर्मूले पर जोर दिया गया
    • प्रौद्योगिकी जीवन को सरल बनाए और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिले।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में ई-कॉमर्स, कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) और संपत्ति दस्तावेजों को डिजिटल化 करने पर फोकस रहा
    • जिससे 1.25 लाख से अधिक CSC ग्रामीण भारत को जोड़ रहे थे।
  • प्रमुख पहलें
    • कार्यक्रम में कई नई डिजिटल पहलें लॉन्च की गईं:
    • डिजिटल इंडिया भाषिणी: भारतीय भाषाओं में AI-आधारित इंटरनेट पहुंच सुनिश्चित करने वाला प्लेटफॉर्म, जो गैर-अंग्रेजी बोलने वालों के लिए डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराता है।
    • इसमें वॉयस-बेस्ड एक्सेस और सामग्री निर्माण पर जोर।
    • प्रौद्योगिकी पहुंच बढ़ाने, सेवा वितरण सुव्यवस्थित करने और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने वाली अन्य पहलें।​
    • 4-6 जुलाई तक गांधीनगर में भौतिक कार्यक्रम हुए, जबकि 7-9 जुलाई तक वर्चुअल 'इंडिया स्टैक नॉलेज एक्सचेंज' चला।​
  • विजन और प्रभाव
    • डिजिटल इंडिया का व्यापक विजन तीन क्षेत्रों पर आधारित है: हर नागरिक के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मांग-आधारित शासन, और नागरिक सशक्तिकरण।
    • इस सप्ताह ने सरकार, उद्योग, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत को एक मंच पर लाकर वैश्विक सहयोग के अवसर खोले।
    • यह भारत के तकनीकी दशक (टेकेड) को गति देने वाला कदम था, जो आज भी डिजिटल समावेशन को मजबूत कर रहा है।

38. मार्च, 2023 में, पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने लोकपाल के लिए आयु सीमा 65 से बढ़ाकर ....... वर्ष करने के लिए 2015 पीएफआरडीए (PFRDA) विनियमन में संशोधन किया। [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) 70
Solution:
  • मार्च, 2023 में, पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने लोकपाल के लिए आयु सीमा 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने के लिए 2015 पीएफआरडीए विनियमन में संशोधन किया।
  • यह संशोधन सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों की विशेषज्ञता का लाभ उठाने और लोकपाल के पद पर नियुक्तियों के लिए व्यापक विकल्प सुनिश्चित करने के लिए किया गया।
  • संशोधन का विवरण
    • यह बदलाव 27 मार्च 2023 को जारी राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से किया गया
    • जिसमें PFRDA (अभिदाता शिकायत निवारण) विनियम, 2015 में संशोधन शामिल था।
    • पहले विनियमन के तहत लोकपाल की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष निर्धारित थी
    • लेकिन अनुभवी व्यक्तियों को आकर्षित करने और शिकायत निपटान प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए इसे 70 वर्ष तक बढ़ाया गया।
  • पृष्ठभूमि और महत्व
    • PFRDA लोकपाल राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से जुड़ी शिकायतों का निपटारा करता है
    • जैसे कि नेशनल पेंशन सिस्टम ट्रस्ट (NPS Trust) द्वारा 30 दिनों में अनसुलझी शिकायतें।
    • यह संशोधन शिकायतकर्ताओं को बेहतर न्याय सुनिश्चित करने के लिए अधिक योग्य उम्मीदवारों को लोकपाल पद के लिए उपलब्ध कराता है।
    • अपील लिखित रूप में दायर की जाती है, जिसमें आवश्यक दस्तावेज संलग्न होते हैं, लेकिन लोकपाल तुच्छ मामलों को खारिज कर सकता है।​
  • प्रभाव और संदर्भ
    • इस कदम से PFRDA की शासन व्यवस्था मजबूत हुई, क्योंकि वरिष्ठ विशेषज्ञ अब लंबे समय तक सेवा दे सकेंगे।
    • इसी अवधि में अन्य नियामक बदलाव भी हुए, जैसे NPS में शामिल होने की आयु सीमा में वृद्धि (60 से 65 वर्ष), लेकिन लोकपाल संशोधन विशेष रूप से शिकायत निवारण पर केंद्रित था।
    • यह बदलाव NPS के 5 करोड़ से अधिक ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।

39. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 24 जनवरी, 2021 को राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत शुरू किए गए अभियान का नाम बताइए। [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (VI-पाली)]

Correct Answer: (b) पंख अभियान (PANKH Abhiyan)
Solution:
  • मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 24 जनवरी, 2021 को राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत शुरू किए गए अभियान का नाम पंख अभियान (PANKH Abhiyan) है।
  • अभियान का परिचय
    • यह अभियान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लॉन्च किया गया था
    • जो बालिकाओं के संरक्षण, अधिकारों, पोषण, ज्ञान और स्वास्थ्य पर केंद्रित है। PANKH इसी का संक्षिप्त रूप है
    • अभियान का मुख्य लक्ष्य बालिकाओं का समग्र विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें जागरूकता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना शामिल है।​
  • उद्देश्य और विशेषताएं
    • संरक्षण: कन्या भ्रूण हत्या और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता।
    • अधिकार जागरूकता: बालिकाओं को उनके कानूनी और सामाजिक अधिकारों के प्रति सजग करना।
    • पोषण: कुपोषण दूर करने के लिए विशेष कार्यक्रम।
    • ज्ञान: शिक्षा को प्रोत्साहन, जैसे स्कूल नामांकन और उच्च शिक्षा।
    • स्वास्थ्य: टीकाकरण, स्वच्छता और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर फोकस।​
    • यह 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का हिस्सा होने से राज्य स्तर पर लिंगानुपात सुधारने में सहायक रहा।​
  • पृष्ठभूमि और संदर्भ
    • राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है, जो बालिकाओं के सशक्तिकरण पर जोर देता है।
    • मध्य प्रदेश में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' 2015 से सक्रिय है, जिसमें सुभाष योजना, लक्ष्मी योजना जैसी उप-योजनाएं शामिल हैं।
    • पंख अभियान ने इन्हें मजबूत किया, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता रैलियों और कार्यशालाओं के माध्यम से।
  • प्रभाव और उपलब्धियां
    • लॉन्च के बाद राज्य में बालिका शिक्षा दर और लिंगानुपात में सुधार देखा गया।​
    • यह अभियान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित होता है, जो स्कूलों, आंगनवाड़ियों और समुदायों में कार्यक्रम आयोजित करता है।​
    • 2026 तक भी इसके तहत वार्षिक कार्यक्रम जारी हैं, जैसे कन्या पूजन और जागरूकता सभाएं।

40. भारतीय अंटार्कटिक अधिनियम, 2022 किस मंत्रालय के तहत आत्मनिर्भर और संबंधित पारिस्थितिक तंत्र के साथ-साथ अंटार्कटिक पर्यावरण की रक्षा के लिए भारत के अपने राष्ट्रीय उपाय करने का लक्ष्य रखता है और भारतीय अंटार्कटिक प्राधिकरण (IAA) स्थापित करने का प्रस्ताव करता है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
Solution:
  • भारतीय अंटार्कटिक अधिनियम, 2022 पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आत्मनिर्भर और संबंधित पारिस्थितिक तंत्र के साथ-साथ अंटार्कटिक पर्यावरण की रक्षा के लिए भारत के अपने राष्ट्रीय उपाय करने का लक्ष्य रखता है और भारतीय अंटार्कटिक प्राधिकरण (IAA) स्थापित करने का प्रस्ताव करता है।
  • भारतीय अंटार्कटिक अधिनियम, 2022 पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आता है।
  • यह अधिनियम अंटार्कटिक पर्यावरण, इसके आश्रित और संबद्ध पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए भारत के स्वदेशी राष्ट्रीय उपायों को लागू करने का लक्ष्य रखता है
  • भारतीय अंटार्कटिक प्राधिकरण (IAA) की स्थापना का प्रस्ताव करता है।
  • अधिनियम का उद्देश्य
    • यह अधिनियम भारत की अंटार्कटिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करता है
    • जो अंतरराष्ट्रीय अंटार्कटिक संधि प्रणाली (Antarctic Treaty System) के अनुरूप है।
    • मुख्य लक्ष्य अंटार्कटिक क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना, पर्यटन का प्रबंधन और अवैध गतिविधियों जैसे खनन या सैन्यीकरण को रोकना है।
    • अधिनियम के तहत कोई भी भारतीय नागरिक या संगठन अंटार्कटिका में गतिविधियां (जैसे अनुसंधान अभियान, पर्यटन या मत्स्य पालन) केवल परमिट प्राप्त करने के बाद ही कर सकता है।
  • भारतीय अंटार्कटिक प्राधिकरण (IAA)
    • IAA अधिनियम के तहत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन स्थापित सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।
    • इसका अध्यक्ष पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का सचिव होगा, और सदस्यों में संबंधित मंत्रालयों (जैसे पर्यावरण, विदेश मंत्रालय आदि) के अधिकारी शामिल होंगे। IAA के प्रमुख कार्य हैं:
    • अंटार्कटिक कार्यक्रमों और अभियानों का प्रायोजन, पर्यवेक्षण और अनुमति प्रदान करना।
    • पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन कराना।
    • पारदर्शी और जवाबदेह प्रक्रिया के माध्यम से गतिविधियों का नियमन।
  • पृष्ठभूमि और संसदीय प्रक्रिया
    • विधेयक को अप्रैल 2022 में लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे जुलाई 2022 में लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने पारित कर दिया।
    • पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे पेश किया था। भारत 1983 से अंटार्कटिक संधि का पक्षकार है
    • दक्षिण ध्रुव अभियान (1981 से) चला रहा है, लेकिन पहले कोई घरेलू कानून नहीं था। यह अधिनियम भारत को वैश्विक ध्रुवीय शासन में मजबूत स्थिति प्रदान करता है।
  • प्रमुख प्रावधान
    • परमिट प्रणाली: अंटार्कटिका जाने वाले सभी भारतीयों (नागरिक, जहाज, विमान आदि) के लिए अनिवार्य परमिट, जिसे IAA या समिति जारी करेगी।
    • पर्यावरण संरक्षण: प्रदूषण रोकथाम, वन्यजीव संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन के सख्त नियम।
    • दंड प्रावधान: उल्लंघन पर जुर्माना (50 लाख तक) या कारावास (5 वर्ष तक)।
    • अंतरराष्ट्रीय अनुपालन: संधि के प्रोटोकॉल (जैसे मैड्रिड प्रोटोकॉल 1991) का पालन।
  • महत्व और प्रभाव
    • यह अधिनियम भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करता है
    • वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाता है तथा जलवायु परिवर्तन, समुद्री संसाधनों पर अनुसंधान को बढ़ावा देता है।
    • IAA के गठन से अंटार्कटिक पर्यटन (जो तेजी से बढ़ रहा है) का नियमन आसान होगा।
    • इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता बढ़ेगी और भविष्य के बहु-पक्षीय मंचों में मजबूत भूमिका निभा सकेगा। अधिनियम 1 जून 2023 से प्रभावी हो गया।