राष्ट्रीय (अद्यतन सामान्य ज्ञान) भाग-IV

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11. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सितंबर, 2022 में किस वर्ष तक भारत से टीबी को खत्म करने के लिए 'प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान' का शुभारंभ किया? [Phase-XI 27 जून, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) 2025 तक
Solution:
  • राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सितंबर, 2022 में 2025 तक भारत से टीबी (तपेदिक) को खत्म करने के लिए 'प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान' का शुभारंभ किया।
  • यह अभियान देश को टीबी मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामुदायिक समर्थन जुटाने पर केंद्रित है, जो वैश्विक लक्ष्य (2030) से पाँच साल पहले का है।
  • अभियान का शुभारंभ
    • यह अभियान 9 सितंबर 2022 को नई दिल्ली में शुरू हुआ, जब राष्ट्रपति मुर्मू ने 'नि-क्षय 2.0' पोर्टल लॉन्च किया।
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया था
    • जो संयुक्त राष्ट्र के 2030 एसडीजी लक्ष्य से 5 वर्ष पहले है।
    • राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में जोर दिया कि टीबी भारत में संक्रामक रोगों से होने वाली सबसे अधिक मौतों का कारण है
    • जहां विश्व के 25% से अधिक टीबी रोगी मौजूद हैं।
  • मुख्य उद्देश्य
    • अभियान का लक्ष्य टीबी के खिलाफ जन-आंदोलन बनाना है
    • जिसमें सामुदायिक भागीदारी, 'नि-क्षय मित्र' (टीबी रोगियों के लिए सहायक) और पोषण सहायता शामिल है।
    • राष्ट्रपति ने राज्यपालों, एनजीओ, स्थानीय प्रशासन और सभी हितधारकों से अपील की कि इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाएं।
    • गरीब और कमजोर वर्गों पर टीबी का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है,
    • इसलिए व्यक्तिगत गोद लेने (adoption) की योजना शुरू की गई, जिसमें रोगियों को भोजन, दवा और निगरानी प्रदान की जाती है।
  • प्रगति और उपलब्धियां
    • शुरुआती चरण में राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वयं 9.5 लाख से अधिक टीबी रोगियों को गोद लिया।
    • 2024-25 तक 1.5 लाख नि-क्षय मित्र सक्रिय हो चुके हैं, और 100 दिवसीय अभियान जैसे कदम उठाए गए।
    • गुजरात जैसे राज्य 95% लक्ष्य हासिल कर चुके हैं, जबकि बिहार-उत्तर प्रदेश में हजारों मरीजों को सहायता मिली।
    • हालांकि, चुनौतियां बनी हुई हैं, जैसे जागरूकता की कमी और ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी।
  • राष्ट्रपति का योगदान
    • राष्ट्रपति मुर्मू ने अभियान को जन-आंदोलन बनाने पर बल दिया, विश्व टीबी दिवस पर लगातार अपील की।
    • 2025 तक लक्ष्य को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि 'न्यू इंडिया' की भावना से यह संभव है।
    • अभियान ने राजनीतिक नेताओं से लेकर आम नागरिकों तक भागीदारी बढ़ाई
    • जिससे टीबी रोगियों की पहचान, उपचार और रोकथाम में तेजी आई।

12. कुटुम्ब न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2022 के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं? [Phase-XI 27 जून, 2023 (IV-पाली)]

1. कुटुम्ब न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 18 जुलाई, 2022 को लोक सभा में पेश किया गया था।
2. यह विधेयक, कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम, 1984 में संशोधन करता है।
3. यह अधिनियम राज्य सरकारों को कुटुम्ब न्यायालय स्थापित करने की अनुमति देता है।
4. यह अधिनियम पंजाब और तमिलनाडु में लागू नहीं है।

Correct Answer: (c) 1, 2 और 3
Solution:
  • कुटुम्ब न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2022 के संबंध में कथन 1, 2 और 3 सत्य हैं।
  • कथन 1: कुटुम्ब न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 18 जुलाई, 2022 को लोक सभा में पेश किया गया था। (सत्य)
  • कथन 2: यह विधेयक, कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम, 1984 में संशोधन करता है। (सत्य)
  • कथन 3: यह अधिनियम राज्य सरकारों को कुटुम्ब न्यायालय स्थापित करने की अनुमति देता है। (सत्य)
  • कथन 4: यह अधिनियम शुरू में पंजाब और तमिलनाडु में लागू नहीं हुआ था
  • लेकिन इस संशोधन का उद्देश्य तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश में स्थापित न्यायालयों को पूर्वव्यापी रूप से कानूनी दर्जा देना था
  • उनके कामकाज को कानूनी रूप से मान्य किया जा सके। इसलिए, यह कहना कि अधिनियम इन राज्यों में लागू नहीं है, संदर्भ के अनुसार असत्य है।
  • विधेयक का उद्देश्य
    • यह विधेयक मूल अधिनियम 1984 के प्रावधानों को अपडेट करने के लिए लाया गया
    • पारिवारिक विवादों (जैसे विवाह विघटन, भरण-पोषण, संरक्षकता आदि) का शीघ्र और प्रभावी निपटारा हो सके।
    • विशेष रूप से, हिमाचल प्रदेश (15 फरवरी 2019 से) और नागालैंड (12 सितंबर 2008 से) में राज्य सरकारों द्वारा स्थापित कुटुंब न्यायालयों को अधिनियम के तहत वैधता मिली।
    • इसके अलावा, केंद्र सरकार को न्यायाधीशों की अतिरिक्त योग्यताएं निर्धारित करने की शक्ति दी गई।
  • प्रमुख संशोधन
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति और योग्यता
    • केंद्र सरकार को कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए अतिरिक्त योग्यताएं निर्धारित करने के नियम बनाने का अधिकार मिला।​
    • महिलाओं को न्यायाधीश पदों पर प्राथमिकता दी जाएगी, जो विवाह संस्था की रक्षा, सुलह और परामर्श को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जुड़ा है।​
    • राज्य सरकारों को न्यायाधीशों के वेतन, परामर्शदाताओं की सेवा शर्तें और अन्य प्रक्रियात्मक नियम बनाने का अधिकार प्रदान किया गया।
  • सहायक संस्थाओं का विस्तार
    • राज्य सरकारें कुटुंब न्यायालयों के लिए निम्नलिखित व्यवस्था कर सकती हैं:
    • समाज कल्याण संस्थान या संगठन।
    • परिवार कल्याण को बढ़ावा देने वाले पेशेवर।
    • समाज कल्याण क्षेत्र के विशेषज्ञ।
    • अन्य व्यक्ति जो न्यायालय के उद्देश्यों को प्रभावी बनाने में सहायक हों।​
    • यह प्रावधान विवादों के त्वरित समाधान के लिए विशेषज्ञों की सहायता पर जोर देता है
    • जहां सुलह संभव न हो तो सरलीकृत साक्ष्य और प्रक्रिया नियम अपनाए जाते हैं।​
  • मूल अधिनियम 1984 का संदर्भ
    • कुटुंब न्यायालय अधिनियम, 1984 का मुख्य लक्ष्य पारिवारिक विवादों को समझौते से निपटाना था
    • पक्षकारों को लंबे मुकदमों से राहत मिले। इसका अधिकार क्षेत्र (धारा 7(1)) निम्नलिखित मामलों को कवर करता है:​
    • एक बार स्थापित होने पर, इन मामलों में कुटुंब न्यायालय का क्षेत्राधिकार अनन्य होता है—जिला न्यायालय या अन्य सिविल कोर्ट का अधिकार समाप्त हो जाता है।​
  • विधेयक का महत्व
    • यह संशोधन महिलाओं की गरिमा सुनिश्चित करने, समाज कल्याण को बढ़ावा देने और दीवानी-फौजदारी क्षेत्राधिकार को एक छत के नीचे लाने के उद्देश्य को मजबूत करता है।
    • इससे पारिवारिक विवादों में तेज न्याय मिलने की उम्मीद है
    • खासकर जहां सुलह संभव न हो तो विशेषज्ञों की मदद से त्वरित निर्णय लिया जा सके।
    • कुल मिलाकर, विधेयक ने अधिनियम को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाया।

13. कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021, ....... के आयकर अधिनियम में संशोधन करता है। [Phase-XI 27 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 1961
Solution:
  • कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021, आयकर अधिनियम, 1961 में संशोधन करता है।
  • यह संशोधन पूर्वव्यापी कराधान (retrospective taxation) को समाप्त करने के लिए किया गया था
  • जिसका उद्देश्य विवादास्पद पिछले कर मांगों को समाप्त कर निवेशकों के बीच विश्वास बहाल करना था।
  • अधिनियम का परिचय
    • यह अधिनियम 13 अगस्त 2021 को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त होने के बाद लागू हुआ।
    • इसका मुख्य उद्देश्य पूर्वव्यापी कराधान (retrospective taxation) को समाप्त करना है
    • जो 2012 के वित्त अधिनियम द्वारा शुरू किया गया था।
    • विशेष रूप से, यह विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय संपत्तियों के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर लगाए गए कर विवादों को सुलझाने के लिए लाया गया।
  • पृष्ठभूमि
    • 2012 में वित्त अधिनियम के माध्यम से आयकर अधिनियम में संशोधन किया गया था
    • जिसने 28 मई 2012 से पहले के लेनदेन पर भी पूर्वव्यापी रूप से कर लगाने का प्रावधान जोड़ा।
    • इससे वोडाफोन और केयर्न एनर्जी जैसी कंपनियों पर भारी कर मांग उठी, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में जीत हासिल की।
    • सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने वाले इस प्रावधान ने निवेशकों में अनिश्चितता पैदा की थी।
  • प्रमुख संशोधन
    • आयकर अधिनियम, 1961 में बदलाव: 28 मई 2012 से पहले भारतीय संपत्तियों के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर भविष्य में कोई कर मांग नहीं उठाई जाएगी।
    • वित्त अधिनियम, 2012 में संशोधन: पूर्व मांगों (जैसे निष्कर्ष निर्धारण या सुधार आदेशों में उठाई गई) को निर्दिष्ट शर्तों पर रद्द करने का प्रावधान।
    • कर मांग रद्दीकरण: लंबित कार्यवाहियां वापस ली जाएंगी, एकत्रित राशि बिना ब्याज के वापस होगी।
    • शर्तें: करदाता को कुछ प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी
    • जैसे मसौदा नियमों के तहत आवेदन। आयकर नियम, 1962 में संशोधन द्वारा इन्हें स्पष्ट किया गया।​
  • प्रभाव और लाभ
    • यह अधिनियम कर संबंधी निश्चितता प्रदान करता है, जिससे विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
    • वोडाफोन (लगभग 14,000 करोड़ रुपये) और केयर्न (लगभग 10,000 करोड़ रुपये) जैसी कंपनियों को सीधा लाभ मिला।
    • कुल मिलाकर, 17 मामलों में लगभग 50,000 करोड़ रुपये के विवाद सुलझे।
  • कार्यान्वयन प्रक्रिया
    • मसौदा नियम जारी कर शर्तें और प्रक्रियाएं निर्धारित की गईं।
    • करदाता को निर्दिष्ट समय में आवेदन करना होता है।
    • अनुपालन पर मांग रद्द और रिफंड सुनिश्चित।

14. इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन की रिपोर्ट (2020-21) के अनुसार, भारत के राज्यों का कौन-सा समूह सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कर्नाटक और केरल
Solution:
  • इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन की रिपोर्ट (2020-21) के अनुसार
  • भारत के राज्यों का जो समूह सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक है
  • वह है कर्नाटक और केरल।
  • कर्नाटक भारत में कॉफी का सबसे बड़ा उत्पादक है
  • इसके बाद केरल और फिर तमिलनाडु का स्थान आता है।
  • ये तीनों राज्य मिलकर भारत के कॉफी उत्पादन का प्रमुख हिस्सा हैं।
  • पूरा विवरण:
    • संदर्भ: IBEF 2020-21 रिपोर्ट के अनुसार भारत में कॉफी उत्पादन का प्रमुख केंद्र पश्चिमी और पूर्वी घाट क्षेत्र हैं
    • जहां सालाना उच्च मात्रा में कॉफी उगाई जाती है। इस समूह के भीतर कर्नाटक सबसे बड़ी भूमिका निभाता है
    • जबकि केरल और तमिलनाडु भी लगातार उच्च उत्पादन में रहते हैं।​
    • राज्य-समूह का चयन: “राज्यों का समूह” बताने का मतलब है
    • ऐसे राज्यों को मिलाकर देखा जाए जिनका कॉफी उत्पादन संयुक्त रूप से भारत के कुल उत्पादन में प्रमुख हिस्सा बनता है
    • IBEF के अनुसार इस समूह में कर्नाटक, केरल, और तमिलनाडु प्रमुख हैं
    • जिनके योगदान मिलकर लगभग देश के अधिकांश कॉफी उत्पादन को बनाते हैं।​
    • अन्य विवरण: कॉफी उत्पादन मुख्यतः पश्चिमी और पूर्वी घाटों में होता है
    • जिनमें कर्नाटक सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, केरल और तमिलनाडु क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहते हैं।
    • इससे संकेत मिलता है कि इन तीनों राज्यों का संयुक्त समूह भारत के शीर्ष कॉफी उत्पादक क्षेत्रों के रूप में जाना जाता है।
    • वैश्विक संदर्भ: भारत विश्व के प्रमुख कॉफी उत्पादकों में से एक है
    • देश का कॉफी उत्पादन विशेषकर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में केंद्रित है
    • ये क्षेत्र वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

15. भारत के प्रधानमंत्री ने दिसंबर, 2022 में ....... मेट्रो चरण-1 को राष्ट्र को समर्पित किया। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) नागपुर
Solution:
  • भारत के प्रधानमंत्री ने दिसंबर, 2022 में नागपुर मेट्रो चरण-1 को राष्ट्र को समर्पित किया।
  • उन्होंने नागपुर में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया था।
  • उद्घाटन का विवरण
    •  जहाँ प्रधानमंत्री ने नागपुर मेट्रो के चरण-1 को औपचारिक रूप से शुरू किया।
    • उन्होंने ऑरेंज लाइन (खापरी से ऑटोमोटिव स्क्वायर) और एक्वा लाइन (प्रजापति नगर से लोकमान्य नगर) पर पहली दो मेट्रो ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई।
    • प्रधानमंत्री ने खुद मेट्रो में यात्रा भी की और छात्रों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों से बातचीत की।​
  • परियोजना की विशेषताएँ
    • नागपुर मेट्रो चरण-1 की कुल लागत 8650 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें दो गलियारों की कुल लंबाई 38 किलोमीटर है।
    • यह परियोजना शहर के प्रमुख स्थानों जैसे एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और व्यावसायिक क्षेत्रों को जोड़ती है
    • जिससे यातायात भीड़भाड़ और प्रदूषण में कमी आएगी।
    • नागपुर मेट्रो महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त उद्यम Maha-Metro द्वारा विकसित की गई है
    • जो नागरिकों को तेज़, सुरक्षित और विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
  • चरण-2 का शिलान्यास
    • उसी अवसर पर प्रधानमंत्री ने नागपुर मेट्रो के चरण-2 का भी शिलान्यास किया
    • जिसकी अनुमानित लागत 6700 करोड़ रुपये से अधिक है।
    • यह चरण शहर के अन्य हिस्सों को कवर करेगा और कुल मेट्रो नेटवर्क को विस्तार देगा।​
  • महत्व और लाभ
    • नागपुर मेट्रो भारत के तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण का प्रतीक है, जो सड़क यातायात पर निर्भरता कम कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देती है।
    • यह ऊर्जा-कुशल ट्रेनें, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, स्मार्ट टिकटिंग और अन्य सार्वजनिक परिवहन से एकीकरण जैसी सुविधाएँ प्रदान करती है।
    • उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर नागपुरवासियों को बधाई दी और मेट्रो को आरामदायक बताया।
    • यह परियोजना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी बल्कि भारत में मेट्रो नेटवर्क विस्तार का हिस्सा है, जिसमें दिल्ली, मुंबई जैसे शहर पहले से शामिल हैं।

16. 2020 में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का पहला संस्करण किस राज्य में आयोजित किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) ओडिशा
Solution:
  • 2020 में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का पहला संस्करण ओडिशा राज्य के भुवनेश्वर में आयोजित किया गया था।
  • इस गेम का उद्देश्य विश्वविद्यालय स्तर पर युवा खेल प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें बढ़ावा देना है।
  • आयोजन स्थल और आयोजक
    • यह प्रतियोगिता मुख्य रूप से कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर में हुई
    • साथ ही कटक के जेएनएल इंडोर स्टेडियम, SAI-ओडिशा बैडमिंटन अकादमी और SAI इंटरनेशनल रेसिडेंशियल स्कूल में भी赛事 आयोजित किए गए।
    • खेलो इंडिया योजना के तहत युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय द्वारा इसे प्रायोजित किया गया
    • जबकि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI), एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन और राष्ट्रीय खेल महासंघों ने संयुक्त रूप से आयोजन किया।
  • प्रतिभागी और खेल
    • लगभग 4,000 से अधिक एथलीट्स 100 से ज्यादा विश्वविद्यालयों से शामिल हुए, जो 17 खेल अनुशासनों में प्रतिस्पर्धा करते थे
    • जैसे तीरंदाजी, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, तलवारबाजी, जूडो, तैराकी, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, फुटबॉल, हॉकी, टेबल टेनिस, टेनिस, वॉलीबॉल, रग्बी और कबड्डी।
    • कुल 211 इवेंट्स हुए, जो भारत में विश्वविद्यालय स्तर की अब तक की सबसे बड़ी प्रतियोगिता थी। प्रधानमंत्री ने इसका उद्घाटन किया।
  • पदक तालिका
    • पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ ने कुल 46 पदक (17 स्वर्ण, 19 रजत, 10 कांस्य) के साथ पहला स्थान हासिल किया।
    • इसके बाद सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (37 पदक) और पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला (32 पदक) रही।
    • यह आयोजन खेलो इंडिया स्कूल गेम्स (2018 से) और यूथ गेम्स की सफलता पर आधारित था
    • जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालय छात्रों में खेल भावना को बढ़ावा देना था।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • ओडिशा सरकार ने स्थानीय समर्थन प्रदान किया, जो राज्य के खेल बुनियादी ढांचे को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करता है।
    • प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खेलो इंडिया योजना के तहत 5 लाख रुपये सालाना की सहायता मिलती है।
    • बाद के संस्करण अन्य राज्यों में हुए, लेकिन 2020 का पहला संस्करण ओडिशा के लिए ऐतिहासिक रहा।

17. 15 अगस्त, 2023 के उत्सव से कितने सप्ताह पहले 'आजादी का अमृत महोत्सव' शुरू हुआ था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 75 सप्ताह
Solution:
  • 15 अगस्त, 2023 के उत्सव से 75 सप्ताह पहले 'आजादी का अमृत महोत्सव' शुरू हुआ था।
    • यह पहल 12 मार्च, 2021 को शुरू की गई थी
    • जो भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ (15 अगस्त, 2022) से 75 सप्ताह पहले थी। यह उत्सव 15 अगस्त, 2023 तक जारी रहा।
  • शुरूआत की तारीख
    • यह महोत्सव आधिकारिक रूप से 12 मार्च 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साबरमती आश्रम, अहमदाबाद से उद्घाटित किया गया।
    • यह तारीख महात्मा गांधी के 1930 के दांडी मार्च की शुरुआत से प्रेरित थी, जो नमक सत्याग्रह का प्रतीक बनी।
    • भारत सरकार ने स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ (15 अगस्त 2022) को ध्यान में रखते हुए
    • इसे 75 सप्ताह पहले शुरू किया, जो कुल 1 वर्ष और 5 माह (लगभग 525 दिन) का सफर था।
  • गणना का विवरण
    • 12 मार्च 2021 से 15 अगस्त 2023 तक की अवधि की गणना सप्ताहों में करने पर सटीक 75 सप्ताह बनते हैं (75 × 7 = 525 दिन)।
    • चक्रवृद्धि गणना: मार्च 2021 से अगस्त 2023 तक 2 साल और 5 माह का अंतर, लेकिन लीप ईयर (2024) को समायोजित कर ठीक 75 सप्ताह।
    • आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट उल्लेख: "75 सप्ताह की उल्टी गिनती हमारी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के लिए।"​
    • यह अवधि 15 अगस्त 2022 (75 वर्ष पूर्ण) से आगे बढ़कर 2023 तक विस्तारित की गई ताकि पूर्ण 'अमृत काल' मनाया जा सके।​
  • महोत्सव का उद्देश्य
    • भारत सरकार का यह सतत कार्यक्रम स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को श्रद्धांजलि देने और आजादी के 75 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए था।
    • इसमें देशभर में पदयात्राएं, प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, तिरंगा अभियान (2-15 अगस्त) और डिजिटल ऐप शामिल थे।
    • राज्य स्तर पर भी 75 सप्ताह के कार्यक्रम आयोजित हुए, जैसे मध्य प्रदेश और तेलंगाना में।

18. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय 2021-22 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा भारत से सबसे अधिक निर्यात किया जाने वाला कृषि उत्पाद है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) चावल
Solution:
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय 2021-22 के अनुसार, भारत से सबसे अधिक निर्यात किया जाने वाला कृषि उत्पाद चावल था।
  • इसमें बासमती और गैर-बासमती दोनों तरह के चावल शामिल हैं। भारत चावल का दुनिया में सबसे बड़ा निर्यातक है।
  • कुल कृषि निर्यात का परिदृश्य
    • 2021-22 में भारत का कुल कृषि एवं संबद्ध उत्पादों का निर्यात 3,74,611 करोड़ रुपये (लगभग 50 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गया
    • जो रिकॉर्ड स्तर था। चावल ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों जैसे इराक, बांग्लादेश, श्रीलंका और यूएई को निर्यात से।
    • बासमती चावल का निर्यात 26,416 करोड़ रुपये रहा।
  • प्रमुख निर्यातक राज्य
    • गुजरात और महाराष्ट्र ने कुल कृषि निर्यात में अग्रणी भूमिका निभाई
    • उसके बाद आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और केरल।
    • चावल निर्यात से पंजाब, हरियाणा जैसे धान उत्पादक राज्यों को विशेष लाभ हुआ।
  • वैश्विक स्थिति और महत्व
    • भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, जो अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण वैश्विक बाजार में लोकप्रिय है।
    • इस निर्यात ने किसानों की आय बढ़ाने में मदद की तथा कृषि निर्यात नीति के लक्ष्यों को गति दी।
    • हालांकि, कुल वैश्विक कृषि निर्यात में भारत की हिस्सेदारी मात्र 2.4% रही।

19. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP), ....... द्वारा प्रशासित एक कल्याणकारी कार्यक्रम है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) ग्रामीण विकास मंत्रालय
Solution:
  • राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP), ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रशासित एक कल्याणकारी कार्यक्रम है।
  • यह कार्यक्रम केंद्र प्रायोजित है जो वृद्धों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों को सामाजिक पेंशन के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • कार्यक्रम का परिचय
    • NSAP को 15 अगस्त 1995 को भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया था
    • जो संविधान के अनुच्छेद 41 के निर्देशक सिद्धांतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
    • यह पूरी तरह से केंद्र प्रायोजित योजना है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में संचालित होती है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों, विधवाओं, विकलांग व्यक्तियों (दिव्यांगजन) और अन्य जरूरतमंदों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।
  • उद्देश्य
    • सबसे कमजोर वर्गों जैसे वृद्ध, विधवा और दिव्यांगजन को मूलभूत सामाजिक सुरक्षा सहायता उपलब्ध कराना।
    • गरीबी रेखा (BPL) से नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए न्यूनतम राष्ट्रीय मानक सुनिश्चित करना।
    • राज्य सरकारों द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य सुविधाओं के अतिरिक्त सामाजिक सहायता का विस्तार।
  • उप-योजनाएँ
    • NSAP के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख उप-योजनाएँ संचालित हैं:
    • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS): 60 वर्ष से अधिक आयु के BPL वृद्धों को मासिक पेंशन।
    • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (IGNWPS): BPL विधवाओं को पेंशन।
    • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना (IGNDPS): 80% या अधिक विकलांगता वाले BPL व्यक्तियों को सहायता।
    • राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना (NFBS): परिवार के मुख्य कमाने वाले की मृत्यु पर एकमुश्त सहायता।
    • अन्नपूर्णा योजना: जिन वृद्धों को अन्य पेंशन नहीं मिलती, उन्हें भोजन के लिए मासिक अनाज।
  • लाभार्थी चयन और वितरण
    • लाभार्थियों का चयन ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं द्वारा किया जाता है।
    • 94% लाभ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से बैंक/डाकघर खातों में हस्तांतरित होते हैं।
    • असाधारण मामलों में डोरस्टेप कैश वितरण की अनुमति है। वर्तमान में लगभग 3.09 करोड़ लाभार्थी इससे जुड़े हैं।
  • महत्वपूर्ण विशेषताएँ
    • यह योजना सामाजिक कल्याण का आधारभूत ढांचा प्रदान करती है
    • जो गरीबों को गरिमापूर्ण जीवन जीने में मदद करती है।
    • यह केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से चलती है, जिसमें केंद्र का वित्त पोषण प्रमुख होता है।

20. राष्ट्रीय जूट बोर्ड, 2022-23 के अनुसार, जूट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) पश्चिम बंगाल
Solution:
  • राष्ट्रीय जूट बोर्ड, 2022-23 के अनुसार, जूट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल है।
  • पश्चिम बंगाल भारत में जूट उत्पादन में अग्रणी है और देश के जूट उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा यहीं से आता है।
  • विस्तार विवरण:
    • संदर्भ: NJB की वार्षिक गणनाओं के अनुसार भारत में जूट उत्पादन का प्रमुख भाग पश्चिम बंगाल में आता है
    • पश्चिम बंगाल अकेले देश के कुल जूट उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा संचयित करता है
    • जिसकी हिस्सेदारी सामान्यतः 50% से अधिक बताई जाती रही है. यह स्थिति 2022-23 के आंकड़ों में भी spearhead बनी रही है.
    • अन्य प्रमुख राज्य: असम, बिहार, मेघालय आदि पड़ोसी राज्यों के भी जूट उत्पादन में योगदान है
    • किन्तु बंगाल की हिस्सेदारी सबसे अधिक है और NJB के अनुसार वही शीर्ष स्थान पर है.
  • महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु:
    • जूट उत्पादन का प्रमुख भू-प्राकृत एक्वस्टरी क्षेत्र गंगा-मैदानी क्षेत्र है जहां जलवायु और मिट्टी जूट के लिए अनुकूल रहती है
    • पश्चिम बंगाल के जिले (उदाहरण: दार्जिलिंग से बाहर के क्षेत्र में) औद्योगिक पूर्वी क्षेत्र में जूट उद्योग के क्लस्टर बनाए हुए हैं।
    • यह भू-आयाम NJB के अनुसार उत्पादन के वितरण में बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार रहता है.