Correct Answer: (b) प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन
Solution:- योजना के तहत 'डोनेट-ए-पेंशन' अभियान:
- 'डोनेट-ए-पेंशन' अभियान प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना के तहत शुरू किया गया था।
- इस पहल के तहत, नागरिक अपने घरेलू कामगारों, ड्राइवरों या किसी अन्य जरूरतमंद व्यक्ति के लिए पेंशन फंड में स्वैच्छिक रूप से प्रीमियम राशि दान कर सकते हैं।
- यह अभियान असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ पहुंचाने के लिए एक सामुदायिक-संचालित प्रयास है।
- अभियान का लॉन्च और पृष्ठभूमि
- यह अभियान श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा शुरू किया गया।
- आइकॉनिक वीक' श्रम मंत्रालय की विभिन्न पहलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया था।
- PM-SYM योजना, जो 2019 में शुरू हुई, असंगठित श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु के बाद 3,000 रुपये मासिक पेंशन प्रदान करती है, और 'डोनेट-ए-पेंशन' इसकी एक अनूठी पहल है।
- मुख्य विशेषताएं
- नागरिक अपने घरेलू कामगारों, ड्राइवरों, हेल्परों, देखभालकर्ताओं या अन्य सहायक कर्मचारियों के लिए न्यूनतम एक वर्ष का प्रीमियम दान कर सकते हैं।
- दानकर्ता ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से आसानी से योगदान कर पाते हैं, जो श्रमिकों को सीधे पेंशन योजना से जोड़ता है।
- यह 50:50 अंशदायी योजना है, जहां श्रमिक और केंद्र सरकार समान योगदान देते हैं।
- उदाहरणस्वरूप, 29 वर्षीय श्रमिक को मासिक 100 रुपये का योगदान देना होता है, जिसके बदले सरकार भी इतना ही जोड़ती है।
- पात्रता मानदंड
- अभियान के लाभार्थी वे असंगठित श्रमिक हैं जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है।
- आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए, और वे ESIC, NPS, EPFO से कवर न हों या आयकर दाता न हों।
- इसमें घरेलू कामगार, स्ट्रीट वेंडर, ईंटभट्ठा मजदूर, रिक्शा चालक, कूड़ा बीनने वाले आदि शामिल हैं।
- प्रक्रिया और लाभ
- दानकर्ता ऑनलाइन पोर्टल पर श्रमिक का चयन कर प्रीमियम (न्यूनतम 660 से 2400 रुपये वार्षिक) दान करते हैं।
- 60 वर्ष पूरे होने पर श्रमिक को 3,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जिसमें पारिवारिक पेंशन का विकल्प भी है।
- ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, जो लाखों असंगठित मजदूरों को जोड़ने में सहायक रहा।
- महत्व और प्रभाव
- यह अभियान सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है, जहां सामान्य नागरिक श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं।
- लॉन्च के समय मंत्री ने खुद अपने माली को दान देकर उदाहरण पेश किया।
- इससे असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को लाभ पहुंचाने की अपेक्षा थी।