राष्ट्रीय आय (अर्थव्यवस्था) (भाग-II)

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11. परिवारों की वैयक्तिक आय की गणना निम्नलिखित में से किस तरीके से की जा सकती है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (II-पाली]

Correct Answer: (c) राष्ट्रीय आय - अवितरित लाभ - परिवारों द्वारा निवल ब्याज का भुगतान - निगम कर + सरकार और फर्मों (firms) से अंतरित भुगतान
Solution:
  • वैयक्तिक आय (Personal Income) = राष्ट्रीय आय - अवितरित लाभ - परिवारों द्वारा की गई निवल ब्याज अदायगी - निगम कर + सरकार और फर्मों से परिवारों को की गई अंतरण अदायगी। अतः विकल्प (a) सही उत्तर है।
  • गणना का सूत्र
    • राष्ट्रीय आय (National Income) - अवितरित लाभ निवल ब्याज भुगतान कॉर्पोरेट कर सरकार और फर्मों से अंतरण भुगतान
    • यह सूत्र परिवारों को वास्तव में प्राप्त होने वाली आय को मापता है
    • जिसमें मजदूरी, वेतन, लाभांश, ब्याज और हस्तांतरण शामिल होते हैं।​
  • घटित होने वाले घटक
    • राष्ट्रीय आय से निम्नलिखित को घटाया जाता है क्योंकि ये परिवारों तक सीधे नहीं पहुंचते:
    • अवितरित लाभ: कंपनियों का वह लाभ जो शेयरधारकों को वितरित नहीं किया जाता।
    • निवल ब्याज भुगतान: विदेशी ऋणों पर दिए जाने वाले शुद्ध ब्याज।
    • कॉर्पोरेट कर: निगमों द्वारा चुकाए गए कर जो व्यक्तियों को प्रभावित नहीं करते।​
    • ये समायोजन सुनिश्चित करते हैं कि केवल वास्तविक प्राप्त आय ही गिनी जाए।
  • जोड़े जाने वाले घटक
    • सूत्र में अंतरण भुगतान जोड़े जाते हैं, जैसे:
    • सरकार से पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, सब्सिडी।
    • फर्मों से प्राप्त लाभांश या अन्य हस्तांतरण।​
    • ये आय उत्पादन के बदले नहीं बल्कि सामाजिक सहायता के रूप में प्राप्त होती है
    • इसलिए इन्हें शामिल किया जाता है।
  • घटकों का विवरण
    • वैयक्तिक आय में शामिल स्रोत निम्न हैं:
    • मजदूरी और वेतन: नौकरी से प्राप्त आय।
    • संपत्ति से आय: किराया, ब्याज, लाभांश।
    • व्यवसाय लाभ: स्वरोजगार या साझेदारी से।
    • अंतरण: सामाजिक सुरक्षा भुगतान।​
    • प्रयोज्य वैयक्तिक आय (Disposable Personal Income) के लिए व्यक्तिगत कर घटाए जाते हैं
    • जो उपभोग पर खर्च की जाने वाली आय दर्शाती है।​
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • मान लीजिए राष्ट्रीय आय 1000 अरब रुपये है
    • अवितरित लाभ 50, कॉर्पोरेट कर 100, निवल ब्याज 20, और अंतरण 80 अरब।
    • तब वैयक्तिक आय = 1000 - 50 - 20 - 100 + 80 = 910 अरब रुपये होगी।​
    • यह गणना उपभोक्ता खर्च, बचत और आर्थिक नीतियों के विश्लेषण में उपयोगी है।​

12. दी गई डेटा तालिका से बाजार मूल्य पर एनएनपी (₹ करोड़ में) की गणना कीजिए। [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

विवरणमूल्य (रू. करोड़ में)
A. साधन लागत पर एनडीपी1. 1,25,250
B. विदेश से निवल आय2. (-) 581
C. निवल अप्रत्यक्ष कर3. 18,120
Correct Answer: (c) 1,42,789
Solution:
  • बाजार मूल्य पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (एनएनपी) की गणना साधन लागत पर निवल घरेलू उत्पाद (एनडीपी) में निवल अप्रत्यक्ष करों को जोड़कर और विदेश से निवल आय को घटाकर की जाती है। अर्थात
  • बाजार मूल्य पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद
  • = साधन लागत पर एनडीपी निवल अप्रत्यक्ष कर - विदेश से निवल आय
  • = 125250 + 18120 - 581
  • = 142789
  • गणना का सूत्र
    • बाजार मूल्य पर एनएनपी = कारक लागत पर NDP + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर + विदेश से शुद्ध आय।​
    • शुद्ध अप्रत्यक्ष कर में अप्रत्यक्ष कर घटाकर सब्सिडी जोड़ी जाती है
    • जबकि NFIA सकारात्मक या ऋणात्मक हो सकती है।​
    • यह सूत्र भारत में राष्ट्रीय आय लेखांकन के मानक तरीके पर आधारित है।​
    • कारक लागत पर NDP + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = 1,25,250 + 18,120 = 1,43,370।
    • अब NFIA जोड़ें: 1,43,370 + (-581) = 1,42,789 करोड़।​
    • इस प्रकार, बाजार मूल्य पर एनएनपी = ₹1,42,789 करोड़।​
  • अतिरिक्त स्पष्टीकरण
    • यदि आपकी तालिका में भिन्न आंकड़े हैं, तो वही मान सूत्र में डालकर गणना करें।​
    • NNP बाजार मूल्य पर GNP से मूल्यह्रास घटाकर या NDP + NFIA से प्राप्त होता है।
    • यह राष्ट्रीय आय का आधार बनाता है जब कारक लागत पर मापा जाए।​

13. निम्नलिखित में से क्या पूंजीगत प्राप्ति का एक उदाहरण है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का विनिवेश
Solution:
  • अर्थव्यवस्था में धन की प्राप्तियों को मुख्यतः दो भागों में वर्गीकृत किया गया है
  • (1) राजस्व प्राप्ति, (2) पूंजीगत प्राप्ति। पूंजीगत प्राप्ति को गैर-राजस्व प्राप्ति के रूप में जाना जाता है।
  • इसमें सरकार द्वारा बाजार से लिया गया ऋण, भारतीय रिजर्व बैंक से ली गई
  • उधारी, सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का विनिवेश तथा बहुपक्षीय संस्थानों से लिए गए ऋण आदि शामिल हैं।
  • पूंजीगत प्राप्ति की परिभाषा
    • पूंजीगत प्राप्ति वह धन प्रवाह है जो व्यवसाय के दैनिक संचालन से स्वतंत्र होता है।
    • उदाहरणस्वरूप, कंपनी द्वारा कोई स्थायी संपत्ति (जैसे मशीनरी या भूमि) बेचना या पहले दिए गए ऋण की वसूली करना पूंजीगत प्राप्ति कहलाता है।
    • ये प्राप्तियाँ लाभ-हानि खाते में नहीं, बल्कि बैलेंस शीट में दर्ज की जाती हैं
    • क्योंकि इन्हें गैर-आवर्ती माना जाता है। सरकार के संदर्भ में, ये देनदारी बढ़ाती हैं
    • (जैसे ऋण लेना) या संपत्ति घटाती हैं (जैसे विनिवेश)।​
  • सामान्य उदाहरण
    • उधार लेना: कंपनी द्वारा बैंक से लिया गया ऋण पूंजीगत प्राप्ति है
    • क्योंकि यह नियमित बिक्री से नहीं आता और भविष्य में चुकाने की देनदारी बनाता है।​
    • ऋण वसूली: पहले दिए गए ऋणों का मूलधन वापस मिलना, जो संपत्ति को पुनः प्राप्त करने जैसा है।​
    • संपत्ति बिक्री: भूमि या शेयरों की बिक्री से प्राप्त धन, जैसे सरकार द्वारा PSU शेयर बेचना (विनिवेश)।​
    • ये उदाहरण नियमित राजस्व (जैसे माल बिक्री या कमीशन) से भिन्न हैं, जो राजस्व प्राप्ति कहलाते हैं।​
  • सरकारी बजट में उदाहरण
    • भारतीय सरकारी बजट में पूंजीगत प्राप्तियाँ विनिवेश (PSU शेयर बिक्री), उधार (बॉन्ड या ट्रेजरी बिल) या ऋण वसूली शामिल हैं।
    • ये बजट घाटे को प्रभावित करती हैं लेकिन कर राजस्व (जैसे GST) से अलग हैं, जो राजस्व प्राप्ति हैं।​

14. इनमें से कौन-सा सरकारी बजट के कार्यों में से एक है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) आय और संपत्ति का पुनर्वितरण
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार, प्रत्येक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल 31 मार्च तक) के लिए अनुमानित वार्षिक वित्तीय विवरण सरकारी बजट है।
  • सरकारी बजट के प्रमुख कार्यों में से एक कार्य 'आय और संपत्ति का पुनर्वितरण' भी है।
  • बजट के प्रमुख कार्य
    • सरकारी बजट के चार मुख्य कार्य होते हैं: संसाधनों का आवंटन, आय और धन का पुनर्वितरण, आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना
    • आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।
    • इनमें से आय और धन का पुनर्वितरण विशेष रूप से प्रगतिशील कर प्रणाली, सब्सिडी, और कल्याण योजनाओं के माध्यम से समृद्ध और गरीब वर्ग के बीच असमानता कम करने पर केंद्रित होता है।
    • उदाहरणस्वरूप, भारत के केंद्रीय बजट 2025-26 में सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर भारी व्यय इसी उद्देश्य को दर्शाता है।​
  • अन्य विकल्पों का विश्लेषण
    • धन आपूर्ति का प्रबंधन: यह मुख्य रूप से भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) का कार्य है
    • जो मौद्रिक नीति के ज़रिए मुद्रा की मात्रा नियंत्रित करता है, बजट का नहीं।​
    • सख्त बजटीय संतुलन बनाए रखना: बजट राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने का प्रयास करता है
    • लेकिन "सख्त संतुलन" हमेशा अनिवार्य नहीं होता; कई बार घाटे वाले बजट बनाए जाते हैं।​
    • मूल्य निर्धारण: यह बजट का प्रत्यक्ष कार्य नहीं, बल्कि मूल्य नियंत्रण नीतियों या सब्सिडी से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा होता है।​
  • भारत में पुनर्वितरण की प्रक्रिया
    • भारत जैसे विकासशील देशों में बजट के ज़रिए पुनर्वितरण प्रगतिशील प्रत्यक्ष कर (जैसे आयकर), अप्रत्यक्ष करों में छूट
    • योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना या जल जीवन मिशन के माध्यम से होता है।
    • 2025-26 के बजट में कुल व्यय 50.65 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है
    • जिसमें राजस्व व्यय पर 37 लाख करोड़ से अधिक खर्च सामाजिक सेवाओं और पुनर्वितरण पर केंद्रित है।
    • इससे मध्यम वर्ग और गरीबों की आय में वृद्धि होती है।​

15. आर्थिक समीक्षा 2020-21 के अनुसार, भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कितना प्रतिशत है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 1%
Solution:
  • आर्थिक समीक्षा 2020-21 के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के प्रतिशत के रूप में भारत या सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय लगभग 1 प्रतिशत था।
  • आर्थिक समीक्षा, 2022-23 के अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र पर केंद्र
  • राज्य सरकारों का बजटीय व्यय वित्त वर्ष 2022-23 (B.E.) में जीडीपी का 2.1 प्रतिशत
  • वित्त वर्ष 2021-22 (R.E.) में 2.2 प्रतिशत तक पहुंच गया
  • जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में यह 1.6 प्रतिशत था।
  • प्रमुख आंकड़े
    • यह आंकड़ा केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त स्वास्थ्य बजट को प्रतिबिंबित करता है
    • जिसमें अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और महामारी प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
    • समीक्षा में सिफारिश की गई है कि इसे 2.5-3% तक बढ़ाया जाए ताकि आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च घटकर 30% रह जाए ।​
  • तुलनात्मक संदर्भ
    • विकसित देशों जैसे OECD राष्ट्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय GDP का औसतन 6-10% होता है
    • जबकि भारत में यह 1% से भी कम रहने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता प्रभावित होती है
    • कोविड-19 महामारी के संदर्भ में समीक्षा ने स्वास्थ्य बजट बढ़ाने पर जोर दिया
    • क्योंकि 2014-15 से 2020-21 तक इसमें क्रमिक वृद्धि हुई लेकिन अभी भी अपर्याप्त है
    • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का लक्ष्य भी 2.5% था, जो अब तक हासिल नहीं हुआ ।​
  • विस्तृत प्रभाव
    • कम सार्वजनिक व्यय के कारण कुल स्वास्थ्य खर्च (THE) में सरकारी हिस्सा लगभग 40% रहता है
    • बाकी निजी क्षेत्र से आता है, जिससे गरीब वर्ग पर बोझ बढ़ता है।
    • समीक्षा में पीएमजेएवाई योजना का सकारात्मक प्रभाव दर्ज किया गया
    • लेकिन समग्र सुधार के लिए बजट वृद्धि आवश्यक बताई गई ।
    • 2020-21 में कुल THE GDP का 3-4% था, जिसमें GHE का योगदान 1% प्रमुख था ।​
  • सिफारिशें
    • समीक्षा ने स्वास्थ्य व्यय बढ़ाने के साथ-साथ दक्षता सुधार, डिजिटल स्वास्थ्य और निवारक चिकित्सा पर फोकस की सलाह दी।
    • इससे न केवल स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होंगे बल्कि आर्थिक उत्पादकता भी बढ़ेगी।
    • भविष्य में NHA अनुमानों से पुष्टि होती है
    • 2020-21 में GHE GDP का 1.6% तक पहुंचा, लेकिन समीक्षा का आधारभूत आंकड़ा 1% ही है ।​

16. एक वस्तु की सीमांत उपयोगिता के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (II-पाली)]

I. यह कुल उपयोगिता में वह परिवर्तन है, जो वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के उपभोग से होता है।

II. यह वस्तु के उपयोग में वृद्धि के साथ गिर जाती है।

Correct Answer: (c) I और II दोनों
Solution:
  • सीमांत उपयोगिता (MV), कुल उपयोगिता में वह परिवर्तन है, जो वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के उपभोग से प्राप्त होता है।
  • सामान्यतः यह देखा जाता है कि सीमांत उपयोगिता वस्तु के उपयोग में वृद्धि के साथ गिरती जाती है।
  • सीमांत उपयोगिता की परिभाषा
    •  जैसे-जैसे उपभोक्ता किसी वस्तु की अधिक इकाइयाँ ग्रहण करता है
    • घटती सीमांत उपयोगिता का नियम (Law of Diminishing Marginal Utility) लागू होता है
    • जिसके अनुसार प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से मिलने वाली संतुष्टि कम होती जाती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि पहली सेब से 10 इकाई उपयोगिता मिले
    • तो दूसरी से 8, तीसरी से 5, और चौथी से 0, तो चौथी इकाई पर कुल उपयोगिता चरम पर पहुँच जाती है।​
  • कुल उपयोगिता से संबंध
    • कुल उपयोगिता मूल बिंदु से प्रारंभ होकर घटती दर से बढ़ती है
    • अधिकतम बिंदु तक पहुँचती है, और उसके बाद घटने लगती है।​
    • जब MU धनात्मक लेकिन घटती हुई है, तो TU घटती दर से बढ़ती है।​
    • जब MU शून्य हो जाती है, TU अधिकतम होती है।​
    • जब MU ऋणात्मक हो जाती है, TU घटने लगती है।​
    • यह संबंध तालिका से स्पष्ट होता है:
  • सही कथन का चयन
    • प्रश्न में दिए विकल्पों (जैसे कि अन्य स्रोतों में उल्लिखित) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथन सही हैं:
    • जब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है, सीमांत उपयोगिता शून्य होती है—यह मूलभूत सत्य है।​
    • गलत कथन: जब कुल उपयोगिता घटती है तो सीमांत उपयोगिता स्थिर रहती है
    • (वास्तव में ऋणात्मक होती है), या कुल उपयोगिता तथा सीमांत उपयोगिता परस्पर असंबद्ध हैं
    • (वे सीधे जुड़ी हैं)। यह नियम उपभोक्ता संतृप्ति बिंदु को समझाने में सहायक है।​
  • महत्वपूर्ण निहितार्थ
    • यह अवधारणा मांग वक्र को भी प्रभावित करती है, क्योंकि उपभोक्ता अतिरिक्त इकाई तभी खरीदते हैं
    • जब MU उनके द्वारा भुगतान करने को तैयार मूल्य से अधिक हो।
    • वास्तविक जीवन में, पानी की पहली बूंद की तुलना में हीरों की सीमांत उपयोगिता अधिक प्रतीत होती है
    • लेकिन समग्र उपयोगिता उलट होती है। इस प्रकार, सीमांत उपयोगिता उपभोक्ता व्यवहार के निर्णयों का आधार बनाती है।​

17. निम्नलिखित में से किसे समानांतर अर्थव्यवस्था का हिस्सा माना जा सकता है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अल्प घोषित आय
Solution:
  • समानांतर अर्थव्यवस्था उन सभी प्रकार की गतिविधियों में शामिल होती है
  • जिनके माध्यम से अर्थव्यवस्था में काले धन की अधिकता होती है।
  • ध्यान रहे कि यह एक अल्प घोषित आय होती है, जिसकी पहचान और नियमन अत्यंत मुश्किल होती है।
  • परिभाषा और विशेषताएँ
    • इसमें काला धन, हवाला लेन-देन, तस्करी और भ्रष्टाचार प्रमुख हैं
    • जो वैध अर्थव्यवस्था को कमजोर करते हैं। भारत जैसे देशों में यह समस्या गंभीर है
    • जहाँ अनौपचारिक क्षेत्र बड़ी आबादी को रोजगार देता है लेकिन मुद्रास्फीति और अपराध बढ़ाता है।​​
  • मुख्य घटक
    • समानांतर अर्थव्यवस्था के प्रमुख हिस्से निम्नलिखित हैं:
    • काला धन: कर चोरी, घूसखोरी से उत्पन्न धन जो बैंकिंग सिस्टम से बाहर रहता है।​
    • हवाला लेन-देन: बिना औपचारिक चैनल के विदेशी मुद्रा हस्तांतरण।​
    • तस्करी: सोना, ड्रग्स या अन्य वस्तुओं का अवैध आयात-निर्यात।​
    • बेनामी संपत्ति: फर्जी नामों पर खरीदी गई जमीन या संपत्ति।​
    • नकली मुद्रा: जाली नोटों का प्रचलन।​
    • ये घटक औपचारिक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर संसाधनों का गलत आवंटन करते हैं।​
  • कारण और प्रभाव
    • इसकी उत्पत्ति उच्च कर दरें, जटिल नियम, भ्रष्टाचार और अपराध से होती है।
    • सकारात्मक प्रभाव में अनौपचारिक रोजगार और बाजार तरलता शामिल है
    • लेकिन नकारात्मक रूप से मुद्रास्फीति, आतंकवाद वित्तपोषण और आर्थिक असमानता बढ़ती है।
    • भारत में नोटबंदी (2016) और जीएसटी जैसे कदमों ने इसे कम करने का प्रयास किया।​
  • नियंत्रण के उपाय
    • डिजिटलीकरण, सख्त कर कानून, पारदर्शी प्रशासन और ई-भुगतान को बढ़ावा देकर इसे रोका जा सकता है।
    • वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी और ई-कॉमर्स जैसे नए स्रोतों पर निगरानी जरूरी है।
    • लंबे समय में, आर्थिक सुधार और नैतिक व्यापार संस्कृति ही स्थायी समाधान हैं।​

18. निम्न में से कौन-सी अभिव्यक्ति सही है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) यदि विदेशों से प्राप्त कारक आय विदेशों में भुगतान की गई कारक आय से अधिक है, तो GNP, GDP से अधिक होगी।
Solution:
  • देश के निवासियों द्वारा देश या विदेश में एक वर्ष के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं व सेवाओं की मौद्रिक मूल्य को सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) कहते हैं।
  • अतः यदि विदेशों से प्राप्त कारक आय विदेशों में भुगतान की गई कारक आय से अधिक है
  • तो GNP, GDP से अधिक (अर्थात GNP > GDP) होगी।
  • अर्थशास्त्र का उदाहरण (GNP vs GDP)
    • GNP (सकल राष्ट्रीय उत्पाद) और GDP (सकल घरेलू उत्पाद) के बीच अंतर महत्वपूर्ण है।
    • सही अभिव्यक्ति: "यदि विदेश से प्राप्त साधन आय विदेश में भुगतान की गई साधन आय से अधिक है
    • तो GNP GDP से अधिक होगी।"​
    • कारण: GNP = GDP + विदेश से शुद्ध साधन आय (NFIA)।
    • यदि NFIA > 0, तो GNP > GDP। उदाहरण: भारत जैसे विकासशील देशों में प्रेषण (remittances) से NFIA सकारात्मक रहता है।
    • गलत विकल्प: NFIA < 0 होने पर GNP < GDP (जैसे अमेरिका में)।
  • रसायन विज्ञान का उदाहरण (गिब्स मुक्त ऊर्जा)
    • ΔG° संबंधी सूत्र प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार आते हैं।
    • सही अभिव्यक्ति: ΔG° = -2.303RT log K_eq या ΔG° = -nFE°_cell।​
    • व्याख्या: यह रासायनिक संतुलन और विद्युत रसायन की मूल अवधारणा है।
    • K_eq संतुलन स्थिरांक है, n इलेक्ट्रॉनों की संख्या, F फैराडे स्थिरांक। यदि ΔG° < 0, प्रतिक्रिया स्वतः होती है।
    • अन्य गलत: ΔH = ΔG + TΔS (वास्तविक: ΔG = ΔH - TΔS)।
  • भौतिकी का उदाहरण (थर्मोडायनामिक्स)
    • पहले सिद्धांत से संबंधित।
    • सही अभिव्यक्ति: द्रव्यमान संरक्षण + ऊर्जा संरक्षण (ΔU = q + w)।
    • वायुमंडल की परतें: बाह्यवायुमंडल (Exosphere) रेडियो तरंगों को परावर्तित करता है
    • आयनित गैसों के कारण। मेसोस्फीयर में तापक्रम ऊंचाई के साथ घटता है।​
  • अन्य सामान्य सही अभिव्यक्तियाँ
    • वित्त: सकल प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा - शुद्ध ब्याज भुगतान।​
    • जीवविज्ञान: पादप कोशिका भित्ति में सेल्यूलोज मुख्य घटक।
    • विकल्प प्रदान करें तो सटीक उत्तर दूंगा। ये अभिव्यक्तियाँ NCERT और परीक्षा पैटर्न पर आधारित हैं।

19. यदि अर्थव्यवस्था में N फर्में हैं, जिनमें से प्रत्येक को 1 से N तक क्रम संख्या दी गई है, तो उत्पाद विधि के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के रूप में लिखा जा सकता है। [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) GVA₁ + GVA₂..... + GVAN
Solution:
  • किसी देश की अर्थव्यवस्था में एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य सकल घरेलू उत्पाद कहलाता है।
  • इसमें देश में निवास करने वाले विदेशियों द्वारा उत्पादित वस्तुएं और सेवाएं भी शामिल होती हैं। अतः
  • उत्पाद विधि का आधार
    • उत्पाद विधि GDP को अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों या फर्मों के उत्पादन मूल्य से घटाकर मध्यवर्ती खपत को समायोजित करके मापती है।
    • प्रत्येक फर्म i के लिए मूल्य वर्धन (VA_i) = उत्पाद का मूल्य (P_i) - मध्यवर्ती इनपुट का मूल्य (IC_i)।
    • अर्थव्यवस्था में N फर्मों के लिए GDP_{उत्पाद} = \sum_{i=1}^{N} VA_i = VA_1 + VA_2 + \dots + VA_N।
    • यह सूत्र सकल मूल्य वर्धन (GVA) पर आधारित है, जो मूल्य संवर्धन विधि का मूल है।​
  • विस्तृत गणना प्रक्रिया
    • GDP की गणना में पहले प्रत्येक फर्म या क्षेत्र (जैसे कृषि, उद्योग, सेवा) का सकल मूल्य वर्धन निकाला जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि फर्म 1 का उत्पाद मूल्य 100 है
    • मध्यवर्ती लागत 40, तो VA_1 = 60। इसी प्रकार सभी N फर्मों के VA को जोड़ा जाता है।
    • कुल GVA = \sum_{i=1}^{N} GVA_i। फिर, बाजार मूल्य पर GDP = GVA + उत्पाद शुल्क - सब्सिडी।
    • यह विधि अर्थव्यवस्था के उत्पादन पक्ष को दर्शाती है।​
  • अन्य समायोजन
    • उत्पाद विधि में मूल्य वर्धन को बुनियादी मूल्य (फैक्टर कॉस्ट) या बाजार मूल्य पर मापा जाता है।
    • बुनियादी मूल्य GDP = कुल GVA (सभी क्षेत्रों का योग), जबकि बाजार मूल्य GDP में कर और सब्सिडी जोड़े जाते हैं।
    • स्थिर कीमतों पर गणना मुद्रास्फीति से बचाती है
    • वास्तविक GDP = नाममात्र GDP / मूल्य सूचकांक। N फर्मों का मॉडल सरलीकृत है
    • वास्तविक अर्थव्यवस्था में क्षेत्रीय वर्गीकरण (जैसे ISIC) का उपयोग होता है।​
  • महत्व और सीमाएँ
    • यह विधि उत्पादन संरचना का विश्लेषण करने में उपयोगी है, जैसे कौन सा क्षेत्र GDP में अधिक योगदान देता है।
    • हालांकि, अनौपचारिक क्षेत्र या गैर-बाजार सेवाओं को पूरी तरह कैप्चर न करना इसकी सीमा है।
    • तीनों विधियाँ (उत्पाद, आय, व्यय) सैद्धांतिक रूप से समान GDP देती हैं।
    • भारत जैसे देशों में CSO इस विधि से त्रैमासिक GDP जारी करता है।​

20. निम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय आय के संबंध में सही है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (II-पाली)]

I. मध्यवर्ती वस्तुओं को राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल नहीं किया जाता है।

II. राष्ट्रीय आय की गणना में अंतिम वस्तुओं को शामिल किया जाता है।

Correct Answer: (c) I और II दोनों
Solution:
  • किसी देश की अर्थव्यवस्था द्वारा एक वित्तीय वर्ष के दौरान उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य राष्ट्रीय आय कहलाता है।
  • ध्यातव्य है कि राष्ट्रीय आय की गणना में मध्यवर्ती वस्तुओं को नहीं शामिल किया जाता।
  • राष्ट्रीय आय की परिभाषा
    • राष्ट्रीय आय को सामान्यतः उत्पादन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP at factor cost) के रूप में परिभाषित किया जाता है
    • जिसमें पूंजीगत मूल्यह्रास को घटाने के बाद कारकों (जैसे भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यम)
    • प्राप्त होने वाली कुल आय शामिल होती है।
    • यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से भिन्न है क्योंकि GDP केवल देश की सीमा के अंदर उत्पादित मूल्य को मापता है
    • जबकि राष्ट्रीय आय में विदेशी आय को भी जोड़ा जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, GNP (सकल राष्ट्रीय उत्पाद) = GDP + विदेश से शुद्ध कारक आय (NFIA), और NNP = GNP - मूल्यह्रास।​
  • गणना की प्रमुख विधियाँ
    • राष्ट्रीय आय की गणना तीन मुख्य विधियों से की जाती है:
    • उत्पाद विधि : सभी क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा) में मूल्य संचयन को जोड़कर, मध्यवर्ती वस्तुओं को बाहर रखते हुए।
    • आय विधि : मजदूरी, ब्याज, लाभ, किराया आदि कारक आयों का योग।
    • व्यय विधि : उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय और निर्यात-आयात के शुद्ध अंतर का योग।
    • ये विधियाँ सैद्धांतिक रूप से समान परिणाम देती हैं
    • लेकिन व्यावहारिक चुनौतियाँ जैसे अनौपचारिक क्षेत्र को शामिल करना महत्वपूर्ण हैं।​
  • सही तथ्य: मध्यवर्ती vs अंतिम वस्तुएँ
    • राष्ट्रीय आय के संबंध में सबसे सटीक कथन यह है कि मध्यवर्ती वस्तुओं (जैसे कच्चा माल) को गणना में शामिल नहीं किया जाता
    • जबकि अंतिम वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया जाता है।
    • इससे दोहरी गणना से बचा जाता है।
    • उदाहरण: गेहूँ (मध्यवर्ती) को आटा बनाने में उपयोग होने पर अलग से नहीं गिना जाता
    • लेकिन रोटी (अंतिम वस्तु) को गिना जाता है।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएँ
    • राष्ट्रीय आय एक प्रवाह राशि (flow) है, स्टॉक नहीं; यह समय-समय पर मापी जाती है।
    • इसमें हस्तांतरण भुगतान (जैसे पेंशन) शामिल नहीं होते, केवल उत्पादक गतिविधियों से उत्पन्न आय।
    • सांकेतिक सकल घरेलू उत्पाद (Nominal GDP) में मुद्रास्फीति शामिल होती है
    • जबकि वास्तविक GDP स्थिर मूल्यों पर आधारित होता है
    • ये विशेषताएँ राष्ट्रीय आय को आर्थिक विश्लेषण का आधार बनाती हैं।​
  • भारतीय संदर्भ में उपयोग
    • भारत में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO, अब NSO) राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाता है।
    • वित्त वर्ष 2024-25 के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की राष्ट्रीय आय में सेवा क्षेत्र का योगदान प्रमुख है।
    • यह बजट निर्माण, योजना आयोग (अब नीति आयोग) की योजनाओं और प्रति व्यक्ति आय गणना के लिए आधार प्रदान करता है।​