राष्ट्रीय आय (अर्थव्यवस्था) (भाग-II)

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21. राष्ट्रीय आय की गणना की किस विधि को 'औद्योगिक उत्पत्ति विधि' के नाम से भी जाना जाता है? [CHSL (T-I) 02 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) मूल्य वर्धित विधि
Solution:
  • मूल्य वर्धित विधि राष्ट्रीय आय निर्धारित करने के तीन तरीकों में से एक है।
  • अन्य दो विधियां व्यय विधि और आय विधि हैं।
  • मूल्य वर्धित विधि को औद्योगिक उत्पाद विधि या आउटपुट विधि के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस विधि का प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न चरणों के दौरान उत्पाद में जोड़े गए मूल्य के दृष्टिगत राष्ट्रीय आय की गणना करना है।
  • मूल्य वर्धित विधि का आधार
    • लेकिन मध्यवर्ती वस्तुओं (intermediate goods) के मूल्य को घटाकर दोहरी गणना से बचा जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि एक किसान गेहूं उगाता है जिसका मूल्य 100 रुपये है
    • तो मिलर द्वारा आटे के रूप में इसे 150 रुपये का बनाया जाता है
    • यहाँ मूल्य वर्धन 50 रुपये ही होगा। सभी क्षेत्रों के ऐसे मूल्य वर्धन का योग राष्ट्रीय आय देता है।​
  • अन्य विधियों से तुलना
    • राष्ट्रीय आय की गणना तीन मुख्य विधियों से होती है:
    • उत्पादन/मूल्य वर्धित विधि: औद्योगिक उत्पत्ति पर केंद्रित, कुल उत्पादन से मध्यवर्ती खपत घटाई जाती है।
    • आय विधि: मजदूरी, किराया, ब्याज, लाभ आदि आयों का योग।
    • व्यय विधि: उपभोग, निवेश, सरकारी खर्च और शुद्ध निर्यात का योग।
    • ये तीनों विधियाँ सैद्धांतिक रूप से एक ही परिणाम देती हैं।​
  • गणना प्रक्रिया
    • प्रत्येक उद्योग/क्षेत्र का सकल उत्पादन मूल्य (output) निकालें।
    • उसी क्षेत्र में उपयोग की गई मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य घटाएँ: मूल्य वर्धन = उत्पादन मूल्य - मध्यवर्ती खपत।
    • सभी क्षेत्रों के मूल्य वर्धन को जोड़ें, अप्रत्यक्ष कर जोड़ें और सब्सिडी घटाएँ।
      फॉर्मूला: GDP (क्षेत्र मूल्य पर) = Σ (उत्पादन मूल्य - मध्यवर्ती खपत)।​
  • महत्व और सीमाएँ
    • यह विधि उद्योगों के योगदान को स्पष्ट करती है
    • आर्थिक संरचना का विश्लेषण संभव बनाती है।
    • सीमाएँ: अनौपचारिक क्षेत्र की जानकारी कठिन, मूल्य ह्रास (depreciation) को समायोजित करना जटिल।
    • भारत में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) इस विधि का उपयोग करता है।​

22. इनमें से कौन-सा राष्ट्रीय आय को मापने की व्यय विधि का उचित रूप से कथित घटक नहीं है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) निर्यात और आयात व्यय
Solution:
  • राष्ट्रीय आय के आकलन या मापन हेतु मुख्यतः तीन विधियां प्रयुक्त होती हैं। ये विधियां हैं
  • (1) उत्पाद विधि, (2) आय विधि तथा (3) व्यय विधि। ध्यातव्य है
  • व्यय विधि में सरकारी व्यय, निवेश व्यय और उपभोग व्यय आदि शामिल होते हैं
  • जबकि निर्यात और आयात व्यय नहीं शामिल होते हैं।
  • व्यय विधि के सही घटक
    • व्यक्तिगत उपभोग व्यय (C): घरेलू परिवारों द्वारा उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं पर किया गया
    • व्यय, जैसे भोजन, कपड़े और सेवाएं।​
    • निजी निवेश व्यय (I): व्यवसायों और व्यक्तियों द्वारा पूंजीगत वस्तुओं (मशीनरी, भवन) और भंडार पर निवेश।
    • इसमें मूल्यह्रास को ध्यान में रखा जाता है।​
    • सरकारी व्यय (G): केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वस्तुओं
    • सेवाओं और बुनियादी ढांचे पर व्यय, जिसमें सब्सिडी शामिल नहीं होती।​
    • शुद्ध निर्यात (X - M): कुल निर्यात (X) से कुल आयात (M) को घटाकर प्राप्त राशि
    • जो विदेशी व्यापार संतुलन को दर्शाती है।​
  • गलत कथित घटक
    • सामान्यतः प्रश्नों में "निर्यात + आयात व्यय" को व्यय विधि का घटक बताया जाता है
    • जो असंगत है। शुद्ध निर्यात (X - M) घटाया जाता है, न कि जोड़ा।
    • निर्यात + आयात" जोड़ना दोहराव पैदा करता है और आयात को व्यय के रूप में गिनना गलत है
    • क्योंकि आयात पहले से C, I या G में शामिल होते हैं।​
  • विधि का सैद्धांतिक आधार
    • यह विधि Keynesian मॉडल पर आधारित है, जहां कुल मांग (Aggregate Demand) को व्यय के रूप में मापा जाता है।
    • भारत में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) इस विधि का उपयोग GDP अनुमान के लिए करता है।
    • गलत घटक चुनने से राष्ट्रीय आय अधिक हो जाती, जो वास्तविकता से मेल नहीं खाता।

23. निम्न में से कौन-सा विकल्प राष्ट्रीय आय की मापन पद्धति का हिस्सा नहीं है? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (III-पाली), CHSL (T-I) 01 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) ऋण विधि
Solution:
  • राष्ट्रीय आय के आकलन या मापन हेतु मुख्यतः तीन विधियां प्रयुक्त होती हैं। ये विधियां हैं
  • उत्पाद विधि, (2) आय विधि तथा (3) व्यय विधि। ध्यातव्य है
  • व्यय विधि में सरकारी व्यय, निवेश व्यय और उपभोग व्यय आदि शामिल होते हैं
  • जबकि निर्यात और आयात व्यय नहीं शामिल होते हैं।
  • मानक मापन विधियाँ
    • राष्ट्रीय आय (जैसे GDP या NNP) की गणना आर्थिक गतिविधियों के चक्रीय प्रवाह—उत्पादन
    • आय और व्यय—के आधार पर की जाती है।
    • उत्पादन विधि में सभी क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा) के अंतिम वस्तुओं-सेवाओं के मूल्य वर्धन को जोड़ा जाता है
    • जिसमें मध्यवर्ती खपत घटाई जाती है।
    • आय विधि में मजदूरी, ब्याज, किराया, लाभ जैसी कारकों की आय का योग होता है
    • जबकि व्यय विधि में उपभोग, निवेश, सरकारी खर्च और शुद्ध निर्यात जोड़े जाते हैं।
    • ये तीनों विधियाँ सैद्धांतिक रूप से समान परिणाम देती हैं।​​
  • गैर-मानक विकल्प
    • वितरण संगणना विधि या बचत-विनियोग विधि राष्ट्रीय आय मापन का हिस्सा नहीं
    • क्योंकि ये उत्पादन-आधारित गणना पर केंद्रित नहीं होतीं।
    • उदाहरणस्वरूप, वितरण संगणना केवल वस्तुओं के वितरण को देखती है
    • जो आर्थिक मूल्य सृजन का पूर्ण चित्रण नहीं देती।
    • इसी तरह, ऋण पद्धति या सामाजिक लेखारीति (जो आय वर्गीकरण पर आधारित है
    • पुरानी या अप्रचलित हैं और आधुनिक राष्ट्रीय लेखांकन (जैसे भारत में CSO द्वारा उपयोग) में शामिल नहीं।

24. निम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय आय का व्यापक से संकीर्ण अवधारणाओं का सही क्रम है? [CHSL (T-1) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) कारक लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद - कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद - वैयक्तिक आय - वैयक्तिक प्रयोज्य आय
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में से विकल्प (b) 'कारक लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद - कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद
  • वैयक्तिक आय - वैयक्तिक प्रयोज्य आय' राष्ट्रीय आय का व्यापक से संकीर्ण अवधारणाओं का सही क्रम है।
  • व्यापक अवधारणा: साधन लागत पर GNP
    • साधन लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP at Factor Cost) राष्ट्रीय आय की सबसे व्यापक अवधारणा है।
    • यह देश के निवासियों द्वारा एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है
    • जिसमें विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय (NFIA) शामिल होती है
    • मूल्यह्रास या अप्रत्यक्ष कर नहीं घटाए जाते । GNP को GDP में NFIA जोड़कर निकाला जाता है
    • जो देश की कुल उत्पादकता का विस्तृत चित्र प्रस्तुत करता है।​
  • संकीर्ण होती अवधारणा: साधन लागत पर NNP
    • साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP at Factor Cost) GNP से मूल्यह्रास घटाने पर प्राप्त होता है।
    • यह पूँजी संपत्तियों की घिसावट को ध्यान में रखते हुए शुद्ध उत्पादन को मापता है
    • जिससे यह GNP से अधिक संकीर्ण हो जाता है।
    • NNP को अक्सर राष्ट्रीय आय (National Income) का पर्याय माना जाता है
    • क्योंकि यह उत्पादन साधनों को प्राप्त वास्तविक आय को प्रतिबिंबित करता है ।​​
  • और संकीर्ण: व्यक्तिगत आय
    • व्यक्तिगत आय (Personal Income) NNP से कर, कॉर्पोरेट लाभ में संरक्षित हिस्सा
    • सामाजिक सुरक्षा योगदान घटाने और हस्तांतरण भुगतान (जैसे पेंशन, सब्सिडी) जोड़ने पर प्राप्त होती है।
    • यह घरेलू क्षेत्र द्वारा प्राप्त कुल आय को दर्शाती है
    • जो व्यक्तियों के वास्तविक उपयोग योग्य संसाधनों पर केंद्रित होती है।
    • इस प्रकार, यह NNP से अधिक संकीर्ण है क्योंकि इसमें केवल वितरित आय शामिल होती है, न कि कुल उत्पादन ।​
  • सबसे संकीर्ण: व्यक्तिगत प्रयोज्य आय
    • व्यक्तिगत प्रयोज्य आय (Personal Disposable Income) व्यक्तिगत आय से प्रत्यक्ष कर घटाने पर शेष रहती है।
    • यह व्यक्तियों द्वारा उपभोग या बचत के लिए उपलब्ध अंतिम आय है
    • जो उपभोक्ता निर्णयों का आधार बनती है। यह क्रम की सबसे संकीर्ण अवधारणा है
    • क्योंकि यह केवल करोत्तर शुद्ध आय तक सीमित रहती है ।​
  • अन्य विकल्पों का विश्लेषण
    • कभी-कभी GDP या बाजार मूल्य पर आधारित अवधारणाएँ भ्रम पैदा करती हैं
    • लेकिन GNP निवासियों के वैश्विक योगदान के कारण सबसे व्यापक है।
    • उदाहरणस्वरूप, GDP भौगोलिक सीमाओं तक सीमित रहता है
    • जबकि GNP इसमें NFIA जोड़ता है। इसी प्रकार, बाजार मूल्य अप्रत्यक्ष कर जोड़ता है
    • साधन लागत अधिक शुद्ध होती है । यह क्रम आर्थिक नीति निर्माण में प्रासंगिक है
    • क्योंकि व्यापक से संकीर्ण दृष्टिकोण विकास, वितरण एवं उपभोग का क्रमिक मूल्यांकन संभव बनाते हैं।​​

25. निम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय आय का व्यापक से संकीर्ण अवधारणाओं का गलत क्रम है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) बाजार मूल्य पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद - कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद - बाजार मूल्य पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद - कारक लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में से विकल्प (c) 'बाजार मूल्य पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद - कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद - बाजार मूल्य पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद - कारक लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद' राष्ट्रीय आय का व्यापक से संकीर्ण अवधारणाओं का गलत क्रम है।
  • मुख्य अवधारणाएँ
    • राष्ट्रीय आय की ये अवधारणाएँ अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन से लेकर व्यक्तियों के हाथ में शुद्ध बची आय तक संकुचित होती जाती हैं।
    • GNP सबसे व्यापक है क्योंकि यह देश के निवासियों (नागरिकों) द्वारा देश के अंदर और बाहर उत्पादित सभी वस्तुओं-सेवाओं के कुल मूल्य को शामिल करता है
    • जिसमें विदेश से शुद्ध आय जोड़ी जाती है। NNP इससे संकरी है
    • क्योंकि मूल्यह्रास (depreciation) घटाया जाता है, जो पूँजी स्टॉक की घिसावट को दर्शाता है।​
  • सही क्रम
    • व्यापक से संकीर्ण का मानक क्रम इस प्रकार है:
    • साधन लागत पर GNP: कुल उत्पादन का प्रारंभिक माप, जिसमें उत्पादन कारकों (श्रम, पूँजी आदि) को भुगतान शामिल।
    • साधन लागत पर NNP: GNP से मूल्यह्रास घटाकर प्राप्त, शुद्ध उत्पादन दर्शाता है।
    • व्यक्तिगत आय (Personal Income): NNP से अप्रत्यक्ष कर
    • सामाजिक सुरक्षा योगदान घटाकर और हस्तांतरण भुगतान (पेंशन आदि) जोड़कर प्राप्त
    • यह व्यक्तियों को वितरित कुल आय है।
    • व्यक्तिगत प्रयोज्य आय : व्यक्तिगत आय से प्रत्यक्ष कर घटाकर प्राप्त, वास्तविक उपभोग-बचत के लिए उपलब्ध।​
  • गलत क्रम की पहचान
    • यदि कोई विकल्प इस क्रम को उलट देता है, जैसे NNP → GNP (संकुचित से व्यापक)
    • GDP को GNP से पहले रखता है
    • (GDP भौगोलिक रूप से सीमित होता है, GNP राष्ट्रीय), या व्यक्तिगत प्रयोज्य आय को व्यक्तिगत आय से पहले रखता है
    • तो वह गलत है। उदाहरणस्वरूप, testbook स्रोत में सही क्रम GNP-NNP-व्यक्तिगत आय-प्रयोज्य आय दिया गया है
    • अतः इसका विपरीत या GDP से प्रारंभिक क्रम गलत होगा।

26. किसी अर्थव्यवस्था में अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर कुल खर्च का योग करके राष्ट्रीय आय की गणना करने के लिए निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग किया जाता है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) व्यय विधि
Solution:
  • किसी अर्थव्यवस्था में अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर कुल खर्च का योग करके राष्ट्रीय आय की गणना करने के लिए व्यय विधि का उपयोग किया जाता है।
  • व्यय विधि का सिद्धांत
    • व्यय विधि में राष्ट्रीय आय, विशेष रूप से सकल घरेलू उत्पाद (GDP), को अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों द्वारा अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए कुल व्यय के योग के रूप में गणना की जाती है।
    • यह विधि इस मूल सिद्धांत पर आधारित है
    • किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादित कुल उत्पाद (अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ) का मूल्य बराबर होता है
    • उस पर किया गया कुल व्यय के मूल्य से। इसमें बिचौलियों के माध्यमिक वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता
    • केवल अंतिम खपत को ध्यान में रखा जाता है। सूत्र इस प्रकार है
    •  GDP = C + I + G + (X - M), जहाँ C उपभोक्ता व्यय, I
    • सकल निवेश, G सरकारी व्यय, X निर्यात और M आयात है।​​
  • अन्य विधियों से तुलना
    • राष्ट्रीय आय की गणना तीन मुख्य विधियों से होती है
    • लेकिन प्रश्न में वर्णित "अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर कुल खर्च का योग" स्पष्ट रूप से व्यय विधि को इंगित करता है।
    • उत्पादन विधि (Value Added Method): उत्पादन के प्रत्येक चरण में जोड़े गए मूल्य का योग।
    • यह उत्पादित वस्तुओं के मूल्य पर केंद्रित है।​
    • आय विधि (Income Method): मजदूरी, लाभ, किराया, ब्याज आदि आयों का योग।
    • यह आय वितरण पर आधारित है।​
    • व्यय विधि इनसे भिन्न है क्योंकि यह मांग पक्ष (खरीदारी) को मापती है।​
  • व्यय विधि के घटक विस्तार से
    • इस विधि के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं, जो कुल व्यय को वर्गीकृत करते हैं:
    • उपभोक्ता व्यय (C): घरेलू परिवारों द्वारा उपभोग्य वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च, जैसे भोजन, कपड़े, चिकित्सा।
    • निवेश व्यय (I): व्यवसायों द्वारा पूँजीगत वस्तुओं (मशीनरी, भवन) पर निवेश, जिसमें स्टॉक परिवर्तन शामिल।
    • सरकारी व्यय (G): सरकार द्वारा सार्वजनिक सेवाओं, बुनियादी ढाँचे आदि पर खर्च (वेतन, सब्सिडी सहित)।
    • शुद्ध निर्यात (X - M): निर्यात घटाकर आयात, जो विदेशी व्यापार को समायोजित करता है।
    • ये सभी अंतिम वस्तुओं/सेवाओं तक सीमित रहते हैं, ताकि दोहरी गणना न हो।​​
  • व्यावहारिक महत्व और सीमाएँ
    • व्यय विधि का उपयोग अधिकांश देशों में GDP अनुमान के लिए किया जाता है
    • क्योंकि यह आर्थिक मांग को प्रत्यक्ष दर्शाती है।
    • भारत जैसे देशों में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) इस विधि को अपनाता है।
    • हालांकि, इसकी सीमाएँ हैं जैसे अनौपचारिक क्षेत्र का व्यय अनुमान कठिन होना
    • मुद्रास्फीति प्रभाव और काला धन शामिल न होना।
    • तीनों विधियों से प्राप्त आँकड़े समान होने चाहिए, अन्यथा विसंगतियाँ सुधारी जाती हैं।​

27. सत्य कथन की पहचान कीजिए। [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) यदि वास्तविक जीडीपी 240 है और कीमत सूचकांक 120 है, तो मौद्रिक जीडीपी 288 होगी।
Solution:
  • प्रश्नगत कथन में वास्तविक GDP 240 और कीमत सूचकांक 120 है, तो मौद्रिक जीडीपी 288 होगी।
  • व्यय विधि का मूल सिद्धांत
    • व्यय विधि के अनुसार, किसी अर्थव्यवस्था में एक निश्चित अवधि (जैसे एक वर्ष) में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर विभिन्न क्षेत्रों द्वारा किया गया
    • कुल व्यय ही राष्ट्रीय आय (GDP at market price) को प्रतिबिंबित करता है।
    • यह सिद्धांत "उत्पादन = आय = व्यय" पर आधारित है, जहाँ व्यय पक्ष कुल मांग को मापता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि किसान अनाज बेचता है
    • तो उसका मूल्य उपभोक्ता, व्यवसाय या सरकार के व्यय के रूप में जुड़ता है
    • लेकिन मध्यवर्ती वस्तुओं (जैसे बीज) का व्यय बाहर रखा जाता है
    • दोहरी गणना न हो। सूत्र है: GDP = C + I + G + (X - M), जो सभी अंतिम खर्चों का योग है।​​
  • सत्य कथनों की सूची और पहचान
    • राष्ट्रीय आय से जुड़े सामान्य कथनों में से निम्नलिखित सत्य हैं, विशेष रूप से व्यय विधि के संदर्भ में:
    • कथन 1: व्यय विधि में केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर व्यय को शामिल किया जाता है
    • मध्यवर्ती वस्तुओं को नहीं। (सत्य, क्योंकि यह दोहरी गणना रोकता है।)​​
    • कथन 2: सकल घरेलू उत्पाद का व्यय विधि से अनुमान C (उपभोक्ता व्यय) + I (निवेश) + G (सरकारी व्यय) + (X - M) (शुद्ध निर्यात) के योग से होता है। (सत्य, यह मानक सूत्र है।)​
    • कथन 3: तीनों विधियाँ (उत्पादन, आय, व्यय) सैद्धांतिक रूप से एक ही मूल्य देती हैं।
    • (सत्य, क्योंकि वे एक ही प्रवाह को अलग-अलग दृष्टि से मापती हैं।)​
    • ये कथन NCERT और मानक अर्थशास्त्र पाठ्यक्रमों से पुष्ट हैं
    • जबकि असत्य कथन जैसे "व्यय विधि उत्पादन मूल्य जोड़ती है" गलत होते।​
  • घटकों का विस्तृत विवरण
    • व्यय विधि के प्रत्येक घटक को अंतिम खपत तक सीमित रखा जाता है:
    • C (उपभोक्ता व्यय): घरेलू परिवारों द्वारा टिकाऊ (कार) और गैर-टिकाऊ (भोजन) वस्तुओं पर खर्च
    • जो 60-70% GDP का बड़ा हिस्सा होता है।
    • I (सकल घरेलू पूँजी निर्माण): व्यवसायों द्वारा मशीनरी, भवन या स्टॉक पर निवेश, जिसमें निजी और सार्वजनिक दोनों शामिल।
    • G (सरकारी अंतिम व्यय): बुनियादी ढाँचे, वेतन, रक्षा पर खर्च, लेकिन हस्तांतरण भुगतान (पेंशन) बाहर।
    • X - M (शुद्ध निर्यात): निर्यात आयात से अधिक होने पर सकारात्मक, जो विदेशी मांग जोड़ता है।
    • ये सभी बाजार मूल्य पर मापे जाते हैं
    • धिसावट, अप्रत्यक्ष करों के समायोजन से शुद्ध राष्ट्रीय आय प्राप्त होती है।​​
  • व्यावहारिक अनुप्रयोग और सत्यापन
    • भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) व्यय विधि का उपयोग GDP अनुमान के लिए करता है
    • जहाँ सर्वेक्षण और प्रशासनिक डेटा से व्यय एकत्र होते हैं।
    • सत्य कथन की पहचान के लिए, परीक्षाओं में अक्सर विकल्प दिए जाते हैं
    • जैसे "व्यय विधि अंतिम व्यय योग करती है" जो सत्य है
    • जबकि "यह उत्पादन जोड़ती है" (उत्पादन विधि) असत्य।
    • तीन विधियों के परिणाम समान होने पर ही अनुमान विश्वसनीय माना जाता है
    • विसंगति होने पर पुनरावलोकन होता है। यह विधि महँगाई समायोजित (स्थिर मूल्य) या चालू मूल्य पर लागू होती है।​​

28. अवास्तविक और वास्तविक जीडीपी (GDP) के बीच के अनुपात को ....... कहा जाता है। [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) जीडीपी अपस्फीति कारक
Solution:
  • अवास्तविक और वास्तविक जीडीपी (GDP) के बीच के अनुपात को जीडीपी अपस्फीति कारक कहा जाता है।
  • नाममात्र और वास्तविक जीडीपी क्या हैं?
    • नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP), जिसे अवास्तविक जीडीपी भी कहा जाता है
    • किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का वर्तमान बाजार मूल्यों पर कुल मौद्रिक मूल्य है।
    • यह मौजूदा वर्ष की कीमतों पर आधारित होता है, इसलिए इसमें मुद्रास्फीति का प्रभाव शामिल रहता है।
    • दूसरी ओर, वास्तविक जीडीपी (Real GDP) आधार वर्ष की स्थिर कीमतों पर गणना की जाती है
    • जो मुद्रास्फीति को समायोजित करके अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि को दर्शाती है।​
  • जीडीपी अपस्फीतिकारक की गणना
    • जीडीपी अपस्फीतिकारक की गणना इस सूत्र से की जाती है:
    • जीडीपी अपस्फीतिकारक = (नाममात्र जीडीपी / वास्तविक जीडीपी) × 100​
    • यह अनुपात मूल्य स्तर में परिवर्तन को दर्शाता है। यदि अपस्फीतिकारक 100 से अधिक है
    • तो मुद्रास्फीति है; यदि कम है, तो अपस्फीति। उदाहरणस्वरूप
    • यदि नाममात्र जीडीपी 120 अरब रुपये और वास्तविक जीडीपी 100 अरब रुपये है
    • तो अपस्फीतिकारक = (120/100) × 100 = 120 होगा।​
  • महत्व और उपयोग
    • जीडीपी अपस्फीतिकारक अर्थव्यवस्था के समग्र मूल्य स्तर को मापता है
    • जिसमें उपभोक्ता, उत्पादक और सरकारी क्षेत्र शामिल हैं। यह सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) से भिन्न है
    • क्योंकि सीपीआई केवल उपभोक्ता वस्तुओं पर केंद्रित होता है
    • जबकि अपस्फीतिकारक सभी वस्तुओं-सेवाओं को कवर करता है।
    • भारत जैसे देशों में, यह त्रैमासिक जीडीपी अनुमानों के साथ जारी होता है और आर्थिक नीति निर्माण में सहायक है।

29. सरकारी बजट के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य गलत है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) यह प्राप्तियों और सरकार द्वारा किए गए व्ययों का विवरण है।
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में विकल्प (c) गलत है
  • क्योंकि सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष की समयावधि में सरकार द्वारा उसके व्यय और प्राप्ति का पुर्वानुमान होता है।
  • बजट की परिभाषा
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार, केंद्रीय बजट एक संवैधानिक आवश्यकता है
    • जो आगामी वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के लिए सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का वार्षिक विवरण प्रस्तुत करता है।
    • यह देश की आर्थिक नीतियों, प्राथमिकताओं और विकास योजनाओं को दर्शाता है।
  • बजट के मुख्य खाते
    • केंद्रीय बजट में तीन भाग शामिल होते हैं:
    • भारत की समेकित निधि : अनुच्छेद 266 के तहत राजस्व प्राप्तियाँ, पूंजीगत प्राप्तियाँ और व्यय इससे संबंधित होते हैं।
    • भारत की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund of India): अनुच्छेद 267 के तहत अप्रत्याशित खर्चों के लिए।
    • सार्वजनिक खाता (Public Account): ऋण, जमा और अन्य लेनदेन के लिए।
  • गलत वाक्य की पहचान
    • निम्नलिखित मानक विकल्पों में से "यह सरकार द्वारा किए गए प्राप्तियों और व्यय का विवरण है" गलत है।
    • कारण यह है कि बजट अनुमानित (estimated) प्राप्तियों और व्यय का विवरण होता है,
    • वास्तविक आंकड़े बाद में लेखा परीक्षा द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं। अन्य विकल्प सही हैं:
    • यह संवैधानिक आवश्यकता है।
    • वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित प्राप्ति-व्यय का विवरण।
    • इसमें दो मुख्य खाते (समेकित निधि और आकस्मिकता निधि) शामिल।​
  • अन्य सामान्य भ्रम
    • कभी-कभी पूछे जाने वाले अन्य गलत कथन:
    • "एकत्रित शुल्क और जुर्माना पूंजी प्राप्ति है" – गलत, यह राजस्व प्राप्ति है।
    • राजस्व प्राप्तियों का विस्तृत अनुमान वित्त विधेयक में नहीं, बल्कि मुख्य बजट में होता है।​
    • यह स्पष्टीकरण SSC, UPSC जैसी परीक्षाओं के संदर्भ में पूर्ण है।

30. राज्य की आय, जो लोगों द्वारा बिना कानूनी उत्तराधिकारी के छोड़ी गई संपत्ति से उत्पन्न होती है, ....... कहलाती है। [CHSL (T-I) 08 जून, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) राजगामित्व
Solution:
  • राज्य की आय, जो लोगों द्वारा बिना कानूनी उत्तराधिकारी के छोड़ी गई संपत्ति से उत्पन्न होती है, राजगामित्व कहलाती है।
  • राजगामित्व की परिभाषा
    • भारत में यह अवधारणा संपत्ति के स्वामित्व के सिद्धांत पर आधारित है
    • हर संपत्ति का कोई न कोई मालिक होना चाहिए।
    • यदि कोई व्यक्ति intestate (बिना वसीयत) मरता है
    • उसके क्लास-1 या क्लास-2 उत्तराधिकारी नहीं होते, तो संपत्ति राज्य escheat हो जाती है।​
  • कानूनी आधार
    • भारतीय विधि में यह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम
    • 1956 या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 जैसी कानूनों के तहत संचालित होता है।
    • यदि कोई हिंदू व्यक्ति बिना वारिस मरता है, तो संपत्ति राज्य को चली जाती है।
    • इसी तरह, अन्य धर्मों के लिए अलग नियम हैं, लेकिन मूल सिद्धांत यही है
    • संपत्ति शून्य (bona vacantia) नहीं रह सकती।
    • राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम जैसी राज्य-विशेष विधियों में भी इसका उल्लेख मिलता है।​
  • प्रक्रिया और उदाहरण
    • प्रक्रिया में सबसे पहले उत्तराधिकारियों की खोज की जाती है; यदि 7-12 वर्ष बाद भी कोई दावा न हो
    • तो संपत्ति राज्य के खजाने में जाती है।
    • उदाहरण: यदि कोई अविवाहित व्यक्ति बिना भाई-बहन या अन्य रिश्तेदारों के मर जाता है
    • तो उसकी बैंक जमा राशि या अचल संपत्ति escheat हो सकती है।
    • राज्य इसे नीलाम कर सकता है या अपनी आय में मिला सकता है
    • लेकिन देनदारों के दावों का निपटारा पहले होता है।​
  • अन्य संबंधित शब्द
    • बोना वैकेंटिया: स्वामी-रहित संपत्ति, जो राजगामित्व का ही अंग है।
    • एस्कीट (Escheat): अंग्रेजी शब्द, जो हिंदी में राजगामित्व कहा जाता है।
    • यह अवधारणा संवैधानिक रूप से अनुच्छेद 296 से जुड़ी है
    • जहां समुद्र तट या नदियों से प्राप्त संपत्ति भी राज्य को जाती है।​