Correct Answer: (a) 1,000 रु.
Solution:- तेंदुलकर समिति द्वारा वर्ष 2009 में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।
- योजना आयोग ने गरीबी माप पद्धति का मूल्यांकन करने के लिए सुरेश तेंदुलकर की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था
- जिसने अपनी रिपोर्ट में शहरी क्षेत्र में रह रहे परिवारों के संदर्भ में गरीबी रेखा का निर्धारण 1000 रु
- प्रति व्यक्ति प्रतिमाह और ग्रामीण परिवारों के लिए 816 रु. प्रति व्यक्ति प्रतिमाह निर्धारित किया।
- तेंदुलकर समिति का पृष्ठभूमि
- जो गरीबी आकलन की पुरानी कैलोरी-आधारित विधि की समीक्षा के लिए था।
- समिति ने 2009 में रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उपभोग व्यय (MPCE) को आधार बनाया गया
- जिसमें भोजन के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, वस्त्र और स्थायी वस्तुओं को शामिल किया।
- इससे गरीबी अनुमान अधिक वास्तविक हुए।
- 2011-12 की गरीबी रेखा
- 2011-12 के लिए तेंदुलकर पद्धति के तहत अखिल भारतीय गरीबी रेखा इस प्रकार निर्धारित हुई:
- ग्रामीण क्षेत्र: प्रति व्यक्ति प्रति माह 816 रुपये।
- शहरी क्षेत्र: प्रति व्यक्ति प्रति माह 1000 रुपये।
- यह रेखा मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) पर आधारित थी
- जो NSSO के 68वें दौर सर्वेक्षण से ली गई। योजना आयोग ने जुलाई 2013 में इन्हें आधिकारिक रूप से अपनाया।
- गरीबी अनुपात और प्रभाव
- इस पद्धति से 2011-12 में गरीबी अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों में 25.7%
- शहरी में 13.7% और अखिल भारतीय स्तर पर 21.9% आंका गया
- जो 269 मिलियन लोगों को गरीब रेखा से नीचे दिखाता है।
- पुरानी लकड़ावाला पद्धति से यह अनुपात अधिक था
- लेकिन तेंदुलकर ने इसे संशोधित कर वास्तविकता के निकट लाया।
- यह अभी भी भारत के आधिकारिक गरीबी अनुमानों का आधार है।
- अन्य समितियों से तुलना
- रंगराजन समिति (2014) ने इसे संशोधित कर ग्रामीण के लिए 972 रुपये और शहरी के लिए 1407 रुपये सुझाए
- लेकिन तेंदुलकर ही 2011-12 का मानक रहा।
- अलघ समिति जैसी पुरानी विधियां केवल कैलोरी (ग्रामीण: 2400 kcal, शहरी: 2100 kcal) पर केंद्रित थीं।