राष्ट्रीय आय (अर्थव्यवस्था) (भाग-I)

Total Questions: 36

11. बजट घाटा क्या है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) राजस्व पर सरकारी व्यय की अधिकता
Solution:
  • जब सरकार राजस्व प्राप्ति से अधिक व्यय करती है, तो इस स्थिति को बजट घाटा कहते हैं।
  • इस घाटे की पूर्ति के लिए कई उपाय किए जाते हैं, जिनका किसी अर्थव्यवस्था पर अलग- अलग प्रभाव पड़ता है।
  • प्रकार
    • बजट घाटे के मुख्य प्रकार निम्न हैं:
    • राजस्व घाटा: राजस्व व्यय से राजस्व प्राप्तियां घटाकर निकाला जाता है, जिसमें ब्याज भुगतान शामिल होते हैं।​
    • राजकोषीय घाटा: कुल व्यय से कुल प्राप्तियां (उधार छोड़कर) घटाकर प्राप्त होता है, जो उधार की आवश्यकता दर्शाता है।​
    • प्राथमिक घाटा: राजकोषीय घाटा से ब्याज भुगतान घटाकर निकाला जाता है।​
    • अन्य प्रकारों में चालू खाता घाटा और व्यापार घाटा शामिल हैं।​
  • कारण
    • सरकारें लोकप्रिय योजनाओं, विकास परियोजनाओं, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य या आपदा प्रबंधन पर अधिक खर्च करती हैं।
    • राजस्व स्रोत सीमित होने पर कर वृद्धि न होने या आर्थिक मंदी से प्राप्तियां कम हो जाती हैं।​
  • प्रभाव
    • बजट घाटा मुद्रास्फीति बढ़ा सकता है, राष्ट्रीय ऋण बढ़ाता है
    • निवेशक विश्वास कम कर सकता है। लंबे समय में यह आर्थिक विकास को बाधित करता है।​
  • प्रबंधन
    • घाटे को कम करने के लिए व्यय कटौती, कर वृद्धि या राजस्व बढ़ाने वाले उपाय अपनाए जाते हैं।
    • भारत में 2025-26 बजट में राजकोषीय घाटा 4.8% का लक्ष्य रखा गया।​

12. निम्नलिखित में से कौन-सा सरकारी बजट में पूंजीगत प्राप्ति (capital receipt) का एक उदाहरण है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) सरकारी बंधपत्र की डिक्री
Solution:
  • प्रश्नगतं विकल्पों में 'सरकारी बंध पत्र की डिक्री' सरकारी बजट में पूंजीगत प्राप्ति का एक उदाहरण है।
  • सरकार की ऐसी सभी प्राप्तियां जिनसे देयता पैदा हो या वित्तीय संपत्तियां कम हो
  • पूंजीगत प्राप्ति कहलाती हैं। ये प्राप्तियां ऋण उत्पादक या गैर-ऋण उत्पादक हो सकती हैं।
  • पूंजीगत प्राप्ति की परिभाषा
    • उदाहरण के लिए, ऋण लेना या सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों का विनिवेश इनमें शामिल होता है
    • क्योंकि ये सरकार की देनदारियों को बढ़ाते हैं या परिसंपत्तियों को घटाते हैं।
    • राजस्व प्राप्तियों (जैसे कर) से भिन्न, ये प्राप्तियां पुनरावर्ती नहीं होतीं
    • इन्हें लाभांश वितरण के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।​​
  • प्रमुख उदाहरण
    • पूंजीगत प्राप्तियों के सामान्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
    • सरकारी बांडों या बॉन्ड्स की बिक्री, जो जनता या संस्थानों से उधार जुटाती है।​
    • जनता, विदेशी सरकारों या बैंकों से लिए गए ऋण।​
    • सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का विनिवेश (disinvestment)।​​
    • पहले दिए गए ऋणों और अग्रिमों की वसूली।​
    • ये सभी प्राप्तियां सरकारी पूंजी बजट का हिस्सा बनती हैं
    • आर्थिक विकास के लिए उपयोग की जाती हैं।​
  • भारतीय संदर्भ में महत्व
    • भारत में केंद्रीय बजट के पूंजी खाते में ये प्राप्तियां प्रमुख भूमिका निभाती हैं
    • जैसे 2025-26 बजट में ऋण वसूली और विनिवेश शामिल रहे।
    • ये आर्थिक स्थिरता और विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करती हैं।​

13. उच्च आय वर्ग के लोगों पर कर की दरों में वृद्धि की गई है, जिसके परिणामस्वरूप ....... I [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) आय और धन की असमानताएं कम हुई हैं
Solution:
  • उच्च आय वर्ग के लोगों पर कर की दरों में वृद्धि की गई है, जिसके परिणामस्वरूप आय और धन की असमानताएं कम हुई हैं।
  • करों के माध्यम से धन का पुनर्वितरण, व्यापक स्वामित्व को बढ़ावा देना और सभी नागरिकों के लिए समान रूप से पूंजी और भूमि का समाजीकरण सभव होगा।
  • मुख्य परिणाम
    • यह नीति अमीर वर्ग से अधिक राजस्व एकत्र करके सरकार को सक्षम बनाती है
    • जिसका उपयोग सामाजिक कल्याण योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसी सार्वजनिक सेवाओं में किया जा सकता है
    • इससे समाज में धन का पुनर्वितरण होता है, जो गरीब और मध्यम वर्ग को लाभ पहुंचाता है
    • आर्थिक असंतुलन को दूर करने में सहायक सिद्ध होता है
    • हालांकि, अत्यधिक वृद्धि से उच्च आय वालों का निवेश या उपभोग कम हो सकता है
    • लेकिन सामान्यतः यह आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देती है ।​
  • आर्थिक प्रभाव
    • प्रगतिशील कर प्रणाली में कर की दर आय बढ़ने के साथ बढ़ती है
    • जिससे धनी व्यक्ति अर्थव्यवस्था में उचित योगदान देते हैं और कम आय वाले वर्ग पर बोझ कम पड़ता है
    • भारत जैसे विकासशील देशों में यह नीति क्षेत्रीय असमानताओं को भी संबोधित करती है
    • क्योंकि एकत्र राजस्व ग्रामीण विकास या सब्सिडी पर खर्च किया जा सकता है
    • उदाहरणस्वरूप, वित्तीय वर्ष 2025-26 में उच्च आय पर सरचार्ज बढ़ाने से सरकारी खजाने में वृद्धि हुई
    • जो कल्याणकारी कार्यक्रमों को मजबूत कर रही है ।​
  • सामाजिक लाभ
    • इससे सामाजिक न्याय सुनिश्चित होता है
    • क्योंकि उच्च आय वर्ग की अतिरिक्त कमाई पर अधिक कर लगाकर गरीबी उन्मूलन और समान अवसर प्रदान किए जाते हैं
    • लंबे समय में यह आर्थिक विकास को गति देती है
    • क्योंकि बेहतर सार्वजनिक सेवाएं समग्र उत्पादकता बढ़ाती हैं
    • हालांकि, वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, कर वृद्धि से कभी-कभी व्यावसायिक निवेश प्रभावित हो सकता है
    • लेकिन भारत में उच्च आयकरदाताओं की संख्या बढ़ रही है, जो इसकी प्रभावशीलता दर्शाता है ।​
  • संभावित चुनौतियां
    • कुछ आलोचकों का मानना है कि अत्यधिक कर वृद्धि से पूंजी प्रवाह या काला धन विदेश भाग सकता है
    • लेकिन प्रगतिशील ढांचा इसे नियंत्रित रखता है
    • कुल मिलाकर, यह नीति आय असमानता के जिन्नी कोसिफिशिएंट को कम करने का प्रभावी साधन है
    • जैसा कि विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है । भारत में हालिया आंकड़ों से पता चलता है
    • 2025 तक उच्च आय वालों की हिस्सेदारी बढ़ी है, जो कर संग्रह को मजबूत कर रही है

14. राष्ट्रीय आय की गणना करते समय, निवासियों द्वारा उनके विदेश दौरों के दौरान किए गए व्यय को किस घटक में जोड़ा जाएगा? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) निजी अंतिम उपभोग व्यय
Solution:
  • राष्ट्रीय आय की गणना करते समय, निवासियों द्वारा उनके विदेश दौरों के दौरान किए गए व्यय को निजी अंतिम उपभोग व्यय में जोड़ा जाएगा।
  • व्यय-विधि का आधार
    • व्यय-विधि में राष्ट्रीय आय की गणना एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) में अर्थव्यवस्था में होने वाले कुल अंतिम व्ययों के योग से की जाती है। सूत्र इस प्रकार है:
    • GDP (बाजार मूल्य पर) = C + I + G + (X - M)
    • यहाँ C निजी अंतिम उपभोग व्यय I
    • सकल घरेलू पूंजी निर्माण (निवेश), G सरकारी अंतिम उपभोग व्यय, X निर्यात और M आयात है।
    • निवासियों के विदेशी दौरों पर व्यय को C के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है
    • क्योंकि यह घरेलू निवासियों द्वारा वस्तुओं व सेवाओं (जैसे होटल, भोजन, यात्रा) पर किया गया उपभोग है
    • भले ही यह विदेश में हो।​
  • निजी अंतिम उपभोग व्यय की परिभाषा
    • निजी अंतिम उपभोग व्यय से तात्पर्य घरेलू क्षेत्र (निवासी परिवारों, गैर-लाभकारी संस्थाओं) द्वारा स्वयं के उपयोग हेतु वस्तुओं व सेवाओं पर किया गया कुल व्यय है। इसमें शामिल हैं:
    • टिकाऊ वस्तुएँ (जैसे फर्नीचर, वाहन)
    • गैर-टिकाऊ वस्तुएँ (जैसे भोजन, कपड़े)
    • सेवाएँ (जैसे चिकित्सा, शिक्षा, परिवहन)
    • विदेश यात्राओं का व्यय (टिकट, आवास, मनोरंजन) इसी श्रेणी में आता है
    • क्योंकि यह निवासियों का व्यक्तिगत उपभोग दर्शाता है और GDP के व्यय पक्ष को प्रभावित करता है।
    • यह व्यय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का सबसे बड़ा घटक होता है
    • जो भारत जैसे विकासशील देशों में 50-60% तक योगदान देता है।​
  • अन्य घटकों से अंतर
    • सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (GFCE): केवल सरकारी खर्च जैसे रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य। इसमें निजी यात्राएँ शामिल नहीं।​
    • सकल घरेलू पूंजी निर्माण: उत्पादन के लिए मशीनरी, भवन आदि में निवेश। उपभोग व्यय इससे अलग।​
    • सकल विदेशी पूंजी निर्माण: विदेशी निवेश से पूंजीगत वृद्धि। यात्रा व्यय इससे असंबंधित।​
    • विदेशी पर्यटकों द्वारा भारत में किया गया व्यय तो निर्यात (X) में जुड़ता है
    • लेकिन निवासियों का विदेशी व्यय आयात (M) के रूप में घटाया जाता है, फिर भी PFCE में जोड़ा जाता है।​
  • GNP और समायोजन
    • GDP को GNP में परिवर्तित करने हेतु शुद्ध कारक आय से विदेश (NFIA) जोड़ी जाती है।
    • विदेशी व्यय PFCE के माध्यम से GDP को प्रभावित करता है
    • लेकिन NFIA में निवासियों की विदेशी आय घटाई जाती है।
    • उदाहरण: यदि कोई भारतीय विदेश में 1 लाख खर्च करता है
    • तो यह PFCE में जुड़ता है, लेकिन समग्र GNP सटीक रहता है।​
  • भारतीय संदर्भ में महत्व
    • भारत में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO, अब NSO) व्यय-विधि से GDP अनुमानित करता है।
    • 2024-25 के आंकड़ों में PFCE GDP का ~58% है, जिसमें यात्रा व्यय उल्लेखनीय है।
    • महामारी के बाद विदेश यात्राएँ बढ़ने से यह घटक प्रभावित हुआ।
    • सटीक गणना हेतु सर्वेक्षण (जैसे NSSO उपभोक्ता व्यय सर्वे) उपयोग होते हैं।​

15. दोहरी गणना के परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय आय ....... होती है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) अति-प्राक्कलित
Solution:
  • दोहरी गणना एक त्रुटि है, जो अतार्किक गणना के परिणामस्वरूप हुई है।
  • इस शब्द का उपयोग अर्थशास्त्र में किसी देश के सामान के मूल्य को एक से अधिक बार गिनने की दोषपूर्ण प्रथा का उल्लेख करने के लिए किया जाता है।
  • अर्थात इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय आय अति-प्राक्कलित होती है।
  • दोहरी गणना क्या है?
    • उदाहरणस्वरूप, यदि आटा (मध्यवर्ती वस्तु) और उसके से बनी रोटी (अंतिम वस्तु) दोनों का मूल्य जोड़ा जाए
    • तो आटे का मूल्य दो बार गिना जाता है, जो गलत है
    • इससे राष्ट्रीय आय का अनुमानित मूल्य वास्तविक से अधिक हो जाता है
    • क्योंकि अर्थव्यवस्था में मूल्य संचय (value addition) ही वास्तविक योगदान होता है ।​
  • इसका राष्ट्रीय आय पर प्रभाव
    • राष्ट्रीय आय (जैसे सकल घरेलू उत्पाद या GDP) देश के निवासियों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के शुद्ध मूल्य पर आधारित होती है।
    • दोहरी गणना से यह अति-अनुमानित (overestimated) हो जाती है
    • जिससे आर्थिक विकास का गलत चित्रण होता है। इससे नीति-निर्माण प्रभावित होता है
    • जैसे गलत तुलना या संसाधन आवंटन
    • दादाभाई नौरोजी जैसे प्रारंभिक अर्थशास्त्रियों ने भी राष्ट्रीय आय अनुमान में इस समस्या का सामना किया था ।​
  • दोहरी गणना से बचाव के उपाय
    • अंतिम उत्पाद विधि: केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य जोड़ें, मध्यवर्ती को नजरअंदाज करें।
    • मूल्य संचय विधि: प्रत्येक चरण में उत्पादक द्वारा जोड़े गए मूल्य (value added) की गणना करें
    • जैसे किसान से मिल मिलर तक।
    • उत्पाद, आय और व्यय विधियों का संतुलित उपयोग, जहां दोहरी गणना की जांच हो ।​​
    • ये विधियां सुनिश्चित करती हैं कि राष्ट्रीय आय सटीक रहे
    • जैसे सकल राष्ट्रीय आय (GNI) = GDP + विदेशी आय - विदेशी निवासियों की घरेलू आय ।​
  • उदाहरण से समझें
    • मान लीजिए एक साइकिल बनाने में टायर (₹100) और साइकिल (₹500) दोनों का मूल्य जोड़ा जाए।
    • दोहरी गणना से कुल ₹600, लेकिन वास्तविक योगदान केवल ₹400 (साइकिल का मूल्य जिसमें टायर शामिल)।
    • कपास और कपड़े का उत्पादन भी ऐसा ही उदाहरण है ।
    • भारत जैसे देशों में CSO (Central Statistics Office) इन विधियों से अनुमान लगाता है।​

16. तेंदुलकर विशेषज्ञ समूह (2009) के अनुसार, वर्ष 2011- 2012 के लिए, भारत में शहरी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय गरीबी रेखा प्रति व्यक्ति प्रति माह ....... तय की गई थी। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) 1,000 रु.
Solution:
  • तेंदुलकर समिति द्वारा वर्ष 2009 में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।
  • योजना आयोग ने गरीबी माप पद्धति का मूल्यांकन करने के लिए सुरेश तेंदुलकर की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था
  • जिसने अपनी रिपोर्ट में शहरी क्षेत्र में रह रहे परिवारों के संदर्भ में गरीबी रेखा का निर्धारण 1000 रु
  • प्रति व्यक्ति प्रतिमाह और ग्रामीण परिवारों के लिए 816 रु. प्रति व्यक्ति प्रतिमाह निर्धारित किया।
  • तेंदुलकर समिति का पृष्ठभूमि
    • जो गरीबी आकलन की पुरानी कैलोरी-आधारित विधि की समीक्षा के लिए था।
    • समिति ने 2009 में रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उपभोग व्यय (MPCE) को आधार बनाया गया
    • जिसमें भोजन के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, वस्त्र और स्थायी वस्तुओं को शामिल किया।
    • इससे गरीबी अनुमान अधिक वास्तविक हुए।​
  • 2011-12 की गरीबी रेखा
    • 2011-12 के लिए तेंदुलकर पद्धति के तहत अखिल भारतीय गरीबी रेखा इस प्रकार निर्धारित हुई:
    • ग्रामीण क्षेत्र: प्रति व्यक्ति प्रति माह 816 रुपये।
    • शहरी क्षेत्र: प्रति व्यक्ति प्रति माह 1000 रुपये।
    • यह रेखा मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) पर आधारित थी
    • जो NSSO के 68वें दौर सर्वेक्षण से ली गई। योजना आयोग ने जुलाई 2013 में इन्हें आधिकारिक रूप से अपनाया।​
  • गरीबी अनुपात और प्रभाव
    • इस पद्धति से 2011-12 में गरीबी अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों में 25.7%
    • शहरी में 13.7% और अखिल भारतीय स्तर पर 21.9% आंका गया
    • जो 269 मिलियन लोगों को गरीब रेखा से नीचे दिखाता है।
    • पुरानी लकड़ावाला पद्धति से यह अनुपात अधिक था
    • लेकिन तेंदुलकर ने इसे संशोधित कर वास्तविकता के निकट लाया।
    • यह अभी भी भारत के आधिकारिक गरीबी अनुमानों का आधार है।​
  • अन्य समितियों से तुलना
    • रंगराजन समिति (2014) ने इसे संशोधित कर ग्रामीण के लिए 972 रुपये और शहरी के लिए 1407 रुपये सुझाए
    • लेकिन तेंदुलकर ही 2011-12 का मानक रहा।
    • अलघ समिति जैसी पुरानी विधियां केवल कैलोरी (ग्रामीण: 2400 kcal, शहरी: 2100 kcal) पर केंद्रित थीं।​

17. ....... को किसी देश में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य के रूप में जाना जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) राष्ट्रीय आय
Solution:
  • राष्ट्रीय आय किसी अर्थव्यवस्था द्वारा उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को दर्शाती है।
  • सकल घरेलू उत्पाद क्या है?
    • सकल घरेलू उत्पाद (GDP) एक निश्चित समयावधि, आमतौर पर एक वर्ष या एक तिमाही
    • किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के अंदर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है।
    • अंतिम वस्तुएं वे होती हैं जो उपभोक्ता सीधे उपयोग करते हैं
    • उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली मध्यवर्ती वस्तुएं, ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके।
    • यह माप किसी देश के आर्थिक विकास, उत्पादकता और जीवन स्तर का प्रमुख सूचक है।​
  • GDP की गणना के तरीके
    • GDP की गणना तीन मुख्य विधियों से की जाती है, जो सैद्धांतिक रूप से एक ही परिणाम देती हैं।
    • उत्पादन विधि: विभिन्न क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा) में मूल्य-वर्धन को जोड़कर कुल उत्पादन निकाला जाता है।
    • मूल्य-वर्धन उत्पादन मूल्य और मध्यवर्ती खपत के बीच का अंतर होता है।​
    • आय विधि: देश में उत्पन्न सभी आयों (वेतन, लाभ, ब्याज, किराया) को जोड़ा जाता है
    • aअप्रत्यक्ष कर जोड़कर और सब्सिडी घटाकर।​
    • व्यय विधि: कुल व्यय = उपभोक्ता व्यय (C) + निवेश (I) + सरकारी व्यय (G) + शुद्ध निर्यात (X - M)। यह सबसे आम विधि है।​
  • GDP के प्रकार
    • GDP को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है।
    • नॉमिनल GDP: वर्तमान बाजार मूल्यों पर गणना, मुद्रास्फीति प्रभावित।
    • रीयल GDP: आधार वर्ष के मूल्यों पर, मुद्रास्फीति समायोजित, वास्तविक विकास दर्शाता है।
    • GDP प्रति व्यक्ति: कुल GDP को जनसंख्या से विभाजित कर, जीवन स्तर मापता है।

18. राष्ट्रीय आय को मापने में बाजार मूल्य और कारक लागत के बीच का अंतर किसके चलते होता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) निवल अप्रत्यक्ष कर
Solution:
  • कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद को राष्ट्रीय आय कहा जाता है।
  • अतः कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NN{PC}) = बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP{MP})
  • (अप्रत्यक्ष कर उपदान) बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP{FC})
  • निवल अप्रत्यक्ष कर (निवल अप्रत्यक्ष कर - अप्रत्यक्ष कर उपदान)।
  • बाजार मूल्य की अवधारणा
    • बाजार मूल्य किसी वस्तु या सेवा का वह मूल्य है जो बाजार में वास्तविक लेन-देन के दौरान चुकाया जाता है।
    • इसमें उत्पादन कारकों को मिलने वाली कुल आय (जैसे मजदूरी, ब्याज, लाभ, किराया) के साथ-साथ अप्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं
    • लेकिन सब्सिडी को घटाया नहीं जाता। उदाहरण के लिए
    • यदि किसी वस्तु का उत्पादन कारकों को 100 रुपये की लागत पर होता है
    • उस पर 20 रुपये का अप्रत्यक्ष कर लगता है, तो बाजार मूल्य 120 रुपये हो जाता है।
    • इस प्रकार, बाजार मूल्य हमेशा कारक लागत से अधिक होता है यदि शुद्ध अप्रत्यक्ष कर सकारात्मक हो।​​
  • कारक लागत की अवधारणा
    • कारक लागत उत्पादन के चारों साधनों (भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम) को उनके योगदान के आधार पर मिलने वाली शुद्ध आय को मापती है।
    • यह उत्पादन प्रक्रिया में वास्तविक रूप से उपयोग हुए संसाधनों की कुल लागत होती है
    • जिसमें अप्रत्यक्ष कर या सब्सिडी का प्रभाव नहीं शामिल होता।
    • सूत्र के अनुसार: कारक लागत = बाजार मूल्य - शुद्ध अप्रत्यक्ष कर।
    • राष्ट्रीय आय लेखांकन में, शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) को कारक लागत पर ही मापा जाता है
    • क्योंकि यह उत्पादन कारकों की वास्तविक आय को सटीक रूप से प्रतिबिंबित करता है।​
  • अंतर का गणितीय सूत्र
    • राष्ट्रीय आय के संदर्भ में अंतर को निम्न सूत्रों से स्पष्ट किया जा सकता है:
    • बाजार मूल्य पर NNP = कारक लागत पर NNP + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
    • कारक लागत पर NNP = बाजार मूल्य पर NNP - शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
    • जहां शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT) = अप्रत्यक्ष कर - सब्सिडी। यदि सब्सिडी अप्रत्यक्ष कर से अधिक हो
    • तो शुद्ध अप्रत्यक्ष कर ऋणात्मक होता है, जिससे बाजार मूल्य कारक लागत से कम हो सकता है।
    • यह अंतर राष्ट्रीय आय लेखांकन का आधारभूत सिद्धांत है
    • जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) की गणना में समायोजन के रूप में उपयोग होता है।​
  • अप्रत्यक्ष कर का प्रभाव
    • अप्रत्यक्ष कर उत्पादक या उपभोक्ता पर लगाए जाते हैं, लेकिन अंततः मूल्य में जुड़ जाते हैं।
    • जैसे, उत्पाद शुल्क या वैट बाजार मूल्य को बढ़ाते हैं
    • जबकि कारक लागत अपरिवर्तित रहती है। इससे उपभोक्ता अधिक भुगतान करता है
    • लेकिन उत्पादन कारकों को उनकी वास्तविक उत्पादकता के अनुसार ही भुगतान मिलता है।​
  • सब्सिडी का प्रभाव
    • सरकार द्वारा प्रदान की गई सब्सिडी (जैसे उर्वरक या बिजली पर अनुदान) बाजार मूल्य को कम करती है
    • लेकिन कारक लागत को प्रभावित नहीं करती। इसलिए, शुद्ध अप्रत्यक्ष कर की गणना में सब्सिडी घटाई जाती है।
    • यदि सब्सिडी अधिक हो, तो कारक लागत बाजार मूल्य से अधिक हो सकती है।​
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • मान लीजिए एक कारखाना 500 रुपये की कारक लागत पर वस्तु बनाता है।
    • अप्रत्यक्ष कर 100 रुपये और सब्सिडी 20 रुपये है। तब:
    • शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = 100 - 20 = 80 रुपये
    • बाजार मूल्य = 500 + 80 = 580 रुपये
    • अंतर = 80 रुपये (शुद्ध अप्रत्यक्ष कर के कारण)​
    • भारत में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) अब बाजार मूल्य पर GDP की गणना करता है
    • लेकिन राष्ट्रीय आय को कारक लागत पर समायोजित कर प्रस्तुत किया जाता है।​
  • महत्व और नीतिगत निहितार्थ
    • यह अंतर आर्थिक नीतियों के विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है
    • क्योंकि कारक लागत उत्पादकता को मापती है
    • जबकि बाजार मूल्य मुद्रास्फीति और कर नीतियों के प्रभाव को दर्शाता है।
    • राष्ट्रीय आय लेखांकन में इस समायोजन से वास्तविक आर्थिक विकास की सटीक तस्वीर मिलती है।​

19. राष्ट्रीय आय की गणना करते समय अप्रत्याशित अभिलाभ को गणना में शामिल नहीं किया जाता है, क्योंकि ....... I [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) उनसे जुड़ी कोई उत्पादक गतिविधि नहीं होती है
Solution:
  • राष्ट्रीय आय की गणना तीन अलग-अलग तकनीकों, उत्पाद विधि, आय विधि और व्यय विधि का उपयोग करके की जाती है।
  • राष्ट्रीय आय की गणना करते समय अप्रत्याशित अभिलाभ को गणना में शामिल नहीं किया जाता है
  • क्योंकि उनसे जुड़ी कोई उत्पादक गतिविधि नहीं होती है।
  • अप्रत्यशित लाभ का उदाहरण लॉटरी आदि से संबंधित आय है।
  • अप्रत्याशित अभिलाभ क्या हैं?
    • अप्रत्याशित अभिलाभ वे लाभ होते हैं
    • जो अप्रत्याशित घटनाओं जैसे प्राकृतिक आपदा के बाद संपत्ति मूल्य में वृद्धि, लॉटरी जीत, शेयर बाजार में अचानक उछाल या सट्टेबाजी से प्राप्त होते हैं।
    • ये लाभ नियमित उत्पादन, श्रम या पूंजी के उपयोग से उत्पन्न नहीं होते, बल्कि संयोग या बाहरी कारकों पर निर्भर होते हैं।
    • राष्ट्रीय आय लेखांकन में केवल वे आयें शामिल की जाती हैं जो अर्थव्यवस्था के उत्पादन चक्र (circular flow) से जुड़ी हों।​
  • उत्पादक गतिविधि से असंबंध
    • राष्ट्रीय आय (National Income) का मापन तीन मुख्य विधियों—उत्पाद विधि (Product Method), आय विधि (Income Method) और व्यय विधि (Expenditure Method)—से किया जाता है।
    • सभी विधियों में मूल सिद्धांत यही है कि केवल वर्तमान लेखा वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य शामिल हो।
    • अप्रत्याशित अभिलाभ उत्पादन के किसी चरण से जुड़े नहीं होते
    • इसलिए मूल्य वर्धन (Value Added) में इनका कोई योगदान नहीं।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि किसी की जमीन पर अचानक खनिज मिल जाए, तो यह लाभ उत्पादकता नहीं दर्शाता।​
  • दोहरी गिनती से बचाव
    • राष्ट्रीय आय गणना में दोहरी गिनती (double counting) एक प्रमुख समस्या है
    • जिसे अंतिम वस्तुओं के मूल्य पर ध्यान केंद्रित करके रोका जाता है।
    • अप्रत्याशित अभिलाभ को शामिल करने से पुरानी संपत्तियों का मूल्य दोबारा गिना जा सकता है
    • जो अर्थव्यवस्था की वर्तमान उत्पादक क्षमता को विकृत कर देगा।
    • जैसे पुरानी वस्तुओं के विक्रय को भी इसी कारण बाहर रखा जाता है, वैसे ही ये अभिलाभ बहिष्कृत होते हैं।​​
  • अन्य बहिष्कृत मदें
    • अप्रत्याशित अभिलाभ के अलावा राष्ट्रीय आय से बाहर रखी जाने वाली अन्य मदें हैं:
    • पुरानी वस्तुओं का विक्रय, क्योंकि उनका मूल्य पहले ही गिना जा चुका होता है।
    • गैर-उत्पादक गतिविधियाँ जैसे घरेलू सेवाएँ (स्वयं के लिए) या अवैध आय (तस्करी, जुआ)।
    • हस्तांतरण भुगतान (transfer payments) जैसे पेंशन, दान या बेरोजगारी भत्ता, क्योंकि ये उत्पादन से उत्पन्न नहीं होते।​​
  • नीतिगत महत्व
    • इस बहिष्कार से राष्ट्रीय आय सटीक रूप से अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता, रोजगार सृजन और विकास दर को प्रतिबिंबित करती है।
    • भारत जैसे विकासशील देशों में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) द्वारा GDP/NNP की गणना इसी सिद्धांत पर की जाती है
    • जो नीति-निर्माण के लिए आधार प्रदान करता है।
    • यदि अप्रत्याशित अभिलाभ शामिल हो जाएं
    • तो महंगाई, कर नीति या सब्सिडी जैसे क्षेत्रों में गलत आकलन हो सकता है।​

20. निम्नलिखित में से कौन-सी अवधारणा किसी देश के घरेलू क्षेत्र के भीतर मजदूरी, लाभ, किराया, व्याज आदि के रूप में कारक लागत पर उत्पादन के कारकों द्वारा अर्जित आय को संदर्भित करती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) कारक लागत पर निवल घरेलू उत्पाद
Solution:
  • कारक लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद किसी देश के घरेलू क्षेत्र के भीतर मजदूरी लाभ
  • किराया, ब्याज आदि के रूप में कारकों द्वारा अर्जित आय है।
  • इसकी गणना राष्ट्र की पूंजीगत संपत्तियों जैसे मशीनरी
  • आवास और वाहनों के मूल्यह्रास के मूल्य को जीडीपी से घटाकर की जाती है।
  • साधन लागत की परिभाषा
    • साधन लागत उत्पादन के चार प्रमुख कारकों
    • भूमि (किराया), श्रम (मजदूरी), पूँजी (व्याज) और उद्यमिता (लाभ)
    • उनके योगदान के लिए दिए गए पारिश्रमिक का योग है।
    • यह घरेलू अर्थव्यवस्था (घरेलू क्षेत्र) में होने वाले उत्पादन पर केंद्रित होती है
    • जिसमें अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य वर्धन शामिल है।
    • उदाहरणस्वरूप, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को साधन लागत पर (GDP at Factor Cost या GDPFC) मापा जाता है
    • जो बाजार मूल्य से अप्रत्यक्ष कर घटाकर और सब्सिडी जोड़कर प्राप्त होता है।​
  • साधन लागत बनाम अन्य मूल्यांकन
    • साधन लागत बाजार मूल्य (Market Price) से भिन्न है
    • क्योंकि बाजार मूल्य में अप्रत्यक्ष कर (जैसे उत्पाद शुल्क) जोड़े जाते हैं
    • सब्सिडी घटाई जाती है। मूल्य वर्धन विधि में साधन लागत कारकों की आय के रूप में प्रकट होती है
    • जबकि व्यय विधि में यह उपभोग, निवेश आदि के योग से जुड़ती है।
    • नेट घरेलू उत्पाद (NDP) को साधन लागत पर (NDPFC) चिह्नित किया जाता है
    • जो मूल्य ह्रास घटाकर GDPFC से निकाला जाता है।​
  • महत्व और उपयोग
    • साधन लागत आय वितरण का सटीक चित्रण प्रदान करती है
    • जो नीति-निर्माताओं को असमानता, रोजगार और विकास का आकलन करने में मदद करती है।
    • राष्ट्रीय आय लेखांकन में, यह आय विधि (Income Method) के माध्यम से गणना होती है
    • NDPFC = मजदूरी + किराया + व्याज + लाभ + मिश्रित आय।
    • भारत जैसे देशों में, केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) इसका उपयोग GDP अनुमान के लिए करता है।
    • यह उपभोक्ता मूल्यों के बजाय उत्पादकों की वास्तविक आय पर जोर देती है।​
  • संबंधित अवधारणाएँ
    • सकल घरेलू उत्पाद साधन लागत पर (GDPFC): घरेलू क्षेत्र में कारकों द्वारा अर्जित सकल आय।
    • राष्ट्रीय आय (NI): GDPFC में शुद्ध कारक आय से विदेश (NFIA) जोड़कर प्राप्त।
    • उत्पादन के कारक इन आयों के स्रोत हैं, जैसा कि NCERT अर्थशास्त्र में वर्णित है।
    • यह अवधारणा वैश्विक मानकों (SNA 2008) के अनुरूप है।​