राष्ट्रीय आय (अर्थव्यवस्था) (भाग-I)

Total Questions: 36

21. निम्नलिखित में से किसे राष्ट्रीय आय के अनुमान में शामिल नहीं किया जाएगा? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

(i) कारखाने द्वारा बिजली पर किया गया व्यय

(ii) भूकंप पीड़ितों को वित्तीय सहायता

(iii) स्व-उपभोग के लिए उत्पादन का आरोपित मूल्य

(iv) बॉण्ड की बिक्री पर दलाली

Correct Answer: (c) (i) और (ii) दोनों
Solution:
  • किसी भी देश की राष्ट्रीय आय का अर्थ है
  • किसी भी देश द्वारा अपने वित्तीय वर्ष के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य।
  • इसमें अवैध गतिविधियों से होने वाली आय शामिल नहीं है
  • पूंजीगत लाभ और हानि को भी राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता।
  • अर्थात कारखाने द्वारा बिजली पर किया गया व्यय और भूकंप पीडितों की वित्तीय सहायता को शामिल नहीं किया जाता।
  • राष्ट्रीय आय की अवधारणा
    • इसे आय विधि, उत्पादन विधि या व्यय विधि से गणना की जाती है
    • लेकिन केवल उत्पादक गतिविधियों को शामिल किया जाता है
    • दोहरी गणना से बचा जा सके। गैर-उत्पादक या हस्तांतरण प्रकृति के भुगतान इससे बाहर रखे जाते हैं
    • इसमें वेतन, लाभ, ब्याज, किराया जैसी साधन आयें शामिल होती हैं
    • जबकि सामाजिक सहायता या परिवारिक सेवाएँ नहीं ।​​
  • शामिल किए जाने वाले प्रमुख तत्व
    • राष्ट्रीय आय के अनुमान में निम्नलिखित को बाहर रखा जाता है:
    • हस्तांतरण भुगतान: पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, भूकंप पीड़ितों को वित्तीय सहायता आदि
    • क्योंकि ये उत्पादन के बदले नहीं होते ।​​
    • गृहिणी की सेवाएँ: घरेलू कामकाज बाजार मूल्य पर नहीं बिकते, इसलिए इन्हें शामिल करना कठिन होता है ।​
    • मध्यवर्ती वस्तुएँ: कच्चा माल या आधे बने उत्पाद, जो अंतिम वस्तु का हिस्सा बनते हैं
    • इन्हें अलग से गिनना दोहरी गणना कराता है ।​​
    • पुरानी वस्तुओं की बिक्री: मौजूदा संपत्तियों का हस्तांतरण नया उत्पादन नहीं दर्शाता ।​
    • गैर-बाजार सेवाएँ: परिवार के सदस्यों द्वारा एक-दूसरे को दी गई सेवाएँ, क्योंकि इनका मूल्यांकन संभव नहीं ।​
  • शामिल किए जाने वाले उदाहरण
    • इसके विपरीत, स्वयं उपभोग के लिए उत्पादन (जैसे किसान का自家 उपभोग अनाज), कारखाने का बिजली व्यय (मूल्य वृद्धि के रूप में), और बॉन्ड बिक्री पर दलाली (सेवा के रूप में) शामिल होते हैं
    • प्रस्तुत सेवाएँ (जैसे मकान मालिक का自家 किराया) को अनुमानित मूल्य पर जोड़ा जाता है ।​​
  • गणना के सिद्धांत
    • राष्ट्रीय आय में केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य शामिल होता है
    • जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या शुद्ध राष्ट्रीय आय (NDP) के रूप में व्यक्त किया जाता है।
    • स्थानांतरण भुगतान आय को स्थानांतरित करते हैं लेकिन नई आय सृजित नहीं करते
    • इसलिए इन्हें बाहर रखा जाता है । भारत में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) इन नियमों का पालन करता है।​

22. ....... द्वारा उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य सकल राष्ट्रीय उत्पाद है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) एक समयावधि में देश के निवासियों
Solution:
  • एक समयावधि में देश के निवासियों द्वारा उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य सकल राष्ट्रीय उत्पाद है।
  • सकल राष्ट्रीय उत्पाद की परिभाषा
    • सकल राष्ट्रीय उत्पाद देश के नागरिकों या निवासियों द्वारा निर्मित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य दर्शाता है
    • चाहे उत्पादन भारत जैसे देश की सीमा के अंदर हो या विदेश में।
    • इसमें डेप्रिशिएशन (पूंजी की हानि) को शामिल नहीं किया जाता
    • जो इसे निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) से अलग करता है।
    • GNP देश के निवासियों की कुल आय को मापता है, जिसमें विदेशी स्रोतों से प्राप्त कमाई भी जुड़ती है।​
  • GNP की गणना विधि
    • GNP की गणना सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से शुरू होती है
    • जिसमें देश के निवासियों द्वारा विदेश से अर्जित शुद्ध आय (Net Factor Income from Abroad - NFIA) जोड़ दी जाती है।
    • सूत्र इस प्रकार है: GNP = GDP + NFIA। उदाहरणस्वरूप, यदि भारतीय नागरिक विदेश में काम करके आय अर्जित करते हैं
    • तो वह GNP में जुड़ती है, लेकिन विदेशी नागरिकों की भारत से अर्जित आय कट जाती है।
    • यह विधि उत्पादन, निवेश, रोजगार और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों की जानकारी प्रदान करती है।​
  • GNP और GDP में अंतर
    • GDP देश की भौगोलिक सीमाओं के अंदर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य मापता है
    • जबकि GNP स्थान की परवाह किए बिना देश के निवासियों की आय पर केंद्रित होता है।
    • भारत जैसे विकासशील देशों में GNP अक्सर GDP से अधिक होता है
    • क्योंकि प्रवासी भारतीयों की विदेशी कमाई महत्वपूर्ण होती है।
    • GNP सरकार को नीतियां बनाने में मदद करता है, जैसे आर्थिक विकास योजनाएं और निवेश प्रोत्साहन।​
  • GNP का महत्व
    • GNP देश की समग्र आर्थिक स्थिति का सटीक संकेतक है
    • जो वैश्विक व्यापार, विदेशी निवेश और राष्ट्रीय आय को प्रतिबिंबित करता है।
    • यह नीति-निर्माताओं को आर्थिक विकास, मुद्रास्फीति नियंत्रण और रोजगार सृजन के लिए डेटा उपलब्ध कराता है।
    • उदाहरण के लिए, यदि किसी देश के पास विदेशी उत्पादन इकाइयां हैं
    • तो उनका मूल्य GNP में जुड़ता है, जो आर्थिक शक्ति का विस्तृत चित्रण देता है।​

23. भारत में उत्पादित वस्तुओं को आयात से बचाने के लिए सरकार द्वारा अपनाए गए निम्नलिखित तरीकों पर विचार करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

(i) आयातित वस्तुओं पर भारी टैक्स लगाया जाता था।

(ii) देशी उपयोगकर्ता द्वारा किसी वस्तु के आयात की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई थी।

सही उत्तर का चयन करें।

Correct Answer: (c) (i) और (ii) दोनों सत्य हैं
Solution:
  • भारत में उत्पादित वस्तुओं को आयात से बचाने के लिए सरकार द्वारा कोटा (Quota) तथा टैरिफ (Tariff) का उपाय अपनाया जाता है
  • जिससे घरेलू उत्पाद के उपयोग को अपने ही देश के भीतर लोगों तक पहुंचाया जा सके।
  • इसके लिए सरकार आयातित वस्तुओं पर भारी टैक्स लगाकर कोटा निर्धारित कर आयात पर प्रतिबंध लगाती है
  • जिससे उन वस्तुओं का आयात न किया जाए जिसका उत्पादन देश में हुआ है।
  • आयात शुल्क (Tariffs)
    •  जिससे घरेलू उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं।
    • उदाहरण के लिए, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों पर उच्च कस्टम ड्यूटी लगाई जाती है
    • स्थानीय निर्माता सुरक्षित रहें। ये शुल्क राजस्व भी उत्पन्न करते हैं और विदेशी प्रतिस्पर्धा को सीमित करते हैं।​
  • आयात कोटा (Quotas)
    • सरकार किसी वस्तु के आयात की अधिकतम मात्रा तय करती है
    • जैसे घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए सीमित आयात अनुमति।
    • इससे बाजार में घरेलू उत्पादों का हिस्सा सुनिश्चित होता है।
    • रसायन, मशीनरी और कुछ उपभोक्ता वस्तुओं पर कोटा प्रणाली का उपयोग किया जाता है।​
  • एंटी-डंपिंग उपाय
    • सस्ते आयात (डंपिंग) से बचाने के लिए एंटी-डंपिंग शुल्क लगाए जाते हैं
    • खासकर चीन जैसे देशों से स्टील या रसायनों पर।
    • डीजीटीआर जैसी एजेंसियां जांच कर अतिरिक्त शुल्क लगाती हैं।​
  • गैर-शुल्क बाधाएं (NTBs)
    • कठोर गुणवत्ता मानक, लाइसेंसिंग और तकनीकी नियम आयात को मुश्किल बनाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, खराब या निम्न गुणवत्ता वाली वस्तुओं पर सीआरएमएस के तहत जोखिम-आधारित जांच।
    • पर्यावरण और सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर आयात रोका जाता है।​
  • सब्सिडी और प्रोत्साहन
    • घरेलू उत्पादकों को सब्सिडी, कर छूट या कम ब्याज ऋण देकर लागत कम की जाती है।
    • PLI योजना के तहत मोबाइल, फार्मा जैसे क्षेत्रों में यह लागू है।
    • आयात प्रतिस्थापन नीति से घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाता है।​
  • आयात प्रतिबंध और नकारात्मक सूची
    • कुछ वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध, जैसे सैन्य उपकरण (आर्टिलरी, राइफल्स) या हानिकारक रसायन।
    • 2020 से 400+ पूंजीगत वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाकर आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • 1991 पूर्व उच्च शुल्क (150-300%) और लाइसेंस राज से संरक्षण मिला
    • लेकिन उदारीकरण के बाद भी रणनीतिक क्षेत्रों में जारी।
    • हाल में रूस तेल आयात विविधता के बावजूद घरेलू उद्योग सुरक्षा बरकरार।​

24. ....... से प्राप्त ब्याज एक कारक आय है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) पूंजी
Solution:
  • कारक आय, आय का वह प्रवाह है, जो उत्पादन के कारकों से प्राप्त होता है।
  • जैसे-भूमि के उपयोग पर प्राप्त कारक आय को लगान (Rent) कहा जाता है।
  • पूंजी से ब्याज प्राप्त होता है, मजदूर को वेतन तथा साहसी को लाभ प्राप्त होता है। अतः पूंजी से प्राप्त ब्याज कारक आय है।
  • कारक आय का अवधारणा
    • उत्पादन प्रक्रिया में पूँजी एक आवश्यक कारक है
    • जो मशीनरी, उपकरण, भवन और तरल धन जैसे रूपों में उपयोग होता है।
    • पूँजी पर लगने वाला ब्याज उसका प्राकृतिक प्रतिफल माना जाता है
    • क्योंकि पूँजी को उत्पादन में प्रयुक्त करने के बदले मालिक को जोखिम उठाने और अवसर लागत सहने के लिए ब्याज मिलता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि कोई व्यक्ति अपनी बचत को बैंक में जमा करता है या ऋण देता है
    • तो उसे प्राप्त होने वाला ब्याज पूँजी कारक आय है।​
    • यह आय राष्ट्रीय आय लेखांकन में कारक आधार पर वर्गीकृत होती है
    • जहाँ कुल राष्ट्रीय आय को भूमि (क्राया), श्रम (वेतन), पूँजी (ब्याज) और उद्यमी (लाभ) में विभाजित किया जाता है।
    • भारत जैसे विकासशील देशों में पूँजी संचय बढ़ाने के लिए ब्याज दरें आर्थिक नीति का हिस्सा होती हैं।​
  • ब्याज के प्रकार
    • ब्याज मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है: साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज।
    • साधारण ब्याज केवल मूलधन पर लगता है, जबकि चक्रवृद्धि ब्याज पिछले ब्याज को मूलधन में जोड़कर गणना करता है।
    • वित्तीय संस्थाएँ, जैसे बैंक, जमा पर ब्याज आय प्रदान करती हैं
    • जो जमा करने वाले के लिए पूँजी कारक आय बन जाती है।​
    • कर प्रणाली में भी प्राप्त ब्याज को "आय से ब्याज" शीर्षक के अंतर्गत कर योग्य आय माना जाता है।
    • आयकर अधिनियम के तहत बैंक जमा, बॉन्ड, या सावधि निक्षेप से प्राप्त ब्याज पूरी तरह कर योग्य होता है
    • सिवाय कुछ छूट जैसे PPF या सुकन्या समृद्धि योजना के।
  • आर्थिक महत्व
    • ब्याज पूँजी गठन को प्रोत्साहित करता है, क्योंकि उच्च ब्याज दरें बचत बढ़ाती हैं
    • निवेश को प्रभावित करती हैं।
    • ब्याज कवरेज रेशियो (ICR) जैसी वित्तीय मेट्रिक्स कंपनियों की ब्याज भुगतान क्षमता मापती हैं
    • जहाँ ICR = EBIT / ब्याज व्यय। यदि ICR 1.5 से अधिक हो, तो कंपनी वित्तीय रूप से स्थिर मानी जाती है।​
    • मौद्रिक नीति में भारतीय रिज़र्व बैंक ब्याज दरों (रेपो रेट) के माध्यम से मुद्रास्फीति नियंत्रित करता है।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), ब्याज दरें आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए समायोजित होती रहती हैं।
  • गणना उदाहरण
    • मान लीजिए ₹1,00,000 का मूलधन 5% वार्षिक साधारण ब्याज पर 3 वर्ष के लिए जमा है।
    • ब्याज = P × R × T / 100 = 100000 × 5 × 3 / 100 = ₹15,000। यह ₹15,000 पूँजी कारक आय है।
    • चक्रवृद्धि ब्याज के लिए सूत्र A = P(1 + r/n)^(nt), जहाँ n चक्र संख्या है।​
  • कराधान और नियोजन
    • भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए स्लैब के अनुसार ब्याज आय कुल आय में जुड़ती है।
    • वरिष्ठ नागरिकों को ₹50,000 तक की छूट मिलती है।
    • टैक्स बचाने हेतु ELSS या NSC जैसे विकल्प उपयोगी हैं। TDS भी 10% से अधिक ब्याज पर कटता है।

25. निम्नलिखित में से कौन-सा समीकरण व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय को उचित तरीके से मापता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) Y = C + I + G + X - M
Solution:
  • व्यय विधि राष्ट्रीय आय की गणना करने की विधियों में से एक है। राष्ट्रीय आय के लिए व्यय विधि का सूत्र है
  • Y = C + I G + X - M जहां उपभोक्ता व्यय को C से, निवेश को I
  •  सरकारी व्यय को G से, निर्यात को X से और आयात को M से दर्शाया जाता है।
  • व्यय विधि की मूल अवधारणा
    • राष्ट्रीय आय लेखांकन में तीन मुख्य विधियाँ हैं: उत्पादन विधि, आय विधि तथा व्यय विधि।
    • व्यय विधि अर्थव्यवस्था के निपटान चरण पर केंद्रित होती है
    • जहाँ उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं पर होने वाले कुल व्यय को जोड़ा जाता है।
    • यह विधि मानती है कि कोई भी आय या तो उपभोग पर खर्च होती है
    • बचत के रूप में निवेश में परिवर्तित हो जाती है, जिससे कुल व्यय उत्पादन के बराबर हो जाता है।​
    • भारत जैसे देशों में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) द्वारा इसी समीकरण का उपयोग GDP अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।
    • यह बाजार मूल्य पर आधारित होता है तथा मध्यवर्ती व्यय को बाहर रखता है ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके।​
  • समीकरण के घटक
    • C (निजी उपभोक्ता व्यय): घरों द्वारा टिकाऊ वस्तुओं (जैसे फ्रिज), अटिकाऊ वस्तुओं (जैसे भोजन) एवं सेवाओं (जैसे चिकित्सा) पर खर्च।
    • यह GDP का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 60%) होता है।
    • निजी निवेश व्यय): व्यवसायों द्वारा पूँजीगत वस्तुओं (मशीनरी), भंडार संचय एवं आवासीय निर्माण पर व्यय।
    • इसमें मूल्य ह्रास (घिसावट) शामिल नहीं होता।
    • G (सरकारी व्यय): केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा अंतिम वस्तुओं-सेवाओं एवं पूँजीगत परियोजनाओं पर व्यय
    • जिसमें सब्सिडी शामिल नहीं होती।
    • (X - M) (शुद्ध निर्यात): निर्यात मूल्य से आयात मूल्य घटाकर प्राप्त।
    • यदि आयात अधिक हो तो यह ऋणात्मक होता है।​
    • यह समीकरण सकल घरेलू उत्पाद (GDP at market price) को मापता है।
    • शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP) के लिए घिसावट घटाई जाती है।
  • भारतीय संदर्भ में महत्व
    • वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का GDP व्यय विधि से ₹350 लाख करोड़ से अधिक अनुमानित है
    • जिसमें C का योगदान 58%, I का 32% है।
    • NSO (राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय) द्वारा तिमाही आधार पर यह गणना की जाती है।
    • COVID-19 के बाद G एवं I में वृद्धि से पुनरुद्धार हुआ।
    • मौद्रिक नीति में RBI इस डेटा का उपयोग ब्याज दरें तय करने हेतु करता है।​
  • सीमाएँ और सावधानियाँ
    • काला धन या अनौपचारिक क्षेत्र का व्यय शामिल नहीं।
    • निर्यात-आयात डेटा में त्रुटि संभव।
    • मुद्रास्फीति समायोजन हेतु स्थिर मूल्य (constant prices) पर गणना आवश्यक।

26. दिए गए मूल्य पर विचार करें तथा निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दें- [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

बाजार मूल्य पर जी.डी.पी. 15,50,113 करोड़ रु. अप्रत्यक्ष कर = 1,75,386 करोड़ रु.

सब्सिडी = 38,504 रु.

विदेश से शुद्ध कारक आय (-) 38,504 रु.

साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद का मूल्य क्या होगा?

Correct Answer: (a) 14,13,231 रु.
Solution:
  • साधन लागत जी.डी.पी. पर (GDP) बाजार कीमत पर जी.डी.पी. (GDP) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT)
  • शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT) अप्रत्यक्ष कर
  • सब्सिडी साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद
  • = 1550113-(175386-38504)
  • = 1550113-136882
  • = 1413231 करोड़ रुपये
  • मूल्य की परिभाषा
    • मूल्य वे मूलभूत मान्यताएँ हैं जो व्यक्ति के दृष्टिकोण, कार्यों और व्यवहारों का मार्गदर्शन करती हैं।
    • ये आदर्श व्यवहार का चिरस्थायी भाव प्रदान करते हैं तथा यह तय करने में सहायक होते हैं
    • हमारे लिए क्या महत्वपूर्ण है। प्रशासन या व्यक्तिगत जीवन में अखंडता, निष्पक्षता, पारदर्शिता जैसे मूल्य प्रमुख हैं।​
  • प्रशासन में मूल्यों की भूमिका
    • शासन व्यवस्था में मूल्य जैसे सत्यनिष्ठा, तटस्थता, जवाबदेहिता और वस्तुनिष्ठता निर्णय प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, नोलन समिति ने वस्तुनिष्ठता को शासन का सर्वोच्च मूल्य माना है
    • जो पूर्वाग्रह रहित निर्णय सुनिश्चित करता है। ये मूल्य सुशासन को मजबूत करते हैं तथा जनता के प्रति समर्पण बढ़ाते हैं।​
  • उदाहरण: गणना आधारित प्रश्न
    • एक सामान्य प्रश्न लें - "वर्ष 2000 में मिस्टर X ने कितनी कमाई की?" यदि कथन 1: 2003 में 7000 रुपये कमाई हुई
    • जो 2000 की तुलना में 10% अधिक। कथन 2: पत्नी ने आधी कमाई की तथा कुल 9000 रुपये।
    • दोनों कथन अलग-अलग पर्याप्त हैं
    • क्योंकि कथन 1 से 2000 की कमाई = 7000 × (10/11) = 6363.64 रुपये
    • कथन 2 से X की कमाई = 9000 × (2/3) = 6000 रुपये।​
  • निष्कर्ष बिंदु
    • यदि विशिष्ट मूल्य या प्रश्न प्रदान करें, तो सटीक उत्तर दिया जा सकता है।
    • मूल्य-आधारित प्रश्न तर्क, नैतिकता या गणना पर केंद्रित होते हैं।​

27. यदि सांकेतिक जीडीपी 1,800 रु. है और वास्तविक जीडीपी 1,000 रु. है। जीडीपी अवस्फीतिक का मान क्या होगा ? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 180%
Solution:
  • जीडीपी अवस्फीतिक कारक
  • = (सांकेतिक जीडीपी/वास्तविक जीडीपी) × 100
  • = (1800/1000)×100
  • = 180%
  • गणना सूत्र
    • जीडीपी अवस्फीतिक की गणना निम्नलिखित सूत्र से की जाती है:
    • जीडीपी अवस्फीतिक = (सांकेतिक जीडीपी / वास्तविक जीडीपी) × 100​
    • दिए गए मानों के साथ: सांकेतिक जीडीपी = 1,800 रु., वास्तविक जीडीपी = 1,000 रु.
    • इसलिए, जीडीपी अवस्फीतिक = (1,800 / 1,000) × 100 = 1.8 × 100 = 180%​
    • यह 180% का मान दर्शाता है कि वर्तमान कीमतें आधार वर्ष की तुलना में 80% अधिक हैं।
  • अवधारणा की व्याख्या
    • सांकेतिक (नाममात्र) जीडीपी वर्तमान बाजार मूल्यों पर आधारित होती है
    • जिसमें मुद्रास्फीति का प्रभाव शामिल होता है
    • जबकि वास्तविक जीडीपी आधार वर्ष की स्थिर कीमतों पर उत्पादन मात्रा को मापती है।​
    • अवस्फीतिक का उपयोग अर्थव्यवस्था में मूल्य वृद्धि को समायोजित करने के लिए होता है
    • जो नीति-निर्माताओं को वास्तविक विकास दर समझने में मदद करता है।​
    • 100 से कम मान डिफ्लेशन (मूल्य ह्रास) का संकेत देता है, जबकि 100 से अधिक मुद्रास्फीति दर्शाता है।
  • व्यावहारिक महत्व
    • यह सूचकांक CPI या WPI से भिन्न है
    • क्योंकि यह अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों (उपभोक्ता वस्तुएं, निवेश, निर्यात आदि) को कवर करता है।​
    • उदाहरणस्वरूप, यदि अवस्फीतिक 180% है
    • तो नाममात्र विकास को वास्तविक विकास में परिवर्तित करने के लिए इसे विभाजित करें
    • वास्तविक विकास ≈ नाममात्र विकास / (अवस्फीतिक / 100)।​
    • भारत जैसे देशों में, RBI और सरकार तिमाही जीडीपी अनुमानों के साथ इसका उपयोग करती है।

28. निम्नलिखित में से अप्रत्यक्ष कर का उदाहरण कौन-सा है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) सीमा शुल्क
Solution:
  • सीमा शुल्क एक अप्रत्यक्ष कर है, जो सरकार द्वारा वस्तुओं के आयात और निर्यात पर लगाया जाता है।
  • अप्रत्यक्ष कर वे कर हैं जो वस्तुओं और सेवाओं की खरीद-बिक्री या उत्पादन पर लगाए जाते हैं
  • जिनका बोझ अंततः उपभोक्ता पर पड़ता है। भारत में GST इसका प्रमुख उदाहरण है।​
  • अप्रत्यक्ष कर की परिभाषा
    • अप्रत्यक्ष कर वह कर होता है जो सीधे करदाता से न लेकर व्यापारियों या उत्पादकों द्वारा एकत्र किया जाता है
    • वस्तुओं की कीमत में मिलाकर उपभोक्ता से वसूला जाता है।
    • ये कर उत्पादन, वितरण या उपभोग के चरणों पर लगते हैं, जैसे जीएसटी, सीमा शुल्क या उत्पाद शुल्क।
    • प्रत्यक्ष करों (जैसे आयकर) से भिन्न, अप्रत्यक्ष कर हस्तांतरणीय होते हैं
    • क्योंकि इन्हें व्यवसाय अपनी बिक्री मूल्य में जोड़ देते हैं।​
  • प्रमुख उदाहरण
    • भारत में अप्रत्यक्ष करों के मुख्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
    • वस्तु एवं सेवा कर (GST): 1 जुलाई 2017 से लागू
    • यह कई पुराने करों (जैसे उत्पाद शुल्क, वैट, सेवा कर) को एकीकृत करता है और अंतिम उपभोक्ता पर लगता है।​
    • सीमा शुल्क (Customs Duty): आयात-निर्यात वस्तुओं पर लगने वाला कर, जो घरेलू उद्योगों की रक्षा करता है।​
    • उत्पाद शुल्क (Excise Duty): विनिर्माण पर लगता था
    • अब GST में विलय, सिवाय पेट्रोलियम और शराब के।​
    • अन्य: बिक्री कर, सेवा कर, स्टांप ड्यूटी, टोल टैक्स।​

29. किसी अर्थव्यवस्था में यदि कारक लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद 10,000 करोड़ रु. है, मूल्यह्रास 250 करोड़ रु. है, विदेशों से शुद्ध कारक आय 500 करोड़ रु. है, तो राष्ट्रीय आय का मान क्या है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 9,250 करोड़ रु.
Solution:
  • बाजार कीमतों पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP{MP})
  • बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP{MP}) - हास
  • 10,000 करोड़ रु. - 250 करोड़ रु. = 9,750 करोड़ रु
  • चूंकि अर्थव्यवस्था में किसी भी प्रकार का अप्रत्यक्ष कर या सब्सिडी नहीं है
  • तो बाजार कीमतों पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद ही राष्ट्रीय आय का मान होगा।
  • प्रमुख अवधारणाएँ
    • सकल राष्ट्रीय उत्पाद कारक लागत पर (GNP_FC) वह कुल मूल्य है
    • जो अर्थव्यवस्था में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कारकों (मजदूरी, ब्याज, लाभ, लगान) को प्राप्त होने वाला मूल्य दर्शाता है।
    • मूल्यह्रास (Depreciation) पूंजीगत वस्तुओं के उपयोग से होने वाले घर्षण को दर्शाता है
    • जिसे घटाने पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) मिलता है।
    • विदेशों से शुद्ध कारक आय (NFIA) वह अतिरिक्त आय है
    • जो देश के निवासियों को विदेश से प्राप्त होती है या विदेशियों को दिए जाने के बाद शेष रहती है।​
  • गणना सूत्र
    • राष्ट्रीय आय (National Income या NNP at Factor Cost) का सूत्र निम्नलिखित है:
    • राष्ट्रीय आय = GNP at Factor Cost - मूल्यह्रास + NFIA
    • यहाँ NFIA सकारात्मक होने पर जोड़ा जाता है।
    • यह सूत्र राष्ट्रीय आय लेखांकन की मानक अवधारणा पर आधारित है
    • जहाँ सकल से निवल रूपांतरण मूल्यह्रास घटाने से होता है।​
  • चरणबद्ध गणना
    • दिए गए आंकड़े लागू करते हुए:
    • GNP at Factor Cost = 10,000 करोड़ रुपये
    • मूल्यह्रास घटाएँ: 10,000 - 250 = 9,750 करोड़ रुपये (यह NNP at Factor Cost का प्रारंभिक मान है
    • यदि NFIA शून्य हो)
    • NFIA जोड़ें: 9,750 + 500 = 10,250 करोड़ रुपये
    • इस प्रकार, राष्ट्रीय आय का मान 10,250 करोड़ रुपये है।
    • यह गणना कारक लागत पर आधारित है
    • जो बाजार मूल्य से परोक्ष कर घटाकर और सब्सिडी जोड़कर प्राप्त होती है
    • लेकिन यहाँ पहले से कारक लागत दिया गया है।​
  • संबंधित संबंध
    • यदि GNP बाजार मूल्य पर होता
    • तो राष्ट्रीय आय = GNP_MP - मूल्यह्रास - शुद्ध अप्रत्यक्ष कर + NFIA होता।
    • यहाँ कारक लागत होने से सीधा समायोजन पर्याप्त है।
    • उदाहरणस्वरूप, समान समस्याओं में NFIA को हमेशा NNP_FC में सम्मिलित किया जाता है।​

30. यदि कारक लागत पर एन.डी.पी. = 1,050 करोड़ रु. सब्सिडी = 40 करोड़ रु. विदेश से शुद्ध कारक आय = 10 करोड़ रु. है, तो कारक लागत पर एन.एन.पी. कितना है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 1,060 करोड़ रु.
Solution:
  • NNP{FC} = NDP{FC} + विदेश से शुद्ध कारक आय
  • = 1050 करोड़ रु. + 10 करोड़ रु.
  • = 1060 करोड़ रुपये
  • मुख्य सूत्र
    • राष्ट्रीय आय लेखांकन में कारक लागत पर एनएनपी निम्न सूत्र से निकाला जाता है
    • एनएनपी (कारक लागत पर) = एनडीपी (कारक लागत पर) + विदेश से शुद्ध कारक आय (NFIA)
    • यह सूत्र मानक है क्योंकि एनडीपी घरेलू उत्पादन को दर्शाता है
    • जबकि एनएनपी में विदेशी आय को शामिल किया जाता है।
    • सब्सिडी बाजार मूल्य और कारक लागत के बीच अंतर से संबंधित होती है
    • लेकिन चूंकि दोनों मानक पहले से कारक लागत पर हैं
    • इसलिए इसे समायोजित करने की आवश्यकता नहीं।​
  • गणना चरणबद्ध तरीके से
    • चरण 1: दी गई एनडीपी (कारक लागत पर) = 1,050 करोड़ रुपये।
    • चरण 2: विदेश से शुद्ध कारक आय (NFIA) = 10 करोड़ रुपये।
    • चरण 3: एनएनपी = 1,050 + 10 = 1,060 करोड़ रुपये।
    • सब्सिडी (40 करोड़) यहां अप्रासंगिक है
    • क्योंकि यह अप्रत्यक्ष करों या सब्सिडी के समायोजन के लिए होती है
    • जो पहले से कारक लागत मान में शामिल माने जाते हैं।​
  • संबंधित अवधारणाएँ
    • एनडीपी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से मूल्यह्रास घटाकर प्राप्त होता है
    • घरेलू सीमा तक सीमित रहता है। एनएनपी में NFIA जोड़ने से यह राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित हो जाता है।​
    • यदि NFIA ऋणात्मक होता, तो घटाया जाता।
    • कारक लागत का अर्थ है उत्पादन कारकों (भूमि, श्रम, पूँजी, संगठन) की आय का योग, बिना अप्रत्यक्ष कर या सब्सिडी के।​
  • व्यावहारिक महत्व
    • यह गणना भारत जैसे विकासशील देशों में राष्ट्रीय आय लेखांकन के लिए महत्वपूर्ण है
    • जहाँ विदेशी आय (रिमिटेंस) अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।
    • एनएनपी राष्ट्रीय आय (National Income) के समान ही है।​