राष्ट्रीय आय (अर्थव्यवस्था) (भाग-I)

Total Questions: 36

1. कीमतों के कुछ स्थिर मूल्यों पर गणना की गई जीडीपी को ....... कहा जाता है। [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) वास्तविक जीडीपी
Solution:
  • सकल घरेलू उत्पाद (GDP) मुख्यतः दो प्रकार का होता है
  • (1) नॉमिनल GDP, (2) वास्तविक GDP। ध्यातव्य है
  • स्थिर मूल्यों पर व्यक्त सभी वस्तुओं और सेवाओं की गणना को वास्तविक GDP कहा जाता है।
  • वास्तविक जीडीपी की परिभाषा
    • वास्तविक जीडीपी किसी निश्चित आधार वर्ष की स्थिर कीमतों
    • उपयोग करके देश की अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को मापती है।
    • आधार वर्ष (जैसे भारत में वर्तमान में 2011-12) की कीमतें स्थिर रखी जाती हैं
    • मूल्य वृद्धि या कमी का प्रभाव समाप्त हो जाए।
    • इससे आर्थिक वृद्धि का वास्तविक आकलन संभव होता है, न कि केवल कीमतों में बदलाव से प्रभावित।​
  • नाममात्र जीडीपी से अंतर
    • नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) वर्तमान बाजार कीमतों पर गणना की जाती है
    • जिसमें मुद्रास्फीति शामिल होती है, जबकि वास्तविक जीडीपी स्थिर कीमतों पर आधारित होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि नाममात्र जीडीपी 10% बढ़े लेकिन मुद्रास्फीति 7% हो
    • तो वास्तविक जीडीपी केवल 3% बढ़ेगी। यह अंतर आर्थिक नीति निर्माण में महत्वपूर्ण है।​
  • गणना विधि
    • वास्तविक जीडीपी की गणना का सूत्र है: वास्तविक जीडीपी = नाममात्र जीडीपी / जीडीपी अपस्फीतिकारक।
    • अपस्फीतिकारक मुद्रास्फीति को मापता है और आधार वर्ष को 100 मानकर गणना होती है।
    • भारत में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (MoSPI) यह आंकड़े जारी करता है
    • जैसे 2024-25 की पहली तिमाही में स्थिर मूल्यों पर वृद्धि दर।​
  • महत्व और उपयोग
    • वास्तविक जीडीपी समय के साथ आर्थिक विकास की सटीक तुलना करने
    • नीतिगत निर्णय लेने और अंतरराष्ट्रीय तुलना के लिए उपयोगी है।
    • यह रोजगार सृजन, उत्पादकता और जीवन स्तर में वृद्धि को बेहतर प्रतिबिंबित करती है।
    • हालांकि, इसमें पर्यावरणीय क्षति या असमानता जैसे कारकों को शामिल नहीं किया जाता।​
  • भारतीय संदर्भ में उदाहरण
    • भारत में 2011-12 आधार वर्ष पर वास्तविक जीडीपी गणना होती है।
    • 2025-26 में जारी आंकड़ों के अनुसार, तीसरे क्षेत्र ने स्थिर मूल्यों पर मजबूत वृद्धि दिखाई।
    • यह दीर्घकालिक रुझानों का विश्लेषण करने में सहायक है।​

2. उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के वार्षिक मूल्य की गणना करने के लिए उपयोग की जाने वाली उत्पाद विधि को ....... भी कहा जाता है। [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) मूल्यवर्धित विधि
Solution:
  • मूल्यवर्धित विधि, उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के वार्षिक मूल्य की गणना करने हेतु उपयोग की जाने वाली उत्पाद विधि को कहा जाता है।
  • मूल्य वर्धित विधि की परिभाषा
    • द्वारा उत्पादन प्रक्रिया में जोड़े गए सकल मूल्य का योग करके जीडीपी मापती है।
    • इसमें प्रत्येक चरण में मध्यवर्ती वस्तुओं की लागत घटाकर शुद्ध मूल्य वर्धन निकाला जाता है
    • ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके।
    • भारत जैसे विकासशील देशों में यह विधि कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों के योगदान को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।​
  • गणना का सूत्र और प्रक्रिया
    • जीडीपी = सभी क्षेत्रों का सकल मूल्य वर्धन।
    • सकल मूल्य वर्धन = कुल उत्पादन मूल्य - मध्यवर्ती खपत।
    • उदाहरण के लिए, यदि गेहूं की खेती से ₹100 का उत्पादन हो और बीज-खाद पर ₹40 खर्च हो
    • तो मूल्य वर्धन ₹60 होगा।
    • केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (MoSPI) विभिन्न क्षेत्रों के आंकड़ों को एकत्र कर तिमाही और वार्षिक आधार पर यह गणना करता है।​
  • महत्व और सीमाएं
    • यह विधि आर्थिक संरचना का विश्लेषण करने, उत्पादकता मापन और नीति निर्माण में सहायक है
    • विशेषकर भारत में जहां सेवा क्षेत्र 55% से अधिक योगदान देता है।
    • हालांकि, अनौपचारिक क्षेत्र के आंकड़े अनुमानित होते हैं और पर्यावरणीय क्षति को शामिल नहीं करती।
    • 2025-26 के आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि इस विधि से ही स्पष्ट हुई।​
  • भारतीय संदर्भ में उपयोग
    • भारत में 2011-12 आधार वर्ष पर यह गणना होती है।
    • राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) दिशानिर्देश जारी करता है।
    • हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में उत्पाद विधि से जीडीपी वृद्धि 6.7% रही।
    • यह विधि आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों की प्रगति मापने में महत्वपूर्ण है।​

3. राष्ट्रीय आय के मापन की उत्पाद विधि में, हमें ....... के लिए मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को घटाना होगा। [MTS (T-I) 04 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) दुहरी गणना को दूर करने
Solution:
  • किसी भी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य राष्ट्रीय आय कहलाता है।
  • ध्यातव्य है कि राष्ट्रीय आय के मापन की उत्पाद विधि में हमें दुहरी गणना को दूर करने के लिए मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को घटाना होता है।
  • उत्पाद विधि का आधार
    • उत्पाद विधि राष्ट्रीय आय की गणना के तीन प्रमुख तरीकों में से एक है
    • जिसमें अर्थव्यवस्था के सभी उत्पादन क्षेत्रों (जैसे कृषि, उद्योग, सेवा) द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य का योग किया जाता है।
    • मूल सूत्र है: राष्ट्रीय आय = उत्पादों का कुल मौद्रिक मूल्य - मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य।
    • मध्यवर्ती वस्तुएँ वे होती हैं जो उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग की जाती हैं और अंतिम उत्पाद का हिस्सा बनती हैं
    • जैसे कच्चा माल, ईंधन या अर्ध-निर्मित सामान। उदाहरणस्वरूप, यदि एक कारखाना ₹100 की कार बनाता है
    • जिसमें ₹70 का कच्चा माल (मध्यवर्ती वस्तु) खर्च होता है, तो मूल्य वृद्धि केवल ₹30 ही मानी जाएगी।​​
  • मध्यवर्ती वस्तुओं को घटाने का कारण
    • मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को घटाने का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था में होने वाली दोहरी गणना को रोकना है।
    • यदि हम अंतिम उत्पाद (जैसे रोटी) के साथ-साथ उसमें प्रयुक्त आटा, गेहूँ आदि मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य भी अलग से जोड़ दें
    • तो कुल राष्ट्रीय आय का आँकड़ा अतिरंजित हो जाएगा।
    • इससे बचने के लिए मूल्य वृद्धि विधि (Value Added Method) अपनाई जाती है
    • जहाँ प्रत्येक उत्पादन इकाई द्वारा सृजित नई वैल्यू (आउटपुट मूल्य - इनपुट मूल्य) को जोड़ा जाता है।
    • जीडीपी की गणना का फॉर्मूला इस प्रकार है
    • जीडीपी (बाजार मूल्य पर) = बिक्री मूल्य + स्टॉक में परिवर्तन - मध्यवर्ती खपत।​
  • गणना का चरणबद्ध तरीका
    • उत्पाद विधि में गणना निम्न चरणों में की जाती है:
    • चरण 1: सभी क्षेत्रों के कुल उत्पादन मूल्य (Gross Output) का योग।
    • चरण 2: मध्यवर्ती वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य को घटाना।
    • चरण 3: शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (Net Indirect Taxes) को समायोजित करना यदि बाजार मूल्य से आधार मूल्य पर जाना हो।
    • चरण 4: मूल्यह्रास (Depreciation) घटाकर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP) प्राप्त करना।
    • उदाहरण: मान लीजिए एक बेकरी में गेहूँ ₹50 में खरीदा जाता है (मध्यवर्ती), जिससे ₹100 की रोटियाँ बनाई जाती हैं।
    • कुल मूल्य वृद्धि = ₹100 - ₹50 = ₹50।
    • पूरे उद्योग स्तर पर सभी इकाइयों की ऐसी वैल्यू जोड़कर राष्ट्रीय आय निकाली जाती है।​​

4. राष्ट्रीय आय लेखांकन में अंतिम और मध्यवर्ती वस्तुओं/सेवाओं के बीच अंतर करना क्यों महत्वपूर्ण है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) यह आर्थिक विकास और उत्पादकता की अधिक सटीक माप करने में सहायता करता है।
Solution:
  • किसी भी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का कुल मूल्य राष्ट्रीय आय कहलाता है।
  • इसके लेखांकन में अंतिम और मध्यवर्ती वस्तुओं और सेवाओं के बीच अंतर करना इसलिए महत्वपूर्ण होता है
  • क्योंकि यह आर्थिक विकास और उत्पादकता की अधिक सटीक माप करने में सहायता करता है।
  • अंतिम और मध्यवर्ती वस्तुओं की परिभाषा
    • अंतिम वस्तुएं या सेवाएं वे होती हैं जो सीधे उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय या निर्यात के लिए उपयोग की जाती हैं
    • इन्हें अन्य वस्तुओं के उत्पादन में इनपुट के रूप में नहीं इस्तेमाल किया जाता।
    • उदाहरणस्वरूप, एक ब्रेड उपभोक्ता द्वारा खरीदी गई अंतिम वस्तु है
    • जबकि आटा जो बेकरी में ब्रेड बनाने के लिए उपयोग होता है, मध्यवर्ती वस्तु है।
    • मध्यवर्ती वस्तुएं उत्पादन प्रक्रिया के दौरान अन्य वस्तुओं के निर्माण में खपत हो जाती हैं।​​
  • दोहरी गणना की समस्या
    • यदि मध्यवर्ती वस्तुओं को भी राष्ट्रीय आय में शामिल कर लिया जाए
    • तो एक ही आर्थिक मूल्य को बार-बार गिना जाएगा, जिससे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का मूल्यांकन गलत हो जाता है।
    • मान लीजिए किसान गेहूं (₹100) बेचता है, मिलर आटा (₹150) बनाकर बेकर को बेचता है
    • बेकर ब्रेड (₹200) उपभोक्ता को बेचता है; यदि सभी को जोड़ा जाए तो कुल ₹450 हो जाएगा
    • लेकिन वास्तविक मूल्य संवर्धन केवल ₹100 है। इसलिए केवल अंतिम वस्तु (ब्रेड) का मूल्य ही गिना जाता है।​​
  • सटीक आर्थिक मापन
    • केवल अंतिम वस्तुओं को शामिल करके राष्ट्रीय आय लेखांकन देश के वास्तविक उत्पादन, उत्पादकता
    • आर्थिक विकास की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है।
    • यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP), सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) और निवल राष्ट्रीय आय (NNI) जैसे प्रमुख संकेतकों की सही गणना सुनिश्चित करता है।
    • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (System of National Accounts - SNA) में यह एक मूलभूत सिद्धांत है।​
  • नीति निर्माण में भूमिका
    • यह भेदभाव नीति निर्माताओं को आर्थिक वृद्धि, क्षेत्रीय योगदान और उत्पादकता का सही आकलन करने में मदद करता है
    • जिससे बेहतर नियोजन संभव होता है।
    • उदाहरण के लिए, विभिन्न क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा) के बीच मूल्य संवर्धन को ट्रैक करने से संसाधन आवंटन सुधरता है।
    • साथ ही, यह उपभोक्ता मांग और बाजार परिवर्तनों को समझने में सहायक होता है।​
  • मूल्य संवर्धन का तरीका
    • दोहरी गणना से बचने का वैकल्पिक तरीका मूल्य संवर्धन (value added) की गणना है
    • जहां प्रत्येक उत्पादन चरण में जुड़े मूल्य को जोड़ा जाता है।
    • हालांकि, अंतिम वस्तु विधि सरल और मानक है, जो वैश्विक तुलना को आसान बनाती है।
    • भारत जैसे देशों में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) इस सिद्धांत का पालन करता है।​

5. निम्नलिखित में से किसे 'कागजी कर' कहा जाता है? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (I-पाली)]

I. धन कर

II. उपहार कर

Correct Answer: (c) I और II दोनों
Solution:
  • ऐसे कर जिनसे राजस्व के संग्रह नहीं होते कागजी कर कहे जाते हैं जैसे-धन कर, संपत्ति कर और उपहार कर आदि।
  • उपहार कर को 'कागजी कर' कहा जाता है।
    • भारतीय कर व्यवस्था में 'कागजी कर' (Paper Tax) उन करों को कहा जाता है
    • जो कानून पर कागजों पर मौजूद हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से इन्हें लागू करना बहुत कठिन होता है
    • जिससे इनसे राजस्व वसूली न्यूनतम रहती है।
    • मुख्य रूप से उपहार कर (Gift Tax) को इस श्रेणी में रखा जाता है
    • क्योंकि संपत्ति हस्तांतरण को ट्रैक करना और कर वसूलना चुनौतीपूर्ण होता है।​
  • कागजी कर का अर्थ
    • कागजी कर वे होते हैं जो केवल कागजी महत्व रखते हैं
    • लेकिन वास्तविक संग्रह में विफल रहते हैं।
    • उपहार कर एक व्यक्ति द्वारा दूसरे को बिना प्रतिफल के संपत्ति देने पर लगता है
    • जो दाता पर लागू होता है।
    • संपत्ति कर (Property Tax) और संपदा कर (Estate Duty) को भी कभी-कभी कागजी कर कहा जाता है
    • क्योंकि इनका मूल्यांकन जटिल होता है और कर चोरी आसान।​
  • उपहार कर का इतिहास
    • भारत में उपहार कर अधिनियम 1958 में लागू हुआ था, लेकिन 1998 में इसे समाप्त कर दिया गया।
    • अब आयकर अधिनियम 1961 की धारा 56(2) के तहत गैर-रिश्तेदारों से 50,000 रुपये से अधिक के उपहार कर योग्य होते हैं।
    • विवाह या रिश्तेदारों से उपहार कर-मुक्त रहते हैं।​
  • अन्य कागजी कर
    • संपत्ति कर: नेट वर्थ (नकदी, अचल संपत्ति, निवेश) पर लगता है, लेकिन मूल्यांकन कठिन होने से बचा जाता है।
    • संपदा कर: मृत्यु पर संपत्ति हस्तांतरण पर, लेकिन इसे भी 1985 में समाप्त किया गया।
    • ये कर व्यापक रूप से लागू नहीं होते, क्योंकि करदाता अपतटीय खाते या गलत दस्तावेजीकरण से बचते हैं।​
  • महत्व और प्रभाव
    • कागजी कर कर प्रणाली की कमजोरियों को दर्शाते हैं
    • जहां कानून सख्त लेकिन प्रवर्तन कमजोर। इससे सरकार का राजस्व प्रभावित होता है
    • लेकिन वित्तीय योजना में इनका विचार आवश्यक है।​

6. वैयक्तिक आय (personal income) के संबंध में प्रयोज्य आय (disposable income) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सत्य है? [MTS (T-I) 14 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) प्रयोज्य आय हमेशा वैयक्तिक आय से कम होती है।
Solution:
  • किसी व्यक्ति की मजदूरी, निवेश उद्यमों और अन्य उपक्रमों से प्राप्त आय को वैयक्तिक आय कहा जाता है।
  • ध्यातव्य है कि व्यक्तिगत करों के भुगतान के पश्चात लोगों के पास बची आय को प्रयोज्य आय कहा जाता है।
  • प्रयोज्य आय हमेशा वैयक्तिक आय से कम होती है।
  • वैयक्तिक आय की परिभाषा
    • वैयक्तिक आय वह कुल आय है जो किसी व्यक्ति या परिवार को सभी स्रोतों—जैसे वेतन, बोनस, पेंशन, निवेश आय आदि
    • प्राप्त होती है, इससे पहले कि कोई कर कटौती हो।
    • यह आय कर भुगतान से पूर्व की स्थिति को दर्शाती है।
    • राष्ट्रीय खातों में इसे राष्ट्रीय आय से कुछ समायोजन (जैसे अप्रत्यक्ष कर जोड़ना और स्थानांतरण भुगतान घटाना) के बाद निकाला जाता है।​
  • प्रयोज्य आय की गणना
    • प्रयोज्य आय की गणना का सरल सूत्र है
    • प्रयोज्य आय = वैयक्तिक आय - प्रत्यक्ष कर।
    • कुछ स्रोतों में इसे थोड़ा विस्तार देते हुए वैयक्तिक आय - प्रत्यक्ष कर + उपभोग व्यय + बचत भी कहा गया है
    • लेकिन मूल रूप से कर कटौती ही मुख्य अंतर है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि वैयक्तिक आय 10,000 रुपये है
    • 2,000 रुपये, तो प्रयोज्य आय 8,000 रुपये होगी।
    • यह राशि घरेलू उपभोग, बचत या अन्य खर्चों के लिए उपलब्ध होती है।​
  • प्रयोज्य आय हमेशा कम क्यों?
    • चूंकि प्रत्यक्ष कर (आयकर आदि) हमेशा शून्य या धनात्मक होते हैं
    • प्रयोज्य आय वैयक्तिक आय से कभी अधिक नहीं हो सकती।
    • यदि कर शून्य हो, तो दोनों बराबर होंगी, लेकिन सामान्यतः कर कटौती के कारण प्रयोज्य आय कम रहती है।
    • यह आर्थिक सिद्धांत सभी विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (जैसे भारत, अमेरिका) में लागू होता है।​
  • आर्थिक महत्व
    • प्रयोज्य आय उपभोक्ता मांग, बचत दर और समग्र आर्थिक स्वास्थ्य का प्रमुख संकेतक है।
    • अर्थशास्त्री इसका उपयोग अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करने के लिए करते हैं
    • क्योंकि यह वास्तविक खर्च करने योग्य राशि बताती है।
    • भारत जैसे देशों में राष्ट्रीय आय लेखांकन में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।​

7. जब किसी अर्थव्यवस्था की 'सीमा पार आर्थिक गतिविधियों (trans-boundary economic activities)' और मूल्यह्रास पर विचार किया जाता है, तो समग्र आकलन (aggregate measure) को ....... के रूप में जाना जाता है। [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) GNP
Solution:
  • उपर्युक्त प्रश्न के समग्र आकलन को GNP के रूप में जाना जाता है।
  • सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) किसी देश की अर्थव्यवस्था में एक वित्तीय वर्ष के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य के योग को कहा जाता है।
  • GNP की परिभाषा
    • चाहे उत्पादन देश के अंदर हो या बाहर। यह GDP (Gross Domestic Product) से भिन्न है
    • क्योंकि GDP केवल देश की भौगोलिक सीमाओं के अंदर की उत्पादन गतिविधियों को मापता है
    • जबकि GNP सीमा पार गतिविधियों को शामिल करता है। उदाहरण के लिए
    • यदि कोई भारतीय नागरिक अमेरिका में काम करके आय अर्जित करता है, तो वह GNP में जुड़ती है।​
  • सीमा पार गतिविधियों का समावेश
    • 'Trans-boundary economic activities' से तात्पर्य शुद्ध कारक आय विदेशों से है
    • जिसमें विदेशी निवेश से प्राप्त लाभ, मजदूरी, ब्याज और लाभांश आदि शामिल होते हैं।
    • GNP की गणना का सूत्र है: GNP = GDP + NFIA।
    • इससे देश के निवासियों की कुल उत्पादकता का सटीक आकलन होता है
    • भले ही वे सीमाओं के बाहर सक्रिय हों।
    • भारत जैसे विकासशील देशों में प्रवासी भारतीयों की आय GNP को GDP से अधिक बनाती है।​
  • मूल्यह्रास का विचार
    • मूल्यह्रास पूंजीगत वस्तुओं (जैसे मशीनरी) के उपयोग से होने वाली ह्रास को दर्शाता है।
    • GNP मूल्यह्रास को घटाने से पहले का सकल माप है
    • जबकि इसे घटाने पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) प्राप्त होता है।
    • प्रश्न में "विचार किया जाता है" का अर्थ है कि मूल्यह्रास को सकल स्तर पर शामिल रखा जाता है
    • अर्थात् GNP ही सही उत्तर है। NNP में मूल्यह्रास घटाया जाता है।​
  • आर्थिक महत्व
    • GNP देश की आर्थिक शक्ति का वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करता है
    • विशेषकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों और प्रवासियों वाले देशों के लिए।
    • आधुनिक समय में (2026 तक) अधिकांश देश GDP पर जोर देते हैं
    • लेकिन GNP सीमा पार गतिविधियों के कारण प्रासंगिक बना रहता है।
    • उदाहरणस्वरूप, अमेरिका का GNP उसके विदेशी निवेशों को प्रतिबिंबित करता है।​

8. वैयक्तिक आय के संबंध में अंतरण भुगतान के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सत्य है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अंतरण भुगतान वैयक्तिक आय में शामिल है।
Solution:
  • वैयक्तिक आय = राष्ट्रीय आय - अवितरित लाभ - परिवारों द्वारा की गई निवल ब्याज अदायगी निगम कर + सरकार और फर्मों से परिवारों को की गई अंतरण भुगतान ।
  • अतः अंतरण भुगतान वैयक्तिक आय में शामिल है।
  • वैयक्तिक आय की परिभाषा
    • वैयक्तिक आय (Personal Income) वह कुल आय है जो किसी देश के व्यक्तियों और परिवारों को वास्तव में प्राप्त होती है
    • जिसमें मजदूरी, वेतन, ब्याज, लाभांश, किराया और सरकारी हस्तांतरण शामिल होते हैं।
    • यह राष्ट्रीय आय (National Income) का एक व्युत्पन्न है
    • लेकिन इसमें उत्पादन कारकों से अर्जित आय के अलावा गैर-उत्पादक स्रोतों से प्राप्त धन भी जोड़ा जाता है।
    • वैयक्तिक आय व्यक्तियों की क्रय शक्ति को मापती है और कर भुगतान से पहले की कुल प्राप्ति दर्शाती है।​
  • अंतरण भुगतान क्या हैं?
    • अंतरण भुगतान (Transfer Payments) वे भुगतान हैं जिनमें कोई वस्तु या सेवा का बदला नहीं मिलता
    • जैसे पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, सामाजिक सुरक्षा लाभ, छात्रवृत्ति या कल्याणकारी योजनाओं के तहत सरकारी सहायता।
    • ये भुगतान मुख्य रूप से सरकार द्वारा आय के पुनर्वितरण के लिए किए जाते हैं
    • ताकि गरीबी कम हो और सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो।
    • राष्ट्रीय आय में ये शामिल नहीं होते क्योंकि ये उत्पादन का हिस्सा नहीं हैं
    • लेकिन वैयक्तिक आय में इन्हें जोड़ा जाता है क्योंकि ये व्यक्तियों की वास्तविक प्राप्ति बढ़ाते हैं।​
  • वैयक्तिक आय की गणना सूत्र
    • वैयक्तिक आय की गणना निम्न सूत्र से की जाती है:
    • वैयक्तिक आय = राष्ट्रीय आय - कॉर्पोरेट कर - अवितरित लाभ - सामाजिक सुरक्षा योगदान + अंतरण भुगतान।
    • कॉर्पोरेट कर और अवितरित लाभ घटाए जाते हैं क्योंकि ये व्यक्तियों तक नहीं पहुंचते।
    • अंतरण भुगतान जोड़े जाते हैं क्योंकि ये अतिरिक्त आय प्रदान करते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि राष्ट्रीय आय ₹100 है
    • कॉर्पोरेट कर ₹10, अवितरित लाभ ₹10, सामाजिक सुरक्षा कटौती ₹10 और अंतरण भुगतान ₹30, तो वैयक्तिक आय ₹100 ।​​
  • क्यों सत्य है कि अंतरण भुगतान वैयक्तिक आय में शामिल होते हैं?
    • राष्ट्रीय आय उत्पादन-आधारित होती है, जबकि वैयक्तिक आय प्राप्ति-आधारित।
    • अंतरण भुगतान जोड़ने से वैयक्तिक आय अधिक यथार्थवादी बनती है
    • जो उपभोग व्यय का सही अनुमान लगाने में सहायक है।
    • भारत जैसे देशों में, जहां सरकारी योजनाएं (जैसे MNREGA, PM-KISAN) व्यापक हैं
    • ये भुगतान वैयक्तिक आय का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
    • इन्हें शामिल न करने से आय वितरण का सही चित्रण नहीं हो पाता।​
  • अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
    • अंतरण भुगतान राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं होते, क्योंकि वे उत्पादन से जुड़े नहीं।
    • ये केवल व्यवसायों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यक्तियों को दिए जाते हैं।

9. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में एक डाक व्यवहार का मार्ग (Communication Mail Channel) है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) ग्रीन चैनल
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में ग्रीन चैनल भारत में एक डाक व्यवहार का मार्ग है।
  • इसके अतिरिक्त इसमें राजधानी चैनल, मेट्रो चैनल, बिजनेस चैनल, बल्क मेल चैनल तथा पीरिओडिकल (Periodical) चैनल भी शामिल किए जाते हैं।
  • प्रमुख मेल चैनल
    • भारतीय डाक विभाग ने बड़े कस्बों और शहरों में मेल की त्वरित डिलीवरी के लिए छह मुख्य चैनल शुरू किए है
    • जिनमें बल्क मेल चैनल (Bulk Mail Channel) सबसे प्रमुख है।
    • यह चैनल व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा भेजे जाने वाले बड़े पैमाने के मेल (जैसे बिल, सर्कुलर) के लिए समर्पित है
    • जो लागत प्रभावी दरों पर प्राथमिकता प्रसंस्करण और विश्वसनीय डिलीवरी प्रदान करता है।
    • अन्य चैनल हैं: राजधानी चैनल (राज्यों की राजधानियों के लिए), मेट्रो चैनल (महानगरों के लिए), ग्रीन चैनल (पर्यावरण-अनुकूल
    • मेल), बिजनेस चैनल (व्यापारिक मेल), पीरियाडिक चैनल (नियमित पत्रिकाओं के लिए)।​
  • बल्क मेल चैनल की विशेषताएं
    • बल्क मेल चैनल विशेष रूप से उच्च मात्रा वाले मेल के लिए विकसित किया गया है
    • जहां प्रेषक को न्यूनतम 5,000 पत्रों का बैच जमा करना होता है।
    • यह चैनल मेल को छंटाई (सॉर्टिंग) के बाद सीधे गंतव्य तक पहुंचाता है
    • जिससे डिलीवरी समय 2-3 दिनों तक कम हो जाता है।
    • इसमें ट्रैकिंग, विशेष हैंडलिंग और छूट प्राप्त दरें शामिल हैं, जो सामान्य मेल से 30-50% सस्ता पड़ता है।​
  • अन्य संचार मेल चैनल
    • स्टेट चैनल: राज्यों के भीतर मेल वितरण के लिए, जो बड़े कस्बों में त्वरित सेवा प्रदान करता है।
    • मेट्रो चैनल: दिल्ली, मुंबई जैसे मेट्रो शहरों के मेल के लिए समर्पित रूट।
    • ये चैनल डाक नेटवर्क को आधुनिक बनाते हैं
    • जो दुनिया का सबसे बड़ा है (1.55 लाख से अधिक डाकघर)।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारतीय डाक की स्थापना 1854 में हुई, और आधुनिक चैनल 2000 के दशक में शुरू हुए।
    • वर्तमान में, डिजिटल एकीकरण जैसे रजिस्ट्रेशन सॉर्टिंग कंप्यूटरीकरण और स्पीड पोस्ट के साथ ये चैनल लॉजिस्टिक पोस्ट जैसी सेवाओं का हिस्सा हैं।​

10. संतुलित बजट से आप क्या समझते हैं? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) व्यय राजस्व के बराबर
Solution:
  • जब सरकार जमा आय के बराबर राशि खर्च कर सकती है, तो इसे संतुलित बजट के रूप में जाना जाता है
  • जब व्यय राजस्व से अधिक होता है, तो उसे घाटा वाला बजट के रूप में जाना जाता है।
  • संतुलित बजट की परिभाषा
    • संतुलित बजट वह होता है
    • जब सरकार या किसी इकाई की अनुमानित प्राप्तियाँ (जैसे कर, शुल्क, ब्याज आय) उसके व्यय (वेतन, बुनियादी ढांचा, रक्षा, स्वास्थ्य आदि) के बराबर होती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि कुल राजस्व 100 करोड़ रुपये है
    • तो कुल खर्च भी ठीक 100 करोड़ ही रखा जाता है।
    • यह आदर्श स्थिति मानी जाती है क्योंकि इससे उधार लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।​
  • संतुलित बजट के घटक
    • इसमें दो मुख्य भाग होते हैं: राजस्व प्राप्तियाँ और व्यय।
    • प्राप्तियाँ में कर राजस्व, गैर-कर राजस्व (जैसे परिसंपत्ति बिक्री) शामिल होते हैं
    • जबकि व्यय विकासात्मक (बुनियादी ढांचा) और गैर-विकासात्मक (पेंशन, सब्सिडी) होते हैं।
    • सरकार इनका मिलान कर अनुशासित खर्च सुनिश्चित करती है।​
  • महत्व और लाभ
    • संतुलित बजट वित्तीय अनुशासन लाता है, फिजूलखर्ची रोकता है
    • अर्थव्यवस्था को मंदी-तेजी के चक्र से बचाता है।
    • यह सरकार को आवश्यक परियोजनाओं पर फोकस करने में मदद करता है
    • मुद्रा स्फीति नियंत्रित रखता है और सार्वजनिक ऋण कम करता है।
    • इसके अलावा, यह आर्थिक स्थिरता का प्रतीक है।​
  • हानियाँ और चुनौतियाँ
    • संतुलित बजट रखना व्यावहारिक रूप से कठिन है
    • क्योंकि आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में व्यय आय से अधिक बढ़ता है।
    • मंदी के समय विकास पर खर्च सीमित हो जाता है, नए कर लगाने पड़ सकते हैं
    • जो नागरिकों पर बोझ डालते हैं। यह लचीलेपन की कमी पैदा करता है।​
  • प्रकार और उदाहरण
    • पूर्ण संतुलित: आय=व्यय।
    • अधिशेष बजट: आय>व्यय (जैसे नॉर्वे का तेल राजस्व से)।
    • घाटे का बजट: व्यय>आय (भारत जैसे विकासशील देशों में सामान्य)।
    • भारत में संतुलित बजट दुर्लभ है
    • लेकिन 2025-26 के बजट में राजकोषीय घाटा कम करने के प्रयास दिखे।​
  • व्यावहारिक कार्यान्वयन
    • सरकार इसे बनाने के लिए कर वृद्धि, व्यय कटौती या परिसंपत्ति बिक्री अपनाती है।
    • व्यक्तिगत स्तर पर, मासिक आय-व्यय ट्रैकिंग से संतुलित बजट बनता है।
    • हालांकि, केयनेसियन अर्थशास्त्र घाटे वाले बजट को मंदी में बेहतर मानता है।​