राष्ट्रीय आय (अर्थव्यवस्था) (भाग-II)

Total Questions: 35

1. 2022 की स्थिति के अनुसार, भारत दुनिया की ....... सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैI नाममात्र जीडीपी (nominal GDP) द्वारा मापा गया। [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) पांचवीं
Solution:
  • वर्ष 2023 एवं वर्ष 2022 की स्थिति के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था नाममात्र जीडीपी के पैमाने पर विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था है।
  • प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ स्थान पर क्रमशः संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी हैं।
  • 2022 की रैंकिंग
    • लेकिन पूरे वर्ष के नाममात्र जीडीपी आंकड़ों के अनुसार यह पांचवें स्थान पर ही रहा।
    • IMF की सितंबर 2022 की रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को 854.7 अरब डॉलर आंका गया
    • जो ब्रिटेन (816 अरब डॉलर) से अधिक था, लेकिन जापान, जर्मनी, चीन और अमेरिका से पीछे था।
    • इससे भारत 11वें से लगातार ऊपर चढ़कर पांचवें पायदान पर स्थापित हुआ।​
  • नाममात्र जीडीपी का महत्व
    • नाममात्र जीडीपी वर्तमान बाजार मूल्यों पर देश की कुल आर्थिक उत्पादन को मापती है
    • बिना मुद्रास्फीति समायोजन के। 2022 में भारत की नाममात्र जीडीपी लगभग 3.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के आसपास थी
    • जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में 3.5% हिस्सेदारी दर्शाती थी।
    • इस रैंकिंग में अमेरिका पहले, चीन दूसरे, जापान तीसरे और जर्मनी चौथे स्थान पर थे।​
  • विकास के प्रमुख कारक
    • भारत की यह स्थिति बैंकिंग सुधारों, जीएसटी जैसे टैक्स बदलावों और डिजिटल भुगतान प्रणाली से मजबूत हुई।
    • 2022 में भारत की विकास दर 6.8% रही, जो चीन (3.2%) और अमेरिका (1.5%) से कहीं अधिक थी।
    • ये सुधार भ्रष्टाचार कम करने और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण में सहायक साबित हुए।

2. ....... की गणना किसी दिए गए वर्ष में नाममात्र जीडीपी (nominal GDP) को उसी वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी (real GDP) से विभाजित करके और इसे 100 से गुणा करके की जाती है। [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) जीडीपी अवस्फीतिक
Solution:
  • सकल घरेलू उत्पाद अवस्फीतिक (GDP Deflator) की गणना
  • किसी दिए गए वर्ष में नाममात्र जीडीपी को उसी वर्ष के वास्तविक जीडीपी से विभाजित करके
  • इसे 100 से गुणा करके की जाती है।
  • GDP Deflator = (Nominal GDP + Real GDP) × 100
  • जीडीपी अपस्फीतिकारक (GDP Deflator) की गणना
    • प्रश्न में वर्णित सूत्र के अनुसार, जीडीपी अपस्फीतिकारक (GDP Deflator) किसी दिए गए
    • वर्ष में नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) को उसी वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी (Real GDP) से विभाजित करके
    • इसे 100 से गुणा करके निकाला जाता है। यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक सूचकांक है
    • जो अर्थव्यवस्था में समग्र मूल्य स्तर के परिवर्तन (मुद्रास्फीति या अपस्फीति) को मापता है।​​
  • सूत्र और गणना विधि
    • जीडीपी अपस्फीतिकारक का मानक सूत्र निम्नलिखित है:
    • यहाँ, नाममात्र जीडीपी वर्तमान वर्ष की कीमतों पर कुल उत्पादन का मूल्य है
    • जबकि वास्तविक जीडीपी आधार वर्ष की स्थिर कीमतों पर मापा जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि किसी वर्ष नाममात्र जीडीपी 120 अरब रुपये और वास्तविक जीडीपी 100 अरब रुपये है
    • तो जीडीपी अपस्फीतिकारक = (120/100) × 100 = 120 होगा
    • जो दर्शाता है कि मूल्य स्तर आधार वर्ष से 20% अधिक है।​​
  • नाममात्र और वास्तविक जीडीपी में अंतर
    • नाममात्र जीडीपी वर्तमान बाजार मूल्यों पर आधारित होती है
    • जिसमें मुद्रास्फीति का प्रभाव शामिल होता है
    • जबकि वास्तविक जीडीपी मुद्रास्फीति के समायोजन के बाद शुद्ध उत्पादन वृद्धि दिखाती है।
    • अपस्फीतिकारक इन दोनों के बीच के मूल्य परिवर्तन को मापने का उपकरण है
    • जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से भिन्न है
    • क्योंकि यह पूरी अर्थव्यवस्था (वस्तुएँ और सेवाएँ दोनों) को कवर करता है।​
  • महत्व और उपयोग
    • यह सूचकांक नीति-निर्माताओं को मुद्रास्फीति नियंत्रण में मदद करता है
    • वास्तविक विकास दर की सटीक तुलना संभव बनाता है।
    • भारत जैसे देशों में, आधार वर्ष (जैसे 2011-12) बदलने पर यह पुनर्गणना की जाती है ताकि आर्थिक डेटा प्रासंगिक रहे।​

3. निम्नलिखित में से क्या घरेलू आय में शामिल नहीं है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) देश के बाहर अनिवासियों द्वारा अर्जित आय
Solution:
  • एक वित्तीय वर्ष की अवधि में किसी देश के घरेलू क्षेत्र के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं व सेवाओं की मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू आय कहते हैं।
  •  किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के अंदर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं से उत्पन्न कुल आय को दर्शाती है।
  • इसमें निवासियों और गैर-निवासियों दोनों द्वारा अर्जित आय शामिल होती है।​
  • घरेलू आय में शामिल तत्व
    • घरेलू आय में देश के अंदर उत्पादन गतिविधियों से होने वाली मजदूरी, ब्याज, लाभांश, किराया और लाभ जैसी कारक आयें शामिल हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, कोई विदेशी कंपनी भारत में उत्पादन करे तो वह आय घरेलू आय का हिस्सा बनेगी।
    • स्थानांतरण भुगतान (जैसे पेंशन या दान) भी उत्पादक गतिविधि न होने के कारण शामिल नहीं होते।​
  • घरेलू आय में शामिल नहीं
    • देश के बाहर अनिवासियों (non-residents) द्वारा अर्जित आय घरेलू आय में शामिल नहीं होती।
    • यह आय राष्ट्रीय आय (GNP) का हिस्सा हो सकती है, लेकिन GDP की गणना में बाहर रहती है
    • क्योंकि यह देश की सीमाओं के बाहर होती है।​

4. शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (Net National Product) क्या होता है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) सकल राष्ट्रीय उत्पाद और मूल्य ह्रास का अंतर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद होता है।
Solution:
  • किसी देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में से पूंजीगत वस्तुओं के मूल्य ह्रास को घटाने पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद प्राप्त होता है।
  • परिभाषा
    • शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद एक महत्वपूर्ण मैक्रोइकोनॉमिक संकेतक है
    • जो देश के निवासियों (व्यक्तियों और फर्मों) द्वारा घरेलू या विदेशी स्तर पर उत्पादित वस्तुओं व सेवाओं के शुद्ध मूल्य को मापता है।
    • मूल्यह्रास वह राशि है जो मशीनरी, भवनों आदि पूंजीगत संपत्तियों के घिसाव-टूट, अप्रचलन या अन्य कारणों से मूल्य में कमी को दर्शाती है।
    • कारक लागत (Factor Cost) पर या बाजार मूल्य (Market Price) पर गणना की जा सकती है
    • जहां राष्ट्रीय आय के रूप में जाना जाता है जब यह कारक लागत पर हो।​
  • गणना सूत्र
    • NNP की गणना सरल सूत्र से होती है:
    • NNP = GNP - मूल्यह्रास​
    • वैकल्पिक रूप से:
    • NNP = (अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का बाजार मूल्य) - मूल्यह्रास​
    • उदाहरणस्वरूप, यदि किसी देश का GNP 100 करोड़ रुपये है
    • मूल्यह्रास 10 करोड़ रुपये, तो NNP = 90 करोड़ रुपये होगा।
    • सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से NNP प्राप्त करने के लिए पहले GNP बनाएं (GDP + विदेश से शुद्ध आय), फिर मूल्यह्रास घटाएं।​
  • महत्व
    • NNP देश की आर्थिक सेहत का सटीक मापक है क्योंकि यह पूंजी के उपभोग को ध्यान में रखता है
    • जो GNP में शामिल नहीं होता।
    • यह प्रति व्यक्ति आय, मानव विकास सूचकांक आदि की गणना में उपयोगी है
    • नीति-निर्माण में सहायक होता है।
    • भारत जैसे विकासशील देशों में यह उत्पादकता की वास्तविक वृद्धि दिखाने में मदद करता है।​
  • उपयोग और सीमाएं
    • NNP का उपयोग आर्थिक नीतियों, बजट विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय तुलना में होता है।
    • हालांकि, यह गैर-मौद्रिक गतिविधियों (जैसे घरेलू काम), पर्यावरण क्षति या आय असमानता को नजरअंदाज करता है।
    • वर्तमान मूल्यों पर आधारित होने से मुद्रास्फीति प्रभावित हो सकता है
    • इसलिए वास्तविक NNP (स्थिर मूल्यों पर) अधिक विश्वसनीय है।​

5. 2011-12 के लिए राष्ट्रीय गरीबी रेखा का प्राक्कलन, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रति व्यक्ति प्रति माह ....... पर किया गया था। [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) रु. 816
Solution:
  • तेंदुलकर पद्धति का उपयोग करके वर्ष 2011-12 के लिए राष्ट्रीय गरीबी रेखा का प्राक्कलन
  • भारत के ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों के लिए प्रतिव्यक्ति प्रतिमाह क्रमशः 816 रुपये और 1000 रुपये पर किया गया था।
  • तेंदुलकर समिति की भूमिका
    • तेंदुलकर समिति का गठन 2005 में हुआ था
    • गरीबी आकलन की पुरानी पद्धति (जो केवल कैलोरी-आधारित थी) को बदला जाए।
    • इसने उपभोग-आधारित दृष्टिकोण अपनाया
    • जिसमें खाद्य (55%) के अलावा गैर-खाद्य व्यय (शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन) भी शामिल किए गए।
    • 2011-12 के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण गरीबी अनुपात 25.7% रहा, जबकि शहरी क्षेत्रों में 13.7%।​
  • गणना पद्धति
    • गरीबी रेखा = न्यूनतम आवश्यक उपभोग बास्केट का मूल्य (उपभोग सर्वेक्षण 2009-10 पर आधारित)।
    • तेंदुलकर ने शहरी गरीबी बास्केट को ग्रामीण पर लागू किया और मूल्य समायोजन किया।
    • रंगराजन समिति (2014) ने बाद में इसे ऊंचा कर 972 रुपये (ग्रामीण) सुझाया, लेकिन सरकार ने तेंदुलकर को ही अपनाया।​
  • महत्व और आलोचना
    • यह रेखा नरेगा, PDS जैसे कल्याण योजनाओं की पात्रता निर्धारित करती है।
    • आलोचना: बहुत कम (रोज 27 रुपये से कम), स्वास्थ्य-शिक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज।
    • 2011-12 में कुल गरीबी 21.9% थी, जो बाद में घटी।​

6. आय या निर्गत के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

i. आय या निर्गत प्रवाह है।

ii. आय या निर्गत स्टॉक हैं।

iii. आय या निर्गत को एक अवधि के बाद परिभाषित किया जा सकता है।

Correct Answer: (d) केवल i और iii
Solution:
  • आय या निर्गत एक प्रवाह है, जो वस्तु या सेवा की मात्रा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • यह एक विशेष समय अवधि के भीतर उत्पादित होते हैं।
  • इनका परिमाणात्मक माप प्राप्त करने के लिए इनको एक निश्चित अवधि में परिभाषित किया जाता है
  • क्योंकि ये एक निश्चित समयावधि के लिए होते हैं।
  • आय और निर्गत की प्रकृति
    • ये एक निश्चित समयावधि (जैसे वर्ष, तिमाही या माह) में मापे जाते हैं
    • किसी बिंदु पर। उदाहरणस्वरूप, किसी अर्थव्यवस्था का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं व सेवाओं का मूल्य है, जो स्टॉक (जैसे पूँजी भंडार) से भिन्न है।​
  • सही कथनों की पहचान
    • निम्नलिखित कथन इस संदर्भ में विचारणीय हैं:
    • कथन 1: आय या निर्गत प्रवाह हैं। यह सही है क्योंकि ये समय के साथ प्रवाहित होते हैं।
    • कथन 2: आय या निर्गत स्टॉक हैं। यह गलत है क्योंकि स्टॉक स्थिर मात्रा होते हैं, जैसे धन संचय।
    • कथन 3: आय या निर्गत को एक अवधि में परिभाषित किया जा सकता है।
    • यह सही है, क्योंकि बिना समयावधि के इनका कोई अर्थ नहीं।​
  • समग्र माँग से संबंध
    • दोहरी लेखांकन प्रणाली के अनुसार, अर्थव्यवस्था का कुल निर्गत हमेशा कुल आय के बराबर होता है।
    • उत्पादन के प्रत्येक चरण पर मूल्यवर्धन कारकों (मजदूरी, लाभ, ब्याज, लगान) के रूप में आय बनता है।
    • स्वायत्त व्यय में वृद्धि से गुणक प्रभाव कार्य करता है, जिससे निर्गत और आय दोनों बढ़ते हैं।​
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • मान लीजिए प्रारंभिक निवेश 100 इकाई बढ़ता है।
    • सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) 0.8 होने पर उपभोग माँग 80 इकाई बढ़ती है
    • फिर अगले चक्र में 64, और इस प्रकार श्रेणी अनंतक होती है।
    • कुल निर्गत वृद्धि गुणक (1/(1-MPC)=5) से 500 इकाई हो जाती है, जो आय में भी परिलक्षित होती है।​

7. 2011-12 के लिए राष्ट्रीय गरीबी रेखा का प्राक्कलन, भारत के शहरी क्षेत्रों के लिए प्रति व्यक्ति प्रति माह ....... पर किया गया था। [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 1,000 रु.
Solution:
  • तेंदुलकर पद्धति का उपयोग करके वर्ष 2011-12 के लिए राष्ट्रीय गरीबी रेखा का प्राक्कलन
  • भारत के ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों के लिए प्रतिव्यक्ति प्रतिमाह क्रमशः 816 रुपये और 1000 रुपये पर किया गया था।
  • पृष्ठभूमि
    •  इसने उपभोग-आधारित दृष्टिकोण अपनाया
    • जिसमें न्यूनतम कैलोरी सेवन (ग्रामीण के लिए 2,400 और शहरी के लिए 2,100) के साथ-साथ शिक्षा
    • स्वास्थ्य आदि गैर-खाद्य व्यय को शामिल किया।
    • 2011-12 के आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा 1,000 रुपये मासिक निर्धारित हुई
    • जबकि ग्रामीण में यह 816 रुपये थी।​
  • गणना विधि
    • यह प्राक्कलन मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) पर आधारित था
    • जो राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) के 68वें दौर (2011-12) के डेटा से लिया गया।
    • शहरी क्षेत्रों में उच्च जीवनयापन लागत के कारण राशि अधिक रखी गई।
    • उदाहरणस्वरूप, पांच सदस्यीय परिवार के लिए शहरी गरीबी रेखा लगभग 5,000 रुपये मासिक हो जाती।​
  • तुलना और आलोचना
    • रंगराजन समिति (2014) ने तेंदुलकर पद्धति की आलोचना करते
    • हुए शहरी गरीबी रेखा को 1,407 रुपये तक बढ़ाने की सिफारिश
    • लेकिन सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से अपनाया नहीं।
    • तेंदुलकर के अनुसार 2011-12 में शहरी गरीबी अनुपात लगभग 13.7% था।
    • कई विशेषज्ञों ने इसे बहुत कम बताकर वास्तविक गरीबी को कम आंकने का आरोप लगाया।​
  • बाद के अपडेट
    • वर्तमान में (2026 तक), गरीबी अनुमान बदल चुके हैं
    • सतत विकास लक्ष्यों के तहत बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) और विश्व बैंक की $2.15-$3 PPP आधारित रेखा का उपयोग होता है।
    • फिर भी, 2011-12 का यह आंकड़ा ऐतिहासिक संदर्भ में महत्वपूर्ण बना हुआ है।​

8. निम्नलिखित में से किसे राष्ट्रीय आय की गणना के लिए आय पद्धति का उपयोग करते समय, शामिल नहीं किया जाना चाहिए - [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

A. लॉटरी से आय

B. शेयरों की बिक्री और खरीद पर दलाली

C. जुआ जैसी अवैध गतिविधियों से आय

Correct Answer: (b) A और C
Solution:
  • राष्ट्रीय आय की गणना के लिए मुख्यतः तीन विधियां अपनाई जाती हैं- (1) आय विधि, (2) व्यय विधि तथा (3) उत्पाद विधि।
  • आय विधि, किसी अर्थव्यवस्था के आय के घटकों पर विचार करके राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाने का एक दृष्टिकोण है।
  • इसमें लॉटरी से आय, जुआ जैसी अवैध गतिविधियों से आय आदि शामिल नहीं किए जाते हैं।
  • आय पद्धति क्या है?
    • आय पद्धति राष्ट्रीय आय की गणना का एक प्रमुख तरीका है
    • जिसमें अर्थव्यवस्था के सभी उत्पादन कारकों से प्राप्त होने वाली कुल आय को जोड़ा जाता है।
    • इसमें मुख्य रूप से मजदूरी (वेतन), किराया, ब्याज, लाभ और मिश्रित आय (स्व-रोजगार से) शामिल होते हैं।
    • यह विधि राष्ट्रीय उत्पादन के वितरण पक्ष पर केंद्रित होती है
    • जहाँ उत्पादन कारकों (श्रम, भूमि, पूँजी, उद्यम) के योगदान के बदले प्राप्त आय का योग किया जाता है।​
  • क्या शामिल किया जाता है?
    • कर्मचारी पारिश्रमिक: सभी वेतन, मजदूरी, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा भत्ते।
    • संचालन अधिशेष: कॉर्पोरेट लाभ, मालिकों की आय और स्व-रोजगार से प्राप्त मिश्रित आय।
    • मिश्रित आय: छोटे व्यवसायियों, किसानों और स्व-रोजगार व्यक्तियों की कुल आय।
    • किराया और ब्याज: भूमि से किराया और पूँजी से शुद्ध ब्याज।
    • ये सभी बाजार लेन-देन पर आधारित होते हैं और अर्थव्यवस्था में उत्पादन प्रक्रिया से जुड़े होते हैं।​​
  • क्या शामिल नहीं किया जाता?
    • आय पद्धति में निम्नलिखित को बाहर रखा जाता है:
    • गृहिणियों की सेवाएँ: ये गैर-बाजार सेवाएँ है
    • जिनका कोई मौद्रिक लेन-देन या बाजार मूल्य नहीं होता।
    • इन्हें शामिल करने से दोहरी गिनती या मूल्यांकन की समस्या उत्पन्न हो सकती है।​
    • स्व-उपभोग वाली वस्तुएँ: जैसे घर के बगीचे से उगाई गई सब्जियाँ, क्योंकि इनका कोई बाजार मूल्य नहीं।
    • पुरानी वस्तुओं की बिक्री: ये पहले वर्षों में गिनी जा चुकी होती हैं, अतः वर्तमान आय में नहीं जोड़ी जातीं।​
    • अनौपचारिक क्षेत्र की अनरिकॉर्ड आय: जैसे सड़क विक्रेताओं की बिक्री, यदि रिकॉर्ड न हो।
  • क्यों बाहर रखा जाता है?
    • राष्ट्रीय आय का उद्देश्य केवल उन आर्थिक गतिविधियों को मापना है
    • जो बाजार मूल्य पर उत्पादित होती हैं और जिनका सटीक मौद्रिक मूल्यांकन संभव हो।
    • गृहिणियों की सेवाएँ मूल्यवान होती हैं, लेकिन इनका मूल्य निर्धारित न होने से इन्हें बाहर रखा जाता है।
    • इससे राष्ट्रीय आय के आँकड़े विश्वसनीय और तुलनीय बने रहते हैं।
    • अन्य विधियों (उत्पादन या व्यय) में भी यही सिद्धांत लागू होता है।​

9. एफसी (FC) पर एनडीपी (NDP) साथ ही विदेश से निवल कारक आय ....... के बराबर है। [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) FC पर NNP
Solution:
  • NNP{FC} = NDP{FC} + NFIA
  • अर्थात साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद = साधन लागत या शुद्ध घरेलू उत्पाद + विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय।
  • एफसी (Factor Cost) पर एनडीपी प्लस विदेश से निवल कारक आय एट फैक्टर कास्ट के बराबर होता है।​
  • मुख्य अवधारणाएँ
    • एनडीपी एट एफसी देश की सीमाओं के अंदर उत्पादित वस्तुओं व सेवाओं से कारकों (जैसे मजदूरी, ब्याज, लाभ, किराया) को मिलने वाली शुद्ध आय है, जिसमें मूल्यह्रास घटा दिया जाता है।
    • विदेश से निवल कारक आय वह शुद्ध राशि है
    • जो देश के निवासियों द्वारा विदेश में अर्जित की जाती है
    • विदेशियों द्वारा देश में अर्जित आय घटाने के बाद।​
  • सूत्र
    • एनएनपी<sub>एफसी</sub> = एनडीपी<sub>एफसी</sub> + विदेश से निवल कारक आय (NFIA)
    • यह राष्ट्रीय आय का मापन करता है, क्योंकि इसमें विदेशी आय को शामिल किया जाता है।​
  • संबंधित तथ्य
    • एनएनपी<sub>एफसी</sub> को राष्ट्रीय आय भी कहा जाता है।​
    • एनडीपी<sub>एफसी</sub> = जीडीपी<sub>एफसी</sub> - मूल्यह्रास।​
    • जीएनपी<sub>एफसी</sub> = जीडीपी<sub>एफसी</sub> + NFIA (सकल स्तर पर)।​

10. आंटे में गेहूं का मूल्य इसकी राष्ट्रीय आय के मापन की ....... विधि का एक भाग है। [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) मूल्यवर्धित
Solution:
  • आंटे में गेहूं का मूल्य इसकी राष्ट्रीय आय के मापन की मूल्यवर्धित विधि का एक भाग है।
  • मूल्य-वर्धित विधि क्या है?
    • मूल्य-वर्धित विधि, जिसे उत्पादन विधि या आउटपुट विधि भी कहा जाता है
    • राष्ट्रीय आय (जैसे GDP) की गणना के तीन प्रमुख तरीकों में से एक है।
    • इसमें अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा आदि) में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापा जाता है
    • लेकिन केवल शुद्ध मूल्य-वर्धन (Net Value Added) को जोड़ा जाता है।
    • शुद्ध मूल्य-वर्धन = उत्पाद का कुल मूल्य - मध्यवर्ती इनपुट का मूल्य।
    • यह विधि सुनिश्चित करती है कि मध्यवर्ती वस्तुओं (जैसे कच्चा माल) का मूल्य बार-बार न गिना जाए।
    • भारत जैसे देशों में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) इसी विधि का उपयोग GDP अनुमान लगाने के लिए करता है।​
  • आटे में गेहूं का मूल्य कैसे जुड़ता है?
    • मान लीजिए एक किसान 100 रुपये मूल्य का गेहूं पैदा करता है।
    • फिर एक मिलर इस गेहूं को खरीदकर आटा बनाता है, जिसका बाजार मूल्य 150 रुपये हो जाता है। यहां:
    • किसान का मूल्य-वर्धन = 100 रुपये (कोई मध्यवर्ती लागत नहीं)।
    • मिलर का मूल्य-वर्धन = 150 - 100 = 50 रुपये (गेहूं की लागत घटाकर)।
    • कुल मूल्य-वर्धन = 150 रुपये। यदि हम सीधे आटे का मूल्य (150) और गेहूं का मूल्य (100) जोड़ दें
    • तो 250 रुपये हो जाएगा, जो दोहरी गणना होगी।
    • आटे में गेहूं का मूल्य (100 रुपये) केवल मध्यवर्ती इनपुट के रूप में घटाया जाता है
    • अलग से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि यह मूल्य-वर्धित विधि का अभिन्न अंग है।​
  • महत्वपूर्ण उदाहरण और सावधानियां
    • उदाहरण: यदि बेकर आटे से ब्रेड बनाता है (मूल्य 200 रुपये), तो मूल्य-वर्धन = 200 - 150 = 50 रुपये।
    • कुल GDP में केवल नया जोड़ा गया मूल्य गिना जाता है।​
    • दोहरी गणना से बचाव: मध्यवर्ती वस्तुओं (गेहूं, आटा) को अंतिम वस्तु (ब्रेड) के साथ न जोड़ें।​
    • भारतीय संदर्भ: नीति आयोग और मूल्य-वर्धित विधि से तिमाही GDP जारी करते हैं
    • जहां कृषि उत्पाद जैसे गेहूं प्रमुख हैं। 2025-26 में यह विधि मुद्रास्फीति समायोजन के साथ उपयोग होती है।