राष्ट्रीय प्रतीक (भारतीय राजव्यवस्था)

Total Questions: 6

1. भारत का राष्ट्रीय धरोहर पशु निम्नलिखित में से कौन-सा है? [MTS (T-I) 22 अक्टूबर, 2021 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) हाथी
Solution:
  • सही विकल्प कौन‑सा है?
    • पूछे गए प्रश्न “भारत का राष्ट्रीय धरोहर पशु निम्नलिखित में से कौन‑सा है?” का सही उत्तर: हाथी (Elephant) है।​
    • ध्यान दें: भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है, जबकि राष्ट्रीय धरोहर पशु हाथी है; दोनों अलग‑अलग सरकारी घोषणाएँ हैं।​
  • राष्ट्रीय धरोहर पशु की अवधारणा
    • “राष्ट्रीय धरोहर पशु” का उद्देश्य ऐसे प्रजाति को विशेष रूप से चिन्हित करना है, जो देश की प्राकृतिक विरासत (natural heritage) और संस्कृति से गहराई से जुड़ी हो और जिसके संरक्षण की खास जरूरत हो।​
    • किसी प्रजाति को राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित करने से उसके संरक्षण, आवास की रक्षा, अवैध शिकार पर नियंत्रण और जनजागरूकता के लिए सरकार को अतिरिक्त नीतिगत आधार और प्राथमिकता मिलती है।​
  • हाथी को राष्ट्रीय धरोहर पशु क्यों घोषित किया गया?
    • भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने 2010 में हाथी को राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया, ताकि हाथियों के लिए खास संरक्षण कदम तेज किए जा सकें।​
  • इसके मुख्य कारण:
    • एशियाई हाथी की घटती संख्या और उसके आवास (हैबिटैट) का लगातार नष्ट होना।​
    • भारत की पौराणिक कथाओं, धार्मिक परंपराओं (जैसे भगवान गणेश) और लोकसंस्कृति में हाथी की बहुत प्रमुख भूमिका।​
    • जंगलों की पारिस्थितिकी में हाथी “की‑स्टोन स्पीशीज़” की तरह काम करता है, यानी उसके रहने से पूरा तंत्र संतुलित रहता है।​
  • हाथी का पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व
    • पारिस्थितिक रूप से हाथी बीज फैलाने, जंगल के रास्ते बनाने, जलस्रोतों तक मार्ग साफ रखने जैसे कार्यों के कारण कई अन्य वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी प्रजाति है।​
    • सांस्कृतिक रूप से हाथी भारतीय कला, स्थापत्य, मंदिरों, त्योहारों और राजसी प्रतीक (जुलूस, युद्ध हाथी आदि) के रूप में ऐतिहासिक रूप से जुड़ा रहा है
    • इसलिए इसे “विरासत” या “धरोहर” का प्रतीक माना गया।​

2. भारत के राष्ट्रीय प्रतीक पर उल्लिखित 'सत्यमेव जयते' शब्द किस उपनिषद से लिए गए हैं? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2020 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) मुंडक (मुंडकोपनिषद)
Solution:
  • भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तम्भ) के नीचे देवनागरी लिपि में लिखा गया आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' (सत्य की ही जीत होती है)
  • मुंडकोपनिषद से लिया गया है। यह प्राचीन भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
  • किस उपनिषद से लिया गया है
    • ‘सत्यमेव जयते’ का स्रोत मुण्डक उपनिषद है, जो अथर्ववेद से सम्बद्ध प्रमुख उपनिषदों में गिना जाता है।​
    • भारत के राजचिह्न (अशोक स्तंभ पर आधारित राष्ट्रीय प्रतीक) के आधार भाग के नीचे देवनागरी लिपि में यही वाक्यांश राष्ट्रीय आदर्श वाक्य के रूप में अंकित है।​
  • मंत्र में इसका स्थान और अर्थ
    • मूल मंत्र में पूरा वाक्य है कि सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं; सत्य के द्वारा ही देवयान मार्ग विस्तृत होता है, जिस पर चलकर ऋषिगण सत्य के परम धाम तक पहुंचते हैं – इस लंबी व्याख्या का संक्षिप्त सार केवल यह है कि अंततः जीत सत्य की होती है।​
    • इस पूरे मंत्र से केवल शुरुआती अंश ‘सत्यमेव जयते’ को चुनकर राष्ट्र के आदर्श वाक्य के रूप में लिया गया, क्योंकि यह संक्षेप में भारतीय विचारधारा की नैतिक भावना को व्यक्त करता है।​
  • मुण्डक उपनिषद का संक्षिप्त परिचय
    • मुण्डक उपनिषद 108 उपनिषदों की पारंपरिक सूची में एक प्रमुख उपनिषद है और मुक्तिका कैनन में इसे पाँचवाँ स्थान दिया गया है।​
    • यह काव्यात्मक शैली में लिखी गई दार्शनिक रचना है, जिसमें लगभग 64 मन्त्र हैं और इनमें ब्रह्मज्ञान, आत्मा, सत्य और ज्ञान–कर्म के भेद आदि की चर्चा की गई है।​
  • सत्यमेव जयतेराष्ट्रीय आदर्श वाक्य कैसे बना
    • स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय प्रतीक को 26 जनवरी 1950 को अपनाते समय अशोक के सिंह स्तंभ के नीचे ‘सत्यमेव जयते’ को आधिकारिक रूप से राष्ट्र के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य के रूप में स्वीकार किया गया।​
    • यह वाक्य भारतीय राज्य की उस मूल भावना को दर्शाता है कि शासन और समाज दोनों का अंतिम आधार सत्य, न्याय और नैतिकता पर होना चाहिए, न कि छल, हिंसा या अन्याय पर।​
  • राष्ट्रीय प्रतीक पर प्रयोग और महत्व
    • राष्ट्रीय प्रतीक में चार सिंहों वाले अशोक स्तंभ के आधार भाग के सबसे नीचे, देवनागरी में ‘सत्यमेव जयते’ अंकित होता है; आधिकारिक प्रयोग में इसे निजी/व्यावसायिक लोगो आदि के लिए मनमाने ढंग से उपयोग करने की अनुमति नहीं है।​
    • प्रशासनिक मुहरों, सरकारी पत्रों, न्यायालयों और संसद सहित अनेक आधिकारिक संदर्भों में यह वाक्यांश यह संकेत देता है कि राज्य व्यवस्था को निर्णय लेते समय अंततः सत्य और न्याय के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।​

3. हमारा राष्ट्रगान 'जन गण मन' किस भाषा से अपनाया गया है? [MTS (T-I) 6 अगस्त, 2019 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) बांग्ला
Solution:
  • भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन' मूल रूप से रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बांग्ला भाषा में लिखा गया था।
  • इसके हिंदी संस्करण को 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था।
  • भाषा और मूल रचना
    • ‘जन गण मन’ की रचना नोबेल पुरस्कार विजेता कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने बांग्ला भाषा में की थी, जिसका मूल शीर्षक ‘भारत भाग्य विधाता’ था।​
    • यह सामान्य बोलचाल वाली बांग्ला न होकर संस्कृतनिष्ठ या साधु बंगाली शैली में लिखी गई, जिसमें संस्कृत के बहुत से तत्सम शब्द हैं, इसलिए इसे कई बार “अत्यधिक संस्कृत-मिश्रित बंगाली” भी कहा जाता है।​
  • हिंदी संस्करण और स्वीकृति
    • गीत का मूल-पाठ बंगाली ही है, लेकिन भारत की संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसके हिंदी संस्करण को आधिकारिक राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया।​
    • बाद में इसका हिंदी अनुवाद और उच्चारण इस तरह रूपांतरित किया गया कि देश भर के लोग इसे आसानी से गा और समझ सकें, जबकि मूल भाषा और संरचना बांग्ला की ही बनी रहती है।​
  • पहली प्रस्तुति और ऐतिहासिक संदर्भ
    • यह गीत सबसे पहले 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया था।​
    • स्वतंत्रता के बाद, लंबे विचार-विमर्श के बाद, इसी रचना के पहले पाँच पद को राष्ट्रगान के रूप में मान्यता दी गई और यह राष्ट्रीय एकता, विविधता और सम्मान का प्रमुख प्रतीक बना।​
  • भाषा से जुड़ी मुख्य बातें (संक्षेप में)
    • मूल भाषा: बांग्ला / संस्कृतनिष्ठ (साधु) बंगाली।​
    • स्वरूप: अत्यधिक संस्कृत शब्दों वाली बांग्ला, जिसे कभी-कभी “संस्कृतनिष्ठ बंगाली” कहा जाता है, इसलिए हिंदी भाषियों को यह लगभग संस्कृत या बहुत शुद्ध हिंदी जैसा प्रतीत होता है।​
    • आधिकारिक रूप: हिंदी संस्करण को 1950 में संविधान सभा ने राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया, लेकिन इसकी जड़ और रचना की भाषा बांग्ला ही है।​

4. भारत का राष्ट्रीय फूल क्या है? [CHSL (T-I) 15 जनवरी, 2017 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) कमल
Solution:
  • कमल (Lotus - Nelumbo nucifera) भारत का राष्ट्रीय फूल है। यह पवित्रता, सुंदरता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है
  • जो भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं में गहरा महत्व रखता है।
  • मूल जानकारी
    • भारत का राष्ट्रीय फूल: कमल (Lotus)।​
    • वैज्ञानिक नाम: नेलुम्बो न्यूसीफेरा (Nelumbo nucifera)।​
    • इसे संस्कृत व हिंदी में पद्म, पंकज, नीरज, जलज, कमला, अरविंद, सरोज आदि नामों से भी जाना जाता है।​
    • कमल एक जलीय पौधा है, जो तालाबों, झीलों और शांत जलस्रोतों में उगता है और उसके बड़े, आकर्षक फूल पानी की सतह के ऊपर खिले दिखाई देते हैं।
    • यह मुख्यत: गुलाबी और सफेद रंगों में पाया जाता है और अपने संतुलित, अनेक पंखुड़ियों वाले फूलों के कारण अत्यंत मनोहारी दिखता है।​
  • राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में महत्व
    • कमल को भारत ने 26 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय फूल घोषित किया, ताकि भारतीय संस्कृति में इसकी पवित्रता, आध्यात्मिकता और सौंदर्य को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में मान्यता मिल सके।
    • इसे राष्ट्रीय प्रतीकात्मक चिह्नों में भी स्थान मिला है, और यह भारतीयता तथा समृद्ध विरासत का द्योतक माना जाता है।​
    • कमल की सबसे महत्त्वपूर्ण प्रतीकात्मक विशेषता यह है कि यह कीचड़ भरे पानी में उगकर भी पूरी तरह स्वच्छ, सुंदर और निर्मल दिखाई देता है
    • इसलिए इसे शुद्धता, अध्यात्म और उच्च विचारों का प्रतीक माना जाता है। भारतीय दर्शन में इसका संदेश है
    • मनुष्य को भी संसार की विषम परिस्थितियों के बीच रहते हुए अपने चरित्र और विचारों को निर्मल बनाए रखना चाहिए।​
  • धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
    • हिंदू धर्म में कमल का विशेष महत्त्व है; देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती और देव ब्रह्मा को प्रायः कमल पर विराजमान दिखाया जाता है
    • जिससे यह समृद्धि, ज्ञान और सृजन का प्रतीक बन जाता है। विष्णु पुराण, पद्म पुराण आदि धार्मिक ग्रंथों में भी कमल के अनेक उल्लेख मिलते हैं
    • जो इसे शुभता और दिव्यता से जोड़ते हैं।​​
    • बौद्ध धर्म में भी कमल को ज्ञान और बोधि का प्रतीक माना गया है, क्योंकि यह अंधकार से निकलकर प्रकाश की ओर खिलता है।
    • प्राचीन भारतीय मूर्तिकला, मंदिर वास्तुकला, चित्रकला और वस्त्र डिजाइन में कमल की आकृति का व्यापक उपयोग हुआ है, जो इसके गहरे सांस्कृतिक प्रभाव को दिखाता है।​
  • वनस्पति और रूप-रंग
    • कमल का पौधा गाद या कीचड़ भरी मिट्टी में जड़ें फैलाकर उगता है, जबकि इसके पत्ते व फूल लंबे डंठलों के सहारे पानी की सतह से ऊपर दिखाई देते हैं।
    • पत्ते लगभग गोल और ढाल जैसे होते हैं, जिन पर पानी की बूंदें नहीं टिकतीं, बल्कि मोतियों की तरह लुढ़क जाती हैं, जो वैज्ञानिक रूप से उसकी सतह की विशेष संरचना के कारण होता है।​
    • इस फूल में आम तौर पर 10 से 15 या उससे अधिक पंखुड़ियाँ होती हैं, जो सर्पिल क्रम में लगी रहती हैं और फूल को अत्यंत संतुलित व सुंदर रूप देती हैं।
    • कमल का फूल प्रायः सुबह के समय खिलता है और रात में बंद हो जाता है, इसलिए इसे सूर्य और उजाले के साथ भी जोड़ा जाता है।​
  • औषधीय और उपयोगी गुण
    • कमल के पौधे के लगभग सभी भाग – जड़ (कंद/राइजोम), बीज, पत्ते और फूल – उपयोगी माने जाते हैं। इसके बीजों और जड़ों में आयरन, कैल्शियम, विटामिन B1, B2, B6, विटामिन C और फाइबर जैसे पोषक तत्त्व पाए जाते हैं, जिनका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता है।​
    • आयुर्वेद में कमल को शीतल, रक्तशोधक तथा हृदय के लिए लाभकारी माना गया है, और इसके विभिन्न भागों से बने नुस्खे शरीर की कई समस्याओं में उपयोग किए जाते हैं।
    • कई क्षेत्रों में कमल के बीजों का प्रयोग खाद्य पदार्थ के रूप में भी किया जाता है, जिन्हें सुखाकर या उबालकर खाया जाता है।​
  • अन्य देशों और राज्यों में स्थिति
    • कमल केवल भारत का ही नहीं, बल्कि वियतनाम आदि कुछ अन्य देशों का भी राष्ट्रीय फूल है, जहाँ इसे समान रूप से पवित्रता और राष्ट्रीय पहचान से जोड़ा गया है।
    • मिस्र की परंपराओं में भी कमल को सूर्य देवता और पुनर्जन्म का प्रतीक माना गया है, जिससे इसके अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महत्व का पता चलता है।​​
    • भारत के भीतर कमल को कुछ राज्यों ने अपने राज्य पुष्प के रूप में भी अपनाया है; जैसे हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक में कमल राजकीय फूल के रूप में मान्यता प्राप्त है। अशोक स्तंभ आदि प्राचीन स्मारकों में भी अधोमुखी कमल की नक्काशियां मिलती हैं, जो इसे भारतीय राजचिह्नों से जोड़ती हैं।​​

5. यह प्रस्ताव किसने पेश किया कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज 'केसरिया, सफेद और गहरे हरे रंग का समान अनुपात में क्षैतिज तिरंगा' होगा? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) जवाहरलाल नेहरू
Solution:
  • जवाहरलाल नेहरू ने 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा में यह प्रस्ताव पेश किया था कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज समान अनुपात में केसरिया, सफेद और गहरे हरे रंग का क्षैतिज तिरंगा होगा, जिसके केंद्र में गहरे नीले रंग का चक्र होगा।
  • किसने और कब प्रस्ताव रखा?
    • यह प्रस्ताव संविधान सभा के सदस्य पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखा था, जो उस समय स्वतंत्र भारत की राजनीतिक दिशा तय करने वाले प्रमुख नेताओं में थे।​
    • राष्ट्रीय ध्वज का यह स्वरूप 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा की बैठक में औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया और उसी दिन स्वीकार भी किया गया।​
  • प्रस्ताव की मुख्य बातें
    • ध्वज को तीन समान क्षैतिज पट्टियों वाला तिरंगा निर्धारित किया गया: ऊपर गहरा केसरिया, बीच में सफेद और नीचे गहरा हरा रंग, तीनों समान अनुपात में।​
    • सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र रखने का प्रावधान किया गया, जिसमें 24 तीलियाँ हैं और जो धर्मचक्र या शाश्वत नियम के प्रतीक के रूप में लिया गया।​
  • रंगों और चक्र का महत्व
    • केसरिया रंग को साहस, त्याग और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना गया, जो राष्ट्र के नेतृत्व और बलिदान की भावना को दर्शाता है।​
    • सफेद रंग शांति, सत्य और पारदर्शिता का प्रतीक है, जबकि हरा रंग उर्वरता, प्रगति और आशा का प्रतिनिधित्व करता है।​
    • मध्य का अशोक चक्र गति, प्रगति और नैतिक/धार्मिक नियमों के पालन का संकेत देता है, यह संदेश देता है कि स्थिरता नहीं, बल्कि सतत गतिशीलता ही जीवन और राष्ट्र का धर्म है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • वर्तमान तिरंगे का आधार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्वज से लिया गया, जिसे समय के साथ संशोधित करते हुए धर्म के प्रतीकों की जगह अशोक चक्र को अपनाया गया ताकि ध्वज संप्रदाय-निरपेक्ष राष्ट्रीय प्रतीक बने।​
    • ध्वज के अंतिम डिज़ाइन को तैयार करने में आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिनके सुझाए डिज़ाइन से प्रेरणा लेकर अंतिम स्वरूप तय किया गया।​
  • राष्ट्रीय ध्वज की स्वीकृति और ध्वज संहिता
    • राष्ट्रीय ध्वज को आज़ादी से ठीक पहले, 15 अगस्त 1947 से कुछ दिन पहले, 22 जुलाई 1947 को ही संविधान सभा द्वारा स्वीकार कर लिया गया
    • ताकि स्वतंत्र भारत के जन्म के साथ ही अधिकृत राष्ट्रीय ध्वज भी मौजूद हो।​
    • बाद में ‘भारतीय ध्वज संहिता’ के माध्यम से इसके उपयोग, फहराने और प्रदर्शन से जुड़े नियम बनाए गए, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि ध्वज का सम्मान और गरिमा हर परिस्थिति में बनी रहे।

6. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द भारत के संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित नहीं है? [JE इलेक्ट्रिकल परीक्षा 28 अक्टूबर, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) समतावाद
Solution:
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'समतावाद' (Egalitarianism) शब्द का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है।
  • हालांकि, 'समानता' शब्द उल्लिखित है (प्रतिष्ठा और अवसर की समानता), जिसका भाव समतावाद से मिलता-जुलता है।
  • प्रस्तावना में उल्लिखित शब्द हैं: संप्रभुता, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, और बंधुता
  •  दिए गए विकल्पों में से 'समतावाद' शब्द का उल्लेख भारत के संविधान की प्रस्तावना में नहीं है।
  •  प्रस्तावना को भारतीय संविधान का परिचय पत्र कहा जाता है।
  • एक संविधान में, यह अपने फ्रेमर्स, अपनी रचना के पीछे के इतिहास और राष्ट्र के मूल मूल्यों और सिद्धांतों को प्रस्तुत करता है।
  • प्रस्तावना के पीछे भारत के संविधान के आदर्शों को जवाहरलाल नेहरू के उद्देश्य संकल्प द्वारा रखा गया था, जिसे संविधान सभा ने 22 जनवरी, 1947 को अपनाया था।
  •  प्रस्तावना में खोजशब्द
  • हम भारत के लोग:
    • यह भारत के लोगों की परम संप्रभुता को दर्शाता है। संप्रभुता का अर्थ है राज्य का स्वतंत्र अधिकार, किसी अन्य राज्य या बाहरी शक्ति के नियंत्रण के अधीन नहीं होना।
  • संप्रभुताः
    • इस शब्द का अर्थ है कि भारत का अपना स्वतंत्र अधिकार है और यह किसी अन्य बाहरी शक्ति का प्रभुत्व नहीं है।
    • देश में विधायिका में कानून बनाने की शक्ति है जो कुछ सीमाओं के अधीन हैं। समाजवादी; शब्द का अर्थ है समाजवादी की उपलब्धि लोकतांत्रिक माध्यमों से समाप्त होती है। यह एक मिश्रित अर्थव्यवस्था में विश्वास रखता है
    • जहां दोनों निजी और सार्वजनिक क्षेत्र एक-दूसरे के सह-अस्तित्व में हैं। इसे 42 वें संशोधन, 1976 में प्रस्तावना में जोड़ा गया था।
    •  धर्मनिरपेक्ष शब्द का अर्थ है कि भारत में सभी धर्मों को राज्य से समान सम्मान, सुरक्षा और समर्थन मिलता है। प्रस्तावना को 1976 में 42 वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधित किया गया था
    • जिसमें तीन नए शब्द समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता को जोड़ा गया था। इसे 42 वें संवैधानिक संशोधन, 1976 द्वारा प्रस्तावना में शामिल किया गया था।
  • लोकतांत्रिक:
    • इस शब्द का अर्थ है कि भारत के संविधान में संविधान का एक स्थापित रूप है जो एक चुनाव में व्यक्त लोगों की इच्छा से अपना अधिकार प्राप्त करता है।
  • गणतंत्र:
    • यह शब्द बताता है कि राज्य का प्रमुख लोगों द्वारा चुना जाता है। भारत में, भारत का राष्ट्रपति राज्य का निर्वाचित प्रमुख होता है।
    • प्रस्तावना में 1976 में 42 वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया था, जिसमें तीन नए शब्द समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता को जोड़ा गया था।
    • यह भारत के सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता प्रदान करता है और लोगों में भाईचारे को बढ़ावा देता है।
    • इसे व्यापक रूप से संविधान की आत्मा के रूप में माना गया है।