रासायनिक और भौतिक परिवर्तन, विलयन आदि (रसायन विज्ञान)

Total Questions: 14

1. निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक उच्चतम होता है? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) एल्काइन
Solution:
  • दिए गए यौगिकों में एल्काइन का क्वथनांक अन्य की तुलना में सर्वाधिक होगा
  • क्योंकि एल्काइन में त्रिबंध (Triple Bond) उपस्थित होता है
  • जबकि एल्कीन में द्विबंध (Double Bond) उपस्थित होता है।
  • एल्केन में एकल बंध उपस्थित होता है तथा मुक्त कार्बन डाइऑक्साइड कमरे के तापमान पर गैसीय अवस्था में होती है।
  • अतः क्वथनांक के लिए बढ़ते हुए क्रम में-मुक्त कार्बन डाइऑक्साइड एल्केन < एल्कीन < एल्काइन।
  • क्वथनांक को प्रभावित करने वाले कारक
    • क्वथनांक मुख्य रूप से अंतर-आण्विक आकर्षण पर निर्भर करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, सीधी श्रृंखला वाले हाइड्रोकार्बन (जैसे n-पेंटेन) में सतह क्षेत्र अधिक होता है
    • जिससे वान डेर वाल्स बल मजबूत होते हैं और क्वथनांक 36°C तक पहुँच जाता है।
    • शाखित संरचनाएँ (जैसे आइसो-पेंटेन या नियो-पेंटेन) सतह क्षेत्र कम करती हैं
    • इसलिए उनका क्वथनांक क्रमशः 28°C और 10°C रहता है।
    • एल्केन की तुलना में एल्काइन का क्वथनांक अधिक होता है क्योंकि त्रिगुट बंध रैखिक आकार प्रदान करते हैं।
  • उदाहरणों से तुलना
    • हाइड्रोकार्बन श्रेणी में n-पेंटेन का क्वथनांक सबसे अधिक होता है
    • क्योंकि इसकी लंबी सीधी श्रृंखला पैकिंग को बढ़ावा देती है।
    • एल्केन (एकल बंध) में शाखित यौगिक कमजोर बलों के कारण निम्न क्वथनांक दिखाते हैं
    • जबकि CO₂ गैस होने से सबसे कम (-78°C सब्लिमेशन) रहता है।
    • इसी तरह, जल का क्वथनांक 100°C है हाइड्रोजन बंधन के कारण, जो मीथेन (–161°C) से कहीं अधिक है।
  • सामान्य नियम
    • समान श्रेणी में क्वथनांक आण्विक भार के साथ बढ़ता है
    • लेकिन समस्थानिक यौगिकों में सीधी श्रृंखला सर्वोच्च होती है।
    • यह भौतिक गुण है जो रासायनिक परिवर्तन के बिना मापा जाता है।

2. एक तत्व की परमाणु संख्या ....... से निर्धारित होती है। [MTS (T-I) 21 सितंबर, 2017 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या
Solution:
  • किसी तत्व की परमाणु संख्या तत्व के एक परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है।
  • परमाणु संख्या की परिभाषा
    • परमाणु संख्या, जिसे Z से दर्शाया जाता है, किसी परमाणु के नाभिक में विद्यमान प्रोटॉनों की कुल संख्या को व्यक्त करती है।
    • उदाहरणस्वरूप, हाइड्रोजन की परमाणु संख्या 1 है
    • (1 प्रोटॉन), हीलियम की 2 (2 प्रोटॉन), और ऑक्सीजन की 8।
    • आवेशरहित परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी प्रोटॉनों के बराबर होती है
    • जो विद्युत neutrality बनाए रखती है। यह संख्या तत्व की पहचान का आधार है
    • क्योंकि दो भिन्न तत्वों की परमाणु संख्या कभी समान नहीं हो सकती।
  • तत्व निर्धारण में भूमिका
    • परमाणु संख्या ही तत्व को परिभाषित करती है—"तत्व ऐसे परमाणुओं का समूह है
    • जिनकी परमाणु संख्या समान हो।" इससे समस्थानिक (isotopes) भिन्न होते हैं
    • जहाँ प्रोटॉन संख्या समान रहती है लेकिन न्यूट्रॉन संख्या अलग होती है
    • (जैसे कार्बन-12 और कार्बन-14, दोनों Z=6)। द्रव्यमान संख्या (A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) भिन्न हो सकती है
    • लेकिन Z तत्व की रासायनिक प्रकृति तय करता है।
    • आवर्त सारणी इसी क्रम में व्यवस्थित है, जो गुणधर्मों की आवर्तिता स्पष्ट करती है।
  • मापन और महत्व
    • परमाणु संख्या का मापन स्पेक्ट्रोस्कोपी या एक्स-रे विवर्तन द्वारा किया जाता है।
    • हेनरी मोजले ने 1913 में इसे प्रोटॉनों से जोड़ा। वर्तमान में 118 तत्व ज्ञात है
    • जिनकी Z 1 से 118 तक है। यह रासायनिक बंधन, अभिक्रियाशीलता और इलेक्ट्रॉन विन्यास निर्धारित करती है।

3. निम्नलिखित में से किसके शोध ने पृष्ठ तनाव के रूप में जानी जाने वाली वर्तमान अवधारणा की नींव रखी, जो तरल और ठोस सतहों तथा अंतराफलकों के गुणों का वर्णन करती है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) एग्नेस पॉकेल्स
Solution:
  • एग्नेस पॉकेल्स (Agnes Pockels) के शोध ने पृष्ठ तनाव के रूप में जानी जाने वाली वर्तमान अवधारणा की नींव रखी
  • जो तरल और ठोस सतहों तथा अंतराफलकों में गुणों का वर्णन करती है।
  • एग्नेस पॉकेल्स ने सतह तनाव (Surface Tension) पर अशुद्धियों के प्रभाव की खोज की।
  • पृष्ठ तनाव की मूल अवधारणा
    •  जहां सतही अणु आंतरिक अणुओं की तुलना में असंतुलित बल अनुभव करते हैं।
    • वर्तमान अवधारणा में इसे प्रति इकाई लंबाई पर कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है
    • जिसका SI मात्रक न्यूटन प्रति मीटर (N/m) है।
  • ऐतिहासिक विकास और पिग्नेट का योगदान
    • 1806 में जन्मी जर्मन भौतिकशास्त्री अग्नेस पिग्नेट ने घरेलू रसोई में सरल troughs (नालिकाओं) का उपयोग कर पृष्ठ तनाव मापा।
    • उन्होंने साबुन के विलयन डालकर सतह क्षेत्र बदलने पर बल मापा
    • जिससे सतह दबाव (surface pressure) की अवधारणा सामने आई।
    • लॉर्ड रेली जैसे वैज्ञानिकों को पत्र लिखकर उन्होंने 1891 में रॉयल सोसाइटी की कार्यवाही में प्रकाशित कराया
    • जो आधुनिक सतह विज्ञान की आधारशिला बनी।
    • उनके कार्य ने ठोस सतहों पर monolayers (एकल परतों) के अध्ययन को प्रेरित किया।
  • ठोस और अंतराफलक पर प्रभाव
    • पृष्ठ तनाव न केवल तरल-वायु अंतराफलक पर बल्कि तरल-ठोस सतहों पर भी कार्य करता है
    • जैसे कांच पर पानी की चढ़ाई (wetting) या पारा की अस्वीकृति।
    • ठोस सतहों पर यह contact angle के माध्यम से व्यक्त होता है
    • जो Young's equation (γSV=γSL+γLVcos⁡θ) से वर्णित है।
    • पिग्नेट के प्रयोगों ने इन गुणों को मात्रात्मक आधार दिया
    • जो आज सतह कोटिंग्स और नैनोटेक्नोलॉजी में उपयोग होता है।
  • आधुनिक अनुप्रयोग और विस्तार
    • आज पृष्ठ तनाव जैविक झिल्लियों, इंटरफेसल तनाव (जैसे तेल-जल) और ठोस सतहों के hydrophobicity को समझाने में प्रयुक्त होता है।
    • पिग्नेट के कार्य ने Langmuir-Blodgett films जैसी तकनीकों को जन्म दिया।
    • तापमान बढ़ने पर पृष्ठ तनाव घटता है, जो उबलने पर शून्य हो जाता है।

4. लुई पाश्चर ने आणविक चिरायता की खोज कब की और पता लगाया कि कुछ यौगिकों के क्रिस्टल, दर्पण छवियों के रूप में विद्यमान होते हैं, जिसने आधुनिक त्रिविम रसायन की नींव रखी ? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) 1848
Solution:
  • लुई पाश्चर ने 1848 ई. में आणविक चिरायता की खोज की और पता लगाया कि कुछ यौगिकों के क्रिस्टल
  • दर्पण छवियों के रूप में विद्यमान होते हैं, जिसने आधुनिक त्रिविम रसायन की नींव रखी।
  • पाश्चर का प्रारंभिक कार्य
    • पाश्चर ने 1840 के दशक में École Normale Supérieure में क्रिस्टलॉग्राफी पर शोध किया।
    • उन्होंने टार्टरिक एसिड के नमक के क्रिस्टलों को सूक्ष्म चिमटी से अलग किया और दो प्रकार के क्रिस्टल पहचाने
    • एक बाएं हाथ की दर्पण छवि जैसा और दूसरा दाएं हाथ की।
    • जब उन्होंने इनका ध्रुवीकृत प्रकाश से परीक्षण किया
    • तो एक प्रकार घूमाता था और दूसरा विपरीत दिशा में, जो आणविक स्तर पर विषमता (asymmetry) को सिद्ध करता था।
  • चिरायता की अवधारणा
    • आणविक चिरायता का अर्थ है कि अणु और उसके दर्पण प्रतिबिंब एक-दूसरे पर पूरी तरह मेल नहीं खाते
    • जैसे बाएं और दाएं हाथ। पाश्चर ने इसे "विषमता" नाम दिया, जो आज चिरालिटी कहलाता है।
    • यह खोज रेसमिक मिश्रण (racemic mixture) को एनैंटियोमर्स में अलग करने की पहली प्रयोगशाला विधि थी
    • जिसने जैविक और औषधीय रसायन में क्रांति ला दी।
  • त्रिविम रसायन की नींव
    • इस कार्य ने 1874 में वैन्ट हॉफ और ले बेल द्वारा प्रस्तावित टेट्राहेड्रल कार्बन मॉडल को वैज्ञानिक आधार दिया
    • जो कार्बनिक अणुओं की 3D संरचना समझाता है।
    • पाश्चर की खोज ने सिद्ध किया कि जैविक प्रक्रियाएं (जैसे किण्वन) केवल एक चिरल रूप को प्राथमिकता देती हैं
    • जो एंजाइमों की चिरल प्रकृति से जुड़ा है। इससे स्टिरियोसिलेक्टिव सिंथेसिस और ड्रग डिजाइन के क्षेत्र खुले।
  • ऐतिहासिक महत्व
    • 1848 की यह खोज पाश्चर के बाद के कार्यों जैसे पाश्चुरीकरण (1860s) और टीकों (1880s) की नींव बनी।
    • फ्रांसीसी रसायनज्ञ ने विज्ञान को दिखाया कि भौतिक गुण आणविक ज्यामिति पर निर्भर करते हैं
    • जो नोबेल पुरस्कार-स्तरीय योगदान था हालांकि नोबेल तब शुरू नहीं हुआ था।
    • आज, चिरालिटी фармаceuticals में महत्वपूर्ण है, जहां एक एनैंटियोमर औषधीय होता है और दूसरा विषाक्त।

5. ऑर्थोलेक्स के जल-अपघटन की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप निम्नलिखित में से कौन-सा उत्पाद बनता है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) केयोलिनाइट
Solution:
  • ऑर्थोलेक्स के जल-अपघटन की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप केयोलिनाइट नामक उत्पाद का निर्माण होता है।
  • केयोलिनाइट का रासायनिक सूत्र AL₂Si₂O₅(OH)₄ है।
  • केयोलिनाइट का उपयोग विभिन्न उद्योगों के अनुप्रयोग जैसे सिरेमिक, पेंट, कॉस्मेटिक आदि में किया जाता है।
  • जल-अपघटन प्रक्रिया
    • न्यूक्लियोसाइड या ऑर्थोलेक्स जैसी संरचनाओं का जल-अपघटन अम्लीय या एंजाइमैटिक माध्यम में होता है
    • जहां ग्लाइकोसिडिक बंधन टूटता है।
    • पहले चरण में पेंटोज़ शर्करा (जैसे राइबोज़ या डीऑक्सीराइबोज़) और नाइट्रोजन बेस (प्यूरीन या पाइरिमिडीन जैसे एडेनिन, ग्वानिन) अलग हो जाते हैं। यदि यह न्यूक्लियोटाइड स्तर पर है
    • तो आगे फॉस्फेट समूह भी मुक्त होता है, जिससे पूर्ण अपघटन उत्पाद बनते हैं।
  • मुख्य उत्पाद
    • एल्डोपेंटोज़: एक पांच कार्बन वाली अल्डोज़ शर्करा, जैसे डी-राइबोज़।
    • यह ऊर्जा स्रोत या अन्य जैव प्रक्रियाओं में प्रयुक्त होती है।
    • नाइट्रोजनयुक्त क्षार: विषम चक्रीय प्यूरीन (एडेनिन, ग्वानिन) या पाइरिमिडीन बेस (साइटोसिन, थाइमिन, यूरासिल)।
    • ये डीएनए/आरएनए के आधार बनाते हैं।
    • फॉस्फोरिक अम्ल: यदि फॉस्फेट समूह मौजूद हो, तो यह ATP जैसे अणुओं के निर्माण में सहायक होता है।
  • रासायनिक अभिक्रिया
    • सामान्यतः प्रतिक्रिया इस प्रकार है:
      न्यूक्लियोसाइड/ऑर्थोलेक्स + H₂O → एल्डोपेंटोज़ + नाइट्रोजन बेस (± H₃PO₄)।
    • यह प्रक्रिया राइबोन्यूक्लिएस या अम्ल उत्प्रेरक द्वारा तेज होती है।
    • उदाहरण के लिए, आरएनए के न्यूक्लियोसाइड्स का अपघटन इसी सिद्धांत पर आधारित है
    • जो जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण है।
  • जैविक महत्व
    • यह अपघटन डीएनए/आरएनए के चयापचय, न्यूक्लियोटाइड संश्लेषण और कोशिका विभाजन में भूमिका निभाता है।
    • असामान्य अपघटन विकार जैसे गाउट या कैंसर से जुड़े हो सकते हैं।
    • विस्तृत अध्ययन में पाया गया कि प्यूरीन बेस विषम चक्रीय होते हैं, जो स्थिरता प्रदान करते हैं।

6. मिश्रण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) कोलाइड एक विषमांगी मिश्रण है, जिसके कणों का आकार बड़ा होता है।
Solution:
  • कोलाइड विलयन एक विषमांगी निकाय होता है
  • जिसमें एक पदार्थ के अत्यधिक बारीक कण (परीक्षिप्त अवस्था) दूसरे पदार्थ में, जिसे एक परिक्षेपण माध्यम कहा जाता है
  • परिक्षिप्त होते हैं। परिक्षिप्त प्रावस्था के कण परिक्षेपण माध्यम के कणों के पुंज होते हैं।
  • मिश्रण की परिभाषा
    • मिश्रण दो या अधिक शुद्ध पदार्थों का वह संयोजन है जिसमें उनके गुण अपरिवर्तित रहते हैं।
    • यह समस्थिर (homogeneous) या असमस्थिर (heterogeneous) हो सकता है।
    • समस्थिर मिश्रण में घटक एकसमान रूप से वितरित होते हैं
    • जैसे वायु या नमक का जल में घोल, जबकि असमस्थिर में दृश्यमान भिन्नता होती है
    • जैसे रेत-जल मिश्रण।
    • मिश्रण के घटकों का अनुपात निश्चित नहीं होता और इन्हें भौतिक विधियों (जैसे विलयन, निस्पंदन, आसवन) से अलग किया जा सकता है।
  • सामान्य कथन और उनका विश्लेषण
    • मिश्रण संबंधी सामान्य कथनों में से निम्नलिखित सही होते हैं:
    • मिश्रण के घटक रासायनिक अभिक्रिया नहीं करते। (सही, क्योंकि कोई नया पदार्थ नहीं बनता।)
    • मिश्रण के गुण उसके घटकों के गुणों के योग का परिणाम होते हैं। (सही, additive गुण।)
    • मिश्रण को निश्चित तापमान पर उबालने पर एकसमान तापमान पर वाष्पित नहीं होता।
    • (सही, शुद्ध पदार्थों के विपरीत।)
    • गलत कथन अक्सर यह होता है: "मिश्रण के घटकों का अनुपात निश्चित होता है।" यह असत्य है
    • क्योंकि यह संपत्ति केवल यौगिकों (compounds) की होती है
    • मिश्रणों की नहीं। उदाहरणस्वरूप, जल में चीनी की मात्रा भिन्न हो सकती है।
  • गलत कथन की पहचान
    • सबसे सामान्य गलत कथन है: मिश्रण के घटकों का रासायनिक संयोजन निश्चित अनुपात में होता है।
    • यह कथन यौगिकों (जैसे जल में H:O = 2:1) पर लागू होता है, न कि मिश्रणों पर।
    • मिश्रण में अनुपात चर (variable) होता है। यदि प्रश्न में न्यूक्लियोसाइड मिश्रण का संदर्भ है
    • (जैसा कि पिछले प्रश्न से जुड़ा), तो गलत कथन हो सकता है:
    • न्यूक्लियोसाइड में फॉस्फेट समूह हमेशा मौजूद होता है।" क्योंकि न्यूक्लियोसाइड केवल बेस + शर्करा है
    • फॉस्फेट न्यूक्लियोटाइड में जुड़ता है।
  • जैव रसायन संदर्भ में विस्तार
    • यदि "मिश्रण" से न्यूक्लियोसाइड मिश्रण का तात्पर्य है (पिछले ऑर्थोलेक्स जल-अपघटन से जुड़कर)
    • तो कथन जैसे "न्यूक्लियोसाइड का अपघटन हमेशा फॉस्फोरिक अम्ल देता है" गलत है।
    • ऑर्थोलेक्स (न्यूक्लियोसाइड) का जल-अपघटन केवल एल्डोपेंटोज़ और नाइट्रोजन बेस देता है
    • फॉस्फेट न्यूक्लियोटाइड में होता है। संरचना: पेंटोज़ शर्करा + नाइट्रोजनस बेस (N-ग्लाइकोसिडिक बंधन)।
    • फॉस्फेट 5' OH पर जुड़ने पर न्यूक्लियोटाइड बनता है। यह भ्रम यौगिकों और मिश्रणों के बीच उत्पन्न होता है।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • सही: वायु (N₂ + O₂ मिश्रण) का अनुपात बदला जा सकता है।
    • गलत कथन का खंडन: "मिश्रण हमेशा समस्थिर होता है" – नहीं, रेत-लोहा असमस्थिर है।
    • इस प्रकार, प्रश्न का गलत कथन निश्चित अनुपात वाला होता है
    • जो मिश्रण की परिभाषा का उल्लंघन करता है। यह रसायन विज्ञान की कक्षा 9-10 की अवधारणा है।

7. 1662 में किसने वर्णित किया कि जब किसी गैस को एक बंद पात्र में पंप किया जाता है, तो वह उस पात्र में व्यवस्थित होने के लिए सिकुड़ जाएगी, परंतु पात्र पर गैस द्वारा डाला गया दाब बढ़ जाएगा ? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) रॉबर्ट बॉयल
Solution:
  • 1662 ई. में रॉबर्ट बॉयल ने वर्णित किया कि जब किसी गैस को एक बंद पात्र में पंप किया जाता है
  • तो वह उस पात्र में व्यवस्थित होने के लिए सिकुड़ जाएगी, परंतु पात्र पर गैस द्वारा डाला गया दाब बढ़ जाएगा।
  • बॉयल का नियम
    • बॉयल ने अपने प्रयोगों में स्थिर तापमान पर गैस के दाब (P) और आयतन (V) के बीच व्युत्क्रमानुपाती संबंध स्थापित किया
    • जिसे P1V1 = P2V2 के रूप में व्यक्त किया जाता है।
    • यह नियम गैसों के व्यवहार का आधारभूत सिद्धांत है
    • जहां गैस के अणुओं की गति और टकराव से दाब उत्पन्न होता है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • 1662 में एंग्लो-आयरिश वैज्ञानिक रॉबर्ट बॉयल ने जे-बॉयल ट्यूब का उपयोग कर गैसों के गुणधर्मों पर पहला विश्वसनीय मापन किया।
    • उनके सहयोगी रिचर्ड टाउनली ने भी इसमें योगदान दिया, लेकिन बॉयल को मुख्य श्रेय मिला।
    • इससे पहले गैसों के व्यवहार पर सटीक प्रयोग दुर्लभ थे।
  • वैज्ञानिक व्याख्या
    • जब बंद पात्र में अतिरिक्त गैस पंप की जाती है, तो गैस के अणुओं की संख्या बढ़ जाती है
    • जिससे वे पात्र की दीवारों से अधिक बार टकराते हैं, दाब बढ़ाते हुए।
    • आयतन स्थिर रहने पर गैस घनीभूत हो जाती है।
    • यह आधुनिक गैस सिद्धांतों जैसे आदर्श गैस समीकरण PV = nRT का पूर्वाधार है।
  • महत्वपूर्ण प्रभाव
    • बॉयल का यह अवलोकन रसायन विज्ञान और भौतिकी में क्रांति लाया
    • जो बाद के नियमों जैसे चार्ल्स, गे-लुसाक और अवोगाद्रो के लिए आधार बना।
    • आज यह नियम संपीड़ित गैस सिलेंडरों, इंजनों और मौसम विज्ञान में उपयोग होता है।

8. किण्वन प्रक्रिया के दौरान ऐल्कोहॉल निर्माण के उप-उत्पाद के रूप में कौन-सा पोटैशियम अम्ल लवण प्राप्त होता है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) पोटैशियम बाइटार्ट्रेट
Solution:
  • किण्वन प्रक्रिया के दौरान ऐल्कोहॉल निर्माण के उत्पाद के रूप में पोटैशियम बाइटार्ट्रेट प्राप्त होता है।
  • 4किण्वन एक जैव रासायनिक क्रिया है
  • इसमें जटिल कार्बनिक यौगिक सूक्ष्म सजीवों की सहायता से सरल कार्बनिक यौगिक में विघटित होते हैं।
  • पोटैशियम बाइटार्ट्रेट को टार्टर की क्रीम के नाम से भी जाना जाता है
  • किण्वन प्रक्रिया का अवलोकन
    • किण्वन एक अवायवीय प्रक्रिया है जिसमें यीस्ट शुगर (जैसे सुक्रोज़ या ग्लूकोज) को तोड़ता है।
    • मुख्य अभिक्रिया इस प्रकार है: C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂।
    • अंगूर के रस में टार्टारिक अम्ल प्रचुर मात्रा में होता है
    • जो किण्वन के दौरान पोटैशियम के साथ मिलकर बाइटार्ट्रेट लवण बनाता है।
    • यह लवण कम तापमान पर अवक्षेपित हो जाता है।
  • उप-उत्पाद का निर्माण कैसे होता है
    • अंगूर में टार्टारिक अम्ल (C₄H₆O₆) प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है
    • किण्वन के अम्लीय वातावरण में पोटैशियम आयन (K⁺) इसके साथ संयोजित होकर KC₄H₅O₆ (पोटैशियम बाइटार्ट्रेट) बनाते हैं।
    • यह "क्रीम ऑफ टार्टर" के नाम से जाना जाता है और वाइन को स्पष्ट करने (फाइनिंग) के लिए हटाया जाता है
    • क्योंकि यह बादलापन पैदा करता है।
    • औद्योगिक स्तर पर, यह उप-उत्पाद बेकिंग पाउडर, खाद्य अम्लयुक्तक (acidulant) और दवा में उपयोग होता है।
  • अन्य संभावित उप-उत्पादों से अंतर
    • पोटैशियम सिट्रेट: खाद्य योज्य या किडनी स्टोन रोकथाम में उपयोग, किण्वन से सीधा संबंध नहीं।
    • पोटैशियम नाइट्रेट: उर्वरक या आतिशबाजी में, किण्वन उप-उत्पाद नहीं।
    • पोटैशियम हाइड्रोजन एडिपेट: सिंथेटिक फाइबर में उपयोग, फल-आधारित किण्वन से असंबंधित।
  • व्यावहारिक महत्व
    • वाइन उद्योग में इसकी मात्रा 2-8 ग्राम/लीटर तक हो सकती है
    • जिसे ठंडा करके अवक्षेपित कर अलग किया जाता है।
    • यह प्रक्रिया वाइन की स्थिरता बढ़ाती है और उप-उत्पाद का पुनर्चक्रण संभव बनाती है।

9. वह प्रक्रिया जिसमें दो अमिश्रणीय द्रव, इस प्रकार मिश्रित होते हैं कि एक द्रव पदार्थ दूसरे द्रव पदार्थ में छोटी-छोटी बूंदों के रूप में परिक्षेपित होता है, ....... कहलाती है। [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) पायसीकरण
Solution:
  • वह प्रक्रिया जिसमें दो अमिश्रणीय द्रव इस प्रकार मिश्रित होते हैं
  • एक द्रव पदार्थ दूसरे द्रव पदार्थ में छोटी-छोटी बूंदों के रूप में परिक्षेपित होता है
  • पायसीकरण (Emulsification) कहलाती है। पायस दो अमिश्रणीय द्रव को मिलाने से बनते हैं।
  • पायस अस्थायी होते हैं तथा वे पदार्थ जो पायस का स्थायित्व बढ़ा देते हैं, उन्हें पायसी कारक कहा जाता है।
  • परिभाषा और अवधारणा
    •  उदाहरणस्वरूप, दूध में वसा की बूंदें पानी में परिक्षेपित होती हैं।
    • यह भौतिक प्रक्रिया ऊर्जा के स्रोत जैसे मिक्सर या अल्ट्रासोनिक उपकरणों से संचालित होती है
    • जो बूंदों को पर्याप्त छोटा बनाती है।
  • पायसीकारक की भूमिका
    • पायसीकारक (जैसे साबुन, लेसीथिन या अंडे की जर्दी) हाइड्रोफिलिक (जलाभिलाषी) और हाइड्रोफोबिक (जलविद्रूपी) दोनों गुणों वाले यौगिक होते हैं
    • जो दोनों चरणों के इंटरफेस पर खड़े होकर बूंदों को स्थिर रखते हैं।
    • बिना पायसीकारक के, गुरुत्वाकर्षण या ब्राउनियन गति से बूंदें अलग हो जाती है
    • जिसे क्रीमिंग या कोलेसेंस कहा जाता है।
    • खाद्य उद्योग में मेयोनीज या सलाद ड्रेसिंग बनाने के लिए सरसों या अंडे का उपयोग इसी कारण किया जाता है।
  • प्रकार
    • तेल-में-जल (O/W) इमल्शन: तेल की बूंदें पानी में, जैसे दूध या क्रीम।
    • जल-में-तेल (W/O) इमल्शन: पानी की बूंदें तेल में, जैसे मक्खन।
  • अनुप्रयोग
    • यह प्रक्रिया खाद्य प्रसंस्करण (मेयोनीज, आइसक्रीम), कॉस्मेटिक्स (लोशन), दवाओं (इमल्शन इंजेक्शन) और उद्योगों (कीटनाशक स्प्रे) में व्यापक रूप से उपयोग होती है।
    • स्थिरता बढ़ाने के लिए pH, तापमान या इलेक्ट्रोलाइट्स का नियंत्रण आवश्यक होता है।

10. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सफेद और पीले रंग का ठोस (White to Yellowish Solid) है, जिसमें हल्की सुगंधित गंध होती है, जिसे ऊर्ध्वपातन की प्रक्रिया द्वारा शुद्ध किया जाता है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) एंथ्रासीन
Solution:
  • एंथ्रासीन एक सफेद और पीले रंग का ठोस (White to Yellowish Solid) है
  • जिसमें हल्की सुगंधित गंध होती है, जिसे ऊर्ध्वपातन की प्रक्रिया द्वारा शुद्ध किया जाता है।
  • एंथ्रासीन (C₄H₁) एक ठोस पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन है। यह तारकोल का एक घटक है।
  • भौतिक गुण
    • इसमें हल्की, सुखद सुगंधित गंध होती है जो बहुआरोमेटिक हाइड्रोकार्बन की विशेषता है।
    • प्रकाश या हवा के संपर्क में आने पर इसका रंग पीला हो जाता है।
  • शुद्धिकरण विधि
    • ऊर्ध्वपातन (sublimation) प्रक्रिया में एंथ्रासीन ठोस अवस्था से सीधे वाष्प में बदल जाता है बिना पिघले।
    • लगभग 340°C पर यह शुद्ध रूप प्राप्त करता है क्योंकि अशुद्धियाँ पीछे रह जाती हैं।
    • प्रयोगशालाओं में यही विधि उपयोगी सिद्ध होती है।
  • रासायनिक संरचना
    • एंथ्रासीन का सूत्र C₁₄H₁₀ है, जिसमें तीन संलग्न बेंजीन वलय होते हैं।
    • यह पानी में अघुलनशील किंतु बेंजीन जैसे कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होता है। यूवी प्रकाश में यह नीला चमकता है।
  • उपयोग
    • रंगाई उद्योग में एंथ्रासीन से अलिजरिन जैसे लाल रंग बनते हैं।
    • विकिरण डिटेक्टरों में स्किंटिलेटर के रूप में काम करता है।
    • कार्बनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में भी प्रयुक्त होता है।