रासायनिक और भौतिक परिवर्तन, विलयन आदि (रसायन विज्ञान)

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11. IUPAC नामकरण प्रणाली के अनुसार, किस क्रियात्मक समूह की विशेषता -OH समूह की उपस्थिति है, जो आमतौर पर पानी की तरह मुड़े हुए आकार (water-like bent shape) में होता है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) एल्कोहॉल
Solution:
  • IUPAC नामकरण प्रणाली के अनुसार, एल्कोहॉल क्रियात्मक समूह की विशेषता - OH समूह की उपस्थिति है
  • जो आमतौर पर पानी की तरह मुड़े हुए आकार (Water like share) में होता है।
  • अल्कोहल की परिभाषा
    • अल्कोहल कार्बनिक यौगिक होते हैं जहां हाइड्रॉक्सिल समूह (-OH) सीधे कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है।
    • यह समूह VSEPR सिद्धांत के अनुसार मुड़ा हुआ (bent) आकार प्रदर्शित करता है
    • क्योंकि ऑक्सीजन परमाणु के आसपास दो lone pairs और दो bonding pairs होते हैं
    • ठीक पानी अणु की भांति। IUPAC में इन्हें "-ol" प्रत्यय से नामित किया जाता है।
  • IUPAC नामकरण नियम
    • सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनें और -OH समूह वाले कार्बन को सबसे कम संख्या दें।
    • उदाहरण: CH₃CH₂OH को इथेनॉल कहा जाता है।
    • बहु-हाइड्रॉक्सिल अल्कोहल्स के लिए "diol", "triol" आदि प्रत्यय और "hydroxy-" उपसर्ग उपयोग होता है।
  • संरचनात्मक विशेषताएँ
    • -OH समूह ध्रुवीय होता है, जिससे अल्कोहल जल में घुलनशील होते हैं।
    • प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°), और तृतीयक (3°) अल्कोहल्स में -OH क्रमशः प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक कार्बन से जुड़ा होता है।
    • यह आकार हाइड्रोजन बंधन बनाता है, जो अल्कोहल्स के उबलने बिंदु को बढ़ाता है।
  • अन्य क्रियात्मक समूहों से अंतर
    • फिनॉल में -OH बेंजीन वलय से जुड़ा होता है, जबकि अल्कोहल में ऐलिफैटिक श्रृंखला से।
    • कार्बोक्सिलिक अम्ल में -COOH होता है, अमीन में -NH₂। केवल अल्कोहल ही इस वर्णन से मेल खाता है।

12. यौगिक और उसके क्वथनांक का/के निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही है/हैं? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

I. क्लोरोफॉर्म - 334K

II. मेथेन - 111K

Correct Answer: (a) I और II दोनों
Solution:
  • क्लोरोफॉर्म का क्वथनांक लगभग 334K होता है तथा मेथेन का क्वथनांक लगभग 111K होता है।
  • अतः दिए गए दोनों युग्म सही हैं। क्लोरोफॉर्म या ट्राईक्लोरोमीथेन एक कार्बनिक यौगिक है
  • जिसका रासायनिक सूत्र CHCI, है। यह एक रंगहीन और सुगंधित तरल पदार्थ होता है
  • जिसे निश्चेतक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
  • लेकिन सामान्यतः UPSC या NEET जैसे परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सवालों के आधार
  • हम कुछ सामान्य उदाहरणों का विश्लेषण करेंगे जहां यौगिक और उनके क्वथनांक के युग्म सही या गलत होते हैं।
  • क्वथनांक निर्धारण के कारक
    • क्वथनांक बढ़ाने वाले प्रमुख कारक निम्न हैं:
    • आणविक द्रव्यमान (molecular mass): अधिक द्रव्यमान वाले यौगिकों में वैन डर वाल्स बल मजबूत होते हैं, अतः क्वथनांक अधिक होता है।
    • शाखायुक्त श्रृंखला (branching): शाखित यौगिकों का सतह क्षेत्र कम होता है, इसलिए क्वथनांक कम होता है।
    • ध्रुवीयता (polarity): ध्रुवीय यौगिकों में डाइपोल इंटरैक्शन मजबूत।
    • हाइड्रोजन बंधन: O-H, N-H, F-H वाले यौगिकों (जैसे अल्कोहल, अमाइन, पानी) में सबसे मजबूत, इसलिए उच्च क्वथनांक।
    • उदाहरणस्वरूप, CH3OH (मेथनॉल) का क्वथनांक 64.7°C है
    • जबकि समान द्रव्यमान वाले CH3CH3 (इथेन) का केवल -89°C।
  • सामान्य युग्म उदाहरण
    • परीक्षा संदर्भ में निम्न युग्म अक्सर आते हैं (सही युग्म वे हैं जहां दिया क्वथनांक वास्तविक मान से मेल खाता है):
    • सही युग्म: CH3CH2OH (इथेनॉल) - 78.4°C (हाइड्रोजन बंधन के कारण उच्च)।
    • सही युग्म: CH3COOH (एसिटिक अम्ल) - 118°C (डाइमर बनाता है, मजबूत H-बंध)।
    • गलत युग्म: CH4 (मिथेन) - 190°C (वास्तविक -161.5°C, बहुत कम क्योंकि गैर-ध्रुवीय)।
    • अन्य: n-पेंटेन (36°C) > नियोपेंटेन (9.5°C) क्योंकि सीधी श्रृंखला का सतह क्षेत्र अधिक।
  • तुलनात्मक विश्लेषण
    • समान श्रेणी में: CH3Cl (क्लोरोमिथेन, -24°C) < CH3Br (-10°C) < CH3I (3°C) क्योंकि हैलोजन का आकार बढ़ने से वैन डर वाल्स बढ़ता है ।
    • H-बंध बनाम अन्य: CH3CH2OH (78°C) > CH3OCH3 (डाइएथिल ईथर, -25°C) समान द्रव्यमान लेकिन H-बंध अनुपस्थित।
    • शाखन प्रभाव: (CH3)2CHCH3 (आइसोब्यूटेन, -11.7°C) < CH3CH2CH2CH3 (n-ब्यूटेन, -0.5°C)।

13. पेपरोनिल, एथिल एसीटेट, ब्यूटिराल्डिहाइड और नाइट्रेट कुछ ऐसे सामान्य अपमिश्रक हैं, जिनका उपयोग ....... में मिलावट के लिए किया जाता है। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) आइसक्रीम
Solution:
  • पेपरोनिल, एथिल एसीटेट, ब्यूटिराल्डिहाइड और नाइट्रेट कुछ ऐसे सामान्य अपमिश्रक हैं
  • जिनका उपयोग आइसक्रीम में मिलावट के लिए किया जाता है। इनका उपयोग उत्पाद का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • ये पदार्थ सस्ते चीनी सिरप या ग्लूकोज सिरप को असली शहद जैसा दिखाने
  • स्वाद देने और उसकी बनावट सुधारने के लिए मिलाए जाते हैं।
  • इनका उपयोग क्यों?
    • ये अपमिश्रक शहद की प्राकृतिक विशेषताओं की नकल करते हैं।
    • एथिल एसीटेट फल जैसी सुगंध देता है, ब्यूटिराल्डिहाइड मक्खन जैसा स्वाद बढ़ाता है
    • पेपरोनिल (पेपरमिंट तेल का घटक) तीखापन जोड़ता है
    • जबकि नाइट्रेट रंग और चिपचिपाहट बनाए रखने में मदद करता है।
    • भारत जैसे देशों में शहद की मिलावट एक बड़ी समस्या है
    • जहां FSSAI के अनुसार 2020-2025 के बीच 40% से अधिक नमूनों में मिलावट पाई गई।
  • स्वास्थ्य जोखिम
    • विषाक्तता: एथिल एसीटेट और ब्यूटिराल्डिहाइड अधिक मात्रा में सिरदर्द, उल्टी और लीवर क्षति पैदा कर सकते हैं।
    • नाइट्रेट का खतरा: यह कैंसरकारी नाइट्रोसैमिन्स बनाता है, खासकर पाचन तंत्र में।
    • पोषण हानि: मिलावटी शहद में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स और एंजाइम्स नष्ट हो जाते हैं।
    • लंबे समय तक सेवन से एलर्जी और इम्यूनिटी कमजोर होती है।
  • रोकथाम उपाय
    • FSSAI ने 2025 से NMR-आधारित ट्रेसिबिलिटी अनिवार्य की है।
    • उपभोक्ता प्रमाणित ब्रांड चुनें (जैसे नेशनल हनी टेस्टिंग लैब प्रमाणित), एंटी-मिलावट चेकर ऐप इस्तेमाल करें।
    • भारत में 2026 तक मिलावट पर सख्त कार्रवाई हो रही है
    • जुर्माना 10 लाख तक। शुद्ध शहद चुनने से स्वास्थ्य लाभ जैसे एंटीबैक्टीरियल गुण मिलते हैं।

14. कम लवणता वाला जल, अधिक लवणता वाले सघन जल के साथ कहां ठहरता है? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) ऊपर
Solution:
  • धनत्व कम होने के कारण कम लवणता वाला जल, अधिक लवणता वाले सघन जल के साथ ऊपर ठहरता है।
  • यह घटना समुद्र विज्ञान और समुद्री जीव विज्ञान में महत्वपूर्ण है
  • क्योंकि यह जल स्तंभ में पोषक तत्वों और जीवों के वितरण को प्रभावित करती है।
  • घनत्व स्तरीकरण का सिद्धांत
    •  कम लवणता वाला जल (जैसे नदियों का मीठा पानी) हल्का होता है
    • ऊपर तैरता रहता है, जबकि उच्च लवणता वाला सघन जल नीचे बैठ जाता है।
    • ठंडा जल भी गर्म जल से अधिक सघन होता है
    • इसलिए तापमान अंतर भी इस स्तरीकरण को प्रभावित करता है।
  • समुद्र में इसका प्रभाव
    • समुद्रों में यह स्तरीकरण सतही जल (कम लवणता, गर्म) और गहरे जल (उच्च लवणता, ठंडा) के बीच स्पष्ट विभाजन बनाता है।
    • ध्रुवीय क्षेत्रों में हिमनदों के पिघलने से सतह पर कम लवणता वाली परत बनती है
    • जबकि भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में वाष्पीकरण से सतही लवणता बढ़ती है
    • लेकिन गहराई में स्थिर रहती है। इससे थर्मोहेलाइन परिसंचरण (गर्मी और लवणता आधारित धाराएं) प्रभावित होती हैं
    • जो वैश्विक जलवायु को नियंत्रित करता है।
  • जैविक और पारिस्थितिक महत्व
    • यह स्तरीकरण पोषक तत्वों के वितरण को प्रभावित करता है
    • क्योंकि ऊपरी हल्के जल में प्रकाश अधिक पहुंचता है जो प्लवक उत्पादन बढ़ाता है
    • जबकि नीचे सघन जल में ऑक्सीजन कम हो सकती है।
    • समुद्री जीवों की प्रवास पैटर्न और मत्स्य उत्पादन इसी पर निर्भर करते हैं।
    • असमान लवणता मिश्रण न होने से 'हैलोक्लाइन' (लवणता परिवर्तन क्षेत्र) बनता है, जो धाराओं को रोकता है।
  • कारक प्रभावित करने वाले
    • लवणता को वर्षा (कम करती है), वाष्पीकरण (बढ़ाता है), नदी प्रवाह (पतला करता है)
    • हिम पिघलाव प्रभावित करते हैं। उच्च अक्षांशों में कम लवणता सतह पर रहती है
    • जबकि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में 400 मीटर तक बढ़ती है।
    • गहरे समुद्र में लवणता लगभग स्थिर (लगभग 35‰) रहती है।