Solution:विकलांग व्यक्ति अधिनियम (The Persons with Disabilities Act), 1995 की धारा 26 के तहत विकलांग बच्चों को न्यूनतम 18 वर्ष की आयु तक निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान है। धारा 43 में प्रावधानित है कि संबंधित सरकारें एवं स्थानीय प्राधिकारी विकलांग व्यक्तियों को रियायती दरों एवं वरीयता के आधार पर गृह निर्माण, व्यवसाय स्थापना आदि के लिए भूमि आवंटन की योजनाएं अधिसूचित करेंगे। धारा 46 में विकलांग व्यक्तियों की सुविधा के लिए सार्वजनिक भवनों में ढाल (Ramps) की उपलब्धता का भी प्रावधान किया गया है। वर्तमान में सरकार द्वारा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) पारित किया जा चुका है। यह अधिनियम वर्ष 1995 के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को निरस्त करता है।दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की विशेषताएं :
• विकलांगता की परिभाषा में बदलाव: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में विकलांगता की परिभाषा में बदलाव लाते हुए इसे और भी व्यापक बनाया गया है। इस अधिनियम में विकलांगता को एक विकसित और गतिशील अवधारणा के आधार पर परिभाषित किया गया है और अपंगता के मौजूदा प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। साथ ही केंद्र सरकार को इन प्रकारों में वृद्धि की शक्ति भी दी गई है।
• आरक्षण की व्यवस्था: शिक्षा और सरकारी नौकरियों में दिव्यांग व्यक्तियों को अब तक 3% आरक्षण दिये जाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन इस अधिनियम में इसे बढ़ाकर 4% कर दिया गया है।
• शिक्षा संबंधी सुधार : इस अधिनियम में बेंचमार्क-विकलांगता (benchmark-disability) से पीड़ित 6 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की गई है। साथ ही सरकारी वित्त पोषित शैक्षिक संस्थानों और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों को दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा प्रदान करनी होगी।
• फंड की व्यवस्था : दिव्यांगजनों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये 'राष्ट्रीय और राज्य निधि' (National and State Fund) का निर्माण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में बनाए गए अन्य फंड्स का इस नए फंड में विलय कर दिया जाएगा।
• अवसंरचना संबंधी सुधार : सुलभ भारत अभियान को मजबूती प्रदान करने एवं निर्धारित समय-सीमा में सार्वजनिक इमारतों (सरकारी और निजी दोनों) में दिव्यांगजनों की पहुंच सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है।
• गार्जियनशिप की व्यवस्था : यह विधेयक जिला न्यायालय द्वारा गार्जियनशिप की व्यवस्था प्रदान करता है जिसके तहत अभिभावक और विकलांग व्यक्तियों के बीच संयुक्त निर्णय लेने की व्यवस्था होगी।
• बेंचमार्क विकलांगता के लिये विशेष प्रावधान : गौरतलब है कि इस अधिनियम में बेंचमार्क विकलांगता यानी न्यूनतम 40 फीसदी विकलांगता के शिकार लोगों को शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का लाभ देने का भी प्रावधान है और ऐसे लोगों को सरकारी योजनाओं और अन्य प्रकार की योजनाओं में भी प्राथमिकता दी जाएगी।
• अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान : दिव्यांगजनों के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों के निपटारे के लिये प्रत्येक जिले में विशेष न्यायालयों को नामित किया जाएगा। नया अधिनियम इस संबंध में भारत में बनने वाले कानूनों को विकलांग व्यक्तियों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीआरपीडी) के उद्देश्यों के सापेक्ष ला खड़ा करेगा। भारत यूएनसीआरपीडी का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है और यह अधिनियम यूनएनसीआरपीडी के संदर्भ में भारत के दायित्वों को पूरा करेगा।