लोकपाल एवं महत्वपूर्ण आयोग

Total Questions: 4

1. योजना आयोग को 2014 में इनमें से किसके द्वारा प्रतिस्थापित किया गया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) नीति आयोग
Solution:
  • योजना आयोग को समाप्त कर उसके स्थान पर 1 जनवरी, 2015 को 'नीति आयोग' अस्तित्व में लाया गया। नीति (NITI) से आशय 'National Institution for Transforming India' है।
  •  नीति आयोग
    •  इसका पूरा नाम राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान है।
    •  यह भारत सरकार का प्रमुख नीतिगत थिंक टैंक' है जो दिशात्मक और नीतिगत दोनों तरह की जानकारी प्रदान करता है।
    •  इसका गठन 1 जनवरी 2015 को हुआ था।
    •  नीति आयोग की शासी परिषद में मैत्री इसके अध्यक्ष और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल हैं।
    •  उपाध्यक्ष सुमन बेरी और सीईओ परमेश्वरन अय्यर हैं।
    •  इसके पूर्णकालिक सदस्य वी.के. सरस्वत, रमेश चंद, वी.के. पॉल हैं।
      Other Information
  • योजना आयोग
    •  यह भारत सरकार में एक संस्थान था।
    •  इसने पंचवर्षीय योजनाएँ बनाई।
    •  इसका गठन 15 मार्च 1950 को हुआ था।
    •  इसे 17 अगस्त 2014 को भंग कर दिया गया और नए संस्थान नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
    •  भारत के प्रधानमंत्री योजना आयोग के पदेन अध्यक्ष थे।
  • योजना आयोग क्या था
    • योजना आयोग भारत सरकार की एक केंद्रीय संस्था थी, जिसका मुख्य कार्य देश के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ बनाना और संसाधनों का आवंटन करना था।​
  • कब और कैसे हुआ प्रतिस्थापन
    • योजना आयोग को 2014 में समाप्त करने/भंग करने का निर्णय लिया गया और इसे औपचारिक रूप से अगस्त 2014 में समाप्त कर दिया गया।​
    • इसके स्थान पर एक नई संस्था नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 से की गई, जो नीति निर्माण के लिए सरकार का प्रमुख थिंक टैंक बनी।​
  • नीति आयोग की मुख्य विशेषताएँ
    • NITI Aayog का पूरा नाम National Institution for Transforming India है और यह केंद्र तथा राज्यों को मिलकर सहकारी संघवाद की भावना से नीति संबंधी सुझाव देने वाली संस्था है।​
    • इसकी गवर्निंग काउंसिल में इसके अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री तथा सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं, जो इसे अधिक सहभागी और परामर्शात्मक ढांचा बनाते हैं।​

2. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद लोक सेवा आयोग के सदस्य को हटाने और निलंबन से संबंधित है? [Phase-XI 27 जून, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 317
Solution:
  • अनुच्छेद 315 - संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग अनुच्छेद 317 - लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य का हटाया जाना और निलंबित किया जाना
  • अनुच्छेद 320 - लोक सेवा आयोगों के कृत्य
  • अनुच्छेद 324 - निर्वाचनों के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण का निर्वाचन आयोग में निहित होना
  • लोक सेवा आयोग के सदस्य को भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
  • सदस्य किसी भी समय भारत के राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।
  • आयोग के किसी भी सदस्य को भारत के राष्ट्रपति द्वारा निम्न आधार पर पद से हटाया जा सकता है -
  • दुर्व्यवहार (यदि और केवल यदि ऐसे दुर्व्यवहार की जांच भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जाती है और उसका बचाव किया जाता है)।
  • यदि किसी सदस्य पर दिवालियापन का आरोप लगाया गया है।
  • अपने कार्यालय के कर्तव्यों के बाहर किसी भी भुगतान वाले रोजगार में लगे हुए हैं।
  • यदि राष्ट्रपति की राय हो तो सदस्य मानसिक या शरीर की बीमारी के कारण पद पर बने रहने के लिए अयोग्य है।
  • अनुच्छेद 317 का प्रावधान
    • यह अनुच्छेद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) और संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष या सदस्यों पर लागू होता है।
    • अनुच्छेद 317(1) के अनुसार, अध्यक्ष या सदस्य को केवल दुर्व्यवहार (misbehaviour) के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से ही हटाया जा सकता है, बशर्ते सर्वोच्च न्यायालय ने
    • राष्ट्रपति के संदर्भ पर जांच कर रिपोर्ट दी हो कि उन्हें हटाया जाना चाहिए। जांच के दौरान राष्ट्रपति उन्हें निलंबित भी कर सकते हैं।​
  • विशेष आधारों पर हटाना (खंड 3)
    • अनुच्छेद 317(3) कुछ मामलों में सर्वोच्च न्यायालय की जांच के बिना सीधे हटाने की अनुमति देता है:
    • दिवालियापन घोषित होना (खंड 3(a))।
    • आधिकारिक कर्तव्यों के बाहर वेतनभोगी रोजगार में संलग्न होना (खंड 3(b))।
    • शारीरिक या मानसिक अक्षमता जो कर्तव्यों के निर्वहन में बाधक हो (खंड 3(c))।​
    • ये प्रावधान आयोग सदस्यों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करते हुए जवाबदेही बनाए रखते हैं।​
  • हितों के टकराव (खंड 4)
    • अनुच्छेद 317(4) स्पष्ट करता है कि यदि कोई सदस्य राज्य सरकार के साथ अनुबंध में वित्तीय हित रखता है, तो इसे दुर्व्यवहार माना जाएगा। ऐसे मामलों में राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भित कर सकते हैं। यह प्रावधान भ्रष्टाचार और पक्षपात रोकने के लिए है।​
  • प्रक्रिया और महत्व
    • राष्ट्रपति ही एकमात्र प्राधिकारी हैं जो हटाने या निलंबन का आदेश जारी कर सकते हैं, भले ही राज्य आयोग हो। अनुच्छेद 145 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की जांच प्रक्रिया का पालन होता है। यह संवैधानिक ढांचा (भाग XIV, अनुच्छेद 315-323) लोक सेवा भर्ती प्रक्रिया की अखंडताを守ता है।​

3. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को ....... के आदेश द्वारा हटाया जा सकता है। [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) राष्ट्रपति
Solution:
  • राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य या अध्यक्ष को अनुच्छेद 317 के तहत राष्ट्रपति के आदेश से उसके पद से हटाया जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है, किंतु उन्हें राष्ट्रपति उनके पद से हटाता है।
  • भारत के संविधान में प्रावधान है कि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को भारत के राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है।
  • राष्ट्रपति किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को तभी हटा सकते हैं जब उनके विरुद्ध लगे आरोपों की जाँच हो चुकी हो।
  • राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को निम्नलिखित आधारों पर हटाया जा सकता है: दुर्व्यवहार, अक्षमता, या संविधान का उल्लंघन।
  • राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को प्रधान मंत्री या राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा नहीं हटाया जा सकता है।
    other Information
  • प्रधान मंत्री:
    • प्रधान मंत्री भारत में राष्ट्रीय स्तर पर सरकार का प्रमुख होता है।
    •  वह भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है और देश की कार्यकारी शाखा का नेतृत्व करने के लिए जिम्मेदार होता है।
  • राज्यपाल:
    • राज्यपाल भारत में राज्य सरकार का प्रमुख होता है।
    •  वह भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है और राज्य की कार्यकारी शाखा की देखरेख के लिए जिम्मेदार होता है।
  • मुख्यमंत्री:
    • भारत में मुख्यमंत्री राज्य सरकार का प्रमुख होता है।
    •  उसकी नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह राज्य की कार्यकारी शाखा का नेतृत्व करने के लिए जिम्मेदार होता है।
  • राष्ट्रपतिः
    • भारत का राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख होता है और उसका चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों और राज्यों की विधान सभाओं के सदस्य शामिल होते हैं।
  • अतः
    • यह कथन "राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है" सही है।

4. संघ लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन- सा/से कथन सत्य है/हैं? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

A. संसद के पास आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों के रूप में नियम बनाने की शक्ति है।

B. भारत सरकार अधिनियम, 1935 में संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग और प्रत्येक प्रांत या प्रांतों के समूह के लिए एक प्रांतीय लोक सेवा आयोग की परिकल्पना की गई थी।

C. संघीय लोक सेवा आयोग को 1950 में संविधान के अनुच्छेद 378 के खंड (1) के आधार पर संघ लोक सेवा आयोग के नाम से जाना जाने लगा।

Correct Answer: (b) केवल B और C
Solution:
  • अनुच्छेद 218 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग एवं संयुक्त लोक सेवा आयोग की दशा में राष्ट्रपति और राज्य लोक सेवा आयोग की दशा में राज्यपाल आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों तथा कर्मचारियों की सेवा शर्तों के संबंध में उपबंध कर सकेंगे। अतः कथन A असत्य है, जबकि कथन B एवं C सही हैं।
  • संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का परिचय
    • संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) भारत का संवैधानिक निकाय है जो केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं जैसे IAS, IPS, IFS आदि के लिए भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है।
    • यह भारतीय संविधान के भाग XIV (अनुच्छेद 315-323) के तहत स्थापित है और स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।​
  • संरचना और नियुक्ति
    • UPSC में एक अध्यक्ष और 9 से 10 सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है।
    • राष्ट्रपति अनुच्छेद 318 के तहत सेवा शर्तों को निर्धारित करते हैं, न कि संसद।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत संघीय लोक सेवा आयोग की स्थापना हुई, जिसे 1950 में संविधान के अनुच्छेद 378(1) के आधार पर UPSC नाम दिया गया।
    • अधिनियम में संघ के लिए एक PSC और प्रांतों के लिए प्रांतीय PSC की कल्पना की गई थी।​
  • शक्तियां और कार्य
    • UPSC भर्ती, पदोन्नति, अनुशासनिक मामलों पर सलाह देता है। इसकी सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन सामान्यतः स्वीकार की जाती हैं।
    • यह राज्य लोक सेवा आयोगों को सहायता भी प्रदान करता है।​
  • सामान्य कथनों की जांच
    • प्रश्न में उल्लिखित सामान्य कथनों के आधार पर:
    • कथन 1 (संसद को सेवा शर्तें निर्धारित करने का अधिकार): असत्य, क्योंकि यह राष्ट्रपति को है।​
    • कथन 2 (1935 अधिनियम में संघ PSC का प्रावधान): सत्य।​
    • कथन 3 (1950 में नाम परिवर्तन अनुच्छेद 378(1) से): सत्य।​