वर्गिकी (जीव विज्ञान) (भाग-I)

Total Questions: 30

21. द्विकोरकी प्राणियों के एक उदाहरण की पहचान करें। [CGL (T-I) 05 दिसंबर, 2022 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) सीलेंटेरटा
Solution:
  • द्विकोरकी (Diploblastic) प्राणी वे होते हैं जिनमें दो भ्रूणीय परतें (एक्टोडर्म और एंडोडर्म) होती हैं
  • उनके बीच एक अविभेदित मेसोग्लिया परत होती है।
  • सीलेंटेरटा (या नाइडेरिया) जैसे हाइड्रा और जेलीफिश द्विकोरकी होते हैं।
  • प्लेटीहेल्मिन्थीज, कॉर्डेटा और एरेक्निडा त्रिकोरकी (triploblastic) होते हैं
  • हाइड्रा का उदाहरण
    • हाइड्रा एक छोटा, ट्यूब जैसा, ताजे पानी का सीलेन्टरेट प्राणी है जो पौधे जैसा दिखता है लेकिन प्राणी है।
    • इसका शरीर रेडियल सममित होता है
    • जिसमें ऊपरी ओर हाइपोस्टोम (मुंह) और टेंटेकल्स होते हैं
    • जो नेमाटोसिस्ट्स (डंक मारने वाले कोशिकाएं) से लैस रहते हैं।
    • ये टेंटेकल्स शिकार (जैसे छोटे क्रस्टेशियन) को पकड़ने के लिए उपयोग होते हैं।​
  • शरीर संरचना
    • हाइड्रा का शरीर गैस्ट्रोवास्कुलर कैविटी (कोएलेंटरॉन) से भरा होता है
    • जो पाचन, श्वास, और उत्सर्जन का कार्य करता है। पाचन आंतरिक और बाह्य दोनों रूप से होता है
    • जबकि गैसों का आदान-प्रदान सरल विसरण द्वारा। नर्व नेट एक सरल तंत्रिका जाल प्रदान करता है
    • लेकिन कोई केंद्रीय मस्तिष्क नहीं होता। प्रजनन अलैंगिक (बडिंग द्वारा) या लैंगिक दोनों तरीकों से होता है।​
  • अन्य उदाहरण
    • जेलीफिश (जैसे ऑरेलिया): मुक्त-तैराकी मेडуса रूप, छतरी आकार का।​
    • समुद्री ऐनीमोन: स्थायी पॉलीप रूप, चट्टानों पर चिपके रहते हैं।​
    • ये सभी मुख्यतः समुद्री होते हैं, लेकिन हाइड्रा मीठे पानी का अपवाद है।​

22. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म, गलत रूप से सुमेलित है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) टेरिडोफाइटा - साइकस
Solution:
  • टेरिडोफाइटा का उदाहरण साइकस नहीं है, साइकस पौधा अनावृतबीजी (Gymnosperm) का एक उदाहरण है।
  • साइकस एक सदाबहार पौधा होता है, जो कि देखने में ताड़ जैसा होता है
  • परंतु अधिक ऊंचा नहीं होता है, यह विश्वव्यापी पौधा है।
  • टेरिडोफाइटा के उदाहरण, लाइकोपोडियम, सिलेजिनेला, ड्रायोप्टेरिस आदि हैं
  • अतः दिए गए विकल्प (d) का युग्म गलत है।
  • सामान्य विकल्प
    • सामान्यतः विकल्प इस प्रकार होते हैं:
    • हरलॉक - स्व-अवधारणा
    • गॉर्डन ऑलपॉर्ट - व्यक्तित्व लक्षण
    • मायर्स-ब्रिग्स - व्यक्तित्व प्राथमिकताएं
    • सिगमंड फ्रायड - OCEAN मॉडल​
  • गलत युग्म
    • सिगमंड फ्रायड - OCEAN मॉडल गलत सुमेलित है।
    • सिगमंड फ्रायड ने मनोविश्लेषण सिद्धांत (Id, Ego, Superego) विकसित किया, न कि OCEAN मॉडल को।
    • मॉडल को कॉस्टा और मैकरे ने 1980-90 के दशक में विकसित किया।​
  • अन्य युग्मों की पुष्टि
    • हरलॉक: E.B. Hurlock ने "Personality Development" पुस्तक में स्व-अवधारणा (Self-Concept) पर विस्तार से चर्चा की।​
    • गॉर्डन ऑलपॉर्ट: व्यक्तित्व के लक्षण सिद्धांत (Trait Theory) के जनक, 18,000 से अधिक लक्षण वर्गीकृत किए।​
    • मायर्स-ब्रिग्स: MBTI टेस्ट 16 व्यक्तित्व प्रकारों पर आधारित, Jung के सिद्धांत से प्रेरित।​
  • अन्य संभावित प्रश्न प्रकार
    • यदि भिन्न विकल्प हैं, तो ये भी सामान्य गलत युग्म हो सकते हैं:
    • परजीवी: एंकिलोस्टोमा - पिनवर्म (वास्तव में एंकिलोस्टोमा हुकवर्म है, पिनवर्म Enterobius vermicularis)​
    • भू-आकृति: मीएंडर - चट्टान-ढलान पक्ष (क्षरण बाहरी मोड़ पर अधिक

23. निम्नलिखित में से कौन ताजे पानी के तालाबों, झीलों और दलदलों में पाए जाने वाले जंतुओं का संघ है जिनमें चलन (locomotion) हेतु शूक (setae) या पैरापोडिया होती है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) एनेलिडा
Solution:
  • एनेलिडा वह समुदाय है जो ताजे पानी के तालाबों, झीलों एवं दलदलों में पाए जाने वाले जंतुओं का संघ है
  • इनमें चलने के लिए शूक (Setae) या पैरापोडिया (Parapodia) पाई जाती है।
  • एनेलिडा का अर्थ खंडयुक्त कृमि (Segemented worms) होता है।
  • इसके प्रमुख उदाहरण हैं-नेरीस, हीरुडिनेरिया (इसे सामान्य भाषा में भारतीय जोंक कहा जाता है)।
  • एनेलिडा संघ की विशेषताएँ
    • एनेलिडा संघ के जंतु खंडित कृमि (segmented worms) होते हैं
    • जिनका शरीर बाह्य तथा आंतरिक रूप से खंडों (segments) में विभाजित होता है।
    • इनमें चिटिनस बालों जैसी संरचनाएँ शूक कहलाती हैं, जो मिट्टी या जल में चलने-फिरने में सहायक होती हैं।
    • जलीय एनेलिड्स जैसे जोंक (leeches) और कुछ पॉलीकाइट्स (polychaetes) में पैरापोडिया नामक फलकाकार उपांग विकसित होते हैं, जो तैराकी में मदद करते हैं।​
  • निवास स्थान
    • ये जंतु मुख्य रूप से मीठे पानी के तालाबों, झीलों, दलदलों और नदियों में पाए जाते हैं
    • हालांकि कुछ स्थलीय (जैसे केंचुआ) या समुद्री भी होते हैं।
    • मीठे पानी में ये जैविक पदार्थों का अपघटन करके पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, ताजे पानी की जोंकें (Hirudinaria) रक्त चूसने वाली परजीवी या मुक्तजीवी हो सकती हैं।​
  • चलन की संरचनाएँ
    • शूक (Setae): ये छोटे, कठोर चिटिनस बाल होते हैं जो प्रत्येक खंड पर 4-8 जोड़े होते हैं।
    • ये मिट्टी में पकड़ बनाने या जल में धक्का देने में सहायक होते हैं।
    • पैरापोडिया (Parapodia): जलीय एनेलिड्स में ये खंडों पर निकले फलक होते हैं
    • जिनमें मांसपेशियाँ और रक्त वाहिकाएँ होती हैं। ये तैराकी और श्वसन दोनों में भूमिका निभाते हैं।​

24. निम्नलिखित में से कौन-सा लाल शैवाल है? [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) रोडोफाइसी
Solution:
  • रोडोफाइसी (Rhodophyceae) को लाल शैवाल कहा जाता है। अधिकांश शैवाल जलीय होते हैं
  • ये अपना भोज्य पदार्थ स्टार्च के रूप में संचित करते हैं तथा इनकी कोशिका भित्ति सेलुलोज की बनी होती है।
  • रंजकों के आधार पर शैवाल को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है
  • क्लोरोफाइसी, (2) फियोफाइसी तथा (3) रोडोफाइसी। रोडोफाइसी को सामान्यतया लाल शैवाल कहते हैं
  • क्योंकि उनके शरीर में लाल वर्णक, आर-फाइकोएरिथ्रिन
  • आर-फाइकोसायनिन नामक रंगद्रव्य (Pigment) की मात्रा अधिक होती है।
  • क्लोरोफाइसी को हरे शैवाल तथा फियोफाइसी को भूरे शैवाल कहा जाता है
  • विशेषताएँ
    • लाल शैवालों में क्लोरोफिल-ए के साथ फ़ाइकोसायनिन और फ़ाइकोएरिथ्रिन जैसे सहायक वर्णक मौजूद होते हैं
    • जो उन्हें लाल, गुलाबी या बैंगनी रंग प्रदान करते हैं । ये बहुकोशिकीय होते हैं, फ्लैजेला और सेंट्रिओल की कमी होती है
    • इनकी कोशिका भित्ति में पेक्टिन और सेल्यूलोज़ के अलावा गड्ढेदार संरचनाएँ (पिट्स) पाई जाती हैं ।
    • ये गहरे समुद्री जल में भी प्रकाश संश्लेषण कर सकते हैं
    • क्योंकि उनके वर्णक नीले प्रकाश को अच्छी तरह अवशोषित करते हैं ।​
  • वर्गीकरण
    • रोडोफाइटा दो मुख्य वर्गों में विभाजित है: फ्लोराइडोफाइसी और बैंगियोफाइसी ।
    • लगभग 7,000 प्रजातियाँ ज्ञात हैं, जिनमें से अधिकांश समुद्री हैं और प्रवाल भित्तियों के निर्माण में सहायक हैं
    • क्योंकि ये कैल्शियम कार्बोनेट स्रावित करते हैं ।
    • भारत में पोरफायरा (Porphyra) और ग्रैसिलैरिया (Gracilaria) जैसी प्रजातियाँ सामान्य हैं ।​
  • महत्वपूर्ण उदाहरण
    • पोरफायरा (Porphyra): नोरि के नाम से जाना जाता है, खाद्य उद्योग में उपयोग ।​
    • ग्रैसिलैरिया: एगर-एगर का स्रोत, जैल बनाने में प्रयुक्त ।​
    • जेलिडियम: एगर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध ।​
    • कोरलाइन शैवाल: कठोर थैलस वाले, प्रवाल निर्माण में भूमिका ।​
    • ये उदाहरण प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं
    • जहाँ रोडोफाइसी को लाल शैवाल के रूप में पहचाना जाता है
    • जबकि क्लोरोफाइसी (हरे शैवाल) और फियोफाइसी (भूरे शैवाल) अलग हैं ।​
  • पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व
    • लाल शैवाल समुद्री पारिस्थितिकी में प्राथमिक उत्पादक हैं
    • शाकाहारी जीवों के भोजन स्रोत हैं । ये एगर, कारेजीनन जैसे हाइड्रोकोलाइड्स उत्पन्न करते हैं
    • जो खाद्य, चिकित्सा और कॉस्मेटिक उद्योगों में उपयोगी हैं । कुछ प्रजातियाँ गहरे मीठे जल में भी पाई जाती हैं ।​

25. एक प्रजनन रणनीति का नाम बताइए जिसमें परजीवी एक ही प्रजाति या विभिन्न प्रजातियों के अन्य जीवों की देखभाल का लाभ उठाते हैं जिससे वे अपने बच्चों को पाल सकें- [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) शाव परजीविता
Solution:
  • 'शाव परजीविता' वह प्रजनन नीति है, जिसमें परजीवी एक ही प्रजाति या विभिन्न प्रजातियों के अन्य जीवों की देखभाल का लाभ उठाते हैं
  • जिससे वे अपने बच्चों को पाल सकें, उदाहरण-कोयल पक्षी।
  • क्लैप्टो परजीविता एक भोजन रणनीति को संदर्भित करता है
  • जिसमें एक परजीवी अक्सर दूसरे परजीवी का पीछा करके या उसे परेशान करके उसका भोजन चुराता है
  • उदाहरण-मधुमक्खी। प्रतिस्पर्धी परजीविता में अक्सर एक परजीवी एक मेजबान के व्यवहार या शरीर विज्ञान में हेरफेर करके उसके संसाधनों और प्रजनन पर कब्जा कर लेता है
  • उदाहरण-टेपवर्म। जबकि लैंगिक परजीविता में एक नर या मादा दूसरे को धोखा देकर अथवा उसके साथ जबरदस्ती करके एक साथी तक पहुंच प्राप्त करता है
  • उदाहरण-सूत्रकृमि शिस्टोसोमा का नर, शरीर पर बनी कुल्या (Caual) में मादा को रखता है।
  • प्रमुख उदाहरण
    • कोयल (Cuckoo): सामान्य कोयल (Cuculus canorus) छोटे पक्षियों जैसे गौरैया या प्रधान पक्षी के घोंसले में अंडे देती है।
    • उसके अंडे मेजबान के अंडों से मिलते-जुलते होते हैं, जिसे egg mimicry कहते हैं।​
    • काउबर्ड (Cowbird): उत्तरी अमेरिका में ये विभिन्न पक्षियों के घोंसलों का शिकार करते हैं
    • कई मेजबानों में अंडे देते हैं।
    • अन्य: हनीगाइड पक्षी, कुछ मछलियां (जैसे सिक्लिड्स), कीड़े (जैसे वास्प्स जो अन्य कीड़ों के लार्वा पर परजीवी होते हैं
    • स्तनधारी भी इस रणनीति का उपयोग करते हैं।​
  • अनुकूलन और लाभ
    • परजीवी ने कई अनुकूलन विकसित किए हैं:
    • अंडे नकल: अंडों का रंग, आकार और धब्बे मेजबान से मिलाते हैं।
    • तेज विकास: परजीवी चूजे मेजबान से पहले फूटते हैं और बड़े होते हैं।
    • मेजबान अंडे नष्ट: अक्सर मेजबान अंडे को घोंसले से बाहर फेंक देते हैं।​
    • लाभ में प्रजनन क्षमता बढ़ना शामिल है, क्योंकि परजीवी एक से अधिक घोंसलों में अंडे दे सकती है
    • बिना देखभाल की जिम्मेदारी लिए। इससे उनकी उत्तरजीविता दर ऊंची हो जाती है।​
  • मेजबान पर प्रभाव
    • मेजबान के लिए यह घातक हो सकता है, क्योंकि परजीवी चूजे अधिक भोजन खाते हैं
    • मेजबान के अपने बच्चों को भूखा मार सकते हैं। हालांकि, कुछ मेजबान प्रतिरक्षा विकसित कर चुके हैं
    • जैसे अंडे पहचानना या परजीवी को घोंसले से भगाना ("माफिया व्यवहार" जहां परजीवी घोंसला नष्ट कर देते हैं
    • अगर अस्वीकार किया जाए)। लागत मेजबान की प्रजाति, परजीवी संख्या और वैकल्पिक घोंसले की उपलब्धता पर निर्भर करती है।​
  • अन्य संबंधित रणनीतियां
    • यौन परजीविता (Sexual Parasitism): साथी या घोंसले तक पहुंच के लिए धोखा, लेकिन बच्चों की देखभाल से अलग।​
    • यह रणनीति विकासवादी दृष्टि से आकर्षक है, जो सह-विकास (co-evolution) को दर्शाती है
    • जहां मेजबान और परजीवी एक-दूसरे के अनुकूलन में सुधार लाते हैं।​

26. फर्न, हॉर्सटेल और लाइकोफाइट्स निम्नलिखित में से किस समूह से संबंधित हैं? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) टेरिडोफाइटा
Solution:
  • फर्न, हॉर्सटेल और लाइकोफाइट्स सभी टेरिडोफाइटा समूह से संबंधित हैं।
  • टेरिडोफाइटा के पौधे सामान्यतया नम, छायादार क्षेत्रों में पाए जाते हैं, ये बीजरहित संवहनी पादप हैं
  • जिनमें बीज नहीं पाए जाते एवं प्रजनन बीजाणुओं द्वारा होता है।
  • टेरिडोफाइटा की विशेषताएँ
    • टेरिडोफाइटा पौधों का एक प्रमुख समूह है
    • जिसमें फर्न (Ferns), हॉर्सटेल (Horsetails या Equisetum) और लाइकोफाइट्स (Lycophytes जैसे क्लबमॉस और स्पाइकमॉस) शामिल होते हैं।
    • ये पौधे जड़, तना और पत्तियों से युक्त होते हैं तथा संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) मौजूद होते हैं,
    • जो पानी और पोषक तत्वों का परिवहन करते हैं। इन्हें क्रिप्टोगैम्स कहा जाता है
    • क्योंकि इनके प्रजनन अंग छिपे हुए होते हैं
    • ये नम, छायादार स्थानों में पनपते हैं।
    •  जीवन चक्र में स्पोरोफाइट (प्रमुख चरण) और गैमेटोफाइट (प्रोथैलस) दोनों चरण होते हैं।​
  • इन पौधों के उदाहरण
    • फर्न: विविध प्रकार के, पंख जैसे पत्ते (फ्रॉन्ड्स) वाले, स्पोरें पत्तियों के नीचे स्पोरैंगिया में। लगभग 12,000 प्रजातियाँ।​
    • हॉर्सटेल: खरपुष्पी या अश्वपुच्छ, जोड़दार तना, सिलिका युक्त, औषधीय गुण।​
    • लाइकोफाइट्स: क्लबमॉस और स्पाइकमॉस जैसे, प्राचीन समूह, लगभग 1,200 प्रजातियाँ, संवहनी लेकिन बिना फूल-बीज।​

27. उस जीव की पहचान करें जिसमें द्विपक्षीय समरूपता नहीं है- [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) निडारियन
Solution:
  • निडारियन (Cnidarians) जैसे जेलीफिश और समुद्री एनीमोन में रेडियल समरूपता (radial symmetry) होती है
  • द्विपक्षीय समरूपता वाले जीवों को एक ही तल से दो समान हिस्सों में काटा जा सकता है।
  • आर्थोपोडा, एनेलिडा और मोलस्का में द्विपक्षीय समरूपता होती है।
  • समरूपता के प्रकार
    • जीवों में समरूपता तीन मुख्य प्रकार की होती है: असममिति (asymmetry), अरीय समरूपता और द्विपक्षीय समरूपता।
    • असममिति स्पंज (Porifera) जैसे जीवों में पाई जाती है, जहां कोई सममित तल नहीं होता।
    • अरीय समरूपता में शरीर के केंद्रीय अक्ष के चारों ओर कोई भी तल (plane) जीव को दो समान भागों में विभाजित कर सकता है
    • जैसे पहिये की तीलियां। द्विपक्षीय समरूपता में केवल एक ही मध्य तल (midsagittal plane) शरीर को बाएं-दाएं समान भागों में बांटता है
    • जो अधिकांश जंतुओं जैसे कृमि, कीट, मछली और मनुष्यों में पाया जाता है।​
  • नाइडेरियन क्यों अपवाद हैं
    • नाइडेरियन एकमात्र प्रमुख जंतु संघ है जिसमें द्विपक्षीय समरूपता नहीं होती। इनका शरीर थैली जैसा (sac-like) होता है
    • जिसमें मुख और गुदा एक ही छिद्र (hypostome) होता है
    • जो अंतर्ग्रहण और उत्सर्जन दोनों करता है। यह सरल शारीरिक संरचना अरीय समरूपता को अनुकूल बनाती है
    • क्योंकि ये जीव स्थिर या तैरते रहते हैं और भोजन चारों ओर से आ सकता है।
    • उदाहरणस्वरूप, जेलीफिश का शरीर ऊर्ध्वाधर अक्ष पर सममित होता है, न कि बाएं-दाएं।​
    • नाइडेरियन की तुलना में मोलस्का, ऐनेलिडा और आर्थ्रोपोडा सभी द्विपक्षीय होते हैं
    • जिनमें गति के लिए स्पष्ट सिर और पैर क्षेत्र विकसित होते हैं। एकाइनोडर्म्स में वयस्क चरण अरीय होता है
    • लेकिन लार्वा द्विपक्षीय से शुरू होता है।​
  • जैविक महत्व
    • द्विपक्षीय समरूपता गति, संवेदी अंगों (जैसे आंखें आगे) और जटिल तंत्रिकाओं के विकास से जुड़ी है
    • जो नाइडेरियन में सीमित होती है। इनमें सरल तंत्रिका जाल (nerve net) होता है
    • यह समरूपता विकासवादी रूप से प्राचीन है और स्थिर पर्यावरण के लिए अनुकूल।​

28. निम्नलिखित में से किस जंतु संघ में शरीर सिर, वक्ष और उदर में विभाजित होता है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) आर्थ्रोपोडा
Solution:
  • संघ आर्थोपोडा में शरीर सिर, वक्ष एवं उदर में विभाजित होता है।
  • इनका शरीर काइटिनी बाह्य कंकाल से ढका होता है। इस संघ में संधियुक्त उपांग पाए जाते हैं
  • इनका परिसंचरण तंत्र खुले प्रकार का होता है। इस संघ में उत्सर्जन मैलपिगी नलिकाओं के माध्यम से होता है।
  • आर्थ्रोपोडा की मुख्य विशेषताएँ
    • आर्थ्रोपोडा के जंतुओं का शरीर खंडित (segmented) होता है, जिसमें सिर, वक्ष और उदर तीन प्रमुख भाग होते हैं।
    • कभी-कभी सिर और वक्ष मिलकर सिरोवक्ष (cephalothorax) बनाते हैं
    • जैसा कि क्रस्टेशियन और अराक्निडा में देखा जाता है।
    • इनका बाह्यकंकाल काइटिन से बना होता है, जो जोड़ों (जoints) से जुड़ा रहता है
    • इसलिए इन्हें संधिपाद (arthropoda) कहा जाता है।
    • संयुक्त पैर और उपांग गति, भोजन तथा प्रजनन में सहायक होते हैं।​
  • शरीर विभाजन का विवरण
    • सिर (Head): इसमें संयुक्त आँखें, एंटीना (antennae) और मुँह के भाग होते हैं
    • जो इंद्रिय बोध और भोजन ग्रहण के लिए जिम्मेदार होते हैं।
    • वक्ष (Thorax): इसमें पैर और कभी-कभी पंख जुड़े होते हैं। कीटों में सामान्यतः तीन जोड़ी पैर वक्ष से निकलते हैं।
    • उदर (Abdomen): इसमें पाचन, उत्सर्जन, श्वसन और जनन अंग स्थित होते हैं।
    • यह भाग लचीला होता है और कई खंडों में बँटा रहता है।​
  • अन्य संघों से तुलना
    • मोलस्का संघ में शरीर सिर, पेशीय पाद (muscular foot) और विसरल कूबड़ (visceral hump) में बँटा होता है।
    • कॉर्डेटा में नॉटोकॉर्ड आदि लक्षण होते हैं, लेकिन ऐसा स्पष्ट त्रिभागी विभाजन नहीं।
    • आर्थ्रोपोडा ही ऐसा विशिष्ट विभाजन प्रदर्शित करता है।​
  • महत्वपूर्ण उदाहरण
    • कीट (Insects): तितली, मच्छर, चींटी—इनका शरीर स्पष्ट रूप से सिर, वक्ष, उदर में बँटा।
    • क्रस्टेशियन (Crustaceans): झींगा, केकड़ा—सिरोवक्ष और उदर।
    • अराक्निडा (Arachnids): मकड़ी, बिच्छू—सिरोवक्ष और उदर।
    • ये जंतु पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।​

29. जिम्नोस्पर्म के बारे में गलत कथन का चयन कीजिए। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) जिम्नोस्पर्म बीज रहित फूल वाले पौधे हैं।
Solution:
  • जिम्नोस्पर्म पौधों का एक समूह है जिसमें बीज तो होता है, परंतु इसमें फूल नहीं होते हैं।
  • जिम्नोस्पर्म काष्ठीय झाड़ियों, पेड़ों एवं बेलों के रूप में पाए जाते हैं
  • इनमें कोई वास्तविक, जलीय शामिल नहीं होता है और कुछ एपिफाइट्स शामिल होते हैं।
  • जिम्नोस्पर्म आमतौर पर प्रजनन के मामले में धीमे होते हैं, परागण और निषेचन के बीच एक वर्ष तक का समय लग सकता है
  • बीज की परिपक्वता के लिए 3 वर्ष की आवश्यकता होती है। अतः विकल्प (b) का कथन गलत है।
  • जिम्नोस्पर्म की प्रमुख विशेषताएँ
    • जिम्नोस्पर्म नग्नबीजी पादप हैं, जो साइकैडेली, कोनिफेरा, जिन्कोएसी और गनेलेटा जैसे वर्गों में विभाजित हैं।
    • इनमें बीज शंकुओं (cones) पर विकसित होते हैं और फूल अनुपस्थित रहते हैं।
    • ये सदाबहार वृक्ष या झाड़ियाँ रूप में पाए जाते हैं, जैसे पाइन, सीक्वॉया और जिन्कगो।​​
  • द्विनिषेचन क्या है?
    • द्विनिषेचन एक विशेष प्रक्रिया है जिसमें एक परागकण से दो शुक्राणु निकलते हैं
    • एक मादा युग्मक से मिलकर भ्रूण बनाता है, जबकि दूसरा ध्रुवीय केंद्रक से मिलकर ट्रिपलॉइड एंडोस्पर्म बनाता है।
    • यह प्रक्रिया केवल आवृतबीजी पादपों (Angiosperms) में पाई जाती है।​
  • क्यों गलत है यह कथन जिम्नोस्पर्म पर?
    • जिम्नोस्पर्म में निषेचन साधारण प्रकार का होता है, जिसमें केवल एक शुक्राणु मादा गैमेट से संलयन करता है
    • एंडोस्पर्म पहले से ही मादा गैमेटोफाइट में उपस्थित होता है।
    • द्विनिषेचन एकबीजपत्री या द्विबीजपत्री दोनों प्रकार के एंजियोस्पर्म्स का लक्षण है
    • उदाहरणस्वरूप, सीक्वॉया (जिम्नोस्पर्म का सबसे लंबा वृक्ष) में भी यही प्रक्रिया होती है।​​
  • अन्य सामान्य कथन और उनकी सत्यता
    • सही कथन: जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न होते हैं (फलों में बंद नहीं)।​
    • सही कथन: ये लकड़ीदार पादप हैं, जलीय या परजीवी नहीं।​
    • गलत कथन का उदाहरण: जिम्नोस्पर्म बीजरहित होते हैं (वास्तव में ये बीज वाले हैं)।​
    • ये पादप मोटे तौर पर धीमे प्रजनक होते हैं, जिनमें परागण हवा या कीटों द्वारा होता है।​

30. पृथुकृमि (प्लेटिहेल्मिन्थीज) में परासरण नियमन में कौन-सी कोशिकाएं मदद करती हैं? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) ज्वाला कोशिकाएं
Solution:
  • पृथुकृमि (प्लेटिहेल्मिन्थीज) में परासरण नियमन में ज्वाला कोशिकाएं (Flame Cells) सहायता करती हैं।
  • परासरण नियमन वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा शरीर के भीतर पानी और आयनों का संतुलन बनाए रखा जाता है।
  • यह ज्वाला कोशिकाएं परासरण नियमन के साथ-ही-साथ अपशिष्ट उत्पादों को हटाने में भी सहायता करती हैं।
  • ज्वाला कोशिकाओं की संरचना
    • ज्वाला कोशिकाएं कप के आकार की विशेष कोशिकाएं होती हैं
    • जिनमें सिलिया (cilia) नामक बालिकाएं होती हैं। ये सिलिया निरंतर कंपन करती रहती हैं
    • जिससे वे लौ (flame) की तरह दिखाई देती हैं—यही कारण है
    • उनका नाम "फ्लेम सेल"। प्रत्येक ज्वाला कोशिका एक सिलियोस ट्यूबुल (ciliated tubule) से जुड़ी होती है
    • जो संकुचनशील नलिकाओं (contractile canal) के माध्यम से शरीर के बाहर एक्सक्रेटरी पोर (excretory pore) तक जाती है।
    • इस संरचना के कारण ये कोशिकाएं सूक्ष्म फिल्ट्रेशन यूनिट की तरह कार्य करती हैं।​
  • परासरण नियमन की प्रक्रिया
    • प्लेटीहेल्मिन्थीज अधिकांशतः जलीय पर्यावरण में रहते हैं, जहां उनका शरीर हाइपोटॉनिक (कम सांद्रता वाला) होता है।
    • इससे शरीर में पानी का अत्यधिक अंतःप्रवाह (endo-osmosis) होता है।
    • ज्वाला कोशिकाएं इस अतिरिक्त पानी को फिल्टर करती हैं:
    • सिलिया द्वारा उत्पन्न धारा से प्रोटोप्लाज्मिक द्रव्य (जिसमें पानी, आयन और अपशिष्ट शामिल होते हैं
    • ज्वाला कोशिका में प्रवेश करता है।
    • सेलुलर फिल्ट्रेशन के बाद शुद्ध पानी और अपशिष्ट नलिकाओं से होकर बाहर निकल जाते हैं
    • जबकि उपयोगी आयन पुन:अवशोषित हो जाते हैं।
    • यह प्रक्रिया अल्ट्राफिल्ट्रेशन और सלק्टिव रिऐब्सॉर्प्शन पर आधारित है, जो किडनी के नेफ्रॉन से मिलती-जुलती है।​​
  • प्रोटोनेफ्रिडिया तंत्र का योगदान
    • ज्वाला कोशिकाएं प्रोटोनेफ्रिडिया की टर्मिनल भाग होती हैं। पूरा तंत्र इस प्रकार कार्य करता है:
    • ज्वाला कोशिकाएं → संग्रहक नलिकाएं (collecting ducts) → मुख्य नलिका (main canal) → एक्सक्रेटरी पोर।
    • यह विकेंद्रीकृत तंत्र पूरे शरीर में फैला होता है
    • जो प्लेटीहेल्मिन्थीज की सपाट संरचना के अनुकूल है।
    • परजीवी प्रजातियों (जैसे फ्लुक) में यह तंत्र मेजबान के हाइपरटॉनिक वातावरण में भी संतुलन बनाए रखता है।