वर्गिकी (जीव विज्ञान) (भाग-II)

Total Questions: 27

11. निम्नलिखित में से कौन-सा 'जरायुज' जंतु का एक उदाहरण नहीं है? [MTS (T-I) 14 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) पक्षी
Solution:
  • वह जंतु जो शिशु को जन्म देते हैं, उन्हें 'जरायुज' जंतु कहते हैं।
  • जरायुज जंतुओं में भ्रूण का विकास मादा शरीर के भीतर होता है।
  • बिल्ली, गाय एवं कुत्ता शिशु को जन्म देते हैं; परंतु पक्षी शिशु के स्थान पर अंडे देते हैं
  • अतः पक्षी 'जरायुज' (Viviparous) जंतु नहीं हैं। लेकिन विकल्प नहीं दिए गए हैं; फिर भी, सामान्यत
  • इस प्रकार के प्रश्नों में अंडज जंतुओं (जैसे चूजा, कीट या मेंढक) को शामिल किया जाता है, जिनमें से कोई भी जरायुज नहीं होता।​​
  • जरायुज जंतुओं की परिभाषा
    • जरायुज जंतु (viviparous animals) स्तनधारियों के अधिकांश उदाहरण हैं
    • जैसे मनुष्य, कुत्ता, बिल्ली, खरगोश (rabbit) और कंगारू, जहां निषेचन आंतरिक होता है
    • भ्रूण माता के शरीर में पोषण प्राप्त करता है। ये जंतु अंडे नहीं देते, बल्कि सीधे जीवित बच्चे पैदा करते हैं
    • जो जन्म के समय स्वतंत्र जीवन जीने योग्य होते हैं।
    • इसके विपरीत, अंडज जंतु (oviparous) अंडे देते हैं, जिनसे लार्वा या चूजे निकलते हैं।​​
  • सामान्य गैर-जरायुज उदाहरण
    • यदि प्रश्न के संभावित विकल्प चीक (chick/चूजा), इंसेक्ट (कीट), फ्रॉग (मेंढक) और रैबिट (खरगोश) हैं
    • तो इनमें चीक, इंसेक्ट और फ्रॉग अंडज जंतु हैं।​
    • चीक मुर्गी के अंडे से निकलता है, इसलिए अंडज।
    • इंसेक्ट (जैसे तितली) लार्वा रूप में अंडे से विकसित होते हैं।
    • फ्रॉग भी अंडे देता है, जिनसे टैडपोल (लार्वा) निकलते हैं।
      रैबिट जरायुज है, लेकिन प्रश्न "कौन-सा जरायुज नहीं है" पूछता है
    • अतः चीक, इंसेक्ट या फ्रॉग में से कोई एक सही उत्तर होगा।​

12. शैवाल के किस वर्ग को प्रायः भूरा शैवाल कहा जाता है? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) फीयोफाइसी
Solution:
  • फियोफाइसी (Phaeophyceae) कुल के सदस्यों को सामान्यतया भूरा शैवाल (Brown Algae) कहते हैं।
  • ये मुख्यतः समुद्री आवास में पाए जाते हैं। इनमें क्लोरोफिल a एवं c, कैरोटिनॉइड तथा फ्यूकोजैन्थिन (Fucoxanthis) होता है।
  • इनमें कायिक जनन विखंडन विधि द्वारा होता है।
  • निवास और वितरण
    • ये शैवाल ज्यादातर ठंडे समुद्री जल में, जैसे उत्तरी गोलार्ध के तटों पर पाए जाते हैं
    • मीठे पानी में दुर्लभ होते हैं। लगभग 1500-2000 प्रजातियाँ ज्ञात हैं
    • जो केल्प (लार्ज समुद्री शैवाल) जैसे विशालकाय रूपों में पाई जाती हैं
    • जो पानी के नीचे जंगल बनाती हैं। ये अंतर्ज्वारीय क्षेत्रों में लहरों का सामना करने के लिए मजबूत संरचना विकसित करते हैं।​​
  • आर्थिक महत्व
    • भूरे शैवाल से एल्गिनेट निकाला जाता है, जो खाद्य उद्योग में गाढ़ापन प्रदान करने, कपड़ा, कागज और दवा में उपयोगी होता है।
    • ये समुद्री जीवों के लिए भोजन और आवास प्रदान करते हैं
    • जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं। कुछ प्रजातियाँ, जैसे सारगसम, उर्वरक और पशु चारे के रूप में भी काम आती हैं।​​

13. नीला-हरा शैवाल एनाबिना (Anabaena) मीठे पानी के फर्न अजोला (Azolla) की पत्तियों में रहता है, जो निम्नलिखित में से कौन-सा संबंध बनाता है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) सहजीवी
Solution:
  • नीला-हरा शैवाल एनाबिना (Anabaena) मीठे पानी के फर्न अजोला (Azolla) की पत्तियों में रहता है
  • जो सहजीवी संबंध बनाता है। यहां पर एनाबिना और अजोला मिलकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अवशोषित कर उर्वरक के रूप में परिवर्तित कर देते हैं
  • जिससे धान की खेती के लिए अधिक उपयोगी हो जाते हैं।
  • सहजीवी संबंध की व्याख्या
    • सहजीवी संबंध दो अलग-अलग जीवों के बीच घनिष्ठ शारीरिक निकटता वाला होता है
    • जिसमें दोनों को लाभ मिलता है। एनाबिना अजोला की पत्तियों की गुहाओं में रहता है
    • वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर (नाइट्रोजन फिक्सेशन) करके अजोला को उपलब्ध कराता है
    • जो पौधे की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्व है।
    • इसके बदले अजोला एनाबिना को सुरक्षित आवास, कार्बन डाइऑक्साइड, खनिज लवण और अन्य पोषक तत्व प्रदान करता है।​
  • जैविक महत्व
    • यह संबंध पारिस्परिकता (mutualism) का उत्कृष्ट उदाहरण है
    • जो अजोला को तेजी से बढ़ने और नाइट्रोजन-समृद्ध बायोफर्टिलाइजर बनने में मदद करता है।
    • धान के खेतों में अजोला की खेती करने पर एनाबिना द्वारा मुक्त नाइट्रोजन पानी में घुलकर चावल की फसल को लाभ पहुंचाता है
    • जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है। यह पर्यावरण-अनुकूल कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।​
  • कृषि और पारिस्थितिक उपयोग
    • अजोला-एनाबिना को जैविक खाद के रूप में एशिया के चावल उत्पादक क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है
    • जहां यह प्रति हेक्टेयर 20-40 किग्रा नाइट्रोजन प्रदान कर सकता है।
    • यह मछली पालन, पशु चारे और जलाशयों के नाइट्रोजन चक्र में भी योगदान देता है।
    • अध्ययनों से पता चलता है कि यह संबंध जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ कृषि का सशक्त माध्यम है।

14. निम्नलिखित में से कौन कीटवर्ग से संबंधित नहीं है? [Phase-XI 30 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) बिच्छू
Solution:
  • तिलचट्टा (Cockroach), मच्छर (Mosquito), सिल्वर फिश (Silver fish) संघ आर्थोपोडा के कीट वर्ग (Class Insecta) से संबंधित जंतु हैं
  • लेकिन बिच्छू (Scorpion) संघ आर्थोपोडा (Phylum Arthropoda) के एराक्निडा (Class-Arachnida) से संबंधित जंतु है।
  • कीटवर्ग की प्रमुख विशेषताएँ
    • कीटों का शरीर स्पष्टतः तीन खंडों में विभाजित होता है
    • सिर (मिश्रित आँखें, एक जोड़ी एंटीना), वक्ष (तीन जोड़ी संयुक्त पैर, कभी-कभी पंख) और उदर।
    • ये चिटिनयुक्त बहिःकंकाल से ढके होते हैं तथा पूर्ण कायांतरण या अपूर्ण कायांतरण द्वारा विकसित होते हैं।
    • उदाहरणतः मधुमक्खी, तितली, चींटी, टिड्डी आदि कीटवर्ग के प्रतिनिधि हैं।​
  • कीटवर्ग से बाहर के जीव
    • बिच्छू (Scorpion) और मकड़ी (Spider) अरच्निडा (Arachnida) गण के होते हैं
    • जिनमें आठ पैर, कोई एंटीना नहीं और दो मुख्य शरीर भाग (cephalothorax तथा उदर) होते हैं।
    • बिच्छू रात्रिचर मांसाहारी होते हैं तथा ओवोविविपैरस प्रजनन करते हैं
    • जबकि कीट छह पैरों वाले हेक्सापॉड होते हैं। इसी प्रकार, केकड़ा या झींगा क्रस्टेशिया (Crustacea) के होते हैं।
    • इसलिए इनमें से कोई भी कीटवर्ग से संबंधित नहीं।​
  • सामान्य भ्रम और उदाहरण
    • लोग प्रायः बिच्छू या मकड़ी को कीट समझते हैं क्योंकि वे आर्थ्रोपोडा फाइलम में आते हैं
    • किंतु वर्गीकरण में अंतर पैरों की संख्या और शरीर संरचना पर आधारित है।
    • ऋजुपक्ष कीटवर्ग (Orthoptera) में टिड्डी, झींगुर आते हैं, पर बिच्छू इससे अलग है।​

15. ....... एक भ्रूणीय मध्य रेखा संरचना है, जो कॉर्डेटा संघ के सभी सदस्यों में पाई जाती है और जो आसपास के ऊतकों के लिए मध्य रेखा संकेतों के स्रोत के रूप में और विकासशील भ्रूण के एक प्रमुख कंकाल तत्व के रूप में कार्यकरती है। [Phase-XI 28 जून, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) पृष्ठ रज्जु
Solution:
  • पृष्ठ रज्जु (Notochord) एक भ्रूणीय मध्य रेखा संरचना है, जो कॉर्डेटा संघ के सभी सदस्यों में पाई जाती है
  • जो आस-पास के ऊतकों के लिए मध्य रेखा संकेतों के स्रोत के रूप में और विकासशील भ्रूण के एक प्रमुख के काल तत्व के रूप में कार्य करती है।
  • पृष्ठरज्जु (नोटोकॉर्ड) की परिभाषा
    • पृष्ठरज्जु, जिसे नोटोकॉर्ड भी कहा जाता है, एक भ्रूणीय मध्य रेखा संरचना है
    • जो कॉर्डेटा संघ (Phylum Chordata) के सभी सदस्यों
    • उपसंघ यूकॉर्डेटा (Urochordata), सेबकॉर्डेटा (Cephalochordata) और वर्टीब्रेटा (Vertebrata)—में पाई जाती है।
    • यह मेसोडर्म की कोशिकाओं से विकसित होती है
    • भ्रूण के मध्यपृष्ठीय भाग में एक लचीली, छड़ जैसी संरचना के रूप में मौजूद रहती है
    • जो आसपास के ऊतकों के लिए मध्य रेखा संकेतों का स्रोत कार्य करती है
    • विकासशील भ्रूण का प्रमुख कंकाल तत्व बनाती है ।​
  • संरचना और विकास
    • पृष्ठरज्जु भ्रूण के प्रारंभिक चरण में नोटोकॉर्डल प्लेट के रूप में बनती है
    • जो बाद में नोटोकॉर्डल शीथ नामक संयोजी ऊतक की बेलनाकार परत में बदल जाती है।
    • इसकी कोशिकाएँ बड़ी और रसयुक्त होती हैं, जो एक ठोस छड़ का निर्माण करती हैं
    • जो मेरुरज्जु (नोटोकॉर्ड) और आहारनाल के बीच स्थित होती है।
    • उच्च कशेरुकियों में यह पूरी तरह से अवशोषित हो जाती है
    • जबकि निचले कॉर्डेट्स जैसे लैंसलेट में वयस्क अवस्था तक बनी रहती है ।​
  • कार्य और महत्व

    • यह संरचना दोहरी भूमिका निभाती है: यांत्रिक समर्थन प्रदान करके भ्रूण को कठोरता देती है
    • सिग्नलिंग अणुओं (जैसे शॉन-हेड्जहोग प्रोटीन) का स्रोत बनकर आसपास के ऊतकों
    • जैसे तंत्रिका तंत्र, मांसपेशियों और कंकाल के विकास को नियंत्रित करती है।
    • विकास के दौरान यह वर्टिब्रल कॉलम (रीढ़ की हड्डी) के निर्माण में सहायक होती है
    • जो बाद में इसे बदल लेती है। कॉर्डेट्स की एकता का यह प्रमुख लक्षण है
    • जो ड्यूटेरोस्टोमिया समूह की व्याख्या करता है ।​
  • विकासीय भूमिका विस्तार से
    • भ्रूणीय अवस्था में पृष्ठरज्जु तंत्रिका नाल (न्युरल ट्यूब) के निर्माण को प्रेरित करती है
    • ग्रसनीय फटलों (pharyngeal slits) सहित अन्य कॉर्डेट लक्षणों के विकास को निर्देशित करती है।
    • प्रयोगों से पता चलता है कि इसकी अनुपस्थिति में भ्रूणीय असामान्यताएँ उत्पन्न होती हैं
    • जो इसके मध्य रेखा आयोजनकर्ता (organizer) के रूप में महत्व को दर्शाता है।
    • वयस्क वर्टीब्रेट्स में इसके अवशेष इंटरवर्टिब्रल डिस्क के न्यूक्लियस पल्पोसस में पाए जाते हैं

16. अत्यंत प्राचीन और विविध समूह, स्फीनॉप्सिडा (Sphen-opsida), जिसे आमतौर पर 'अश्वपुच्छ' (horsetail) के नाम से जाना जाता है, का एकमात्र जीवित प्रतिनिधि कौन है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) एक्वीसीटम
Solution:
  • अत्यंत प्राचीन और विविध समूह, स्फीनॉप्सिडा (Sphenopsida), जिसे आमतौर पर अश्वपुच्छ (horsetail) के नाम से जाना जाता है
  • एकमात्र जीवित प्रतिनिधि एक्वीसीटम (Equisetum) है।
  • एक्वीसीटम संवहनी पौधों का समूह है, जो आमतौर पर गीले क्षेत्रों में उगते हैं।
  • इसका प्रयोग ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार में किया जाता है
  • क्योंकि इसमें सिलिकॉन पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होती है।
  • एकीकृत विवरण
    • स्फीनॉप्सिडा (Sphenopsida), जिसे आमतौर पर 'अश्वपुच्छ' या horsetail के नाम से जाना जाता है
    • एक प्राचीन संवहनी पौधों का समूह है जो डेवोनियन काल से अस्तित्व में है।
    • इसका एकमात्र जीवित जीनस इक्विसेटम (Equisetum) है, जो इस समूह का एकमात्र आधुनिक प्रतिनिधि है।​
  • इक्विसेटम की विशेषताएँ
    • इक्विसेटम पौधे जोड़ों वाले तने (jointed stems) वाले होते हैं
    • जिन पर पत्तियों और शाखाओं के घनीभूत कुंडल (whorls) होते हैं।
    • ये सिलिका (silica) से भरपूर होते हैं, जिससे इन्हें 'स्कोरिंग रश' (scouring rush) भी कहा जाता है।
    • प्रजनन बीजाणुओं (spores) द्वारा होता है, जो शंकु (cones) में sporangia के समूह में बनते हैं।​
  • विकासवादी महत्व
    • स्फीनॉप्सिडा का चरम कार्बोनिफेरस काल में था, जब ये कोयला भंडारों की प्रमुख वनस्पति थे।
    • आज इक्विसेटम 'जीवित जीवाश्म' है, जो प्राचीन विविधता का अवशेष है। यह फ़र्न्स (ferns) से निकटता रखता है।​
  • प्रजातियाँ और वितरण
    • लगभग 15-20 प्रजातियाँ हैं, जो उत्तरी गोलार्ध में नम स्थानों पर पाई जाती हैं।
    • कुछ प्रजातियाँ जैसे Equisetum arvense औषधीय हैं, लेकिन कई खरपतवार हैं।​

17. निम्नलिखित में से वर्गिकीय पदानुक्रम का आरोही क्रम में सही विन्यास चुनिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

(A) Genus → Species → Family → Order → Class → Phylum → Kingdom

(B) Genus → Species → Family → Class → Order → Phylum → Kingdom

(C) Species → Genus → Family → Order → Class → Phylum → Kingdom

(D) Species → Phylum → Genus → Family → Order → Class → Kingdom

Genusवंश
Speciesप्रजाति
Familyकुल
Orderगुण
Classवर्ग
Phylumसंघ
Kingdomजगत
Correct Answer: (d) C
Solution:
  • वर्गीकरण में आरोही क्रम (Ascending Order) का तात्पर्य सबसे छोटी से सबसे बड़ी श्रेणी तक है।
  • वर्गीकरण की सबसे छोटी इकाई प्रजाति (Species) और सबसे बड़ी इकाई जगत (kingdom) है।
  • वर्गिकीय पदानुक्रम का आरोही क्रम है- Species → Genus → Family → Order → Class → Phylum → Kingdom
  • पदानुक्रम का आरोही क्रम
    • आरोही क्रम में वर्गिकीय संवर्ग निम्नलिखित होते हैं:
    • प्रजाति (Species)
    • वंश (Genus)
    • कुल (Family)
    • गण (Order)
    • वर्ग (Class)
    • संघ (Phylum)
    • जगत (Kingdom)​
  • प्रत्येक संवर्ग का विस्तृत विवरण
    • प्रजाति सबसे मूलभूत इकाई है, जिसमें वे जीव आते हैं
    • जो एक-दूसरे के साथ संभोग कर उपजाऊ संतान उत्पन्न कर सकते हैं।
    • वंश में निकट संबंधी प्रजातियाँ समाहित होती हैं, जैसे होमो सेपियन्स का वंश होमो है।
    • कुल में समान लक्षणों वाले वंश आते हैं
    • उदाहरणस्वरूप होमिनिडे (मानवों का कुल)। गण में सहसंबद्ध कुल समूहित होते हैं
    • जैसे प्राइमेट्स (Primates)। वर्ग अधिक सामान्य विशेषताओं पर आधारित होता है
    • जैसे स्तनधारी (Mammalia)। संघ शरीर रचना की मूल योजना पर निर्भर करता है
    • जैसे कॉर्डेटा (Chordata)। जगत सबसे व्यापक है, जिसमें पादप, जंतु आदि शामिल होते हैं।​
  • स्मरण सहायक सूत्र
    • संवर्गों को याद रखने के लिए हिंदी में प्रसिद्ध सूत्र "के पी सीओ फाल्गुनी का गाना सुनाया" उपयोगी है:
    • के = जगत (Kingdom)
    • पी = संघ (Phylum)
    • सी = वर्ग (Class)
    • ओ = गण (Order)
    • फा = कुल (Family)
    • ल्गु = वंश (Genus)
    • नी = प्रजाति (Species)​

18. किसी प्रजाति का उसको प्रभावित करने वाले सभी जैविक और अजैविक कारकों के साथ उस के अंतर्संबंध को क्या कहा जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) पारिस्थितिक ताक
Solution:
  • किसी प्रजाति का उसको प्रभावित करने वाले सभी जैविक और अजैविक कारकों के साथ उसके अंतर्संबंध को पारिस्थितिक ताक (Ecological niche) कहा जाता है।
  • पारिस्थितिक ताक/ निकेत एक प्रकार की प्रजाति उसके पर्यावरण भूमिका तथा स्थिति को प्रदर्शित करता है।
  • पारिस्थितिक आला की परिभाषा
    • पारिस्थितिक आला किसी प्रजाति के बहुआयामी स्थान को दर्शाता है
    • जिसमें उसके रहने का स्थान (हैबिटेट), भोजन की आदतें, प्रजनन काल, शत्रुओं से बचाव के तरीके और अन्य प्रजातियों के साथ संबंध शामिल होते हैं।
    • यह न केवल अजैविक कारकों जैसे तापमान, आर्द्रता, मिट्टी की गुणवत्ता, प्रकाश और जल उपलब्धता से प्रभावित होता है
    • बल्कि जैविक कारकों जैसे प्रतिस्पर्धा, परभक्षिता, सहजीवन और परागण जैसे अंतर्संबंधों से भी जुड़ा होता है।
    • उदाहरणस्वरूप, एक जंगल में शेर का आला उसके शिकार (जैसे हिरण), क्षेत्र चिह्नांकन, संभोग मौसम और वर्षा-निर्भर शिकार उपलब्धता पर आधारित होता है।​
  • जैविक और अजैविक कारकों की भूमिका
    • जैविक कारक (Biotic Factors) जीवित घटक होते हैं
    • जैसे पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव और कवक, जो प्रजाति के आला को आकार देते हैं
    • जैसे भोजन श्रृंखला में स्थिति या रोगाणुओं से प्रतिरक्षा। अजैविक कारक (Abiotic Factors) निर्जीव होते हैं
    • जैसे सूर्य प्रकाश, हवा, मिट्टी का पीएच मान और ऊँचाई, जो प्रजाति की生存 सीमाओं को निर्धारित करते हैं।
    • इन दोनों के अंतर्संबंध गतिशील होते हैं; उदाहरण के लिए, कम वर्षा (अजैविक) पौधों की वृद्धि घटा सकती है
    • जिससे शाकाहारी जानवरों (जैविक) पर प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है।​
  • आला का महत्व और उदाहरण
    • पारिस्थितिक आला प्रजातियों के सह-अस्तित्व और जैव विविधता को समझने में सहायक है
    • क्योंकि दो प्रजातियों के आला में पूर्ण ओवरलैप प्रतिस्पर्धा से विलुप्ति का कारण बन सकता है
    • प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत)। पक्षी स्पारो का आला शहरों में बीज खाना, घोंसला बनाने के लिए इमारतें और कीटों से प्रतिस्पर्धा है
    • जबकि मरुभूमि में ऊँट का आला पानी संरक्षण, रेत परिवहन और शुष्कता सहनशीलता है।
    • संरक्षण में आला ज्ञान जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।​

19. निम्नलिखित में से किसने जैविक वर्गीकरण की द्विनाम नामावली की शुरुआत की? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) लिनिअस
Solution:
  • कैरोलस लिनियस ने 1758 ई. में सिस्टेमा नेचुरी (Systema Naturae) नामक पुस्तक प्रकाशित किया
  • जिसमें जीवों के वैज्ञानिक नाम रखने की एक विशेष पद्धति का उल्लेख किया
  • जिसे द्विनाम पद्धति (Binominal nomenclature) कहते हैं।
  • इसीलिए कैरोलस लिनियस को आधुनिक वर्गीकरण का पिता/ जनक (Father of Modern Taxonomy) कहते हैं।
  • लीनियस का परिचय
    • कार्ल लीनियस एक स्वीडिश वनस्पतिशास्त्री, चिकित्सक और प्राणीशास्त्री थे
    • जिन्हें आधुनिक वर्गीकरण का जनक कहा जाता है। उनका जन्म 1707 में स्वीडन में हुआ
    • उन्होंने 18वीं शताब्दी में जीवों को व्यवस्थित रूप से वर्गीकृत करने की पद्धति विकसित की।
    • उन्होंने विभिन्न भाषाओं में भ्रम से बचने के लिए लैटिन भाषा आधारित एक सार्वभौमिक नामकरण प्रणाली प्रस्तुत की, जो आज भी जैविक विज्ञान में मान्य है।​​
  • द्विनाम पद्धति क्या है?
    • द्विनाम पद्धति में प्रत्येक जीव को दो लैटिन शब्दों से नाम दिया जाता है
    • पहला शब्द वंश (Genus) को दर्शाता है, जो बड़ा समूह होता है
    • दूसरा शब्द जाति (Species) को, जो विशिष्ट पहचान बताता है।
    • उदाहरणस्वरूप, आम का वैज्ञानिक नाम Mangifera indica है
    • जहां Mangifera वंश है और indica जाति। ये नाम इटैलिक फॉन्ट में लिखे जाते हैं
    • नाम देने वाले वैज्ञानिक का संक्षिप्त नाम अंत में जोड़ा जाता है।​​
  • ऐतिहासिक विकास
    • लीनियस ने इस पद्धति को 1753 में अपनी पुस्तक Species Plantarum में विस्तार से वर्णित किया
    • जिसमें पौधों की प्रजातियों का वर्णन था। इससे पहले 1735 में Systema Naturae में उन्होंने प्रारंभिक रूप प्रस्तुत किया था।
    • हालांकि कुछ वैज्ञानिकों ने पहले भी दो-शब्दीय नामों का उपयोग किया
    • लेकिन लीनियस ने इसे मानकीकृत और वैश्विक रूप से प्रचलित बनाया।
    • 1956 में अंतरराष्ट्रीय वनस्पतिशास्त्र परिषद ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किया।​​
  • महत्व और नियम
    • यह पद्धति वैज्ञानिकों के बीच संवाद को सरल बनाती है, क्योंकि स्थानीय नाम भिन्न होते हैं
    • लेकिन वैज्ञानिक नाम एकसमान रहते हैं।
    • मुख्य नियमों में लैटिन या लैटिनीकृत नाम, वंश का बड़ा अक्षर और जाति का छोटा अक्षर, तथा नामकरणकर्ता का उल्लेख शामिल है।
    • आज यह ICBN (पौधों के लिए) और ICZN (जानवरों के लिए) कोड द्वारा नियंत्रित होती है।​
  • प्रभाव और विरासत
    • लीनियस की यह प्रणाली ने आधुनिक टैक्सोनॉमी की नींव रखी
    • जो डार्विन जैसे वैज्ञानिकों के कार्यों के लिए आधार बनी।
    • उनके योगदान से जीवों का hierarchical वर्गीकरण

20. निम्नलिखित में से किसका उपयोग मिट्टी के बंधकों (soil binders) के रूप में किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) टेरिडोफाइट
Solution:
  • टेरिडोफाइट्स पौधे जैसे फर्न (Fern) और हार्सटेल (Equi-setum) का उपयोग मिट्टी के बंधकों (Soil benders) के रूप में किया जाता है।
  • जिससे हवा और पानी से होने वाले कटाव से बचा जा सके।
  • ब्रायोफाइट्स की भूमिका
    • ब्रायोफाइट्स, जैसे काई (mosses) और लिवरवर्ट्स, मिट्टी के कणों को अपनी जड़ जैसी संरचनाओं (राइजॉइड्स) से बांध लेते हैं
    • जिससे पानी और हवा से होने वाले कटाव रुक जाता है।
    • ये प्रारंभिक पायनियर प्रजातियां होती हैं जो चट्टानों या नंगी मिट्टी पर सबसे पहले उगती हैं
    • मिट्टी निर्माण प्रक्रिया को शुरू करती हैं।
    • भारत जैसे देशों में मरुस्थलीकरण रोकने के लिए इन्हें जानबूझकर लगाया जाता है।​
  • अन्य विकल्पों की तुलना
    • कवक (Fungi): ये मिट्टी में पोषक तत्वों को विघटित करने में सहायक होते हैं
    • लेकिन बंधक के रूप में कम प्रभावी क्योंकि ये जड़ प्रणाली विकसित नहीं करते।​
    • शैवाल (Algae): नील-हरित शैवाल नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं
    • मिट्टी को हल्का बांध सकते हैं, परंतु पूर्ण बंधन ब्रायोफाइट्स जितना मजबूत नहीं।​
    • टेरिडोफाइट्स (Pteridophytes): ये फर्न जैसे पौधे हैं जो विकसित जड़ें रखते हैं
    • लेकिन ये मिट्टी बंधक के बजाय कवर क्रॉप के रूप में काम करते हैं।​
  • कार्यप्रणाली और लाभ
    • ब्रायोफाइट्स मिट्टी की सतह पर घनी चादर बनाते हैं जो वर्षा के पानी को अवशोषित कर लेती है
    • जैविक पदार्थ जोड़कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं।
    • इनके उपयोग से मिट्टी का जल धारण बढ़ता है
    • जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।
    • कृषि और वनरोपण में इन्हें बायोइंजीनियरिंग तकनीक के तहत प्रोत्साहित किया जाता है।​
  • व्यावहारिक उपयोग
    • भारत में मिट्टी संरक्षण योजनाओं जैसे समोच्चरेखीय खेती या मरुस्थलीकरण रोकथाम में ब्रायोफाइट्स को प्राकृतिक बंधक के रूप में अपनाया जाता है।
    • लंबे समय तक ये मिट्टी को स्थायी रूप से बांधे रखते हैं
    • जबकि रासायनिक बाइंडर्स पर्यावरण को हानि पहुंचा सकते हैं।​