वर्गिकी (जीव विज्ञान) (भाग-II)

Total Questions: 27

21. निम्नलिखित में से किस कवक का उपयोग किण्वन प्रौद्योगिकी में किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) सैक्रोमाइसेस
Solution:
  • सैक्रोमाइसेस (Saccharomyces): यह एक प्रकार का यीस्ट (yeast) है, जो एकल-कोशिका वाला कवक होता है।
  • सैक्रोमाइसेस सेरेविसिए (Saccharomyces cerevisiae) को आमतौर पर बेकर्स यीस्ट और ब्रूअर्स यीस्ट के रूप में जाना जाता है।
  • इसका व्यापक रूप से किण्वन (fermentation) प्रक्रियाओं में उपयोग किया जाता है:
  • किण्वन प्रक्रिया का परिचय
    • किण्वन एक अवायवीय चयापचय प्रक्रिया है
    • जिसमें सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थों जैसे शर्करा को अल्कोहल, कार्बन डाइऑक्साइड या एसिड में बदल देते हैं।
    • यह प्रक्रिया प्राचीन काल से भोजन संरक्षण, स्वाद वर्धन और औद्योगिक उत्पादन के लिए उपयोगी रही है।
    • कवक विशेष रूप से यीस्ट प्रकार के इस प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।​
  • सैक्रोमाइसिस की विशेषताएँ
    • सैक्रोमाइसिस यीस्ट कवक का एक जीनस है
    • जिसमें सैक्रोमाइसिस सेरेविसिया (Saccharomyces cerevisiae) सबसे प्रसिद्ध प्रजाति है।
    • यह एककोशिकीय यीस्ट है जो ग्लूकोज जैसी शर्कराओं को एथेनॉल और CO₂ में परिवर्तित करता है
    • जिसे अल्कोहली किण्वन कहते हैं। बेकर का यीस्ट या ब्रूअर यीस्ट के नाम से जाना जाने वाला
    • यह कवक तापमान 20-30°C और अम्लीय वातावरण में सर्वोत्तम कार्य करता है।​
  • प्रमुख अनुप्रयोग
    • बेकिंग उद्योग: ब्रेड, केक आदि में यीस्ट ग्लूकोज को CO₂ में बदलकर आटे को फुलाता है
    • जिससे स्पंजी बनावट प्राप्त होती है।​
    • शराब और बीयर उत्पादन: अंगूर के रस या जौ के माल्ट से वाइन, बीयर बनाते समय अल्कोहल उत्पन्न करता है।​
    • अन्य आसवन: व्हिस्की, रम जैसे पेयों में भी प्रयुक्त।​
    • जैव ईंधन: बायोएथेनॉल उत्पादन में गन्ने या मकई से ईंधन बनाता है।​
  • औद्योगिक महत्व
    • किण्वन प्रौद्योगिकी में सैक्रोमाइसिस का उपयोग वैश्विक स्तर पर लाखों टन उत्पादन करता है
    • जैसे वार्षिक 50 मिलियन टन ब्रेड।
    • आनुवंशिक इंजीनियरिंग से इसके तनाव विकसित कर एंजाइम उत्पादन और जैव प्रौद्योगिकी में विस्तार हो रहा है।
    • यह प्रक्रिया पर्यावरण-अनुकूल है क्योंकि अवायवीय होती है।​

22. फाइलम एंजियोस्पर्म (Phylum Angiosperms) के बारे में दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

A. एंजियोस्पर्म गैर-संवहनी पौधे हैं, जिनमें तने, जड़ें और पत्तियां होती हैं।

B. एंजियोस्पर्म के बीज अनावृत होते हैं।

C. पृथ्वी पर अधिकांश पौधे इससे संबंधित होते हैं।

D. बीज पौधे के अंगों के अंदर विकसित होते हैं और फल बनाते हैं।

Correct Answer: (d) केवल C और D
Solution:
  • एंजियोस्पर्म (Angiosperm) संवहनी पौधे होते हैं, अतः कथन A गलत है।
  • एंजियोस्पर्म (आवृतबीजी) पौधों के बीज नग्न नहीं होते, बल्कि अनावृतबीजी (जिम्नोस्पर्म) पौधों के बीज नग्न होते हैं।
  • अतः कथन B भी गलत है। पृथ्वी पर अधिकांश पौधे एंजियोस्पर्म से संबंधित होते हैं
  • बीज पौधों के अंगों के अंदर विकसित होते हैं और फल बनाते हैं। अतः कथन C और D सही हैं।
  • दिए गए कथन और उनकी सत्यता
    • कथन A: एंजियोस्पर्म गैर-संवहनी पौधे हैं जिनमें तने, जड़ और पत्तियां होती हैं।
    • यह कथन गलत है। एंजियोस्पर्म संवहनी पौधे हैं, जिनमें जाइलम और फ्लोएम जैसे संवहनी ऊतक होते हैं
    • जो जल, खनिज और भोजन का परिवहन करते हैं। जड़, तना और पत्तियां तो सभी उच्च पौधों में होती हैं
    • लेकिन गैर-संवहनी होना असत्य है ।​
    • कथन B: एंजियोस्पर्म के बीज नग्न होते हैं।
    • यह कथन गलत है। एंजियोस्पर्म के बीज अंडाशय के अंदर विकसित होते हैं
    • जो फल में बदल जाता है, जबकि जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न (खुले) होते हैं।
    • यही कारण है कि इन्हें आवृतबीजी कहा जाता है ।​
    • कथन C: ये पृथ्वी पर सभी पौधों का बहुमत बनाते हैं।
    • यह कथन सही है। एंजियोस्पर्म पादप जगत के लगभग 80-90% प्रजातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं
    • जिनकी संख्या 3 लाख से अधिक है। ये जंगलों, घासभूमियों, रेगिस्तानों और जलीय क्षेत्रों में प्रमुख हैं ।​
    • कथन D: बीज पौधे के अंगों के अंदर विकसित होते हैं और फल बनाते हैं।
    • यह कथन सही है। फूलों में परागण और निषेचन के बाद अंडाशय में बीजांड बीज बनते हैं,
    • अंडाशय फल में परिवर्तित हो जाता है। फल बीजों की सुरक्षा और फैलाव में सहायक होता है
    • जैसे आम का गूदा फल है और बीच में बीज ।​​
  • प्रमुख विशेषताएं
    • फूल: प्रजनन अंग, जिसमें केसर (नर) और अंडाशय (मादा) होते हैं।
    • संवहनी ऊतक: जाइलम में वाहिकाएं, फ्लोएम में सहायक कोशिकाएं।
    • द्विगुणित निषेचन: एक शुक्राणु अंडे से भ्रूण बनाता है, दूसरा केंद्रीय कोशिका से भ्रूणपोष (त्रिगुणित)।
    • जीवन चक्र: प्रमुख स्पोरोफाइट चरण (2n), फल और बीज द्वारा फैलाव।
    • वर्गीकरण: एकबीजी (मोनोकॉटाइलिडॉन जैसे गेहूं) और द्विबीजी (डाइकॉटाइलिडॉन जैसे गुलाब)।
  • आर्थिक एवं पारिस्थितिक महत्व
    • ये पौधे कृषि (गेहूं, चावल), फल (आम, सेब), औषधि (अश्वगंधा) और ईंधन प्रदान करते हैं।
    • ये खाद्य श्रृंखला के आधार हैं और जैव विविधता बनाए रखते हैं ।​

23. निम्नलिखित में से कौन-सा टेरिडोफाइटा का एक उदाहरण है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) साल्वीनिया
Solution:
  • टेरिडोफाइटा वर्ग के अंतर्गत पर्णहरिम (Chlorophyll) व संवहन ऊतक (Vascular tissue) युक्त अपुष्पोद्भिद (Cryp-togamous) पौधे आते हैं।
  • जैसे-साल्वीनिया (Salvinia)। ब्रायोफाइटा वर्ग के पौधों में संवहन ऊतक नहीं पाया जाता है।
  • जैसे-स्फैग्नम (Sphagnum), पॉलीट्राइकम (Polytrichum), फ्यूनेरिया (Funaria) आदि।
  • टेरिडोफाइटा की विशेषताएँ
    • ये पौधे जलीय या अर्ध-जलीय वातावरण में पनपते हैं और नम, छायादार स्थानों को पसंद करते हैं
    • क्योंकि इनका प्रजनन जल पर निर्भर करता है। इनमें फूल या फल नहीं होते
    • इन्हें क्रिप्टोगैम्स (गुप्त बीजाणु वाले) कहा जाता है।​
  • सामान्य उदाहरण
    • टेरिडोफाइटा के प्रमुख उदाहरणों में शामिल हैं:
    • सेलाजिनेला (Selaginella): एक छोटा, घास जैसा पौधा जो हरेत, स्पाइक मॉस के नाम से जाना जाता है।
    • इसमें heterosporous (विभिन्न प्रकार के बीजाणु) प्रजनन होता है।​
    • साल्विनिया (Salvinia): एक तैरता हुआ जलीय फर्न, जिसकी पत्तियाँ पानी की सतह पर तैरती हैं।
    • यह भारत में तालाबों में आम है।​
    • अन्य उदाहरण: प्टेरिस (Pteris), नेफ्रोलेपिस (Nephrolepis), इक्वीसेटम (Equisetum), लाइकोपोडियम (Lycopodium), मार्सिलिया (Marsilea)।​
  • अन्य विकल्पों का भेदन
    • यदि विकल्पों में फ्यूनेरिया (Funaria) या स्फैग्नम (Sphagnum) हैं
    • तो ये टेरिडोफाइटा नहीं हैं। फ्यूनेरिया ब्रायोफाइटा (मॉस) समूह का है
    • जिसमें संवहनी ऊतक अनुपस्थित होते हैं और गैमेटोफाइट प्रमुख होता है।
    • स्फैग्नम भी मॉस है, जिसे पीट मॉस कहा जाता है और यह दलदली क्षेत्रों में पाया जाता है।
    • सरगासम (Sargassum) एक भूरा शैवाल (thallophyte) है।​
  • वर्गीकरण और महत्व
    • टेरिडोफाइटा को मुख्यतः चार वर्गों में बाँटा जाता है
    • ये डेवोनियन युग (लगभग 35 करोड़ वर्ष पूर्व) में प्रमुख थे और कोयला निर्माण में योगदान दिया।
    • आधुनिक महत्व: कुछ औषधीय (जैसे Adiantum), सजावटी, और मिट्टी संरक्षण में उपयोगी।​​

24. सजीव टेरिडोफाइटा का संकीर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में किस प्रकार का फैलाव होता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) सीमित और प्रतिबंधित
Solution:
  • टेरिडोफाइटा, हालांकि संवहनी पौधे हैं, लेकिन प्रजनन के लिए उन्हें पानी की आवश्यकता होती है।
  • उनके नर युग्मक (एंथेरोजोइड्स) को मादा युग्मक (अंडा) तक पहुँचने के लिए तैरना पड़ता है।
  • इस पानी पर निर्भरता के कारण, टेरिडोफाइटा आमतौर पर नम, ठंडी और छायादार जगहों तक ही सीमित होते हैं।
  • यह कारक उनके भौगोलिक फैलाव को सीमित और प्रतिबंधित कर देता है।
  • वे शुष्क या व्यापक रूप से विविध वातावरण में आसानी से नहीं फैल सकते।
  • प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र
    • उष्णकटिबंधीय क्षेत्र: सबसे अधिक विविधता दक्षिण अमेरिका के वर्षावनों (Amazon rainforest), दक्षिण-पूर्व एशिया (भारत, इंडोनेशिया) और अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय भागों में पाई जाती है।
    • उदाहरण: भारत में पश्चिमी घाट, पूर्वी हिमालय और नीलगिरि पहाड़ियाँ।
    • लगभग 80% प्रजातियाँ यहाँ केंद्रित हैं।
    • पहाड़ी और वन क्षेत्र: समशीतोष्ण क्षेत्रों में पहाड़ी ढलानों पर, जैसे हिमालय, एंडीज और रॉकी पर्वत।
    • यहाँ छाया और नमी प्रचुर होती है।
    • जलीय और अर्ध-जलीय: कुछ प्रजातियाँ जैसे साल्विनिया और मार्सिलिया तालाबों, नदियों में तैरती हैं
    • लेकिन ये भी उष्णकटिबंधीय जलाशयों तक सीमित।​
      वैश्विक रूप से लगभग 10,000-12,000 जीवित प्रजातियाँ हैं, लेकिन ये 400 से कम जीनरा में बँटी हैं
    • जो व्यापक फैलाव को दर्शाता है।​
  • फैलाव की सीमाएँ और तुलना
    • टेरिडोफाइटा का फैलाव बीजाणु-प्रधान होने के कारण सीमित रहता है। बीजाणु हवा द्वारा फैल सकते हैं
    • लेकिन अल्प-दूरी (कुछ मीटर से किमी) तक ही प्रभावी होते हैं, जबकि उच्च पौधों के बीज/पराग दूर तक जाते हैं।
    • शुष्क जलवायु, मृदा क्षरण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन से इनका आवास संकुचित हो रहा है।
    • तुलनात्मक रूप से, ब्रायोफाइटा इससे भी अधिक सीमित हैं, जबकि जिम्नोस्पर्म/एंजियोस्पर्म वैश्विक हैं।​
  • पारिस्थितिक महत्व
    • ये क्षेत्रों में मिट्टी संरक्षण, आर्द्रता बनाए रखने और जैव-विविधता में योगदान देते हैं।
    • कुछ प्रजातियाँ (जैसे स्फेग्नम जैसी फर्न) पीट निर्माण करती हैं। संरक्षण आवश्यक है क्योंकि कई प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं।

25. निम्नलिखित में से कौन-सा घरेलू मक्खी का जैविक नाम है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) मस्का डोमेस्टिका
Solution:
  • घरेलू मक्खी संघ आर्थोपोडा के कीट वर्ग (Class Insecta) का जंतु है।
  • इसका जैविक नाम मस्का डोमेस्टिका (Musca domestica) है।
  • यह रोग फैलाने में सर्वोपरि है अर्थात रोगों का वाहक है।
  • इसके द्वारा फैलाए जाने वाले प्रमुख रोग हैं- अतिसार, हैजा आदि।
  • वर्गीकरण
    • घरेलू मक्खी का पूर्ण वैज्ञानिक वर्गीकरण निम्नलिखित है:
    • जगत (Kingdom): Animalia
    • संघ (Phylum): Arthropoda
    • वर्ग (Class): Insecta
    • गण (Order): Diptera
    • कुल (Family): Muscidae
    • जीनस (Genus): Musca
    • प्रजाति (Species): domestica
    • यह नामकरण कार्ल लिन्नेयस द्वारा 1758 में दिया गया था।
    • मस्का डोमेस्टिका पूरी दुनिया में पाई जाती है, खासकर मानव बस्तियों के आसपास।​
  • शारीरिक विशेषताएँ
    • वयस्क घरेलू मक्खी की लंबाई लगभग 6-7 मिलीमीटर होती है
    • इसके पंख 1.5 सेमी तक फैल सकते हैं। इसका सिर उत्तल होता है
    • आँखें बड़ी और चमकदार होती हैं, जबकि थोरैक्स धूसर-काला और पेट पीला-काला धारीदार होता है।
    • मादाएँ नरों से थोड़ी बड़ी होती हैं। लार्वा (मक्खी के अंडे से निकलने वाला रूप) सफेद, कीड़ेनुमा और गंदगी में पनपते हैं।​
  • जीवन चक्र
    • घरेलू मक्खी का जीवन चक्र पूर्ण रूपांतरण (complete metamorphosis) वाला होता है:
    • अंडा: मादा एक बार में 75-150 अंडे देती है, जो 8-24 घंटे में फूटते हैं।
    • लार्वा: 3 अवस्थाओं में विकसित होता है, 3-7 दिनों में।
    • प्यूपा: 3-6 दिनों में कठोर खोल बनाकर परिवर्तन।
    • वयस्क: कुल जीवनकाल 15-30 दिन, लेकिन आदर्श स्थितियों में 2 महीने तक।
    • गर्मियों में यह चक्र तेजी से पूरा होता है।​
  • महत्व और हानि
    • घरेलू मक्खी रोगों का प्रमुख वाहक है, जैसे हैजा, टायफॉइड, डिसेंट्री, और साल्मोनेला।
    • यह भोजन पर बैठकर उल्टी या मल से बैक्टीरिया फैलाती है।
    • हालांकि, इसके लार्वा को पशु चारे या जैविक खाद निमार्ण में उपयोगी माना जाता है।
    • नियंत्रण के लिए साफ-सफाई, जाल और कीटनाशक प्रभावी हैं।​
  • अन्य रोचक तथ्य
    • उत्पत्ति मध्य पूर्व मानी जाती है, जो मानव प्रवास के साथ फैली।
    • यह 500 गुना तेजी से उड़ सकती है जितना मनुष्य दौड़ता है।
    • आँखों में 4,000 लेंस होते हैं, जो गति का पता लगाने में सहायक।​

26. निम्नलिखित में से कौन-सी पादप जगत की सबसे प्रमुख वनस्पति है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) एंजियोस्पर्म
Solution:
  • एंजियोस्पर्म (Angiosperms) या आवृतबीजी: ये पादप जगत की सबसे प्रमुख और विविध वनस्पति हैं।
  • वे पृथ्वी पर लगभग हर स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में पाए जाते हैं
  • पौधों की अधिकांश ज्ञात प्रजातियां (लगभग 3,00,000 प्रजातियां) इसी समूह से संबंधित हैं।
  • उनकी सफलता का कारण उनके फूलों, फलों में बीज का संरक्षण, और परागण के लिए विभिन्न अनुकूलन हैं।
  • विशेषताएँ
    • एंजियोस्पर्म फूलों और फलों से युक्त होते हैं, जो उनके बीजों को बंद (आवृत) रखते हैं।
    • इनमें संवहनी ऊतक (ज़ाइलम और फ्लोएम) अच्छी तरह विकसित होते हैं
    • जो जल और पोषक तत्वों का कुशल परिवहन सुनिश्चित करते हैं।
    • ये द्विबीजपत्री (जैसे गेहूँ, मटर) और एकबीजपत्री (जैसे चावल, बाँस) दो मुख्य वर्गों में विभाजित हैं।​
  • प्रजाति संख्या
    • पादप जगत में लगभग 3,00,000 से अधिक ज्ञात प्रजातियाँ एंजियोस्पर्म की हैं
    • जो कुल पादप प्रजातियों का 90% से अधिक हिस्सा बनाती हैं।
    • ये सूक्ष्म जलीय पौधों (जैसे वुल्फिया) से लेकर विशाल वृक्षों (जैसे यूकेलिप्टस, 100 मीटर ऊँचाई) तक फैली हुई हैं।
    • जिम्नोस्पर्म, ब्रायोफाइट्स या टेरिडोफाइट्स की तुलना में इनकी संख्या कहीं अधिक है।​
  • पारिस्थितिक महत्व
    • ये पारिस्थितिकी तंत्र के आधार हैं, जो ऑक्सीजन उत्पादन, भोजन श्रृंखला का समर्थन और मिट्टी संरक्षण करते हैं।
    • मनुष्यों को भोजन (अनाज, फल), ईंधन, दवाएँ, चारा और आवास प्रदान करते हैं।
    • विभिन्न जलवायु और आवासों (स्थलीय, जलीय) में अनुकूलित होने से ये सबसे व्यापक हैं।​

27. निम्नलिखित में से कौन-सा एक पुष्प-रहित, बीजाणु पैदा करने वाला पादप है, जो आमतौर पर एक पतले सींग जैसे या सुई जैसे कैप्सूल के रूप में होता है, जिसमें बीजाणु होते हैं जो एक सपाट, हरी पत्ती से विकसित होते हैं? [Phase-XI 30 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) हॉर्नवॉर्ट
Solution:
  • हॉर्नवॉर्ट एक पुष्प-रहित, बीजाणु पैदा करने वाला ब्रायोफाइटा संघ का पादप है
  • जो आमतौर पर एक पतले सींग जैसे या सुई जैसे कैप्सूल के रूप में होता है
  • जिसमें बीजाणु होते हैं जो एक सपाट, हरी पत्ती से विकसित होते हैं।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • यह ब्रायोफाइट्स समूह के एंथोसेरोटोफाइटा विभाग का सदस्य है
    • जिसमें कोई फूल या बीज नहीं होते, बल्कि बीजाणु (स्पोर) द्वारा प्रजनन होता है।
    • इसका स्पोरोफाइट एक पतला, सींग जैसा या सुई जैसा लंबा कैप्सूल होता है
    • जो गametophyte से निकलकर ऊपर की ओर बढ़ता है और इसमें बीजाणु विकसित होते हैं।
    • गametophyte एक सपाट, हरी, पसरे हुए थैलस जैसी पत्ती के रूप में होता है
    • जो नमी वाली मिट्टी या चट्टानों पर उगता है।​
  • प्रजनन प्रक्रिया
    • हॉर्नवॉर्ट में लाइफ साइकिल में गametophyte प्रमुख चरण होता है
    • जो हरा थैलस बनाता है। स्पोरोफाइट इस थैलस से विकसित होता है
    • सींग जैसा संरचना बनाकर成熟 होता है, जिसमें स्पोर कैप्सूल के अंत में बीजाणु बनते हैं
    • जो हवा से फैलते हैं। यह संरचना 5-10 सेमी तक लंबी हो सकती है
    • एकल कोशिका दीवार वाली कोशिकाओं से बनी होती है।
    • पुरुष और मादा संरचनाएँ अलग-अलग थैलस पर हो सकती हैं।​
  • आवास और पारिस्थितिकी
    • ये पादप नम, छायादार स्थानों जैसे जंगलों की मिट्टी, नदी किनारों या चट्टानों पर आमतौर पर पाए जाते हैं।
    • ये छोटे आकार के होते हैं (कुछ सेंटीमीटर) और क्लोरोफिल युक्त होने से प्रकाश संश्लेषण करते हैं
    • लेकिन संवहनी ऊतक (जाइलम, फ्लोएम) का अभाव होता है।
    • ये पारिस्थितिकी तंत्र में मिट्टी के कटाव को रोकने और नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होते हैं।​
  • अन्य समान पादपों से अंतर
    • फर्न (टेरिडोफाइटा): बीजाणु पैदा करते हैं, लेकिन स्पोरोफाइट प्रमुख होता है
    • स्पorangia पत्तियों पर होते हैं, न कि सींग जैसे कैप्सूल।​
    • मॉस: स्पोरोफाइट कैप्सूल पर स्टॉक पर होता है, लेकिन सींग जैसा नहीं।​
    • लिवरवॉर्ट: थैलस समान, लेकिन स्पोरोफाइट छोटा और स्टॉक वाला।​
    • हॉर्नवॉर्ट की अनूठी सींग जैसी संरचना इसे अलग करती है।