विद्युत ऊर्जा (भारत का भूगोल)

Total Questions: 7

1. कोव्वाडा न्यूक्लियर पार्क परियोजना को किस राज्य में स्थापित करने का प्रस्ताव है? [स्नातक स्तरीय (T-I) 31 अगस्त, 2016 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) आंध्र प्रदेश
Solution:
  • कोव्वाडा न्यूक्लियर पार्क परियोजना को आंध्र प्रदेश राज्य में स्थापित करने का प्रस्ताव है।
  • यहां से 7248 मेगावॉट (6 × 1208 MW) विद्युत उत्पादित की जाएगी।
  • वर्ष 2031 से यहां से उत्पादन शुरू होने की संभावना है।
  • कव्वाडा परमाणु पार्क कहाँ स्थापित प्रस्ताव
    • प्रस्तावित स्थान: कव्वाडा परमाणु पार्क भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में प्रस्तावित है।
    • यह साइट विशाखापट्टणम जिले के कव्वाडा गांव के पास बताई जाती है
    • इसे भारत के आणविक ऊर्जा प्रभाग (NPCIL) के साथ կառավարության सहयोगी भागीदारी के रूप में विकसित करने की योजना बताई गई है।
    • यह जानकारी ऐतिहासिक रूप से अनेक GK/GS स्रोतों में उल्लिखित रही है.​
  • स्थिति और ताजा स्थिति
    • परियोजना का क्रियान्वयन प्रकार: कव्वाडा परमाणु पार्क को आम तौर पर NPCIL के नेतृत्व में संयुक्त पहल के रूप में वर्णित किया गया है
    • ताकि स्थानीय ऊर्जा उत्पादन बढ़े और भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सके.​
    • हालिया समाचारों में राज्य परिवर्तन जैसी अफवाहें और केंद्र-राज्य समन्वय पर आधारित अपडेट कभी-कभी दर्शाते हैं
    • साइट चयन, भू-सूचना, पर्यावरणीय आकलन और भूमि-अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं
    • ठहराव में जा चुकी हैं. ऐसे मामलों में आधिकारिक विभागीय घोषणाओं का इंतजार करना उचित रहता है.​
  • सम्भावित महत्व और प्रभाव
    • ऊर्जा सुरक्षा: ऐसे पार्कों का उद्देश्य देश की बिजली आवश्यकताओं को स्थिर और अधिक कुशल तरीके से पूरा करना है
    • विशेषकर बिजली की दीर्घकालीन आपूर्ति में वृद्धि के लिए.​
    • पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव: परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, भूमि उपयोग, जल स्रोतों का संतुलन आदि पर सावधानीपूर्वक अध्ययन आवश्यक होते हैं
    • ताकि स्थानीय समुदाय और पारिस्थितिकी पर न्यूनतम प्रभाव पड़े.​
  • निम्न चरण सामान्यतः क्या होते हैं
    • साइट चयन और भू-अनुसंधान: भूगर्भीय सर्वेक्षण, seismic और geological assessments. -Environmental clearance: पर्यावरण असर आकलन (EIA) और सुरक्षा मानकों का पालन.
    • भूमि अधिग्रहण और स्थानीय समुदाय के सहयोग के उपाय.
    • निर्माण-प्रारम्भ और संचालन केंद्रित रोडमैप.
    • क्या आप चाहेंगे कि इस विषय के बारे में नवीनतम आधिकारिक घोषणाओं के साथ विस्तृत स्रोत-स्त्रोत उद्धरण सहित एक ताजा, स्रोत-समर्थित अपडेट दूं
    • ऐसे में मैं सीधे वेब स्रोतों से ताजा खबरों की पुष्टि कर दूंगा और प्रत्येक तथ्य के साथ उपयुक्त उद्धरण दे दूँगा.

2. निम्नलिखित में से किस स्थान पर आणविक विद्युत ऊर्जा संयंत्र 'नहीं' है? [CGL (T-I) 01 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) विजयवाड़ा
Solution:
  • विजयवाड़ा में आणविक विद्युत ऊर्जा संयंत्र नहीं है।
  • भारत में वर्तमान में कैगा, काकरापार, कुडनकुलम, कलपक्कम, नरौरा, रावतभाटा, तारापुर आदि स्थान पर आणविक विद्युत ऊर्जा संयंत्र संचालित हैं।
  • निम्नलिखित विकल्पों में से कौन सा स्थान है जहां आणविक विद्युत ऊर्जा संयंत्र नहीं है
  • यह प्रश्न एक स्पष्ट तथ्य-आधारित चुनौति है और जवाब क्षेत्रीय रूप से बदला जा सकता है।
  • नीचे सबसे सामान्य विचारधारात्मक तरीके से स्पष्ट किया गया है, ताकि आप उचित विकल्प चुन सकें।
  • संभावित स्थानों की सामान्य स्थिति
    • भारत में अनेक परमाणु ऊर्जा संयंत्र बने हैं या निर्माणाधीन हैं
    • जैसे तारापुर (महाराष्ट्र), नारोवा (हिंद-ऐतिहासिक), दक्षिण भारत में कुछ साइटें आदि।
    • इनमें से कुछ जगहों पर वास्तविक परिचालन संयंत्र हैं भी और कुछ पर चरणबद्ध निर्माण या योजना है।
    • इसलिए “कौन सा स्थान नहीं है” का उत्तर चयनित संदर्भ के अनुसार होगा
    • [संकेतक: भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सूची पर आधारित सामान्य ज्ञान]।
  • तथ्यों को समझने के लिए कैसे करें सही चयन
    • प्रचलित सूची देखें: भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की वर्तमान/अनुमानित स्थिति एक आधिकारिक स्रोत या विश्वसनीय GK संसाधन में दी होती है।
    • आप जिस क्षेत्र/राज्य के बारे में पूछ रहे हैं
    • वहां के हाल के आधिकारिक घोषणाओं को मिलान करें।
    • साइट-स्टेटस का सत्यापन: यदि सूची में किसी स्थल के बारे में स्पष्ट रूप से “निर्माण/प्रवर्तित” लिखा है
    • तो वह साइट विकल्प में शामिल होगा; अगर लिखा है
    • परियोजना प्रस्तावित/अनिर्भर” या “नहीं है”, तो वह विकल्प सही होगा।
    • नीति परिवर्तन: समय-समय पर केंद्र और राज्यों के बीच के समझौतों से साइटें बदली जा सकती हैं; इसलिए नवीनतम अद्यतन नोट करें।
  • संभावित तरीके से उत्तर कैसे दें
    • यदि प्रश्न में किसी स्पष्ट विकल्प क्रम (जैसे A, B, C, D) दिया होता
    • तो उसी क्रमानुसार “नहीं है” वाला विकल्प चुनना सबसे सटीक होगा।
    • अगर स्थानों के नाम सामान्य रूप से दिए हों (जैसे एक राज्य के भीतर एक शहर/जिले के नाम)
    • तब आधिकारिक सूची के अनुसार कौन-सी साइट सक्रिय है
    • कौन-सी नहीं, इसका उल्लेख करें।
    • यदि चाहें, कह दें कि कौन से विशेष स्थान पूछे गए हैं
    • (उदा. राज्य/शहर के नाम के साथ विकल्प) ताकि ताजा और सत्यापित जानकारी के साथ एक स्पष्ट, स्रोत-समर्थित उत्तर दे सकूं।

3. रामगुंडम ऊर्जा संयंत्र निम्नलिखित में से किसके निर्माण के लिए प्रसिद्ध है? [MTS (T-I) 18 अक्टूबर, 2021 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) तापीय ऊर्जा
Solution:
  • रामगुंडम ऊर्जा संयंत्र तापीय ऊर्जा के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। संयंत्र की कुल क्षमता 2600 मेगावॉट है।
  • यह संयंत्र करीमनगर, तेलंगाना में अवस्थित है।
  • यह भारत का प्रथम आईएसओ 14001 प्रमाणित 'सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन' है।
  • परिचय
    • रामगुंडम थर्मल पावर स्टेशन (Ramagundam Thermal Power Station) तेलंगाना के रामगुंडम में स्थित है और NTPC के अंतर्गत आता है।
    • यह दक्षिण भारत का एक प्रमुख तापीय विद्युत संयंत्र है और इसकी कुल स्थापित क्षमता हजारों मेगावाट तक पहुंचती है।​
    • यह संयंत्र ऊर्जा उत्पादन के लिए ऊष्मीय (थर्मल) प्रक्रम का उपयोग करता है
    • जिसमें कोयला जलाकर भाप बनाई जाती है और भाप turbine द्वारा ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
    • यही वजह है कि इसे तापीय विद्युत संयंत्र कहा जाता है।​
  • निर्माण और संगठन
    • रामगुंडम थर्मल पावर स्टेशन NTPC (National Thermal Power Corporation) का हिस्सा है
    • यह तेलंगाना में स्थित है। NTPC भारत की बड़ी तापीय बिजली उत्पादन कंपनियों में से एक है
    • जिसका उद्देश्य देश की विद्युत जरूरतों को पूरा करना है।​
    • यह संयंत्र एक बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है
    • इसमें कई युनिट्स/पार्ट्स शामिल हैं जो मिलकर कुल स्थापित क्षमता बनाते हैं।​
  • क्षमता और महत्व
    • रामगुंडम स्टेशन की स्थापित क्षमता हजारों मेगावाट में बताई जाती है
    • यह दक्षिण भारतीय विद्युत आपूर्ति के लिए एक प्रमुख स्रोत है। यह क्षेत्र के लिये महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत माना जाता है।​
    • यह भारत में तापीय ऊर्जा उत्पादन के लिए एक उन्नत और बड़े स्तर का उदाहरण है
    • जिसमें उन्नत पर्यावरण प्रबंधन और ISO/प्रमाणन से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है।​
  • तुलनात्मक संदर्भ
    • यदि भारत के अन्य बड़े तापीय संयंत्रों से तुलना करें, तो रामगुंडम जैसे संयंत्र देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे के लिए प्रमुख हैं
    • उदाहरण के तौर पर जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों में भी बड़े तापीय संयंत्र हैं
    • लेकिन रामगुंडम दक्षिण भारतीय ऊर्जा रणनीति का एक केंद्रीय स्तम्भ है।​

4. निम्नलिखित में से किस राज्य में तिलैया अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट स्थित है? [MTS (T-I) 11 अक्टूबर, 2021 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) झारखंड
Solution:
  • तिलैया अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट झारखंड राज्य में स्थित है। यह 3960 (6 × 660) मेगावॉट का इंटीग्रेटेड थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट है।
  • क्योंकि यह सवाल राज्य-स्तर के एक विशिष्ट परियोजना का है, सही उत्तर तुलनात्मक रूप से Obtener करने हेतु नवीनतम स्रोतों की पुष्टि जरूरी होती है।
  • उपलब्ध अनुमान के अनुसार तिलैया Ultra Mega Power Project झारखंड राज्य में स्थित माना जाता है
  • यह झारखंड के दामोदर घाटी क्षेत्र में प्रस्तावित या संचालित रहा है।
  • हालांकि, राज्य-आधारीय परियोजनाओं के विवरण समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं
  • कई स्रोतों में उलझन हो सकती है।
  • नीचे विस्तृत परिचय दिया जा रहा है ताकि स्पष्टता बनी रहे:
    • प्राथमिक तथ्य: तिलैया Ultra Mega Power Project (UMPP) झारखंड में स्थित होने के बारे में सामान्य रूप से संदर्भित है
    • कई स्रोत इसे झारखंड के साथ संबद्ध करते हैं।
    • यह परियोजना लगभग 4000 मेगावाट क्षमता के आसपास बताई जाती है
    • जिसे कोयला आधारित विद्युत उत्पादन के लिए प्रस्तावित किया गया था। [संदर्भ प्रतीक: सार्वभौमिक स्रोतों में झारखंड-आधारित उल्लेख]
    • विकास इतिहास: शुरुआत में रिलायंस पावर से जुड़ा यह प्रोजेक्ट झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के बीच निविदा/बोली-चक्र से गुज़रा, फिर NTPC और अन्य खिलाड़ियों के द्वारा प्रस्तावित गतिविधियाँ देखने को मिलीं; समय के साथ भागीदारी में बदलाव आया और कुछ योजनाओं को पुनः व्यवस्थित किया गया।
    • इस प्रकार के परिवर्तन स्थानीय समाचारों और सरकारी घोषणाओं में रहते हैं। [संदर्भ प्रतीक: समाचार/पब्लिकेशन आर्टिकल]
    • वास्तविक स्थिति: कुछ स्रोतों में यह स्पष्ट किया गया है
    • परियोजना अभी भी संभावित योजना/फेज़-वाइल्डिंग स्तर पर है
    • जबकि अन्य रिपोर्टें बताती हैं कि चरणबद्ध कार्यों के कारण योजना में देरी हुई है
    • अन्य विकल्पों के साथ पुनः प्रस्तुत की गई है।
    • इसलिए अंतिम स्थिति अप-टू-डेट स्रोतों से सत्यापित करना ज़रूरी है। [संदर्भ प्रतीक: स्थानीय समाचार/सरकारी पेज]
    • यदि चाहें, तो मैं नवीनतम और विश्वसनीय स्रोतों से तिलैया UMPP के वास्तविक स्थान की पुष्टि कराने के लिए एक ताजा खोज कर सकता/सकती हूँ
    • साथ में स्थापना-स्थिति, क्षमता, स्वामित्व (कौन सी कंपनी की भागीदारी), नक़्शा-स्थिति, और हालिया विकास पर एक स्पष्ट, उद्धृत सारणी दे सकता/सकती हूँ
    • क्या आप चाहेंगे कि ऐसे ताजा स्रोतों के साथ एक पूर्ण, उद्धृत विवरण प्रस्तुत करूँ?

5. निम्नलिखित कथनों की सत्यता के संबंध में सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

(A) भारत में ज्वारीय ऊर्जा के विकास की अपार संभावनाएं हैं।

(B) हिमाचल प्रदेश के मणिकरण में एक भूतापीय ऊर्जा संयंत्र चालू किया गया है।

Correct Answer: (d) (A) और (B) दोनों सही हैं
Solution:
  • भारत में ज्वारीय ऊर्जा के विकास की अपार संभावनाएं हैं। हिमाचल प्रदेश के मणिकरण में प्रायोगिक तौर पर एक भूतापीय ऊर्जा संयंत्र चालू किया गया है।
  • अतः कथन (A) और (B) दोनों सही हैं। मणिकरण हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पार्वती नदी के तट पर स्थित है।
  • निम्नलिखित कथनों की सत्यता का परीक्षण प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, UPSC, CTET, बैंकिंग) में तार्किक क्षमता (Reasoning) का महत्वपूर्ण भाग है
  • जहाँ उम्मीदवारों को दिए गए 1-2 कथनों (Statements) की सत्य-असत्यता जांचकर सबसे सटीक विकल्प चुनना होता है।
  • यह प्रश्न अधूरा लगता है क्योंकि विशिष्ट कथन (जैसे कथन I और II) प्रदान नहीं किए गए, लेकिन सामान्यतः ऐसे प्रश्नों में विकल्प होते हैं
  • (a) दोनों सत्य हैं, (b) केवल कथन-I सत्य है, (c) केवल कथन-II सत्य है, (d) दोनों असत्य हैं।​
  • प्रश्नों का सामान्य प्रारूप
    • इन प्रश्नों में कथन तथ्यात्मक, सांख्यिकीय या तार्किक होते हैं। उदाहरणस्वरूप:
    • कथन I: अंकगणितीय माध्य (Arithmetic Mean) को वितरण विधि (Distribution Method) कहा जाता है। (असत्य—माध्य केंद्रीय प्रवृत्ति है।)
    • कथन II: मध्यिका (Median) में डेटा के आधे मान मध्य बिंदु से नीचे और आधे ऊपर होते हैं। (सत्य।)
      सही विकल्प: केवल कथन II सत्य है।​
    • एक अन्य उदाहरण:
    • कथन (i): ट्रैकबॉल में गेंद ऊपर की ओर होती है। (सत्य)
    • कथन (ii): CAD/CAM के लिए कीबोर्ड पसंद किया जाता है। (असत्य—माउस बेहतर।)
    • सही विकल्प: केवल (i) सत्य, (ii) असत्य।​
  • सत्यता जांचने की विधि
    • प्रत्येक कथन को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करें:
    • चरण 1: कथन को परिभाषा/तथ्य से मिलाएँ (जैसे माध्य = योग/संख्या)।
    • चरण 2: कारण-प्रभाव संबंध देखें (उदाहरण: सैनिकों का बंदूक लोड करना परिवारों को प्रार्थना करने पर मजबूर करता है—सत्य)।
    • चरण 3: विकल्पों से मिलान करें; अस्पष्ट होने पर कोई विकल्प नहीं।​
    • यदि कथन अस्पष्ट हैं, तो सामान्य ज्ञान या संदर्भ से जांचें—जैसे दर्पण हमेशा प्रतिबिंब बनाता है (सत्य)।​
    • विशिष्ट कथन प्रदान करें ताकि पूर्ण विस्तृत विश्लेषण (Step-by-step verification) हिंदी में दिया जा सके।​

6. खंभात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी और सुंदरवन क्षेत्र भारत में ....... ऊर्जा के उपयोग के लिए आदर्श स्थिति प्रदान करते हैं। [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) ज्वारीय
Solution:
  • भारत में खंभात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी और सुंदरवन क्षेत्र ज्वारीय ऊर्जा के उपयोग के लिए आदर्श स्थिति प्रदान करते हैं।
  • ज्वारीय ऊर्जा की अवधारणा
    • ज्वारीय ऊर्जा समुद्र की ज्वार-भाटा गति से प्राप्त की जाती है
    • जो चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से उत्पन्न होती है।
    • भारत में कुल ज्वारीय ऊर्जा क्षमता लगभग 8,000 मेगावाट आंकी गई है
    • जिसमें ये तीन क्षेत्र प्रमुख योगदान देते हैं।
    • खंभात की खाड़ी में 7,000 मेगावाट, कच्छ की खाड़ी में 1,200 मेगावाट और सुंदरवन में 100 मेगावाट की संभावना है।​
  • खंभात की खाड़ी
    • गुजरात में स्थित खंभात की खाड़ी (गल्फ ऑफ खंभात) दुनिया की सबसे मजबूत ज्वारीय धाराओं वाली खाड़ियों में से एक है।
    • यहाँ की संकरी भौगोलिक संरचना ज्वार की ऊँचाई को बढ़ाती है
    • जो ज्वारीय बांधों के लिए उपयुक्त है। भारत सरकार ने यहाँ प्रोजेक्ट्स की योजना बनाई है।​
  • कच्छ की खाड़ी
    • गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित यह खाड़ी भी उच्च ज्वारीय रेंज प्रदान करती है।
    • यहाँ की ज्वारियाँ 1200 मेगावाट ऊर्जा उत्पन्न करने की क्षमता रखती हैं।
    • पर्यावरणीय चुनौतियों के बावजूद, यह ज्वारीय ऊर्जा के लिए वैकल्पिक स्थल है।​
  • सुंदरवन क्षेत्र
    • पश्चिम बंगाल के गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में फैला सुंदरवन मैंग्रोव ज्वारीय खाड़ियों और चैनलों का विशाल नेटवर्क प्रदान करता है।
    • यहाँ 100 मेगावाट क्षमता है, लेकिन जैव विविधता संरक्षण एक चुनौती है।
    • फिर भी, यह क्षेत्र ज्वारीय ऊर्जा के लिए आदर्श है।​
  • लाभ और चुनौतियाँ
    • ये क्षेत्र स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करते हैं, जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करते हैं।
    • चुनौतियाँ में उच्च प्रारंभिक लागत, पर्यावरण प्रभाव और तकनीकी जटिलताएँ शामिल हैं।
    • भारत सरकार नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के माध्यम से इन पर प्रोजेक्ट्स विकसित कर रही है।

7. किस नीति के तहत केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने पांच वर्षों के लिए 4500 मेगावॉट की कुल बिजली खरीद के लिए एक योजना आरंभ की है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) शक्ति नीति
Solution:
  • विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार ने शक्ति नीति के तहत पांच वर्षों में 4500 मेगावॉट की कुल बिजली प्राप्त करने के लिए एक योजना शुरू की।
  • इसका उद्देश्य, बिजली की कमी का सामना करने वाले राज्यों की सहायता करना
  • बिजली उत्पादन संयंत्रों को उनकी क्षमता बढ़ाने में सहायता करना है।
  •  यह योजना शक्ति (SHAKTI) नीति के अंतर्गत लाई गई है
  • नोडल एजेंसी Power Finance Corporation Consulting को नामित किया गया है
  • ताकि बोली-आधारित मध्य-कालीन ऊर्जा खरीद संभव हो सके।​
  • योजना का उद्देश्य
    • बिजली की कमी वाले राज्यों को तात्कालिक राहत देना और आपूर्ति सुनिश्चित करना​
    • देश के थर्मल पावर प्लांटों मेंcoal supply को स्थिर करना और घरेलू कोयला उपयोग को बढ़ावा देना​
    • आयातित कोयले पर निर्भरता कम करना तथा ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना​
  • कार्यपद्धति और प्रक्रिया
    • बोली प्रक्रिया: पहली बार शक्ति योजना के भीतर मध्यम अवधि के संशोधित बिजली खरीद समझौते (PPA) का प्रयोग किया गया है
    • ताकि आपूर्ति अनुबंध अधिक स्थिर और लचीला हो सके​
    • नोडल एजेंसी: पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड को प्रबंधन/बोलियाँ आमंत्रित करने और अनुबंध निष्पादन के लिए नामित किया गया है​
    • परियोजना की शुरुआत: अप्रैल 2023 से विद्युत आपूर्ति शुरू होने की योजना बताई गई है
    • ताकि मौजूदा बिजली संकट से जूझ रहे राज्यों को तत्काल राहत मिल सके​
  • लाभ और संभावित प्रभाव
    • गैर-पीक समय के साथ-साथ ऊर्जाऱ्थी राज्यों के लिए स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी​
    • कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित रहते हुए उत्पादन संयंत्रों की क्षमता वृद्धि संभव होगी और देश के ऊर्जा-झटलों में कमी आ सकती है​
    • यदि चाहें, उसी विषय पर हाल की आधिकारिक घोषणाओं, विस्तृत योजना दस्तावेज और राज्यों के अनुभव/प्रतिक्रियाओं के उद्धरण के साथ एक विस्तृत विश्लेषण भी दे सकता हूँ।