विद्युत धारा (भौतिक विज्ञान)

Total Questions: 8

1. यदि 3Ω, 4Ω, 5Ω और 6Ω के चार प्रतिरोध श्रेणी क्रम में जुड़े हैं, तो चारों प्रतिरोधों का संयुक्त प्रतिरोध क्या होगा? [Phase-XI 27 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 18Ω
Solution:
  • प्रश्नानुसार, चार प्रतिरोध श्रेणी क्रम में संयोजित हैं-
  • A o──────3Ω──────4Ω──────5Ω──────6Ω──────o B
  • R_{AB} = (3 + 4 + 5 + 6)Ω = 18Ω
  • पूर्ण विवरण:
    • श्रृंखला क्रम में प्रत्येक प्रतिरोध पर समान धारा प्रवाहित होती है
    • कुल विभवांतर स्रोत का विभवांतर सभी प्रतिरोधों के विभवांतरों के योग के बराबर होता है.​
    • ओम के नियम के अनुसार V_total = I(R1 + R2 + R3 + R4), अतः कुल तुल्य प्रतिरोध R_eq = R1 + R2 + R3 + R4.​
    • यहाँ प्रत्येक प्रतिरोध के मान क्रमशः 3Ω, 4Ω, 5Ω, 6Ω दिए गए हैं, अतः R_eq = 3 + 4 + 5 + 6 = 18Ω.​
  • गणना स्पष्ट चरण:
    • चरण 1: समस्त प्रतिरोध श्रृंखला में धारा I समान रहती है; V1 = I×3, V2 = I×4, V3 = I×5, V4 = I×6.
    • चरण 2: कुल वोल्टेज V_total = V1 + V2 + V3 + V4 = I(3 + 4 + 5 + 6) = I×18.
    • चरण 3: परिणामस्वरूप तुल्य प्रतिरोध R_eq = V_total / I = 18Ω.
  • नोट्स/महत्वपूर्ण बिंदु:
    • श्रृंखला में प्रतिरोध बढ़ते हैं; यदि प्रतिरोधों को क्रमवार नहीं जोड़ा जाए, अगर समानांतर संयोजन होता
    • तो परिणाम अलग होगा (R_eq_parallel = 1/(1/3 + 1/4 + 1/5 + 1/6) आदि), पर यहाँ स्पष्ट रूप से श्रृंखला जोड़ा गया है इसलिए योग ही उत्तर है.​​
    • अगर चाहें तो इस चार प्रतिरोधों के लिए V_source का मान conocer कर सकते हैं, पर वह I के मान पर निर्भर करेगा।

2. विद्युत आवेशों के संदर्भ में गलत कथन की पहचान कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) तड़ित चालक का उपयोग बिजली गिरने की भविष्यवाणी करने के लिए किया जा सकता है।
Solution:
  • तड़ित चालक का उपयोग बिजली गिरने की भविष्यवाणी करने के लिए किया जा सकता है
  • यह एक गलत कथन है। तड़ित चालक एक धातु की चालक छड़ होती है
  • जिसे ऊंचे भवनों की छत पर भवन आदि के रक्षा के लिए लगाया जाता है।
  • समान आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा विपरीत आवेश एक दूसरे को आकर्षित करते हैं।
  • विद्युत आवेश के मूल सिद्धांत (मुख्य बिंदु)
    • आवेश एक अंतर्जात मात्रा है और केवल समान प्रकार के आवेश repell करते हैं
    • विपरीत प्रकार के आकर्षित करते हैं। यही कारण है
    • समान आवेश एक-दूसरे से दूरी पर के संकेत पर force आकर्षित नहीं करते, बल्कि आपस में विकर्षित करते हैं।
    • इस आधार पर कथन जो कहता है कि समान आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं
    • वह गलत है। सामान्यतः: समान आवेश एक-दूसरे को विक्षेपित करते हैं
    • असमान आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। यह गलत कथन ही गलत धारणा साबित करता है ।​
    • विद्युत आवेश संरक्षण का नियम: closed system में कुल आवेश संरक्षित रहता है
    • q_total = q1 + q2 + ... + qn स्थिर रहता है। यह अवधारणा अक्सर सवालों में सही/गलत के रूप में पूछी जाती है
    • इसका सत्यापन संभव बनाता है कि कुछ कथन इस संरक्षित योग के साथ INSIGHT देते हैं ।​
    • विद्युत द्विध्रुव (dipole): एक द्विध्रुव में दो विपरीत समान magnitude के आवेश होते हैं
    • दूरी पर separados होते हैं; कुल आवेश शून्य हो सकता है
    • क्षेत्र शून्य नहीं होता। द्विध्रुव के गुणों के संबंध में सामान्य गलतियाँ होती हैं
    • जैसे यह मानना कि कुल आवेश नहीं होता या दिशानिर्देश गलत होते हैं। इन बिंदुओं पर स्पष्टता आवश्यक है ।​
    • क्षेत्र रेखाओं का गुणधर्म: विद्युत क्षेत्र रेखाएं धनात्मक आवेशों से शुरू होकर ऋणात्मक आवेशों पर समाप्त होती हैं।
    • वे बंद लूप नहीं बनतीं, इसलिए यह कथन कि क्षेत्र रेखाएं बंद लूप बनाती हैं, सामान्यतः गलत है (यह एक सामान्य गलतफहमी है) ।​
  • कौन-कौन से कथन सामान्यतः गलत माने जाते हैं
    • समान आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं” – गलत। समान आवेश एक दूसरे को विकर्षित (repel) करते हैं ।​
    • आवेशों का समाकलन सिद्धांत पर्याप्त नहीं है” – यह ठीक है कि एडिशनल प्रश्नों में आवेशों का संचय (superposition) कितना सही है
    • लेकिन सामान्यतः आवेशों का संचय नियम सही है और इसे समझना चाहिए; अगर विकल्प बताता है कि यह सिद्धांत गलत है, तो वह गलत होगा ।​
    • द्विध्रुव के कुल आवेश का योग शून्य नहीं होता” – द्विध्रुव का कुल आवेश अक्सर शून्य होता है
    • अगर कथन में यह कहा गया हो कि कुल आवेश शून्य नहीं होता, तो वह गलत हो सकता है ।​
  • ध्यान रखने योग्य बातें और निष्कर्ष
    • यदि विकल्प में लिखा हो: “समान आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं
    • तो यह कथन गलत है। सही वेक्यों: समान आवेश एक-दूसरे को विकर्षित करते हैं; विपरीत आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं ।​
    • अगर विकल्प में कहा गया है: “विद्युत क्षेत्र रेखाएं बंद लूप बनाती हैं
    • तो यह गलत है; वास्तविकता यह है कि क्षेत्र रेखाएं कभी भी बंद नहीं होतीं
    • वे धनात्मक से नकारात्मक आवेश तक जाती हैं और दूरी बढ़ने पर धीरे-धीरे कमजोर होती हैं ।​
    • विद्युत स्थितिज ऊर्जा: दो बिंदु आवेश q1 और q2 के बीच ऊर्जा U = (1/(4πϵ0)) (q1 q2)/r है
    • यह ऊर्जा दोनों आवेशों की निकाय स्थितिज ऊर्जा को दर्शाती है।
    • यदि प्रश्न में इनकी sign conventions पूछे गए हों, तो ध्यान दें कि q1*q2 का sign energy पर प्रभाव डालता है ।​
    • कथन: “समान आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं” — गलत; कारण: समान आवेश एक-दूसरे को विकर्षित करते हैं
    • असमान आवेश आकर्षित करते हैं ।​
    • कथन: “क्षेत्र रेखाएं बंद लूप बनाती हैं
    • गलत; कारण: क्षेत्र रेखाएं धनात्मक से शुरू होकर नकारात्मक पर समाप्त होती हैं, इसलिए वे बंद लूप नहीं बनतीं ।​
    • कथन: “कुल आवेश संरक्षण के सिद्धांत का उल्लंघन होता है” — गलत; कारण: बंद प्रणाली में कुल आवेश स्थिर रहता है ।​
  • उचित σημείωση
    • ऊपर दिए गए बिंदु किसी विशिष्ट परीक्षा/प्रश्न-पत्र के कथनों से मेल खा सकते हैं।
    • यदि किसी खास कथन को आप साझा करें, तो उसी आधार पर मैं उसे एक-एक करके विश्लेषित कर सकता हूँ
    • सही/गलत के स्पष्ट तर्क दे सकता हूँ, साथ में संक्षिप्त-द्वितीयक उदाहरण भी।

3. 1834 में किसने एक नियम प्रस्तावित किया था जिसके अनुसार प्रवाह में परिवर्तन से प्रेरित विद्युत धारा परिवर्तन उत्पन्न करने वाले प्रभाव का प्रतिरोध करती है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) हेनरिक फ्रेडरिक लेंज
Solution:
  • वर्ष 1834 में हेनरिक फ्रेडरिक लेंज (Heinrich Friedrich Lenz) द्वारा एक नियम प्रस्तावित किया गया था
  • जिसके अनुसार प्रवाह में परिवर्तन से प्रेरित विद्युत धारा परिवर्तन उत्पन्न करने वाले परिवर्तन का विरोध करती है।
  • मुख्य तथ्य
    • नियम का मूल तर्क: किसी भी चालक में प्रेरित धारा की दिशा ऐसी होगी कि वह उस परिवर्तन का विरोध करे जिससे वह उत्पन्न हुई है।
    • दूसरे शब्दों में, प्रेरित धारा वह प्रतिक्रिया बनाती है
    • जो परिवर्तन को पूर्ववत या निरस्त करने के लिए लागू होती है.​
  • सिद्धांत का प्रेरक विचार
    • ऊर्जा संरक्षण से जुड़ा तर्क: लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के स्तर पर समझाया जा सकता है
    • प्रेरित प्रवाह परिवर्तन एक प्रणाली में ऐसी ऊर्जा विमर्श पैदा करता है
    • जिसे प्रत्यावर्तन के रूप में प्रत्युत्तर देना चाहिए ताकि उत्पन्न परिवर्तन को रोका जा सके या घटाया जा सके.​
  • ऐतिहासिक संदर्भ और महत्त्व
    • लेंज का नियम इलेक्ट्रोमाग्नेटिक प्रेरण के साथ-साथ फिजिक्स के अन्य सिद्धांतों में भी केंद्रीय भूमिका निभाता है।
    • यह नियम बताता है कि प्रेरित धारा चुंबकीय क्षेत्र के परिवर्तन के विरुद्ध दिशा में बनती है, जिससे प्रेरित emf का प्रतिरोध किया जा सके.​
    • इस नियम के साथ, माइकल फैराडे के प्रेरण पर किए गए कार्यों को एक स्पष्ट डायनेमिक दिशा दी गई
    • प्रेरित धारा स्वयं परिवर्तन के विरुद्ध प्रतिक्रिया करती है, जिससे कुल ऊर्जा विनिमय संतुलित रहता है.​
  • संबन्धित संक्षिप्त विवरण
    • नाम: लेन्ज़ का नियम (Lenz's Law)
    • विषय: विद्युत धाराओं के प्रेरित emf और परिवर्तनशील चुम्बकीय Flux
    • प्रयोजन: यह बताने के लिए कि प्रेरित धारा की दिशा किस प्रकार चुंबकीय Flux के परिवर्तन के विरोध में होती है।
    • गणितीय सार: प्रेरित emf E = - dΦ/dt, जहाँ Φ flux है; संकेत (-) का अंश नियम की दिशा बताता है।
  • अक्सर पूछे जाने वाले दावे और स्पष्टीकरण
    • प्रश्न-उत्तर: 1834 में किसने नियम प्रस्तावित किया? उत्तर: हेनेरिक फ्रेडरिक लेंज ने, जिसे लेंज़ का नियम कहा जाता है.​
    • नियम का व्यावहारिक अर्थ: परिवर्तनशील Flux के कारण बनाए गए emf के कारण प्रतिरोधक तंत्र उस परिवर्तन को रोकने या कम करने की दिशा में धारा प्रवाहित करता है, जिससे कुल परिवर्तन की दर घटती है.​
    • संदर्भित इतिहास: लेंज के नियम के साथ प्रेरण के सामान्य अध्ययन में ऊर्जा संरक्षण और रसायन-भौतिकी के संबंध भी प्रकट होते हैं
    • यह नियम विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के व्यावहारिक डिजाइनों में भी लागू होता है (जैसे विद्युत जनरेटर, ट्रांसफॉर्मर आदि).​
  • तुलनात्मक सार
    • लेंज़ का नियम और फ्रेडरिक फैराडे के प्रेरणा के नियम के बीच संबंध: फैराडे का नियम प्रेरित emf के magnitude को dΦ/dt के बराबर बताता है
    • जबकि लेंज का नियम उस emf की दिशा निर्धारित करता है
    • ताकि परिवर्तन के विरोध में हो। दोनों एक साथ मिलकर प्रेरण की पूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करते हैं.​
  • संदर्भित स्रोत (प्राथमिक तथ्य)
    • लेंज के नियम का मूल विचार और इतिहास विवरण: स्रोत बताते हैं कि 1834 में Heinrich F. Lenz ने यह नियम प्रस्तावित किया
    • जिसे आज Lenz's Law कहा जाता है.​
    • समरूप संकल्पनाओं का स्पष्टीकरण और पाठ्य-संदर्भ
    • कई शिक्षण साइटें और अध्ययन संसाधन इस नियम के व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समझाते हैं
    • कैसे प्रवाह-परिवर्तन के विरुद्ध धारा बनती है

4. किसका नियम बताता है कि विद्युत परिपथ में किसी संधि पर संधि में प्रवाहित होने वाली धाराओं का योग संधि से निकलने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) गुस्ताव रॉबर्ट किरचॉफ
Solution:
  • गुस्ताव रॉबर्ट किरचॉफ का नियम यह बताता है
  • विद्युत परिपथ में किसी संधि पर संधि में आने वाली धाराओं का योग संधि से निकलने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है।
  • इसे किरचॉफ का संधि नियम, जंक्शन का नियम या बिंदु नियम भी कहते हैं।
  • यह आवेश के संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
  • नियम का कथन
    • यह नियम गुस्ताफ किरचॉफ (Gustav Kirchhoff) का पहला नियम है, जिसे संधि नियम या धारा नियम भी कहते हैं
    • गणितीय रूप से, किसी संधि पर  या , जहाँ संधि में आने वाली धाराएँ धनात्मक (+) और निकलने वाली ऋणात्मक (-) ली जाती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि i₁ और i₃ संधि में आ रही हों तथा i₂ और i₄ निकल रही हों, तो i₁ + i₃ = i₂ + i₄।​
  • भौतिक आधार
    • यह नियम आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है
    • क्योंकि विद्युत परिपथ में कोई संधि आवेश को संग्रहीत नहीं कर सकती—जितना आवेश आता है
    • उतना ही निकलना चाहिए। जंक्शन पर चार्ज संचय न होने से धाराएँ संतुलित रहती हैं
    • अन्यथा परिपथ में असीमित चार्ज जमा हो सकता।​
  • उपयोग और उदाहरण
    • जटिल परिपथों (जैसे समांतर-क्रमिक प्रतिरोधों वाले) में धाराओं का विश्लेषण करने के लिए KCL आवश्यक है।
    • मान लीजिए एक संधि पर 2A और 3A धाराएँ आ रही हैं, तो निकलने वाली कुल धारा 5A होगी।
    • वास्तविक परिपथों में, जैसे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट या पावर ग्रिड, यह नियम धारा वितरण गणना करता है।​
  • किरचॉफ के दूसरे नियम से अंतर
    • किरचॉफ का दूसरा नियम (KVL) बंद लूप में वोल्टेज ड्रॉप्स के योग को शून्य बताता है
    • जो ऊर्जा संरक्षण पर आधारित है
    • जबकि KCL केवल संधियों पर लागू होता। दोनों नियम परिपथ विश्लेषण के लिए पूरक हैं।

5. फ्यूज तार के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) इसमें निम्न गलनांक और उच्च चालकता होती है।
Solution:
  • फ्यूज तार का गलनांक बिंदु निम्न तथा प्रतिरोध उच्च होने के कारण फ्यूज तार को टिन तथा लेड के मिश्रण से निर्मित किया जाता है।
  • फ्यूज तार की चालकता उच्च होती है।
  • संक्षिप्त उत्तर
    • जो परिपथ में अत्यधिक धारा प्रवाहित होने पर पिघलकर सर्किट को बंद कर देता है
    • ताकि उपकरणों को नुकसान न पहुंचे. यह तापीय आधार पर काम करता है
    • सामान्य धारा के दौरान धीरे-धीरे गर्म होकर यह पूरी तरह से पिघल नहीं होता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर ही कार्य करता है.​
  • फ्यूज क्या है
    • फ्यूज एक सुरक्षा उपकरण है जो विद्युत परिपथ में रखा जाता है
    • ताकि अधिक धारा प्रवाहित होने पर वह स्वयं पिघलकर टूट जाए और धारा प्रवाह रोक दे. यह तार आम तौर पर टिन या लेड-टिन मिश्र धातु के होते हैं
    • क्योंकि इनका गलनांक कम होता है और पिघलना आसान होता है
    • फ्यूज तार का चयन इसके गलनांक और चालकता पर निर्भर होता है
    • ताकि यह सामान्य ऑपरेशन में अवरोध न बनाएं और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा दे सकें.​
  • कैसे काम करता है
    • फ्यूज का मूल सिद्धांत ऊष्मीय-विद्युत प्रभाव है: धारा बहुत अधिक होने पर फ्यूज तत्व तेजी से गर्म होता है
    • गलनांक तक पहुँचते ही पिघल जाता है और सर्किट को तोड़ देता है
    • जिससे आगे धारा प्रवाह नहीं हो पाती. इससे पंख या केबल में आग लगना या अन्य नुकसान रोकते हैं.​
  • किस प्रकार की सामग्री उपयोग में आती है
    • सामान्य फ्यूज तार स्नोबल (Sn) और लेड (Pb) के मिश्रधातु से बना होता है
    • कभी-कभी निर्माण के अनुसार उच्च चालकता वाले तत्व भी मिलते हैं
    • लेकिन मुख्य-कटौती यही दो तत्व प्रमुख हैं. कई स्रोत बताते हैं
    • फ्यूज तार में उच्च प्रतिरोध और कम गलनांक की सामग्री चुनी जाती है ताकि सही समयमा पिघलना सुनिश्चित हो सके.​
  • गलत धारणाओं का स्पष्टीकरण
    • गलत धारणाओं में कहा जाता है कि फ्यूज तार मोटा होता है
    • वह अधिक धारा ले सके; असल में फ्यूज के लिए पतला तार चुना जाता है
    • अधिक धारा आने पर वह जल्दी गर्म होकर पिघल जाए और सर्किट को सुरक्षित रूप से तोड़ दे
    • यह धारणाएं सत्यापित करते समय धारा-गणना और गलनांक के अनुपात को देखना जरूरी है।​
  • फ्यूज बनाम अन्य सुरक्षा उपकरण
    • फ्यूज एक एक-बार उपयोग का सुरक्षा उपाय है; इसके स्थान पर MCB (मैकेनिकल-कंट्रोल्ड ब्रेकर) भी इस्तेमाल होते हैं
    • जो बदले जा सकने वाले हों, जबकि फ्यूज को बदलना पड़ता है। हमेशः सर्किट डिज़ाइन में इन दोनों के लाभ-हानियाँ देखे जाते हैं
  • रिपोर्ट-आधार संदर्भ
    • फ्यूज की परिभाषा और कार्य-pधति, गलनांक/तार-चालकता के संबंध, और धारा के उच्च प्रवाह पर पिघलने की प्रक्रिया विभिन्न सामान्य संदर्भ स्रोतों में उल्लेखित है
    • जैसे Doubtnut, Testbook आदि स्रोतों में दी गई व्याख्याओं के आधार पर
    • इन स्रोतों के अनुसार फ्यूज का तार अक्सर कम गलनांक वाले धातु से बना होता है
    • जो सुरक्षित रूप से परिचालित होता है और अत्यधिक धारा पर पिघलकर सर्किट को रोक देता है.​
  • यदि चाहें तो नीचे की चीजें भी स्पष्ट कर सकते हैं:
    • आपके पाठ या परीक्षा के अनुसार कौन-से विकल्प सही माने जाएँगे (क्योंकि प्रश्न-प्रकार के अनुसार सही विकल्प भिन्न हो सकता है)।
    • फ्यूज के प्रकार (कार्ट्रिज, फ्यूज तार, रीवायरबल आदि) और उनके उपयोग-परिदृश्य।
    • सुरक्षा-प्रोटोकॉल: फ्यूज बदलते समय क्या सावधानियाँ रखें।

6. कौन 1827 में एक सूत्र प्रकाशित करने के लिए प्रसिद्ध था जो विद्युत धारा, प्रतिरोध और वोल्टता के बीच एक गणितीय संबंध दर्शाता है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) जॉर्ज साइमन ओम
Solution:
  • जॉर्ज साइमन ओम (George Simon Ohm) द्वारा वर्ष 1827 में एक सूत्र, जिसे ओम का नियम भी कहा जाता है
  • प्रतिपादित किया गया था। यह नियम विद्युत धारा प्रतिरोध और वोल्टता के बीच एक गणितीय संबंध दर्शाता है।
  • V = IR
  • जहां
  • V = वोल्टता
  • l = धारा
  • R = प्रतिरोध
  • मौलिक इतिहास और व्यक्ति
    • इस प्रकाशन ने ओम के नियम की स्थापना की, जिसका संक्षिप्त रूप है
    • V = IR. यह नियम विद्युत सर्किटों के विश्लेषण की आधारशिला बना और बाद में विद्युत विज्ञान के प्रमुख ढांचे में समाहित हुआ.​
  • सूत्र का सही रूप और अर्थ
    • ओम के नियम के अनुसार धारा I, विभवांतर V, और प्रतिरोध R के बीच संबंध ऐसा है कि V = IR. यहाँ:
    • V: स्रोत या पथ के दो बिंदुओं के बीच विभवांतर (वोल्टेज)
    • I: धारा (एम्पियर, A)
    • R: प्रतिरोध (ओम, Ω)
    • समीकरण डीफिनेशन के अनुसार, किसी वस्तु का प्रतिरोध वह गुण है
    • जो धारा के प्रवाह पर वह क्यों और कितना रोक प्रभाव डालता है
    • पदार्थ, उसकी ज्यामिति, और तापमान आदि पर निर्भर रहता है
    • ओम का नियम इन घटकों को एक सरल दो-घटक संबंध में जोड़ देता है.​
  • इतिहास से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बिंदु
    • ओम ने अपने प्रयोगों और गणितीय विश्लेषण के जरिये यह दिखाया कि विद्युत प्रवाह में योगदान देने वाले विभेदकों के बीच एक रैखिक, गुणात्मक संबंध है
    • जिसे एक सार्वभौमिक नियम के रूप में मान्यता मिली
    • आरम्भ में कुछ समकालीनों ने प्रतिरोध के सिद्धान्त को सीधे नहीं माना, पर समय के साथ ओम के नियम का मान्यता व्यापक हो गई.​
  • आधुनिक उपयोग और उदाहरण
    • Ohm के नियम की व्यावहारिकता हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में है
    • चाहे वह एक सरल रचना हो या जटिल सर्किट
    • यह बताता है कि किसी विशिष्ट प्रतिरोध के साथ चरित्र में कितनी धारा प्रवाह होगी या किसी दिए गए स्रोत पर कितनी धारा चलेगी
    • इसे आप निम्न तरीके से आज़मा सकते हैं:​
    • एक resistor R = 10 Ω और एक DC source V = 5 V दें, तो I = V/R = 0.5 A होगा.​
    • यदि धारा 2 A हो और प्रतिरोध 4 Ω हो, तो विभवांतर V = IR = 8 V होगा.​
  • संदर्भित स्रोत (कृपया देखें)
    • ओम के नियम और 1827 में प्रकाशित कार्य: ओम का नियम का इतिहास और उनके योगदान.​
    • प्रतिरोध, धारा, विभवांतर के सामान्य सत्यापन और उपयोगी उदाहरण: Ohm's law पर हिंदी स्रोतों के संकलन.​

7. निम्नलिखित में से 1A की विद्युत धारा में निहित इलेक्ट्रॉनों की उचित संख्या क्या है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 6.25 × 10¹⁸
Solution:
  • विस्तार से समझाएं
    • धारा I को परिभाषित किया जाता है कि किसी समय अंतराल में प्रवाहित कुल आवेश Q के बराबर होती है
    • I = ΔQ / Δt. इसका अर्थ है कि 1 ऐम्पियर धारा में प्रति सेकंड कुल आवेश Q = 1 coulomb प्रवाहित होता है. [उल्लेख: सामान्य विद्युत धारा की परिभाषा]​
    • एक इलेक्ट्रॉन का आवेश ई मानly होता है: e ≈ 1.602 × 10^-19 coulombs. अतः एक इलेक्ट्रॉन का आवेश लगभग 1.602 × 10^-19 C है
    • किसी धारा I में प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों की संख्या n निकालने के लिए n = Q / e, जहां Q = I × Δt है।
    • एक सेकेंड के लिये Δt = 1 s होने पर Q = I × 1 s = I Coulombs होता है। इसलिए n = I / e. [उल्लेख: धारा से संख्या तक पहुँचना]​
    • 1 A धारा के लिये n = 1 / (1.602 × 10^-19) ≈ 6.242 × 10^18 इलेक्ट्रॉन प्रति सेकंड प्रवाहित होते हैं।
    • यह मान सामान्यतः 6.24 × 10^18 इलेक्ट्रॉन/सि के रूप में प्रयोग किया जाता है। [उल्लेख: गणितीय निष्कर्ष]​
    • कुछ अध्ययन/स्थानों पर यह संख्या 6.25 × 10^18 भी दिखती है (सरलीकरण के कारण)
    • लेकिन वास्तविक मान 6.242 × 10^18 है जब e = 1.602176634 × 10^-19 C मान लिया जाए। [उल्लेख: वैकल्पिक प्रस्तुतीकरण]​
    • व्यावहारिक संकेत: इलेक्ट्रॉन एक अविभाज्य कण नहीं है, पर धारा एक क्रमिक रूप से घटित आवेश की धार है
    • अतः प्रति सेकंड प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों की गिनती एक औसत मान है
    • जो ऊपर के सूत्र से निकलती है. [उल्लेख: अवधारणा अस्पष्टता और औसतित्व]​
  • क्या पूछा गया है: “1A की विद्युत धारा में निहित इलेक्ट्रॉनों की उचित संख्या क्या है?”
    • उत्तर: लगभग 6.242 × 10^18 इलेक्ट्रॉन प्रति सेकंड। अगर आप 1.0 A धारा के लिए प्रत्येक सेकंड की संख्या पूछ रहे हैं
    • यही मान है। अगर समय के लिए किसी अन्य Δt दिया हो, तो इलेक्ट्रॉन संख्या n = I × Δt / e से निकलेगी।​
  • विस्तार के साथ छोटे नोट:
    • आवेश इकाई: 1 C = 1 A·s. इसलिए 1 A धारा मिलने पर 1 C आवेश प्रति सेकेंड प्रवाहित होता है.​
    • इलेक्ट्रॉन का मौलिक आवेश: e ≈ 1.602 × 10^-19 C. अतः 1 C आवेश में इलेक्ट्रॉन की संख्या ≈ 1 C / (1.602 × 10^-19 C) ≈ 6.242 × 10^18 होता है.​
    • अन्य स्रोतों में भी यही परिणाम मिलता है; कुछ सरलीकृत उत्तर 6.25 × 10^18 के रूप में भी दिखते हैं (उसी अवधारणा पर आधारित).​
  • महत्वपूर्ण सूत्रs (सार):
    • I = Q / t
    • Q = n × e
    • n = Q / e = I × t / e

8. एक छड़ चुंबक के अंदर चुंबकीय बल रेखाओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा दावा सही है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) चुंबक के S - ध्रुव से N-ध्रुव तक
Solution:
  • चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण निम्न हैं-
    • किसी चुंबक (या धारावाही परिनालिका) की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं सतत बंद लूप का निर्माण करती हैं।
    • यह वैद्युत द्विध्रुव के जैसी नहीं है, जहां ये रेखाएं धनावेश से शुरू होकर ऋणावेश पर खत्म हो जाती हैं।
    • क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखाएं उस बिंदु पर परिणामी चुंबकीय क्षेत्र (B) की दिशा का निर्धारण करती हैं।
    • क्षेत्र के लंबवत रखे गए उस तल के प्रति इकाई क्षेत्रफल से जितनी रेखाएं गुजरती हैं
    • उतना ही अधिक उस स्थान पर चुंबकीय क्षेत्र (B) का परिमाण होता है।
    • चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक दूसरे को काटती नहीं हैं।
  • विस्तृत व्याख्या
    • यह बात क्लासिकल मॅग्नेटिक फील्ड की प्रकृति को दर्शाती है जिसमें दिशा और प्रवाह सतत एक चक्र के रूप में बाॅंधे रहते हैं
    • बल-रेखा घनत्व (B) क्षेत्र_strength को दर्शाती है
    • क्षेत्र-रेखाओं का घनत्व जितना अधिक, क्षेत्र उतना ही मजबूत माना जाता है। चुंबक के ध्रुवों के पास घनत्व अधिक रहता है
    • दूरी बढ़ने पर घटता है, जिससे अंदर और बाहर दोनों जगह बल की तीव्रता घटती है।
    • यह विद्युत-chumbakiya क्षेत्र के गुणों में एक मौलिक तथ्य है [उच्च-स्तरीय पाठ्य-सार]।
    • चुम्बकीय बल रेखाओं के गुणों के बारे में आम लोक-व्यावहारिक गलतफहमियाँ भी प्रचलित हैं
    • जैसे रेखाएं कभी-कभी अंदर बंद नहीं होतीं; वास्तविकता यह है कि वे एक पूर्ण बंद सर्किट बनाती हैं
    • छड़चुम्बक के बाहर दक्षिण से उत्तर तक और अंदर से उत्तर से दक्षिण की ओर—जो प्रकृति में निरंतर चक्र बनाती है [क्लासिक व्याख्या]।
  • यदि चाहें, इस विषय पर मैं एक साफ़-नीचे डायग्राम-आधारित समझ लेआउटलिस्ट बना सकता हूँ, जिसमें:
    • दक्षिण से उत्तर की प्रवाह दिशा की arrows के साथ
    • अंदर/बाहर के क्षेत्र-रेखाओं की क्षमता और घनत्व
    • दूरी के साथ क्षेत्र की कमी-भविष्यबाणी (field strength fall-off)
    • सब कुछ एक साथ दिखे।