विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-I

Total Questions: 50

1. निम्नलिखित में से कौन-से राज्य गरीब कल्याण रोजगार अभियान का हिस्सा हैं? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) बिहार और मध्य प्रदेश
Solution:
  • गरीब कल्याण रोजगार अभियान COVID-19 महामारी के मद्देनजर गांवों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था।
  • इस अभियान में छः राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, राजस्थान को शामिल किया गया है।
  • शामिल राज्य
    • यह अभियान छह राज्यों में संचालित किया गया:
    • बिहार (32 जिले)
    • उत्तर प्रदेश (31 जिले)
    • मध्य प्रदेश (24 जिले)
    • राजस्थान (22 जिले)
    • ओडिशा
    • झारखंड
    • कुल 116 जिलों को कवर किया गया, जिनमें 27 आकांक्षी (aspirational) जिले भी शामिल थे।
  • उद्देश्य
    • अभियान का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास करते हुए प्रवासी श्रमिकों को तत्काल रोजगार देना था।
    • इसमें 25 प्रकार के कार्य शामिल थे, जैसे ग्रामीण आवास निर्माण (PMAY-G), जल संरक्षण, स्वच्छता (स्वच्छ भारत मिशन), सड़क निर्माण (PMGSY), रेलवे ट्रैक निर्माण, और कृषि से जुड़े काम।
    • ग्रामीण विकास मंत्रालय नोडल मंत्रालय था, जबकि 12 केंद्रीय मंत्रालयों ने समन्वय किया।
  • कार्यान्वयन और बजट
    • अवधि: 20 जून से 2 नवंबर 2020 तक (125 दिन), मिशन मोड में।
    • बजट: लगभग 50,000 करोड़ रुपये।
    • लाभार्थी: अनुमानित 2/3 प्रवासी श्रमिक (लगभग 6 करोड़ श्रमिकों के मूल राज्यों पर फोकस)।
    • प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स गठित की गई, जो कार्यों की निगरानी करती थी।
    • डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे GKRA पोर्टल के माध्यम से प्रगति ट्रैक की गई।
  • उत्तर प्रदेश के चयनित जिले (उदाहरण)
    • उत्तर प्रदेश में 31 जिले शामिल थे, जैसे सिद्धार्थनगर, प्रयागराज, गोंडा, महराजगंज, बहराइच, बलरामपुर, जौनपुर, हरदोई, आज़मगढ़, बस्ती, गोरखपुर, सुल्तानपुर, कुशीनगर, संतकबीरनगर, बांदा, अंबेडकरनगर, सीतापुर, वाराणसी, गाज़ियाबाद, प्रतापगढ़, रायबरेली, अयोध्या, देवरिया, अमेठी, लखीमपुर खीरी, उन्नाव, श्रावस्ती, फतेहपुर, मिर्ज़ापुर, जालौन, और कौशाम्बी।​
  • उपलब्धियां और प्रभाव
    • अभियान ने लाखों श्रमिकों को रोजगार दिया और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया।
    • उदाहरणस्वरूप, जल संरक्षण और सड़क निर्माण में भारी प्रगति हुई।
    • हालांकि, यह समय-सीमित था और 2020 के बाद अलग योजनाओं (जैसे MNREGA) में एकीकृत हो गया।
    • यह प्रवासी संकट के समाधान का एक तात्कालिक कदम साबित हुआ।

2. निम्नलिखित में से क्या घरेलू आय में शामिल नहीं है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) देश के बाहर अनिवासियों द्वारा अर्जित आय
Solution:
  • घरेलू आय जिसे सकल घरेलू उत्पाद के रूप में भी जाना जाता है
  • किसी देश की घरेलू सीमा के भीतर स्थित निवासी उत्पादक तथा गैर-निवासी उत्पादक इकाइयों द्वारा एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
  • देश के बाहर अनिवासियों द्वारा अर्जित आय राष्ट्रीय आय का हिस्सा है न कि घरेलू आय का
  • घरेलू आय की परिभाषा
    • घरेलू आय वह कुल आय है जो देश की सीमाओं के भीतर सभी उत्पादक इकाइयों—जैसे घरों, फर्मों, व्यवसायों और सरकार—द्वारा उत्पादन के बदले प्राप्त होती है।
    • इसमें मजदूरी, ब्याज, लाभांश, किराया और मुनाफा जैसे कारक आय शामिल हैं
    • लेकिन केवल वही जो देश के भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं। उदाहरणस्वरूप, भारत में कोई विदेशी कंपनी द्वारा अर्जित मुनाफा घरेलू आय का हिस्सा होगा
    • जबकि भारतीय निवासी द्वारा विदेश में कमाई नहीं। गणना का सूत्र सामान्यतः कारक लागत पर GDP होता है
    • घरेलू आय = GDP (कारक लागत पर) ± समायोजन (जैसे मूल्यह्रास, सब्सिडी, कर)।
  • घरेलू आय में शामिल तत्व
    • देश के अंदर उत्पादन से आय: कृषि, उद्योग, सेवाएं और निर्माण जैसे सभी क्षेत्रों से उत्पन्न मूल्य।
    • निवासी और गैर-निवासी दोनों की आय: यदि आय भारत की सीमाओं के भीतर बनी है, तो यह शामिल।
    • कारक आय: श्रम (वेतन), पूंजी (ब्याज), भूमि (किराया) और उद्यम (मुनाफा) से प्राप्त।
      यह राष्ट्रीय आय से भिन्न है, क्योंकि राष्ट्रीय आय में विदेश से निवासियों की शुद्ध आय (NFIA) जोड़ी जाती है।
  • घरेलू आय में शामिल नहीं होने वाले तत्व
    • सवाल के संदर्भ में, "निम्नलिखित में से क्या घरेलू आय में शामिल नहीं है?" का उत्तर देश के बाहर अनिवासियों (गैर-निवासियों) द्वारा अर्जित आय है।
    • इसका कारण यह है कि घरेलू आय केवल देश की सीमाओं तक सीमित रहती है
    • विदेश में कोई भी व्यक्ति (यहां तक कि गैर-निवासी) जो कमाता है
    • वह घरेलू आय का हिस्सा नहीं बनता। यह राष्ट्रीय आय में जा सकता है यदि वह देश का निवासी हो। अन्य उदाहरण:
    • विदेश से प्राप्त शुद्ध कारक आय (NFIA): भारतीय निवासियों द्वारा विदेश में कमाई, जो GDP को GNP में बदलने के लिए जोड़ी जाती है।
    • अंतरण भुगतान: पेंशन, दान, उपहार या बेरोजगारी लाभ, क्योंकि ये उत्पादन-आधारित नहीं होते।
    • मध्यवर्ती माल, सेकंड-हैंड बिक्री, गृहिणी की घरेलू सेवा: ये उत्पादन प्रक्रिया में योगदान नहीं देते या दोहरी गणना रोकते हैं।
  • महत्व और उपयोग
    • घरेलू आय अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता को मापती है
    • जो नीति-निर्माण, मुद्रास्फीति विश्लेषण और विकास दर गणना में सहायक है।
    • भारत जैसे देश में, यह GDP डेटा से निकाला जाता है, जो RBI और CSO द्वारा प्रकाशित होता है।
    • हालांकि, यह प्रवासन या विदेशी निवेश प्रभावों को नजरअंदाज करता है, इसलिए GNP के साथ तुलना आवश्यक है।
    • यह व्याख्या पूर्ण रूप से घरेलू आय की अवधारणा को स्पष्ट करती है, जहां विदेशी आय का बहिष्कार मुख्य बिंदु है।​

3. दिसंबर, 2022 में भारत के पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने संघीय सरकार से देश के ....... के लिए यूके (UK) पेंशन योजना जैसी पेंशन योजना आरंभ करने की सिफारिश की है। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) गिग श्रमिकों
Solution:
  • भारतीय पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) पेंशन निधि के लिए भारत का मुख्य नियामक निकाय है।
  • इसने देश के गिग श्रमिकों के लिए 'यूके पेंशन योजना' जैसी एक पेंशन योजना आरंभ करने की सिफारिश की है।
  • इस कदम का उद्देश्य गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों को बढ़ाना है।
  • UK पेंशन योजना की विशेषताएं
    • UK में गिग वर्कर्स (जैसे Uber ड्राइवर या डिलीवरी पार्टनर) के लिए ऑटो-एनरोलमेंट आधारित पेंशन स्कीम चल रही है।
    • इसमें नियोक्ता और कर्मचारी दोनों योगदान देते हैं; न्यूनतम योगदान 8% (3% नियोक्ता + 5% कर्मचारी) होता है।
    • यह DC (Defined Contribution) मॉडल पर आधारित है, जो लचीलापन देती है।
    • भारत में PFRDA ने इसी मॉडल को अनुकूलित करने का सुझाव दिया
    • जहां गिग प्लेटफॉर्म्स NPS (National Pension System) को एकीकृत कर सकें।
  • भारत के गिग वर्कर्स का संदर्भ
    • 2022 तक भारत में 1.5 करोड़ से अधिक गिग वर्कर्स थे, जो 2026 तक 2.35 करोड़ होने का अनुमान था।
    • ये वर्कर्स असंगठित क्षेत्र से हैं, बिना पेंशन कवरेज के, जो सेवानिवृत्ति में असुरक्षा पैदा करता है।
    • PFRDA का लक्ष्य इन्हें NPS के दायरे में लाना था, न्यूनतम योगदान के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए।​
  • सिफारिश के मुख्य बिंदु
    • प्लेटफॉर्म्स की भूमिका: Ola, Zomato जैसे ऐप्स को NPS योगदानकर्ता बनाना, जहां वे कर्मचारी हिस्सा काट सकें।
    • लचीलापन: पार्ट-टाइम काम के हिसाब से योगदान, UK की तरह ऑटो-एनरोलमेंट।
    • सरकारी समर्थन: शुरुआती सब्सिडी या को-कॉन्ट्रिब्यूशन से प्रोत्साहन।
    • यह कदम NPS को विस्तार देता, जो मुख्यतः संगठित क्षेत्र तक सीमित था।
  • आगे की प्रगति
    • 2023 में UK-India पेंशन सहयोग शुरू हुआ, जहां PFRDA को UK विशेषज्ञों से क्षमता निर्माण मिला।
    • हाल के वर्षों में UPS (Unified Pension Scheme) जैसी योजनाएं आईं, लेकिन गिग वर्कर्स के लिए विशिष्ट स्कीम अभी प्रस्तावित है।
    • 2026 तक PFRDA ने NPS में सुनिश्चित भुगतान के लिए समिति गठित की, जो गिग सेक्टर को प्रभावित कर सकती है।

4. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS)-5, 2019-21 के अनुसार कितने प्रतिशत महिलाओं के पास बैंक या बचत खाता है जिसका वे स्वयं उपयोग करती हैं? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) 78.6%
Solution:
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5, 2019-21 के अनुसार, 78.6% महिलाओं के पास बैंक या बचत खाता है
  • जिसका वे स्वयं उपयोग करती हैं। NFHS-4, 2015-16 में यह आंकड़ा 53% था।
  • राष्ट्रीय आंकड़े
    • NFHS-5 सर्वेक्षण में 15-49 वर्ष की महिलाओं में से 78.6% के पास बैंक या बचत खाता है
    • जिसका वे स्वयं संचालन करती हैं। यह वृद्धि प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) और डिजिटल बैंकिंग पहलों से जुड़ी है
    • जिसने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाई।
  • ग्रामीण बनाम शहरी अंतर
    • शहरी क्षेत्र: लगभग 81% महिलाओं के पास स्वयं उपयोग किया जाने वाला बैंक खाता है।
    • ग्रामीण क्षेत्र: 77.4% महिलाओं के पास ऐसा खाता है, जो शहरी से थोड़ा कम है लेकिन फिर भी उल्लेखनीय प्रगति दर्शाता है।
    • ग्रामीण महिलाओं में वृद्धि दर तेज रही, हालांकि शहरी क्षेत्र अभी भी आगे हैं। यह अंतर शिक्षा, रोजगार और जागरूकता स्तर से प्रभावित होता है।​
  • राज्य-स्तरीय विविधताएं
    • अधिकांश राज्यों में 70% से ऊपर आंकड़े, जैसे फेज-II में सभी में 70%+ (गुजरात 70%, नागालैंड 64% को छोड़कर)।
    • बिहार और उत्तर पूर्वी राज्यों में सबसे तेज सुधार देखा गया।​
      NFHS-5 के फेज-I और II आंकड़ों से पता चलता है कि लगभग सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 70%+ महिलाओं के पास खाते हैं।​
  • संबंधित संकेतक
    • NFHS-5 में महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण के अन्य आंकड़े भी प्रगति दिखाते हैं:
    • मोबाइल फोन स्वामित्व: शहरी 70%, ग्रामीण 46.6% (NFHS-4 से 8% वृद्धि)।​
    • घरेलू निर्णय: स्वास्थ्य, खरीदारी और यात्रा जैसे फैसलों में अधिक भागीदारी।
    • संपत्ति स्वामित्व: ग्रामीण 45.7%, शहरी 38.3%।​
    • ये आंकड़े महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को मजबूत करते हैं, लेकिन ग्रामीण-शहरी असमानता बनी हुई है।
    • NFHS-5 ने 2,81,429 परिवारों, 3,07,422 महिलाओं और 43,945 पुरुषों का सर्वेक्षण किया।​
  • नीतिगत प्रभाव
    • PMJDY ने 2014 से 50 करोड़+ खाते खोले, जिनमें अधिकांश महिलाओं के।
    • NFHS-5 डेटा SDG 5 (लिंग समानता) और आर्थिक सशक्तिकरण लक्ष्यों की प्रगति मापता है।
    • हालांकि, उपयोग दर (सिर्फ खाता न होना) महत्वपूर्ण है, जो वास्तविक नियंत्रण दर्शाता है।

5. भारत में बेरोजगारी से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

A. मौसमी बेरोजगारी मुख्यतः शहरी क्षेत्रों में पाई जाती है।

B. शिक्षित बेरोजगार लोग मुख्य रूप से भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

C. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी को कम करने के लिए उच्च फसल सघनता वांछनीय है।

दिए गए कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Correct Answer: (c) केवल C
Solution:
  • फसल सघनता का अर्थ है, कृषि वर्ष के दौरान एक ही खेत से उगाई जाने वाली फसलों की संख्या को बढ़ाना।
  • यदि एक वर्ष में एक फसल उगाई जाएगी, तो फसल सघनता का सूचकांक 100 होगा और यदि दो फसलें उगाई जाएंगी, तो यह 200 होगा।
  • यह वास्तव में कृषि मजदूरों के लिए अधिक निरंतर काम प्रदान करके ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी को कम करने में मदद कर सकती है।
  • उच्च फसल सघनता वास्तव में ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी को कम करने में मदद कर सकती है।
  • मौसमी बेरोजगारी मुख्य रूप से कृषि प्रधान ग्रामीण क्षेत्रों में पाई जाती है, न कि शहरी क्षेत्रों में।
  • ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत में कृषि काफी हद तक मानसून के मौसम पर निर्भर है।
  • ऐसी स्थिति जहां शिक्षित व्यक्ति उपयुक्त नौकरियां ढूंढ़ने में असमर्थ होते हैं, उसे शिक्षित बेरोजगारी कहते हैं।
  • आमतौर पर यह ग्रामीण क्षेत्रों के बजाय शहरी क्षेत्रों से अधिक संबंधित है।
  • बेरोजगारी के प्रमुख कारण
    • भारत में बेरोजगारी के पीछे जनसंख्या वृद्धि सबसे बड़ा कारक है, क्योंकि श्रमिक आयु वर्ग की आबादी रोजगार अवसरों से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है।
    • शिक्षा प्रणाली में व्यावहारिक और तकनीकी कौशल की कमी, कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, औद्योगिक विकास की धीमी गति तथा आधुनिक मशीनरी और AI जैसी तकनीकों का बढ़ता उपयोग भी नौकरियों को सीमित कर रहे हैं।
    • इसके अलावा, सरकारी भर्तियों में देरी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी चक्रीय बेरोजगारी को बढ़ावा देते हैं
    • जबकि कौशल असंतुलन के कारण केवल 51% युवा ही उद्योग-उपयुक्त कौशल रखते हैं।
  • बेरोजगारी के प्रकार
    • भारत में मौसमी बेरोजगारी मुख्यतः ग्रामीण कृषि क्षेत्रों में पाई जाती है, जहां मानसून पर निर्भरता के कारण काम की कमी होती है।
    • शिक्षित बेरोजगारी शहरी क्षेत्रों में अधिक प्रचलित है, जहां डिग्रीधारी उपयुक्त नौकरियां न पा सकें।
    • अन्य प्रकारों में चक्रीय बेरोजगारी (आर्थिक मंदी से), तकनीकी बेरोजगारी (ऑटोमेशन से), अल्प-रोजगार (कम घंटे का काम) और दीर्घकालिक बेरोजगारी शामिल हैं
    • जो कौशल ह्रास और आत्मसम्मान को प्रभावित करती हैं।
  • वर्तमान स्थिति (2026 तक)
    • जनवरी 2026 तक, देश में 15 वर्ष से ऊपर की आबादी में बेरोजगारी दर लगभग 4.8% है
    • लेकिन शहरी क्षेत्रों में यह 6.7% तक पहुंच गई है।
    • वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में राष्ट्रीय दर 5.2% रही, हालांकि शहरी बेरोजगारी 6.9% हो गई।
    • युवाओं में यह समस्या गंभीर है, जहां मॉर्गन स्टेनली के अनुसार वर्तमान विकास दर से दोगुनी गति की आवश्यकता है।
    • महिला श्रम भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन संरचनात्मक संकट जैसे कौशल अंतर और अस्थायी नौकरियां बनी हुई हैं।
  • प्रभाव और परिणाम
    • बेरोजगारी गरीबी, आय असमानता और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ाती है
    • विशेषकर युवाओं में निराशा से अपराध और राजनीतिक अशांति उत्पन्न होती है।
    • मानसिक तनाव, परिवारों का संघर्ष और जनसांख्यिकीय लाभांश का अपव्यय होता है, जबकि अल्प-रोजगार से आय असुरक्षा बनी रहती है।
  • सरकारी प्रयास और समाधान
    • सरकार ने स्किल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, MSME समर्थन और श्रम-प्रधान विनिर्माण को बढ़ावा दिया है।
    • ग्रामीण विविधीकरण, उच्च GDP वृद्धि और स्थायी रोजगार पर जोर आवश्यक है।
    • राष्ट्रीय रोजगार नीति में कौशल विकास, उद्यमिता प्रोत्साहन और तकनीकी शिक्षा सुधार पर फोकस से समस्या का समाधान संभव है, ताकि युवा शक्ति का इष्टतम उपयोग हो।

6. गरीबी के आकलन में निम्नलिखित में से किसे संदर्भित किया जा सकता है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) मासिक प्रति व्यक्ति व्यय
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में से गरीबी के आकलन हेतु 'मासिक प्रति व्यक्ति व्यय' को संदर्भित किया जा सकता है।
  • इसकी गणना जनसंख्या के कुल मासिक व्यय को कुल संख्या से विभाजित करके की जाती है।
  • गरीबी आकलन की अवधारणा
    • गरीबी का आकलन आमतौर पर गरीबी रेखा (Poverty Line) के आधार पर किया जाता है
    • जो न्यूनतम आवश्यकताओं (भोजन, वस्त्र, आवास आदि) को पूरा करने के लिए आवश्यक खर्च को दर्शाती है।
    • भारत में यह प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय (MPCE) पर आधारित होता है
    • जहां कैलोरी सेवन (ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 और शहरी में 2100 कैलोरी प्रतिदिन) को मूल आधार माना जाता है।
    • अन्य विकल्प जैसे औसत सीमांत उपयोगिता (अर्थशास्त्र में उपयोगिता सिद्धांत से जुड़ा), अधिकतम समर्थन मूल्य या न्यूनतम समर्थन मूल्य (कृषि उत्पादों के लिए सरकारी
    • मूल्य निर्धारण से संबंधित) गरीबी मापन से असंबंधित हैं।​
  • प्रमुख समितियां और उनके मानदंड
    • भारत में गरीबी आकलन विभिन्न समितियों द्वारा विकसित विधियों पर आधारित रहा है:
    • योजना आयोग कार्य समूह (1962): ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ₹20 प्रति व्यक्ति मासिक व्यय का सुझाव दिया।​
    • अलघ समिति (1993 से पहले): कैलोरी-आधारित दृष्टिकोण को मजबूत किया।
    • लकड़ावाला समिति (1993): खपत व्यय को कैलोरी आधारित रखा
    • लेकिन राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखाओं के लिए CPI-AL (ग्रामीण) और CPI-IW (शहरी) का उपयोग सुझाया।
    • इसने राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान टोकरी को अस्वीकार किया।
    • तेंदुलकर समिति (2009): कैलोरी के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, वस्त्र और स्थायी वस्तुओं को शामिल किया।
    • 2011-12 के लिए ग्रामीण ₹816 और शहरी ₹1000 MPCE निर्धारित। वर्तमान अनुमान इसी पर आधारित हैं।​
    • रंगराजन समिति (2014): तेंदुलकर की कमियों को दूर कर ग्रामीण ₹972 और शहरी ₹1407 MPCE सुझाया, जिसमें आवास, स्वास्थ्य आदि जोड़े।​
    • ये समितियां NSSO सर्वेक्षणों (Uniform Reference Period और Mixed Reference Period) पर निर्भर करती हैं।​
  • विधियां और संकेतक
  • चुनौतियां और सुधार
    • सीमाएं: कैलोरी फोकस पोषण की गुणवत्ता नजरअंदाज करता है; शहरीकरण और महंगाई समायोजन कठिन।​
    • वर्तमान स्थिति: तेंदुलकर विधि प्रमुख, लेकिन NITI Aayog MPI को बढ़ावा दे रहा।
    • 2011-12 में 21.9% गरीबी दर थी, जो घटकर MPI में कम हुई।​
    • अंतरराष्ट्रीय संदर्भ: विश्व बैंक $2.15/दिन (2017 PPP) का Absolute Poverty Line उपयोग करता है।

7. एन.बी.एफ.सी.एम.एफ. आई. (NBFC-MFI) के लिए सूक्ष्मवित्त ऋण की न्यूनतम आवश्यकता, ....... है। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कुल आस्तियों का 75%
Solution:
  • एनबीएफसी - एमएफआई (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - सूक्ष्म वित्त संस्था) जमाराशि न लेने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है।
  • MFI द्वारा प्रदान किए गए सूक्ष्म ऋण का उद्देश्य व्यक्तियों को अपने छोटे व्यवसाय शुरू करने या विस्तार करने में सहायता करना है।
  • NBFC - MFI के लिए सूक्ष्म वित्त ऋण की न्यूनतम आवश्यकता कुल आस्तियों (Assets) का 75% है।
  • NBFC-MFI क्या है?
    •  ये मुख्य रूप से कम आय वाले व्यक्तियों, ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लक्षित करती हैं
    • जहां पारंपरिक बैंकिंग पहुंच सीमित होती है। आरबीआई इनका विनियमन करता है
    • उधारकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो और गरीबी उन्मूलन तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिले।
  • न्यूनतम ऋण आवश्यकता
    • पारंपरिक रूप से, NBFC-MFI को अपनी कुल संपत्ति (Adjusted Net Bank Assets - ANBA) का कम से कम 75% सूक्ष्मवित्त ऋणों के रूप में बनाए रखना पड़ता था।
    • यह अनुपात यह सुनिश्चित करता है कि ये संस्थाएं मुख्य रूप से माइक्रोफाइनेंस पर फोकस करें।
    • हालांकि, आरबीआई ने हाल ही में 6 जून 2025 को इसे 60% तक कम कर दिया है, ताकि इन संस्थानों को अधिक लचीलापन मिले और ऋण प्रवाह बढ़े।
  • अन्य प्रमुख विनियम
    • ऋण सीमा: पहले चक्र में अधिकतम ₹75,000, बाद के चक्रों में ₹1,25,000 तक।
    • कुल उधारकर्ता ऋणग्रस्तता ₹1,25,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए (शिक्षा/चिकित्सा ऋण को छोड़कर)।​
    • कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR): न्यूनतम 15% (टियर-1 और टियर-2 कैपिटल सहित)।​
    • NPA सीमाएं: सकल NPA 2% से कम और शुद्ध NPA 0.5% से कम (NBCFDC मानदंडों के अनुसार)।​
    • रेटिंग आवश्यकता: CRISIL या समकक्ष से न्यूनतम MFR5 रेटिंग।​
  • हालिया बदलाव और प्रभाव
    • 2025-26 में आरबीआई ने NBFC-MFI ऋणों पर जोखिम भार कम किया है, जिससे बैंकों को इन्हें फाइनेंस करने में आसानी हुई है।
    • यह बदलाव खुदरा क्षेत्र, MSME और आवास ऋणों को बढ़ावा देगा।
    • पुरानी 75% सीमा अब 60% हो गई है, जो संस्थानों को विविधीकरण की अनुमति देती है।
  • पात्रता और पंजीकरण
    • NBFC-MFI बनने के लिए आरबीआई के साथ पंजीकरण अनिवार्य है।
    • गैर-जमा स्वीकार करने वाली NBFC कुल संपत्ति का 10% से अधिक सूक्ष्मवित्त में नहीं दे सकती यदि MFI मानदंड पूरे न हों।
    • तीन साल का लाभ ट्रैक रिकॉर्ड और कोई डिफॉल्ट न होना जरूरी है।
  • उद्देश्य और भूमिका
    • ये संस्थाएं छोटे व्यवसायों को बिना गारंटी के छोटे ऋण प्रदान करती हैं, लचीले पुनर्भुगतान के साथ।
    • भारत में वाई. एच. मालेगाम समिति की सिफारिशों पर आधारित ये नियम उधारकर्ता संरक्षण पर जोर देते हैं।​

8. निम्नलिखित में से आयात प्रतिस्थापन नीति का मुख्य लाभ कौन-सा है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) यह राष्ट्र को आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद करता है।
Solution:
  • आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण एक आर्थिक सिद्धांत है जिसका पालन विकासशील देश करते हैं
  • जो विकसित देशों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं।
  • यह घरेलू उत्पाद को बढ़ावा देकर बदले में राष्ट्र को आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में मदद करता है।
  • नीति का आधारभूत स्वरूप
    • आयात प्रतिस्थापन नीति का मूल विचार आयातित वस्तुओं को घरेलू स्तर पर उत्पादित करके विदेशी निर्भरता घटाना है।
    • सरकारें टैरिफ, कोटा, सब्सिडी और आयात प्रतिबंध जैसे उपायों से स्थानीय उद्योगों की रक्षा करती हैं
    • विशेष रूप से शिशु उद्योगों (नए उभरते उद्योगों) को।
    • यह नीति 1950-1990 के दशक में भारत सहित कई विकासशील देशों (जैसे लैटिन अमेरिकी देशों) में लोकप्रिय रही
    • जहां औद्योगीकरण को गति देने के लिए अपनाई गई।​
    • उदाहरणस्वरूप, भारत में स्वतंत्रता के बाद पंचवर्षीय योजनाओं के तहत इस नीति ने भारी उद्योगों और मशीनरी उत्पादन को प्रोत्साहित किया।​
  • मुख्य लाभ: आत्मनिर्भरता
    • इस नीति का सर्वप्रमुख लाभ देश को आत्मनिर्भर बनाना है
    • जो विदेशी देशों पर आवश्यक वस्तुओं (जैसे खाद्य, रक्षा उपकरण, उच्च तकनीकी उत्पाद) के लिए निर्भरता कम करता है।
    • आत्मनिर्भरता से विदेशी मुद्रा की बचत होती है, जो भुगतान संतुलन को मजबूत बनाती है और आर्थिक संकटों (जैसे तेल संकट) से सुरक्षा प्रदान करती है।​
    • भारत जैसे देशों में यह नीति ने स्थानीय उत्पादन क्षमता विकसित की, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्वायत्तता बढ़ी।​
  • अन्य प्रमुख लाभ
    • रोजगार सृजन: घरेलू उद्योगों के विस्तार से श्रम-गहन क्षेत्रों में नौकरियां पैदा होती हैं, बेरोजगारी घटती है और गरीबी कम होती है।​
    • स्थानीय उद्योगों का विकास: आयात प्रतिबंध से घरेलू मांग बढ़ती है, जिससे निवेश आकर्षित होता है और नए उद्योग स्थापित होते हैं।
    • परिवहन लागत में कमी: स्थानीय उत्पादन से लंबी दूरी के आयात की जरूरत नहीं पड़ती, जो लागत बचाता है।​
    • नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: नीति से नई तकनीकों का घरेलू विकास होता है, जो लंबे समय में अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।​
  • भारत में ऐतिहासिक संदर्भ
    • भारत में 1950 से 1990 तक की अर्थव्यवस्था में आयात प्रतिस्थापन प्रमुख व्यापार नीति थी।​
    • इसने औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 के तहत सार्वजनिक क्षेत्र को भारी उद्योगों (इस्पात, मशीनरी) में प्राथमिकता दी।​
    • परिणामस्वरूप, भारत ने आयातित मशीनरी का घरेलू उत्पादन शुरू किया, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।​
  • संभावित सीमाएं (पूर्णता के लिए)
    • हालांकि मुख्य लाभ आत्मनिर्भरता है, लेकिन नीति में कमियां भी हैं
    • जैसे संरक्षणवाद से प्रतिस्पर्धा की कमी, उच्च उत्पादन लागत और अकुशल उद्योगों का विकास।
    • इन्हें संतुलित करने के लिए निर्यात-उन्मुख नीतियों के साथ जोड़ा जाता है।

9. निम्नलिखित में से कौन-सा निवेश का एक घटक नहीं है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) किसी कंपनी के शेयर खरीदने पर खर्च किया गया धन
Solution:
  • निवेश को उन वस्तुओं की खरीद के रूप में परिभाषित किया जाता है
  • जिसका आज उपभोग नहीं किया जाता लेकिन भविष्य में धन बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
  • आवासीय निर्माण, एक फर्म द्वारा नियोजित मशीनरी और उपकरण, तथा एक फर्म द्वारा स्टॉक किए गए कच्चे माल की सूची सभी निवेश के घटक हैं
  • क्योंकि उनका उपयोग भविष्य की आय उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
  • निवेश की परिभाषा
    •  बल्कि भविष्य में आय या धन उत्पन्न करने के लिए उपयोग किया जाता है।
    • समष्टि अर्थशास्त्र में, निवेश GDP के एक प्रमुख घटक (C + I + G + NX) का "I" भाग है
    • जो उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाले व्यय को दर्शाता है। यह भौतिक पूंजी (जैसे मशीनरी) या इन्वेंट्री पर केंद्रित होता है, न कि वित्तीय संपत्तियों पर।
  • निवेश के प्रमुख घटक
    • निवेश के दो मुख्य घटक होते हैं: स्थायी निवेश (Fixed Investment) और मालसूची निवेश (Inventory Investment)।
    • स्थायी निवेश: इसमें मशीनरी, उपकरण, भवन, बुनियादी ढांचा (सड़क, पुल) और आवासीय निर्माण शामिल हैं
    • जो लंबे समय तक उत्पादन में योगदान देते हैं। उदाहरण: एक फर्म द्वारा नई मशीनरी खरीदना, जो उत्पादकता बढ़ाए।​
    • मालसूची निवेश: कच्चे माल, अर्ध-निर्मित या तैयार माल का स्टॉक, जो नियोजित (योजनाबद्ध) या अनियोजित (अनपेक्षित) हो सकता है।
    • यह उत्पादन प्रक्रिया को सुचारू रखता है।​
    • सकल निवेश = शुद्ध निवेश + मूल्यह्रास, जबकि सकल घरेलू निवेश में स्टॉक परिवर्तन भी जोड़ा जाता है।​
  • कौन-सा निवेश का घटक नहीं?
    • शेयर खरीदना निवेश का घटक इसलिए नहीं माना जाता क्योंकि यह "वित्तीय लेन-देन" है
    • जो मौजूदा संपत्तियों का हस्तांतरण मात्र है—नई उत्पादन क्षमता नहीं बनाता।
    • हालांकि शेयर भविष्य में लाभांश या पूंजीगत लाभ दे सकते हैं, लेकिन GDP निवेश गणना में इन्हें शामिल नहीं किया जाता
    • क्योंकि यह अर्थव्यवस्था की कुल पूंजी स्टॉक नहीं बढ़ाता।
    • अन्य विकल्प जैसे मशीनरी, कच्चा माल या आवासीय निर्माण भौतिक उत्पादन बढ़ाते हैं, इसलिए घटक हैं।

10. इनमें से कौन-सा वह एक कारण नहीं है कि क्यों आजादी के बाद भारत में औद्योगिक क्षेत्र को स्थापित करने में सार्वजनिक क्षेत्र ने प्रमुख भूमिका निभाई? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) निजी लाभ के सृजन से बचना
Solution:
  • स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के उद्योगपतियों के पास अर्थव्यवस्था के विकास हेतु उद्योगों में निवेश करने के लिए अपेक्षित पूंजी नहीं थी।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था को समाजवाद के पथ पर अग्रसर करने के लिए द्वितीय पंचवर्षीय योजना में निर्णय लिया गया
  • सरकार अर्थव्यवस्था में बड़े तथा भारी उद्योगों का नियंत्रण करेगी।
  • जनता की बचत क्षमता काफी कमजोर थी तथा उत्पादन के लिए पर्याप्त बड़े बाजार का अभाव भी था।
  • निजी लाभ सृजन से बचना विकल्प गलत है; क्योंकि यह पूंजीवाद और उद्यमिता के मूल्य सिद्धांतों के विरुद्ध है। निजी क्षेत्र लाभ के उद्देश्य से संचालित होता है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख भूमिका के कारण
    • निजी क्षेत्र के पास पर्याप्त पूंजी, प्रौद्योगिकी और जोखिम उठाने की क्षमता का अभाव था
    • खासकर इस्पात, कोयला, बिजली, तेल और भारी मशीनरी जैसे पूंजी-गहन क्षेत्रों में।
    • समाजवादी मॉडल अपनाते हुए आत्मनिर्भरता (स्वदेशी उत्पादन) और आयात-प्रतिस्थापन पर जोर दिया गया
    • विदेशी निर्भरता कम हो। 1956 की औद्योगिक नीति ने उद्योगों को तीन अनुसूचियों में बांटा
    • जहां अनुसूची 'अ' के 17 प्रमुख उद्योग (जैसे इस्पात, खनन) पूरी तरह सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित थे।​
    • क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने के लिए पिछड़े इलाकों में भारी उद्योग स्थापित किए गए, जैसे भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर में स्टील प्लांट।
  • वह कारण जो नहीं था: निजी निवेश को बढ़ावा
    • 1947 से 1991 तक की समाजवादी नीतियों में निजी क्षेत्र को नियंत्रित किया गया, न कि बढ़ावा दिया।
    • लाइसेंस राज (Industrial Licensing Policy) के तहत निजी कंपनियों को सख्त अनुमतियां, क्षमता सीमाएं और जैसे कानूनों से बंधा रखा गया।
    • निजी निवेश उपभोक्ता वस्तुओं (जैसे टेक्सटाइल, साबुन) तक सीमित रहा। निजी क्षेत्र को बढ़ावा 1991 के उदारीकरण के बाद ही हुआ।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ और उपलब्धियां
    • प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56): सार्वजनिक क्षेत्र की शुरुआत, जैसे डीम संयंत्र।
    • द्वितीय योजना (1956-61): महालनोबिस मॉडल पर आधारित, भारी उद्योगों पर फोकस; SAIL, BHEL, ONGC जैसी संस्थाएं बनीं।
    • उपलब्धियां: औद्योगिक उत्पादन 1950-90 में 7% की दर से बढ़ा; बुनियादी ढांचे (डैम, बिजली घर) का विकास; रोजगार सृजन (लाखों नौकरियां)।​
  • चुनौतियां और परिवर्तन
    • सार्वजनिक क्षेत्र ने अकुशलता, नौकरशाही, घाटे और भ्रष्टाचार का सामना किया।
    • 1991 के आर्थिक संकट के बाद LPG (Liberalization, Privatization, Globalization) सुधारों से निजी क्षेत्र को मुक्ति मिली।
    • फिर भी, आज भी रक्षा, रेलवे जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र प्रमुख है।
    • यह दृष्टिकोण भारत को औद्योगिक राष्ट्र बनाने की नींव रखता था
    • हालांकि पूर्ण सफलता निजी भागीदारी से ही संभव हुई।